ऑक्टोहेड- प्रादुर्भाव और अंत

अध्याय 1 – Cultists 

अलार्म सुबह 5 बजे “बीप बीप” की ध्वनि से उस आलीशान कमरे की शांति को भंग कर रहा था। विक्रांत ने फिर भी जब उठने में आलस किया तो नंदिता ने उसको झिंझोड़कर उठाया।

नंदिता- जल्दी उठो विक्रांत, वरना तुम्हारी फ्लाइट मिस हो जाएगी।

इतना सुनकर ही विक्रांत अचानक से उठा।

विक्रांत- जल्दी तैयार होना पड़ेगा, आठ बजे एयरपोर्ट भी पहुंचना है।

नंदिता- मेरी समझ मे तो ये नहीं आ रहा कि अचानक से ऐसा क्या काम आ गया कि तुमको, कि तुम्हारी कंपनी तुरंत भारत भेजना चाहती है?

विक्रांत- मनाली में नई ब्रांच खुली है कंपनी की, मुझे वहां का काम सुपरवाइज़ करने के लिए जाना होगा।

नंदिता- तुम एक हफ्ते के लिए जा रहे हो ,मैं यहां अकेले बोर हो जाऊंगी।

विक्रांत- नहीं होगी, यहां भी काफी काम बाकी है। तुम्हारा जॉब भी है और फिर…

नंदिता- क्या हुआ विक्रांत? बोलो?

विक्रांत- पता नहीं। कुछ अजीब लग रहा है, शायद इतने समय से लंदन में रहकर अब वापिस जा रहा हूँ इसलिए।

नंदिता- मैं भी भारत को काफी मिस करती हूं, किसी और अवसर पर हम दोनों साथ मे चलेंगे।

विक्रांत- ठीक है, पर फिलहाल तो मुझे जाना होगा।

मनाली बस स्टेशन पर दो युवकों ने बस से उतरकर अपने कदम  मनाली की धरती पर रखे।

रोहित- विक्रांत ने कहा था कि वो जल्द ही आएगा।

पुलकित- जल्दी मतलब कितना जल्दी?

रोहित-पता नही , शायद शाम तक।

पुलकित- हम कॉलेज में इतने अच्छे दोस्त हुआ करते थे, और समय हमको कॉलेज खत्म होने के दो साल बाद आज मिला रहा है।

रोहित- इस बात की शिकायत तो मुझे भी विक्रांत से करनी है, शादी करके तुरतं लंदन निकल लिया, बिना हम लोगों से मिले।

पुलकित(झिझकते हुए)- पता नहीं यार…शायद…

रोहित- शायद क्या?

पुलकित(गहरी सांस छोड़कर)- शायद उसे तेरे और नंदिता के चक्कर के बारे में पता चल गया था।

रोहित को इतनी पुरानी बात सुनकर थोड़ा सा झटका लगा लेकिन उसने खुद को संभाला।

रोहित- ह..हाँ , लेकिन कॉलेज में सबको पता था कि हम साथ थे और बाद में ब्रेकअप हो गया। ये कोई राज़ की बात तो थी नहीं!

पुलकित- ठीक है यार, समय के तारों के नहीं छेड़ते अब। चल कोई होटल वगैरह ढूंढें।

पुलकित और रोहित तुरंत बस स्टेशन के बाहर निकले। मनाली की हवा में उन्हें एक अजीब सा सूनापन महसूस हुआ, सर्दी और कोहरा बढ़ गया था और लोग कम हो गए थे। वो पहले वाली चहल पहल भी नहीं थी।

पुलकित- यार कुछ अजीब लग रहा है?

रोहित- हाँ कुछ अजीब बात तो है, लगता ही नहीं कि हम उसी जगह पर वापिस आये हैं जहां अपना बचपन गुज़ार दिया।

पुलकित- लोग भी डरे डरे से लग रहे हैं।

तभी उनके पीछे से एक रौबीली और कड़कदार आवाज़ आयी ” ये उनकी वजह से है।” पुलकित और रोहित ने पीछे मुड़कर देखा कि इस रौबीली आवाज़ का मालिक था इंस्पेक्टर शमशेर, जो कि घनी मूछों और आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक था।

शमशेर- आप लोग टूरिस्ट हैं क्या?

पुलकित- जी नहीं ,हम लोगों ने अपनी पढ़ाई मनाली से ही की है। ग्रेजुएशन तक हम यहीं थे और फिर नौकरी के सिलसिले में अलग अलग शहरों में जाना पड़ा, हमारा एक दोस्त भी आज लंदन से आ रहा है।

शमशेर- हूँ।  फिर तो आपको नहीं पता होगा कि यहां क्या चल रहा है?

पुलकित- जी नहीं।

शमशेर- किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि में संलग्न लोग गायब हो रहे हैं,मुख्य रूप से बड़े बड़े पंडित, मौलवी, पादरी इत्यादि।

रोहित- क्या? फिर ये अखबारों में क्यों नही है?

शमशेर- मेरी वजह से। देखिए ये एक बहुत संवेदनशील मुद्दा है और इस तरह की बातें बाहर जाने से नेता अपने लाभ के लिए इस बात का प्रयोग करने की कोशिश करेंगे जिससे शायद साम्प्रदायिक दंगे भड़क उठें, इसलिए ये बात जितनी दबी रहे उतना सही है। हालांकि मीडिया को ज़्यादा समय तक कोई दबा नहीं पायेगा लेकिन शायद ये केस  तब तक सॉल्व हो जाये।

पुलकित- लेकिन कोई भी किसी धार्मिक क्रिया में जुड़े व्यक्ति को ही क्यों उठाना चाहेगा।

शमशेर- यही तो हम भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, आप लोगों को अपने आसपास कुछ अजीब दिखे तो कृपया पुलिस से संपर्क करें।

रोहित- जी, ठीक है।

शमशेर- देखिए ऐसा कहकर मैं आप लोगों को हतोत्साहित तो नहीं करना चाहता लेकिन मनाली आने के लिए आप लोगो ने शायद सही समय नहीं चुना है।

फिर इंस्पेक्टर शमशेर ने एक टैक्सी बुलाई और ड्राइवर से पुलकित और रोहित को किसी अच्छे होटल छोड़ने के लिए कहा। गाड़ी के अंदर भी पुलकित और रोहित मनाली की परिस्थितियों के लेकर ही  बातचीत कर रहे थे।

पुलकित- इंस्पेक्टर साहब ने काफी मदद की।

रोहित(गंभीर स्वर में)- हूँ।

पुलकित- अब तुमको क्या हुआ?

रोहित- इंस्पेक्टर की बात सुनी न तुमने?

पुलकित- हाँ, लेकिन ये लोगों का अपहरण करने वाले कौन हो सकते हैं?

रोहित- क्या पता? शायद आतंकवादी होंगे।

टैक्सी होटल पाइनग्रोव के पास आकर रुकी, पुलकित और रोहित ने गाड़ी से उतरकर होटल में चेक इन किया।

रोहित- ये होटल भी काफी…शांत शांत सा लग रहा है।

पुलकित- हाँ सही कहा, मुझे भी ऐसा लग रहा है। खैर, चलो अपने अपने रूम देख लेते हैं।

फिर रोहित और पुलकित अपने अपने कमरों में चले गए। पुलकित ने कमरे में घुसते ही अपने बैग को एक कोने फेंका और बाहर का व्यू शीशे से देखने लगा। शायद ये वो मनाली था ही नहीं जिसे वो जानते थे, हर तरफ मौत जैसा सन्नाटा पसरा हुआ था और लोग घर से बाहर निकलने में डर रहे  थे। तभी अचानक रोहित पुलकित के कमरे में आया।

रोहित- विक्रांत को कॉल किया तुमने?

पुलकित-इतनी जल्दी क्या है? आ जायेगा तो वो खुद ही फोन करेगा।

रोहित- अरे क्योंकि यहां पर उसके परिवार का फार्महाउस है , हम लोग तो किराये के घर मे रहते थे। जितनी जल्दी वो आ जायेगा, हम वहीं शिफ्ट हो जाएंगे। वैसे भी ये होटल थोड़ा ज़्यादा महंगा है।

पुलकित(मुस्कुराते हुए)- लगता है कि इंस्पेक्टर ने तुमको अपनी कहानी से डरा दिया है!

रोहित- क्या! नहीं नहीं!उनकी बात से इसका कोई लेना देना नहीं है।

पुलकित- ठीक है मेरे बहादुर भाई! आओ मनाली की सुंदरता तो निहारें बालकनी से। इतने समय बाद तो आने का मौका मिला है।

पुलकित और रोहित बालकनी में खड़े ही थे कि तभी उन्होंने देखा एक रहस्यमयी व्यक्ति जिसने काले रंग का चोगा पहन रखा था और चेहरा भी नकाब से ढक रखा था, लगातार उनके फ्लोर की तरफ घूरे जा रहा था।

रोहित- ये कौन है? हमारी तरफ क्यों देख रहा है?

पुलकित- मुझे कैसे पता होगा?

रोहित- पहनने ओढ़ने के ढंग से कोई सामान्य व्यक्ति तो लग नहीं रहा।

पुलकित- होगा कोई पागल। हमें क्या करना , आओ कमरे में चलकर थोड़ा खाना वाना आर्डर कर दें।

होटल में खाना खाकर पुलकित और रोहित होटल के बाहर टहलने निकल गए। रोहित के दिमाग मे अभी भी वो रहस्मयी व्यक्ति आ रहा था।

रोहित- ये होटल शहर से कुछ दूरी पर है। यहां तो जंगल झाड़ सब कुछ है।

पुलकित- सोचो इतने साल मनाली में रहने के बाद भी इस जगह का हमको नहीं पता था।

रोहित- मनाली बहुत बड़ी जगह है पुलकित, तुम हर लोकल आदमी से पूरी मनाली का नक्शा जानने की उम्मीद नहीं कर सकते।

अचानक पुलकित का फोन बज उठा।

पुलकित- अरे! विक्रांत का फोन है!

फिर पुलकित ने फोन को कानों से लगा लिया।

पुलकित- हेलो! कहाँ तक पहुंचे विक्रांत?

विक्रांत(फोन पर)- अभी अभी फ्लाइट टेक ऑफ हुई है! जल्द ही मिलते हैं।

पुलकित- ठीक है, तो हमको होटल पाइनग्रोव से पिक कर लेना।

विक्रांत- ठीक है। पहुंचने के बाद बात करता हूँ।

फिर फोन डिसकनेक्ट हो गया।

रोहित- क्या हुआ?

पुलकित- मैंने उसे बता दिया है कि कहां आना है।

रोहित- क्या….उसकी आवाज़ की टोन नार्मल थी?

पुलकित- देखो तुमने कहा तो था कि विक्रांत को तुम्हारे और नंदिता के बारे में सबकुछ पता ही था। फिर चिंता किस बात की?

तभी अचानक पास की झाड़ियों  में दोनों को कुछ हलचल सुनाई पड़ी।  जब दोनों ने मुड़कर देखा तो पाया कि एक सात फुट का व्यक्ति चिंघाड़ मारकर उनकी तरफ कुल्हाड़ी लेकर आ रहा था। पुलकित और रोहित दोनों ने उसका वार बचा लिया, फिर उस लंबे व्यक्ति ने पुलकित को कुल्हाड़ी से मारने का प्रयास किया लेकिन पुलकित ने असाधारण फुर्ती दिखाते हुए न सिर्फ लात मारकर कुदाल उसके हाथ से छुड़ाई बल्कि दो ज़ोरदार लात मारकर उसे कुछ पीछे भी धकेल दिया। फिर वो व्यक्ति रोहित की तरफ मुड़ा और उसे गर्दन से पकड़कर उठा लिया।

रोहित- प..पुलकित कुछ करो!

पुलकित- चिंता मत करो!

पुलकित गठीले बदन का मालिक था लेकिन वो भी जोर लगाकर वो भारी कुल्हाड़ी नहीं उठा पा रहा था पर कुछ कोशिशों के बाद उसने कुल्हाड़ी उठाई और उस लंबे व्यक्ति की गर्दन पर जोरदार वार किया। “खच्च” की आवाज़ के साथ पुलकित ने कुल्हाड़ी को उस हमलावर के खून से लाल कर दिया। हमलावर की पकड़ रोहित की गर्दन पर ढीली पड़ी और वह धरती पर धराशायी हो गया।

रोहित(खांसते हुए)- उफ्फ.. ये कौन था? और हमें मारना क्यों चाहता था?

पुलकित हाथ मे कुल्हाड़ी और चेहरे पर खून लिए स्तब्ध सा खड़ा था।

पुलकित- म..मैंने एक व्यक्ति का खून कर दिया! उसे मार दिया!

रोहित(पुलकित को झिंझोड़कर)- पुलकित मेरी बात सुनो। तुमने जो कुछ भी किया, आत्मरक्षा के लिए किया जिसमे कुछ भी गलत नहीं है।

पुलकित- तो क्या हमें पुलिस को बता देना चाहिए?

रोहित- देखो, ये समझदारी की बात नहीं होगी। उल्टा हम भी फंस सकते हैं।

पुलकित- तो फिर क्या करें?

रोहित- इसके शरीर को यहीं पास में जंगल में गाड़ देते हैं। किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, वैसे भी हम दोनों और इस अनजान हमलावर के अलावा यहां पर कोई नहीं था।

पुलकित- क्या ये उस ग्रुप का हिस्सा हो सकता है जिसकी बात शमशेर ने की थी?

रोहित- क्या पता? फिलहाल तो इसको उठाओ ताकि जंगल मे इसको गाड़ा जा सके।

पुलकित और रोहित ने हमलावर को उठाया और जंगल मे ले जाने लगे। जंगल भी उस समय बड़ा शांत था, चिड़ियों के चहचहाने की भी आवाज़ नहीं आ रही थी।

पुलकित- हम्मफ़! बड़ा भारी है कमबख्त।

रोहित- हाँ , सो तो है। अच्छा एक बात बताओ। तुम इतना अच्छा लड़ना कब सीखे?

पुलकित- वो..वो मनाली से निकलकर मैंने कराटे क्लास जॉइन की थी कुछ समय मे लिए।

रोहित- और तुमने इतनी भारी कुल्हाड़ी भी उठा ली। ये तो वाकई काबिले-तारीफ था।

पुलकित- आ..हाँ ..हाँ। धन्यवाद। पर यह भैंसा बहुत भारी है।

रोहित- हाँ , सो तो है।

तभी शांत जंगल मे दोनो को अपने अलावा किसी और के चहल कदमी की भी आवाज़ आयी। उन्होंने लाश वहीं पर छोड़ दी, फिर दोनों उस आवाज़ की दिशा में बढ़े लेकिन वहां उन्हें कोई भी दिखाई न दिया, फिर वे जब वापिस लाश को लेने आये तो वहां से लाश गायब थी। दोनो घबराकर जल्दी जल्दी जंगल से बाहर आ गए।

रोहित- एक बात तो साफ है कि कोई हमें मारने का प्रयास कर रहा है।

पुलकित- तुम बैंक में काम करते हो और मैं एक जिम ट्रेनर हूँ, हमें भला कोई क्यों मारना चाहेगा?

रोहित- दिमाग बिल्कुल काम नहीं कर रहा इस वक्त। चलो होटल लौट चलें।

पुलकित-ठीक है।

पुलकित और रोहित होटल जाने के लिए लौटे ही थे कि न जाने कहाँ से काले चोगे और काले नकाब में कई सारे लोग जंगल से निकल आये।

रोहित- ये..ये तो वैसे ही वेशभूषा वाले लोग हैं जैसी उस व्यक्ति ने पहनी थी जो हमको बालकनी से घूर रहा था।

अचानक ही रोहित और पुलकित को कोई केमिकल सुंघाकर बेहोश कर दिया गया। धीरे धीरे जब रोहित और पुलकित को होश आया तो वो एक अंधेरे सीलन से भरे कमरे में अलग अलग दीवारों से आमने सामने लोहे की जंजीरों से जकड़े हुए थे। वो कमरा किसी पुराने वेयरहाउस की तरह था, आने जाने के लिए पुराना सा लकड़ी का दरवाज़ा था।

पुलकित- र..रोहित! क्या ये तुम हो! रोहित!

रोहित(धीरे धीरे होश में आते हुए)- आह! पुलकित , उफ्फ.. ये कहाँ हैं हम!

पुलकित- पता नहीं , कोई पुराना सा कमरा है।

रोहित(चिल्लाकर)- कौन हो तुम लोग! क्या चाहते हो?

पुलकित- चिल्लाने का मुझे कोई खास मतलब लग नहीं रहा, मुझे नहीं लगता की उन्होंने हमें किसी आबादी वाले इलाके में बंद किया होगा।

तभी लकड़ी का वो दरवाज़ा धीरे धीरे चरररर की आवाज़ के साथ खुला और उन्ही काले चोगे वाले रहस्यमयी लोगों ने अंदर प्रवेश किया।

पुलकित- कौन हो तुम लोग? क्या चाहते हो?

उन काले चोगे वालों में से एक आगे आया और बड़ी धीमी आवाज़ में बोला जिसने दोनो को अंदर तक हिला दिया “हमें चाहिए …..तुम्हारी जान!”

पुलकित- प..पर क्यों?

काले चोगे वाला व्यक्ति- वैसे तो लोगो ने हमें कई नाम दिए हैं लेकिन तुम हमको cultists कह सकते हो। आम दुनिया से अलग हमारे अपने विश्वास, अपनी मान्यताएं….और अपना ईश्वर है।

रोहित(झुंझलाकर)- ठीक है ठीक है। सीधा मुद्दे पर आते हैं! कितना पैसा चाहिए तुम लोगों को?

वो काले चोगे वाला रोहित की तरफ धीरे धीरे बढ़ा और एक जोरदार थप्पड़ रसीद किया।

फिर उसको शर्ट से पकड़ा और उसे कान में बहुत धीमी आवाज़ में फुसफुसाया ” धन और दौलत! आखिर लोग क्यों इन सब के पीछे पूरी ज़िंदगी निकाल देते हैं। क्या तुम्हारा ईश्वर तुमको ये सब उपलब्ध नहीं करवा सकता? दुनिया मे दुख दर्द क्यों हैं? असंतोष क्यों है? लोग क्यों धर्म के नाम पर कत्ल करते हैं? क्या तुम्हारा ईश्वर पक्षपात करता है? अगर नहीं तो अमीर और गरीब क्यों है? सबको सबकुछ क्यों नहीं मिल पाता! लेकिन हमारा ईश्वर ऐसा नहीं है, क्योंकि कम से कम हम उसके वजूद के बारे में जानते तो हैं, लेकिन तुमको तो अपने ईश्वर के वजूद का ही नहीं पता। लेकिन कोई बात नहीं, जब हमारे प्रभु इस धरती पर आएंगे तो सबको उन्हें मानना पड़ेगा, जो ऐसा नहीं करेगा वो धूल में मिल जाएगा और अपने ईश्वर को इस धरती पर लाने के लिए हमको कुछ कुर्बानियां देनी होंगी।”
जैसे ही उसने अपना आखिरी वाक्य खत्म किया, दूसरे cultist ने आकर केरोसिन से भरी बोतल को रोहित के ऊपर उड़ेल दिया।

पुलकित- य..ये क्या कर रहे हो तुम लोग! रुको! रुक जाओ!

पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रोहित के ऊपर जलती हुई माचिस की तीली डालकर उसे जला दिया गया। रोहित बहुत चीखा चिल्लाया लेकिन वहां उसकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं था। जल्द ही जहां रोहित बंधा था, वहां सिर्फ एक मांस का लोथड़ा जंजीर में बंधा हुआ था। पुलकित अपने दोस्त को अपने सामने जलता देखकर सदमे जैसी स्थिति में पहुंच गया था, उसके मुंह से अब कोई बोल नहीं फूट रहे थे। तब उसी cultist ने पुलकित के पास आकर कहा ” चिंता मत कर! दो घंटे बाद तेरी बारी है! तुझे आज अपने सारे दर्द, सारी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी।” फिर सभी cultists कमरे ले बाहर निकल आये, जहां पर एक विशाल कब्रिस्तान बना हुआ था।

उनमे से एक cultist निकलकर आया और तेज़ आवाज़ में खुशी के साथ बोला “आज 59वीं कुर्बानी पूरी हुई। बस एक कुर्बानी और फिर हमारे ईश्वर, ऑक्टोहैड आज़ाद होंगे लाखों वर्ष की अपनी कैद से और प्रशांत महासागर का सीना चीरकर बाहर आएंगे।”

अध्याय 2-Old Revenge  



पुलकित सीलन भरे कमरे में एक घंटे से कैद था। वो कई बार पूरी ताकत के साथ “बचाओ बचाओ” चिल्ला चुका था लेकिन कोई बाहरी रिस्पांस नहीं मिलने की वजह से उसने रही सही उम्मीद भी छोड़ दी थी। सामने रोहित की जली हुई लाश लोहे की जंजीरों से अब भी बंधी हुई थी, तभी “खटाक” से लकड़ी का दरवाजा टूटा। इंस्पेक्टर शमशेर अपनी टीम के साथ आ चुके थे और उन्होंने पुलकित औए रोहित की लाश को जंजीरों से आज़ाद करवाया। पुलकित अभी भी सदमे की स्थिति में था।

शमशेर- मैं जानता हूँ, कि तुम पर बहुत बुरी बीती है लेकिन यकीन मानो, ये दरिंदे बहुत दिन तक बच नहीं पाएंगे।

पुलकित- लेकिन…लेकिन आपको पता कैसे चला कि हम लोग यहां कैद हैं?

शमशेर- सब बताऊंगा लेकिन पहले पुलिस स्टेशन चलो मेरे साथ।

शमशेर पुलकित को अपनी जीप में बैठाकर पुलिस स्टेशन ले गया। वहां उसने सभी हवलदारों से बाहर इंतज़ार करने को कहा, पुलकित कुर्सी पर सर पकड़कर बैठा हुआ था।

शमशेर- अब मेरी बात ध्यान से सुनो पुलकित। ये लोग खुद को cultists कहते हैं, ये इस बात में विश्वास करते हैं कि इनका आराध्य देव समुद्र में कैद है और अगर ये निश्चित मात्रा में मानव बलि दें तो वो अपनी कैद से स्वतंत्र होकर धरती पर आ सकता है। ये उसे “ऑक्टोहैड” कहते हैं। साथ ही इनके पास एक “काले जादू की किताब” भी है जिससे ये काले जादू में भी महारत हासिल कर चुके हैं, कुछ कुछ सदस्य जो अधिक निपुण हैं वे telekinesis भी कर पाते हैं।

पुलकित- telekinesis? ये क्या होता है?

शमशेर- बिना हाथ लगाए सिर्फ अपनी मानसिक शक्ति से वस्तुओं को इधर से उधर खिसका देने की कला को telekinesis कहते हैं।

पुलकित- लेकिन आपको इतना सब कैसे पता इनके बारे में?

शमशेर(लंबी सांस लेकर)- क्योंकि मेरे पिता भी इनमें से एक थे।

पुलकित- क्या?

शमशेर- हाँ, और मेरी माँ की बलि जब इनके वाहियात रिवाज़ के लिए चढ़ाई गयी तभी मैं घर से भाग गया। तब मैं 12 साल का था, मेरी बाकी पढ़ाई का खर्चा एक अनाथाश्रम ने उठाया। मैं ही जानता हूँ कि कितनी मुश्किल से मैं यह तक पहुंचा हूँ और अब उन हरामखोरों को मैं और कत्ल नहीं करने दूंगा।

पुलकित- क्या आप “ऑक्टोहैड” के वजूद में विश्वास करते हैं इंस्पेक्टर?


शमशेर- पता नहीं लेकिन मेरे लिए ये बस चंद मानसिक रूप से विक्षिप्त लोग हैं जिनको मुझे किसी भी कीमत पर मिटाना ही है।


पुलकित- आपको कैसे पता कि इन लोगों ने मुझे और रोहित को कहां बंदी बनाया हुआ है?


शमशेर- मैंने अपने कुछ लोग इनके बीच छोड़ रखे थे , इनको वैसे पकड़ना मुश्किल था क्योंकि दिन में ये सब हमारे ही बीच सामान्य नौकरीपेशा लोगों की तरह रहते हैं। उन्होंने ही खबर दी थी कि तुम लोगों को इन्होंने बंदी बनाया हुआ है लेकिन जब तक हम कोई एक्शन लेते तब तक न रोहित बचा , न मेरे खबरी।


पुलकित- तो अब आप क्या करेंगे?


शमशेर- उनको नहीं पता कि मैंने तुमको छुड़वा लिया है। वो ज़रूर उस कब्रिस्तान में वापिस जाएंगे, हम छुपकर उनका इंतजार करेंगे और मौका पाते ही हमला करेंगे…..इनको कैद नहीं करना है, सीधा एनकाउंटर करना है।


पुलकित- मैं भी चलूंगा आपके साथ।


शमशेर- क्या? लेकिन अभी अभी तुम मौत के मुंह से बचकर….


पुलकित- उन्होंने मेरे सबसे अच्छे दोस्त को मार दिया है इंस्पेक्टर, मुझे उम्मीद है कि आप समझेंगे मेरी बात।


शमशेर(कुछ सोचकर)- हम्म। ठीक है, तुम आ सकते हो। लेकिन ध्यान रहे कि हमको सही मौका मिलने तक छुपे रहना है, ये लोग खतरनाक और चालाक हैं।


पुलकित- मैं समझ गया।

शाम के 6 बजे थे लेकिन अंधेरा हो चुका था, शमशेर अपने कुछ लोगों और पुलकित के साथ वापिस कब्रिस्तान गया और वे पास में ही एक जगह पर छिपकर बैठ गए। थोड़ी ही देर में वहां एक काले रंग की बड़ी सी वैन आकर रुकी, उसमे से काले चोगे और काले नकाब वाले कुछ लोग उतरे, वे लोग आपस मे कुछ बात कर रहे थे जो शमशेर , पुलकित और बाकी पुलिसवालों तक भी पहुंच रही थी।

व्यक्ति 1- मुझे लगता है कि उन्होंने यहां तक हमारा पीछा किया है।
व्यक्ति 2- तो तैयार रहो। याद है ना कि पिछली बार क्या हुआ था?
व्यक्ति 3- वहां देखो! वे जानते हैं कि हम यहां पर हैं!

तभी छुपे हुए इंस्पेक्टर शमशेर और बाकी लोगों ने देखा कि एक सफेद रंग की बड़ी वैन भी आकर कब्रिस्तान में रुकी लेकिन उसमें से जो लोग निकले उनका भी चोगा और नकाब बाकी cultists की तरह ही था…..बस वो काले की जगह लाल था। ये देखकर इंस्पेक्टर शमशेर थोड़ा चकरा गए।

पुलकित(धीमी आवाज़ में)- यहां कितने तरह के cultists हैं?पहले कुछ लोग काले चोगे में आये और अब कुछ लोग लाल चोगे में, ये चल क्या रहा है?

शमशेर- मैं भी परिस्थिति को समझने का ही प्रयास कर रहा हूँ। शशशश…लगता है ये कुछ बोल रहे हैं, ध्यान से सुनो।

काले और लाल चोगे वाले लोग आमने सामने थे।

व्यक्ति 1 (लाल चोगे में)- लगता है कि आप लोगों ने आखिरी व्यक्ति ढूंढ लिया है जिसकी कुर्बानी दी जाएगी, कृपया उसे हमें सौंप दीजिए और अपने प्राण बचाइए।
व्यक्ति 2 (काले चोगे में)- पिछले दो लोगों को ढूंढने में बहुत मेहनत लगी है और हमारा एक आदमी भी मारा गया है। तो अच्छा होगा कि आखिरी कुर्बानी के बारे में भूल जाओ और यहां से चलते बनो।
व्यक्ति 1 (लाल चोगे में)- लगता है कि तुम ब्लैक हुड के लोगों को विनम्रता रास नहीं आती, अब हमें दूसरा तरीका अपनाना होगा।

लाल और काले चोगे में मौजूद ब्लैक हुड और रेड हुड के लोगों ने अपनी अपनी बंदूकें निकाल लीं, ये देखकर इंस्पेक्टर शमशेर तुरंत उठ खड़ा हुआ और अपनी पुलिस फ़ोर्स को लेकर सामने आया।

शमशेर- Freeze Everyone Freeze। अपनी बंदूकें नीचे गिरा दो।

Cultists इस घटना से थोड़ा आश्चर्यचकित ज़रूर हुए लेकिन तुरंत ही अपनी बंदूकों से पुलिस पर ही फायर करने लगे। पुलिस में भी जवाबी हमला किया। मुठभेड़ में दो तीन पुलिस के जवान घायल हो गए, कुछ मारे गए। शमशेर ने भी अचूक निशाने का प्रदर्शन करते हुए कई cultists की खोपड़ी उड़ा दी। अचानक हुए इस हमले से ब्लैक हुड और रेड हुड के लोग घबरा गए और अपनी बंदूकें छोड़कर भागने लगे, शमशेर भी उनके पीछे भागा की अचानक एक अद्भुत घटना घटी। एक ब्लैक हुड cultist पीछे मुड़ा और उसने अपने हाथ को एक विशेष मुद्रा में हवा में घुमाया , साथ ही इंस्पेक्टर की बंदूक भी उसके हाथों से छूटती चली गयी। ये देखकर शमशेर और पुलकित हैरान रह गए। इसके बावजूद शमशेर उस ब्लैक हुड वाले के पीछे भागे और छलांग मारकर उसे पकड़ लिया, शमशेर की पकड़ मजबूत थी लेकिन cultist में भी अमानवीय शक्ति भरी हुई थी जिसके कारण शमशेर का उसे पकड़े रखना मुश्किल हो रहा था कि तभी पुलकित ने एक पत्थर उठाया और उस cultist के सर पर दे मारा, वो वहीं गिरकर बेहोश हो गया। इस चक्कर मे बाकी सभी cultists भागने में सफल हो गए।

शमशेर- ठीक है, अब इसका नकाब हटाओ।

कुछ पुलिसवालों ने उसका नक़ाब हटाया, साथ ही पुलकित बहुत बुरी तरह चौंक गया।

पुलकित- विक्रांत! तुम! मुझे तो विश्वास ही नहीं होता कि तुमने और तुम्हारे लोगों ने रोहित को मार दिया!

विक्रांत ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा, इस वक्त वो इंसान नहीं बल्कि एक पिशाच लग रहा था।

विक्रांत- हा हा हा, हाँ मार डाला मैंने उसे। उस कमीने का चक्कर था मेरी बीवी के साथ! इसीलिए मार डाला मैंने उसे!

पुलकित- पर वो तो बहुत समय पहले की बात थी। मुझे लगा कि तुम ये सब भूल चुके हो।

विक्रांत- उसका मेरी बीवी के साथ अफेयर था पुलकित, ऐसी बात मैं कभी नहीं भूल सकता! मैं लंदन में नंदिता के साथ सेटल तो हो गया लेकिन ये सच्चाई जानने के बाद मेरा दिल पूरी तरह टूट चुका था, मैं डिप्रेशन में चला गया था। मैं एक मनोचिकित्सक के पास जाने लगा, जब उसे मेरी स्थिति का पता चला तो उसने मुझे कुछ लोगों से मिलवाया, वो मनोचिकित्सक खुद ब्लैक हुड का सदस्य था। ब्लैक हुड को जॉइन करने के बाद मुझे पता चला कि जिस दुनिया मे हम रह रहे हैं वो कितनी खोखली है, कितनी नकली है और कितना नकली है इसे बनाने वाला भगवान! इसलिए मैंने अपने लिए एक नया भगवान ढूंढ लिया जो मुझे वाकई में समझता है, जो वाकई में हमारे पास है और कैद है समुद्रतल की गहराइयों में लेकिन एक बाधा थी, हम लोगों को 60 कुर्बानियां देनी थी ताकि ऑक्टोहैड, हमारा देवता समुद्रतल से बाहर आ सके। इसके लिए हमने निशाना बनाया धर्मगुरुओं, मौलवियों, और धार्मिक कार्यों में संलग्न और लोगों को। ऐसा हमने ये देखने के लिए की उनको बचाने उनका भगवान आता है या नहीं, लेकिन कोई नहीं आया। हा हा हा…हमने उनको जंजीर में बांधकर जला दिया लेकिन कोई नहीं आया। कुछ दो कुर्बानियों की और ज़रूरत थी, बस फिर क्या था , रोहित से बदला लेने और रीति को पूरा करने का परफेक्ट प्लान था मेरे पास। इसके लिए मैंने नंदिता से कंपनी के काम का बहाना किया ताकि यहां आकर रोहित को आने हाथों से मारने का आनंद ले सकूं और कसम से बता रहा हूँ पुलकित , उस कमीने की चीखें सुनकर, आग के द्वारा उसके पिघलते हुए मांस को देखकर, उसकी छटपटाहट देखकर जो सुकून मिला वो किसी और चीज़ में नहीं मिला। तुम तो बेकार ही रास्ते मे आ गए, तुमसे मेरी दुश्मनी नहीं थी लेकिन आखिरी कुर्बानी फिर हम कहाँ ढूंढने जाते इसलिए तुमको भी स्वाहा करने की योजना बनानी पड़ी।

पुलकित- तू और तेरे लोग मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं, इसे यहां से ले जाइए इंस्पेक्टर। न जाने मैं क्या कर दूंगा इसके साथ!

शमशेर- ठीक है, पर तुम खुद को संभाल लोगे न पुलकित।

पुलकित(भारी आवाज़ में)- जी।

फिर इंस्पेक्टर शमशेर आगे की पूछताछ में लिए विक्रांत को थाने में ले गए। पुलकित अकेला कब्रिस्तान में बचा था, तभी अचानक ही उसका फोन बज उठा, उसने फोन उठाकर अपने कानों से लगाया।

पुलकित- हाँ, काम हो गया! ब्लैक हुड के एक सदस्य को पुलिस ले गयी है,……नहीं मुझ पर किसी का शक नहीं गया….बिल्कुल। अमर रहे रेड हुड और अमर रहे ऑक्टोहैड।

पुलकित के चेहरे के भाव बदल चुके थे, अब वो अकेले कब्रिस्तान में कुटिलता से अट्टहास कर रहा था।

अध्याय 3-Origin of Blackhood 

मनाली के वीरान इलाके में एक दो मंजिला इमारत में कुछ हलचल थी। उस इमारत की सुरक्षा के लिए कुछ 10-12 लोग हाथ मे बंदूक लिए बाहर तैनात थे। उस इमारत के ऊपरी हिस्से में एक बहुत ही आलीशान शयनकक्ष बना हुआ था,जहाँ बिस्तर पर एक व्यक्ति चिंतित मुद्रा में बैठा हुआ था। लगभग 35 की उम्र का बलिष्ठ शरीर वाला व्यक्ति जिसकी दाढ़ी उसकी छाती तक आ रही थी, चेहरा दाढ़ी से ढका हुआ लेकिन बहुत ही प्रभावशाली था, उसने सिर्फ एक जीन्स पहनी थी और ऊपर कुछ नहीं पहना था। घड़ी की टिक टिक उस शांत कमरे की शांति को भंग कर रही थी, तभी उस कमरे में एक खूबसूरत महिला आयी और उस व्यक्ति की तंद्रा को उसके कंधे पर हाथ रखकर भंग कर दिया।

सारा- क्या कल की घटना को लेकर अभी तक चिंतित हो?

जॉन- कल हमारे एक आदमी को पुलिस ने पकड़ लिया।

सारा- चिंता मत करो, विक्रांत अपना मुंह कभी नहीं खोलेगा।

जॉन- एक बात समझ मे नहीं आयी सारा। ये रेड हुड के लोगों को पता कैसे चला कि कल हम आखिरी कुर्बानी देने वाले थे?

सारा- हाँ , पूरा प्लान अच्छे से बना था लेकिन रेड हुड और पुलिस दोनों हमारी लोकेशन जान गए।

जॉन- हमारा आदमी शमशेर की गिरफ्त में है।

सारा- शमशेर के पिता तो ऑक्टोहैड के सबसे बड़े भक्तों में से एक थे। वो अपने पिता के पदचिन्हों पर क्यों नहीं चल रहा?

जॉन- उसके पिता की बेवकूफी की वजह से। उसने अपनी ही बीवी यानी शमशेर की माँ को उसके सामने ही रिवाज के लिए कुर्बान कर दिया, वरना आज शमशेर भी हमारी मुट्ठी में होता।

तभी एक 27 वर्ष का लड़का घबराकर तेज़ी से दौड़ते हुए कमरे में आया, उसके चेहरे पर खौफ साफ झलक रहा था और उसका पूरा चेहरा पसीने से तर था।

जॉन(गुस्से से)- क्या है सिद्धार्थ? दरवाज़ा खटखटाना ज़रूरी नहीं समझा।

सिद्धार्थ- क्षमा करें लेकिन बात ही कुछ ऐसी है कि…

जॉन- क्या बात है?

सिद्धार्थ- हमारे ब्लैक हुड का एक सदस्य रमेश जंगलों में मरा पड़ा मिला है, पुलिस ने लाश बरामद कर ली है।

सारा(चौंककर)- क्या! पर उसे कौन मार सकता है?

जॉन- सामान्य व्यक्ति के लिए रमेश को मारना बड़ा मुश्किल था क्योंकि वो telekinesis का अच्छा ज्ञाता है।

सारा- तो क्या रेड हुड में से किसी का काम हो सकता है?


जॉन- इशारा तो इसी ओर है हर चीज़ का। मुझे अपने छोटे भाई से बात करनी होगी।


सारा- तुम्हारा छोटा भाई हेनरी आखिर ऐसा कर क्यों रहा है? ऑक्टोहैड की पूजा तो हम सबको मिलकर करनी चाहिए।


जॉन(गहरी सांस लेकर)- जैसा कि तुम्हे पता है कि ब्लैक हुड के मुखिया की मृत्यु होने पर मुखिया के पद के लिए सबसे काबिल सदस्यों के बीच जंग होती है। ये पद हमेशा से मेरे परिवार के पास ही रहा है क्योंकि तंत्र मंत्र और telekinesis में हमसे अच्छा ज्ञाता कोई नहीं है। जब पिताजी की मृत्यु हुई तो मैं भी ग्रुप के हर शक्तिशाली सदस्य से लड़कर जीता लेकिन मुझे बराबर की चुनौती अगर किसी से मिली तो मेरे खुद के भाई से, हेनरी से। लेकिन जब लंबे समय तक लड़ते रहने के बावजूद भी हमारे बीच कोई हल न निकला तो ग्रुप के लोगों के बीच मतदान करवाया गया, उसमे भी 75% मत मुझे ही मिला लेकिन हेनरी को ये गंवारा नहीं हुआ और वो अपने 25% समर्थक लेकर इस ग्रुप से अलग हो गया और cultists दो भागों में बंट गए…ब्लैक हुड और रेड हुड।


सारा- एक मिनट! मुझे तो लगता था कि रेड हुड और ब्लैक हुड दोनो का उद्गम एक साथ हुआ है।


जॉन- नहीं प्रिये, ब्लैक हुड की स्थापना मेरे पूर्वज चार्ली नाम के  नाविक ने 1000 वर्ष पहले की थी जबकि रेड हुड 6 साल पहले मेरे छोटे भाई हेनरी ने बनाया। तुमको इसलिए नहीं पता क्योंकि तुम शुरू से हमारे साथ नहीं थीं, बाद में आई हो।

सिद्धार्थ- तो..आपको लगता है कि रेड हुड के लोगों ने रमेश को मारा है?

जॉन- हेनरी से इस बारे में बात करनी होगी।

सारा- तुम अकेले उससे मिलने नहीं जाओगे जॉन। सिद्धार्थ को भी साथ ले लो।

सिद्धार्थ- जी सर। मैं भी चलूंगा आपके साथ।


जॉन- ठीक है, अगर तुम लोग इतना ज़ोर दे ही रहे हो तो चलो तुम मेरे साथ।

जंगल के एक सुनसान इलाके में सन्नाटे को चीरती हुई सफेद रंग और काले रंग की गाड़ियां आमने सामने जा खड़ी हुईं। काले रंग की गाड़ी से जॉन और सिद्धार्थ निकले और सफेद रंग की गाड़ी से हेनरी, जो की सिद्धार्थ की ही उम्र का था, बाहर आया।

हेनरी- बहुत दिनों बाद मिले बड़े भाई।


जॉन- तुमने ऐसा क्यों किया हेनरी? रमेश को क्यों मारा?


हेनरी(हतप्रभ होकर)- क्या? मैंने किसी को नहीं मारा!


जॉन(क्रोध में)- बहुत हुआ! पहले तुम्हारे लोगों ने कब्रिस्तान में आखिरी कुर्बानी होने नहीं दी, फिर तुम्हारी वजह से मेरा एक आदमी विक्रांत अभी पुलिस कस्टडी में है और अब ये कत्ल!


हेनरी- वो आखिरी कुर्बानी जिसकी तुम बात कर रहे हो, वो मेरा ही आदमी था….पुलकित।


जॉन- क्या?


हेनरी- हाँ , दरअसल लगातार हो रहे हाई प्रोफाइल लोगों के अपहरण और हत्याओं से पुलिस ने हर जगह कड़ी घेराबंदी कर रखी थी इसलिए मैंने पुलकित से अपने किसी जान पहचान वाले को कुर्बानी के लिए लाने के लिए कहा, उसकी मौत से इतना हल्ला भी नहीं मचता। लेकिन मेरे कुछ करने से पहले तुम्हारे आदमी विक्रांत ने जाकर इन दोनों को पकड़ लिया, रोहित को तो उसने मार दिया लेकिन पुलकित को कुछ करने से पहले ही हमने उसे रोक दिया।


जॉन- तो तुमको पता कैसे चला कि विक्रांत ने रोहित और पुलकित को कहां रखा हुआ है?


हेनरी- विक्रांत की बीवी नंदिता हमारे रेड हुड की मेंबर है।


जॉन- क्या? इसका मतलब तुम्हें नंदिता के जरिये विक्रांत की और हमारी सारी गुप्त खबरें मिलती थीं।


हेनरी- सारी तो नहीं लेकिन थोड़ा बहुत तो पता चल ही जाता था, जब विक्रांत का अचानक भारत आने का प्लान बना तभी नंदिता ने हमको सतर्क कर दिया था। उसने विक्रांत से शादी ही इसलिए कि थी कि ब्लैक हुड पर नज़र रख सके, उसे कॉलेज में रोहित से प्यार था लेकिन हम लोगों के बहुत समझाने पर उसे समझ मे आया कि विक्रांत से उसका शादी करना कितना जरूरी है। जहां तक बात है तुम्हारे पुलिस की, तो तुम्हारा आदमी विक्रांत अपनी मूर्खता की वजह से पकड़ा गया।


जॉन- लेकिन अगर तुमने रमेश को नहीं मारा? तो कौन हो सकता है?

तभी अचानक हेनरी का फोन बजा, उसने फोन उठाया लेकिन कुछ सुनने के बाद एकदम हैरान रह गया।

जॉन- क्या हुआ?


हेनरी- मेरे दो लोगों को किसी ने एक पेड़ पर फांसी से टांग दिया।


जॉन- ये सब आखिर हो क्या रहा है? हम cultists हैं, हमें मारने की हिम्मत किसमे आ गयी? वो भी इतना चोरी छिपे?


हेनरी- लोगों को मारते वक्त कभी ये ख्याल आया ही नहीं कि हम भी मारे जा सकते हैं।


जॉन- ये जो कोई भी है, इसे अपने किये की भारी कीमत चुकानी होगी।


हेनरी- अभी मैं चलता हूँ, कुछ होगा तो खबर कर दूंगा।


जॉन- ठीक है।

हेनरी अपनी सफेद गाड़ी में बैठकर निकल गया, जॉन भी अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ा ही था कि तभी उसने देखा कि एक तेज़ धार वाला चाकू असावधान सिद्धार्थ की ओर बढ़ा, जॉन ने तुरंत अपने हाथ को उठाया और telekinesis द्वारा चाकू को हवा में ही रोक दिया। फिर जॉन और हेनरी दौड़कर उस दिशा में गए जहां से चाकू चला था लेकिन कुछ हाथ न लगा। वे वापिस गाड़ी के पास आ गए।

जॉन- तुम ठीक हो न लड़के?

सिद्धार्थ- ज..जी। ये चाकू में क्या लगा है?

तब जॉन का ध्यान गया कि चाकू में एक कागज का टुकड़ा लगा हुआ था , उसने चाकू उठाकर वो कागज़ का  टुकड़ा उठाया, उसपर लिखा था ” दो घंटे में पन्नालाल रेस्टॉरेंट आ जाओ, जिसे तुम ढूंढ रहे हो वो मैं ही हूँ।” ये पढ़ते ही जॉन की आंखें क्रोध से सुर्ख लाल हो गईं।

सिद्धार्थ- क्या हुआ?

जॉन- उसकी इतनी हिम्मत? मेरे लोगों को मारकर मुझे ही रेस्टॉरेंट बुलाता है।

सिद्धार्थ- कौन है ये?


जॉन- वही। ब्लैक हुड और रेड हुड के लोगों का रहस्यमयी कातिल।


सिद्धार्थ- मैं चलता हूँ आपके साथ।


जॉन- नहीं तुम वापिस जाओ, मुझे अकेले ही जाना होगा।


सिद्धार्थ- सर अगर आप मेरी मानें तो…


जॉन- मुझे कुछ भी नहीं होगा, तुम जाओ।

सिद्धार्थ चला गया और जॉन गाड़ी लेकर पन्नालाल रेस्टॉरेंट की तरफ निकल गया। जॉन ने पन्नालाल पहुंचकर गाड़ी पार्क की और बाहर निकल आया, वो रेस्टॉरेंट के अंदर पहुंचकर इधर उधर देख ही रहा था कि तभी एक 20-25 वर्ष के लड़के ने उसकी तरफ देखकर हाथ हिलाया, जॉन उस तरफ गया। जल्द ही वे दोनों आमने सामने बैठे थे। लड़का बड़ी स्टाइल से काला चश्मा लगाकर और जैकेट पहनकर बैठा था।

सार्थक(मजाकिया अंदाज में)- बड़ी ठंड है मनाली में , है ना?

जॉन- तो cultists के मर्डर के पीछे तुम हो?


सार्थक- हाँ, मैं ही हूँ।


जॉन(अविश्वसनीयता से)- यकीन नहीं होता कि एक बच्चा इतने काबिल लोगों को मार सकता है जो काले जादू और telekinesis में विशेषज्ञ थे।


सार्थक(मुस्कुराकर)- दाढ़ी बढ़िया रखी है तुमने।


जॉन- तुझे डर नहीं लग रहा लड़के?


सार्थक- मुझे भला क्यों लगेगा डर?


जॉन(मुट्ठी भींचकर)- क्योंकि तूने मेरे लोगों को मारा है और मैं तुझे छोड़ने वाला नहीं हूं।


सार्थक- और मुझे मारोगे कैसे? अपने काले जादू से या telekinesis से? क्योंकि मुझ पर दोनो ही असर नहीं करते।


जॉन(आश्चर्य से)- तुम हो कौन?


सार्थक- मेरा नाम सार्थक है, और इससे ज़्यादा तुम्हे बस ये जानने की आवश्यकता है कि तुम लोग अपने अंत के लिए तैयार रहो।


जॉन- लेकिन क्यों? क्यों मार रहे हो तुम मेरे लोगों को?


सार्थक- हा हा हा….देखो पूछ भी कौन रहा है? उस कल्ट का मुखिया जो 1000 वर्षों से हर दो वर्ष के भीतर 60 लोगों की बलि दे रहा है।


जॉन- ये..ये जानकारी तुझे कैसे मिली?


सार्थक- मैंने भी अपनी रिसर्च की है ब्लैक हुड पर, खैर जो मेरी समझ मे नहीं आया वो यह कि आखिर ऐसा क्या हुआ 1000 साल पहले जो इस कल्ट की स्थापना की गई?

जॉन- मैं तुमको कुछ भी नहीं बताने वाला।

सार्थक- देखो मुझ पर काला जादू टोना तो असर करता नहीं इसलिए तुमको चुनना है ,या तो अपना राज़ छिपा लो या यहां से जिंदा निकल जाओ क्योंकि यकीन मानो, मुझे इस बात की फिक्र नहीं कि कितने लोग यहां बैठे हैं।


जॉन(कुछ सोचकर)- ठीक है, वैसे भी तुमको बताने में कोई हानि नहीं है। 1000 साल पहले व्यापारियों का एक दल नाव से प्रशांत महासागर पार करने का प्रयास कर रहा था, कि तभी अचानक बहुत भयंकर आंधी तूफान शुरू हो गया। दो तीन लोगों पर तो बिजली गिर पड़ी इस कारण बाकी लोग घबराकर समुद्र में कूद पड़े लेकिन तेज़ हवाओं में उन्हें भीतर डुबा दिया। उनमे से एक नाविक था चार्ली वो भी समुद्र तल की गहराइयों में चला गया था कि तभी उसने तल के पास एक बहुत बड़े से प्राणी को देखा, पहली नज़र में तो उसे लगा कि व्हेल मछली होगी लेकिन गौर करने पर पता लगा कि उस प्राणी का आकार व्हेल से बेहद अलग था। तभी चार्ली के दिमाग मे एक आवाज़ गूंजी “मनुष्य! मैं ऑक्टोहैड हूँ!”

चार्ली ने घबराकर पूछा “क.. कौन हो तुम?” उस आवाज़ ने फिर कहा ” घबराओ मत! मैं तुमको हानि नहीं पहुंचाऊंगा, मैं कई लाख वर्षों से समुद्रतल की गहराइयों में कैद हूँ। यहां मुझे देवताओं ने कैद किया है। तुम्ही पहले व्यक्ति हो जिसने मुझे साकार रूप में देखा है।” चार्ली बेहद घबराकर बोला “मेरे दिमाग से निकल जाओ!” तो ऑक्टोहैड बोला ” घबराओ मत मनुष्य! तुम्हें क्या लगता है कि तुम किस वजह से इतनी गहराई में भी सांस ले पा रहे हो और पानी का दबाव तुमको मार नहीं रहा क्योंकि मैंने तुमको बचाया है।” फिर चार्ली थोड़ा शांत हुआ और पूछा” लेकिन आपने मेरी जान बचाई क्यों?” इसपर ऑक्टोहैड बोला ” क्योंकि स्वतंत्र होने के लिए मुझे तुम्हारी आवश्यकता है। यदि तुम बाहरी दुनिया मे जाकर कुछ विशेष लोगों का समूह बनाओ और हर दो वर्ष के भीतर 60 लोगों की बलि दो तो 1000 वर्षों में मैं स्वतंत्र हो सकता हूँ। मेरी शरण मे आओगे तो सामान्य व्यक्ति से अधिक जियोगे, और तुमको तरह तरह की शक्तियां भी दूंगा।” तभी समुद्र में एक पुस्तक प्रकट हुई, वो थी ‘काले जादू की किताब’ , उसे ऑक्टोहैड ने स्वयं अपने अनुभवों के आधार पर बनाया था। उसने उस पुस्तक को चार्ली को सौंप दिया ताकि वो उसमे से काले जादू को सिध्द कर सके। चार्ली ने बाहर निकलकर ऐसे लोगों को ढूंढा जो ईश्वर से असंतुष्ट और नाराज़ थे और उनको अपने कल्ट में शामिल किया। उनका निशाना मुख्य रूप से वे लोग रहे जो धार्मिक क्रियाकलापों में लगे रहते थे जैसे कि पंडित, पादरी, मौलवी इत्यादि ताकि लोगों में वे एक डर बिठा सकें कि उनका भगवान भी उनको नहीं बचा सकता। जब कल्ट के लोग मर जाते तो उनके बच्चे उनकी जगह ले लेते ,साथ ही नए लोग भी शामिल हो जाते। मुखिया की मृत्यु पर सबसे काबिल लोगों में जंग होती जिससे कल्ट का मुखिया चुना जाता। अब इसे संयोग ही कहो, चार्ली के वंशजों ने ही हमेशा खुद को साबित करके कल्ट की सत्ता को अपने हाथों में रखा।

सार्थक- और..अब 1000 साल पूरे होने को हैं।

जॉन- हाँ, इन दो सालों में हम लोगों ने 59 कुर्बानी दी दी हैं, एक आखिरी कुर्बानी और, फिर हमारा मसीहा आज़ाद होगा समुद्र की गहराइयों से।

सार्थक- अब ऐसा कुछ भी नहीं होगा।

जॉन- तुम हमको नहीं रोक पाओगे।

सार्थक- दरअसल मैं रोक सकता हूँ, रेड हुड और ब्लैक हुड दोनो को रोक सकता हूँ। ऑक्टोहैड कभी समुद्र से बाहर नहीं आएगा, लेकिन फिलहाल तुमको छोड़ रहा हूँ क्योंकि मैंने वादा किया था कि अगर तुम मुझे कुछ जानकारी दोगे तो मैं तुमको छोड़ दूंगा। इस घटना से ऐसा मत सोच लेना कि तुम्हारी किस्मत हर बार तुम्हारा साथ देगी।

इतना कहकर सार्थक रेस्टॉरेंट से तेज़ी से बाहर निकल गया लेकिन जॉन वहीं टेबल पर बैठा हुआ था। वह अपने जीवन में पहली बार डर महसूस कर रहा था , वही डर जो cultists की वजह से मनाली के लोगों में व्याप्त था।

अध्याय 4- Henry 

जॉन 10 मिनट से पन्नालाल रेस्टॉरेंट की टेबल पर बैठा कुछ सोच रहा था, उसने फिर जेब से अपना मोबाइल निकालकर अपने किसी आदमी को कॉल किया।

जॉन- हाँ एक 20-25 साल का लड़का है, हाँ पीछा करो उसका, वो अभी पन्नालाल रेस्टॉरेंट से बाहर निकला है। काले रंग का चश्मा और जैकेट पहना हुआ है, देखो वो कहाँ जाता है। बस उसको तुम्हारी भनक भी नहीं लगनी चाहिए।

विक्रांत और शमशेर एक अंधेरे लॉकअप में केवल धीमी बल्ब की रोशनी में लकड़ी की टेबल के आमने सामने बैठे हुए थे, विक्रांत के हाथ पीछे हथकड़ी से बंधे थे और उसके चेहरे पर पिछली लड़ाई के बाद चोटों के हल्के निशान थे। उस लॉकअप में मौत जैसा सन्नाटा था जिसे इंस्पेक्टर शमशेर की आवाज़ ने भंग किया।

शमशेर- मैंने हर एक पुलिसवाले को तुम्हारी सेल से दूर रहने को कहा है ताकि मैं तुमसे अकेले में पूछताछ कर सकूं।

विक्रांत- तुम्हारे पिता हममें से एक थे, तुमने उनकी विरासत को शर्मसार किया है।


शमशेर- मैं अपना पिता नही हूँ, तुममें से एक भी नहीं हूं। बस मुझे अपने मुखिया के गुप्त अड्डे का पता बता दो।


विक्रांत(कुटिल मुस्कुराहट के साथ)- तुम उसे कभी ढूंढ नहीं पाओगे, एक आखिरी कुर्बानी और फिर ऑक्टोहैड को स्वतंत्र करा देंगे हम लोग।


शमशेर- तुम अंधविश्वासी लोगों से तंग आ गया हूँ मैं, तुम लोग मानसिक रूप से विक्षिप्त हो।


विक्रांत- यानी कि तुम्हें लगता है कि ऑक्टोहैड सिर्फ एक मिथ्या रचना है? काश की मेरे हाथ इस वक्त खुले होते ताकि मैं telekinesis करके तुम्हारी खोपड़ी खोल देता।


शमशेर- मुझे यकीन है तुम ये जो telekinesis करते हो, इसके पीछे भी अवश्य ही कोई वैज्ञानिक कारण होगा।


विक्रांत- गलत इंस्पेक्टर, हमारे देवता ने हमें ये शक्ति दी है।


शमशेर- यानी ऑक्टोहैड ने? वो इतना ही शक्तिशाली है तो अपनी कैद से खुद ही आज़ाद क्यों नहीं हो जाता?

उसे तुम लोगों की आवश्यकता क्यों है?

विक्रांत- चाहे कोई भी आराध्य देव हो, उसे अपने भक्तों की शक्ति की आवश्यकता होती ही है जैसे तुम्हारे ईश्वर को तुम्हारी भक्ति की आवश्यकता है वैसे ही हमारे ईश्वर को हमारी भक्ति की आवश्यकता है। ऑक्टोहैड को आत्माओं की शक्ति चाहिए जिससे वो अपने बंधनों से आजाद हो सके, बस एक इंसानी रूह और हमारा देवता समुद्र से बाहर धरातल पर आ जाएगा। 1000 वर्षों की तपस्या अब रंग लाएगी।

सार्थक एक सुनसान रास्ते पर अकेला चलता हुआ जा रहा था कि तभी उसे अपने पीछे कुछ हलचल सुनाई दी। उसने पीछे मुड़कर देखा तो कोई नहीं था, वो थोड़ा सा मुस्कुराया और तेज़ आवाज़ में बोला “ऐसे कायरों की तरह छुपने का कोई फायदा नहीं। मैं जानता हूँ कि तुम लोग मेरा पीछा कर रहे हो।” उसके इतना बोलते ही 6 लोग लंबे काले चोगे और काले नकाब में झाड़ से निकलकर उसके सामने आ गए, उनमे से एक बोला “वैसे तो हमें कहा गया था कि सिर्फ चुपचाप तेरा पीछा करें लेकिन अगर इस सुनसान इलाके में तुझे मार भी दें तो शायद मुखिया बुरा नहीं मानेंगे। उनको रेस्टॉरेंट में बुलाकर धमकाना तेरी ज़िंदगी की आखिरी गलती थी लड़के।”

सार्थक- और इस तरह मेरे सामने आना तुम सबकी ज़िंदगी की आखिरी गलती है।

उन छह लोगों ने सार्थक को गोला बनाकर घेर लिया, उनमे से एक व्यक्ति धारदार कुल्हाड़ी लेकर सार्थक को मारने के लिए आगे आया लेकिन सार्थक ने तेज़ी से उसके हाथों को पकड़ा और उसके धड़ से अलग कर दिया। बाकी सबकी आंखें ये दृश्य देखकर फटी की फटी रह गईं। ये देखकर एक cultist दूसरे से बोला “ये आखिर है कौन? धरती पर कोई भी सामान्य व्यक्ति हमसे इस प्रकार से नहीं लड़ सकता।” इस पर दूसरा cultist बोला “इस पर telekinesis का प्रयोग करके देखो।” इस पर सभी cultists ने अपना हाथ एक विशेष मुद्रा में घुमाया, इस दौरान सार्थक ने कुछ नहीं किया, वो बस खड़े खड़े मुस्कुरा रहा था। ये देखकर सभी cultists सकते में आ गए, उनमे से एक घबराई से आवाज़ में बोला “ये तो हमारी शक्तियों का भी विरोध कर रहा है।” तभी सार्थक ने तेज़ी से घूमकर एक cultist के सीने को हाथ डालकर फाड़ दिया, ये देखकर बाकी सब के पैर उखड़ गए। वे तेज़ी से भागने लगे, उनमे से एक ने डरकर कहा ” ये मनुष्य तो नहीं है। हमें भागकर मुखिया जी को इस बारे में खबर करनी होगी।” लेकिन सार्थक ने आगे से जाकर उनका रास्ता रोक लिया, बस फिर 5 मिनट बाद सभी cultists की लाश सड़क पर पड़ी हुई थी और सार्थक खून सने हाथ लेकर खड़ा हुआ था।

सार्थक- हम्मफ़…जिन्हें लोगों को लाश बनाने का शौक था, आज वे खुद लाश बन गए।

फिर सार्थक वापिस अपने रास्ते पर किसी सामान्य नागरिक की तरह चल दिया, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मनाली की खूबसूरत वादियों के में एक छोटा सा घर बना हुआ था, उस घर की दीवारें सफेद थी और दरवाज़ा गोलाकार था, साथ मे एक डोरबेल लगी थी जिसे दबाने पर घंटियों की आवाज़ आती थी। सार्थक ने डोरबेल बजायी, दरवाज़ा खोलने वाला एक 50-55 वर्ष का व्यक्ति जो अपने उम्र के हिसाब से काफी तंदुरुस्त था, बाल हल्के सफेद थे लेकिन चेहरा क्लीन शेव था।उसने टीशर्ट के ऊपर हॉफ जैकेट और जीन्स पहना हुआ था।

सार्थक- cultists ने मुझ ही पर हमला कर दिया ऋषि जी।

ऋषि- हा हा..फिर तो मैं ये समझूँ कि ये उनकी आखिरी गलती थी।

सार्थक- सही कहा।

ऋषि- आओ जल्दी अंदर आओ।

सार्थक- अरे! बाकी सब लोग कहाँ गए?


ऋषि- पता नहीं, अरुण ने कहा था कि सब आधी रात तक वापिस आ जाएंगे। हमें हथियारों का इंतज़ाम भी तो करना है।


सार्थक- अच्छी बात है। वैसे भी ज़्यादा समय नहीं बचा है, अगर cultists आखिरी कुर्बानी देने में सफल हो गए तो अनर्थ हो जाएगा।


ऋषि- अब उनके लिए किसी को मारना इतना आसान नहीं होगा, अब तो इंस्पेक्टर शमशेर और उसकी पुलिस फ़ोर्स भी उनके पीछे है।


सार्थक- हाँ लेकिन क्या शमशेर पर भरोसा किया जा सकता है? उसके पिता भी तो उन्हीं में से एक थे।


ऋषि- हम लोगों ने उसके बारे में पूरी रिसर्च की है, अगर उसके cultist बनने की कोई भी संभावना होती तो पता तो लग ही जाता।


सार्थक- फिर भी, हमें शमशेर को अपनी टीम में शामिल करने के बारे में सोचना होगा।


ऋषि- शमशेर के पास पुलिस फ़ोर्स है सार्थक, हमारी टीम के लिए वो मूल्यवान साबित होगा।

सार्थक ने धड़ाम से पास पड़े सोफे पर बैठकर एक लंबी सांस ली।

सार्थक- मैं क्या कर रहा हूँ ऋषि जी? लोगों को मारना मेरा काम नहीं है।


ऋषि- हममें से कोई किसी की जान नहीं लेना चाहता लेकिन उन लोगों को ज़िंदा छोड़ना कितना खतरनाक है इसका अंदेशा हम सबको है।


सार्थक- मुझे शमशेर से बात करनी होगी, अपने बारे में बताना होगा।


ऋषि- क्या वो तुम्हारी बात मानेगा?


सार्थक- इतना सब कुछ घटने के बाद उसे मानना पड़ेगा।

सार्थक सोफे से उठकर वापिस घर से निकल गया।
इंस्पेक्टर शमशेर अभी भी विक्रांत से पूछताछ  कर रहा था।

शमशेर- रोहित को क्यों मारा?

विक्रांत- तुम्हें उसकी, मेरी और नंदिता की कहानी पता है इंस्पेक्टर। अपनी बीवी के पहले प्रेमी को मैं ज़िंदा नहीं छोड़ता।

तभी अचानक टेबल के पास लगा धीमी रोशनी का बल्ब जलने बुझने लगा। शमशेर ने तेज़ आवाज़ में बोला “रामदास! बल्ब क्यों नहीं काम कर रहा?” रामदास की तरफ से शमशेर को कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, शमशेर अपनी कुर्सी से उठकर इस अंधेरे लॉकअप से बाहर आया, उसने कुछ ऐसा देखा कि उसे बड़ा झटका लगा। उसके सारे साथी मरे पड़े थे, किसी की आंखें बाहर निकली हुई थीं , किसी की अंतड़ियां पेट के बाहर झांक रहीं थीं, किसी की गर्दन फटी हुई थी और हड्डियां साफ दिख रही थीं। ये शमशेर के पूरे जीवन का सबसे वीभत्स दृश्य था, उसने लाशों को पार किया तो देखा कि सामने लाल चोगे वाले लाल नकाब पहने चार लोग खड़े थे। उनमें से एक ने अपना नकाब निकाला, वो जॉन का छोटा भाई हेनरी था। शमशेर ने बिना कुछ सोचे तुरंत बंदूक निकाली लेकिन हेनरी ने अपने हाथ को हवा में हल्का से झटका दिया जिससे उसकी बंदूक हाथ से छूटकर दूर जा गिरी।

शमशेर- तुमने मेरे सभी साथियों को मार डाला दरिंदों!

हेनरी- लेकिन तुम्हारा सौभाग्य है कि तुम जीवित हो, वो भी शायद इसलिए कि तुम भी एक cultist हो, भले ही तुमने अपने लिए एक अलग मार्ग चुन लिया हो। आज नहीं तो कल तुम्हारी अक्ल ठिकाने आ ही जाएगी जब तुम दुनिया को हमारी मुट्ठी में देखोगे।

शमशेर- क्या चाहते हो तुम लोग?


हेनरी- उस ब्लैक हुड वाले को हमारे हवाले कर दो।


शमशेर- तुम लोगों ने तो आज तक कभी दिन दहाड़े हमला नहीं किया?


हेनरी- कभी कभी कुछ नया ट्राई कर लेना चाहिए वरना जीवन नीरस हो जाता है।


शमशेर- पर तुमको विक्रांत क्यों चाहिए? वो तो ब्लैक हुड का सदस्य है।


हेनरी- वो एक cultist है, बस इस वक्त यही मायने रखता है। मेरे संबंध मेरे भाई से इतने भी खराब नहीं कि मैं उसके लोगों को तुम्हारे पास सड़ने दूं। वैसे भी, अब ऑक्टोहैड कुछ ही समय मे धरती पर होंगे तब इस कल्ट की कोई आवश्यकता ही नहीं होगी। क्या ब्लैक हुड और क्या रेड हुड, पूरी दुनिया मे सिर्फ cultists ही होंगे, पूरा संसार सिर्फ ऑक्टोहैड को पूजेगा।


शमशेर- मेरे लोगों की मौत का खामियाजा भुगतना होगा तुम्हें।


हेनरी- लगता है कि मुझे तुमको भी खत्म करना होगा, दुनिया से एक cultist कम हो जाएगा लेकिन ये अभी मायने नहीं रखता।

हेनरी में कुछ करने के लिए अपना हाथ हवा में उठाया लेकिन अचानक एक टेबल उड़ती हुई उसकी तरफ आयी लेकिन हेनरी ने सही समय पर ध्यान देकर telekinesis द्वारा टेबल के टुकड़े टुकड़े कर दिए।
सभी लोगों को ध्यान टेबल फेंकने वाले पर गया….सामने सार्थक खड़ा था।

सार्थक- हर बार telekinesis काम नहीं आएगी।

हेनरी(आश्चर्य और क्रोध से )- तू कौन है?

सार्थक- मेरे बारे में सोचने के लिए तुम लोग ज़िंदा नहीं रहोगे।


हेनरी(चिल्लाकर)- इस लड़के और इंस्पेक्टर को पकड़ो!

Cultists दौड़कर सार्थक को पकड़ने के लिए गए लेकिन सार्थक के एक जोरदार झापड़ से एक cultist की खोपड़ी “चटक” की आवाज़ से मुड़ी और वो धरती पर गिर गया। दूसरे cultist ने सार्थक के शरीर पर telekinesis करके फाड़ने का प्रयास किया लेकिन सार्थक पर कोई असर नहीं हुआ, ये देखकर हेनरी और इंस्पेक्टर दोनो बेहद आश्चर्यचकित हुए। सार्थक उस दूसरे cultist की तरफ बढ़ा और उसकी गर्दन को पकड़ लिया , उसे छुड़ाने एक और cultist आया तो उसकी भी गर्दन सार्थक की गिरफ्त में थी। एक साथ गर्दन चटकने की दो आवाज़ें आईं। अब सिर्फ हेनरी बचा हुआ था, उसने तुरंत शमशेर की बंदूक को telekinesis द्वारा अपने हाथ मे लिया और तुरंत सार्थक पर दो तीन गोलियां दाग दीं। सारी गोलियां सार्थक के शरीर से टकरायीं और नीचे गिर गईं, हेनरी की आँखें फटी की फटी रह गईं।

हेनरी- तुम कोई इंसान नहीं हो, कौन हो तुम?


सार्थक- कोई ऐसा जिसके लिए इंसानी जानें मायने रखती हैं लेकिन तुम जैसे जानवरों को मारने के ये मजबूर है ताकि ऐसा हत्याकांड दोबारा घटित न हो।

सार्थक हेनरी के पास गया और उसे अपने दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर हवा में उठा लिया और फिर सामने की दीवार में दे मारा, हेनरी का शरीर इतना तेज इम्पैक्ट झेल नहीं पाया और उसके शरीर ने प्राण त्याग दिए। फिर सार्थक ने शमशेर की बंदूक उठाई और विक्रांत की सेल की तरफ बढ़ा, शमशेर उसे रोकने की हालत में तो बिल्कुल नहीं था। फिर उस अंधेरे कारावास से गोलियां चलने की कुछ आवाज़ें आईं और विक्रांत का शरीर शांत पड़ गया।

सार्थक- आइए इंस्पेक्टर। मेरे साथ चलिए।

शमशेर- रुको! कौन हो तुम? और ये सब कैसे किया तुमने?

सार्थक- मैं आपको सबकुछ बता सकता हूँ लेकिन रास्ते मे। थोड़ी ही देर में ये इलाका इन लोगो से भर जाएगा और मैं फिर शायद आपको न बचा पाऊँ।

शमशेर फिर बिना कोई न नुकुर किये हुए, सार्थक के साथ चल दिया। तेज़ बारिश हो रही थी, अपनी दो मंजिला इमारत के बाहर जॉन हाथ फैलाये बारिश में खड़ा था। इस बारिश या कड़कड़ाती बिजली का उसपर कोई असर नहीं पड़ा था, तभी सारा ने दरवाज़े से आवाज़ लगाई।

सारा- क्या कर रहे हो जॉन? अंदर आ जाओ।

जॉन मुड़ा, तो सारा ने महसूस किया कि उसकी आखों में एक सूनापन था और बहुत सारा दुख। सारा खुद बारिश में निकल आयी, वो धीरे धीरे जॉन के पास तक आयी, उसे भी किसी अनिष्ट की आशंका हो रही थी।

सारा- क्या हुआ जॉन?
जॉन- वो मर गया सारा….उसने मेरे भाई को मार दिया। 

अध्याय 5- Formation 

सार्थक और शमशेर पुलिस जीप में काफी दूर निकल आये थे।

शमशेर- तुम मुझे लेकर जा कहाँ रहे हो?

सार्थक- किसी सुरक्षित स्थान पर, ब्लैक हुड को अब तक इन सबकी मृत्यु का पता चल गया होगा, वो तुम्हारे पीछे आएंगे।

शमशेर- मुझे अभी भी नहीं समझ आ रहा की तुम पर उनके काले जादू का असर क्यों नहीं हुआ? आखिर तुम हो क्या चीज़?

सार्थक- फिलहाल हम समय व्यर्थ नहीं कर सकते, मैं सही समय आने पर आपको सब कुछ बता दूंगा। हम उनको आखिरी कुर्बानी लेने में कामयाब नहीं होने दे सकते, वरना ऑक्टोहैड जाग जाएगा।

शमशेर- एक मिनट रुको! तुम्हें उस ऑक्टोहैड के अस्तित्व पर विश्वास है?


सार्थक- हाँ ,बिल्कुल है।


शमशेर- यह सब बस बकवास है! मेरे पिता भी इन अंधविश्वासियों में से एक थे।


सार्थक- अच्छा? तो ज़रा बताना की ये लोग हाथ बिना लगाए चीज़ें कैसे हिला देते हैं?


शमशेर- इसका भी कोई न कोई कारण ज़रूर होगा, कोई ठोस कारण।


सार्थक- कारण है ना! ऑक्टोहैड का शरीर ज़रूर समुद्र में बंधा हुआ है लेकिन वो मानसिक तरंगे भेजकर इन सबको इस तरह की शक्तियां प्रदान करता है। वो इनसे ये शक्तियां ले भी सकता है और इन्हें अधिक शक्तिशाली भी बना सकता है इसलिए बोल रहा हूँ कि अगर आखिरी कुर्बानी दी गयी तो हम सब खत्म हो जाएंगे।


शमशेर- आखिरी कुर्बानी? अभी अभी उन्होंने थाने में घुसकर इतने लोगों को मार दिया, क्या ये काफी नहीं है?


सार्थक- नहीं, कुर्बानी के लिए इन्हें रिवाज के अनुसार चलना पड़ता है। व्यक्ति को लोहे की जंजीर से बांधकर आग में जिंदा जलाना पड़ता है, तभी कुर्बानी मान्य होती है।


शमशेर- ऐसा क्यों?


सार्थक- पता नहीं। शायद इस तरह से मानव की आत्मा ज़्यादा समय तक इस लोक में , इस plane of existence पर बनी रहती है और ऑक्टोहैड को आज़ाद होने के लिए आत्मा की ऊर्जा ही चाहिए।


शमशेर- ओह, इसलिए रोहित की लाश जली हुई मिली थी।


सार्थक- हाँ,और अब आखिरी कुर्बानी हुई तो उनका ईश्वर जाग जाएगा। लो बातों बातों में हम पहुंच भी गए।


शमशेर- कहाँ?


सार्थक- वहां जहां cultists से भिड़ने वाले मौजूद हैं।

सार्थक और शमशेर जीप से निकलकर घर के अंदर पहुंचे जहां ऋषि पहले से ही 28-30 साल के दो व्यक्तियों अरुण और संजीव के साथ बैठे थे। अरुण एक दुबला पतला गंजा लड़का था और संजीव शमशेर की तरह ही घनी मूंछों और रौबीले व्यक्तित्व का मालिक था।

सार्थक- क्या हाल है संजीव? बहुत समय बाद दिखे?

संजीव- तुम भी तो इतने समय बाद दिखे भाई।


सार्थक- और अरुण भाई, ऋषि जी ने तो कहा था कि आप आधी रात में आएंगे?


अरुण- आधी रात तक का वक्त अब नहीं है हमारे पास। वैसे भी जो चाहिए था वो तो मिल ही गया, हथियारों का
जखीरा है हमारे पास।


शमशेर- ये सब चल क्या रहा है? कौन हैं आप लोग?


ऋषि- एक कुर्सी लेकर बैठ जाओ आराम से, हम तुमको सब बताएंगे।

शमशेर ने अपने पीछे पड़ी कुर्सी खींच ली और उसपर बैठ गया। सभी उसे काफी गौर से देख रहे थे। उस कुछ पल अजीब सी शांति में सिर्फ घड़ी की टिक टिक सुनाई दे रही थी। ऋषि ने सबसे पहले चुप्पी तोड़ी।

ऋषि- मेरा नाम ऋषि है, बाकी दोनो लोग अरुण और संजीव हैं। सार्थक से तो तुम मिल ही चुके हो। हम सभी ने कहीं न कहीं cultists के कारण अपनों को खोया है, मेरी बीवी और भाई को उन्होंने बड़ी ही क्रूरता से मार दिया।


अरुण- मेरे पूरे परिवार को ही cultists ने मार दिया, बीवी ,बच्चे, माँ, बाप सबको। तबसे मेरे जीवन का एकमात्र ध्येय ही इनको खत्म करना है।


संजीव- मेरी बहन इनका शिकार बनी, मैं एक नास्तिक था और भूत प्रेत या किसी और तरह की पैरानॉर्मल क्रियाओं में विश्वास नहीं करता था, लेकिन जब मैंने नेट पर लोगों के ब्लॉग्स पढ़े, तब मुझे पता चला कि इनका शिकार कितने लोग हुए हैं। सौभाग्यवश मैं ऋषि जी और अरुण से भी नेट के कारण ही मिला, पहले तो मुझे लगा था कि ये लोग पैसे के लिए ऐसा कर रहे हैं लेकिन मुझे भी ऑक्टोहैड के अस्तित्व वाली कहानी को स्वीकारने में थोड़ा समय लगा क्योंकि ये लोग बड़ी ही सफाई से अपना काम करते हैं, इनके अस्तित्व को आज भी कई लोग मनगढंत कहानी बताते हैं लेकिन सच्चाई क्या है वो हम सब जानते हैं।

शमशेर- आप सबकी कहानी सुनकर दुख हुआ मुझे लेकिन सार्थक कौन है? या सही सवाल शायद ये हो कि सार्थक “क्या” है?

ऋषि- दरअसल मेरा भाई महावीर एक बायो इंजीनियरिंग में महारत वाला वैज्ञानिक था जो कि किसी गुप्त आर्गेनाईजेशन के लिए काम करता था, वो आर्गेनाइजेशन पता नहीं कैसे महावीर को इतने पैसे और संसाधन मुहैया करा देती थी कि उसकी रिसर्च में किसी प्रकार की बाधा नहीं आ पाए।


शमशेर- किस प्रकार की रिसर्च?

ऋषि- Artificial meta-humans यानी कि कृत्रिम महामानवों पर रिसर्च। ये तब की बात है जब हमारी पूरी फैमिली अमेरिका में रहती थी मतलब मैं, मेरी बीवी और मेरा भाई। महावीर एक ऐसा शरीर या कहा जाए कि मानव बनाना चाहता था जिसका शरीर हमारी तरह ही हो लेकिन हड्डियों में तरह तरह की मिश्रित धातुएं यानी alloys का संगम हो जिससे वो अभेद्य बन सके, फिर उसने एक ऐसा कृत्रिम शरीर बनाने में कामयाबी हासिल कर भी ली जिसमे दिल, गुर्दे, फेफड़े और बाकी सभी अंदरूनी अंग हमारे जैसे ही थे लेकिन कंकाल का ढांचा बेहद कठोर था, उसने त्वचा का composition भी वैसा ही रखा ताकि ऊपरी शरीर भी अभेद्य और कठोर हो,एक कृत्रिम मस्तिष्क का भी निर्माण किया गया जो कि आम मानव के मस्तिष्क जैसा ही था। अब समस्या थी कि इस बेजान शरीर मे जान कैसे आये तो आये कैसे! मुझे याद है कि उन दिनों मेरा भाई इस एक्सपेरिमेंट को लेकर बहुत चिंतित था क्योंकि उस शरीर को ज़िंदा करने का कोई भी वैज्ञानिक तरीके नही सूझ रहा था। तभी उसकी आर्गेनाईजेशन वाले जाने कहाँ से एक तांत्रिक को ले आये, उस तांत्रिक ने अपनी कुछ तंत्र क्रियाएं वहां पर कीं और किसी आत्मा को इस लोक में खींच लाया। फिर वो आत्मा तो उस शरीर मे चली गयी लेकिन फिर शरीर को stabilize करने के लिए एक निश्चित मात्रा में बिजली दौड़ाई गयी। ये प्रयोग पूरा होने ही वाला था कि लैब पर cultists का हमला हो गया शायद तांत्रिक उन्हीं में से एक था। सभी लोग अपना काम छोड़कर भागने लगे लेकिन मेरा भाई इतना खुशकिस्मत नहीं था। उसे उन्होंने पकड़ लिया, और ज़िंदा जला दिया लेकिन तब तक उस….कृत्रिम मानव को होश आया चुका था, उसके शरीर को एक बड़े से चैम्बर में एक केमिकल solution के अंदर रखा गया था। अब तक वह अपने निर्माता, अपने पिता को पहचानने लगा था। होश में आते ही, जन्म लेते ही उसे जो सबसे पहला अहसास हुआ वो था क्रोध का अहसास जब cultists ने लैब पर हमला करके उसके निर्माता महावीर को ज़िंदा जलाकर अपना रिवाज़ पूरा किया। मेरा अंदाज़ा है कि cultists को शायद कृत्रिम मानव के प्रयोग की खबर लग गयी होगी और वो उसे लेने आये होंगे ताकि मानवता के खिलाफ एक और हथियार उनको मिल जाये, लेकिन वो कृत्रिम मानव खुद ही अपने solution चैम्बर को तोड़कर बाहर आ गया, बस फिर क्या था, cultists को उसने वो भयानक मौत दी जिसके वो लायक थे। महावीर की गुप्त आर्गेनाइजेशन के कुछ लोग मुझसे मिले और अपने भाई की अमानत को संभालने को कहा, मैं उसे घर ले आया और मेरी बीवी ने प्यार से उसका नाम सार्थक रखा। सार्थक मेरी बीवी से काफी हिलमिल गया, हमारे शादी के बाद कोई संतान नहीं थी तो हम सार्थक को ही अपनी संतान मानकर रहने लगे लेकिन मैं अपने भाई की मौत को भूला नहीं था क्योंकि मैं एक जासूस था, मैंने अपने स्तर पर चीजों को खोजना शुरू किया लेकिन शायद cultists की नजरें मुझपर बहुत पहले से थीं। एक दिन जब मैं और सार्थक दोनो कहीं बाहर थे तो वो लोग घर मे घुस आए और मेरी बीवी को भी ज़िंदा जला दिया, सार्थक इस घटना से क्रोधित था और बदला चाहता था लेकिन मैं पूरी तरह से टूट चुका था। सार्थक की काबिलियत को मैं जानता था लेकिन मेरे अंदर किसी और को खोने की शक्ति नहीं बची थी तो मैं सार्थक को लेकर यहां मनाली आ गया। लेकिन cultists यहां भी डेरा जमाए बैठे थे, और मुझे और सार्थक को बदला चाहिए था, बस फिर मैंने सार्थक को कभी उनकी जान लेने से नहीं रोका। मैं ना तो अपने भाई के मरने पर रोया और न ही बीवी के , क्योंकि मुझे अपने गुस्से को पालना था , बहाना नहीं था और अब आपकी मदद के साथ हम उन कमीनों पर कभी भी हमला बोल सकते हैं।

शमशेर(कुछ दस सेकंड के मौन के बाद)- आपकी कहानी सुनकर बहुत दुख हुआ,अब मुझे समझ मे आ रहा है कि सार्थक पर काला जादू असर क्यों नहीं करता क्योंकि उसने हमारी तरह जन्म नहीं लिया बल्कि उसे लैब में बनाया गया है और उसके अभेद्य शरीर के कारण ही उस पर गोलियां भी बेअसर हैं….. लेकिन आप बार बार अपनी कहानी में किसी गुप्त संस्था का जिक्र कर रहे थे जिसमें आपका भाई काम करता था। क्या आप नहीं जानते कि वो कौन सी संस्था थी?

ऋषि(ठंडी सांस लेकर)- अफसोस, उस संस्था का राज़ भी मेरे भाई के साथ चला गया। फिर मुझे ये दोनों नेट पर मिले, अरुण किसी भी तरह के हथियार को चलाने में सिद्धहस्त है क्योंकि ये पैरामिलिटरी जवान रह चुका है और संजीव एक रॉयल फैमिली से है तो हमारे मिशन का फाइनेंस वही करता है। मैं चाहता हूं कि आप भी हमारी टीम में शामिल हों, इंस्पेक्टर।


शमशेर- म..मैं!


ऋषि- जी हाँ, क्योंकि मैंने आपके बारे में थोड़ा खोजा तो जाना कि आपके पिता कौन थे और आप कौन हैं। आप हमारे बहुत काम आ सकते हैं और साथ मे हम उन cultists को जड़ से खत्म कर सकते हैं।


शमशेर(कुछ सोचकर)- ठीक है ऋषि जी, आज से मैं भी आपकी इस टीम का एक हिस्सा हूँ। शायद इसी तरीके से हम उन्हें रोक पाएं।

अध्याय 6 – Rise of Octohead

रात के 12 बज चुके थे और मनाली में भारी बारिश शुरू हो चुकी थी लेकिन बारिश का असर उन काले लंबे चोगे वाले नकाबपोशों पर नही पड़ रहा था जो उस कब्रिस्तान में खड़े थे जहां रोहित की बलि दी गयी थी। जॉन उन सबको संबोधित कर रहा था।

जॉन- मेरे दोस्तों! 1000 वर्ष बाद अब जाकर हमें लोगों के बीच छुपने की ज़रूरत नहीं रहेगी क्योंकि आज की रात आखिरी कुर्बानी की रात है जो इतने समय से चले आ रहे कुर्बानियों के चक्र को तोड़ देगी…..हमारा देवता समुद्र से बाहर आकर इस धरती पर राज करेगा लेकिन पिछले कुछ दिन हमारे लिए अच्छे नहीं रहे हैं। तुच्छ मानवों ने मेरे भाई को मार दिया, मैं उसके जाने से शोक में था लेकिन कुछ समय बाद मुझे समझ मे आया कि मेरे भाई की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। मेरे भाई हेनरी के अंत के बाद रेड हुड बिखर गया था लेकिन मैंने उन्हें शरण दी क्योंकि हमारे पास जितने लोग होंगे उतना ही लक्ष्य तक पहुंचना आसान होगा। अमर रहे ऑक्टोहैड!

जॉन के बाद सभी लोगों ने आखिरी वाक्य दोहराया “अमर रहे ऑक्टोहैड!”
दूसरीओर ऋषि का घर इस वक्त चंद लोगों से भरा हुआ था। सार्थक खिड़की से बाहर देख रहा था। ऋषि उसके बगल में जाकर खड़े हो गए।

सार्थक- रात आज बहुत काली है, बारिश भी तेज है।

ऋषि- तुम कुछ ज़्यादा ही फिक्र कर रहे हो लड़के।

अरुण- अब आखिरी वार करने का वक्त है, cultists अपने रिवाज को पूरा करने के लिए किसी को ढूंढ रहे होंगे। हमें पूरी ताकत से हल्ला बोल देना है।


सार्थक- अगर मेरे पास उनका पता हो तो मैं जाकर अभी खत्म कर सकता हूँ उन्हें, आप लोगों को आने की ज़रूरत नहीं है।


शमशेर- लेकिन तुम्हें नहीं पता कि वो कहाँ हैं और सारे cultists एक जगह तो मिलेंगे नहीं, उनका प्लान होगा कि अलग अलग जगह से प्रयास करें लोगों को उठाने का। इसके लिए हमें भी बिखरना होगा।

फिर शमशेर ऋषि की तरफ मुड़ा। उसने एक बड़ी सी किताब ऋषि को दी जिसकी जिल्द कई जगह से कटी फटी थी।

शमशेर – मैं अपने घर जाकर ये ले आया हूँ।

ऋषि(किताब को अपने हाथों में लेते हुए)- ये..क्या ये वही है जो मैं सोच रहा हूँ?


शमशेर- काले जादू की किताब। मेरे पिता की है, जिसका लेखक स्वयं ऑक्टोहैड को माना जाता है। कभी सोचा नहीं था कि इसकी आवश्यकता पड़ेगी लेकिन इस जंग में कुछ भी हो सकता है।


ऋषि- मुझे लगा था कि ये एक ही है।


शमशेर- ऑक्टोहैड ने एक ही किताब दी थी cultists को लेकिन फिर cultists को इस किताब की और प्रतियां तैयार करने के आदेश भी दिए गए ताकि लोग बड़ी संख्या में इनसे जुड़कर काले जादू और telekinesis का अभ्यास कर सकें।


ऋषि- चलो इसके पन्नों को खोलकर देखें कि इसमें क्या राज़ दफन हैं।

ऋषि और शमशेर ने किताब को खोला, शुरुआती कुछ पन्नों में तो कुछ बेहद वीभत्स रीति रिवाज थे जो cultists बनने की प्रक्रिया में आते थे जैसे भैंसे का सर काटकर खाना और सिर्फ कंकाल छोड़ देना, मनुष्य की आंतें निकालकर खाना इत्यादि। ऐसे चित्र देखकर ऋषि और शमशेर दोनों घृणा से भर गए।

ऋषि- उफ्फ…. ये तो बहुत वीभत्स है।


शमशेर- हाँ लेकिन ये भाषा क्या है?


ऋषि- मैं एक जासूस रह चुका हूँ, और विश्व मे बोली जाने वाली लगभग हर भाषा का कुछ न कुछ आईडिया तो है मुझे, लेकिन ये भाषा देखने से तो लग रहा है कि…..


शमशेर- क्या लग रहा है?


ऋषि- जैसे ये इस दुनिया की ही भाषा नहीं है।

फिर ऋषि और शमशेर ने आगे कुछ पन्ने पलटे, तभी एक पन्ने पर उन्हें एक भयानक आकृति बनी दिखाई दी। उस आकृति का सिर ऑक्टोपस जैसा था, धड़ मनुष्य की तरह और पंख किसी ड्रैगन की तरह।

शमशेर- तो क्या ये….


ऋषि- ऑक्टोहैड। ये जानने के लिए भाषा पढ़ने की ज़रूरत नहीं है कि यही ऑक्टोहैड है।


शमशेर- मुझे तो यह समझ मे नहीं आता कि अगर यह भाषा इस दुनिया की नहीं है तो बाकी cultists को कैसे समझ मे आ जाती है? क्योंकि वो सब तो मनुष्य ही हैं जिनको ऑक्टोहैड ने कुछ शक्ति दे दी है।


ऋषि- और शक्ति आयी कैसे? क्योंकि जितने लोग cultists बनते हैं वो सब कहीं का कहीं ऑक्टोहैड से मानसिक रूप से जुड़े रहते हैं, शायद यही कारण होगा कि वो ये भाषा पढ़कर इस किताब से काले जादू की प्रैक्टिस भी कर लेते होंगे।


शमशेर- हम्म…..आप वाकई में जासूस थे।


ऋषि- हा हा, कोई शक?


अरुण- अब हमारी प्लानिंग क्या है?


ऋषि- मनाली में कुछ ही ऐसे संवेदनशील हिस्से हैं जहां आज तक cultists ने हमला किया है, मैंने जब इन जगहों को मार्क करना शुरू किया तो समझ मे आया कि असल मे तीन ही ऐसी जगहें हैं जहां cultists हमला करते हैं। अब हमें भी उन्हें ढूंढने के लिए बंटना होगा, उत्तर में केवल सार्थक अकेला जाएगा क्योंकि उसपर किसी प्रकार के telekinesis या जादू का असर नहीं होता, पूरब में मैं और अरुण जाएंगे, दक्षिण में शमशेर और संजीव जाएंगे। सार्थक के अलावा हम सबको भारी मात्रा में हथियारों की ज़रूरत पड़ेगी, पहले हम छुपकर उनको गतिविधि देखेंगे फिर बिना नज़रों में आये RDX प्लांट करेंगे और पूरी जगह को ही उड़ा देंगे। अगर फिर भी कुछ cultists बच निकले तो बाकी हथियारों का इंतज़ाम भी अरुण ने कर दिया है, देखते ही मार देंगे उन कमीनों को। बस इसका ध्यान रखना की उन्हें मौका नहीं मिलना चाहिए, अगर उन दरिंदों को मौका मिल गया तो शायद आखिरी कुर्बानी हममें से ही किसी की होगी। सभी को गुड लक।

सभी लोग घर से बाहर निकले, तब तक बारिश बहुत हल्की हो चुकी थी लेकिन रात का अंधेरा और सन्नाटा बरकरार था, साथ ही रह रहकर बिजली भी तेजी से कड़क रही थी। तीनों टीम के लोग आपस मे एक दूसरे से गले मिले, सार्थक ऋषि के पास आया।

सार्थक(झिझकते हुए)- देखिए…अगर आपको वो लोग मिलें तो आपको मुझे कॉल करना है, खुद कोई एक्शन नहीं लेना है।


ऋषि- देखो मैं समझता हूं कि तुम्हें मेरी चिंता है लड़के लेकिन अगर ये योजना काम कर गयी तो चिंता की कोई बात नहीं है।


सार्थक- कुछ चांस ये भी है की काम न करे योजना, फिर हम क्या करेंगे? आप जानते हैं कि अब आपके अलावा मेरा दुनिया मे कोई नहीं है, मैं नहीं चाहता कि आपका हाल आपके भाई….


ऋषि(बात काटकर)- मैं वादा करता हूँ लड़के कि अगर कुछ भी गड़बड़ लगी तो तुम्हें कॉल करूंगा, अब मेरी चिंता करने का वक्त नहीं बल्कि धावा बोलने का वक्त है।

फिर तीनों टीम अपने अपने लक्ष्य की तरफ रवाना हुईं। शमशेर और संजीव शमशेर की जीप में थे, पीछे उन्होंने अरुण के दिये हुए सारे भारी भरकम हथियार रखे थे। ऋषि और अरुण , अरुण की गाड़ी में थे, उसकी डिक्की में भी सारे भारी हथियार रखे हुए थे। सार्थक अकेला बाइक पर बैठकर अपनी लोकेशन की तरफ रवाना हुआ। अरुण और ऋषि गाड़ी से तेज़ी से अपनी लोकेशन की तरफ बढ़े।

ऋषि- हमें बस पहले चुपचाप उनको देखना है, ज़्यादा जोश में मत आ जाना।

अरुण- हाँ मैं जानता हूँ कि ये कितना जरूरी है।


ऋषि- और एक बात अरुण…


अरुण- बोलिये ऋषि जी।


ऋषि- अगर मुझे वो लोग पकड़ लें तो तुम तेज़ी से निकल जाना, पहले अपनी जान बचाना।


अरुण- ऐसा क्यों सोच रहे हैं?अगर आपको उन लोगों ने कुछ भी किया तो सार्थक हर एक के दस टुकड़े कर
देगा।


ऋषि- इसी बात का तो डर है।


अरुण- मतलब?


ऋषि- सार्थक इंसान तो है नहीं अरुण, मतलब मेरी या तुम्हारी तरह नहीं। मैं सोचता हूँ कि कभी अगर वो इंसानियत के विपक्ष के लड़ा तो क्या होगा?


अरुण(मज़ाकिया अंदाज़ में)- फिलहाल तो हमें अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। वैसे भी आप उस तरह के काम के लिए थोड़े बूढ़े हो चले हैं।


ऋषि(मुस्कुराकर)- और तुम अभी भी बच्चे ही हो।

तभी अचानक अरुण को गाड़ी के ब्रेक लगाने पड़े, ऋषि को झटका महसूस हुआ। एक व्यक्ति सड़क पर बेहोश पड़ा था।

ऋषि- लगता है cultists का शिकार मिल गया, इसे किसी कारण उन्होंने यहां छोड़ दिया। तुम इसे उठा लो और एम्बुलेंस को फोन कर दो।


अरुण- रुकिए ऋषि जी! गाड़ी से बाहर नहीं उतरना चाहिए, ये चाल हो सकती है इनकी।


ऋषि- और अगर चाल नहीं हुई तो एक निर्दोष मारा जाएगा, अपनी बंदूक लो और बाहर जाकर चेक करो।

बारिश और कड़कती बिजली के इस माहौल में अरुण गाड़ी से बाहर निकला, वातावरण में कुत्तों, बिल्लियों की मनहूस आवाज़ें भी शामिल हो गईं। अरुण धीरे धीरे बंदूक लेकर बेहोश व्यक्ति की तरफ बढ़ा, उसने धीरे से इस काले कपड़े वाले व्यक्ति को हाथ लगाया लेकिन अचानक ही इस व्यक्ति ने अरुण की गर्दन को पकड़ लिया। “चटाक” की आवाज़ के साथ अरुण की जान चली गयी, अरुण को वहीं सड़क पर मारा छोड़कर वो काले चोगे और काले नकाब वाला  व्यक्ति गाड़ी की तरफ बढ़ा, तब तक ऋषि गाड़ी का स्टीयरिंग संभाल चुके थे। उन्होंने तेज़ी से गाड़ी को उसकी तरफ बढ़ाया लेकिन उस व्यक्ति ने केवल अपना हाथ हवा में उठाया और गाड़ी बंद पड़ गयी। फिर उस व्यक्ति के हाथों में फिर कुछ हरकत हुई और गाड़ी का पूरा दरवाज़ा उखड़कर निकल गया। उसने कुछ देर ऋषि को घूरा और फिर अपना काला नकाब उतार दिया…….वह जॉन था और उसके चेहरे पर एक अजीब किस्म का वहशीपन था। उसमे ऋषि को गाड़ी से बाहर खींच लिया और एक जोरदार घूंसा उनके पेट पर जड़ा जिससे ऋषि के मुंह से खून आने लगा।

जॉन- तुम लोग मेरे भाई की मौत के ज़िम्मेदार हो।

ऋषि- त..तुमको कैसे पता?


जॉन- जब पुलिस स्टेशन में सार्थक ने हेनरी को मारा और शमशेर को जीप में लेकर तुमसे मिलने आया तब भी मेरे लोग बेहद सावधानी से उन दोनों को पीछा कर रहे थे। उन्हें तुम्हारी लोकेशन मिल गयी और हम लोगों ने सही मौके का इंतज़ार किया,और मौका तब मिला जब तुम सब अलग अलग बांटकर हमारी तलाश में निकले।


ऋषि- म..मतलब तुमने पूरे समय हम पर नज़र रखी?


जॉन- हा हा हा, बस हम तुमसे थोड़ा ज़्यादा चालक निकल गए लेकिन चिंता मत करो। तुम्हारी मृत्यु को हम ऐतिहासिक बनाएंगे क्योंकि तुमको हम मौका देंगे वो आखिरी कुर्बानी बनने का जो ऑक्टोहैड के लिए इस दुनिया का मार्ग प्रशस्त करेगी।

फिर जॉन ने एक जोरदार घूंसा ऋषि को जड़ा जिससे वो बेहोश हो गए, फिर उन्हें कंधे पर डालकर जॉन चल दिया। दूसरी तरफ सार्थक बाइक से तेज़ी से बढ़ रहा था कि उसका फोन बजा, उसने बाइक रोककर देखा तो फोन शमशेर का था। सार्थक ने फोन उठाकर कान से लगाया।

शमशेर- सार्थक! शमशेर बोल रहा हूँ!

सार्थक- हाँ! क्या हुआ?


शमशेर- ऋषि जी और अरुण से संपर्क टूट गया है हमारा।


सार्थक- नेटवर्क प्रॉब्लम हो गयी होगी बारिश की वजह से।


शमशेर- काश ऐसा ही हो। वैसे मुझे अपने एरिया में किसी cultist का नामोनिशान तक नहीं मिला, तुम कहो।


सार्थक- अब तक तो नहीं।


शमशेर- तो क्या ऋषि और अरुण……


सार्थक(बात बीच मे काटकर)- इंस्पेक्टर! आपने किसी कब्रिस्तान के बारे में कुछ बताया था!


शमशेर- हाँ एक पुराना कब्रिस्तान है, वहां उन्होंने रोहित नाम के एक शख्स की बलि हाल ही में दी थी।


सार्थक- तुरंत वहां पहुंचिए। मैं भी रास्ते पर हूँ, आप मुझसे जल्दी पहुंच गए तो कोई एक्शन मत लीजिएगा, मेरा इंतज़ार कीजियेगा।


शमशेर- ठीक है।

शमशेर और संजीव अपनी जीप से जल्द ही कब्रिस्तान पहुंच गए, उन्होंने छुपकर देखा कि सारे cultists काला चोगा और नकाब पहनकर एक गोला बनाकर खड़े थे, जैसे कि कोई प्रक्रिया चल रही हो।

शमशेर(फुसफुसाकर)- ये क्या! लगता है उन्हें अपना शिकार मिल गया, हमें….

संजीव- रुक जाओ! याद है ना, सार्थक का इंतज़ार करना है हमें। देखो, वो आ भी गया अपनी बाइक से।

सार्थक अपनी बाइक खड़ी करके तुरंत शमशेर के पास पहुंचा।

सार्थक- क्या चल रहा है?

शमशेर- शायद उनको आखिरी शिकार मिल गया।

सार्थक- अच्छा है सब एक जगह हैं, मैं उन कमीनों को छोडूंगा नहीं। तुम लोग यहीं रुको।


शमशेर- रुको, हम भी चलते हैं।


सार्थक- क्या आप मेरी तरह कृत्रिम मानव हैं?


शमशेर- आ…नहीं।


सार्थक- बस फिर आप दोनों यहीं रुकें, बस अगर कोई बाहर भागने का प्रयास करे तो उसे गोली मारने में देर मत कीजियेगा। अपने हथियार तैयार रखिये।

सार्थक धड़धड़ाते हुए कब्रिस्तान में घुस गया जहां cultists गोला बनाकर कुछ मंत्रोच्चारण कर रहे थे। तभी सार्थक ने देखा के पास में बुरी तरह से घायल ऋषि लोहे की जंजीर के सहारे एक दीवार से बंधे हैं। सार्थक को झटका लगा, वो पहले ऋषि को छुड़ाने के लिए बढ़ा लेकिन किसी ने उसे ज़ोरदार किक से दूर फेंक दिया। सार्थक ने मुड़कर देखा तो चेहरे पर राक्षसी भाव लिए जॉन खड़ा था, उसकी आंखें पूरी तरह काली हो चुकीं थीं।

जॉन(कुटिलता से मुस्कुराते हुए)- तो अब हम दोबारा मिल गए!

सार्थक- तुममें इतनी शक्ति कहाँ से आ गयी? क्या किया है तुमने?


जॉन- हमारे प्रभु, ऑक्टोहैड को पता है कि उनको स्वतंत्र कराने से हम बस एक कुर्बानी दूर हैं इसलिए उन्होंने अपनी शक्ति का एक बड़ा हिस्सा मुझे दिया। ताकि कार्य मे कोई बाधा न आये।इतनी ताकत तुमको मारने के लिए काफी रहेगी।

सार्थक चिल्लाते हुए जॉन की तरफ भागा लेकिन जॉन ने फिर एक जोरदार घूंसा सार्थक के मुंह पर रसीद किया। सार्थक ने अपने जीवन मे पहली बार खून, दर्द और बेबसी का अनुभव किया। फिर जॉन ने सार्थक को गर्दन से पकड़कर उठा लिया।

जॉन(क्रोध से)- मेरे भाई को मार डाला तूने! पता है कितना दर्द होता है जब हम किसी अपने को खोते हैं? मैं बताता हूँ।

जॉन ने एक हाथ से सार्थक को गर्दन पकड़कर उठा रखा था , दूसरे हाथ को हवा में ही उसने ऋषि की तरफ घुमाया और ऋषि ने जोरदार चीख मारी क्योंकि जॉन धीरे धीरे उनका पेट फाड़ रहा था और उसमें से अंतड़ियां दिखने लगीं थीं। सार्थक ज़ोरदार तरीके से चीखा “नहीं!” लेकिन जॉन के हाथ से वह खुद को नहीं छुड़ा पा रहा था।
जॉन- इतनी जल्दी क्या है? अभी तो असली काम शुरू होगा, हम इसको कुर्बान करेंगे ताकि हमारे देवता इस धरती पर आ जाएं और फिर मैं खुद तुझे अपने हाथों से एक धीमी मौत दूंगा।

जॉन ने पास ही पड़ा एक kerosene का डब्बा telekinesis द्वारा ऋषि के पूरे शरीर पर छिड़क दिया और माचिस से आग लगा दी। इस दौरान बाकी cultists के मंत्रोच्चारण भी काफी तेज हो गए थे। ऋषि अत्यधिक पीड़ा के कारण पहले से ही बेहोश थे इसलिए वे चीख भी नहीं पाए लेकिन सार्थक बेबसी से बहुत बुरी तरह चीख रहा था लेकिन उसके सारे प्रयास व्यर्थ जा रहे थे, जल्द ही ऋषि ने रहा सहा प्रतिरोध करना भी बंद कर दिया। अब आग भी धीरे धीरे बारिश से बुझने लगी थी और जंजीरों में अब एक मांस का लोथड़ा लटक रहा था, आखिरी कुर्बानी पूरी हो चुकी थी। सार्थक ने अब चिल्लाना बन्द कर दिया था और वो एकटक उसी तरफ देखे जा रहा था जहां ऋषि कुछ देर पहले जीवित मौजूद थे, जॉन ने भी उसकी गर्दन छोड़ दी। सार्थक ज़मीन पर घुटनो के बल बैठ गया और ऋषि की लाश की तरफ देखने लगा जो जंजीरों से बंधी थी, पहले उसके निर्माता को cultists ने मारा फिर जिस व्यक्ति ने पिता की तरह पाला उसे भी एक अति भयानक मौत दी गयी। उसकी पूरी दुनिया ही उजड़ गयी थी, जब किसी के साथ ऐसा होता है तो उसे दुख नहीं होता, बल्कि उसका पूरा दिमाग शून्य में चला जाता है। सार्थक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। वहीं जॉन कुटिल और विजयी मुस्कान लेकर खड़ा था, गोले में खड़े cultists के मंत्रोच्चारण बंद हो चुके थे, प्रक्रिया पूरी हो गयी थी।

जॉन- हा हा हा…..प्रक्रिया पूरी हो गयी। अब 1000 साल का इंतज़ार खत्म! अब हमारे देवता धरती पर आएंगे!

खून और बेहिसाब दर्द के बावजूद, सार्थक फिर उठा। इस बार उसके चेहरे पर कोई भाव भी नहीं थे।

जॉन- अब तेरी बारी है, telekinesis का असर तो तुझ पर होता नहीं। तो अपने हाथों से पीटकर मारना होगा तुझे।

जॉन ने फिर सार्थक को घूंसा मारने की कोशिश की लेकिन इस बार सार्थक ने उसका हाथ रोक लिया।

सार्थक- लगता है रिवाज पूरा होने के बाद ऑक्टोहैड ने अपनी शक्ति वापस ले ली है, तुम्हारी आंखें सामान्य हो चुकी हैं।

जॉन के चेहरे पर अब बेहिसाब भय था। सार्थक ने जॉन के हाथ को और बुरी तरह भींच दिया जिससे उसकी हथेली की हड्डियां टूट गईं, वो अपना हाथ पकड़कर वहीं बैठ गया । बाकी cultists ने वहां से भागने की कोशिश की लेकिन सार्थक उन्हें छोड़ने के मूड में नहीं लग रहा था, आज उन्हें सार्थक का सबसे भयानक रूप देखना था। उसने शुरुआत की कुछ  cultists का सिर उनके धड़ से अलग करके, वो भी सिर्फ अपने दो हाथों से। कुछ को उसने उठाकर पेट वाली जगह से दो भाग में चीर दिया, कुछ के सीने से उसने अपना हाथ आरपार कर दिया। cultists जिन्होंने भागने का प्रयास किया उन्हें बाहर खड़े शमशेर और संजीव ने भारी भरकम बंदूकों से मारना शुरू किया, cultists के telekinesis के प्रयोग से पहले ही वे उनको मौत के घाट उतार दे रहे थे। बहुत से cultists अब मांस के लोथड़े में बदल चुके थे, बाकी दो चार जो बचे थे उनपर ध्यान दिए बिना सार्थक जॉन की तरफ बढ़ा। तभी एक काला चोगा पहने स्त्री उसके और जॉन के बीच मे आ गयी।

सार्थक- सामने से हट जाओ।

जॉन- हट जाओ सारा! ये तुम्हें मार डालेगा!


सारा(जॉन को प्यार से देखकर)- तो मैं खुशी से तुम्हारे लिए जान दे दूंगी, मेरी जान।

सारा ने telekinesis से एक भारी पत्थर उठाया और सार्थक को मारने की कोशिश की लेकिन सार्थक के एक ही घूंसे से उस चट्टान में टुकड़े टुकड़े हो गए। सार्थक की आंखों में अब और क्रोध उतर आया।

सार्थक- मेरा शरीर कोई आम मानव शरीर नहीं है, बल्कि तरह तरह की धातुओं से बना हुआ है। मेरी ताकत देखना चाहती हो।


जॉन(घबराकर)- न..नहीं सार्थक! मुझे मार डालो, जितनी बुरी मौत देनी है दे दो लेकिन इसे छोड़ दो।

लेकिन सार्थक ने उसे अनसुना कर दिया, उसने एक शक्तिशाली झापड़ सारा को रसीद किया जिससे उसकी गर्दन की हड्डियां कड़कड़ा उठीं। धरती पर गिरते वक्त उसकी आंखें खुलीं थीं जो एकटक जॉन को ही प्यार से निहार रहीं थीं।

जॉन(चिल्लाकर)- नहीं! तूने उसे मार डाला!


सार्थक- तूने मेरी दुनिया उजाड़ी और मैंने तेरी। लेकिन अब तुझे अधिक दुख झेलने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि तू भी मरने वाला है।

सार्थक जॉन को मारने उसकी तरफ बढ़ा लेकिन जॉन रहस्यमयी तरीके से हवा में ही गायब हो गया। शमशेर और संजीव तब तक कब्रिस्तान में आ गए और रहे सहे दो चार cultists को भी खत्म कर दिया। फिर उन्होंने देखा कि चारों तरफ लाशें फैली हुई थीं और सार्थक बुत बनकर खड़ा था। दोनों सार्थक की तरफ बढ़े।

शमशेर- मुझे पता नहीं था कि तुम इतनी क्रूरता से मार सकते हो।


सार्थक- उन्होंने आखिरी रिवाज पूरा कर लिया।


संजीव- क्या? हम तो बाहर थे तो अंदर का ज़्यादा कुछ पता ही नहीं लगा, यहां हुआ क्या सार्थक।

सार्थक ने लोहे की जंजीरों में लटकी लाश की तरफ इशारा किया।

शमशेर- ओह, तो ये थी आखिरी कुर्बानी।


सार्थक- जानना नहीं चाहोगे कौन था?


संजीव- कौन था?


सार्थक- ऋषि जी।

सुनकर दोनों शमशेर और संजीव में पैरों तले जमीन खिसक गई। किसी को कुछ समझ मे ही नहीं आया कि सार्थक को कैसे सांत्वना दी जाए क्योंकि सार्थक वहीं लाशों के बीच घुटनो के बल बैठकर अपनी पूरी ताकत से चिल्लाकर रो रहा था। बहुत समय बाद शमशेर और संजीव सार्थक और ऋषि की लाश को कब्रिस्तान से बाहर निकालकर अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे। सार्थक शमशेर और संजीव से आगे आगे अपने ही ख्यालों में चल रहा था। शमशेर और संजीव धीरे धीरे बात कर रहे थे।

संजीव- क्या लगता है कि वो ठीक हो जाएगा?


शमशेर- पता नहीं! ऋषि ने उसे पाला था अब तक। वो भले ही एक कृत्रिम मानव सही लेकिन वो बस एक लड़का है संजीव बस एक लड़का। कोई कितना झेल सकता है ज़िंदगी मे! वैसे भी अब पता नहीं इस दुनिया का क्या होगा, क्योंकि ऑक्टोहैड इस दुनिया मे आ रहा है।

कहीं दूर प्रशांत महासागर में दो मछुआरे मछली पकड़ने वाला जाल समुद्र में डाल रहे थे।

रघु- अबे आज ज़्यादा दूर निकल आये। चलो जल्दी काम निपटाया जाए।


हरिया- अरे रुक जा दो मिनट! और दो तीन हाथ लगने दे।


रघु- अरे हाल देख मौसम का! इतने आंधी तूफान में नाव कितना टिकेगी?

तभी अचानक समुद्र में हलचल होने लगी।

हरिया- अरे! ये क्या हो रहा है?


रघु- क्या पता! ऐसा लग रहा है जैसे समुद्र से कुछ बाहर रहा हो!


हरिया- ये निश्चित रूप से व्हेल होगी। और इतनी हलचल कौन मचा सकता है पानी मे?


रघु- पता नहीं! अरे देख! एक काला बड़ा शरीर पानी से बाहर आ रहा है!


हरिया- हे भगवान! ये क्या है?

धीरे धीरे 100 फुट का एक प्राणी समुद्र से बाहर निकला जिसका सर ऑक्टोपस जैसा, शरीर मानव जैसा और ड्रैगन जैसे विशालकाय पंख थे। ऑक्टोहैड अपनी कैद से आज़ाद हो चुका था। 

अध्याय 7- Reign of Octohead

सुबह करीब 7 बजे ऋषि और अरुण के अंतिम संस्कार की क्रिया पूरी करके सभी ऋषि के घर मे बैठे हुए थे। सार्थक ने भी काफी हद तक खुद को संभाल लिया था लेकिन वो चुपचाप बैठा हुआ था।
शमशेर और संजीव भी बैठे थे लेकिन किसी से कुछ कहते नहीं बन रहा था। आखिरकार सार्थक ने ही चुप्पी तोड़ी।

सार्थक- अब मैं मनाली में नहीं रुकने वाला।

शमशेर- ऐसा क्यों?


सार्थक- ऋषि ने मुझे अपने बच्चे की तरह पाला, अपनी पत्नी की मौत के बाद दूसरी शादी भी नहीं की लेकिन बदले में उन्हें क्या मिला….. एक दर्दनाक मौत!


अरुण- सार्थक तुम ये क्या….


सार्थक- आप लोग कुछ भी कहें लेकिन ये सच्चाई कोई नहीं बदल पायेगा कि मैं उनके साथ हुई अनहोनी को रोक नहीं पाया।

शमशेर उठकर सार्थक के पास पहुंचा और उसके कंधे पर हाथ रखा।

शमशेर- मेरी बात सुनो लड़के, तुमने अपनी तरफ से जो हो सकता था किया। ये जो हुआ उसमे तुम्हारी कोई गलती नहीं थी, ऋषि जी की मौत का दुख हम सबको है लेकिन उनकी मौत पता है कब व्यर्थ जाएगी , जब हम यहीं बैठे रहेंगे और ऑक्टोहैड को रोकने के लिए कुछ नहीं करेंगे।


संजीव- अब ऑक्टोहैड को रोकना तो होगा ही, वरना ये दुनिया खत्म होते देर नहीं लगेगी।


सार्थक(मुट्ठी भींचते हुए)- ऋषि जी की मौत को मैं बेकार नहीं जाने दूंगा, ऑक्टोहैड को रोकना होगा।

वहीं दूर प्रशांत महासागर में वो बड़ी, काली, भयानक आकृति समुद्र से पूरी तरह बाहर निकल आयी थी।

हरिया- ये..ये कैसा प्राणी है!


रघु- हरिया जाल निकाल और नाव घुमा ले! तुरंत!

लेकिन तभी कब्रिस्तान से हवा में गायब हुआ  जॉन ठीक उनकी नाव पर ही प्रकट हुआ जिसे देखकर दोनों नाविक और घबरा गए। जॉन ने उन दोनों को कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन वो ऑक्टोहैड की तरफ मुड़ा और आंखें बंद करके खड़ा हो गया। वो अब ऑक्टोहैड से मानसिक संपर्क के द्वारा बात कर रहा था।

जॉन- हे मेरे ईश्वर! आज हम लोगों की इतने सालों की मेहनत रंग लाई, आप अपनी कैद से आजाद हो गए परंतु आपने मुझे दी हुई अत्यधिक शक्ति वापिस क्यों ले ली प्रभु, मुझे एक दुश्मन को खत्म करने के लिए उस शक्ति की आवश्यकता थी।

तभी ऑक्टोहैड की आवाज़ जॉन के दिमाग मे गूंजी।

ऑक्टोहैड- शांत मेरे भक्त शांत! मैं जानता हूँ कि तुम उस अमानवीय बालक सार्थक की बात कर रहे हो।

जॉन(आश्चर्य से)- लेकिन आपको कैसे पता?


ऑक्टोहैड- तुम शायद भूल रहे हो कि मैं कल्ट के हर सदस्य से मानसिक संपर्क द्वारा जुड़ा हूँ, अगर तुम कोई भी हरकत करते हो तो सबसे पहले मुझे पता लगता है। जहां तक सवाल है शक्ति को वापिस लेने का तो तुमने भले ही आखिरी कुर्बानी दी थी लेकिन तब भी मुझे लाखों वर्षों की इस कैद से स्वतंत्र होने के लिए अपनी शक्ति का एक एक कतरा चाहिए था लेकिन मैंने तुमको यहां पर बुला लिया, इस तरह से मैंने अपने किये गए नुकसान की भरपाई कर दी।


जॉन- अब आपके राज को धरती पर शुरू होने से कोई नहीं रोक सकता।


ऑक्टोहैड- इतनी जल्दी क्या है वत्स। पहले मुझे ये विराट रूप त्यागकर मनुष्य रूप में आने दो जिससे हमको मानसिक संपर्क की ज़रूरत नहीं रहेगी, हम आपस मे बोलकर भी बात कर पाएंगे।

फिर ऑक्टोहैड ने तुरंत अपना विशाल रूप त्यागा और एक खतरनाक लेकिन प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले मनुष्य के रूप में जॉन के सामने जा खड़ा हुआ। ये मानव रूप भी कम प्रभावशाली नहीं था, एक लंबा चौड़ा व्यक्ति जिसने लंबा सा काली शेरवानी जैसा ऑउटफिट पहन रखा था।

जॉन-आप..आप मानव रूप में भी आ सकते हैं?


ऑक्टोहैड- बहुत आसान है, अब इस समुद्र से दूर चलते हैं जिसने मुझे इतने समय तक अपनी कैद में रखा लेकिन उससे पहले…..

ऑक्टोहैड ने उन दो मछुआरों की तरफ देखा जो भय से जड़ होकर खड़े हो गए थे। ऑक्टोहैड के हाथ से कुछ किरणें निकलीं और दोनों ज़मीन पर गिरकर तड़पने लगे, फिर धीरे धीरे उनमे कुछ शारीरिक परिवर्तन होने लगे। उनके दांत पैने, आंखें लाल और चमड़ी नीली हो गयी, दोनों बहुत भयानक लग रहे थे।

ऑक्टोहैड(मुस्कुराकर)- इस दुनिया को मेरे आगमन का पैगाम तो दिया जाए।


ये सुनते ही जॉन भयानक रूप से हंसा।

वहीं दूसरी ओर ऋषि के घर मे सार्थक ने न्यूज़ चैनल को देखने के लिए टीवी को ऑन किया। शमशेर और संजीव भी पास ही बैठे थे।

Newsflash- कल रात दुनियाभर के मौसम मे तरह तरह के अजीबोगरीब परिवर्तन पाए गए। कहीं पर भयानक बिजली गिरी तो कहीं पर भारी वर्षा के कारण फसलों को नुकसान हुआ, साथ ही कई जगह आंधी तूफान आने की भी खबरें मिलीं। प्रशांत महासागर में से किसी बड़े से जीव को देखे जाने की भी बात उछली थी लेकिन वहां पर कुछ नहीं मिला , कुछ मछुआरों के गायब होने की खबर ज़रूर सामने आई। कुछ लोग इसे अपशकुन मान रहे हैं और कुछ ने तो इसे दुनिया का अंत ही घोषित कर दिया है। इन हालातों में कुछ जानें भी गयी हैं, कोई अन्य खबर मिलते ही आपको तुरंत सूचित किया जाएगा तब तक बने रहिए हमारे साथ।

सार्थक ने टीवी ऑफ कर दिया।

सार्थक- कहीं पर मनाली में कल हुए हत्याकांड की कोई खबर ही नहीं है।

शमशेर- तुम्हें क्या लगता है कि cultists 1000 साल से इतने खून करके कैसे बचे हुए हैं। उनके लोग दुनियाभर में फैले हैं, मीडिया में भी।


सार्थक- मुझे लगा कि जॉन को छोड़कर हमने सभी cultists को कब्रिस्तान में खत्म के दिया।


शमशेर- हमने एक बड़ी संख्या को मार दिया लेकिन अब भी कुछ तो बचे ही हैं। अब हमें पता लगाना है कि ये जॉन हवा में कैसे गायब हो गया?


संजीव-उसमे पता क्या लगाना है? ऑक्टोहैड ने उसे बुला लिया होगा अपने पास।

तभी उन्हें घर मे ऊपर की तरफ की कुछ हलचल सुनाई दी।
सार्थक- शशशश….सब लोग धीरे बोलो, लगता है कोई घर के अंदर घुसा है।

सभी सावधान हो गए, सब धीरे धीरे सीढ़ियों से ऊपर की तरफ बढ़े। तभी अचानक से उनके सामने निंजा जैसी पोशाकों में तीन नकाबपोश आ खड़े हुए। शमशेर और संजीव बिना सोचे समझे उनसे भिड़ गए लेकिन बहुत जल्दी दो नकाबपोशों ने उन्हें काबू कर लिया। तीसरा नकाबपोश सार्थक की तरफ बढ़ा और सार्थक के सामने पहुचते ही धीरे से कोमल आवाज़ में पूछा “ऋषि जी कहाँ हैं?” सार्थक को समझते देर न लगी कि तीसरा नकाबपोश एक लड़की है।

सार्थक- ऋषि जी अब इस दुनिया मे नहीं हैं।

इतना सुनते ही दो नकाबपोशों की पकड़ शमशेर और संजीव पर ढीली पड़ गयी और तीसरी नकाबपोश लड़की रोने लगी। शमशेर और संजीव एक दूसरे को प्रश्नवाचक निगाहों से देखने लगे, सार्थक को भी कुछ समझ न आया।
सार्थक- आ..आप लोग नीचे चलिए। हम सब लोग दोस्त हैं ऋषि जी के, नीचे चलकर बात करते हैं।

नीचे चलकर सब लोग सोफे पर बैठ गए। तीनों ने अपने मास्क उतार दिए, उनमे से दो तो लड़के थे और एक खूबसूरत सी लड़की थी लेकिन इस वक्त आंसुओं में डूबी हुई थी। उनमे से एक लड़का जिसका नाम मनीष था, बोलना शुरू किया।

मनीष- जो कुछ हुआ उसके लिए हम माफी चाहते हैं, हमें लगा कि आप लोग cultists हैं।


सार्थक- क्या? नहीं हम उनके दुश्मन हैं।


मनीष- मेरा नाम मनीष है , ये मेरा भाई है अवनीश और बहन कृति। क्या आप हमें बता सकते हैं कि आखिर हुआ क्या था?

शमशेर ने तीनों को एक एक घटना बताई जो कल रात घटी थी। सब कुछ सुनकर तीनों लोग आंखें फाड़ फाड़कर सार्थक को देखने लगे। कृति तो सोफे से उठकर सार्थक के एकदम करीब पहुंचकर उसे देखने लगी। सार्थक थोड़ा सा अचंभित हुआ।

कृति- तुम तो हमारा अविष्कार हो।

सार्थक- आ..क..क्या कह रही हैं आप?


कृति- हाँ, जिस आर्गेनाईजेशन की बात ऋषि जी ने आप सबसे की थी, जहां उनके भाई महावीर ने सार्थक को बनाया …..हम उसी गुप्त आर्गेनाईजेशन के लोग हैं।

ये सुनकर सबसे बड़ा झटका सार्थक को लगा।

सार्थक- यानी मेरे निर्माता को आप लोग जानते थे।


अवनीश – दरअसल पर्सनली नही जानते नहीं थे लेकिन उनका नाम बहुत सुना था। हमारी आर्गेनाईजेशन बहुत बड़ी है, हर आदमी हर किसी से नहीं मिल पाता।


शमशेर- क्षमा कीजियेगा लेकिन ये ‘आर्गेनाइजेशन’ है क्या?


मनीष- हालांकि इसे हम दुनिया से इसे गुप्त रखते हैं लेकिन आप लोग जिन परिस्थितियों से गुजरे हैं, ये बात तो बहुत छोटी है उनके सामने। हम लोग ‘हिडन वारियर्स’ हैं, छुपे हुए योद्धा। हम अपनी आर्गेनाइजेशन में ऐसे लोगों का चुनाव करते हैं जिन्होंने युद्ध कलाओं , हथियारों या विज्ञान के क्षेत्र में बहुत ही अधिक प्रशिक्षण हासिल किया होता है। यह आर्गेनाइजेशन पिछले 500 वर्षों से अस्तित्व में है, हमारे पास दुनिया के बड़े बड़े वैज्ञानिक, मार्शल आर्ट्स के महारथी और बड़े बड़े कॉन्टेक्ट्स वाले राजनीतिज्ञ लोग भी हैं। हमारी पैठ रॉ, इण्टरकॉम, FBI जैसे संगठनों में भी है, हम लोग मुख्यतः पैरानॉर्मल या कह लीजिए कि ऐसी चीजों से लड़ने का प्रयास करते हैं जिसे दुनिया न ही जाने तो अच्छा है। इन 500 वर्षों में अगर किसी को हम पूरी तरह से नहीं रोक पाए तो वो थे cultists। इसका एक कारण ये भी था कि इनके लोग हमारी ही तरह कई पावरफुल पोज़िशन्स पर थे, इनसे लड़ने के दौरान ही जब हमारी आर्गेनाइजेशन के लोगों को ऑक्टोहैड नाम के उस प्राणी का पता कुछ साल पहले ही चला तब हमारी आर्गेनाइजेशन ने तुमको बनाने का निर्णय लिया सार्थक, इस काम के लिए बेस्ट थे महावीर , ऋषि के भाई……और हम तीनों के पिता।

ये सुनकर सार्थक को बड़ा झटका लगा।

सार्थक- म..महावीर आप तीनों के पिता थे!


अवनीश- हाँ, तब हम लोग भी ज़्यादा बड़े नहीं थे। ऋषि चाचा की फैमिली यानी वो और उनकी पत्नी से मिलने हम लोग अक्सर जाया करते थे। कृति को ऋषि चाचा से सबसे अधिक बहुत लगाव था।


सार्थक(कृति की तरफ देखकर, जो अभी तक सोफे पर बैठी सुबक रही थी)- मुझे खेद है कि मैं ऋषि जी को नहीं बचा सका लेकिन आप लोगों को पता कैसे लगा कि ऋषि जी मनाली रहने आ गए थे?


अवनीश- हमारी आर्गेनाइजेशन….मतलब हिडन वारियर्स के पास शायद ही किसी व्यक्ति का डेटाबेस न हो। हम किसी के भी बारे में चुटकियों में पता लगा सकते हैं। अच्छा शमशेर आपके पिता तो cultist थे ना।


शमशेर(हैरत से)- आ…हाँ। तुम लोग वाकई अपनी रिसर्च करके आये हो।


अवनीश- तो आपके पास वो ‘काले जादू की किताब’ भी अवश्य होगी।


शमशेर- हाँ, है न।

शमशेर तुरंत उठकर गया और पास की टेबल पर पड़ी किताब अवनीश को दे दी।

शमशेर- ये एक कॉपी है, ऐसी कई और हैं cultists के पास।


अवनीश- कॉपी…नहीं नहीं ये सब कॉपी नहीं हैं। एक किताब ऑक्टोहैड ने चार्ली को सौंपी थी जो जिसने cultists की स्थापना की थी 1000 साल पहले फिर चार्ली ने ही 4-5 किताबें और लिखीं ,बिल्कुल ऐसी ही।


शमशेर- अच्छा, तो ऐसा है।


मनीष- ये किताब सिर्फ ऑक्टोहैड के बारे में नहीं है, ये वो ज्ञान है जो ऑक्टोहैड ने अर्जित किया है अपने जीवन के अनुभवों से। जो बातें और रहस्य हम इस बृह्मांड के बारे में नहीं जानते वो सब इसमें दर्ज है, बस एक अलग भाषा में। साथ ही काले जादू और telekinesis के बारे में भी बहुत कुछ है, जो भी इसे सीखता है वो ऑक्टोहैड के मानसिक संपर्क में आ जाता है जिससे उसे शक्ति मिलती है।


सार्थक- तुम लोगों को इतना कुछ पता है, तो ये भी पता होगा कि cultists मनाली के इस कब्रिस्तान में जमा होने वाले हैं, अगर तुम लोग समय पर पहुंच जाते तो शायद ऋषि जी ज़िंदा होते इस वक्त।


अवनीश- हम नहीं आ सके क्योंकि हमारे दुनियाभर के सभी गुप्त अड्डों पर उसी वक्त cultists में धावा बोल दिया था, ऐसा लगता है कि हिडन वारियर्स के बीच भी cultists ने अपने लोग छोड़ रखे थे।


सार्थक- तो क्या तुम लोगों के पास कोई प्लान है ऑक्टोहैड को रोकने का?

तभी मनीष की जेब से बीप बीप की आवाज़ हुई, उसमे मोबाइल जैसा यंत्र निकाला जिस पर कुछ बिंदु थे।

मनीष- पता लग गया….ऑक्टोहैड इस वक्त राजस्थान के किसी गांव में है।


सार्थक- क्या? कैसे पता लगा?


मनीष- ये यंत्र देख रहे हो न! ये वातावरण में हो रहे ऊर्जा में बदलाव को महसूस करता है, इसकी मदद से हम लोगों ने कई बुरी आत्माओं को पकड़ा है लेकिन इस तरह की भारी मात्रा में ऊर्जा को पहली बार देखा है।


सार्थक- कमाल के यंत्र हैं तुम्हारे पास।


मनीष(मुस्कुराकर)- अभी तो तुमने कुछ देखा ही नहीं है।


सार्थक- तो तुम लोग तांत्रिकों की तरह भूत प्रेत भी पकड़ते हो?


अवनीश- हमने पहले ही कहा था कि हमारा सामना तरह तरह की…..चीजों से होता है।


शमशेर- लेकिन ऑक्टोहैड अगर मिल भी गया तो उसे आप लोग उसे खत्म कैसे करेंगे?


अवनीश- हमारे पास कई ऐसे गुप्त हथियार हैं जिसके सामने आपको अमेरिका, रूस या जापान के सबसे विध्वंसक हथियार भी खिलौने लगेंगे, अभी तक ऐसी नौबत नहीं आयी थी कि उनका इस्तेमाल करना पड़े लेकिन अब लगता है कि ऐसा करना पड़ेगा। अब हमें अपने गंतव्य की तरफ चलने की तैयारी करनी चाहिए। आप सब लोग ज़रूरी सामान ले लीजिए, हम दो घंटे में निकलेंगे।

राजस्थान के विशाल रेगिस्तान में दूर नज़र दौड़ाने पर चार आकृतियां नज़र आईं, एक था मानवरूपी ऑक्टोहैड, एक था जॉन और बाकी दो मछुआरे जिनको ऑक्टोहैड ने जानवर जैसा खूंखार बना दिया था।

जॉन- सवाल पूछने के लिए क्षमा करें ऑक्टोहैड लेकिन आप हमें यहां क्यों लेकर आये हैं।


ऑक्टोहैड- ये कोई मामूली स्थान नहीं है वत्स। इस स्थान से और कई रहस्यमयी आयामों का द्वार खुलता है।


जॉन- आयाम! यानी कि वो जगह जो हमारे आसपास ही मौजूद होती है लेकिन उसका द्वार खोलने के लिए हमको अत्यधिक ऊर्जा चाहिए होती है?


ऑक्टोहैड- बिल्कुल सही समझे वत्स! मुझे भी एक आयाम का द्वार खोलना है जो यहां से कुछ ही दूर है। साथ ही विश्व को बताना भी है कि कौन आ गया है।


जॉन- आयमद्वार खोलने से क्या होगा प्रभु?


ऑक्टोहैड(मुस्कुराकर)- बस देखते जाओ।

अचानक ही उन्होंने कुछ दूरी पर कुछ लोगों को ऊंट की सवारी करते देखा।

ऑक्टोहैड- ये मानव किसकी सवारी कर रहे हैं?


जॉन- इनको ऊंट कहा जाता है। ये रेगिस्तान में बहुतायत में मिलेंगे।


ऑक्टोहैड- मानव को हमेशा से ही अपने से कमज़ोर का फायदा उठाने की आदत रही है पर मेरे राज में ऐसा अन्याय नहीं होगा।

फिर ऑक्टोहैड में उन दो मछुआरों को कुछ इशारा किया, दोनों दौड़ते हुए उन मानवों की तरफ गए। ऊंट पर बैठे लोगों ने जब दूर से किसी चीज़ को दौड़कर आते देखा तो पहले तो वे समझ ही नहीं पाए। उनमे से एक व्यक्ति हैरानी से बोला ” अरे ये क्या! ये कैसे जानवर हैं?” दूसरे व्यक्ति को भी कुछ समझ नहीं आया लेकिन जब दोनों मछुआरे अपने राक्षसी स्वरूप में उनके पास पहुंचे तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दोनों मछुआरों ने एक एक ऊंटसवार पर छलांग लगा दी, फिर उनको रेत पर पटककर अपने पैने पंजेनुमा हाथों से उनकी छाती चीर दी, और धड़कता हुआ दिल निकालकर खाने लगे। इतना वीभत्स दृश्य देखकर बाकी दो बचे ऊंटसवारों ने अपने अपने ऊंटों को तेजी से हांकना शुरू किया लेकिन वे भी नहीं बच पाए और उनका भी मछुआरों ने वही हाल किया।

जॉन- हा हा हा….अब इन तुच्छ मानवों की अक्ल ठिकाने आएगी।

ऑक्टोहैड- हां, चलो आगे बढ़ें।

सार्थक, शमशेर और संजीव ज़रूरत भर का सामान पैक कर रहे थे। तभी कृति सार्थक के पास आई।

कृति- तुम पर भी काफी गहरा असर हुआ है ऋषि चाचा की मौत का।


सार्थक- वे मेरे पिता नहीं थे लेकिन फिर भी मेरे लिए इतना कुछ किया उन्होंने, उनको न बचा पाने का गम तो रहेगा।


कृति- तुम एक मानव नहीं हो, मतलब उस तरह नहीं जैसे हम सब हैं लेकिन तुम्हारे अंदर भी वैसी ही भावनाएं हैं जैसे हम सबके अंदर होती हैं। ये देखकर मैं हतप्रभ हूँ।

सार्थक ने जब बैग पैक करके मुंह उठाकर देखा तो कृति की निगाहें उसकी निगाहों से टकरायीं और दोनो थोड़ी देर तक एक दूसरे को घूरते रहे लेकिन अचानक ही सार्थक ने इस अजीब सी स्थिति को नकारने के लिए एक प्रश्न कर डाला।

सार्थक- आ..अच्छा तो तुम लोग अपनी आर्गेनाइजेशन के लिए लोगों का चयन कैसे करते हो?


कृति- वो काम हम लोग नहीं हमसे ऊपर के और लोग करते हैं, ऐसा तभी होता है जब बहुत जरूरत हो और ऐसा बहुत कम होता है। हमें हमेशा बेस्ट लोग चाहिए अपने साथ।


सार्थक- तो मान लो कि आर्गेनाइजेशन के अंदर का कोई आदमी काम छोड़ना चाहे या आर्गेनाइजेशन के राज को बाकी दुनिया के सामने लाने की धमकी दे तो?


कृति- दोनों ही स्थितियों में एक विशेष प्रकार की गैस का इस्तेमाल करके व्यक्ति की याददाश्त मिटा दी जाती है। अगर कोई इस प्रक्रिया से बच भी गया तो बाकी दुनिया के सामने वो अगर चिल्लाकर चिल्लाकर भी हमारी आर्गेनाइजेशन के बारे में बताएगा तो कोई भला उसका क्यों यकीन करेगा, क्योंकि हमारी उपस्थिति का कोई सुबूत भी तो होना चाहिए। अच्छा मैंने सुना है कि तुम पर काले जादू या telekinesis का असर नहीं होता और तुम भारी मात्रा में cultists आ जाएं फिर भी अकेले भिड़ लेते हो, क्या ये सच है?


सार्थक(हल्का सा शर्माते हुए)- कृत्रिम मानव होने के अपने फायदे हैं।


कृति- तो क्या तुम ऑक्टोहैड से भी भिड़ सकते हो।


सार्थक- बिल्कुल नहीं! इन cultists को मारना अलग बात है, ऑक्टोहैड तो कुछ और ही है। उसको मेरे जैसे 10 भी नहीं मार सकते। अगर आप लोगों के हथियार काम नहीं आये तो ऑक्टोहैड से सीधी टक्कर आत्महत्या के ही समान है।

शमशेर और संजीव सोफे पर बैठे बड़ी देर से कृति और सार्थक को बात करते हुए देख रहे थे।

शमशेर- यार संजीव एक बात बता। एक कृत्रिम मानव को भी प्यार हो सकता है क्या?


संजीव- तू कृति के बारे में बोल रहा है क्या?


शमशेर- मुझे लगता है कि अपना छोटा भाई पसंद करता है उसे।


संजीव(हंसकर)- वाह रे! दस मिनट की बातचीत से कितना कुछ पता कर लिया तूने!

तभी मनीष और अवनीश जो अभी तक घर के ऊपरी हिस्से में थे, लिविंग एरिया में आये।

मनीष- मेरी बात राहुल से हो गयी है, अब हम लोगों को निकलना होगा।


शमशेर- ये राहुल कौन है?


मनीष- हमारी आर्गेनाइजेशन के जिन खतरनाक हथियारों का हमने ज़िक्र किया वो इसी के अंडर आते हैं, मतलब यही देख रेख करता है। इसे सभी हथियारों को चलाने का तरीका भी पता है। चलो अब निकलते हैं, समय कम है हमारे पास।

 

अध्याय 8- The Guardian

सार्थक, संजीव, शमशेर, मनीष, अवनीश और कृति जल्द ही ट्रेन में बैठे हुए थे। सबके दिमाग मे कुछ न कुछ चल रहा था, आखिरकार सार्थक ने चुप्पी तोड़ी।

सार्थक- पूरा का पूरा कोच खाली है, बड़ी अजीब बात है।

मनीष(मुस्कुराकर)- अजीब बात क्यों है। हो सकता है जितने लोगों ने इस कोच में सीट ऑनलाइन बुक करने की कोशिश की हो उनको एक बड़ी लंबी सी वेटिंग लिस्ट दिखी हो।

सार्थक- लेकिन ऐसा क्यों….ओह, यानी कि इसमें भी तुम्हारी आर्गेनाइजेशन का हाथ है।

मनीष- तुम अभी भी हमारी पूरी पावर को नहीं जानते।

सार्थक शमशेर के बगल में जाकर बैठ गया।

सार्थक- आपको अगर पीछे हटना हो तो….

शमशेर- सोचना भी मत लड़के।


सार्थक- मैं बस इसलिए कह रहा हूँ कि आगे का मिशन बहुत खतरनाक है, हममें से किसी को नहीं पता कि क्या होने वाला है।


मनीष- हमें एक आईडिया तो है कि क्या होने वाला है।


सार्थक- क्या मतलब?


अवनीश- मतलब हम वहां बिना प्लान के नहीं जा रहे सार्थक।


सार्थक- क्या प्लान है?

अवनीश ने मुस्कुराकर एक लंबा से बैग निकाला, उसमे एक गिटार के बराबर का यंत्र रखा हुआ था।

सार्थक- ये क्या है?


अवनीश- ये डायमेंशनल गेटवे है।


शमशेर- ये क्या करता है?


मनीष- ये हथियार सीधे सूर्य से ऊर्जा लेकर दूसरे आयाम में जाने वाला द्वार खोलता है।


शमशेर- अब ये आयाम क्या होता है?


मनीष- आयाम एक तरह से एक दूसरी दुनिया होती है जिसमे जाने का साधारण तौर पर कोई मार्ग नहीं होता लेकिन हमारे साथ दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों ने मिलकर इसे तैयार किया है। अब ऑक्टोहैड को सीधे तौर पर खत्म करने लायक कोई शक्ति तो है नहीं लेकिन उसे दूसरे आयाम में तो भेज सकते हैं।


संजीव- क्या ये आज तक एक बार भी इस्तेमाल हुआ है?


अवनीश- नहीं इस्तेमाल तो नहीं हुआ है, लेकिन ये पूरी तरह काम करता है। इसकी गारंटी हम लेते हैं।


शमशेर- काम करने की बात नहीं है, लेकिन क्या तुम खोला हुआ आयामद्वार वापस बन्द कर पाओगे?

ये सवाल सुनकर मनीष और अवनीश एक दूसरे का मुंह ताकने लगे।

शमशेर- तो तुम लोग आयामद्वार खोलोगे लेकिन उसे बंद करने का तरीका नहीं है तुम्हारे पास।


मनीष- वो अपने आप बन्द हो जाएगा…….जहां तक हमें लगता है।


सार्थक- पक्के तौर पर कहो मनीष।


अवनीश- देखिए मैं आप सबकी चिंता समझ सकता हूँ लेकिन ये हमारा एकमात्र विकल्प है ऑक्टोहैड के खिलाफ कुछ करने का। हम हिडन वारियर्स आज तक भूत प्रेत, डायन, चुड़ैल, पिशाच इत्यादि सबसे लड़े हैं लेकिन इतने शक्तिशाली शत्रु से कभी हमारा सामना नहीं हुआ। हमारे हथियार विशेषज्ञ राहुल की थ्योरी के हिसाब से आयाम द्वार कुछ मिनटों के लिए खुलेगा, एक छोटे से ब्लैकहोल की तरह अपने आसपास की हर चीज़ को खींचेगा और बन्द हो जाएगा।


शमशेर(क्रोधित होकर)- थ्योरी! यहां मानवता दांव पर लगी है और तुम एक थ्योरी पर भरोसा कर रहे हो? क्या पता ब्लैकहोल बन्द न हो और पूरी पृथ्वी को ही अपने अंदर खींच ले।


मनीष- पर ऐसे हमारे पास एक मौका तो है, ऑक्टोहैड के रहते तो पृथ्वी वैसे भी सुरक्षित नहीं है।


सार्थक- हथियार रख दो मनीष, हम कोई और रास्ता निकालेंगे।


कृति- क्या हम पर भरोसा नहीं सार्थक?


सार्थक- तुम पर है, इस हथियार पर नहीं।

ट्रेन बस राजस्थान पहुंचने ही वाली थी। मनीष, अवनीश और कृति के सामने सार्थक, शमशेर और संजीव खड़े थे। तभी मनीष का हाथ जेब की तरफ गया और उसने एक छोटी सी पेंसिल के बराबर बंदूक निकाल ली।

सार्थक(हंसकर)- अब ये क्या नया खिलौना है?

मनीष ने इस गन का एक बटन दबाया जिससे एक जाल निकला और सार्थक, शमशेर और संजीव सीट से बंध गए।

मनीष- ये नाइलो स्टील का जाल है, तुम्हारे जैसा कृत्रिम मानव भी इसमें से निकलने में कुछ समय लेगा।

तब तक ट्रेन रुक चुकी थी। मनीष, अवनीश और कृति तुरंत कोच से बाहर निकलने लगे। कृति ने गेट से निकलने से पहले एक नज़र सार्थक की तरफ डाली।

कृति- सॉरी सार्थक। पर ये ज़रूरी है।


सार्थक(चिल्लाते हुए)- तुम लोग पागलपन करने जा रहे हो! रुक जाओ!


शमशेर- कोई फायदा नहीं सार्थक, अब हमें इस जाल से निकलने पर ध्यान देना चाहिए।

सार्थक ने अपनी पूरी ताकत लगा दी, कुछ 5 मिनट में वे सब जाल से आज़ाद थे। बिना वक्त गंवाए वे दौड़कर प्लेटफार्म पर पहुंचे लेकिन तब तक मनीष, कृति और अवनीश वहां से निकल चुके थे।

सार्थक- अब हम इनको कहाँ ढूढेंगे?


शमशेर- ये किसी राहुल नाम के लड़के से होटल जयपुर पैलेस में मिलने वाले थे न! चलो वहीं चलकर पता करें।

दूसरी तरफ मनीष, अवनीश और कृति जयपुर पैलेस पहुंच चुके थे। राहुल उनको बाहर ही खड़ा मिल गया।

राहुल- इतनी देर कहाँ लगा दी?


मनीष- लंबी कहानी है।


राहुल- डायमेंशनल गेटवे गन लाये हो?


मनीष- हां, अच्छा राहुल तुम पक्के तौर पर ये कह सकते हो कि आयामद्वार कुछ ही समय तक खुलकर अपने आप बन्द हो जाएगा?


राहुल- देखो दोस्त, जब ये गन बन रही थी तो मैं भी बाकी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर प्रोसेसिंग देख रहा था तो मैं पूरी तरह आश्वस्त हूँ कि आयामद्वार कुछ ही समय के लिए खुलेगा। तुम बस अपना निशाना सही रखना, द्वार ऑक्टोहैड के आसपास ही खुलना चाहिए। ज़रा लोकेटर पर ऑक्टोहैड की पोजीशन देखो।

मनीष ने जेब से लोकेटर निकाला।

मनीष- लगता है पश्चिम दिशा में सुनसान रेगिस्तानी इलाके में कहीं है।


अवनीश- ठीक है, अब ज़्यादा समय नष्ट मत करो। अगर सार्थक पहुंच गया तो बेकार में काम मे बाधा आएगी।

वे लोग होटल से निकल गए, कुछ ही देर में सार्थक, शमशेर और संजीव भी होटल पहुंच गए।

सार्थक- यहां आसपास तो नज़र नहीं आ रहे।


शमशेर- लगता है राहुल को लेकर ऑक्टोहैड से भिड़ने निकल गए।


सार्थक- राहुल कुछ समय के लिए यहां रुका था तो उसने चेक इन तो किया होगा न?


शमशेर- चलो रिसेप्शन पर चलकर पूछें।

सार्थक रिसेप्शनिस्ट के पास गया।

सार्थक- ज़रा देखकर बताइए कि आज किसी राहुल ने चेक आउट किया है क्या?


रिसेप्शनिस्ट- और मैं आपको ये क्यों बताऊं?


सार्थक(500 का नोट दिखाकर)- इसके लिए।


रिसेप्शनिस्ट(नोट लेकर)- हां सर, कुछ लोग अभी यहां आए तो थे। बड़ी अजीब अजीब बातें कर रहे थे, मैंने कुछ कुछ सुना था, पश्चिम दिशा के सुनसान रेगिस्तानी हिस्से में जाने की बात कर रहे थे।


सार्थक- धन्यवाद।

फिर सार्थक, शमशेर और संजीव के पास आया।

सार्थक- पता चल गया कि वे कहां पर हैं।

राजस्थान के विस्तृत फैले हुए रेगिस्तान में दो आकृतियां कुछ काले चोगे और काले नकाब वाले लोगो के सामने खड़ीं थीं…..मनुष्य रूप में ऑक्टोहैड और जॉन। शाम का पहर था और चांद की रोशनी रेत पर पड़ रही थी।

ऑक्टोहैड- बस इतने ही लोग? ये तो 500 के आसपास होंगे।


जॉन- लोग तो और भी थे प्रभु लेकिन उस सार्थक और किसी गुप्त संस्था के लोगों की वजह से अब हम आधे भी नहीं बचे हैं। मेरे जितने लोग राजस्थान के आसपास थे, वो सब यहां पर हैं और बाकियों को आपके आगमन की सूचना दे दी गयी है।


ऑक्टोहैड- कोई बात नहीं, मेरे रहते अब लोगों की संख्या से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।


जॉन(बाकी cultists की तरफ देखकर)- मेरे मित्रों ,आज हमारी तपस्या का फल हमको मिला है। हमारे ईश्वर लाखों साल की कैद में आज इस धरती पर वापिस आये हैं, लेकिन ये समय खुशी मनाने का नहीं बल्कि दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने का है जिसकी शुरुआत होगी आसपास के गांवों से। सब लोग इन गांवों में जाओ और लोगों को ऑक्टोहैड की तरफ से संदेश दो कि या तो वे हमारे साथ मिल जाएं या एक दर्दनाक मौत के लिए तैयार रहेंगे। इसमें आपका नेतृत्व रेड हुड का आखिरी बचा सदस्य और मेरे भाई का भरोसेमंद दोस्त पुलकित करेगा।


पुलकित(सबसे आगे आकर)- इस सम्मान के लिए शुक्रिया मुखिया जी और महान ऑक्टोहैड।

सब लोग राजस्थान के आसपास के छोटे गांवों की ओर जाने लगे कि तभी जॉन पुलकित के पास आया।

जॉन- एक बात बताओ पुलकित कि उस दिन सार्थक ने पुलिस स्टेशन में हर रेड हुड के सदस्य को मार दिया था फिर तुम कैसे बचें?


पुलकित- शमशेर मुझे पहले से जानता था मुखिया जी इसलिए हेनरी ने मुझे सामने जाने से मना किया था।


जॉन- चलो अच्छा है, कम से कम मेरे भाई के साथ का कोई तो बचा है। मेरे लोगों ने भी तुमको शायद एक बार पकड़ लिया था आखिरी कुर्बानी के लिए लेकिन अब ये पुराने मसले कोई मायने नहीं रखते। जो cultists का एकमात्र लक्ष्य था बस वो पूरा हो गया।


पुलकित- ठीक कहते हैं आप, बस अब दुनिया पर अपना राज़ फैलाने की देर है।

राजस्थान के दूर दराज के इलाके में बसा एक छोटा सा गांव जहां सीमा पर लल्लन पान वाले कि छोटी सी दुकान थी, वहां कुछ दो चार लोग खड़े आपस मे हंसी मजाक कर रहे थे।

विनोद- भई इस बार तो लगता है कि अपने गांव में 24 घंटे की बिजली आ ही जाएगी।


मनोज- अरे भैया, अभी 10 घंटे आ जाये बस काफी है।

अचानक पूरे गांव की बिजली चली गयी और गांव अंधेरे में डूब गया।

लल्लन- लो भैया, आ गयी 24 घंटे बिजली। हा हा हा।


विनोद- जब तक गवर्नमेंट में निकम्मे लोग रहेंगे तब तक यही हाल रहेगा।


मनोज- वैसे इतने टाइम तो बिजली हमेशा रहती थी भैया, आज क्या हुआ?


विनोद- हम्म। बात तो तेरी सही है, कटिया चोर रघु का काम तो नहीं है ये?

तभी सबको रघु दूर से आता दिखा।

रघु- अरे भैया हम ये सब गलत काम छोड़ दिये।


विनोद- फिर कोई नया कटिया चोर होगा।

तभी शांत अंधेरे वातावरण में कुत्तों , बिल्लियों के रोने की आवाज़ एक साथ गूंजने लगी।

लल्लन- अब ये सब काहे चिल्लम चिल्ली मचा रहे हैं?


विनोद- सब एक साथ रो रहे हैं, कोई बड़ा अपशकुन है।


मनोज- किन बातों में मानते हो भैया आप भी।

तभी सबको दूर से दो जानवर आते दिखे।

विनोद- अबे ये क्या है?


रघु- भ..भैया! ये तो बड़े बड़े जानवर से लग रहे हैं!

उन दो जानवरों के पास आते देर नहीं लगी, ये वही दो मछुआरे थे जो ऑक्टोहैड की शक्ति के प्रभाव में थे। उनका भयानक स्वरूप देखकर लल्लन की दुकान पर बैठे लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

मनोज- भ..भैया भागिए! भागिए जल्दी!


विनोद- ह..हां हां। भाग!

मनोज और विनोद उन मछुआरों के आने से पहले ही भाग गए लेकिन लल्लन और रघु की किस्मत उतनी अच्छी नहीं थी। उनकी ज़ोरदार चीखें विनोद और मनोज के कानों में पड़ी लेकिन वे पीछे नहीं मुड़े। वो भागते हुए सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचे, थानेदार सीताराम आराम से टेबल पर पैर पसारकर बैठा हुआ था। विनोद और मनोज दौड़ते हुए अंदर गए।

सीताराम- अबे क्या तूफानमेल की तरह आ रिये हो?


विनोद- वो रघु..रघु और लल्लन


सीताराम- रघु? फिर बिजली चोरी के धंधे पर लग गया क्या?


मनोज- नहीं साहब! मारा गया, दोनो मारे गए।


सीताराम- मारे गए? किसने मार दिया?


विनोद- दो जानवर थे, पता नहीं क्या थे।


सीताराम- जानवर? अबे यहां आजतक लकड़बग्घे को भी घूमते देखा है? एक तो  बिजली नहीं ऊपर से तुम दोनों गांजा मारके आ गए दिमाग का दही करने।

मनोज- सच बोल रहे हैं हम। आप चलो तो हमारे साथ, अगर हम सही न बोल रहे हों तो अंदर कर देना।

सीताराम- ठीक है, गाड़ी निकाल प्रजापति।

पुलिस जीप में बैठकर विनोद, मनोज, सीताराम और कुछ पुलिसवाले लल्लन की दुकान तक पहुंचे। वहां का दृश्य किसी के भी दिल मे रौंगटे खड़े के देने वाला था, लल्लन और रघु की लाशें पड़ीं थीं और दो मछुआरे उनका सीना चीरकर दिल निकालकर खा रहे थे।

सीताराम- प्रजापति, ब..बंदूक निकाल। अबे जल्दी कर।

सीताराम और दो थानेदार धीरे धीरे जीप से नीचे उतरे लेकिन उनकी आहट दोनों राक्षसरूपी मछुआरों को मिल गयी लेकिन इससे पहले की वो किसी की भी तरफ बढ़ते, धड़ाधड़ गोलियां चलने लगीं और कुछ ही देर में मछुआरों के शरीर शांत पड़ गए। सीताराम ने पास जाकर देखा।

सीताराम- ये आखिर हैं क्या चीज़? इंसान जैसे जानवर?

तभी सबने सामने से आते काले चोगे वाले नकाबपोश लोगों को देखा, सबसे आगे पुलकित था। जब सीताराम को कुछ समझ नहीं आया तो वो उनकी तरफ बंदूक तानकर खड़ा हो गया लेकिन पुलकित ने telekinesis द्वारा उसके हाथ से बंदूक गिरवा दी।

तब तक बंदूक के शोर से बाकी गांववाले जग चुके थे और सड़कों पर निकल आये थे।

पुलकित- गांव वालों! तुमको cultists की तरफ से ये सूचना दी जाती है कि हमारे देवता ऑक्टोहैड लाखों वर्षों की कैद से बाहर आ चुके हैं, अब या तो अपने ईश्वर को छोड़कर उनकी शरण मे जाओ या फिर अपने प्राणों से हाथ धो लो।

गांव वालों ने पहले एक दूसरे की ओर देखा और फिर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे, सभी हंस रहे थे केवल विनोद, मनोज और सीताराम को छोड़कर। तभी पुलकित का हाथ हवा में घूमा और एक गांववाले की गर्दन उसके धड़ से अलग हो गयी, ये देखकर सभी घबरा गए।

पुलकित(मुस्कुराते हुए)- तुम सबको अपनी जान बचाने का एक मौका दिया गया लेकिन लगता है कि तुममे से कोई अपने प्राणों को लेकर गंभीर नहीं है। खैर, तुम सबकी जान लेने में मज़ा आएगा।

तभी कहीं से आवाज़ आयी “रुक जाओ”, सबका ध्यान उस तरफ गया जहां मनीष, अवनीश, राहुल और कृति चारों हिडन वारियर्स खड़े थे।

पुलकित- तुम लोग कौन हो?


मनीष- हिडन वारियर्स का नाम तो सुना ही होगा तुमने।


पुलकित- अरे हां, तुम्हारे बारे में तो हर cultist को पता है, 500 सालों से नाक में दम किया है तुमने हमारी, पर अब हमारे प्रभु आज़ाद हैं, अब तुममे से कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।


मनीष- मानवता को हराने में कोई सफल नहीं हो सकता, न तुम और न तुम्हारा भगवान।


पुलकित- वाकई? ज़रा देखें तुम चार क्या कर पाते हो?

पुलकित ने अपना हाथ हवा में उठाया और मनीष ने अपनी छाती पर एक दबाव महसूस किया।

मनीष- ये लोग telekinesis इस्तेमाल कर रहे हैं, अपना हथियार निकालो राहुल!

राहुल ने एक विशेष प्रकार की रॉड निकाली जो उसने उस रेगिस्तानी रेतीली ज़मीन पर गाड़ दी।

पुलकित- हा हा हा, कुछ नहीं हुआ तुम्हारे इस हथियार से। अब मरने के लिए तैयार…..अरे, telekinesis काम क्यों नहीं कर रहा?


मनीष-यह रॉड वातावरण में फैली हर प्रकार की ताकतवर ऊर्जा तरंगों को काट सकती है। तुम्हें भी तुम्हारी शक्तियां ऑक्टोहैड से मिल रही हैं जिसका प्रवाह अब तुम्हारे शरीर मे बन्द हो चुका है। अफसोस लेकिन अब तुमको पिटना पड़ेगा।

जॉन और ऑक्टोहैड उस गांव से कुछ मील दूर खड़े थे।

जॉन- उनको इतना समय क्यों लग रहा है?

ऑक्टोहैड- लगने दो, मेरा काम तो हो गया। हा हा हा।

जॉन- कैसा काम प्रभु ?

ऑक्टोहैड- हम राजस्थान जिस आयामद्वार को ढूंढने आये थे वो हमको मिल चुका है, अब बस इसे खोलने की देर है।

ऑक्टोहैड ने अपने हाथों से हवा में एक तरंग छोड़ी जिसमे कुछ दूर हवा में जाकर एक गोल घेरा बना लिया।

जॉन- ये..ये हवा में गोला कैसे बन गया?


ऑक्टोहैड- इस गोले के उस पार वो दुनिया है जहां से मैं आया हूँ। मेरे अलावा और भी भयानक प्राणी हैं इस आयाम में।


जॉन- तो आप पृथ्वी पर कैसे आये? और देवताओं ने आपको कैद करके समुद्र में क्यों बांधा?


ऑक्टोहैड- हर बात जानना ज़रूरी नहीं वत्स, समय के साथ सब अपने आप पता चल जाता है। फिलहाल तो इस आयामद्वार को मैंने इसलिए बनाया है ताकि अपने खतरनाक गुलामों को मैं यहां ला सकूं जो विश्वविजय में मेरी…मतलब हमारी मदद करेंगे।

जल्द ही उस आयाम में से कुछ भयानक एक आंख वाले हरे मोटे प्राणी निकले जिनके चमगादड़ जैसे कान और पैने दांत थे। एक बार को जॉन भी उन्हें देखकर सिहर गया।

ऑक्टोहैड- घबराओ मत, ये तुमको कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे और जिसको पहुंचाएंगे उसके टुकड़े भी नहीं छोड़ेंगे।आओ अब उस गांव में चलें, देखें क्यो इतना समय लग रहा है cultists को।

दूसरी तरफ cultists भागते हुए हिडन वारियर्स की तरफ बढ़ रहे थे।

मनीष- तैयार हो जाओ दोस्तों, इनके पास telekinesis भले ही न हो लेकिन लड़ना ये भी जानते हैं।


राहुल- अपने रहते चिंता क्यों करते हो गुरु!

राहुल ने कुछ बंदूकें मनीष, अवनीश और कृति की तरफ फेंकीं।

राहुल- ये एनर्जी ब्लास्टर्स हैं, एक बार मे दो cultists को उड़ा देंगे।


मनीष- तो फिर देर किस बात की।

फिर चारों हिडन वारियर्स ने मोर्चा खोल दिया। वे लोग इतनी कुशलता से बंदूक चला रहे थे cultists उन तक पहुंचने से पहले ही चीथड़ों में तब्दील हो जा रहे थे। दस मिनट बाद रेगिस्तान की रेतीली ज़मीन पर सैकड़ों cultists की लाशें पड़ी हुई थीं। तभी मनीष का ध्यान अपने लोकेटर की तरफ गया।

मनीष- ऑक्टोहैड! वो इसी तरफ आ रहा है! डायमेंशनल गेटवे गन तैयार करो जल्दी!

राहुल- इतनी जल्दी मत करो। ऑक्टोहैड को अपने भक्तों की नाकामयाबी का पता तो चल ही गया होगा , हमें छुपकर उनका इंतजार करना होगा। हथियार मुझे दो ज़रा।


मनीष(बैग थमाते हुए)- ये लो, क्या करोगे इसका?


राहुल- इसकी फ्रीक्वेंसी बढ़ा दूं ताकि आयाम द्वार आराम से खुल जाए, बिना वक्त गंवाए।

तभी वातावरण में एक आवाज़ गूंजी “छुपने की कोई ज़रूरत नहीं बच्चों” सभी ने आवाज़ की दिशा में मुड़कर देखा तो एक दिल दहला देने वाला दृश्य पाया। मनुष्यरूपी ऑक्टोहैड जॉन के साथ धीरे धीरे हवा में उड़ता हुआ उन्हीं की तरफ आ रहा था और साथ मे थी उन एक आंख वाले भयानक प्राणियों की सेना।

ऑक्टोहैड- तुम बालकों ने मेरे भक्तों को इतनी आसानी से खत्म कर दिया मतलब की तुममें असाधारण कौशल है। इस दुनिया मे मेरा राज कायम करने में मेरी मदद करो और मैं तुमको इतनी शक्तियां दूंगा जिसके बारे में तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा। मैं तुम्हारे निर्दयी ईश्वर की तरह नहीं हूं , मैं सबकी सुनूँगा और सबकी इच्छाएं पूरी करूंगा।


कृति- डायमेंशनल गेटवे गन निकालिये मनीष भैया, जल्दी।


मनीष- हां, मैं निकालता हूँ।

ऑक्टोहैड अभी भी जॉन के साथ हवा में ही तैर रहा था, उसने राहुल की तरफ देखा।

ऑक्टोहैड- तुमको तुम्हारी माँ वापिस चाहिए, जिनका देहांत बचपन मे हो गया था। क्यों है ना?


राहुल(अचंभित होकर)- त..तुम्हें कैसे पता?


ऑक्टोहैड- मैं तुमको अवसर देता हूँ, मेरी मदद करो और मैं तुम्हारी माँ को ज़िंदा वापिस ले आऊंगा।


राहुल(आंखों में आंसू भरकर)- क्या तुम..आप ऐसा कर सकते हैं?


ऑक्टोहैड- बिल्कुल, मैं तुमको वो सब दे सकता हूँ जो तुम्हारा ईश्वर कभी नही देगा।


मनीष(फुसफुसाकर)- उसकी मत सुनो राहुल, ये ऑक्टोहैड भी मरे हुए इंसान को वापिस नहीं ला सकता।


राहुल- अमर रहे ऑक्टोहैड!

ऑक्टोहैड धीरे धीरे धरती पर आया और मनीष के सर पर हाथ रखा। ये देखकर अवनीश सबसे पहले विचलित हुआ, उसने दौड़कर डायमेंशनल गेटवे गन उठाना चाही जो कि राहुल के पास पड़ी थी लेकिन ऑक्टोहैड ने उसे क्रोध भरी नजरों से देखा और अवनीश का शरीर वहीं धूल बन गया और रेगिस्तानी मिट्टी से जा मिला। ये देखकर ही मनीष और कृति की हृदय विदारक चीख निकली “नहीं”, मनीष भी अपनी छुपने की जगह से निकलकर गन उठाने के लिए भागा और उसे भी ऑक्टोहैड ने धूल में बदल दिया। कृति इन सब घटनाओं से इस कदर घबरा गई कि वो उल्टे पांव भागने लगी, भागते भागते ही वो एक कठोर शरीर से टकरा गई। उसने सामने देखा तो सार्थक, शमशेर और संजीव खड़े थे। कृति तुरंत सार्थक से लिपटकर रोने लगी।

कृति- उसने मार दिया, उसने मेरे भाइयों को मार दिया।


सार्थक- ये क्या कह रही हो कृति?


कृति- हां, राहुल ने ऐन मौके पर धोखा दे दिया और पूरा मिशन फेल हो गया।


सार्थक- वो..वो गन कहाँ है?


कृति- शायद अब ऑक्टोहैड ने उसे हथिया लिया है।


शमशेर- अब क्या करें सार्थक?


सार्थक- मेरे दिमाग मे कुछ है, लेकिन हमें जल्दी उस पर काम करना होगा। सुनो मेरा प्लान।

सार्थक ने अपना प्लान बताया। जॉन, ऑक्टोहैड और राहुल अब एक साथ खड़े थे।

राहुल- क्या हमें उस लड़की को नहीं पकड़ना चाहिए महान ऑक्टोहैड?


ऑक्टोहैड- नहीं, वो फिलहाल के लिए कोई खतरा पैदा नहीं करेगी। ज़रा ये हथियार तो दिखाओ जिसके बल पर ये मुझे पराजित करने का सोच रहे थे।

तभी अचानक से सार्थक आ गया।

सार्थक- अमर रहे ऑक्टोहैड!


जॉन(आश्चर्य से)- ये..ये हमारा सबसे बड़ा शत्रु है महान ऑक्टोहैड! वही कृत्रिम मानव जिसने मेरे सारे लोगों को मार दिया।


ऑक्टोहैड- अच्छा, तो तुम ही वो लड़के हो जिसने मेरे भक्तों को अकेले मार गिराया।


सार्थक- मैंने ये सब सिर्फ आपकी नज़रों में आने के लिए किया, मैं आपके लिए जॉन से बेहतर शिष्य साबित होऊंगा।


जॉन- ये लड़का झूठ बोल रहा है प्रभु!


ऑक्टोहैड- मैं जानता हूँ कि ये हथियार वापस पाने के लिए कोई हथकंडे अपना रहा है लेकिन तुमने मुझे मूर्ख समझने की भारी गलती कर दी लड़के जिसका हर्जाना तुझे जान देकर भुगतना होगा।

अब तक शांत खड़े एक आंख वाले भयानक जीव अब सार्थक पर हमला बोल दिए। सार्थक ने दो चार जीवों को तो लात घूंसे से काबू कर लिया लेकिन ये जीव बहुतायत में होने के साथ साथ शक्तिशाली और क्रूर भी थे जो सार्थक के अभेद्य शरीर को फाड़ खाने को बेताब थे लेकिन सार्थक भी उन राक्षसी जीवों का पूरी बहादुरी से मुकाबला कर रहा था। सभी का ध्यान सार्थक की लड़ाई की ओर ही था कि शमशेर चुपके से गया और चीते जैसी चपलता दिखाकर हथियार निकाल लाया। तब तक ऑक्टोहैड का ध्यान शमशेर पर चला गया था।

ऑक्टोहैड(क्रोधित होकर)- तुम मानव ऐसे नहीं मानोगे , अब मुझे अपने असली रूप में आना ही होगा।

तभी ऑक्टोहैड अपना मानव रूप त्याग कर फिर से वही 100 फुट की चलती फिरती मौत बन गया। शमशेर ने भी बिना देर किए ऑक्टोहैड के विशाल शरीर की तरफ गन को चला दिया, हवा में एक आयमद्वार खुल गया।

ऑक्टोहैड- हा हा हा, इस आयामद्वार को खोलकर मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते तुम! मेरी शक्ति को बहुत कम करके आंका है तुमने।

तब तक ऑक्टोहैड के जीवों ने सार्थक, शमशेर, संजीव और कृति को अपने काबू में कर लिया था।

ऑक्टोहैड- कितने बेबस , कितने लाचार हो तुम मानव। जानते हो कि मैंने भी एक आयामद्वार यहां से कुछ मील दूर खोला है, मेरी दुनिया का आयामद्वार, वहाँ से अभी तक तो केवल ये एक आंख वाले राक्षस आये हैं, अभी तो कई भयानक मौतों का आना बाकी है और उस मौत का तांडव दिखाने के लिए मैं तुम सबको ज़िंदा रखूंगा।

तभी डायमेंशनल गेटवे द्वारा खोले गए आयामद्वार से एक रहस्यमयी आकृति बाहर आई, सब लोगों ने गौर से देखा कि एक मानव जिसकी हल्की बढ़ी हुई दाढ़ी थी और केवल एक काली जीन्स जैसा वस्त्र पहन रखा था, उसके हाथों और आँखों से ऊर्जा प्रस्फुटित हो रही थी। वो धीरे धीरे उड़ता हुआ बाहर आया, बाहर की स्थिति को परखने में उसे अधिक समय नहीं लगा।

ऑक्टोहैड- कौन है तू मनुष्य?



संरक्षक- मेरा नाम समीर गुप्ता है लेकिन तुम मुझे संरक्षक कह सकते हो। कुछ समय पहले मैं धरती को एक संकट से बचाने के लिए ही इस Dark Realm नामक आयाम में आया था और तुम भी मुझे शक्ल सूरत से कोई भले आदमी तो नहीं लगते।


ऑक्टोहैड(क्रोधित होकर)- मेरा नाम ऑक्टोहैड है और मैं तुझ जैसे मामूली प्राणियों को मसल कर रख देता हूँ।

ऑक्टोहैड ने अपना विशाल पंजा संरक्षक की तरफ बढ़ाया लेकिन संरक्षक ने ऊर्जा का एक वार करके उसके विशाल शरीर को कई फुट पीछे धकेल दिया। ये देखकर जॉन और राहुल को सबसे अधिक झटका लगा। फिर संरक्षक ने उन एक आंख वाले प्राणियों की ओर देखा जिन्होंने सार्थक, शमशेर , संजीव और कृति को बंदी बनाया था। उसने एक हाथ उठाया और उससे निकली किरणों से वे प्राणी धूल बनते चले गए, सब लोग आज़ाद हो गए।

सार्थक(चिल्लाकर)- देखिए आप जो भी हैं, आपके आयामद्वार के अलावा एक द्वार और खुला है अगर वो बन्द नहीं किया गया तो धरती पर कयामत आ जायेगी।

संरक्षक ने पलटकर कोई जवाब नहीं दिया लेकिन उसे पता चल गया कि दूसरा द्वार कहाँ खुला है, वो उड़ता हुआ दूसरा द्वार बंद करने गया लेकिन सामने फिर से ऑक्टोहैड आ गया।

ऑक्टोहैड- तू ..तू वाकई में बहुत शक्तिशाली है। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है? कोई मानव इतना शक्तिशाली कैसे हो सकता है?

संरक्षक- अपनी मौत के बाद पता करते रहना।

संरक्षक ने ताबड़तोड़ ऊर्जा के वार करके ऑक्टोहैड को पीछे की ओर धकेला और फिर अपने हाथ को उठाया जिससे ऊर्जा तरंगें निकल रही थीं जिनकी मदद से उसने ऑक्टोहैड द्वारा खोला गया आयामद्वार बन्द कर दिया।

ऑक्टोहैड- ये..ये क्या किया तूने! कोई बात नहीं,मैं फिर से द्वार खोल लूंगा।


संरक्षक- जब मैं मौका दूंगा तब न!


ऑक्टोहैड- तेरे दो चार वार चल गए तो खुद को क्या समझ बैठा। अभी तेरे टुकड़े करता हूँ।

फिर शुरू हुआ ऑक्टोहैड और संरक्षक के बीच एक अनोखा युद्ध। कभी संरक्षक ऑक्टोहैड पर भारी पड़ता तो कभी ऑक्टोहैड संरक्षक पर। उनके टकराव से इतनी ऊर्जा पैदा हो रही थी कि बाकियों को इस युद्ध से कई फ़ीट दूर खड़े होकर देखना पड़ रहा था।

सार्थक- आपको जल्दी करना होगा संरक्षक! आपके आयाम का द्वार अब छोटा होता जा रहा है!


संरक्षक- हम्मफ़, यानी मुझे अपनी परमशक्ति का एक एक कतरा इस्तेमाल करके ऑक्टोहैड को अपने आयाम में ले जाना होगा।

संरक्षक ने फिर अपनी पूरी शक्ति ऑक्टोहैड को अपने आयाम में खींचने में लगा दी।

जॉन- इसका प्रतिरोध करें महान ऑक्टोहैड! मैं और राहुल वो यंत्र ही तोड़ देंगे जिसकी वजह से ये आयाम द्वार खुला है!

जॉन और राहुल ने यंत्र लेने का प्रयास किया लेकिन सार्थक ने लात मारकर दोनो को दूर गिरा दिया।

सार्थक- थोड़ा बहुत एक्शन का मौका तो मैं भी नहीं छोडूंगा।


जॉन- मुझे वैसी ही शक्तियां प्रदान करें ऑक्टोहैड जैसी पहले की थी, ताकि मैं इस नराधम को पीट पीट कर मार डालूँ।


ऑक्टोहैड- उम्म्फ….नहीं दे सकता क्योंकि मेरी शक्ति का एक एक कतरा अभी इस संरक्षक का विरोध करने में जा रहा है। इस धरती पर मुझे मेरी प्रभुता खत्म होती नजर आ रही है।


संरक्षक- कुछ समय पहले अत्यधिक शक्ति पाकर मैं भी विश्व को अपनी जागीर समझने लगा था शायद इसलिए आज मेरे पापों की सज़ा मुझे डार्क रियल्म में कैद होकर मिल रही है, तू भी अब वहीं सड़ेगा।

फिर संरक्षक ने अपनी पूरी इच्छाशक्ति ऑक्टोहैड को डार्क रियल्म के आयाम द्वार के अंदर खींचने में लगा दी। ठीक उसी समय द्वार तेज़ी से छोटा होने लगा।

ऑक्टोहैड- नहीं ये मेरा अंत नहीं है! ये अंत नही हो सकता, मैं वापिस आऊंगा! वापिस आऊंगा मैं!


सार्थक- अब गन नष्ट करने का सही वक्त है।

सार्थक ने डायमेंशनल गेटवे गन को उठाया और अपने शक्तिशाली हाथों से तोड़ डाला, साथ ही डार्क रियल्म के आयाम का द्वार भी एक तीव्र रोशनी के साथ बन्द हो गया।

सार्थक- चलो अब कम से कम इस गन का प्रयोग फिर से किसी आयाम द्वार को खोलने में नहीं किया जा सकेगा।


कृति- तो..ऑक्टोहैड अब कैद में है?


सार्थक-हां।


शमशेर- ईश्वर का लाख लाख शुक्र है।


संजीव- जॉन और राहुल तो भाग गए, वे ऑक्टोहैड को छुड़वाने की कोशिश ज़रूर करेंगे।


कृति- मैं हिडन वारियर्स को राहुल के धोखे के बारे में बताऊंगी, वो हमसे ज्यादा देर नहीं छुपा रहेगा।


सार्थक- हां और अभी बचे खुचे cultists को ढूंढकर खत्म भी तो करना है।


कृति(दुखी आवाज़ में)- मुझे नहीं लगता कि अब मैं ये काम जारी रख पाऊंगी।

सार्थक ये बात सुनकर शमशेर और संजीव को कुछ इशारा करता है।

शमशेर- ओ..आजा भई संजीव! ऑक्टोहैड तो खत्म हो गया, अब हम राजस्थान घूम लें थोड़ा सा। तुम आ जाओगे न सार्थक?


सार्थक- हां मैं बाद में आप लोगों को जॉइन करूंगा।

शमशेर ने जाते जाते सार्थक और कृति को देखा और फिर हल्के से मुस्कुराकर सार्थक को आंख मारी जिससे सार्थक ने उसे हाथ हिलाकर जल्दी जल्दी जाने का इशारा किया। कृति एक भीषण युद्ध के बाद शांत पड़े मरुस्थल को निहार रही थी। सार्थक उसके बगल में आकर खड़ा हो गया।

कृति- इस जंग ने मेरा सब कुछ ले लिया सार्थक, पिता, चाचा, दो भाई, पूरा परिवार बलि चढ़ गया।


सार्थक- सही कहा तुमने, मेरे भी रचनाकार, जिन्होंने मुझे पाला सब चले गए।

कृति के गाल पर आंसू की धार बह निकली थी, सार्थक ने उसके कंधे पर सांत्वना देने के लिए हाथ रखा तो कृति उसके सीने से जा लगी।

कृति- अगर मुझे कभी किसी काम मे मदद की ज़रूरत पड़ी तो क्या तुम मेरा साथ दोगे?

सार्थक(मुस्कुराकर)- हमेशा, बस एक कॉल कर देना।


कृति- मुझे कुछ समय तक कुछ नहीं करना, बस अकेले रहना है।


सार्थक- मैं समझ सकता हूँ।


कृति-एक बात बोलूं सार्थक, तुम कहने के लिए कृत्रिम मानव हो लेकिन कई ज़िंदा इंसानों से अच्छे हो।


सार्थक- आ..थैंक्स।


कृति- अब मैं चलती हूँ।


सार्थक- तुम्हारे पास मेरा नंबर तो है ना?


कृति(मुस्कुराकर पीछे पलटते हुए)- फेसबुक पर रिक्वेस्ट भेज दूंगी।

सार्थक कृति को तब तक जाते देखता रहा जब तक वो उसकी नज़रों से ओझल नहीं हो गयी ,फिर वो खुद उस रेगिस्तान से निकलकर शमशेर और संजीव को ढूंढने चला गया।

 

Written BySamvart Harshit for Comic Haveli

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6 Comments on “ऑक्टोहेड- प्रादुर्भाव और अंत”

  1. विदेशी भाषा मे पढ़ी थी लेकिन आज हिंदी में पुनः पढ़कर बहुत खुशी मिली।
    आरम्भ से ही कहानी बड़ी मजेदार बन पड़ी है। प्रत्येक चरित्र को काफी बढ़िया तरीके से आपने उभरा है। सार्थक कई जगह काफी प्रॉमिसिंग लगा और octahead का सच मे तांडव देखना है।
    इस पार्ट में लेखन अच्छा है शब्द तोल मोल के लिखे हैं आपने, कुछ जगह वाक्य टूट से रहे हैं जो सुधारने की आवश्यकता है।
    सार्थक को कई मौकों पर लड़ते हुए देखा गया लेकिन युद्ध का सही से जिक्र नहीं किया गया।
    ऐसा ही समीर और octahead के मध्य भी हुआ है जिसका जिक्र मैंने अंग्रेजी भाग में भी किया था लेकिन क्योंकि ये अनुवाद है तो आपको इसमें अधिक बदलाव नहीं करने थे तो समझ सकता हूँ।
    आशा है आगे कभी भविष्य में octahead और समीर को फिर से देख पाएंगे।
    यांत्रिक/अर्धमानुष सार्थक जल्द ही एक नई कहानी में दिखे इसकी आशा करता हूँ।
    भविष्य के लिए शुभकामनाएं।

    1. Dhanyawad review ke liye. Ladai ki adhik detailing par gaur kiya jayega , aur Sarthak ke origin ke upar aapko alag se ek laghu katha zarur milegi

  2. Wah bhai bahut badiya kahani likhi hai.padkar maja aa gaya.par is me octahead ko 1000 sal pahale kis tarah ked kiya tha y nahi pata chala. Aur aayam dwar se jo samir nikala hai y wo hi hai na jo DARK REALMS ME KALNETRI KO LEKAR aayam dwar me chala gaya tha. Octahead bhi samir se dar gaya.matlab samir powerful cractor hai.sarthak ki origen bhi bahut badiya lagi hai. Ab aagami ank me hi pata chalega ki octahead kese wapas aa pata hai ki nai. Sarthak ki bhi koi story likhana bhai jis me us ki origen aur rashi ke bhai mahaveer aur un ki sanstha ja pata chale.
    Itani badiya story ke liye aap ko dhanyawad aur bahut bahut shub kamana.
    Next story ka intajaar rahega.

    1. Bahut Dhanywad ji, actually octohead lakho saal se prithvi par kaid tha par vo kyon kaid tha , kaise kaid tha, ye sab Dark Realms 2 me pata chalega. Tab tak uski utpatti ko ek rahasya rakha gya hai, sath hi gupt sanstha ‘hidden warriors’ ke log bhi aage Dark Realm 2 me dekhne milenge.

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