राक्षस क्षेत्र (भाग दो – परिचय)

#राक्षस क्षेत्र#
भाग 2 – > परिचय
पहले भाग ‘प्रस्तावना’ में आपने पढ़ा कि डॉक्टर मैड(MAD) नाम का एक शख्स जयपुर में अक्षय गर्ग से मिलता है। डॉक्टर मैड उसे बताता है कि कुछ सालों पहले वो दोनों जिस वायरस की खोज कर रहे थे वो किसी गलत हाथों में पड़ चुका है , जिसे रोकना बहुत जरूरी है।डॉक्टर के कहने पर अक्षय उनके साथ पुष्कर जाने को तैयार हो जाता है।रास्ते में डॉक्टर उसे एक फ़ाइल पढ़ने को देता है जिसमें ऐसे लोगों के बारे में जानकारी है जो उनकी मदद कर सकते हैं।
(विस्तार से जानने के लिए पहला भाग पढ़े।)
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अक्षय और डॉक्टर मैड(MAD) उर्फ मृत्युंजय अरुण देसाई , दोनों डॉक्टर की कार में पुष्कर की तरफ बढ़ रहे थे।
अक्षय के हाथों में वही फ़ाइल थी जो डॉक्टर मैड ने उसे दी थी।
अक्षय उस फ़ाइल को उलट पलट कर ही देख रहा था, उसने अभी तक फ़ाइल को खोला नहीं था।
“क्या देख रहे हो अक्षय? मैंने तुम्हें फ़ाइल पढ़ने के लिए दी है घूरने के लिए नहीं।”
“क… कुछ नहीं डॉक्टर, मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं इसे खोलूँ या नहीं, इतनी मोटी फ़ाइल इतनी जल्दी मैं नहीं पढ़ सकता। और सबसे मेन बात ये है कि इस फ़ाइल में आखिर किन लोगों की जानकारी है।”
“इस फ़ाइल में ऐसे लोगों के बारे में जानकारी है जिनमें कुछ खास शक्तियाँ हैं या जिनमें दूसरों की रक्षा करने का जज्बा है, साथ ही मैंने ऐसे कुछ संगठनों की जानकारी भी इक्कठी की है जो सदियों से इंसानों के बीच रह कर भी उनकी रक्षा कर रहे हैं।”
“खास शक्तियों वाले इंसान, रहस्यमयी संगठन ,ये सब तो केवल किस्से कहानियों में ठीक लगते हैं। मैं इन सबमें विश्वास नहीं करता।”
“तुम उसी में विश्वास करते हो न जिसे साबित किया जा सके? तुम इस फ़ाइल को पढ़ो , आने वाले दिनों में हम इन लोगों से मिलेंगे भी, तब वे लोग खुद ही अपने होने का सबूत देंगे।”
अक्षय के चेहरे पर अभी भी उलझन के भाव थे, जिन्हें देख कर डॉक्टर ने फिर कहा-“तुम एक बार इस फ़ाइल को सरसरी नजर से देख लो, जो तुम जानना चाहोगे ,मैं खुद ही उसकी डिटेल तुम्हें दे दूँगा। ठीक है?”
अक्षय ने सहमति में सर हिलाया और फ़ाइल को खोल कर पढ़ने लगा।
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शिमला-
शिमला के बाहरी इलाके में स्थित एक पुराने से घर में आज कुछ ज्यादा ही हलचल थी। घर काफी बड़ा था और उसके आस पास केवल पेड़ पौधे ही थे , जो उस जगह को जंगल जैसा माहौल दे रहे थे।
घर के अंदर कुछ लोग बंधक बना कर रखे गए थे, जो हर उम्र के थे ।महिलाएं, बच्चे, बूढ़े सब तरह के लोग वहाँ मौजूद थे जिन्हें एक बड़े से कमरे में रखा गया था।
उस कमरे में तीन आदमी मौजूद थे , जिनके हाथों में बंदूखें थीं।
उस कमरे के बाहर ही एक दरवाजा था जो नीचे मौजूद एक तहखाने में जाता था।
घर के बाहर एक लड़की का साया धीरे धीरे उसी तरफ बढ़ रहा था, उसके चेहरे पे एक नकाब था जिससे केवल उसकी आंखें ही दिख रही थी।
उन आँखों में किसी किस्म का भाव नहीं था। उसने घर को ध्यान से देखा, बाहर से किसी किस्म की कोई हलचल नहीं दिखाई दे रही थी।
दबे कदमों से वह घर के अंदर गयी।
उसने उस कमरे के दरवाजे को खोला।जिस कमरे में बंधक थे। तीनों आदमियों ने हैरानी से उसकी तरफ देखा , दरवाजे के पास खड़े आदमी ने हड़बड़ाहट में गोलियां चलाई । गोली उस लड़की की बाँह छूकर गुजर गई। गोली की वजह से उसकी ड्रेस कट गई और उसकी बाँह से खून बहने लगा।
उस लड़की ने अपने जगह से हिलने की कोई कोशिश नहीं की। अगले ही पल उसका घाव भर गया।
ये देख कर वहाँ मौजूद तीनों आदमी और बंधक हैरान रह गए।
गोली चलाने वाले ने फिर गोलियां चलाने की कोशिश की ,पर तब तक उस लड़की ने फुर्ती से उसकी बंदूख छीन ली।
बौखलाहट में उसने हाथों से उस लड़की पर हमला किया जो कि उसकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई।
उस लड़की ने तो उसके वारों को झेल लिया पर उस लड़की के एक ही वार ने उसे बेहोशी की दुनिया में पहुँचा दिया।
बाकी दोनों आदमी अपने तीसरे आदमी की ये हालात देख कर एक पल के लिए भौचक्के रह गए, पर जल्दी ही वो भी सम्भल गए और उन्होंने उस लड़की पर वार किया।
वह लड़की एक बार फिर फुर्ती से उन गोलियों से बच गयी।
उन्होंने फिर से हमला करना चाहा कि बंधकों में से मौजूद एक दूसरी लड़की ने भी उनपर हमला कर दिया।
दो तरफा हमलों से वो दोनों संभल नहीं पाए और बेहोश हो गए।
बाहर से आई उस लड़की ने उस लड़की को ध्यान से देखा जो कुछ देर पहले बंधकों के बीच थी।
उसने जीन्स और टी शर्ट पहन रखी थी।
बहर से आई लड़की की नजरें दूसरी लड़की के चेहरे पर टिक गयीं। उसके मुँह से केवल इतना ही निकला-“त…तु… तुम कृति हो न? गुप्त योद्धाओं में से एक यानि ‘हिडन वारियर्स’।”
अब चौकने की बारी उस लड़की की थी, जिसका नाम कृति था।
“पर तुम कौन हो? और मुझे कैसे जानती हो?”-कृति ने उस लड़की से पूछा।
“मेरा नाम निकिता है, मैं डार्क रियल्म के गेट कीपर्स की वंशज हूँ और खुद भी एक गेट कीपर हूँ।”
“गेट कीपर, य…यानी अन्धक्षेत्र के द्वार रक्षक।”
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“डॉक्टर, ये ‘हिडन वारियर’ और ‘गेट कीपर्स ‘ कौन हैं?”- अक्षय ने डॉक्टर मैड से पूछा ।
“युगों पहले देवताओं ने कुछ असुरों और काली शक्तियों को एक दूसरे आयाम में कैद कर दिया था, उस आयाम में जाने के लिए जिन आयाम द्वारों की आवस्यकता थी ,वो पृथ्वी पर ही मौजूद थे । उन द्वारों की रक्षा के लिए देवताओं ने कुछ मनुष्यों की नियुक्ति की जिनके वंशज आज भी उन द्वारों की रक्षा करते हैं । उन्हें ही द्वार रक्षक या गेट कीपर्स कहा जाता है। उस आयाम का नाम अन्धक्षेत्र था जिसे अब ‘डार्क रियल्म’ के नाम से भी जाना जाता है।”- डॉक्टर ने तल्लीनता से अक्षय के सवाल का जवाब दिया।
“और हिडन वारियर्स?”
“इनकी स्थापना हजारों साल पहले हुई थी, तब कई लोग जो अंधविश्वासी थे या काली शक्तियों की आराधना करते थे, ये उन्हें रोकने का काम करते थे।जो लोग विलक्षण गुणों के स्वामी होते हैं, केवल वही लोग इनके संघठन में भर्ती होते हैं।”
अक्षय कुछ देर तक सोच में डूबा रहा।
“ये सब तो बड़ा कंफ्यूजिंग है। किसी ने इन्हें देखा भी है या नहीं? या फिर ये लोग केवल पुरानी किताबो की शोभा बढ़ाते हैं?”
“समय समय पर इन्हें देखा जाता है , पर ये खबर सब तक नहीं पहुंच पाती क्योंकि सरकार ऐसी खबरों पर नियंत्रण रखती है , वरना जनता खामख्वाह परेशान हो जाएगी। अभी कुछ दिनों पहले ही कुछ असुरों ने शिमला में एक डार्क रियल्म का दरवाजा खोलने की कोशिश की थी पर कुछ गेट कीपर्स ने आखिर कार उन्हें रोक ही लिया। ऐसे ही कुछ दिनों पहले octahead को हिडन वारियर्स ने कुछ और लोगों के साथ मिल कर रोका था।”
“यानी लगभग दोनों एक जैसे ही हैं?”
“दोनों में कई अंतर हैं, जैसे गेट कीपर्स को कुछ शक्तियाँ जन्म से ही मिलती हैं , साथ ही उनका संगठन युगों पुराना है जबकि हिडन वारियर्स केवल कुछ ही हजार साल पुराने हैं, साथ ही उनमें कोई शक्तियाँ नहीं होतीं।”
“ह्म्म्म, ये जानकारियाँ तो बहुत रोचक हैं।”-अक्षय ने कहा और फिर से फ़ाइल के पन्ने पलटने लगा।
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शिमला-
“पर अगर तुम गेट कीपर हो तो यहाँ क्या कर रही हो? और तुम मुझे पहचानती कैसे हो?”-कृति ने निकिता से पूछा।
“मैं कुछ दिनों से शिमला में ही हूँ और गेट कीपर्स के काम से दूर। तभी मुझे कुछ लोगों के गायब होने की खबर मिली, मैं उन्हीं का पीछा कर रही थी।”
सारे बंधक अभी वहाँ से जा ही रहे थे कि तहखाने का दरवाजा खुला। एक आदमी ने बाहर देखा और उसे सारी स्थिति समझते देर नहीं लगी। अगले ही पल वो फिर दरवाजे के भीतर था।
“यहाँ तहखाने में बहुत से लोग हैं जिन्होंने सबको बंधक बनाया था। ये लोग किसी तरह का प्रयोग कर रहे हैं। लगता है इनसे निपटे बिना यहाँ से नहीं जाया जा सकता।”-कृति ने निकिता को बताया।
तभी तहखाने से चार पाँच आदमी बाहर निकले, उनके हाथों में भी गन्स थीं। इस बार उन्होंने गन्स का निशाना बंधकों को बनाया।
सारे गन्स से निकली गोलियों को एक साथ रोकना दोनों के लिए लगभग नामुमकिन था।
तभी जैसे एक जादू सा हुआ। हवा का एक तेज़ झोंका सा आया और सारी गोलियाँ हवा में ही रुक गयीं और आगे बढ़ने जी जगह बगल की दीवार से टकरा गयीं।
एक दूसरा झोंका आया और वो पाँचो भी दूर जा गिरे।
निकिता , कृति और बंधकों ने भी हवा का दबाव महसूस किया पर उन्हें कुछ ज्यादा नुकसान नहीं हुआ।
निकिता और कृति ने दरवाजे की तरफ देखा , हवा में उड़ते हुए एक आदमी ने उस बड़े से कमरे में प्रवेश किया। उसने एक ड्रेस पहन रखी थी जो पूरी नीली थी । केवल कमर और बाहों पर पीली धारियाँ थीं। सीने पर अंग्रेजी का C बना हुआ था।उसके छोटे छोटे बाल हवा में लहरा रहे थे। धीरे धीरे से वो उन दोनों के सामने उतरा।
निकिता और कृति ने सवालिया नजरों से उसकी तरफ देखा।
“मुझे भी कुछ लोगों के गायब होने की खबर मिली थी, मैं भी उन्हें ही ढूँढते हुए आया हूँ।”-उसने मासूमियत से अपने कंधे उचकाते हुए कहा।
दोनों को कुछ न बोलते देख उसने फिर कहा।
“अभी, तुम दोनों डार्क वारियर्स, फलाना ढिमकाना का परिचय हो गया हो तो इन्हें बाहर भी निकालना है। शायद अभी तहखाने में और लोग भी हों।”
“तुम कब से हमारी बातें सुन रहे थे?”-निकिता ने गुस्से से पूछा।
“बस दो मिनट हुए होंगे मैं इन्हें बाहर निकालता हूँ और तुम नीचे जाकर देखो।”
इतना कहकर वो बंधकों की तरफ बढ़ गया । कृति भी सहमति में सर हिलाते हुए उसी तरफ बढ़ गयी।
निकिता नीचे तहखाने की तरफ बढ़ गयी।
थोड़ी ही देर में उस आदमी ने और कृति ने सारे बंधकों को उस घर से एक सुरक्षित जगह पर पहुँचा दिया।
“वो वापस नहीं आएगी क्या?”-उस आदमी ने कृति से पूछा।
“पता नहीं, हमें देखना चाहिए चलकर।”-कृति ने कहा।
उसने भी सहमति में सर हिलाया और दोनों उस घर की तरफ बढ़ने लगे।
अभी वो दोनों घर के पास ही पहुँचे थे की निकिता दौड़ते हुए बाहर आती हुई दिखाई थी।
“तहखाने में बॉम्ब हैं।”-निकिता चीखते हुए बाहर आ रही थी।
अभी किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि तभी एक जोरदार धमाका हुआ।
निकिता घर से बाहर आ चुकी थी, पर बढ़ती हुई लपटों से बचना नामुमकिन था।
उसी पल निकिता ने अपने चारों तरफ एक दबाव महसूस किया और उसका जिस्म हवा में उड़ता हुआ तेजी से बढ़ने लगा।
उस आदमी ने एक बार फिर निकिता की जान बचाई।
निकिता , कृति और उस आदमी के सामने पहुँची और लड़खड़ाते हुए खड़ी हो गयी।
“थैंक्स।”- निकिता ने कहा।
“वेलकम”-उसने मुस्कुराते हुए कहा।
“वैसे तुमने अपना नाम तो बताया नहीं।”-इस बार सवाल कृति ने किया।
“म…मेरा नाम?”-उसने हकलाते हुए पूछा।
“हाँ, और नहीं तो क्या?”
“कैटस्ट्रोफे।”
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“अब ये कैटस्ट्रोफे कौन है?और इसकी कोई साफ तस्वीर भी नहीं इस फ़ाइल में। न ही पूरी जानकारी है। और सबसे मेन बात , ये इतना अजीब नाम क्यों?”
“शायद ये नाम इसे पसंद हो।”- डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा-” इसे देहरादून के आस पास के इलाकों में देखा गया है, कुछ सीसीटीवी कैमरों में इसकी धुँधली तस्वीरें मिलीं हैं बस। जितनी जानकारी मुझे है उसके अनुसार ये हवा को कंट्रोल कर सकता है।”
“पर अगर आपके पास इसकी इतनी कम जानकारी है तो आप इससे कॉन्टैक्ट कैसे करेंगे?”
“समय आने पर सब कुछ हो जाएगा।”
डॉक्टर मैड की बातों से अक्षय संतुष्ट नहीं हुआ फिर भी वह दुबारा से फ़ाइल में खो गया।

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शिमला-
“कैटस्ट्रोफे? ये तुम्हारा नाम है?”- कृति ने आंखें चौड़ी करते हुए पूछा।
कैटस्ट्रोफे ने सहमति में सर हिलाया।
कृति ने कुछ नहीं कहा, वो निकिता की तरफ मुड़ी।
“तुम ठीक हो?”-कृति ने पूछा।
“हाँ।”
“मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी।”
“यही न कि मैं तुम्हे कैसे पहचानती हूँ?”
“हाँ”
“कुछ दिनों पहले तुमने और तुम्हारे कुछ साथियों ने octahead को रोका था । मैं उसी केस को फॉलो कर रही थी।”
“पर क्यों? गेट कीपर्स कब से हमारे कामों में इंटरेस्ट लेने लगे?”
“उस समय मैं न तो एक गेट कीपर थी न ही तुम्हारे किसी काम में इन्टरसेटेड थी। मैं समीर में इन्टरसेटेड थी।”
“समीर …यानी संरक्षक।”
“हाँ, वही ।”
कैटस्ट्रोफे उन दोनों की बातें सुन रहा था कि अचानक से उसके पास मौजूद फोन की घंटी बजी।
कैटस्ट्रोफे उनसे थोड़ी दूर गया जहाँ कोई उसकी बातें नहीं सुन पाता।
“हेलो,… यस सर… बस पाँच मिनट में आता हूँ…नहीं यहीं मार्केट में घूम रहा था।”
बात कर के जब वह वापस उनकी तरफ आया तो दोनों उसी की तरफ देख रही थीं।
“क्या हुआ?”- कैटस्ट्रोफे ने अपने आस पास देख कर पूछा , जैसे वे दोनों उसे नहीं उसके आस पास मौजूद किसी चीज को देख रहीं हो।
“आज कल तो उड़ने वाले भी फोन लेकर घूमते हैं।वाह।”- कृति ने मजाकिया अंदाज में कहा।
“पर सॉरी मैं तुम्हें नंबर नहीं दे पाउँगा, मुझे जल्दी से कहीं और जाना है।”- कैटस्ट्रोफे ने कहा और उड़ते हुए वहाँ से चला गया।
इससे पहले की कृति कुछ कह पाती, कैटस्ट्रोफे वहाँ से जा चुका था।
उसके जाने के बाद निकिता और कृति ने बंधकों को वापस उनके घर पहुँचाया और दोनों अपने अपने रास्तों पर वापस चलीं गयीं।
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स्पेस एकेडेमी-
स्पेस एकेडेमी भारत की एक सीक्रेट आर्गेनाइजेशन है। इसका काम मुख्यतः स्पेस से जुड़े खतरों से निपटना और ऐसे जांबाज लोगों को ट्रेनिंग देना है जो ऐसे काम करने में सक्षम हों।
स्पेस एकेडेमी के वर्तमान हेड हैं कैप्टेन रोडविक जिन्हें लोग कैप्टेन रोड भी बुलाते हैं।
इस समय कैप्टेन रोड अपने आफिस में थे जब निधि ने नॉक किया।
“अंदर आ जाओ निधि।”
“थैंक यू कैप्टेन। आपने मुझे बुलाया?”
“हाँ। मैं तुम्हें और रिवर्स को कहीं भेजने वाला हूँ, तुम तैयारियाँ कर लो।”
“पर रिवर्स है कहाँ पर?”
“किसी ने दिल्ली में इसरो की एक मिसाइल को अपने काबू में कर लिया है और वो उसे किसी और देश में भेजने वाला है, शायद पाकिस्तान में। अगर ऐसा हो गया तो इंडिया के लिए मुश्किलें बढ़ जायेंगीं। इसीलिये मैंने उसे भेजा। मैं तुम्हें भी भेजने वाला था पर तुम यहाँ थी नहीं।”
“पर रिवर्स क्यों? वहाँ पुलिस नहीं है क्या?”
“मिसाइल को काबू में करने वाले ने बाहर रोबोट्स का पहरा लगाया है। जब तक पुलिस उसे काबू में करेगी तब तक कहीं देर न हो जाये।”
“फिर भी।”- निधि की बातों में परेशानी साफ झलक रही थी जिसे कैप्टेन ने भी देखा।
“क्या बात है निधि?”
“कुछ नहीं कैप्टन , मैं रिवर्स के बेहवीयर से हमेशा परेशान रहती हूँ। वो किसी भी काम को कभी सीरियस नहीं लेता। उसे खुद नहीं पता कि उसके पास कितनी शक्तियाँ हैं, उसे नहीं पता कि वो क्या क्या कर सकता है। मुझे लगता है कहीं वो खुद को और दूसरों को किसी मुसीबत में न डाल दे।और अगर ऐसा हुआ तो उसे रोकने वाला शायद कोई नहीं होगा।”
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“ये रिवर्स नाम का बन्दा तो काफी पॉवरफुल है।”-अक्षय ने डॉक्टर से कहा।
“तुम्हें अभी भी विश्वास नहीं कि ऐसे लोग होते हैं?”
“अरे नहीं। अब तो ये फ़ाइल भी लगभग खत्म होने वाली है , इतने लोगों के बारे में जानने के बाद मेरा अविश्वास थोड़ा कम हो रहा है.”
अक्षय की बात सुन कर डॉक्टर मैड के चेहरे पर एक मुस्कान तैर गयी।
“रिवर्स में कई शक्तियाँ हैं। सुपर स्पीड, हाई स्ट्रेंथ पर उसकी सबसे बड़ी पॉवर है उसका कई रूपों में बदलना जो कि उसे एक एक्सपेरिमेंट के दौरान मिले थे।इससे वो अपने शरीर से कई प्रतिरूपों को निकाल सकता है।”
“अगर ऐसा है तो ये कुछ भी कर सकता है।”
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दिल्ली
इसरो का एक बेस-
बेस के आस पास सन्नाटा छाया हुआ था।
बेस के बाहर कुछ रोबोट्स चहलकदमी कर रहे थे, देखने से ही पता चल रहा था कि वो खतरनाक हथियारों से लैस थे।
बेस के अंदर एक आदमी एक स्क्रीन के सामने रखे कंट्रोल पैनल में कुछ कर रहा था।
“और यार, क्या कर रहे हो?यहाँ कोई और नहीं है क्या?”- एक आवाज उसके पीछे से आई। आवाज सुन कर वो ऐसे चोंका जैसे उसे हजारों वोल्ट का करंट लग गया हो।
उसने पीछे देखा एक लड़का जिसकी उम्र 19- 20 साल उसके पीछे खड़ा था।उसने एक टाइट फाइटिंग ड्रेस पहन रखी थी ।ये रिवर्स था।उसके सीने पर एक लोगो बना हुआ था जिसमें उल्टा R लिखा हुआ था।
“क…कौन हो तुम?”
उस आदमी के मुँह से केवल इतना ही निकला।
इतने में रिवर्स तेज़ी से उस आदमी तक गया और उसके पेट में एक घूँसा लगाकर वापस अपनी जगह लौट आया।
“ये मेरा नाम न जानने के लिए। चलो मैं तुम्हें एक हिंट देता हूँ।ये देखो, ये है तुम्हारा हिंट।”-रिवर्स ने अपने सीने की तरफ इशारा किया जहाँ एक सर्किल में उल्टा R लिखा हुआ था।
“उल्टा आर…आ।”-उसके मुँह से बस इतना ही निकला।
“अरे यार, अभी भी नहीं समझे । रिवर्स नाम है मेरा।”-रिवर्स ने अपना हाथ सर पर रखते हुए कहा।
इतने देर में सामने वाला आदमी बौखला गया।उसने एक गन रिवर्स पर तान दी।
रिवर्स ने फिर से अपना हाथ सर पर मारा-“पहली बात इस गन से निकली बुलेट मेरे ड्रैस का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी क्योंकि ये एडवांस्ड नैनो टेक्नोलॉजी से बनी है, दूसरी बात मैं अपनी सुपर स्पीड से इस बुलेट से आराम से बच सकता हूँ।”
“और तीसरी बात”- आवाज उस आदमी के पीछे से आई-” तुम्हारे फायर करने से पहले ही मैं ये गन तुमसे छीन लूँगा।”
उस आदमी ने पीछे मुड़ कर देखा, उसके पीछे रिवर्स का ही एक प्रतिरूप खड़ा था। उसे देख कर वह आदमी हड़बड़ाहट में पीछे हटा और गन उसके हाथों से छूटकर गिर गई।
“त…तुम कौन हो?”
“हे भगवान, कहीं तुम एलियन तो नहीं, तुम मुझे नहीं जानते।”
“तुम लोग अंदर कैसे आये? रोबोट्स ने तुम्हें रोका नहीं?”
इतना कहते ही रिवर्स के चार पाँच प्रतिरूप सामने के दरवाजे से अंदर आये।
“सारे रोबोट्स की बैटरी डाउन हो चुकी है।”-सारे प्रतिरूपों ने एक साथ कहा और अगले पल वो रिवर्स के अंदर समा गए।
“बहुत हो गया तमाशा, अगर तुम आगे बढ़े तो मैं मिसाइल को लांच कर दूँगा।”- उस आदमी ने कंट्रोल पैनल पे उँगली रखते हुए कहा।
रिवर्स तेजी से उसके तरफ बढ़ा और उसके कुछ समझ पाने से पहले रिवर्स का एक घूँसा उसके पेट मे लगा और वो कंट्रोल पैनल से उछल कर दूर जा गिरा। उसका सर दीवार से टकराया और वो बेहोश हो गया।
रिवर्स ने उसकी तलाशी ली तो उसके जेब से उसका मोबाइल फोन को मिला।
रिवर्स ने चेक किया तो एक नम्बर पे कई बार फोन किया गया था, साथ ही उसी नंबर से कुछ मैसेज भी आये थे जिसमें उसे मिसाइल बेस को अपने कब्जे में लेने के लिए कहा गया था।
रिवर्स ने स्पेस एकेडेमी के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट में काम करने वाले सलीम के पास कॉल लगाई।
“सलीम भाई, मैं तुम्हें एक नम्बर भेज रहा हूँ, जल्दी से बताओ ये नंबर किसका है और इस वक्त कहाँ है।”
“एक मिनट रुको।”
लगभग एक मिनट बाद सलीम की आवाज फिर आयी।
“ये नंबर इस वक्त मोहन नगर में है और किसका है ये पता नहीं चल सकेगा।”
“क्लोजर सैटेलाइट्स की मदद से बताओ ये नंबर इस समय किसके पास है।”
“पर बिना कैप्टेन से पूछे मैं क्लोजर सैटेलाइट्स की डिटेल किसी को नहीं दे सकता।”
क्लोजर सैटेलाइट्स स्पेस एकेडेमी की सैटेलाइट्स हैं। इनकी मदद से पृथ्वी के किसी भी हिस्से की हाई रेसोल्यूशन फ़ोटो ली जा सकती है और साथ ही कौन सा फोन या कोई ट्रांसमिटिंग डिवाइस कहाँ है उसकी भी लोकेशन पता की जा सकती है। इसके साथ ही किसी जगह किसी के पास कौन सा फोन या ट्रांसमिटिंग डिवाइस है पता किया जा सकता है।
“अरे यार, मैं यहाँ एक खतरनाक क्रिमिनल को पकड़ने वाला हूँ और जब तक तुम कैप्टेन से पूछोगे तब तक तो मैं वापस भी आ जाऊँगा। और अगर तुमने नहीं बताया तो हो सकता है वो क्रिमिनल भाग जाये।”
“अरे भाई, एक मिनट रुको, ये नंबर इस समय जिसके पास है उसके पास एक दूसरा नंबर है जो किसी जेम्स नाम के आदमी के नाम से अलॉट है और सैटेलाइट से दिख रही फोटो के मुताबिक वो जेम्स ही है।”
“यानी मुझे जेम्स को जल्दी से जल्दी पकड़ना होगा, मदद के किये थैक्स, बाई।”-सलीम के कुछ कहने से पहले ही रिवर्स ने फोन कट कर दिया।
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सलीम ने स्पेस एकेडेमी के हेड कैप्टन रोड को फ़ोन लगाया जो कि इस समय अपने आफिस में निधि के साथ मौजूद थे।
“कैप्टन!रिवर्स ने अभी अभी क्लोजर सैटेलाइट से एक आदमी की जानकारी ली है और मोहन नगर की तरफ गया है। केस जरूरी था इसीलिए मैंने आपसे बिना पूछे उसे डिटेल्स दे दीं।”
“ठीक है। रिवर्स ने कुछ बताया, वो आदमी मिसाइल को कहाँ लांच करने वाला था।?”-कैप्टन की आवाज में गंभीरता थी।
“ठीक है। रिवर्स के सूट में लगे नैनो कैमरे से इसरो बेस की जितनी भी फुटेज है मेरे सिस्टम पर फॉरवर्ड करो। तुरंत।”
कैप्टेन ने कॉल कट कर दी । लगभग थोड़ी देर में उनके सिस्टम में डाटा आ गया और वो फुटेज देखने लगे ।
“हे भगवान!”-कैप्टेन की आवाज में परेशानी झलक रही थी।
“क्या हुआ कैप्टन?”-निधि ने पूछा।
“वो आदमी जो भी था, किसी बड़े षडयंत्र का हिस्सा था।उस मिसाइल का निशाना वही जगह थी जहाँ मैं तुम दोनों को भेजने वाला था।
“कहाँ?”
“पुष्कर।”
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मोहननगर-
मोहन नगर के मुख्य बाजार नवाब मार्केट में जेम्स इस समय मौजूद था। वो किसी से फोन पर बात कर रहा था।
“छोटे भाई!”-जेम्स ने कहा।
“बोलो बड़े भाई।” दूसरी तरफ से आवाज आई जो कि बांड की थी।
जेम्स और बांड दोनों भाई हैं।
“काम तो हुआ नहीं, शायद दुबारा ट्राई करना पड़ेगा।”- जेम्स ने कहा।
“दुबारा करने की क्या जरूरत।मैं किसी को दूसरा मौका नहीं देता।”- जेम्स के पीछे से आवाज आई।
जेम्स ने पीछे मुड़ कर देखा। पीछे रिवर्स खड़ा था।
“तुम कौन हो?”-जेम्स ने पूछा।
“अरे यार, इस दुनिया मे कोई भी मेरा नाम नहीं जानता क्या? मेरा नाम छोड़ो , वो तो तुम्हें पता ही चल जाएगा। तुम्हारा नाम जेम्स है?”
“हाँ, है तो। पर तुम्हें कैसे पता?”
“मैं तुम्हें गिरफ्तार करने आया हूँ।”
“ए भाई, पागल हो क्या। चमकने वाला ड्रेस देख कर तो किसी सर्कस से आये हुए लगते हो।”
“क्या हुआ जेम्स, कौन है?”-बांड ने पूछा जो अभी तक उनकी बातें फोन पर ही सुन रहा था।
“अरे यार, तू आइस क्रीम खाना छोड़ और यहाँ आकर खुद ही देख ले।”
बांड सामने वाली गली में ही था और फोन रखते ही कुछ देर में वहाँ पहुँच गया।
“दो दो? वाह”-रिवर्स ने कहा।
“मैं भी दो दो हूँ।”-इस बार आवाज जेम्स बांड के पीछे से आई जहाँ रिवर्स का एक प्रतिरूप था।- “एक्चुअली मैं दो से ज्यादा भी हो सकता हूँ पर फिलहाल अभी दो ही हूँ।”
रिवर्स और उसके प्रतिरूप को देख कर जेम्स और बांड की आँखें फटी की फटी रह गईं।
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“ये जेम्स बांड तो देखने में अभी बच्चे ही हैं।”-अक्षय ने फ़ाइल से नजरें उठाते हुए कहा।
अक्षय और डॉक्टर मैड अब पुष्कर की सीमा में प्रवेश कर चुके थे।
“पर इन्होंने बड़े बड़े कारनामे किये हैं। इनका असली नाम आकाश और सूरज है,पर सब लोग इन्हें इसी नाम से जानते हैं। “- डॉक्टर ने बताया।
“मुझे तो लगा ये दोनों जुड़वा हैं, पर दोनों के पेरेंट्स का नाम तो अलग है।”
“हाँ , इनके पिता जुड़वा भाई हैं, इस तरह से दोनों चचेरे भाई हैं। पर सगे भाइयों से बढ़कर हैं।तरह तरह के मार्शल आर्ट्स और टेक्नोलॉजी में माहिर हैं दोनों।”
डॉक्टर की कार एक पुराने किले के पास पहुंची जो कि पुष्कर के एक बाहरी इलाके में था।
किला सुनसान था और जर्जर हालत में था । कार बिना रुके किले के अंदर पहुंची और मुख्य दरवाजे से सटे हुए कमरे में जाकर रुकी।
कमरे का दरवाजा टूटा हुआ था, साथ ही दीवार भी इस तरह टूटी थी की पूरी लंबी कार उस में पहुँच गयी।
कार कमरे के बीचों बीच जाकर रुकी। तभी अक्षय ने महसूस किया कि कमरे का फर्श नीचे सरक रहा है।
डॉक्टर और अक्षय दोनों कार सहित नीचे तहखाने में बढ़ने लगे।
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एक अनजान स्थान-
करीने से सजा हुआ एक कमरा।
कमरे के बीचों बीच एक टेबल रखी हुई थी जिसके पीछे रखी हुई ऊँची कुर्सी पे एक आदमी बैठा था।
उसका ध्यान सामने टेबल पर रखे फाइलों में था।
कुछ देर बाद एक लड़की ने कमरे में प्रवेश किया।
“बोलो सिल्विया, आज की क्या रिपोर्ट है।”-उस आदमी ने फाइलों में से अपना सर उठाते हुए कहा।
लड़की, जो कि देखने में विदेशी लग रही थी, उस ने स्कर्ट और शर्ट पहन रखी थी और देखने से किसी बड़े आर्गेनाइजेशन की एम्प्लोयी लग रही थी।
“कुछ अच्छी खबरें हैं और कुछ बुरी भी।”-उस लड़की ने कहा।
“पहले बुरी ही बताओ।”
“शिमला में हमने कुछ लोगों को टेस्ट के लिए बंधक बनाया था, पर कुछ अनजान लोगों ने उन्हें छुड़ा लिया।”
वह आदमी कुछ देर तक अपना सर हिलाता रहा जैसे किसी गहरी सोच में डूबा हो। फिर बोला-
“अब अच्छी खबर भी बता दो।”
“सर! दरअसल अभी एक और बुरी खबर है। डॉक्टर मैड के बेस को तबाह करने का हमारा प्लान भी फेल हो गया।”
“क्या!”-उस आदमी के माथे पर गहरी चिंता की लकीरें उभर आयीं-“ये तो वाकई बुरी खबर है।वो हमारे लिए खतरा बन सकता है।”
“एक अच्छी ख़बर ये है कि हमने जो नया एक्सपेरिमेंट किया था वायरस के साथ,वो सक्सेसफुल हो गया। सारे पाँच आदमी अभी भी जिंदा हैं और अपने साइज को बढ़ा सकते हैं।मतलब एक बार साइज बढ़ाने के बाद वापस अपने वास्तविक अवस्था मे आने पर भी वो नार्मल हैं।पर इससे वायरस की इंफेक्टिविटी थोड़ी कम हुई है।”
“मतलब?”
“जो वायरस उनके शरीर से निकलेगा वो आगे ज्यादे लोगों को इफेक्ट नहीं कर पायेगा।”
“हम्म, वायरस का जो मेन काम था, वो हुआ?”
“नहीं सर, हमारे सारे एक्सपेरिमेंट नाकामयाब हो रहे हैं, लगता है उस पांडुलिपि के बिना हम कामयाब नहीं होंगे।”
“कोई बात नहीं, कोशिश करते रहो। हमें कामयाबी जरूर मिलेगी।”
————————-
द्वापर युग-
स्थान- कार्तिकेय पुरम।
द्वापरयुग का आखिरी चरण।
कार्तिकेयपुरम भारत वर्ष का एक बहुत बड़ा साम्राज्य था और वहाँ का राजा था निर्भय।
निर्भय अर्थात जिसे किसी का भय न हो।
निर्भय जब छोटा था उसके पिता की हत्या राक्षस राज विराध ने कर दी थी।
पर बड़े होने पर उसने राक्षस राज विराध का वध भी किया और कार्तिकेयपुरम के लिए एक आदर्श राजा भी बना।
उसका दैवीय फरसा बहुत ही शक्तिशाली है।
इस समय निर्भय महागुरु आदियोगी से वार्तालाप कर रहा था।
“क्या बात है महागुरु, आप मुझे चिंतित दिख रहे हैं।”
“चिंता की बात है ही वत्स! आने वाला समय बहुत ही कठिन होने वाला है, केवल तुम्हारे लिए ही नहीं अपितु पूरी सृष्टि के लिए। आने वाला समय ऐसा खेल खेलने वाला है जिसमें असुर, राक्षस और मनुष्य तीनों केवल कठपुतलियाँ बन कर रह जाएँगे।”
“असुरों के लिए तो देवता ही पर्याप्त हैं और किसी मनुष्य में इतना साहस नहीं जो हमें चुनौती दे सके।”
“और राक्षस?”
“राक्षसों में इतनी शक्ति कहाँ। इससे पहले उनका राजा विराध तो पूर्ण रूप से राक्षस भी नहीं था। उसकी माता एक असुर थीं और पिता राक्षस। पर अब राक्षस वापस अपनी जगह लौट गए हैं, अंधेरे जंगलों और कंदराओं में । उनमें इतना सामर्थ्य नहीं कि समय का संतुलन बिगाड़ सकें।”
“यह मत भूलो निर्भय कि हमें किसी को कम नहीं आंकना चाहिए।इतिहास साक्षी है कि जिन्होंने भी ऐसा किया हमेशा अनिश्चित परिणामों का भोगी हुआ है।”
“क्षमा करें महागुरु।पर राक्षसों को लेकर आपकी चिंता का कारण क्या है?”
“मुझे पता चला है कि किसी मनुष्य ने राक्षसों से संपर्क किया है और उसके पास ऐसी विधि है जिससे किसी भी मनुष्य को राक्षस बनाया जा सकता है।”
“क्या? अगर ऐसा हुआ तो अनर्थ हो जाएगा।पूरी पृथ्वी पर केवल राक्षस ही रहेंगे।पृथ्वी राक्षस क्षेत्र बन जाएगी।”
——————————————
लेखक- आकाश पाठक।
नमस्कार दोस्तों।
आशा करता हूँ आपको यह कहानी पसंद आ रही होगी।इस कहानी का पहला भाग थोड़ा छोटा था, पर आने वाले बाकी के पार्ट्स छोटे नहीं होंगे।
अगर आप यह कहानी पढ़ रहे हैं तो रिव्यु देना न भूलें।
कहानी कैसी लगी?किन पॉइंट्स को और विस्तार से बताना चाहिए ? इन बातों पर अपनी राय जरूर दें।
जल्द ही मेरी कहानी ‘नागभारत’ का दूसरा भाग भी आने वाला है तो अगर आपने उसका पहला भाग या पहला सीजन (पूरे 10 पार्ट्स) नहीं पढ़ा तो अभी पढ़े।
धन्यवाद।

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4 Comments on “राक्षस क्षेत्र (भाग दो – परिचय)”

  1. bhut hi shaandaar aur jaandaar…..khaani ka har ik point bhut jbrdst thaa khaaskar superheroes ki entry…..sbi superhero ki Details wise entry huyi hai …is se nye log bi khaani se aaram se realit kar pa rahe hai….story suruwat acchi hai ..umeed karta hu agla part jaldi aayegaa

  2. वाह एक बेहतरीन कहानी
    वास्तव में आपकी सभी कहानियां अच्छी होती है।

    शानदार तरीके से डिटेलिंग और बकायदा सुपरहीरोज की एंट्री मस्त है।
    लाजवाब
    वैसे अभी सस्पेंस बना है और बहुत कुछ तो अभी बाकी ही है, सस्पेंस बहुत ही ज़ोरदार बन गया है।

    एक सवाल है – रिवर्स ,निधि और रोड तो भविष्य से है, फिर रिवर्स जेम्स-बांड के पास कैसे पहुच गया?

    अगले भाग का इंतज़ार है…..…

  3. वाह जितनी तारीफ की जाए कम है गजब है।
    डॉक्टर mad का आगमन और रिवर्स का आगमन बहुत ही बढ़िया लग रहा है।
    गेटकीपेर्स और ऑकताहैड को देखकर ऐसा लग रहा है जल्द ही हमें समीर के दर्श होने वाले हैं।
    मेरा बनाया किरदार कैटस्ट्रोफे भी आ गया है
    अब बहुत मजा आने वाला है ।
    खैर कहानी पर आता हूँ।। एक तरफ डॉक्टर मैड अक्षय को राक्षस क्षेत्र की जानकारी दे रहा है तो साथ ही सुपरहीरोज़ के बारे में जानकारी भी दे रहा है जैसे कौन जेम्स बांड है कौन क्या है ।
    दूसरी तरफ शिमला में एक घटना घट रही है जिसमें पहली बार दो सुपरहीरोज़ का आमना सामना हो रहा है गजब ।
    बहुत बढ़िया तरीके से आप आगे बढ़ रहे हैं जिसमें सभी किरदार निखर कर आ रहे हैं। अभी कहानी की शुरुआत है तो अभी कुछ कहा नहीं जा सकता कि स्टोरी किस ओर जाएगी।
    लेकिन इतना पक्का है बहुत मजा आने वाला है।

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