Sarvnayak se Trast (Antim Bhag)

सर्वनायक से त्रस्त 

अंतिम भाग

परिशिष्ट अध्याय

 

ध्रुव नागराज के कान में फुसफुसाया।

ध्रुव : “उस काल ने ये फैसला तो सही किया था।”

नागराज : “हाँ। न रहता काल क्षेत्र जो अब युगम क्षेत्र है, और न होती प्रतियोगिता। पर बेचारा, ये एक पुण्य का काम भी नही कर सका। बहूहूहू।”

युगम ने फिर बोलना शुरू किया।

युगम : और फिर काल ने, शंभूक तथा उसकी सेना के साथ मिलकर स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया। सारे देवता परेशान हो उठे । कोई भी काल को कुछ नही कर सकता था, और देवताओं के अलावा कोई काल को मार भी नही सकता था। काल अपनी शक्तियों की मदद से समय की रफ्तार को कम कर देता था जिससे स्वर्ग के रक्षक शंभूक की सेना पर आक्रमण नही कर पाते थे और, शंभूक की राक्षस सेना बड़े आराम से उन्हें मारते हुए आगे बढ़ रही थी। किसी को कुछ समझ नही आ रहा था। और तब इंद्रदेव ने धरती पर रहने वाले एक ऋषि को मदद के लिए बुला भेजा। और यह बात जगत प्रसिद्ध है, की किसी से भी पंगा ले लेना बेटा, लेकिन ऋषि मुनियों से पंगा मत लेना। दो देवदूत पृथ्वी से ऋषि अजीबो गरीब शाप देवा चार्य को ले आये।

भोकाल : ऋषि अजीबो गरीब शाप देवा चार्य??

युगम : हाँ।

भोकाल : ये नाम तो मैंने……….पहले कभी नही सुना।

युगम : क्योंकि यह तुम्हारे काल से भी पहले की बात है। ऋषि अजीबो गरीब शाप देवा चार्य। वो ऋषि थे जो बड़े ही अजीबो गरीब शाप दिया करते थे। वो जब किसी को एक शाप देते तो उस व्यक्ति के साथ एक दूसरा शाप भी जुड़ जाता। ऋषि पहले शाप का तोड़ बता देते पर दूसरे शाप के बारे में कुछ न बताते। बस उससे बचने के लिए सावधान ज़रूर कर देते थे। वो भी किसी किसी को। पहला शाप खतम होते ही दूसरा शाप व्यक्ति को चाप लेता था अगर वो व्यक्ति सावधान न होता था। इसी वजह से ऋषि अजीबो गरीब शाप देवा चार्य से सब डरते थे । उनसे पंगा लेना महंगा पड़ता था, दो दो शाप एक साथ लग जाते थे। ―इंद्रदेव ने उन्हें बुला भेजा, देवदूत उन्हें लेकर इंद्रदेव के पास पहुंचे। देव इंद्र ने उन्हें सारी बात बताई, और यह भी बताया कि देवता काल पर हाथ नही उठा सकते, वरना आपको कष्ट न दिया जाता। फिर इंद्र देव ने अजीबो गरीब शाप देवा चार्य से मदद मांगी। अजीबो गरीब शाप देवा चार्य ने कहा मुझे उस स्थान पर ले चलो जहाँ युद्ध हो रहा है।
और फिर इंद्रदेव और बाकी देवतागण ऋषि को लेकर उस स्थान पर पहुंचे जहां काल, शंभूक की सेना के साथ उत्पात मचाये हुए था। ऋषि ने पहले काल को समझाना चाहा, क्योंकि काल पहले सही बन्दा था। लेकिन काल ने ऋषि की बात नही मानी और ऋषि से बदतमीज़ी करने लगा। शंभूक, जिसे की ऋषियों के बारे में अच्छे से पता था। धीरे से वहाँ से खिसक लिया, काल को पता भी न चला। और फिर ऋषि ने क्रोधित होकर काल को शाप दिया कि वो एक चिपचिपा पदार्थ बन कर रह जाए। और उनका शाप तुरन्त लग गया। काल गलने लगा। राक्षसों की सेना वापस भागने लगी क्योंकि देवतागण उनपर टूट पड़े थे। लेकिन काल पिघलते वक़्त भी हुंकार भर रहा था। काल ने कहा। “ऋषि ! आपने मेरे साथ गलत किया। अब आप मुझे इस शाप का तोड़ बताइये।”

“हरेरेरेरे। गलत कार्य तो तूने किया है काल । बहुत गलत। इसलिए मैंने तुझे ऐसा शाप दिया है जिसका कोई तोड़ नही है।”

“क्या??? फिर मेरा क्या होगा??”

“घबरा मत। इस शाप का कोई तोड़ नही है। लेकिन यह शाप समाप्त तो हो ही सकता है। मैंने तुझे जो शाप दिया है उसका असर कलियुग में समाप्त हो जाएगा । और फिर तुझे शरीर मिल जाएगा, तू शरीर पा सकता है। लेकिन । इसी के साथ साथ दूसरा शाप तुझसे जुड़ जाएगा।”

“क क्या है वो शाप??”

“ये नही बताऊंगा मैं। बस इतना कहना चाहूंगा कि कभी किसी सींकड़ी शरीर वाले धूर्त, लालची, मक्कार, षड्यंत्रकारी, मक्खी जैसी मूँछों और सर पर पतली लहराती चोटी वाले इंसान पर कभी एक हाथ भी मत उठाना वरना, अपनी मौत के तुम खुद ज़िम्मेदार होगे।”

कहकर ऋषि मौन हो गए। और गलता हुआ भी काल अट्टहास करने लगा।

“हा हा हा। इंद्रदेव कलियुग में ही सही। पर मैं फिरसे आक्रमण करूँगा स्वर्ग पर। भले मुझे इतना इंतज़ार करना पड़े। कर लो राज, जितना करना है। कलियुग में स्वर्ग सिंहासन मेरा होगा। हा हा हा।”

इंद्रदेव देवदूतों से बोले।

“उठाकर फेंक दो इसे, उसी आयाम के किसी अनजान ग्रह पर । जहाँ से यह आया है।”

और फिर काल को उठाकर इस आयाम के एक अनजान ग्रह पर फेंक दिया गया। काल के गलते ही, उसकी सारी शक्तियों ने उसका शरीर छोड़ दिया और फिर वो शक्तियाँ मुझे दे दी गईं। और फिर इस क्षेत्र का नाम बदलकर युगम क्षेत्र रख दिया गया।

कोबी : हो गइल खिस्सा खतम। पर मन्ने कुछ शमझ न आयो।

युगम : क्योंकि तुमने अभी पूरी कहानी सुनी ही कहाँ है।

कहकर युगम ने नागराज और ध्रुव पर निगाह डाली। वो दोनों उसे देखकर मुस्करा रहे थे।

युगम : सब कुछ तो खत्म हो गया। लेकिन जैसा कि तुमलोगों ने सुना। काल का शाप कलियुग में समाप्त होना था। कब या किस दिन समाप्त होता। यह ऋषि अजीबो गरीब शाप देवा चार्य ने नही बताया था। ―फिर जब मैंने तुमलोगों को यहाँ इस आयाम में इकट्ठा कर लिया, प्रतियोगिता के लिए। और एक दो प्रतियोगिताएं हो भी गईं, तब एक दिन । ब्रह्मा देव ने मुझे दर्शन दिए। और उन्होंने मुझे बताया कि काल का शाप खत्म होने वाला है, वो शाप से आज़ाद हो जाएगा। फिर वो सबके लिए खतरा बन सकता है । चूँकि काल की सारी शक्तियों ने उसका साथ छोड़ दिया था पर अब भी एक शक्ति काल के पास थी। और वह शक्ति थी–किसी भी चीज़ को छूकर उसकी शक्ति अपने अंदर समेट लेने की शक्ति।

तिरंगा : समझ गया ! इसीलिए वो परमाणु की शक्तियों का इस्तेमाल कर रहा था। उसने परमाणु की शक्तियां सोख ली थीं।

युगम : बहुत खूब। उसने न सिर्फ परमाणु की शक्तियां सोख ली थीं। बल्कि उन्हें बहुगुणित भी कर लिया था।

स्टील : लेकिन परमाणु की शक्तियाँ तो उसके शरीर मे नही, उसकी बेल्ट में थीं !

युगम : मैंने क्या कहा । आपने ध्यान से सुना नही क्या? काल के पास…

ध्रुव : ..किसी भी चीज़ को छूकर उसकी शक्ति अपने अंदर समेट लेने की शक्ति थी।

युगम : बहुत खूब ध्रुव। हाँ तो ब्रह्मा देव ने दर्शन देकर मुझे स्थिति से अवगत करा दिया। अब मुझे कोई ऐसा काम करना था कि काल का दूसरा शाप, पहले शाप के निष्क्रिय होते ही सक्रिय हो जाए। ताकि काल का खतरा टल जाए। और चूँकि देवता अब भी उसपर हाथ नही उठा सकते थे, इसलिए वो भी मेरी मदद नही कर सकते थे। मुझे कोई योजना समझ नही आ रही थी। और तब ब्रह्मा ने मुझे सुझाव दिया कि–मुझे नागराज और ध्रुव की मदद लेनी चाहिए। और तब मैंने सोच लिया कि अब मुझे क्या करना है। मैंने सोचा कि मैं नागराज और ध्रुव की परीक्षा लूँगा । देखूँगा की वो यह कार्य कर पाते हैं या नही। और फिर नागराज और ध्रुव को बुलाया और सारी बात बताई।

सबके चेहरे नागराज और ध्रुव की ओर घूम गए।

शक्ति : यानी इन दोनों को यह सबकुछ पहले से मालूम था?

युगम : मालूम क्यों नही होगा। इन्ही दोनों की बनाई हुई योजना तो थी ये।

तिरंगा : यानी कि अभी तक जो कुछ हुआ, सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से हुआ?

तिरंगा को जवाब ध्रुव ने दिया।

ध्रुव : हाँ यह सब हमारी योजना थी। काल के द्वारा बाँकेलाल को मारना भी योजना में शामिल था। हमने ही तुमलोगों को आपस मे लड़ा दिया ताकि तुम सब काल के रास्ते से हट जाओ।

तिरंगा : लेकिन । फिर हमें भी यह सब बताना चाहिए था। हमसब मिलकर काम करते।

युगम : नही बता सकते थे। यह बात जितने कम लोगों के बीच थी, उतना अच्छा था। काल को पता चल सकता था।

नागराज : जब युगम ने हम लोगों को सारी बातों से अवगत कराया। तो हम इसी सोच में डूबे हुए थे कि कौन होगा ऐसा शख्स। जो सींकड़ी भी हो और एक नम्बर का धूर्त, लालची, मक्कार और षड्यंत्रकारी इंसान हो, जिसकी मक्खी जैसी मूछें हो और सर पर पतली चोटी। जिसको छूते ही काल को लगा दूसरा शाप सक्रिय हो जाए।

अब सबके चेहरे नागराज और ध्रुव की तरफ घूमे हुए थे और सब नागराज और ध्रुव को आँखें फाड़कर देख रहे थे तथा कान खड़े करके सुन रहे थे।

युगम : और तब । ध्रुव ने हम लोगों को बाँकेलाल के बारे में बताया। उस जैसा इंसान पूरी दुनिया मे कहीं नही मिलेगा। बस फिर क्या था, ध्रुव ने योजना बनानी शुरू कर दी। सबसे पहले ध्रुव ने यह सोचना शुरू किया कि काल को यहाँ कैसे बुलाया जाए।

तिरंगा : लेकिन काल तो खुद यहाँ आने वाला था।

युगम : काल अगर खुद यहाँ आता तो, वो पूरी तैयारी के साथ आता। और फिर हम कोई रिस्क नही लेना चाहते थे। काल को जल्द से जल्द यहाँ लाकर खत्म कर देना ही ज़रूरी था।

नागराज : और फिर मैंने और ध्रुव ने मिलकर एक मीटिंग की । जिसका उद्देश्य हमने ये बताया कि सर्वनायक प्रतियोगिता को रुकवाने के लिए यह मीटिंग है।

ध्रुव : ताकि तुमलोग इस मीटिंग में ज़रा भी दिलचस्पी न दिखाओ। क्योंकि ये हम सबको पता है कि ये प्रतियोगिता किसी कीमत पर नही रुक सकती।

शक्ति बीच मे ही बोल दी।

शक्ति : ओह। इसीलिए तो मैं सोच रही थी कि ध्रुव, नागराज ऐसी फालतू मीटिंग क्यों कर रहे हैं। जबकि ये सबको पता है कि ये प्रतियोगिता नही रुकवाई जा सकती ।

तिरंगा : मेरी भी समझ मे आ गया।

नागराज : आगे सुनो अब। तुम सबने तो इस मीटिंग को बेकार माना। लेकिन परमाणु, कोबी और डोगा को यह मीटिंग सही लगी। हमने सोचा अब क्या करें? हमे यह मीटिंग अकेले करनी है।

ध्रुव : लेकिन हमें कुछ करने की ज़रूरत नही पड़ी। डोगा और कोबी आपस मे लड़ने लगे। नागराज ने भी उनके साथ लड़ने का नाटक किया ताकि कोबी और डोगा गुस्सा होकर या तो अपने अपने कक्ष में चले जाएं या फिर दूर जाकर द्वंद करें।

नागराज : लेकिन लड़ाई होती रही । और फिर कोबी ने डोगा के पीछे से एक ज़ोरदार गदा का प्रहार किया और डोगा उड़ गया आकाश की ओर। और फिर उसे ढूंढने के बहाने हमने परमाणु को भेज दिया।

ध्रुव : अब मैं और नागराज आराम से बैठकर योजना बना सकते थे लेकिन तभी।

युगम : मैंने इन दोनों को अपने पास बुलाया और बताया कि डोगा उसी ग्रह पर जाकर गिरा है जहाँ काल को फेंका गया था।

ध्रुव : तब मेरी योजना जल्दी जल्दी बन गई। मुझे लगा कि जल्द ही काल और डोगा की मुलाकात हो जाएगी और काल डोगा के शरीर पर कब्ज़ा करके यहाँ तक पहुंच जाएगा।

नागराज : और फिर ध्रुव ने हमे अपनी योजना बताई की काल के आने से पहले हमें, बाँकेलाल को यहाँ लेकर आना है। और चूँकि काल, सबसे पहले युगम को मारने वाला था, इसीलिए ध्रुव ने योजना बताई की बाँकेलाल को युगम के स्थान पर बैठा देंगे। और काल उस वक़्त इतने गुस्से में होगा कि बिना सोचे समझे बाँकेलाल पर हाथ उठा देगा।

ध्रुव : और जैसा कि अजीबो गरीब शाप देवा चार्य ने बताया था, अगले शाप की वजह से काल की मौत होनी थी। और बाँकेलाल पर हाथ उठाते ही उसकी मौत तय थी। बस अब हमें बाँकेलाल को यहाँ लाना था, लेकिन हमें समझ नही आ रहा था कि बाँकेलाल को कैसे लाया जाए। क्योंकि यहां से तो निकलना ही असम्भव है, फिर बन्दा दूसरे को कहाँ से लेकर आएगा ?

नागराज : और युगम ने हमसे कह दिया था कि यह काम हमे अपने दम पर करना है। यानी कि बाँकेलाल को भी यहाँ हमे अपने दम पर लाना था। और जल्द से जल्द लाना था।

ध्रुव : और यहाँ नागराज की अद्भुत शक्तियाँ काम आईं। नागराज की जितनी तारीफ की जाए कम है। नागराज ने आखिर न सिर्फ इस आयाम से बाहर निकल कर दिखा दिया बल्कि बाँकेलाल को जल्द ही लेकर यहाँ आ गया।

नागराज : मैंने बाँकेलाल को लेकर आते वक्त युगम से सम्पर्क करके उन्हें बता भी दिया था।

युगम : और देव कालजयी ने मुझे पहले ही बता दिया था कि नागराज यह कार्य कर लेगा। इसलिए मैं पूरी तरह निश्चिंत था। वरना नागराज को इस आयाम से बाहर निकालने के लिए मैं तैयार था।

तिरंगा और स्टील ने मिलकर नारा लगाया।

स्टील : नागराज ज़िंदाबाद।

तिरंगा : सुपर कमांडो ध्रुव ज़िंदाबाद।

नागराज ने एक बार फिर बोलना शुरू किया।

नागराज : और ध्रुव ने मुझे यह बता दिया था। कि मैं बाँकेलाल को युगम और युगम के सिंहासन के बारे में ज़रूर बताऊँ। फिर वो युगम का सिंहासन पाने की योजना ज़रूर बनाएगा।

युगम : और ऐसा ही ही हुआ। बाँकेलाल ने पहले ही ब्रह्मा जी से वो चीज़ मांग ली थी जिसे वो राजा विक्रम सिंह को दूध में मिलाकर देने वाला था। फिर जब नागराज उससे मिला । उसे सारी बात बताई, तो बाँकेलाल ने तुरन्त योजना बना ली। और यहाँ पर आते ही। वो दूध मुझे भेंट कर दिया उसने। मुझे उसके बारे में पहले से मालूम था इसलिए मैंने वो दूध नही पिया। और जानबूझकर बीमार होने का नाटक करने लगा। और बाँकेलाल को मैंने अपने स्थान पर बैठवा दिया।

शक्ति : ओह। इसीलिए आपने बाँकेलाल को वापस भेज दिया है।

युगम : हाँ मैं उसकी करनी उसके सामने नही न बता सकता था आप सबको।

नागराज : और फिर आगे का किस्सा तो तुमलोग जानते ही हो। काल आया और बाँकेलाल को युगम समझ कर उसने थप्पड़ जड़ा और धुँवा बनकर उड़ गया। यानी कि मृत्यु को प्राप्त हुआ।

स्टील : एक मिनट एक मिनट। अभी आप लोगों ने बताया कि ऋषि अजीबो गरीब शाप देवा चार्य का दूसरा शाप तभी सक्रिय होता जब पहला शाप समाप्त हो जाता। लेकिन काल जब यहाँ आया तो उसका पहला शाप तो समाप्त ही नही हुआ था। उसे अपना शरीर तो मिला ही नही था। वो तो डोगा के शरीर पर कब्ज़ा करके आया था।

युगम कुछ पल स्टील को देखने के बाद बोला।

युगम : आपलोग मेरी हर बात को ध्यान से नही सुन रहे लगता है। ऋषि अजीबो गरीब शाप देवा चार्य ने काल से कहा था कि, “कलियुग में शाप का असर समाप्त हो जाएगा और फिर तुझे शरीर मिल जाएगा, तू शरीर पा सकता है।” न कि ये कहा था उन्होंने की “शाप के खत्म होते ही तुझे तेरा शरीर मिल जाएगा।”

स्टील : समझ गया। मतलब काल जब तक शापित था तब तक वो किसी के शरीर पर कब्ज़ा नही कर सकता था।

युगम : हाँ। वो कीचड़ की तरह एक स्थान पर पड़ा रहता।

स्टील : लेकिन शाप के समाप्त होते ही काल को अपना शरिर नही मिलता, बल्कि उसे यह शक्ति मिल जाती की वो किसी के भी शरीर पर कब्ज़ा जमा लेता। जिस तरह स्पाइडर मैन का दुश्मन वेनम करता है।

युगम : हाँ । जे बात।

तिरंगा : लेकिन एक सवाल मुझे पूछना है।

युगम : हाँ पूछिये श्रीमान तिरंगा।

तिरंगा : मान लीजिए। अगर डोगा उस ग्रह पर जाकर नही गिरता, तो फिर काल को शरीर कहाँ से मिलता। इस आयाम में तो कोई इंसान नही पाया जाता, और न ही उस ग्रह पर कोई इंसान था, जहाँ काल कीचड़ बनकर पड़ा हुआ था।

युगम : था न।

“कौन!!!!!!!”

सभी के मुंह से एकसाथ निकला यह सवाल।
नागराज ने इसका उत्तर दिया।

नागराज : हवलदार बहादुर।

“क्या!!!!!!!”

सभी के मुंह से फिर एक साथ निकला।

नागराज : हाँ। यह सच है, हवलदार बहादुर के एक दुश्मन ने न जाने कैसे हवलदार बहादुर को उस ग्रह पर पहुंचा दिया था। हवलदार बहादुर उस ग्रह पर तीस साल से थे। काल का शाप समाप्त तो हो जाता लेकिन वो खुद कहीं नही जा सकता था, किसी इंसान की तलाश में। हवलदार बहादुर को ही उस तक पहुंचना था। लेकिन वो ग्रह बहुत बड़ा था। हवलदार बहादुर उस तक न पहुंच सके। पर एक न एक दिन तो हवलदार वहाँ पहुंच ही जाता।

तिरंगा बीच मे ही बोला।

तिरंगा : च् । मुझे एक बात समझ न आई। जब काल कुछ नही कर सकता था। खुद किसी शरीर को ढूंढकर उसपर कब्ज़ा नही कर सकता था। तो फिर आपलोगों ने इतना झमेला क्यों किया। हवलदार बहादुर को ही उस ग्रह से हटा देते। फिर वो किसके शरीर पर कब्ज़ा करता।

यह बात तिरंगा ने युगम की तरफ देखते हुए कही।

युगम : मैंने आपलोगों को पहले ही बता दिया है कि, मैं किसी भी काम में दखल नही दे सकता। मुझे हर बात मालूम होती है पर मैं कुछ नही कर सकता। इसीलिए मैं हवलदार बहादुर को वहाँ से नही हटा सकता था। और मान लो हवलदार को उस ग्रह से हटा भी दिया जाता तो भी काल का खतरा पूरी तरह नही टलता। उसे पूरी तरह और हमेशा के लिए खतम करना ज़रूरी। वरना उसकी और असुरराज की मुलाकात फिरसे हो जाती तो गजब हो जाता।

नागराज : लेकिन काल हवलदार के शरीर पर कब्ज़ा नही कर सका। क्योंकि उससे पहले ही डोगा वहाँ पहुंच गया, जो ठीक काल के ऊपर ही गिरा था। काल ने डोगा के शरीर पर कब्ज़ा जमा लिया। और डोगा को खोजते हुए परमाणु भी उसी ग्रह पर पहुंचा, लेकिन दूसरे छोर पर। जहाँ हवलदार बहादुर मौजूद थे। और परमाणु हवलदार बहादुर को लेकर वापस आ गया।

तिरंगा : हूँ……। समझ मे आ गया। लेकिन एक बात अभी और समझ मे नही आई।

नागराज : क्या??

तिरंगा : अगर काल हवलदार बहादुर के शरीर पर कब्ज़ा कर भी लेता तो भी वो कुछ नही कर सकता था। क्योंकि हवलदार बहादुर के पास कोई शक्ति ही नही थी। काल उसके शरीर पर कब्ज़ा जमाकर क्या कर लेता।

युगम : इस आयाम में। हर ग्रह पर, अजीबो गरीब और भयंकर शक्तियाँ मौजूद हैं । काल कहीं से भी कोई भी शक्ति पा जाता। और फिर उसे बहुगुणित करके और ज़्यादा शक्तिशाली बन जाता।

स्टील : ओह अच्छा । अब समझ गया मैं।

तिरंगा : मैं भी सब कुछ समझ गया।

युगम : हुम्म…..।

तिरंगा : लेकिन एक आखिरी सवाल। हवलदार बहादुर अचानक कहाँ गायब हो गए? टॉयलेट में बैठे बैठे।

अब सभी के मुंह से एक साथ निकला।

“अरे हाँ!!! हवलदार के बारे में तो हम एकदम भूल गए थे।”

युगम एक दो पल बाद बोला।

युगम : दरअसल बात यह है कि। जैसे ही हवलदार बहादुर की याददाश्त वापस आई। उसे अपने घर की याद सताने लगी और वह टॉयलेट में बैठकर बहुत देर तक रोता रहा। मैंने अवधी से पूछा क्या किया जाए। अवधी ने कहा हम कुछ कर भी नही सकते। फिर मैंने ब्रह्मा जी को याद किया और उन्हें सारी बात बताई। ब्रह्मा हवलदार की मदद को तैयार हो गए और उन्होंने मुझे इजाज़त दे दी कि मैं हवलदार बहादुर को वापस उसके घर पहुंचा दूँ। बल्कि उसी समय मे पहुंचा दूँ, तीस साल पीछे। और मैंने ऐसा ही किया। अब हवलदार बहादुर तीस साल पीछे अपने समय मे अपने घर पहुंच चुके हैं। लेकिन उनके साथ वो घटना फिर होगी, उनका वो दुश्मन, जिसने उन्हें इस आयाम के गृह पर पहुंचाया था। फिर हवलदार बहादुर को यहाँ पहुंचाने की कोशिश करेगा। लेकिन इस बार हवलदार बहादुर सावधान होंगे।

शक्ति : हुम्म…….। कुल मिलाकर ये सारी घटना अब हमारी समझ मे आ गई। लेकिन अगर काल बाँकेलाल पर थप्पड़ मारने के बजाए जानलेवा हमला करता तब क्या होता??

युगम : तब भी बाँकेलाल को चोट बहुत धीरे लगती। अवधी ने बाँकेलाल के इर्द गिर्द एक कवच बना दिया था

योद्धा : हूं…….। तो श्रीमान ये था सारा मामला।

युगम : नागराज और ध्रुव ने बहुत अच्छा काम किया। बाकी सबने भी अच्छा काम किया, भोकाल और उसकी टीम ने भी बढ़िया काम किया है। और इसलिए मैं दोनों टीमों को एक एक पॉइंट देता हूँ।

गोजो भोकाल के कान में फुसफुसाया।

गोजो : “अबे हमने क्या किया है लेकिन।”

भोकाल : “अबे चुप कर। जो मिल रहा है ले ले।”

शक्ति : (युगम से) परमाणु और डोगा का क्या होगा??

युगम : वो दोनों ठीक हो जाएंगे। डरने की कोई ज़रूरत नही। काल ने परमाणु को जान से मारने की कोशिश की । परमाणु की जान समझ लो निकल भी गई। परंतु पूरी तरह से नही। जल्द ही परमाणु ठीक हो जाएगा। और डोगा को तो अभी थोड़ी ही देर में होश आ जायेगा।

तभी वो आवाज़ सुनाई दी।

“हम्फ। कहाँ हूँ मैं? क्या हो रहा है?”

सब दौड़कर डोगा के पास पहुंचे। डोगा को होश आ चुका था।

कोबी : तुम डोंगा हौ। अउर टुम शुगम चेत्र में हौ।

डोगा की निगाह कोबी पर ठहर गई। डोगा कोबी को घूरने लगा और अपनी भौं सिकोड़ने लगा।
अगले ही पल डोगा उठा और झट्ट से अपनी बंदूक सम्भाल ली उसने।

डोगा : साले घोभी के बच्चे। दाल दाल कच्चे। तूने मुझे कहाँ पहुंचा दिया था बे। अब तो मैं तुझे नही छोडूंगा। तेरे बम में बम डालकर रहूँगा मैं।

डोगा ने कोबी को दौड़ा लिया। कोबी भी इस वक़्त मस्ती के मूड में था इसलिए पलटवार करने के बजाए इधर उधर भागने लगा और डोगा को चिढ़ाता रहा। बाकी सभी ने मिलकर ज़ोरदार ठहाका लगाया।

“हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा”

और अब आइये मैं आपलोगों को ले चलता हूँ उस बन्दे के पास जिसके बिना शायद ये स्टोरी पूरी ही न हो पाती।

बाँकेलाल जंगल के उसी क्षेत्र में पहुंचा था जहां से नागराज उसे लेकर युगम क्षेत्र गया था। इस वक़्त सुबह हो रही थी। सूरज अपनी किरणे बिखेर रहा था, चिड़ियों की मधुर चहचाहट कानो में पड़ रही थी। खरगोश इधर उधर कूद रहे थे। घने पेड़ों के बीच से कभी कभी सूरज नज़र आ जाता था।―इस दृश्य को देखने के बाद किसी भी इंसान का चेहरा खिल उठे। मगर बाँकेलाल का चेहरा इस वक़्त बुरी तरह लटका हुआ था।

बाँकेलाल : गुर्रर्रर्र गुर्रर। बूहूहू इतना बड़ा सिंहासन हाथ से निकल गया। एक बार फिर बेड़ा गर्क हो गया। टूट गई योजना की टाँग। नही इस बार योजना की टाँग, हाथ, पैर, नाक,कान, थोबड़ा सबकुछ टूट फूट गया। बूहूहू।

बाँकेलाल फुल खुंदक में बड़बड़ाता हुआ बढ़ा चला जा रहा था। कुछ दूर पहुंचने पर बाँकेलाल के कानों में पड़ा वो स्वर। और बाँकेलाल जहाँ का तहाँ रुक गया।

“वत्स बाँकेलाल। तुमने एक बहुत ही अच्छा कार्य किया है। अनजाने में ही सही, हीहीही, तुमने दुनिया को एक बहुत बड़ी आफत से मुक्ति दिलाई है। और इसीलिए तुम्हे इनाम देना तो बनता है। तुम इस वक़्त जिस स्थान पर खड़े उसके नीचे बहुत बड़ा खजाना दबा हुआ है। तुम इस स्थान पर खुदाई करना शुरू करो । तुम्हे जल्द बहुत बड़ा खज़ाना मिलेगा। बाँकेलाल उस ख़ज़ाने में से आधा गरीबों में बांट देना और आधा तुम रख लेना। अच्छा तो हुण अप्पा चलदे हैंगे आं…. हीहीही।”

और फिर आवाज़ आनी बन्द हो गई।
बाँकेलाल जल्दी जल्दी उस स्थान पर खुदाई करने लगा। वहीं से कुछ दूरी पर एक झाड़ी के पीछे सेनापति मरखप लोटा लेकर बैठा हुआ था।

विक्रम सिंह और उसकी सेना अब भी बाँकेलाल को ढूंढ रही थी।

मरखप ने झाड़ी के पीछे से बाँकेलाल को देख लिया।

मरखप : अरे ! बाँकेलाल ! बाँकेलाल मिल गया। लेकिन यह क्या कर रहा है? गड्ढा क्यों खोद रहा है?

अगले ही पल मरखप लोटा एक तरफ फेंककर बाँकेलाल की ओर दौड़ा। थोड़ी करीब पहुंचकर चिल्लाया।

मरखप : अरे बाँकेलाल !! तुम यहाँ क्या कर रहे हो??

बाँकेलाल ने मुंह उठाकर मरखप को देखा। पहले तो बाँकेलाल चौंका फिर खौरीया कर बोला

बाँकेलाल : दिखता नही है क्या!!! अपनी कब्र खोद रहा हूँ।

मरखप : 💭बेटा मैं जानता हूँ। तू यहाँ कुछ छुपाने आया है। अभी महाराज और सबको लेकर आता हूँ मैं।💭 अच्छा बाँकेलाल। खोदते रहो तुम अपनी कब्र । मैं चला।

बाँकेलाल : गुर्रर्रर।

मरखप वहाँ से निकल गया।

बाँकेलाल फिरसे ज़मीन खोदने लगा। तभी उसे किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी। उसने उठकर देखा। पास में ही कालिया खड़ा था।

बाँकेलाल खुश होता हुआ बोला।

बाँकेलाल : अरे कालिया!! तू यहां कैसे आ गया।

कालिया : 💭तुझे ही तो ढूंढ रहा था बे सींकड़ी।💭

बाँकेलाल : ये देख । मैं गड्ढा खोद रहा हूँ। अभी इसमे से बहुत बड़ा खज़ाना निकलेगा। हम दोनों उसे लेकर कहीं दूर चल चलेंगे। और ज़िन्दगी भर ऐश करेंगे।

कालिया : 💭साला। झूठ मूट में मैं इसकी परवाह कर रहा था मैं। नही ढूंढना चाहिए था इसे। ये जैसा है वैसा ही रहेगा। गुर्रर्र।💭

और तभी बाँकेलाल के कानों में फिरसे शिवजी का स्वर गूँजा।

“गुर्रर्र। वत्स बाँकेलाल तू लालची का लालची ही रहेगा। मैंने तुझसे कहा था कि इस ख़ज़ाने में से आधा गरीबों में बांट देना और आधा तू रख लेना। मगर तू पूरा हड़पने में चक्कर मे है। जा अब तुझे आधा भी नही मिलेगा।”

शिवजी की आवाज़ आनी फिर बन्द हो गई। बाँकेलाल भौंचक्का हुआ खड़ा था। उसने गड्ढा इतना खोद लिया था कि दो बड़े बड़े सन्दूक नज़र आने लगे थे। और तभी बाँकेलाल को कदमों की आवाज़ें सुनाई दीं। और अगले ही बाँकेलाल को विक्रम सिंह उसकी ओर दौड़ कर आता दिखाई दिया, उसके पीछे मरखप और बाकी सेना थी।

बाँकेलाल : 💭गुर्रर्र । मर गए। इस मोटे मनहूस को अभी टपकना था।💭

विक्रम सिंह दौड़ता हुआ आकर बाँकेलाल से लिपट गया। बाँकेलाल ऊपर से नीचे तक हिल गया।

विक्रम : बाँकु। मेरा प्यारा बाँकु कल से इस जंगल मे क्या कर रहा था?

तभी मरखप की आवाज़ गूँजी।

मरखप : महाराज ये देखिए दो बड़े बड़े हीरों से भरे हुए सन्दूक।

मरखप उस गड्ढे में कूद चुका था और उसने सन्दूकों का ढक्कन खोल दिया था।

मरखप : महाराज। बाँकेलाल, जंगल मे खज़ाना छुपाने आया था।💭हीहीही💭

विक्रम सिंह ने बाँकेलाल से आंखें मिलाईं।

बाँकेलाल : म महाराज। ऐसा कुछ नही है। दरअसल परसों रात में शिवजी मेरे सपने में आये थे और मुझसे कहा था कि इस जंगल मे बहुत बड़ा खजाना छुपा हुआ है। मैं कल से उसी ख़ज़ाने को ढूंढ रहा था। और आज मुझे ये खज़ाना मिल गया।

विक्रम सिंह ने बाँकेलाल की जोरदार पुच्ची ले ली।

विक्रम सिंह : वाह बाँके। दे पुच्ची। और अब मैं समझ गया की कालिया हमे यहाँ क्यों ले आया। तुमने उसे भेजा था क्योंकि तुम अकेले खज़ाना नही उठा सकते थे।

बाँकेलाल : हीही। हां यही बात है। 💭बेड़ा गर्क हो इस कालिये का💭

विक्रम सिंह : लेकिन बाँकेलाल। तुम्हे ढूंढता हुआ एक हरा मानव हमारे पास आया था।

बाँकेलाल : क्या?? ल लेकिन मुझसे तो कोई ह हरा मानव नही मिला।

विक्रम : शायद वो कोई पागल था।

बाँकेलाल : हाँ यही हो सकता है।

कालिया : 💭नही ये झूठ बोल रहा है। वो हरा मानव इसको कहीं लेकर गया था। गुर्रर्र। है भगवान तूने मुझे मानवों जैसे बोली क्यों नही दी।💭

फिर महाराज ने सैनिकों को आदेश दिया।

विक्रम सिंह : सैनिकों। ले चलो ये खजाना। अब ये हमारी प्रजा के काम आएगा।

बाँकेलाल : 💭गुर्रर्र। मोटे मनहूस। बेड़ा गर्क हो जाए तेरा। चुल्लू भर पानी मे डूब कर मर जाए तू। केले के छिलके पर तेरा पाँव फिसल जाए। गुर्रर्रर्रर्र गुर्रर्रर्र।💭

और फिर सब चल पड़े विशालगढ़ की ओर। बेचारे बाँकेलाल की योजना एक बार फिर चौपट हो गई।

————————समाप्त—————————

दोस्तों कैसा लगा आपको ये पार्ट? कैसी लगी आपको यह पूरी सीरीज़?? आपको क्या अच्छा लगा और क्या नही। बताना मत भूलिएगा। इस सीरीज या इस पार्ट में मैंने कौन कौन सी गलतियाँ की हैं ज़रूर बताइयेगा मुझे। ताकि आगे से मैं अपनी गलतियां सुधार सकूँ। और इसमें आपको क्या अच्छा लगा वो भी बताइयेगा। ताकि आगे से भी आपको ऐसी ही कहानियां मिलती रहें।
आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद जो आप सबने इतनी लंबी सिरीज़ में मेरा भरपूर साथ दिया। आज मैं इस श्रृंखला को खत्म करके बहुत खुशी महसूस कर रहा हूँ। बस अब राज कॉमिक्स भी जल्दी से सर्वनायक श्रृंखला खतम कर दे ताकि उन्हें भी खुशी महसूस हो और हमे भी।

मेरा साथ देने के लिए, मेरी कहानियां पढ़ने के लिये आप सबका तहे दिल से शुक्रिया।😊😊😊

 

Written By –  Talha Faran for Comic Haveli 

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9 Comments on “Sarvnayak se Trast (Antim Bhag)”

  1. जबरदस्त वाह।
    बहुत बढ़िया और सुखद अंत था।

    1. सुखद नही दुखद अंत है ये। बेचारा बांकेलाल। (हीहीही)

      1. हाहाहा।
        बाँकेलाल तो बेचारे बाँकेलाल है।
        अब लास्ट पार्ट पूरा एक साथ पढूँगा

          1. अरे मतलब है कि दोबारा पढूँगा तीनों एक साथ ही। संडे को आराम से

  2. Bahut badhiya kahani likhi….Kaal ka origin bhi bahut achhe se dikhaya aur ye bhi achcha laga ki poori series ke ant me Banke lal ki yojna ki taang fir se tooti. Just a perfect ending.

  3. बहुत ही अच्छा प्रयास है. हमे आपकी और भी कहानियों की प्रतीक्षा रहेगी

  4. Bahut badhiya series, Bankelal ko shaap ke hisaab se alp laabh milna tha lekin shivji ne is baar milne nahi diya :D:D:D. Poori series bahut badhiya lagi aur us series ne mujhe hasa hasa kar lotpot kar diya. Agli series ka intezaar rahega.

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