राक्षस क्षेत्र भाग-3

राक्षस क्षेत्र 

भाग – तीन

 

अब तक की कहानी जानने के लिए राक्षस क्षेत्र के पहले दो भाग पढ़ें।
भाग 1- प्रस्तावना
भाग 2- परिचय
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राक्षस क्षेत्र
भाग 3- पुष्कर की ओर

तीन साल पहले-
रात के नौ बज रहे थे।
राजस्थान के एक सुनसान हाइवे पर एक कार तेजी से चली जा रही थी।
कार की स्टेयरिंग संभाले डॉ मृत्युंजय अरुण देसाई के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।
उसकी बगल वाली सीट पर उसकी धर्मपत्नी देविका बैठी थी।पीछे की सीट पर उनकी पाँच वर्ष की बेटी सुहानी बैठे हुए सो रही थी।
सुहानी को एक खास तरह की बीमारी थी जिसके कारण उसकी हड्डियाँ कमजोर हो रहीं थीं , साथ ही उसके इंटर्नल ऑर्गन्स भी तेजी से खराब हो रहे थे।

“आखिर बात क्या है? हम कहाँ जा रहे हैं?”-देविका ने पूछा।

“बताता हूँ।”-डॉ मैड ने बिना अपनी पत्नी के तरफ ध्यान दिए हुए कहा।

मैड ने एक हाथ से अपना सेलफोन निकाला और दूसरे हाथ से स्टेयरिंग संभाले हुए कार ड्राइव करने लगा।
उसने एक निगाह पिछले सीट पर सो रही अपनी बेटी पर डाली।
कितनी मासूम लग रही थी सुहानी। उसकी इस हालत का जिम्मेदार कहीं न कहीं वो खुद था।
मैड ने उधर से अपना ध्यान हटाया और सेलफोन में अक्षय का नम्बर डायल करने लगा।
लगभग तुरंत ही कॉल रिसीव कर ली गयी।

“ये मैं क्या सुन रहा हूँ डॉ मैड? लैब में ब्लास्ट…”- अक्षय ने बिना मैड की बात सुने ही बोलना शुरू कर दिया।

“मेरी बात ध्यान से सुनो अक्षय। कोई है जो मिशन से जुड़े लोगों को नुकसान पहुँचा रहा है। उसी ने लैब में ब्लास्ट भी करवाया है। मैं भी तुरंत ही राजस्थान से बाहर जा रहा हूँ। तुम भी अब वापस उधर मत जाना।”

“पर टीम के बाकी लोग?”

“कुछ लोग तो लैब में हुए ब्लास्ट में ही मारे गए । पर जो लोग बचे हैं उन्हें भी मैंने यही बोला है। ये मिशन बहुत ही गुप्त था।तुम लोग अब कभी आपस में मिलने की कोशिश मत करना।”

“ठीक है।”- अक्षय के मुँह से बस यही शब्द निकले।उसके समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या कहे।

“और हाँ, अगर संभव हो तो इस मिशन के बारे में किसी से मत कहना। अपनी जान देकर भी इस जानकारी को सुरक्षित रखना।”

मैड अभी अक्षय से बातें ही कर रहा था कि एक तेज़ रफ़्तार से आ रही बड़ी कार ने उसकी कार को टक्कर मारी।
उसकी कार पलट कर सड़क के किनारे पहुँच गयी।मैड के सर से खून बहने लगा। उसके सर से बहता खून उसकी आँखों में पहुँचने लगा। उसने बाहर निकलने की कोशिश की पर पैरों में हो रहे असहनीय दर्द की वजह से वह हिल भी नहीं सका।
उसने सर घुमा कर अपनी बेटी को देखने की कोशिश की पर अपना सिर नहीं घुमा पाया।
एक दरार के जरिये उसे केवल बाहर का धुँधला दृश्य ही दिखाई दे रहा था।
अब उसके सारे शरीर में दर्द महसूस हो रहा था। उसके लिए आँखें खोले रखना अब नामुनकिन था।
बंद होती आँखों से वह केवल यही देख पाया कि दो लोग उसकी तरफ बढ़ रहे थे।
कार की तरफ बढ़ रहे दोनों व्यक्ति एक पल के लिए रुके।
देखने में दोनों हट्टे कट्टे थे।उनमें से एक के हाथ में गन थी। दूसरा व्यक्ति निहत्था था। उसके दाहिने आँख के ऊपर भौंह पर बीचों बीच कटे हुए का निशान था।
दोनों ने आपस में इशारा किया और कार को उठाकर सीधा कर दिया।
अब तक कार में कोई भी होश में नहीं था।
उनकी तरफ बिना ध्यान दिए वो दोनों टूटी कार की तलाशी लेने लगे।लगभग पाँच मिनट की तलाशी के बाद भी उनके हाथ कुछ नहीं आया।
दोनों वापस अपनी कार की तरफ बढ़ने लगे।

“लगता है पांडुलिपी भी लैब में किये गए ब्लास्ट में जल गई।”-जिसके हाथ में गन थी वो बोला।

जवाब में दूसरे व्यक्ति ने केवल अपना सर हिलाया।

“वैसे अब हमारे पास कम से कम वायरस की लोकेशन तो है, हो सकता है हमें पांडुलिपि की जरूरत ही न पड़े।” -पहला वाला व्यक्ति फिर बोला।

जवाब में फिर से दूसरे व्यक्ति ने केवल अपना सर हिलाया।
दो मिनट बाद दोनों वहाँ से जा चुके थे।
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वर्तमान समय-
पुष्कर, राजस्थान।
अक्षय और डॉ मैड दोनों किले की सरकती दीवार के जरिये कार सहित नीचे पहुँचे।
मैड अपने व्हील चेयर सहित नीचे उतरा।उसके पीछे ही अक्षय भी बाहर निकला।
अक्षय ने देखा कि वो एक बड़े से हॉल में हैं। जिस फर्श की सहायता से वो अंदर आये थे वो एक प्लेटफार्म की तरह उस हॉल के एक कोने में रुक गया था।
सामने एक स्टील का दरवाजा था। मैड बिना कुछ कहे उस दरवाजे की तरफ बढ़ने लगा। अक्षय भी उसके पीछे पीछे चल पड़ा।
मैड ने दरवाजे के पास लगे कीपैड में सिक्योरिटी कोड डाला तो दरवाजा एक धीमी आवाज के साथ खुल गया।
अंदर एक आधुनिक लैब थी, जिसकी दीवारें और दरवाजे लगभग स्टील और ग्लास के ही बने थे।
अक्षय आँखें चौड़ी करके पूरे लैब का मुआयना करने लगा।उसका मुँह आश्चर्य से खुला हुआ था।

“ये सब कबसे बनवा कर रखा है आपने?”-अक्षय ने आगे बढ़ते हुए पूछा।

“लगभग दो सालों से मैं यहीं रह रहा हूँ। ये जगह एक पुराना किला था जिसके नीचे सुरक्षा कारणों से एक बहुत बड़ा तहखाना बनवाया गया था। ऊपर का किला लगभग टूट चुका है इसिलये ये तहखाना भी किसी के काम का नहीं था, सिवाय मेरे।छः महीने पहले मैंने इस जगह को एक लैब में बदल दिया है। एक आधुनिक लैब, जहाँ हमारी जरूरत का सारा सामान मौजूद है।”

“और स्टाफ? मतलब हमारी टीम में से कौन कौन बचा…” -अक्षय ने जानबूझकर अपनी बात अधूरी छोड़ दी।

“उस दिन लैब में हुए ब्लास्ट में जो लोग लैब में मौजूद थे उनमें से कोई नहीं बचा था। उसके अलावा बाकी किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचा था सिवाय मेरे क्योंकि मैंने समय रहते ही सबको अलर्ट कर दिया था।”

“अगर आप के ऊपर हमला नहीं हुआ होता तो मैं यही समझता कि ब्लास्ट किसी और वजह से हुआ है।क्योंकि उस घटना के बाद भी हमारे सावधानी बरतने के बावजूद भी हमें ढूँढा जा सकता था।”

“इस मामले में मैं कुछ नहीं कह सकता पर शायद आने वाले समय में हमारे इस सवाल का जवाब भी मिले।”

अक्षय एक बार फिर से लैब का मुआयना करने लगा।
लैब के दाहिने और बाएं तरफ दो गैलरियां थीं जिनमें कई कमरों के दरवाजे खुलते थे।
लैब के मेन हॉल, जहाँ इस वक्त दोनों मौजूद थे, वहाँ काफी जगह खाली थी और कई छोटे छोटे मेज लगे हुए थे।

“अक्षय…”-अचानक से अक्षय के पीछे से एक लड़की की आवाज आई ।

अक्षय ने पीछे पलट कर देखा तो एक लड़की उसके पीछे खड़ी थी जिसे वो पहचानता था।

“न…नैनिका।”-अक्षय के मुँह से केवल इतने ही शब्द निकल पाए। उसे लगा कि उसका गला सूख रहा है। एक पल के लिए उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया।

तीन सालों से हर रोज ये सवाल उसे परेशान करता था कि नैनिका जिन्दा है या नहीं? क्या लैब में हुए ब्लास्ट के समय वो लैब में मौजूद थी?
आज उसका जवाब खुद उसके सामने खड़ा था।
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मोहननगर-
जेम्स बांड अभी भी रिवर्स और उसके प्रतिरूप को देख रहे थे। दोनों हू बहू एक जैसे।
लग रहा था दोनों की किसी मशीन द्वारा क्लोनिंग की गई है।
बालों का स्टाइल, कपड़े , आवाज सब कुछ वही।


जेम्स बांड की सूरत भी लगभग मिलती जुलती थी , ऐसा इसलिए था क्योंकि दोनों के पिता जुड़वा भाई थे।दोनों हमेशा साथ में ही रहते थे, फिर भी कई लोग दोनों में अंतर नहीं कर पाते थे।
आज जेम्स बांड की भी हालत ऐसी ही थी।
उन्हें अभी मालूम नहीं था कि रिवर्स ऐसे प्रतिरूप हजारों की सँख्या में बना सकता है।

“तुम्हारे पास एक फोन है जिससे कुछ खतरनाक मैसेज भेजे गए थे। इसीलिये मैं तुम्हें पूछताछ के लिए अरेस्ट करने वाला हूँ।”- रिवर्स की आवाज सुनकर जेम्स बांड अपने ख्यालों से बाहर निकले।

“वो फोन हमारा नहीं है, पर तुम हो कौन?” -जेम्स ने रिवर्स से पूछा।

“पुलिस।” -रिवर्स से पहले उसके प्रतिरूप ने जवाब दिया। रिवर्स उसे घूरने लगा।

“स्कूल के नाटक में पुलिस का रोल मिला है क्या?”-इस बार बांड ने हँसते हुए पूछा।

“मजाक नहीं। मैं जेम्स को अरेस्ट करने वाला हूँ , अगर तुमने बीच में कूदने की कोशिश की तो बहुत बुरा होगा।”- ऐसा कहके रिवर्स ने जेम्स का हाथ पकड़ लिया।

बांड ने रिवर्स के हाथ पे ऐसा वार किया कि उसका पूरा हाथ झनझना गया।उसके हाथ से जेम्स का हाथ छूट गया।
ये देखकर रिवर्स का प्रतिरूप सुपर स्पीड से बांड के सामने आया और अचानक से रुक गया।
अचानक से उसे अपने तरफ आता देख बांड हड़बड़ा गया और सँभलने के चक्कर में गिर पड़ा।

“मैंने पहले ही मना किया था।”-रिवर्स ने अपने कँधे उचकाते हुए कहा।

“सुपर स्पीड ! जेम्स तुम्हारे पास ‘tortoise’ है।” – बांड ने जेम्स से पूछा।

“मेरे पास कहाँ से रहेगा, कल तुमने ही तो लिए थे।”

“अरे हाँ! मैंने अपने जेब में रखा था।” -बांड ने अपनी जेबें टटोलते हुए कहा।-“मिल गए।”

“ए, ये सब क्या लगा रखा है। ये tortoise क्या है?”- रिवर्स ने पूछा।

“Tortoise मतलब कछुआ। नहीं जानते क्या?” -बांड ने दो छोटे छोटे कछुए रिवर्स और उसके प्रतिरूप की तरफ उछाल दिए।

दोनों कछुए एक खास तरह की प्लास्टिक से बने थे।

रिवर्स और उसके प्रतिरूप दोनों ने उन दोनों कछुओं को कैच कर लिया।
उनके कैच करते ही दोनों कछुए फट गए और उनमें से एक खास तरह की हवा निकली जिसने रिवर्स और उसके प्रतिरूप को घेर लिया।

“ये सब क्या नौटंकी है?अब तुम दोनों ही मेरे साथ आओगे।”- इतना कहकर दोनों जेम्स बांड की तरफ दौड़े।

पर ये क्या? दोनों की रफ्तार इतनी कम कैसे हो गयी।

“ये कैसी हवा है?”-रिवर्स ने अपने आस पास देखते हुए कहा।

“ये सब tortoise का कमाल है।इसने तुम्हारे आस पास की हवा को गाढ़ा कर दिया है। ये तुम्हारे शरीर में मौजूद थर्मल एनर्जी के कारण तुम्हारे आस पास ही रहेगी।”-जेम्स ने मुस्कुराते हुए कहा।

“पर कब तक? मैं स्पीड से अपने हाथों को हिलाकर इस हवा को दूर कर दूँगा।”

“तुम अपने हाथों से इसे हटाने की कोशिश करोगे और तुम्हारे हाथों की काइनेटिक एनर्जी (गतिज ऊर्जा) पाकर ये और भी गाढ़ी होती जाएगी। तब तक हम तुम्हें ‘अरेस्ट’ करेंगे।”-इस बार बांड ने कहा।

“तुम अभी समझे नहीं।” – अब रिवर्स को भी गुस्सा आ गया।

उसने अपने शरीर से प्रतिरूप निकालने शुरू किए।अगले पल वहाँ दस रिवर्स खड़े थे।

“तुम्हारा कछुआ तो वाकई स्लो निकला।अब किसकी किसकी थर्मल एनर्जी सिग्नेचर पहचानेगा ?”

इस बार वाकई जेम्स बांड की हैरानी की कोई सीमा नहीं थी।
उन्होंने कई अजूबे देखे थे, कई प्रणियों से पाला पड़ा था उनका। पर सामने खड़ा रिवर्स जैसे प्राणी आजतक नहीं देखा था। एक जैसे दस।
दोनों की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है।

“रुक जाओ रिवर्स।”-एक लड़की की आवाज गूँजी।

रिवर्स ,उसके प्रतिरूप, जेम्स और बांड सबने उस तरफ देखा। वहाँ निधि खड़ी थी।
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कुछ देर पहले निधि कैप्टन रोड के साथ उनके आफिस में मौजूद थी।
(विस्तार में जानने के लिए पढ़ें पिछला भाग।)
दोनों ने ही रिवर्स के सूट में लगे नैनो कैमरे से जेम्स बांड को देखा।


“अरे!मैं इन दोनों को जनता हूँ। इन्होंने कई बार मोहननगर और वहाँ के लोगों को मुसीबतों से बचाया है।”-रोड ने हैरानी से कहा।

“पर रिवर्स तो उन्हें अरेस्ट करने गया है।”

“उसे जरूर कोई गलतफहमी हुई होगी।”

“इसीलिए मैं उसे अकेले नहीं जाने देना चाहती।” -निधि की आवाज में चिंता झलक रही थी।

“एक काम करो, इससे पहले की देर हो जाये तुम जल्दी से वहाँ जाओ। और सुबह तुम दोनों पुष्कर के लिए निकल जाओ।वहाँ कहाँ जाना है उसका एड्रेस मैं तुम्हें भेज दूँगा।”
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“निधि! तुम यहाँ क्या कर रही हो?”- रिवर्स ने निधि को देखते हुए पूछा।

“रिवर्स, जल्दी से अपने प्रतिरूपों को समेटो , ये सब एक गलतफहमी है।”

जेम्स और बांड दोनों अभी तक निधि को ही देख रहे थे। उसने भी अपना फाइटिंग सूट पहन रखा था जो कि स्पेस एकेडेमी से उसे मिला था।

“ये आज हो क्या रहा है?किसी ने सर्कस का दरवाजा खुला छोड़ दिया क्या।” – बांड ने धीरे से जेम्स से कहा।

“मुझे तो लगता है किसी ने कोई डायमेंशनल पोर्टल खोल दिया है, ये रिवर्स तो इस दुनिया का नहीं लगता। वैसे ये लड़की कौन है?” -जेम्स ने भी धीरे से ही जवाब दिया।

“मुझे क्या पता?”

निधि के समझाने पर रिवर्स ने अपने प्रतिरूपों को वापस बुला लिया।

निधि जेम्स बांड की तरफ बढ़ी-“तुम दोनों जेम्स बांड हो न?”

“हैं तो। पर तुम्हे कैसे पता?”

“यहाँ जरूर कोई गलतफहमी हुई है।”-निधि ने बांड के सवाल को अनसुना करते हुए कहा।

“कोई गलत वलत फहमी नहीं है। जेम्स के पास वो फोन है जिससे इसरो के मिसाइल को पुष्कर में लांच करने को कहा गया था।”-रिवर्स ने कहा।

“है तो पर तुम्हें कैसे पता?”

“देखा मैंने कहा था न, कोई फहमी, मतलब गलत फहमी नहीं है।इसी ने मैसेज भेजा था।” -रिवर्स ने इस बार निधि की तरफ देखते हुए कहा।

“अरे मैंने कब कहा कि मैंने मैसेज भेजा। मैंने बस ये कहा कि मेरे पास फोन है।”

“पूरी बात बताओ जेम्स।” -इस बार निधि ने बीच में ही दोनों को टोका।

“हम एक केस की इन्वेस्टीगेशन कर रहे थे। उसी दौरान हमें एक संदिग्ध आदमी के हाथ से ये फोन मिला। वो आदमी तो भाग गया पर हमने मैसेज पढ़ लिया। हम यही सोच रहे थे कि कैसे मिसाइल लांच को रोका जाए कि तभी ये आ गया।” -जेम्स ने रिवर्स की तरफ इशारा करते हुए कहा।

“लांच तो मैंने रोक दिया।” -रिवर्स के चेहरे पे मुस्कुराहट आ गयी।

“यानी यहाँ जो भी हुआ गलतफहमी से हुआ।”-निधि ने चैन की सांस ली। रिवर्स को समझाना इतना आसान नहीं होता।

रिवर्स भी अब आश्वस्त था और जेम्स बांड भी।
“अब हमें जाना होगा। उम्मीद है आगे भी मिलेंगे।”-निधि ने जाते हुए कहा।

“पर ये तो बताओ तुम्हें हमारे बारे में इतना कैसे पता।कौन हो तुमलोग?” -बांड ने पूछा।

“हम एक सीक्रेट आर्गेनाइजेशन का हिस्सा हैं जो कि लोगों की सहायता के लिए बनाया गया है। इससे ज्यादा बातें बताना रूल्स के अगेंस्ट है।” -निधि से पहले रिवर्स ने बताया ।

अगले ही पल दोनों वहाँ से जा चुके थे।
जेम्स बांड दोनों वहाँ कुछ देर खड़े थे।

“अब आगे क्या?”-बांड ने पूछा।

“मिसाइल वाला केस तो बंद ही समझो। जब तक कोई लीड नहीं मिलेगी आगे नहीं बढ़ा जा सकता , वैसे भी सुबह हमें पुष्कर पहुँचना है। हो सकता है वहाँ पे हमें पता चले कि कोई पुष्कर को क्यों उड़ाना चाहता है।”

“पर हम जायेंगे कैसे?”

“मैंने उस मैड नाम के आदमी को बोल दिया है कि हम पहुँच जाएंगे। अब हमें टाइगर से ही जाना होगा।”

टाइगर जेम्स बांड की बाइक का नाम है, जिसके अंदर AI (आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस) है।

“ठीक है तब, लंबे सफर का मजा आएगा।”

“बिल्कुल, उससे पहले एक लंबी नींद भी जरूरी है।”

जेम्स ने कहा और दोनों हँसने लगे।
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अक्षय अभी भी नैनिका को ही देख रहा था।
नैनिका आर्या।
तीन साल पहले अक्षय नैनिका से मिला था। हमेशा खुश रहने वाली नैनिका उसे एक नजर में ही पसंद आ गई थी,पर कुछ कह पाने से पहले ही वो हादसा हो गया जिसने सब कुछ बदल दिया।

“हाई! कहाँ खो गए?”- नैनिका ने पूछा।

नैनिका की आवाज सुनकर उसकी तंद्रा टूटी।
नैनिका ने इस समय पीली टीशर्ट पहन रखी थी जिसमें वो और खूबसूरत लग रही थी।
उसकी बड़ी बड़ी आँखें इस समय और भी खूबसूरत लग रहीं थी जिनकी वजह से उसके परिवार वालों ने उसका नाम नैनिका रखा था।

“क…कहीं नहीं। तुम कैसी हो?”

इससे पहले नैनिका कुछ बोल पाती, मैड उससे पहले ही बोल पड़ा- “नैनिका! मैंने जो रिपोर्ट्स तुमसे माँगी थीं, वो तैयार हैं?”

“जी हाँ, सब तैयार है , बस प्रिंटआउट निकालने बाकी हैं, मैं अभी कर देती हूँ।” -इतना कहकर नैनिका वहाँ से गई और बायीं तरफ के एक केबिन में चली गई।

उसके जाने के बाद मैड अक्षय की तरफ मुड़ा-“नैनिका के अलावा जो लोग बचे थे उन्होंने आने से मना कर दिया। इसे भी मैंने बहुत मुश्किल से राजी किया है क्योंकि इसने पहले डॉ शुक्ला के साथ काम किया है। ”

“अगर हमारा काम कुछ दिन और जारी रहता तो डॉ शुक्ला जरूर उस वायरस का पता लगा लेते।”

“सही कहा तुमने , पर उस ब्लास्ट में…”-इसके आगे की बात मैड ने जानबूझकर छोड़ दी।

कुछ देर बाद मैड ने कहा- “तुम अपना सामान यहाँ व्यवस्थित कर लो। गैलरी के लास्ट में रहने लायक क्वार्टर बने हुए है।अमर तुम्हें वहाँ पहुँचा देगा।”

“ये अमर कौन है?”
“जब से मैं यहाँ शिफ्ट हुआ हूँ तबसे वो मेरे साथ है। मेरा सारा काम वही देखता है । पुराना परिचित है और सबसे महत्वपूर्ण, भरोसेमंद है।”

मैड ने आवाज लगाई। कुछ ही देर में एक लंबा चौड़ा नौजवान वहाँ आ गया।
देखने से उसकी उम्र पच्चीस-छब्बीस के आस पास थी। चेहरा बिल्कुल साफ। उसने एक टीशर्ट और जीन्स पहन रखी थी।

“पर मेरा अधिकतर समान तो यहाँ है नहीं। जो जरूरी सामान था वो भी कार में ही था।”

“तब तक तुम जाकर अपना रूम देखो, थोड़े देर में कार यहाँ पहुँच जाएगी। तब तक आराम करो, उसके बाद डिनर पे मिलते हैं। कल की सुबह यहाँ बहुत से लोग आने वाले हैं।”

अक्षय ने सहमति से सर हिलाया और अमर के साथ चला गया।
अक्षय के जाने के बाद मैड ने एक कॉल लगाई।

“हेलो! डॉ तारिक़?”

“बोलो मृत्युंजय। कैसे याद किया मुझे?”-दूसरी तरफ से एक आवाज आई।

“मैंने तुमसे कुछ करने को कहा था। कोई काबिल मिला या नहीं।”


“तुमने जिस हिसाब से कहा था वैसा एक लड़का है मेरी नजर में , मेरा असिस्टेंट चंद्रेश। मैंने उससे बात की है वो राजी हो गया है।”


“तो ठीक है उसे कल सुबह यही भेज दो।”


“कल सुबह! इतनी जल्दी?” -उधर से तारिक़ की चौंकने वाली आवाज सुनाई दी।


“बात को समझो तारिक़, काम बहुत जरूरी है।”

“ठीक है मैं उससे बात करूँगा, पर अगर वो लेट हुआ तो मेरी जिम्मेदारी नहीं।”

“ठीक है, पर मुझे लगता है वो लेट नहीं होगा।”
मैड ने कहा और फोन रख दिया।
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देहरादून-
तारिक़ ने फ़ोन रखा और कुछ सोचने लगा।
तारिक़ पूरे भारत का बहुत बड़ा पुरातत्वविद था।उसकी उम्र लगभग साठ वर्ष थी।
तारिक़, मैड को बहुत पहले से जानता था, हालांकि दोनों में कोई गहरी दोस्ती नहीं थी पर कई मौकों पर दोनों का मिलना हो जाता था।
कुछ दिनों पहले मैड ने उससे एक काम करने को कहा था। उसने तारिक़ को पुष्कर बुलाया था क्योंकि उसे किसी खास और गुप्त काम के लिए एक पुरातत्वविद यानी archaeologist की जरूरत थी।
तारिक़ ने अपने बिजी शेड्यूल के चलते वहाँ जाने से मना कर दिया। तब मैड ने उससे किसी दूसरे पुरातत्वविद के बारे में पूछा जो उसके गुप्त काम में उसकी सहायता करे।
तारिक़ की नजर में केवल एक ही ऐसा शख्स था, उसका असिस्टेंट चंद्रेश।
उसी समय चंद्रेश वहाँ आया।उसकी उम्र लगभग पच्चीस साल थी।

“आपने बुलाया था?”

“हाँ चंद्रेश, मैंने तुमसे कुछ दिन पहले पुष्कर जाने को कहा था न?”


“हाँ, तो कब जाना है?”


“तुम्हें सुबह वहाँ जाना है।”


“सुबह?”


“हाँ सुबह, इसीलिये तुम अभी जाओ और रात में ही वहाँ के लिए निकल जाना।”


“ठीक है।”-चंद्रेश ने कहा और धीरे धीरे तारिक़ के आफिस से बाहर चला गया।

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पुष्कर-
रात में लगभग आठ बजे।
अक्षय अपने ‘कमरे’ से बाहर निकला।
ठीक उसी समय नैनिका भी बगल वाले कमरे से बाहर निकली।

“हाई!”-इस बार अक्षय ने नैनिका का अभिवादन किया।

“तो डॉ ने तुम्हें भी एक कमरा दे दिया?”-नैनिका ने मुस्कुराते हुए पूछा।

“तुम्हें भी से क्या मतलब? तुम भी यहीं हो क्या?”

“हाँ, ये बगल वाला कमरा मेरा है।” -नैनिका ने बगल वाले कमरे की तरफ इशारा किया; जिसमें से वो कुछ ही देर पहले निकली थी।

“मुझे समझ नहीं आ रहा ये मैड की लैब है या होटल।” – अक्षय ने चारों तरफ देखते हुए कहा।

“ये तो मुझे भी नहीं पता, पर यहाँ और भी रूम्स हैं।साथ ही वो सारी चीजें जो एक घर मे रहती हैं। मैं अभी किचन की तरफ ही जा रही थी डिनर के लिए।”

“मैं भी वहीं जा रहा था, अच्छा हुआ तुम मिल गयी वरना मुझे ढूँढने में बहुत दिक्कत आती।”

“आओ चलते हैं उधर।”-नैनिका ने कहा और एक तरफ बढ़ गयी।

अक्षय भी उसके साथ ही चलने लगा।

“तुम कब आयी यहाँ?”

“मैं? मैं तो कल रात ही आयी यहाँ।”

“एक रात में तुम्हें काफी बातें मालूम हो गईं हैं।”

नैनिका ने जवाब में केवल मुस्कुरा दिया।
जल्दी ही दोनों ‘किचन’ में पहुँचे।
वहाँ एक छोटी सी टेबल पर डिनर रखा हुआ था। जब अक्षय और नैनिका वहाँ आये तो अमर एक प्लेट में खाना लेकर बाहर निकल रहा था।
दोनों टेबल पर बैठ गए और दोनों ने अपनी प्लेट में खाना निकाल लिया।

“डॉ मैड नहीं आयेंगे क्या?”-अक्षय ने पूछा।

“अमर वही तो लेकर गया है अभी।”

“ओह! मुझे लगा वो अपना खाना लेकर गया है।”

“मैड अपना खाली समय अपनी बेटी के साथ ही बिताना पसंद करते हैं।”

“बेटी?”- अक्षय ने हैरानी से पूछा-“मुझे तो पता था कि उनकी बेटी भी उस एक्सीडेंट में…”

“जानबूझकर उन्होंने ये खबर फैलाई थी।मीडिया वालों को भी यही बताया गया था। सुहानी अभी कोमा में है।तुमको पता ही होगा कि उसे एक खास तरह की बीमारी थी जिसके कारण उसकी हड्डियाँ कमजोर हो रहीं थीं , साथ ही उसके इंटर्नल ऑर्गन्स भी तेजी से खराब हो रहे थे।एक्सीडेंट में वो भी बच गयी थी पर कोमा में चली गयी। जबसे वो कोमा में गयी है तबसे उसकी बीमारी भी स्लो हो गयी है। मैड को अभी भी उम्मीद है कि इसका कोई इलाज मिल जाएगा जबकि अभी ऐसी कोई भी उम्मीद नहीं मिली है। इन फैक्ट ये बीमारी किसी और में देखी ही नहीं  गयी है।”

“मैड ने इस मिशन में बहुत कुछ खोया है।”-अक्षय ने एक गहरी साँस लेते हुए कहा।

“मैंने सुना है तुम राइटर बन गए।”

“हाँ”-अक्षय ने हँसते हुए कहा-“आज सुबह ही मेरे बुक की लॉन्चिंग थी। पर तुम्हें कैसे पता?”

“इंटरनेट। आज की दुनिया में सब कुछ पता चल सकता है।”

“वैसे तुमने क्या किया इन तीन सालों में?”

“काम, काम और काम।अभी भी एक प्रोजेक्ट पे काम ही कर रही थी कि मैड की कॉल आयी तो मैं यहाँ आ गयी।घर वालों को भी नहीं बता सकती कि कहाँ जा रही हूँ।वैसे भी घर वाले आजकल मेरी शादी कराने के पीछे पड़े हुए हैं।”-नैनिका ने हँसते हुए कहा।- “तुम बताओ, तुम्हारी शादी हुई या नहीं?”

“अभी तक तो नहीं।”

“इसका क्या मतलब?कोई लड़की पसंद कर ली है क्या?”

“हाँ। लेकिन उसे बताना अभी बाकी है।”

दोनों हँसने लगे।
काफी देर तक दोनों बातें करते रहे, उसके बाद दोनों वापस अपने अपने कमरों में चले गए।
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न्यूज़ फ़्लैश->>>>>
अभी अभी मिले खबर के अनुसार दिल्ली के इसरो बेस को पुलिस ने अपने काबू में कर लिया है। यहाँ बताते चलें कि कुछ देर पहले एक अनजान शख्स ने बेस को अपने काबू में कर लिया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक दूसरे युवक ने पुलिस की सहायता की और तुरंत ही हवा में गायब हो गए। पुलिस ने इस मामले में कुछ भी बताने से मना किया है।
सच्चाई क्या है कोई नहीं जानता, पर जल्द ही हम इसकी तह तक जरूर पहुँचेंगे।
इस खबर से संबंधित सच्चाई जानने के लिए हमसे जुड़े रहें।
कैमरामैन रमन के साथ संवाददाता अंजली।
न्यूज़ 365।
हमेशा सच के साथ।
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द्वापरयुग-
कार्तिकेयपुरम।
कार्तिकेयपुरम की बाहरी सीमा पर स्थित था कालकूट वन।
कालकूट वन में मानवों का जाना निषेध था क्योंकि वह जगह राक्षसों के अधिकार में आती थी।
वर्षों पूर्व मानवों और राक्षसों में एक संधि हुई थी जिसके अनुसार राक्षस केवल कालकूट वन में ही रहेंगे। वहाँ जाने वाले मानव के ऊपर राक्षसों का अधिकार होगा।
इस संधि से मानवों और राक्षसों दोनों को लाभ था।
कालकूट वन में जाने वाला कोई भी मानव जीवित नहीं लौटता।
किवंदतयों के अनुसार उनकी उत्पत्ति स्वयं ब्रह्मा जी से हुई थी।परंतु त्रिदेवों ने उन्हें पृथ्वी पर भेज दिया।
उनका कद इंसानों की तरह था पर स्वभाव बिल्कुल विपरीत।
वे कच्चा माँस खाते थे। जानवरों की तरह कंदराओं में रहते थे।लंबे बाल और लंबे नाखून। जंगल के ही नियम का पालन करते थे; अर्थात जो बलवान वही राजा।
इतना ही नहीं वे मायावी भी थे। माया से वे अपना कद भी बढ़ा सकते थे।
परंतु उनमें बुद्धि की कमी थी, जिसके कारण वे हमेशा मानवों से पराजित हो जाते थे।
कुछ समय पूर्व विराध ने उन्हें अपने नेतृत्व में कालकूट वन से निकाला था।
विराध एक असुर माता और राक्षस पिता की संतान था। उसका पालन असुरलोक में ही हुआ था।
इसी कारण वो राक्षसों को भी असुरों के बराबर अधिकार दिलाना चाहता था। उसने राक्षसों और असुरों की एक सम्मिलित सेना बनाई और मानवों पर अत्याचार करने लगा।
परंतु निर्भय के द्वारा राक्षस राज विराध का अंत होने के बाद राक्षस पुनः कालकूट वन में लौट चुके थे।
उनका साहस टूट चुका था। उन्होंने कालकूट वन को फिर से अपनी नियति बना लिया था।
पर आज कोई उनकी नियति बदलने वाला था।
आकाश में सूरज जल्द ही डूबने वाला था। कार्तिकेयपुरम और कालकूट वन को विभक्त करने वाली पगडण्डी पर एक चिन्ह बना हुआ था जो अंकित करता था, कि आगे कालकूट वन है।
पर एक ऋषि आज उसी तरफ बढ़े जा रहे थे। उनकी चाल की दृढ़ता से पता चल रहा था कि वे जानबूझकर वहाँ जा रहे थे।
उनके चेहरे पर एक अद्भुत तेज़ था, जिससे उनकी आयु का पता नहीं चल रहा था। लंबे बाल और घनी मूछें, उनके चेहरे को और कांति प्रदान कर रहीं थीं।
कालकूट वन के राक्षस वैसे भी तो ऋषियों से बच कर रहते थे; परंतु इस ऋषि को रोकने का साहस भी कोई नहीं कर रहा था।
वे सीधा राक्षसों के वर्तमान राजा कलंकेश की कंदरा की तरफ बढ़ रहे थे।
कलंकेश एक ताजे हिरण को खाकर अपनी गुफा के बाहर लेटा हुआ था। वहाँ पेड़ इतने घने थे कि सूर्य की किरणें भी नहीं पहुँचती थीं।
कलंकेश के शरीर पर मैल की एक पर्त जमी हुई थी। लंबे बाल आपस में उलझे हुए थे। दांतों में पीलापन था।
उसने ऋषि को आते देखा तो उठ खड़ा हुआ।

“प्रणाम ऋषि युगेन्द्र। आपने हमारी कई अवसरों पे सहायता की है; इसी कारण राक्षसों ने आपका वध नहीं किया वरना आज तक कोई भी मनुष्य इस कंदरा तक नहीं पहुँच सका है।”

“कब तक इन्हीं कंदराओं में सड़ते रहोगे? यहाँ तो सूर्य की किरणें भी ठीक से नहीं पहुँच पाती।”

कलंकेश कुछ नहीं बोला, परंतु उसके चेहरे पे एक मुस्कान फैल गयी।

“मालूम होता है आज मानवों ने महान रसायन ज्ञाता युगेन्द्र को राक्षसों का कुशल क्षेम पूछने के लिए भेजा है।”

“ऐसा नहीं है कलंकेश। मैं यहाँ तुम्हारे लिए एक प्रस्ताव लाया हूँ।”

“राक्षसों को किसी प्रस्ताव को आवश्यकता नहीं । वे इन वनों में ही सुख से हैं।”

“ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने कालकूट के बाहर का संसार नहीं देखा।”

“कुछ समय पूर्व विराध ने भी ऐसी ही बातें कही थीं। जिन राक्षसों ने उसका कहना माना आज वे जीवित ही नहीं।”

“विराध मूर्ख था। तुम्हारे साथ तो स्वयं तुम्हारे जनक ब्रह्मा ने भी छल किया।”

“बस करिए ऋषिवर। आपका प्रस्ताव क्या है? कहीं आप भी तो हमें छलने नहीं आये?”

“मैं राक्षसों को उनका अधिकार दिलाना चाहता हूँ।”

“वो कैसे?”

“मैंने एक ऐसे रसायन का निर्माण किया है जिससे मानवों को भी राक्षस बनाया जा सकता है। परंतु उस रसायन को और उत्तम बनाने के लिए मुझे तुम्हारी सहायता की आवश्यकता है।”

“परंतु ऐसा कैसे संभव है। और इसमें आपका क्या लाभ?”

“मैं मानवों से अपना प्रतिशोध लेना चाहता हूँ। उन्होंने मेरे रसायन ज्ञान का परिहास किया है। मैं उन्हें रसायन ज्ञान की शक्ति दिखाना चाहता हूँ। मैंने जिस रसायन का निर्माण किया है उससे सारे मानवों को राक्षसों में परिवर्तित किया जा सकता है। राजा हो या रंक, स्त्री हो या पुरूष, वैश्य हो या क्षत्रिय, ज्ञानी हो या मूर्ख, बालक हो या प्रौढ़, आस्तिक हो या नास्तिक, शैव हो या वैष्णव, मित्र हो या शत्रु सबको राक्षस में परिवर्तित किया जा सकता है।”

राक्षस राज कलंकेश की आंखों में एक चमक आ गयी। उसकी आँखों में एक स्वप्न तैरने लगा। पूरे विश्व को राक्षस क्ष्रेत्र बनाने का स्वप्न।

“मुझे आपका प्रस्ताव स्वीकार है। मैं आपकी सहायता करूँगा। आपका प्रतिशोध पूर्ण होगा। सम्पूर्ण पृथ्वी अब राक्षस क्षेत्र बनेगी।”

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भाग 3 समाप्त।

गाथा जारी है [भाग 4- पुनर्गठन] में।
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नमस्कार दोस्तों।
पिछले भागों की तुलना में इस भाग को आने में थोड़ी देर हुई , पर आने वाले भाग जल्दी जल्दी ही आयेंगे।
तब तक आप इस कहानी के बारे में अपनी निष्पक्ष राय अवश्य दें।

Written By– Akash Pathak  for Comic Haveli.

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2 Comments on “राक्षस क्षेत्र भाग-3”

  1. बहुत बढ़िया । काफी मस्त। कहानी में रहस्य बने हुए हैं और रोमांचक भी होती जा रही है। डॉक्टर मैड और उनके असिस्टेंट का अतीत भी धीरे-धीरे सामने आ रहा है। जेम्स-बॉन्ड Vs रिवर्स देखकर मजा आ गया । हंसी भी आई। स्टोरी में सबकुछ है। मुझे आकाश पाठक भाई का लिखने का अंदाज़ बहुत अच्छा लगता है । शायद सबसे ज़्यादा। यही कारण है कि मैं इनकी एक भी कहानी मिस नही करता। नागभारत तो आज भी याद है मुझे। अब मुझे नागभारत 2 का ििइंतज़ार है। और उससे भी ज़्यादा इस कहानी के अगले भाग का। क्योंकि यह ज्यों-ज्यों आगे बढ़ रही है रोमांच भी बढ़ रहा है और दिल की धड़कने भी। बस आकाश भाई अगले पार्ट जल्दी दीजिएगा। और हाँ। जेम्स-बॉन्ड को नया खिलौना देने के लिए धन्यवाद

  2. Achha crossover hai, vo virus kya hai vo to ab tak log samajh hi gye honge. Nirbhay bhi shayad present me aayega. Tabhi team puri hogi.

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