राक्षस क्षेत्र (भाग एक – प्रस्तावना)

■ राक्षस क्षेत्र■
◆भाग एक – प्रस्तावना◆
सतयुग
काल के पहले चरण अर्थात सतयुग का अंत चल रहा था।
सृष्टि के रचियता , त्रिदेवों में एक, ब्रह्मा चिर निद्रा में लीन थे।
ब्रह्म लोक में शांति छाई हुई थी। अचानक ब्रह्मदेव के मुख से निकलती श्वांस एक आकार लेने लगी। उनकी थकावट, और दुर्गुण जो गुप्त रूप से उनके शरीर में विद्यमान थे ,वे एक रूप लेने लगे।
कुछ ही क्षणों में वो आकृति कई छोटी छोटी आकृतियों में बंट गयी।
उनके मुख पर एक अजीब भयानकता थी।
उन आकृतियों ने ब्रह्मदेव के शरीर भक्षण शुरू कर दिया।
ब्रह्मदेव की निद्रा भँग हो गयी।
ब्रह्मदेव ‘रक्षाम!’ ‘रक्षाम!’ चीखने लगे।
पूरी सृष्टि उनकी चीखों से थर्राने लगी।
तब सृष्टि के पालक विष्णु का आगमन हुआ।
उन्हें ब्रह्मदेव को उन आकृतियों से मुक्त कराया।
वो आकृतियाँ नष्ट नहीं हुईं, विष्णु ने उन्हें पृथ्वी पर भेज दिया।
ब्रह्मदेव के ‘रक्षाम!’ उच्चारण के कारण उन आकृतियों को राक्षस कहा गया।
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कलियुग
वर्तमान समय-
“Mr. अक्षय गर्ग, आप अपनी किताब ‘राक्षस रहस्य’ के बारे में कुछ बताइए।”- एक बुजुर्ग पत्रकार ने अक्षय से पूछा।
डिग्गी पैलेस , जयपुर राजस्थान में इस समय लिटरेचर फेस्टिवल चल रहा था। चारों तरफ बुक स्टॉल्स लगे हुए थे।देश विदेश से लोग यहाँ आए हुए थे। जनवरी के महीने में खिली धूप के कारण भीड़ इस समय कुछ ज्यादा ही थी।
नए पुराने लेखक सब उत्साह से अपनी किताबों का प्रचार कर रहे थे।
ऐसे ही एक छोटे स्टॉल के बाहर भी भीड़ लगी हुई थी।स्टॉल के बाहर एक किताब के पोस्टर लगे हुए थे जिसका नाम था -‘राक्षस रहस्य’। इस समय उस किताब का लेखक अक्षय गर्ग स्टॉल में ही मौजूद था।
अक्षय स्टॉल में ही एक ऊँची जगह खड़ा था, उसके साथ एक और लड़का था जो शायद स्टॉल को संभालने का काम करता था। स्टॉल के बाहर भीड़ थी पर इतनी नहीं कि अक्षय को माइक की जरूरत पड़ती ।
“यह एक फिक्शनल नावेल है, जिसमें बाईसवीं सदी में राक्षसों का हमला होता है। बाईसवीं सदी में राक्षस कहाँ से आये और क्या बाईसवीं सदी का इंसान उन्हें हरा पायेगा? ये नावेल उसी पे बेस्ड है।”-अक्षय ने बुजुर्ग पत्रकार के सवाल का जवाब दिया।
अक्षय की उम्र लगभग 27-28 वर्ष थी।आँखों पर चश्मे लगे थे और चेहरे पर गंभीरता थी।
बहुत तल्लीनता से वह लोगों के सवालों का जवाब दे रहा था जिससे स्टॉल के बाहर मौजूद भीड़ बढ़ती जा रही थी।
“दोस्तों यह मेरी पहली किताब है, उम्मीद है आपलोग मुझे और मेरी किताब को ढेर सारा प्यार देंगे जिससे मुझे आगे लिखने में कोई दिक्कत न आये।”
“अक्षय गर्ग… क्या आप राक्षसों में विश्वास करते हैं?”- भीड़ को चीरती हुई एक आवाज आई।
अक्षय ने देखा भीड़ में ही एक ऑटोमैटिक व्हीलचेयर पर एक आदमी बैठा था।उसकी उम्र लगभग 40-42 वर्ष रही होगी। सूट बूट पहने उस आदमी की आवाज में जैसे सम्मोहन सा था।
भीड़ की नजरें भी उसी पर टिक गयीं और उसकी नजरें अक्षय पर ही टिकी हुई थी।
एक पल के लिए अक्षय को भी नहीं सूझा की वो क्या जवाब दे।
“जी?”-मुश्किल से उसके मुँह से निकला।
“मेरा मतलब है कि आपने राक्षसों पर ये किताब लिखी है, तो जाहिर है आपने जरूर थोड़ी बहुत रिसर्च भी की होगी।तो क्या आप मानते हैं कि राक्षस सच में होते हैं?”
“जी नहीं, कम से कम आज के समय में ये कहना कि राक्षस होते हैं, एक बेकार सी बात होगी।”
अक्षय ने जल्दी से जवाब दिया और उस आदमी को जानबूझकर अनदेखा कर दिया।भीड़ भी वापस अक्षय की तरफ मुड़ गयी।
व्हीलचेयर पे बैठा आदमी भी भीड़ में ही गायब हो गया। पर उसे देखने के बाद अक्षय के हाव भाव में एक बदलाव सा आ गया। अक्षय ने जल्दी से अपना ‘पूर्व नियोजित’ कार्यक्रम समाप्त किया और पार्किंग की तरफ बढ़ गया।
अक्षय की बातों से प्रभावित भीड़ का रुख उसके स्टॉल की तरफ बढ़ चुका था जो उसके नावेल की बिक्री बढ़ाने वाली थी।
अक्षय अपनी कार की तरफ बढ़ा कि अचानक से व्हीलचेयर पे बैठा आदमी बगल वाली कार की ओट से बाहर निकला।
“अक्षय गर्ग । लगता है तीन सालों में तुम मुझे भूल गए।”
“आपको तो शायद मैं अगले जन्म में भी न भूल पाऊँ डॉक्टर मृत्यंजय अरुण देसाई उर्फ… डॉक्टर मैड (MAD)।”
“फिर भी तुमने मेरे सवाल का सही जवाब नहीं दिया।”
“मैं उसी को सच मानता हूँ जिसे साबित कर सकूँ और इसीलिए मेरा जवाब कि ‘राक्षस नहीं होते’ सही था।”
“तुम उसी सच को झुठला रहे हो जिसे तुम खुद तीन साल पहले मेरे साथ ढूँढ रहे थे।तुम उसे सच मानते हो जिसे साबित कर सकते हो और मैं उसे सच मानता हूँ जिसे महसूस कर सकता हूँ।”
“आपको पता है डॉक्टर, आपसे ज्यादा मैंने आपकी बातों को मिस किया। पर आज मैंने आपको देखा तो मुझे यकीन नहीं हुआ। मुझे कभी नहीं लगा था कि उस ‘एक्सीडेंट’ के बाद हम कभी मिलेंगे।”
डॉक्टर मैड के होठों पे एक मुस्कुराहट तैर गयी।
“ये दुनिया अभी इतनी बड़ी भी नहीं कि मैं जिससे चाहूँ उसे मिल न पाउँ। और जो तीन साल पहले हुआ था वो कोई एक्सीडेंट नहीं बल्कि एक साजिश थी । हमारे बीच कोई घुसपैठिया था, कोई घर का भेदी था।”
“चाहे जो भी कहिये डॉक्टर, हम अपनी खोज के अंतिम चरण में पहुँच चुके थे, शायद जिन ‘राक्षसों’ को हम ढूँढना चाहते थे, वो खुद इंसानों के भीतर कहीं छुपा हुआ था। पुरानी बातों को भूल कर हमें इस बात की खुशी मनानी चाहिए कि हम अभी भी जिंदा हैं, और अपनी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए।”
“अगर मुझे सब भूलना ही होता तो मैं यहाँ नहीं आता।”
“इसका अंदाजा तो मुझे आपको देख कर ही हो गया था, पर मैं आपकी कोई मदद नहीं कर पाउँगा।मैं पुरानी बातों को भूलना चाहता हूँ।”-अक्षय ने अपना चश्मा ठीक करते हुए कहा।
“अगर भूलना चाहते तो ‘राक्षस रहस्य’ नहीं लिख रहे होते।”
“शायद आपको पता नहीं डॉक्टर कि ये एक काल्पनिक कहानी है, शायद जिन राक्षसों और उनकी कहानियों के बारे में मैंने पढ़ा था,उसी का असर था।कल्पना और यथार्थ में अंतर होता है।”
“हर यथार्थ पहले कल्पना ही होती है, बिना कल्पना के किसी को यथार्थ रूप नहीं दिया जा सकता।”
इस बार मुस्कुराने की बारी अक्षय की थी।
“मैं आपकी इन्ही ‘बातों’ को मिस कर रहा था, पर इसका ये मतलब नहीं कि मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ।”
“पहले पूरी बात तो सुन लो, उसके बाद निर्णय लेना। बिना प्रश्न जाने उत्तर देना बेवकूफी है।”
“क्या बात है? इस बार राक्षसों की जगह एलियंस को ढूंढेंगे?”
“नहीं, इस बार हमें कुछ नहीं ढूँढना , बल्कि किसी और ने कुछ ढूँढ लिया है।”
“मतलब?”
“किसी ने उस ‘वायरस’ को ढूँढ लिया है, जिसे हम ढूँढने वाले थे, या यूँ कहें ढूँढ चुके थे।”
“क्या ? अगर ऐसा है और उस पांडुलिपि में लिखी बात सच थी तो अब तक इस दुनिया में तहलका मच जाना चाहिए था।”
“तुम समझे नहीं। जिसने भी वायरस ढूँढा है उसके पास पांडुलिपि नहीं है, मुझे शक है कि लैब में हुए हमले में ही वो पांडुलिपि नष्ट हो गयी थी।”
“इसका मतलब जिसने भी वायरस ढूँढा है उसे ‘इंग्रेडिएंट्स’ मिल गए हैं पर ‘रेसिपी’ नहीं मिली।”
“हाँ, पर वो ‘वायरस’ बिना पांडुलिपि के भी खतरनाक साबित हो सकता है और अगर बदकिस्मती से उन्हें वो पांडुलिपि मिल गयी या उसमें लिखी बातें उन्हें पता चल गयीं तो फिर कुछ नहीं किया जा सकता। जो दुनिया ‘राम राज्य’ की कहानियाँ सुनाती है , वो ‘राक्षस- राज्य’ को अपनी आँखों से देखेगी।”
“प..पर उन्हें वो ‘वायरस’ कहाँ मिला? और कैसे मिला?”
“वो ‘वायरस’ उन्हें नहीं हमें मिला था, अगर हम कुछ दिन और रिसर्च जारी रखते तो हमें सफलता जरूर मिलती।जाहिर है किसी ने हमारी रिसर्च का ही इस्तेमाल किया है। और… वायरस वहीं मिला है जहाँ उम्मीद थी।”
“यानी…पुष्कर।”
“हाँ, ब्रह्मा की नगरी पुष्कर।”
अक्षय ने एक गहरी साँस ली।
“पर मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ।”
“तुम्हें मेरे साथ पुष्कर चलना होगा।मुझे ऐसे लोगों की जरूरत है जो इस बात की गम्भीरता को समझें।”
“पर पुष्कर ही क्यों?और आपका प्लान क्या है?”
“पुष्कर में हम अभी भी उस वायरस को ढूँढ रहे है। और अगर बदकिस्मती से पांडुलिपी उन्हें मिल गयी ,जिनके पास वायरस है तो हमें उनके लिए तैयार रहना होगा।”
“पर कैसे? इस दुनिया में कौन है जो ‘राक्षसों’ को रोक पायेगा?”
इतने देर में एक लंबी कार आके उनके बगल में रुकी।
“बातों का वक्त नहीं है अक्षय, तुम मेरी मदद कर सकते हो।”
अक्षय थोड़ा हिचकिचाया।
“क्या हुआ?”-डॉक्टर ने पूछा।
“मेरी कार…”
“चाभी कार में ही छोड़ दो, तुम जहाँ चाहोगे, कार वहाँ सही सलामत पहुँच जाएगी।”
अक्षय ने ऐसा ही किया।
डॉक्टर की कार का दरवाजा, जो कि काफी बड़ा था, खुला और उसमें से समतल सतह बाहर निकली जो कि जमीन पर आकर टिक गई।डॉक्टर मैड व्हीलचेयर सहित उसमें चले गए। उनके बाद अक्षय भी अंदर गया।वहाँ एक फिक्स सीट पर वो बैठ गया।
डॉक्टर ने ड्राइवर को इशारा किया और कार जयपुर से पुष्कर बढ़ने लगी।
“आपने अभी भी मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया , कौन बचाएगा इंसानों को?”- अक्षय ने कार के भीतरी हिस्से को ध्यान से देखते हुए कहा।
“ये फ़ाइल लो।”-डॉक्टर ने अक्षय को एक फ़ाइल देते हुए कहा।-“मैंने ऐसे लोगों की एक रिपोर्ट तैयार की है। इस दुनिया मे ऐसे इंसान भी हैं जो आम इंसानों से अलग हैं, पर समय आने पर आम इंसानों की रक्षा वही करेंगे।”
अक्षय फ़ाइल को ध्यान से पढ़ने लगा और कार पुष्कर की तरफ बढ़ने लगी।
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न्यूज़ फ़्लैश->
पिछले कुछ दिनों में भारत के विभिन्न इलाकों में क्राइम ग्राफ में बढ़त देखी गयी है।लोगों का कहना है सीधे साधे लोग भी संगीन अपराध कर रहे हैं।मनोवैज्ञानिक इसे बिजी लाइफ स्टाइल का नतीजा मान रहे हैं, पर अचानक बढ़े हुए ग्राफ का कारण कोई नहीं बता पाया। वहीं दूसरी ओर कई धार्मिक संगठन इसे कलियुग के आगमन का संकेत मान रहे हैं।सच्चाई क्या है, कोई नहीं बता पा रहा।
इस खबर से संबंधित सच्चाई जानने के लिए हमसे जुड़े रहें।
कैमरामैन रमन के साथ संवाददाता अंजली।
न्यूज़ 365।
हमेशा सच के साथ।
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भाग -एक [ प्रस्तावना ] समाप्त।

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7 Comments on “राक्षस क्षेत्र (भाग एक – प्रस्तावना)”

  1. बहुत ही बढ़िया शुरुआत ,

    अभी ये दोनों क्या रीसर्च कर रहे थे ये तो आगे ही पता चलेगा ।
    शायद किसी वायरस पर रिसर्च कर रहे थे
    या फिर किसी अन्य विषय पर ।
    डॉक्टर के पैर किस तरह की दुर्घटना में चोटिल हुए जो उन्हें व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ा ।

    लोग क्यों हिंसक हो गए ।

    इस तरह के सवाल कहानी की रोचकता को बड़ा रहे हैं ।

    अगले भाग का इंतज़ार है ।
    जल्दी लाइएगा

    शुभकामनाएं

  2. गजब ……कहानी की शुरुआत bhut hi रोमांचक है, सस्पेंस और क्लाइमैक्स तो अभी बहुत दूर की बात है फिलहाल तो kahani कीर्फ शुरुआत हुई है ,शुरुआत की सबसे अच्छी Chij आपने kahani को एक सिंपल kirdar से शुरू किया जो ki एक अच्छी बात है जिसके बाद kirdar को धीरे धीरे दूसरी चीजों की ओर ले कर गए, बाद में wheel chair वाला जो कि अभी सस्पेंस है , kahani में तो अभी सब कुछ सस्पेंस है पर जो भी हो aapकी कहानी पढ़ने में बहुत मजा आने वाला है, इस कहानी को मैं 10 में से 9 मार्क्स दूंगा और साथ में आने वाले दूसरे parts aur storye ke लिए एडवांस में शुभकामनाएं

  3. बहुत खूब आकाश भाई धमाकेदार सिरीज़ की शुरुआत कर दी है आपने । मुझे बहुत दिनों से आपकी किसी कहानी का इंतज़ार जो अब पूरा हुआ । अब पढ़ने को मिलने वाली है एक धमाकेदार, रोमांचक श्रृंखला ।
    इस कहानी की शुरुआत बड़े अच्छे और बेहतरीन ढंग से की है । बिल्कुल अलग तरह से सोचा गया है―और रहस्य भी बंनाने शुरू कर दिए आपने पहले ही पार्ट से । अभी तो आगे और रहस्य बनते तथा खुलते जाएंगे । कौनसी खोज कर रहे थे डॉकटर मैड और उनका साथी ? पुष्कर नगरी में कौनसे रहस्य दफन हैं? क्या राक्षस आज भी मौजूद हैं? सबसे बड़ा सवाल इन सारी घटनाओ का और पुष्कर में जो कुछ भी है उस सब का वर्तमान पर क्या असर पड़ने वाला है । सभी सवाल बहुत ही दिलचस्प हैं तथा इनके उत्तर जानने की व्याकुलता बढ़ गई है।
    कृपया नेक्स्ट पार्ट जल्दी लाइए।

    ★★★★★

    आपकी कहानियां शुरू से पसन्द हैं मुझे । इसलिए वेट नही होता।

  4. Wah bhai bahut badiya story laye ho aap.maja aa gaya. Bahut dino bad koi jordar story aai hai.rahasy aur romanch se bharpoor.next part ka intajar rahega.

  5. बहुत ही अद्भुत प्रस्तावना दी है आपने आकाश जी।
    सतयुग से कहानी का प्रारम्भ किया है फिर राक्षसों के उद्गम को लाये हैं आप इसका अर्थ है कि कहानी अपने नाम स्वरूप राक्षसों के इर्दगिर्द रहेगी।
    जिसमें अक्षय और अन्य किरदार किस तरह आएंगे देखना रुचिकर होगा।
    बहुत बहुत शुभकामनाएं आगे कहानी के लिए।

  6. बहुत बढ़िया। मैं पार्ट और थोड़ा लंबा देखना चाहता था लेकिन इस पार्ट में भी काफी बढ़िया तरीके से तथ्यों को सामने रखा गया है। अब ये देखना है कि राक्षस राज्य कैसे बनता है।

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