Nagbharat (Shakti Parv)

नागभारत
शक्ति पर्व
स्थान-असम।
जंगल में अंधेरा अपने पाँव पसार चुका था।
रात में जंगल के कबीले वाले अपने अपने घरों में चले जाते है क्योंकि यह समय होता है खूँखार जानवरों के शिकार का।
पर भेड़िया को उनका भय नहीं था।
रात के उस भयानक अंधकार में भेड़िया जेन की तरफ बढ़ रहा था ।
भेड़िया-यह मैं क्या कर रहा हूँ। जेन तो मर चुकी है। अपने प्रेम के अधीन होकर मैं फिर एक बार भूल करने जा रहा हूँ। अवश्य ही यह जेन नहीं कोई और है।। पर प्रश्न है कि ये है कौन और जेन के रूप में क्या कर रहा है। एक उपाय है।
“हे भेड़िया देवता !मदद।”-भेड़िया के आवाहन करते ही गदा उसके हाथ में प्रकट हो गयी।
भेड़िया ने जेन की तरफ गदा फेंकी । गदा लगते ही जेन की आकृति गायब हो गयी ।
भेड़िया आश्चर्यचकित रह गया।
भेड़िया- मुझे लगा ये कोई मायावी है, पर ये तो खुद एक माया है। फिर मायावी कहाँ है?
अचानक से जैसे भेड़िया को कुछ याद आया।
”नागराज!”
———
“नागराज”-तिरंगा ने नागराज का नाम पुकारा।
मंदिर के निकट नागराज के अचानक विलुप्त हो जाने से तिरंगा विचलित हो गया।
तिरंगा-ऐसा कैसे हो गया। नागराज कहाँ गायब हो गया? कोई आहट भी नही हुई। यदि कोई तिलिस्मी या आयाम द्वार खुलता तो भी अवश्य आहट होती। यह जरूर किसी प्रकार का सम्मोहन या मायाजाल है।
तभी भेड़िया वहाँ पहुँचा।
भेड़िया-सही कह रहे हो तिरंगा यह एक मायाजाल ही है।
तिरंगा- तुम कहाँ चले गए थे भेड़िया, यहाँ नागराज अपने स्थान से गायब है?
भेड़िया-मैं कहाँ था इन बातों का अब कोई महत्व नहीं , अवश्य ही यहाँ कोई है जो हमारे साथ खेल खेल रहा है।
भेड़िया ने अपनी गदा मंदिर के उस भाग की तरफ फेंकी जहाँ नागराज काल मृत्यु आराधना कर रहा था। परंतु गदा किसी अदृश्य दीवार से टकराकर रुक गयी।

तिरंगा आश्चर्यचकित हो गया-‘इसका क्या अर्थ है भेड़िया?’
भेड़िया- मेरा शक सही था तिरंगा। नागराज यहीं है बस किसी ने उसे अदृश्य कवच में ढ़क रखा है। हमें ऐसा प्रतीत कराना चाह रहा है कि नागराज यहाँ नहीं है। जो कि शायद स्वयं भी उसी कवच में नागराज को मारने का प्रयास कर रहा होगा। परंतु अब नहीं।
इसी के साथ भेड़िया ने अपने पूरे बल के साथ गदा को कवच की ओर फेंका। रोशनी के एक तेज़ धमाके के साथ सब कुछ साफ नजर आने लगा।
नागराज अपनी काल मृत्यु आराधना में लीन था। उसके सामने विसर्पी मूर्च्छित लेटी हुई थी। एक जंगली आदमी जिसके गले में मुंड माला थी और जोकि देखने से कोई तांत्रिक लग रहा था, विसर्पी को मारने का प्रयास कर रहा था।
भेड़िया-मारीच?
भेड़िया ने एक बार फिर गदा उस तरफ फेंकी और मारीच दूर जा गिरा।
तब तक डोगा, परमाणु , स्टील और फूजो बाबा भी वही पहुँच गए ।
फूजो-मारीच? यह तो मारीच है । ये यहाँ कैसे पहुँच गया , और ये विसर्पी को मारने का प्रयत्न क्यो कर रहा है।
तब तक सबने मिल कर मारीच को बंधक बना लिया। विसर्पी को भी होश आ गया।
डोगा- ये मारीच कौन है?
‎फूजो बाबा- यह हमारे जंगल के ही एक कबीले में रहता था , और भोले भाले जंगलियों को जादू टोना दिखा कर और तंत्र क्रियाओं से मूर्ख बनाता था। तब कुछ वर्षों पूर्व भेड़िया ने सज़ा के लिए इसे जंगल से निष्कासित कर दिया था। फिर बाद में ये भी पता चला था कि ये अफ्रीका के जंगलों में चला गया था।शायद वहीं से इसने अपनी शक्तियों का विस्तार किया है। परन्तु अब ये यहाँ क्यों आया है ये मुझे नही पता ।
‎भेड़िया- इस प्रश्न का उत्तर तो ये स्वयं देगा वरना यहीं मृत्यु को प्राप्त हो जायेगा।
पहले से ही अधमरा मारीच सब कुछ बताने लगा-
कुछ दिनों पूर्व मुझे एक संदेश प्राप्त हुआ था नरकपाशा का। उसमें बस यही लिखा था कि नागराज की काल मृत्यु आराधना भंग करनी है । इसीलिए मैं यहाँ आ गया , मुझे लगा यदि मैं विसर्पी को इसके सामने मारूंगा तो ये अवश्य ही साधना भँग कर देगा क्योंकि इसकी सर्प इन्द्रियाँ सब कुछ देख सकती थीं। इसीलिए मैंने तुम सब को भी भ्रम में डाला ताकि तुमलोग मेरे कार्य मे व्यवधान न उतपन्न करो।

स्टील- परंतु इसने तुम को कैसे बंधक बना लिया विसर्पी?
विसर्पी- जब मैं जल भर रही थी तभी इसने पीछे से वार किया । मैं असावधान थी इसलिए प्रतिकार नहीं कर सकी।
परमाणु- नरकपाशा अपनी चाल से बाज़ नही आया।
भेड़िया- मैं इसको बंदी बनाने का कार्य करता हूँ जहाँ से ये कभी नहीं भाग पायेगा।
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स्थान-राजनगर।
मेहरा निवास।
नताशा और श्वेता कहीं बाहर से घर में आती हैं।
नताशा-चलो कमसे कम ध्रुव के बारे में कुछ तो पता चला।
श्वेता- हाँ । भईया सुरक्षित हैं ये जानकर खुशी हुई।
पर मम्मी को इतनी बात से भी सुकून नही मिलेगा ।
श्वेता ने कॉल बेल बजाई। दरवाजा रजनी ने ही खोला।
रजनी-नताशा बेटा तुमसे मिलने कोई आया है। अपने आप को ध्रुव का दोस्त कह रही है। पर ध्रुव के बारे में कुछ बता नहीं रही है। उससे पूछो ना बेटा ध्रुव कहाँ है?
श्वेता- अरे मम्मी एक ही बार में कितना बोलोगी।
नताशा – क्या नाम है?
रजनी- नाम तो चंदा बात रही है , पर इससे पहले मैंने उसे कभी देखा नही। तुम्हारे कमरे में ही बैठाया है मैंने।
श्वेता- अरे मम्मी कैसे देखोगी , भईया के दोस्त तो पूरे ब्रह्मांड में है।
नताशा – ठीक है मैं देखती हूँ।
इसी के साथ नताशा अपने कमरे के तरफ बढ़ गयी।
चंदा कमरे में रखी ध्रुव की तस्वीरों को देख रही थी।
तभी नताशा कमरे में आती है।
चंदा- तुम शायद नताशा हो?
नताशा- हाँ । मैं ही हूँ नताशा । ध्रुव की पत्नी। पर मैंने तुम्हें पहचाना नहीं।
चंदा-तुम शक्ति को तो जानती होगी ।
नताशा- हाँ । वो भी ध्रुव के साथ ब्राह्मण रक्षको की टीम का ही हिस्सा है।
चंदा- हाँ। मैं शक्ति के लिए ही गुप्त रूप से काम करती हूँ। और मुझे उसी ने भेजा है ध्रुव के संदेश के साथ।

नताशा- पर ध्रुव है कहाँ। मुझे पता चला है कि वो सुरक्षित तो है । पर वो घर क्यों नहीं आया। ध्रुव के बारे में सोच सोचकर यहाँ मम्मी का बुरा हाल है।कमसे कम उसे अपनों की तो चिंता होनी चहिये।
चंदा- उसे केवल अपनों की ही नहीं पूरी दुनिया की चिंता है।
चंदा ने नताशा को सारी स्थिति से अवगत कराया।
चंदा-स्थितियाँ बहुत गम्भीर हैं नताशा तुमको तैयार रहना होगा।
नताशा- ठीक है , मैं हमेशा से तैयार हूँ।
चंदा- तुम्हे मेरे लिए एक और काम करना होगा चंडिका को भी इस युद्ध में आने के लिए तैयार करना होगा । क्योंकि उसको ढूंढ ने का समय नहीं है। तब तक मैं ऋचा के पास जा रही हूँ।
नताशा- ऋचा!! यानी …यानी तुम जानती हो कि……
चंदा- हाँ। ध्रुव ने ही बताया था शक्ति को और उसने मुझे। पर मैं जानना चाहती हूँ कि आखिर हुआ क्या था उस समय। क्यों ऋचा अब ध्रुव से दूर ही रहती है वो भी शांति बनकर।
नताशा-
“यह उस समय की बात है जब मैं रोबो के खिलाफ जाकर ध्रुव से शादी करने वाली थी। पर अपनी बेटी की शादी अपने सबसे बड़े दुश्मन से करवाना रोबो को बिल्कुल भी नहीं अच्छा लगा । तब उसने मेरे दिमाग मे चिप ट्रांसप्लांट करने का निर्णय लिया इससे मैं हमेशा उसकी गुलाम हो जाती। पर ध्रुव को यह बात पता चल गई और वो अकेला ही घुस आया रोबो सिटी में मुझे लेने के लिए। उसने मुझे रोबो सिटी से निकाल लिया , पर दरवाजे पर ही रोबो आर्मी ने हमें रोक लिया। ध्रुव ने मुझे बाहर की तरफ भेजा और खुद ही उनसे लड़ने लगा । मैंने भी रुकना चाहा पर वो नहीं माना। तब रोबो ने एक चाल चली , बाहर निकलते ही मुझे बंदूक की नोक पर कैद कर लिया और मेरे जगह पर हूबहू मेरे जैसा दिखने वाला एक क्लोन खड़ा कर दिया जिसमें बम फिट था।
जल्दबाजी में ध्रुव उसे नताशा यानी मुझे समझ कर उसके पास पहुंच गया। पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तभी ऋचा ब्लैक कैट के रूप में वहाँ पहुंच गई , उसने ध्रुव को दूर धकेल दिया पर खुद नही बच सकी और घायल हो गयी।

ये बात मुझे बाद में पता चली कि ऋचा बहुत पहले से ही ध्रुव का पीछा कर रही थी। अचानक से ब्लैक कैट के आ जाने से रोबो भी बौखला गया। इसका फायदा उठाकर मैं भी ध्रुव के पास पहुंच गई।उसके बाद ऋचा को लेकर हम दोनों ही वहाँ से निकल गए।
ऋचा को हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। ये बात सबको पता चल गई कि ब्लैक कैट और कोई नहीं ऋचा ही थी।पर सबसे ज्यादा आश्चर्य हुआ ध्रुव को। उसने ऋचा को समझाया । और ऋचा को पुलिस के सुपुर्द नहीं किया केवल उस शर्त पर की यदि पुलिस खुद उसे ढूंढ लेगी तो वो कुछ नहीं करेगा। तबसे ऋचा शांति बनकर ही उस शांति चिल्ड्रेन्स होम को चलाती है।
‎केवल कुछ ही लोग जानते हैं कि शांति वास्तव में कौन है?”
‎नताशा ने एक लंबी साँस ली।”तुम चाहो तो प्रयास कर लो चंदा परंतु मुझे नहीं लगता वो वापस आएगी।”
‎चंदा-ठीक है , मैं एक बार प्रयास करूंगी , और तुम भी चंडिका को ढूंढने का प्रयास करना।
‎इतना कह कर चंदा वहाँ से चली गयी।थोड़ी देर बाद श्वेता वहाँ आयी।
‎श्वेता -क्या बात है नताशा , कौन थी ये?
‎नताशा ने श्वेता को सारी बात बताई।
‎श्वेता- ठीक है मैं भी तैयार हूँ तुम्हारे साथ चलने के लिए।
‎नताशा-नहीं। तुम कहीं नही जा रही।
श्वेता-पर क्यों , ध्रुव मेरा भी भाई है तुम चाहे कुछ भी कहो मैं तो अवश्य चलूँगी।
नताशा-समझने की कोशिश करो श्वेता। अगर तुम भी चली गयी तो यहाँ कौन रहेगा , मम्मी पापा का ख्याल कौन रखेगा। ध्रुव ने हमेशा यही सिखाया है कि अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाओ।तुम ध्रुव की ताकत हो श्वेता , उसकी कमज़ोरी मत बनो।
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मेहरा निवास से होकर चंदा सीधा शान्ति चिल्ड्रेन्स होम पहुँची।
चंदा ने शांति उर्फ ऋचा को भी सारी बात बताई।

ऋचा- माफ करना चंदा , ऋचा और ब्लैक कैट दोनों अब दुनिया के लिए मर चुकी हैं , और ध्रुव मेरे लिए मर चुका है । उन बातों की मेरी इस दुनिया में अब कोई जगह नहीं। ये चिल्ड्रेन्स होम , ये बच्चे यही मेरी दुनिया है।
चंदा-एक बार फिर सोचना ऋचा, आज शायद ध्रुव को तुम्हारी जरूरत है । उसे विश्वास था कि तुम आओगी।
इतना कह कर चन्दा वहाँ से बाहर गयी।चंदा के जाने के बाद ऋचा अपने ही विचारों में डूब गई।
————
अंधेरा एक बार फिर अपने पैर पसार चुका था।
वहाँ से जाने के बाद चन्दा सुनसान रास्ते पर अकेले चलने लगी।
चंदा ने अपने फ़ोन से ध्रुव को कॉल लगाई।
चंदा- हेलो ध्रुव, कहाँ हो , एंथोनी का कुछ पता चला?
ध्रुव ने तिलिस्म की बात बताई।
ध्रुव- उसके बाद मैंने करीम को कॉल करके नया स्टार कॉप्टर मँगाया। उसीसे मैंने एंथोनी के जानकार लोगों के बारे में पता करने को कहा था। कुछ जानकारी मिली है , एंथोनी के परिवार के बारे में और रूपनगर के ex-DsP इतिहास के बारे में भी, DSP इतिहास कुछ काम की जानकारी दे सकता है मुझे।
चंदा-ओह! यानी तुम अपनी मंज़िल के काफी करीब हो…पर यहाँ से तुम्हारे लिए बैड न्यूज़ है। मैंने सलमा और नताशा से तो बात कर ली …पर ऋचा…ऋचा आने को तैयार नहीं है।
उसी समय कुछ आवारा जो रात में सड़कों पर घूम रहे थे चन्दा को परेशान करने लगे।
उनमें से एक अपने साथियों से बोला-“क्या बात है…इतनी खूबसूरत लड़की अकेले ही घूम रही है।”
दूसरा चंदा के पर्स को देखकर बोला-“हाँ बॉस, लगता में पर्स में बहुत सारा माल है”
चन्दा ने फ़ोन डिसकनेक्ट किया।
चन्दा-/मन में/(उफ! ये क्या हो गया , इनके सामने मैं शक्ति नहीं बनना चाहती। सुनसान रास्ते पे कोई दिख भी नही रह है मदद माँगने के लिए।)
“जा पांडु पर्स तो लेके आ, पर जरा प्यार से।”पहला वाला हँसते हुए बोला।

पांडु चंदा की तरफ बढ़ने लगा, तभी एक काली बिल्ली पांडु के सामने से गुजरी । वह एक पल के लिए रुका फिर चन्दा की तरफ बढ़ने लगा।
“कहते हैं जब काली बिल्ली किसी का रास्ता काट जाए तो वापस लौट जाना चाहिए।”
चन्दा ने आवाज की तरफ देखा , अँधेरे में भी ब्लैक कैट के रूप में ऋचा को उसने पहचान लिया।
‎ब्लैक कैट ने हवा में एक किक पांडु को मारी, पांडु उछलकर दूर जा गिरा।उसकी ऐसी हालत देख कर उसके बाकी साथी भी भाग गए।
‎चन्दा- इसका मतलब तुम मेरा पीछा कर रही थी।
‎ऋचा कुछ नहीं बोली।
‎चंदा-पर तुम वापस आ गयी इसकी मुझे खुशी है।
ऋचा-हाँ , तुमने सही कहा था, आज शायद ध्रुव को मेरी जरूरत है तो मैं कैसे उसको मना कर सकती हूँ।
चन्दा का फोन बजने लगा ।
यह ध्रुव की कॉल थी।
ध्रुव-क्या हुआ था चन्दा , तुमने फोन क्यों डिसकनेक्ट कर दिया था।
चन्दा-एक समस्या थी जो अब नहीं है, पर एक खुश खबरी भी है, ऋचा अब हमारे साथ आने को तैयार हो गई है।
ध्रुव-वाह ये तो बहुत अच्छी बात है, मैं भी कल ही मिलूँगा इतिहास से क्योंकि अभी तो रात बहुत हो गयी है, उम्मीद है कि एंथोनी का कुछ पता चल जाये।
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अगले दिन सुबह ध्रुव इतिहास के घर पर था।
इतिहास – तुम बिल्कुल सही जगह आये हो ध्रुव, तुम ब्रह्मांड रक्षकों के दल का हिस्सा हो इसलिए मैं तुम्हे एंथोनी के बारे में जरूर बताऊँगा।
“तुम तो जानते ही होगे की जब एंथोनी जिंदा था तब कुछ लोगों ने उसकी हत्या कर दी थी। पर अपने परिवार के प्रति कर्तव्य ने उसे पृथ्वी पर ही रोके रखा। समय बीतता गया और एंथोनी ने अपने ही नाती किंग के रूप में जन्म लिया।पर बढ़ते हुए जुर्म को देखते हुए एंथोनी फिर लौट आया।पर जब भी एंथोनी किंग के शरीर से बाहर आता किंग अवचेतन अवस्था मे पहुँच जाता।

तब किंग की ये हालत देखकर एंथोनी ने एक निर्णय लिया।वो मेरे पास आया और मुझसे बोला कि मैं किंग को एक जांबाज़ पुलिसवाला बनाऊँ। रूपनगर में अपराध उन्मूलन का काम जो एंथोनी कर रहा था वो अब किंग करे। मैंने उसे वचन दिया, और उसके बाद एंथोनी वापस चला गया मुर्दों की दुनिया में।
इस बात को अब पाँच साल गुजर गए हैं, इतने सालों में मैंने किंग को एक जांबाज पुलिसवाला बनाया है।रूपनगर के सारे अपराधी उसके नाम से डरते हैं।इतने वर्षो में एंथोनी कभी वापस नहीं आया, उसका वापस आना अब असंभव है।”
ध्रुव-तुम्हारी जानकारी के लिये धन्यबाद इतिहास, शायद इस महायुद्ध में हमें बिना एंथोनी के ही लड़ना पड़े।
उसके बाद ध्रुव वहाँ से निकल गया।
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गुप्त द्वीप में बैठा गुरुदेव नागेन्द्र से बातें कर रहा था।
गुरुदेव-तुमको तो दिल्ली जाना था, नागेन्द्र तुम रूपनगर क्यों जा रहे हो?और डॉक्टर करुणाकरन कहाँ है?
नागेन्द्र – करुणाकरन ने यंत्र बना दी है, और इसके बाद उसकी उपयोगिता खत्म , इसीलिए मैंने उसे मार दिया।
नागेन्द्र ने अपनी दाहिनी कलाई की तरफ देखा ,उसके कलाई पर एक यंत्र लगा हुआ था।
नागेन्द्र-मेरे विष को अस्त्र बनाने वाला यंत्र तो उसने बना दिया पर उसको चलाने वाली ऊर्जा मिलेगी रूपनगर के साइंस सेन्टर में रखे हुए ऊर्जा क्रिस्टल से।
गुरुदेव- ये वही क्रिस्टल है ना जो कुछ वर्षों पूर्व वैज्ञानिकों को मिला था अंतरिक्ष से।
नागेन्द्र- हाँ , उससे मुझे पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा मिलेगी और तब मैं जाऊँगा दिल्ली।
— ——————–
कुछ समय बाद।
एक बार फिर अँधेरा अपने पैर पसारने जा रहा था।
दिन भर लोगों को प्रकाश देने वाला सूर्य अब अस्त होने लगा था।
अपने कार्य में असफल होकर ध्रुव रूपनगर से बाहर जा रहा था।

तभी ध्रुव को एक काल आयी।
ध्रुव-हेलो।
“हेलो ध्रुव, मैं इतिहास बोल रहा हूँ”-ये इतिहास की आवाज थी।
ध्रुव-हाँ बोलो इतिहास क्या हुआ?
इतिहास-एक बहुत बडी समस्या आ गयी है ध्रुव , जल्दी से रूपनगर वापस आ जाओ। वो वापस आ गया है।
ध्रुव-कौन?कौन वापस आ गया है।
इतिहास-एंथोनी वापस आ गया है।
ध्रुव-क्या?ये तो बहुत अच्छी बात है।
इतिहास-ये बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है ध्रुव, वो अब रक्षक नही रह गया है, वो अब भक्षक बन गया है। वो इस दुनिया को भी अब मुर्दों की दुनिया बनाना चाह रहा है। उसने मुर्दो की दुनिया का दरवाजा खोल दिया है।
ध्रुव-क्या?
————-समाप्त————————–
(प्रिय पाठकों ,कौन सी घटना किस दिन घाटी यह बताने से कहानी और भी उलझ जाएगी , आशा करता हूँ आप सब समझने का प्रयत्न करेंगे)

Wrritte By-  Akash Pathak for Comic Haveli ko

12 Comments on “Nagbharat (Shakti Parv)”

  1. Awesome कहानी आकाश पाठक जी….
    भेड़िया का भ्रम अच्छा था, साथ ही मारीच का प्रायिग भी अच्छा था, घटनाएं बहुत तेजी से घट रही हैं जो अच्छा भी लग रहा है…. एन्थोनी का आगमन होप जबरदस्त हो

  2. मैने यह पार्ट पढ़ा मुझे बहुत अच्छा लगा। सच मे आकाश भाई गजब के लेखक हैं।

    इस कहानी की शुरुआत रहस्यमय तरीके से हुई, असम जंगल का दृश्य दिखाया गया जहाँ भेड़िया को जेन दिखी, पर वो एक छलावा निकला। मारीच का रोल भी गजब लगा जो कि विसर्पी को नागराज के सामने मारकर उसकी आराधना भंग करना चाहता था। बहुत ही अच्छे तरीके से इन सीन को लिखा गया। भेड़िया का तुरंत यह बात समझ जाना कि नागराज खतरे में है, बहुत ही अच्छा लगा।

    उसके बाद शक्ति, चंदा के रूप में राजनगर में ध्रुव के घर पर दिखी, उसकी और नताशा की मुलाकात भी बहुत सही ढंग से लिखी गई। फिर उसके बाद चंदा गई शांति के पास, जो कि ऋचा है। चंदा ने ऋचा को अपने साथ चलने को कहा लेकिन ऋचा तैयार नही हुई, लेकिन जब चंदा को रास्ते मे गुंडों ने घेर लिया तब ब्लैक कैट का आगमन हुआ, बहुत ही अच्छा लगा यह सीन भी।
    और इसी पार्ट में यह जिज्ञासा भी शांत हो गई कि ऋचा शांति क्यों बनी।

    ध्रुव और डीसीपी इतिहास की मुलाकात भी अच्छा लगा।

    और फिर नागेंद्र को भी दिखाया गया जो रूपनगर से रूप नगर से किसी तरह का क्रिस्टल चुराने वाला है। आगे क्या होगा, क्या करेगा नागेंद्र अब? यह तो अब अगले पार्ट में पता चलेगा, जिसे जानने के लिए मैं बहुत उत्सुक हो गया हूँ।

    ध्रुव को जब लगा कि उसका रूपनगर आना बेकार हो गया है, ध्रुव वापस जाने लगा लेकिन रास्ते मे ही डीसीपी इतिहास ने ध्रुव को कॉल किया और बताया कि एंथोनी वापस आ गया है।

    आकाश भाई सबकुछ तो सही है, स्टोरी बहुत ही गजब है, लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूँ। कुछ घटनाएं इस पार्ट में बहुत तेज़ी से दिखाई गईं जिसकी वजह से पढ़ने वालों को शायद उतना मज़ा न आया हो। जैसे कि ऋचा का अचानक से ब्लैक कैट बनकर आ जाना, जबकि कुछ तो दिखाना चाहिए था लम्बा। उसके बाद एंथोनी का अचानक से वापस आ जाना। और डीसीपी इतिहास जब यह खबर ध्रुव को दे रहा था तो वो आश्चर्यचकित बिल्कुल नही लगा, जबकि इस घटना को देखकर उसे भयंकर तरीके से आश्चर्यचकित हो जाना चाहिए था।
    और ध्रुव ने भी जब यह खबर सुनी, तो उसे भी आश्चर्य नही हुआ। उसने कहा-क्या? यह तो बहुत अच्छी बात है-। जबकि ध्रुव को आश्चर्यचकित होना चाहिए था और कहना चाहिए था। क्या? ऐसा कैसे हो सकता है? या ऐसा कैसे हो गया? खैर यह तो अच्छी बात है।
    इसकी अलावा भी कई जगह कहानी भागती सी लगी।

    बहरहाल। यह तो हर लेखक के साथ होता है। मेरे साथ भी ऐसा बहुत होता है।
    मुझे विश्वास है अगला पार्ट और भी धमाकेदार होगा। नागभारत के हर पार्ट धमाकेदार हैं।

    1. धन्यवाद talha भाई।
      आपके सुझावों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

  3. भाई बहुत बहुत बहुत बढिया
    मजा आ रहा है कहानी मे।पता ही नही चला कब खत्म हो गई कहानी।रहस्य और रोमांच से भरपूर।आपको बहुत बहुत धन्यवाद और शुभ कामनाएँ।
    नागभारत के अगले भाग का इंतजार बहुत बेसब्री से रहेगा।

    1. धन्यवाद विजय जी।
      अगला भाग भी शीघ्र प्रकाशित होगा।

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