Origin Stories Of Indian Superheroes – Dhruv

साल 1987,

राजकॉमिक्स को आये हुए सालभर हो चुका था, गगन और विनाशदूत के बाद नागराज राजकॉमिक्स का पहला सुपरहीरो बनकर एंट्री ले चुका था।   

 

 


पर अब संजय गुप्ता जी को तलाश थी राजकॉमिक्स के दूसरे सुपर सितारे की , और ये तलाश खत्म हुई अनुपम सिन्हा जी पर आकर न न न अनुपम सिन्हा वो सुपर सितारे नही थे बल्कि वो तो उसके जनक थे ओर उस सितारे का नाम उत्तर के सबसे चमकीले सितारे पर था ओर नाम था उसका सुपर कमांडो ध्रुव।

नमस्कार दोस्तो ये कॉमिक हवेली यूट्यूब चैनल और मैं हूँ आपका होस्ट सागर स्वरूप देख रहे है ओरिजिन स्टोरीज ऑफ सुपर हैरोज़ जिसमे आज आपके सामने हम लाये है सुपर कमांडो ध्रुव की स्टोरी।

दोस्तो ध्रुव की ओरिजिन स्टोरी बहुत ही इंटरेस्टिंग है इसे कुल 3 बार एक्सप्लोर किया गया है पहली बार प्रतिशोध की ज्वाला में फिर खूनी खानदान और अभी हाल ही में बाल चरित में यहा हम प्रतिशोध की ज्वाला के बारे के बात करेंगे । प्रतिशोध की ज्वाला से पहले अनुपम जी चाहते थे रोमन हत्यारा आये पर फिर ये आईडिया ड्राप कर दिया गया ।

ध्रुव का जन्म सर्कस में हुआ जो उस टाइम का काफी पॉपुलर सर्कस था जिसका नाम था जुपिटर , ध्रुव के माँ बाप उसी सर्कस में कलाकार थे माँ राधा और पिता श्याम का लाड़ला बेटा ध्रुव पूरे सर्कस की भी आंख का तारा था क्या इंसान क्या जानवर सब ध्रुव पर जान छिड़कते थे और ध्रुव उनपर । ध्रुव जब कुछ बड़ा हुआ तो उसने सभी कलाकारों से उनकी महारत वाली विद्या में भी ट्रेनिंग ली और जल्द ही उनमे खुद भी महारत हासिल की ध्रुव जानवरो के साथ बचपन से रहने की वजह से उन्हें समझने लगा और धीरे धीरे उनकी भाषा भी बोलने लगा जैसे वो इंसानों की बोल लेता था, ध्रुव तारा जैसे ही ध्रुव की ख्याति बढ़ने लगी जबसे उसने करतब दिखाने शुरू किए पर ग्लोब सर्कस के मालिक बॉस को ये पसंद नही आया कि कोई और सर्कस उसके सर्कस से बढ़कर लोगो को पसंद आये उसने आपने ख़ास आदमी जुबिस्को के जरिये जुपिटर सर्कस में आग लगवा दी पर ध्रुव नव जुबिस्को को उसके पिता श्याम को आग में फेकते हुए देख लिया उसने जुबिस्को को पकड़ने के लिए उसका पीछा किया पर जुबिस्को गनमास्टर की हेल्प से निकल गया ध्रुव वापस सर्कस में लौटा तो सबकुछ राख हो चुका था ध्रुव की दुनिया लूट चुकी थी अब बचा ही क्या था उस बच्चे के पास जी हां 15 -16 साल का बच्चा ही तो था ध्रुव। पर ध्रुव भी ध्रुव था उसने कसम खायी बदला लेने की और उसने बदला लिया और कैसे लिया इसके लिए भाई कॉमिकस पढ़ो 😀

आर्ट बहुत ही जबरदस्त था उस टाइम पर जब कंप्यूटर की स्टार्टिंग ही थीं इंडिया में उस टाइम जब हाथ से ही हर पैनल बनाया जाता था उस टाइम में हमने अनुपम जी का बेहट्रीएं आर्ट देखा आपको कैसा लगा कमेंट बॉक्स में बताइये

 


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