Nagraj Janmotsav 2018

Breaking news!

हैल्लो दोस्तों , भाइयों, सज्जनों।

मैं तलहा फरान अली इस बार साक्षात खुद, अपने पैरों से चलकर महानगर गया नागराज का इंटरव्यू लेने , उनके जन्मोत्सव के बारे में कुछ सवाल करने । और वहाँ जो-जो घटनाएं घटीं वो आप खुद देखें ( अपने मन मे। और पढ़ें स्क्रीन पर😜)

महानगर , नागराज के घर मे।

नागराज एक चेयर पर बैठा हुआ था फुल खुंदक में दाँतों को भींचे हुए। मैं नागराज के करीब पहुँचा।

मैं :हैल्लो नागराज जी। मैं हूँ तलहा फरान और मैं कॉमिक हवेली की ओर से आपका इंटरव्यू लेने के लिए आया हूँ। आपके पास रवि कुमार तंवर जी का फोन तो आया था न?

नागराज : हाँ आया था उन्होंने बताया कि तुम आने वाले हो मेरा इंटरव्यू लेने।

मैं नागराज के सामने वाली चेयर पर जा कर बैठ गया।

मैं : हाँ तो अब लिया जाए इंटरव्यू !

नागराज : गुर्र। मेरा दिमाग खराब है। दस्त ने परेशान कर रखा है 1 घण्टे से!

मैं : क्या! आपको एक घण्टे से दस्त आ रहे हैं !

नागराज : मुझे नही उसे आ रहे हैं। गुर्र!

मैं : कौन ‘उसे’?

नागराज : अभी कुछ क्षण में पता चल जाएगा तुम्हे भी।

नागराज ने अपनी बात खत्म की ही थी कि तभी एक जोरदार धमाका हुआ।

बड़ाsssम!!!

मैंने महसूस किया कि पूरा घर हिल गया था उस धमाके से।

मैं : नागराज जी! लगता है आपके घर मे कोई विलेन घुस आया है।

नागराज : विलेन नही , एन्टी हीरो है साला! गुर्र।

मैं : मतलब?

नागराज : मतलब श्रीमान डोगा जी। बैठे हुए हैं, इस वक्त मेरे टॉयलेट में। गुर्र।

मैं : डोगा जी आपके टॉयलेट में क्या कर रहे हैं।

नागराज : सुना नही क्या! धमाके कर रहा है। गुर्र! साला हमेशा खुद को बारूद पुत्र-बारूद पुत्र कहता रहता है। अभी तक सिर्फ दुश्मनो पे बम फोड़ता था । आज पता चला संडास में भी बम फोड़ता है!

डोगा (टॉयलेट में से चिल्लाया) : अबे इसमे मेरी गलती नही। कुछ गुंडो ने मुझे चैलेंज किया बोले तू खुद को बड़ा बारूद पुत्र कहता फिरता है,बारूद पे सोता है,बारूद सूँघता है ,बारूद लादे फिरता रहता है न, चल आज बारूद गटक के दिखा तो हम जानें तुझे। मैं भी ठहरा मर्द का बच्चा , आज तक किसी से हार थोड़ी मानी मैंने। आधा किलो बारूद घोट गया । और दोनों गुंडो में से एक को उधरिच टपका दिया पर दूसरा भाग निकला और भागता हुआ यहाँ महानगर पहुंच गया। उसी का पीछा करता हुआ मैं यहाँ आया था, उसे भी मैंने टपका दिया ।

नागराज : और साले सारा घोटा हुआ बारूद मेरे यहाँ आकर निकाल रहा है तू वो भी प्रेशर के साथ। अब तक तो मेरा टॉयलेट जलकर काला हो चुका होगा। बहूहू।

डोगा : अबे भाई रो मत। मैं महानगर में किसी को नही जानता सिवाए तेरे। अब बता किधर जाता मैं।

नागराज : तू किसी को नही जानता पर सब तुझे जानते हैं । किसी का भी दरवाज़ा खटखटाता तो वो तेरा स्वागत करते।

डोगा : परन्तु ‘किसी’ को भी मैं नही जानता पूरे महानगर में।

नागराज : गुर्र। बहूहू अब तक तो सीट चकनाचूर हो चुकी होगी।

मैं : सीट?

नागराज : कुछ नही जी। अबे डोगे ! मरम्मत का पैसा मुझे देकर जाइयो वर्ना सर्वाकार से सर फुड़वा दूंगा तेरा।

डोगा : घबरा मत भाई। तुझे हर्जाना दूंगा मैं। तेरे जन्मोत्सव में आऊंगा न तो दूंगा।

नागराज फिर अपना सर पकड़ लेता है।

नागराज : जन्मोत्सव-जन्मोत्सव-जन्मोत्सव गुर्रर्र! भाड़ में गया जन्मोत्सव।

मैं : क्या हुआ नागराज जी? भड़क क्यों रहे आप।

नागराज : जन्मोत्सव में होता ही क्या है मेरे लिए? साला बस नाम है नागराज जन्मोत्सव। युग बीत गए अभी तक मेरी एक भी सोलो कॉमिक नही आई। ऊपर से उस-उस परमणुवा को सुपर मैन बना कर रख दिया उन्होंने। मेरी ओर किसी की तवज्जो ही नही …

डोगा : सही बोले भाई! अपुन को भी भूल गए सब। बहूहू।

नागराज : गुर्र। तू जो कर रहा है चुपचाप कर बैठ के। तेरी तो पूरी मूवी आने वाली है बे! मेरे जन्मोत्सव वाले दिन।

डोगा : घण्टा मूवी। आधे घण्टे की मूवी होती है भला। साला मेरे ऊपर तो पांच घण्टे की मूवी बने तो भी कम है।

मैं : 💭 लगता है मैं इंटरव्यू नही ले पाऊंगा नागराज का।💭

नागराज : कभी कभी तो लगता है कि सिर्फ नाम ही उन्होंने रख रखा है ‘नागराज जन्मोत्सव’ । असल मे वो बाकी सुपर हीरोज़ के लिए ऐसा करते हैं। गुर्र। बर्थ डे मेरा है और मेन गेस्ट बना है वो धरु। अब बस बहुत हुआ अब मेरा जन्मोत्सव मैं अपने तरीके से मनाऊंगा ..

### : तेरा नही मेरा जन्मोत्सव है वो।

मैं और नागराज दोनों ही चौंक गए । हमने पलट कर देखा तो सामने नागराज खड़ा था … आतंकहर्ता नागराज हाथों में नागफनी सर्प लपेटे हुए।

डोगा : का हुआ भाई! अब कौन आईस।

मैं : डोगा जी जल्दी फारिग हो कर बाहर आओ वरना आप ये सीन मिस कर दोगे।

डोगा : अरे कइसे फारिग हो जाएं बेटा। साला रुकते नई है ।

नागराज : कौन है बे तू! कहीं नागदंत तो नही । मूछ छिल कर क्यों आया है बे!

आतंकहर्ता नागराज : नागदंत नही आतंकहर्ता नागराज हूँ मैं।

नागराज : अच्छा। यानी नागमणि ने एक और हमशक्ल बना रखा है मेरा।

आतंकहर्ता नागराज : अबे हमशक्ल तू मेरा है और हाँ मैं तुझसे ज़्यादा शक्तिशाली हूँ।

### : तुम दोनों ही मेरे हमशक्ल हो और मैं तुम दोनों से ज़्यादा पॉवरफुल हूँ।

इस बार आवाज़ हवा में गूंजी थी। कोई नज़र नही आया। फिर अचानक हवा में ही जैसे कोई पर्दा सा फटने लगा । दो हाथ हवा को फाड़कर बाहर आ रहे थे। जल्द ही सबके सामने था ….

### : मैं हूँ नरक नाशक नागराज।

नागराज : अबे तू कौन है?

आतंकहर्ता नागराज : हाँ कौन है तू?

नरक नाशक नागराज : एक मिनट ।

नरक नाशक नागराज फिर गायब हो गया और एक बार फिर हवा फाड़ कर प्रकट हुआ और तनकर खड़ा होता हुआ बोला …

नरक नाशक नागराज : मैं हूँ नरक नाशक नागराज।

आतंकहर्ता नागराज : अबे नाम कितनी दफा बताएगा ! तू है कौन ये बता।

नरक नाशक नागराज : गुर्र। पृथ्वी पर पाप रूपी नरक का नाश करने के लिए पैदा हुआ हूँ मैं।

नागराज : अबे सब से बड़ा पाप तो तू खुद है। हमारा नाम मिट्टी में मिला दिया तूने! अबे तुझे पैंट और जैकेट पहनने को कौन बोलिस!

नोट : 👆 ये वाला नागराज #विशरक्षक_नागराज है। 😜

नरक नाशक नागराज : ज़ुबान को लगाम दे! ये वस्त्र मुझे मेरी स्वर्गवासी प्रेमिका ने दिए थे।

आतंकहर्ता नागराज (बुदबुदाकर) : इसी गलती के कारण स्वर्गवासी हो गई होगी बेचारी।

तभी डोगा की आवाज़ गूंजी ।

डोगा : अबे अब कौन आईस?

मैं : डोगा जी जल्दी बाहर आइए वर्ना ये सीन भी मिस कर देंगे आप।

डोगा : अरे कइसे बाहर आएं बेटा। साला रुकते नई है।

नरक नाशक नागराज : मिट्टी में तो तुम लोगों ने अपना नाम खुद मिलाया है। अश्लील हो तुम दोनों सिर्फ अंडरवेअर पहन कर घूमते हो । छि छि ऐसा तो अपना सुपर मैनवा भी नही करता। मान लो अगर किसी दिन तुम्हारी चड्ढियाँ फट गईं बीच बाज़ार में लड़ते वक़्त फिर तो …. ही ही ही …

आतंकहर्ता नागराज (विश्वरक्षक की तरफ इशारा करते हुए) : इसकी फट चुकी है।

नागराज : गुर्र! कब बे! और तू मेरी तरफ है या उसकी तरफ।

आतंकहर्ता नागराज : मैं सिर्फ अपनी तरफ हूँ।

नागराज : गुर्रर्र! तुम दोनों की वजह से मैं अपने लक्ष्य से भटक रहा हूँ।

आतंकहर्ता नागराज : हाँ तो मैं कौनसा तेरे साथ यहां गोटियां खेलने आया हूँ! मैं भी संजय सर के पास जाने के लिए ही आया हूँ।

नरक नाशक नागराज : और मैं भी अपने समय से इस समय मे इसीलिए आया हूँ। संजय सर खुद को चालू समझते हैं क्या। मुझे दूसरे आयाम में डालकर बच थोड़ी सकते हैं वो। मैं आयाम द्वार फाड़ कर आ गया।

### : और मैं भी।

इस बार आवाज़ छत से आई थी सब ने एक साथ मुंडियां ऊपर की पर उससे पहले ही जो चीज़ छत से चिपकी थी वो कूद कर नीचे आ गई। नही नही चीज़ नही वो तो …

### : तुम सब का बाप हूँ …मैं।

उसे देखने के बाद पहले तो सभी ने अपनी आंखें चौंड़ी कर लीं। फिर कुछ ही क्षण बाद तीनों नागराज ज़ोर से हंसे और पेट पकड़ कर हंसे।

तीनो नागराज : हा हा हा , ही ही ही, हू हू हू । अबे ये कौनसा कीड़ा है अब। हा हा हा।

मैं : इसे कहते हैं क्लासिक नागराज।

क्लासिक नागराज : गुर्र। क्लासिक नागराज हूँ मैं।

नागराज : अबे तू तो संपोला भी नही लग रहा।

आतंकहर्ता नागराज : ही ही ही।

नरक नाशक नागराज : हा हा हा।

डोगा फिर चिल्लाया।

डोगा : अबे कोई बताएगा वहां क्या हो रहा है? वर्ना मैं भी बम गिराता हुआ ही चला आऊंगा।

नागराज : खबरदार जो बाहर आया तू! मुझे अपना पूरा घर नही तबाह करवाना ।

नरक नाशक नागराज : अबे तुझे अपने घर की ही पड़ी है। चल अब संजय सर का पता बता । आज तो नागराज जन्मोत्सव को नरक नाशक नागराज जन्मोत्सव बना कर रहूँगा ।

आतंकहर्ता नागराज : वो सिर्फ आतंकहर्ता नागराज जन्मोत्सव बनेगा।

क्लासिक नागराज : नही क्लासिक नागराज जन्मोत्सव।

आतंकहर्ता नागराज : अबे हड़प्पा काल के प्राणी। चल फूट ले यहाँ से।

नागराज : अबे तुम सब के आपस मे लड़ने से कुछ नही होगा और न ही संजय सर से शिकायत करने से।

नरक नाशक, आतंकहर्ता, क्लासिक नागराज : फिर क्या करें?

नागराज : सब मिलकर करीब आओ मेरे।

चारों नागराज एक दूसरे के कंधे पर हाथ रख कर खड़े हो गए।

नागराज : अब सुनो। ये समय आपस मे लड़ने या संजय सर से शिकायत करने का नही है। ये समय है संजय सर को सबक सिखाने का। और सजंय सर को सबक सिखाने का एक कारगर और भयानक आईडिया आया है मुझे।

नरक नाशक नागराज : और वो आईडिया क्या है?

नागराज : बताता हूँ।

फिर नागराज ने डोगा को आवाज़ लगाई।

नागराज : डोगा। मेरे भाई क्या मेरी हेल्प करेगा?

डोगा : जो भी करवाना हो बाद में करवाना । अभी साला रुकते नई है।

नागराज : यही है तू मर्द का बच्चा। भाई कैसे भी कर के रोक ले। और फिर संजय सर के घर मे जाकर उनका ….

डोगा : समझ गया मैं। ही ही ही …मुझे भी उनसे बदला लेना है मेरी आधे घण्टे की मूवी बनाने के जुर्म में। आ रहा हूँ मैं।

जल्द ही डोगा चारों नागराज के सामने खड़ा था।

डोगा : अइला ! तू चार कइसे हो गया बे।

नागराज : ये सभी मेरे रूप के नागराज हैं अलग अलग टाइम लाइन और आयाम से आए हैं।

डोगा : और ये वाला किस टाइम या आयाम से आया है बिल्कुल अजीब सा है।

नरक नाशक नागराज : वो क्लासिक नागराज है , क्लासिक ही न लगेगा।

क्लासिक नागराज : गुर्र।

और फिर सभी , साथ मे मैं भी नरक नाशक नागराज के सर्पट पर सवार हो गए । पलक झपकते ही सर्पट ने हमे संजय सर के घर के सामने खड़ा कर दिया।

मैं : वाव! क्या स्पीड थी सर्पट की। मज़ा आ गया।

नरक नाशक नागराज ने अपना सीना फुला लिया।

तभी नागराज ने सभी को एक दीवार के पीछे खींच लिया।

नागराज : सब इधर आओ बे! कहीं संजय सर हमे देख न लें। और डोगा अब तू जा अपने काम पे।

डोगा : यस … अब रोके न रुकत है।

डोगा जल्दी-जल्दी भागता हुआ जाकर संजय सर के दरवाजे पर खड़ा हो गया। उसने बेल बजाई। जल्द ही संजय सर ने दरवाजा खोला।

संजय सर : ओ … हैल्लो माय सन डोगा।

डोगा : हैल्लो सर जी। सर जी इस वक़्त मुझे बहुत जोर की लगी है मैं इधर से गुज़र रहा था तो सोचा आप मदद करेंगे।

संजय सर : ओ हाँ क्यों नही । आओ।

डोगा अंदर घुसा। संजय सर ने घर का दरवाजा बंद किया।

इधर सभी नागराज गच्च हो कर छिपे बैठे थे।

नागराज : अब आएगा मज़ा जब संजय सर का पूरा घर उड़ जाएगा।

आतंकहर्ता नागराज : ही ही ही।

क्लासिक नागराज : हा हा हा ।

नरक नाशक नागराज : हू हू हू ।

….

……

…….

……..

……….

……………

……………….

……………………

………………………

क्लासिक नागराज : यार काफी देर हो गई अभी तक डोगा बाहर क्यों नही आया।

आतंकहर्ता नागराज : हां । और न ही संजय सर का घर उड़ा।

तभी संजय सर के घर का दरवाज़ा एक बार फिर खुला। और उसमें से निकला डोगा। बेहद बुरी हालत में, लुढ़कता-ढुलकता हुआ डोगा किसी तरह उन सब के पास पहुंचा।

नागराज : अबे क्या हुआ? ये क्या हालत बना ली तूने।

डोगा : यारों गजब हो गया। संजय सर ने मेरा ऑपरेशन कर डाला!

क्लासिक नागराज : क्या बक रहा है!

डोगा : सच बोल रहा हूँ। जिस वक्त मैं संजय सर के घर मे दाखिल हुआ संजय सर ने परमाणु का नया एक्सरे विज़न पहन रखा था। उन्होंने मेरे पेट मे जमा बारूद देख लिया और फौरन मुझे स्ट्रेचर पर पटक कर मेरा ऑपरेशन कर के सारा बारूद निकाल डाला। बहूहू। भाइयों माफ कर दो मैं संजय सर का घर नही उड़ा सका।

आतंकहर्ता नागराज : अबे तू खुद को उड़ा ले! गुर्र।

नागराज : अब बस बहुत हो गया। अब हम सबको ही कुछ करना होगा यारों। चलो मिलकर संजय सर को मज़ा चखाते हैं।

चारों नागराज संजय सर के दरवाजे पर खड़े हो गए और बजाए बेल बजाने के दरवाज़ा पीटने लगे।

संजय सर ने दरवाज़ा खोला।

संजय सर : गुर्र कौन … ओह ओह मेरे चार चांडव आए हैं। कहो पुत्रों कैसे हो ।

नागराज : गुर्र। हम यहाँ आपको सबक सिखाने आए हैं।

आतंकहर्ता नागराज : हाँ। आपको जन्मोत्सव का नाम बदलकर आतंकहर्ता नागराज जन्मोत्सव करना होगा। गुर्र।

नरक नाशक नागराज : नही। नरक नाशक नागराज जन्मोत्सव।

क्लासिक नागराज : गुर्र । क्लासिक नागराज जन्मोत्सव।

नागराज बुदबुदाया।

नागराज : अबे तुम तीनो क्या कर रहे हो? हमे संजय सर को सबक सिखाना है । परन्तु तुम लोग तो अपनी ही सुनाने लगे । गुर्र।

संजय सर ने सारी बात समझ ली।

संजय सर : देखो पुत्रों। मैं जानता हूँ तुम लोग इसी बात को लेकर नाराज़ हो न कि तुम चाहते हो जन्मोत्सव का नाम तुम सबके नाम पर रखा जाए। पर जन्मोत्सव तुम्हारे नाम से ही तो होता है। भले ही तुम आतंकहर्ता हो , विश्वरक्षक हो, नरक नाशक हो, क्लासिक हो। परन्तु तुम सब का असली नाम तो नागराज ही है न। ये जन्मोत्सव तुम चारों के नाम पर होता है , नागराज जन्मोत्सव।

नागराज : कहने को तो जन्मोत्सव हमारे नाम से होता है लेकिन हमारे लिए विशेष क्या होता है उसमें?

संजय सर : तुम्हारे लिए विशेष क्या होता है? तुम लोग ये कैसी कैसी बातें कर रहे हो। अरे तुम्हारे ही नाम से तो केक कटता है , तुम्हारी तारीफें बयान की जाती हैं , बच्चे तुम्हारा रूप धरकर खुद को नागराज समझते हैं। सब से बड़ी बात तुम्हारा नाम सुनकर ही तो लोग आते हैं नागराज_जन्मोत्सव। तुम लोगों के तो नाम ही काफी हैं। कभी ये मत सोचना की तुम्हारी कोई अहमियत नही है ……. अरे तुम्हारे तो नाम से चलती है राज कॉमिक्स। तुम्हारा तो नाम ही काफी है।

संजय सर का ये इमोशनल भाषण सुनने के बाद चारों नागराज आंसुओं में डूब गए।

चारों नागराज : हम से बहुत बड़ी गलती हो गई । हमे माफ कर दीजिए।

संजय सर : कोई बात नही बच्चों । तुम मेरे बच्चे हो और अपने बच्चों की गलतियों का बुरा नही मानता उनका पिता।

चारों नागराज : परन्तु आपने हमे कभी ये क्यों नही बताया कि हमारे हमशकल भी हैं?

संजय सर : किन्ही कारणों की वजह से मैं तुम लोगों को ये नही बता सका 💭 वर्ना तुम चारों किसी दिन मेरे सर पर आकर बैठ जाते तो मैं क्या करता।😕💭 परन्तु अब तो तुम लोग एक दूसरे से मिल ही चुके हो समझ चुके हो एक दूसरे को। तो अब कोई समस्या नही।

चारों नागराज : हाँ । और अब हम चलते हैं सर जी।

संजय सर : हाँ हाँ जाओ बच्चों।

चारों नागराज बाहर निकल आए और उस जगह पहुंचे जहां उन्होंने डोगा को छोड़ा था। डोगा अब भी वहीं पड़ा था।

नागराज : अबे तुझे क्या हुआ? चल चलते हैं।

डोगा : यारों गजब हो गया!

नरक नाशक नागराज : क्या हुआ?

डोगा : संजय सर ने बारूद के साथ-साथ मेरी किडनियां भी निकाल लीं। बहूहू , हुड़ अपुन का की होऊगा अब।

आतंकहर्ता नागराज : बहुत बुरा हुआ। नरक नाशक इसे अपने सर्पट पर बैठा कर मुम्बई पहुंचा दे।

डोगा : क्या तुम लोग बदला नही लोगे मेरा?

क्लासिक नागराज : अपने बाप से कोई बदला लेता है क्या। ही ही ।

नागराज : तुझे मेरा संडास उड़ाने की सज़ा मिली है। ही ही ।

नरक नाशक नागराज : छि छि छि । कितना घिन्हा है बे तू विश्वरक्षक। किस चीज़ का नाम ले रहा है।

डोगा : बहूहूहू। भैंsssss।

नागराज : अबे तू रो मत। आतंकहर्ता नागराज तुझे अपनी एक किडनी देगा ।

आतंकहर्ता नागराज : अबे नही मेरे पास सिर्फ दो ही है । अगर मैं इसे दे दूंगा तो आतंक कैसे खत्म करूंगा। नरक नाशक तू दे दे।

नरक नाशक नागराज : अबे मेरे पास तो किडनी ही नही है। मैं अपनी किडनी नियति को दे चुका ।

नागराज (बुदबुदाकर) : लोग दिल देते हैं ये साला किडनी देता है। ही ही ही। गुर्र। अच्छा चल क्लासिक नागराज तू दे दे डोगा को किडनी।

आतंकहर्ता नागराज : इसके पतले दुबले शरीर मे जो किडनी है क्या वो डोगा का भार सम्भाल लेगी? ही ही ही।

क्लासिक नागराज : गुर्र गुर्र गुर्र।

डोगा : रहने दो बे तुम सब! कोई मत दो मैं अपने कुत्तों से मांग लूंगा मेरे कुत्ते बड़े वफादार हैं।

फिर सब सर्पट पर सवार हो कर चल दिए।

इधर संजय सर के घर मे ।

संजय सर ( डोगा की किडनी को एक जार में रखते हुए) : ही ही ही ही। अपने चार पुत्रों को तो मैंने इमोशनल भाषण पिला कर रवाना कर दिया और पांचवे पुत्र डोगा को भी अच्छा सबक सिखाया। कमबख्त मेरा घर बड़ाम बुलाने आया था। अबे तुम सब का बाप हूँ मैं! ही ही ही,गुर्रर्र।

#समाप्त

तो दोस्तों जैसा कि आपने देखा (मन मे😜) मैं नागराज का इंटरव्यू तो नही ले सकता परन्तु मज़ा बहुत आया खासकर सर्पट पर घूमने में तो मुझे बहुत मज़ा आया।😜

अच्छा अब चलता हूँ। और हाँ , आप सब नागराज जन्मोत्सव में ज़रूर जाइएगा। मैं तो जा नही पाऊंगा😜

और हाँ । ये मत सोचिएगा कि नागराज जन्मोत्सव में नागराज के लिए कुछ विशेष नही होता । अरे नागराज का तो ……..नाम ही काफी है।😎😎😎

Written By- Talha Faran for Comic Haveli

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7 Comments on “Nagraj Janmotsav 2018”

  1. …. अच्छी स्टोरी थी । मेरी तारीफ करने का शुक्रिया।

  2. गजबबब्ब यार,
    रुला दिया हँसाते हँसाते, कसम से
    Bhut hi bdhiya combination,
    Mazedar, aur Sbhi Nagrajo ko सन्तुष्ट कर देने वाली कहानी

  3. गजबबब्ब यार,
    रुला दिया हँसाते हँसाते, कसम से
    Bhut hi bdhiya combination,
    Mazedar, aur Sbhi Nagrajo ko सन्तुष्ट कर देने वाली कहानी

    Hi hihihihihihihi………….

  4. बेहतरीन लेखन तल्हा महाराज।
    तीनों नागराज को साथ लाने का कांसेप्ट अच्छा था। ये क्लासिक नागराज भी कुछ है ये नहीं पता।
    जो भी है ये नागराज लेकिन 4 ही सही ठीक ठाक ही है। मेरा पसंदीदा तो एक ही नागराज है…”नागराज”।
    डोगा को बारूद खिला दिया बताओ बेचारा बाथरूम में बैठा डन डना डन डन कर रहा था।
    नरक नाशक इतना खतरनाक है क्या की आयाम ही फाड दे नागीश कि तरह? सही है।
    स्टोरी की बात करूं तो इतने कम समय में लेखन किया है जो लाजवाब बात है।
    काफी अच्छा लिखा है पंचेज कम थे। शायद तुम्हें इतना अच्छा करते देखा है कि अब संतुष्टि नहीं मिल पाती।
    क्लासिक नागराज का छत से उतरना वाला हिस्सा बहुत मजेदार था। मजा आ गया।
    अंततः इतनी सधी हुयी और कम समय मे लिखी स्टोरी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। आपकी हर स्टोरी काफी हंसाती है और इसने भी ऐसा ही किया।
    अपने hero alom की तरह संजय जी भी किडनी चोर निकले हाहाहाहा।
    खैर बहुत शुभकामनाएं छोटा नागराज आगे एक सुखद और बेहतरीन भविष्य के लिए।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद मनोज भाई & बड़े भइया। मैं जानता हूँ इस कहानी में कॉमेडी पन्जेज़ कम हैं। 4 घण्टे के अंदर कहानी सोचा तथा लिखा। इतने कम समय में कहाँ से बढ़िया हो सकती है।

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