Sarvnayak Se Trast Part 11

सर्वनायक से त्रस्त

(अंतिम भाग)

बांके-युगम
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प्रथम अध्याय ◆ युगम की मुसीबत

पृथ्वी पर : बहुत समय पहले, भूतकाल में।

दो रहस्मयी शख्स एक ओर तेज़ी से बढ़े चले जा रहे थे दोनों ने अजीब तरह के वस्त्र पहन रखे थे जो इस दुनिया के बिल्कुल नही मालूम पड़ते थे। वो दोनों बन्दे जंगल जैसे इलाके में इस तरह से भटक रहे थे, जैसे किसी को खोज रहे हों । वो इतनी तेजी से चल रहे थे कि घास में से तेज़ सरसराहट की आवाज़ें उतपन्न हो रही थीं, उन्हें किसी की तलाश थी। वो चारों तरफ अपनी नज़रें बाज़ की तरह दौड़ा रहे थे। आसपास सिर्फ पेड़ दिख रहे थे। बड़े, छोटे, नाटे, मोटे हर तरह के पेड़। किसी इंसान का नामोनिशान नही दिख रहा था। फिर वो किसे ढूंढ रहे थे

पहला शख्स (दूसरे से) : हमे जल्द से जल्द उसे ढूंढना होगा।

दूसरा शख्स : हाँ हमारे लिए एक एक पल कीमती है। हमे जल्द से जल्द उसे खोज कर अपने साथ ले जाना होगा।

इन दोनों की बात से यह तो साफ पता चल गया कि ये कहीं दूर से आये हुए हैं और किसी को अपने साथ ले जाना चाह रहे हैं। पर सवाल फिर वही है। किसे ढूंढ रहे हैं ये इस वीरान जंगली क्षेत्र में?

तो जनाब, यह है जवाब―

हरेरेरेरे, दुष्ट मूर्ख कौवे!! तेरी यह हिम्मत की तूने हमारे लम्बे काले प्यारे बालों को अपना घोंसला समझ इसपर बैठकर बीट कर दिया!! जा मैं तुझे शाप देता हूँ कि तेरे दोनों पंख गायब हो जाएं। पंख कटा कौवा बन जाये तू !”

ऋषि अजीबो गरीब शाप देवाचार्य, एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठे हुए थे और इस वक़्त उनके चेहरे पर क्रोध ब्रेक डान्स कर रहा था। आज उस मूर्ख कौवे की शामत आई थी जो उसने अजीबो गरीब शाप देवाचार्य के घोंसले जैसे बालों को अपनी प्रॉपर्टी समझकर खुद को वहाँ हल्का कर लिया था। और उस बरगद की एक डाल पर जा बैठा था― उसी समय वो दोनों देवदूत वहाँ से गुजरे और उनहोंने ऋषि को टीप लिया

दूसरा देवदूत (पहले देवदूत से) : अरे वो देखो वो रहा ऋषि अजीबो-गरीब शाप देवा चार्य।

पहला देवदूत : हाँ हाँ मैने भी टीप लिया उसे। उसने एक कौवे को शाप दे दिया है।

दूसरा देवदूत : अब तू देखता जा आगे आगे होता है क्या।

कौवा। जिसने ऋषि के प्रिय बालों में अप्रिय चीज़ कर दी थी–अचानक उसके पंख लापता हो गए, और वो पेड़ की डाल पर से ऋषि के चरणों में गिरकर घास चाटने लगा

कौवा मेंढक की भांति ऋषि के चरणों के पास फुदक रहा था और अपनी चोंच ज़मीन में मार रहा था, शायद अपनी करनी की माफी मांग रहा था―दोनों देवदूत एक पेड़ के तने के पीछे छिपकर सारे सीन को बड़े ध्यान से टीप रहे थे। उन्हें डर था कि इस वक़्त अगर वो ऋषि के सम्मुख गए तो उनका मुख, मुख दिखाने लायक नही रहेगा। क्योंकि उस कौए ने ऋषि को गुस्सा दिला दिया था

कौवा ऋषि के कदमों में बुरी तरह छटपटाने लगा। और अपनी चोंच को ज़मीन में रगड़ता रहा। –आखिरकार ऋषि महाराज को उसपर तरस आ गया

अजीबो गरीब शाप देवा चार्य : शांत हो जा, शांत हो जा काले कौवे । चल हमने तुझे क्षमा किया।

कौए को तड़पता देखकर ऋषि का हृदय आइस क्रीम की तरह पिघल चुका था और पतझड़ के मौसम में जिस तरह पेड़ो से पत्ते उड़ते हैं उसी तरह उनका गुस्सा उनकी खोपड़ी से उड़ गया था

ऋषि : घबरा मत । हमने तुझे जो शाप दिया है उसका असर सिर्फ कुछ क्षणों तक का है। मैं इतना सख्त नही हूँ की जानवरों और पक्षियों पर अत्याचार करूँ, वो तो हम सिर्फ तुमको सबक सिखाने के लिए शाप दिए थे । कुछ ही क्षणों में शाप का असर समाप्त हो जाएगा-और-तेरे पंख पुनः निकल आएंगे।

कौवे ने ऋषि की बात समझ ली और मारे खुशी के राग कर्कशी अलापने लगा

ऋषि : कर्कशाना बन्द कर। और हमारी बात ध्यान से सुन, जब तेरे पर फिर से निकल आएंगे तो समझ ले मेरा शाप निष्क्रिय हो जाएगा–लेकिन–पहले शाप के निष्क्रिय होते ही, मेरा दूसरा शाप तुझसे जुड़ जाएगा। डर मत वो शाप निष्क्रिय रूप में रहेगा जबतक…..

कौवा स्टेच्यू की मुद्रा में आ चुका था, और गर्दन टेढ़ी करके ऋषि को बड़े ध्यान से टीप रहा था। जैसे समझने की कोशिश कर रहा हो

ऋषि : क्या हुआ ?? तुम यही सोच रहे हो न कि मैंने तो तुम्हे एक ही शाप दिया है, दूसरा कहाँ से आ गया? खैर। तुम नही समझ पाओगे मूर्ख पक्षी। बस इतना समझ लो ठीक हो जाने के बाद तुम यहाँ से फुर्र हो जाओगे। और दोबारा कभी हमारे बालों में गन्दगी करने की कोशिश मत करना गुर्रर्रर्रर। और। आखिरी और ज़रूरी बात। पके हुए आमों पर कभी चोंच मत मारना। इस बात का खास ध्यान रखना । वरना दूसरा शाप जो निष्क्रिय रूप में होगा–तुम्हारे ऐसा करते ही सक्रिय हो जाएगा। इसीलिए कभी भूल कर भी आम पर चोंच मत मारना।

और यही वो क्षण था जब वो चमत्कार हुआकौवे के पर अचानक फिरसे उगने लगे, ऋषि के होठों पर मुस्कान थी और पास ही एक पेड़ के तने के पीछे छुपे हुए देवदूतों ने भी यह दृश्य देखा

कौवे के पर जल्द ही फिरसे पहले जैसे निकल आये। अब वो उड़ सकता था। कौवा गच्च हो गया था। और तभी। कौवे की आंखें ऋषि के बगल में रखे पके हुए रसीले आम पर पड़ीं और नाचने लगीं। कौवे की चोंच में पानी आ चुका था

कौवा : 💭ऋषि ने चोंच मारने को मना किया है खाने को थोड़ी मना किया प्यार से खाऊंगा इस आम को मैं  … हीहीही💭

अचानक कौवा ऋषि के बगल में रखे आम पर झपटा और अपनी चोंच उसमे धंसा दी। अपने आम पर हुए इस अचानक हमले से ऋषि का पारा फिरसे चढ़ गया। उनके भेजे से पतझड़ का मौसम गायब हो गया। और एक बार फिर से उनके भेजे में गुस्से की बहार आ गई

ऋषि : हरेरेरेरे दुष्ट मूर्ख कौवे!!!! तू गधा का गधा ही रहेगा। हमने कहा था कभी आम मत खाना लेकिन तुमने खा लिया। अब भुगत।

अचानक आंखों को आश्चर्य से फैला कर गोटी बना देने वाला दृश्य प्रस्तुत होने लगा। कौवे के शरीर मे कुछ हो रहा था, बुरी तरह से लहराने लगा वो-और-और फिर उसके पर एक बार फिर धीरे-धीरे छोटे होने लगे। कौवा हैरत के मारे कूदने लगा और फिर उसके पंख पूरी तरह गायब हो गए। लेकिन यह तो शुरुआत थी । क्योंकि आंखों के हैरत के मारे मेंढक बनकर बाहर कूद जाने का दृश्य तो अब प्रस्तुत हो रहा था। ―कौवे की पूंछ भी गायब हो रही थी..नही नही–बल्कि–कन्वर्ट हो रही थी पतली लम्बी रस्सी जैसी चीज़ में। देखते ही देखते कौवे की पूंछ बदलकर अब चूहे की पूंछ जैसी हो गई। और तभी कौवे का कद अचानक नाटा लगने लगा क्योंकि उसके पैर भी अब छोटे हो गए थे…और फिर उसके पैर भी चूहे के पैर जितने छोटे हो गए। अब समझ आ रहा था। कौवा धीरे धीरे चूहा बनता जा रहा था। फिर कौवे का चोंच बदलकर चूहे के चोंच जैसा हो गया, और उसके कान भी निकल आये। दो पैर तो उसके पास पहले से ही थे अब दो और बढ़कर दो-दो चार हो गए। 

और अब, कौवा पूरी तरह से चूहा बन चुका था। 

ऋषि : मूर्ख पक्षी उल्ला का पट्ठा। बात नही मानी मेरी ले बन गया न चूहा। मेरा दूसरा शाप सक्रिय हो गया।

चूहा बना कौवा अपने आपको चूहे के रूप में देखकर कांप गया। वो एक तरफ दुड़की हो लिया । चूहा बना कौवा भागता रहा, उसे समझ मे नही आया कि वो कहाँ जाए क्योंकि उसे नही पता था कि चूहे कहाँ रहते हैं। बेचारा उड़कर अपने घोंसले में भी नही जा सकता था, क्योंकि चूहे के तो पंख ही नही होते हैं। और तभी उसके ऊपर चारों तरफ किसी का साया पड़ा। पल भर को लगा कि सूरज चाचा के सामने बादल भइया आ गए थे। लेकिन। वो परछाईं सिर्फ चूहे के ऊपर ही पड़ रही थी। इसका मतलब एक ही था कि–एक चील की भूखी निगाहें उसपर पड़ गईं थीं। अगले ही पल चील ने झपट्टा मारा और चूहे को अपने पंजो में फंसा कर एक ऊंची पहाड़ी की ओर लपक ली

ऋषि अजीबो गरीब शाप देवा चार्य ने यह दृश्य देखा और उन्हें दुख हुआ।

ऋषि : मूर्ख कौवा गधे का पिल्ला। अगर मेरी बात मान ली होती उसने तो आज मौत का निवाला न बनता । च् च् च् । अब वो चील उसे हूर जाएगी।…….इस घटना से यह शिक्षा मिलती है कि लालच बुरी बला है।

ऋषि खुद से बड़बड़ाता हुआ बोलाऔर तभी वो दोनों देवदूत पेड़ के पीछे से लपक कर सामने आ गए

ऋषि : हैं ! तुम दोनों कौन हो ??

दोनों देवदूतों ने पहले ऋषि को प्रणाम किया और फिर अपने बारे में बताया

ऋषि : अच्छा तुम दोनों देवदूत हो?

पहला देवदूत : हाँ हमे इंद्रदेव ने भेजा है। देवताओं को इस वक़्त आपकी ज़रूरत है उन्होंने आपको बुला भेजा है।

ऋषि : अच्छा ! वाह धन्य हो गया मैं तो हीही। क्या ज़रूरत पड़ गई उन्हें मेरी?

दूसरा देवदूत : आप पहले हमारे साथ चलें आपको सब बता दिया जाएगा।

ऋषि तैयार हो गए उनके साथ चलने को। अगले ही क्षण देवदूत उन्हें लेकर लपक लिए स्वर्गलोक की ओर

स्वर्गलोक में―

इंद्रदेव अपने सिंहासन पर विराजमान थे। और भी देवतागण वहाँ उपस्थित थे। किसी गहरी चर्चा में लीन थे वो

एक देवता : क्या किया जाए कुछ समझ मे नही आ रहा हमारी तो । असुरराज शंभूक ने बहुत बड़ी सेना के साथ स्वर्गलोक पर हमला किया है । और ‛वो’ भी उसके साथ है। उनकी सेना हमारे योद्धाओं को बुरी तरह से हराती हुई इस ओर चली आ रही है। हमारे योद्धा उनका ज़्यादा नुकसान नही कर पा रहे हैं क्योंकि ‛वो’ अपनी शक्तियों की मदद से योद्धाओं के हमला करने की रफ्तार को कम कर दे रहा है । हम इस लड़ाई में नही कूद सकते क्योंकि हम भी उसे कुछ नही कर सकते । और त्रिदेव इस वक़्त अपने अलग अलग कार्यों में व्यस्त हैं…..।

एक अन्य देवता : वो इन्ही मौकों पर व्यस्त रहते हैं गुर्रर्रर्र।

तभी इंद्रदेव का स्वर गूंजा

इंद्रदेव : अब चिंता करने की कोई ज़रूरत नही। मेरे दो सेवकों ने उस ऋषि को ढूंढ लिया है और वो उसे लेकर आ रहे हैं। हम देवताओं को कई बार इंसानों की मदद की ज़रूरत पड़ती रही है। और इस बार भी एक इंसान ही इस समस्या को हल करेगा।

वर्तमान में : युगम के आयाम में

नागराज, ध्रुव और बाँकेलाल अवधि के साथ एक ग्रह पर पहुंचे…

ध्रुव : ये क्या अवधि तुम हमे युगम के पास ले जा रही थी। ये कौनसी जगह है? युगम तो युगम क्षेत्र में होगा।

अवधि : युगम अब युगम क्षेत्र में नही बल्कि यहाँ हैं।

अगले ही क्षण वो एक बहुत बड़े महल के सामने खड़े थे। इतना बड़ा महल तो उन्होंने कभी ज़िंदगी मे नही देखा था। उस महल को देखकर वो चौंके। महल खूबसूरत था और बहुत ही बड़ा था। महल की दीवारों से रौशनियाँ फूट रही थीं जिससे आंखें चौंधियां रही थीं। वो अपने अपने बुक्के फाड़कर महल के अंदर दाखिल हुए। अंदर भी दीवारों से सुनहरी रौशनियाँ निकल रही थीं। महल की सजावट देखते ही बन रही थी उनकी नज़र ऊपर छत पर गई छत की ऊंचाई इतनी ज्यादा थी कि उनके बुक्के और चौड़े हो गए। छत से एक फानूस लटक रहा था जो इंद्र धनुष के रंगों की तरह रंगीन चमक बिखेर रहा था। उसका साइज़ कम से कम एक हाथी के जितना था।

अचानक ध्रुव और नागराज के मुंह से एकसाथ निकला

ध्रुव, नागराज : ये युगम का महल है ??

अवधि : हाँ ।

नागराज : अरे वाह । हमे तो मालूम ही नही था। जनाब हमे यहाँ फंसाकर खुद महल में आराम किया करते हैं।

अवधि : नही । ये महल युगम के लिए ही बनाया गया था। पर वो तबतक इसमे दाखिल नही हो सकता था जबतक अपना कर्तव्य पूरा न कर ले यानी कि जबतक सर्वनायक प्रतियोगिता समाप्त न हो जाये।

ध्रुव : “सकता था”? इसका मतलब युगम सर्वनायक प्रतियोगिता समाप्त होने से पहले ही इस महल में आ घुसा है?

अवधि : मजबूरी में।

मजबूरी में??”

नागराज,ध्रुव और बाँकेलाल ने अवधि को घूरा

अवधि : हाँ युगम को इस महल में मजबूरी में आना पड़ा।

नागराज : अच्छा कौनसी मजबूरी हो गई ?

बाँकेलाल : 💭हीहीही मुझे पता है वो मजबूरी। युगमक्षेत्र में ‛वो’ जो नही है जहाँ ‛वो’ करते हैं। हीही💭

कुछ पलों बाद अवधि बोली

अवधि : तुमलोग चलकर युगम से मिल लो सबकुछ मालूम चल जाएगा।

और अवधि उन्हें लेकर चल दी।……..कुछ ही समय मे वो एक बड़े कक्ष में थे। सामने एक बहुत ही विशाल बेड था जिसपर लंबलेट था। युगम।

तीनो लपक कर जल्दी से युगम के पास पहुंचे । अवधि भी उनके पीछे आई। युगम को पता नही क्या हुआ था। वो बिस्तर पर बिल्कुल डंडे की तरह सीधा होकर लेटा हुआ था और बिल्कुल भी हिलडुल नही रहा था। उसकी आंखें खुली हुई थीं और सिर्फ छत को टीप रही थीं|

नागराज : क्या हुआ है ?? क्या युगम टपक गया है?

अवधि और ध्रुव ने नागराज को घूरा। बाँकेलाल अपनी दुनिया मे खोया हुआ था।

अवधि ने उन्हें बताया

अवधि : युगम को पता नही क्या हो गया है अभी आधा घण्टा पहले तक वो एकदम ठीक था। लेकिन फिर पता नही कैसे क्या हो गया। युगम को कुछ होने लगा और उसका पूरा शरीर कांपने लगा और–और–उसका पूरा शरीर जाम हो गया आवाज़ निकलनी भी बंद हो गई। मुझे कुछ समझ नही आ रहा था। फिर मुझे मजबूरन युगम को यहाँ इस महल में लेकर आना पड़ा….।

ध्रुव : और ऐसा कैसे हुआ कुछ पता नही तुमको? और हमे क्यों लेकर आई तुम यहाँ…..?

बाँकेलाल : 💭ऐं …. ये क्या हो गया? मुझे याद है मैंने तो उस दूध में वो चीज़ मिलाई थी जिसे पीने के बाद इस युगम की शंका शुरू हो जाती । मगर ये क्या हुआ? इसे देखकर तो अब मुझे शंका शरू होती लग रही है। ……हूँ…..लगता है उस चीज़ का इस युगम पर दूसरी तरह से असर हुआ है। कुछ भी हो, ये तो साला रास्ते से हट गया न हीही। अब मुझे कुछ ऐसा कांड करना होगा कि युगम का सिंहासन मुझे मिल जाये।💭

अवधि ध्रुव से कह रही थी

अवधि : युगम ने ही तुमलोगों को यहां बुलाया है।

नागराज : क्या??? दिमाग चल गया है क्या तुम्हारा भी !अभी तो तुम कह रही थी युगम बोल भी नही पा रहा है ! फिर हमें बुलाकर लाने को कैसे कह दिया ??

ध्रुव ने भी अवधि पर सवालिया निगाह डाली। बाँकेलाल की निगाहें कक्ष की सजावट पर गड़ी थीं, और ललचाई निगाहों से सबकुछ नाप रही थीं

अवधि : वो क्या है……। थोड़ा बहुत तो बोल ही ले रहा है युगम।

तभी एक आवाज़ आई

हाँ”

आवाज़ को सुनकर ऐसा लगा जैसे बड़ी मुश्किल से निकली हो

उन्होंने युगम पर नज़र डाली। उसका बुक्का खुला हुआ था। लेकिन आंखें अब भी छत को टीप रही थीं।
वो सब लपक कर युगम के पास पहुंचे। युगम उन्हें देखने के लिए अपनी नज़रें नही घुमा पा रहा था।

अवधि : वो हमारी बातें सुन सकता है पर कोई प्रतिक्रिया नही कर सकता।

नागराज : हाँ वो तो इनकी ‛हाँ’ सुनकर ही लग गया💭हीहीही💭

ध्रुव : ये सब कैसे हुआ युगम जी ? अब क्या होगा ? सर्वनायक प्रतियोगिता रोकनी पड़ेगी?

अवधि : नही ये प्रतियोगिता नही रुक सकती।

नागराज : लेकिन जब प्रतियोगिता कराने वाला उस स्थिति में ही नही है तो फिर प्रतियोगिता होगी कैसे?? कौन करवाएगा अब प्रतियोगिता??

अवधि : इसी के लिए तो आपलोगों को बुलाया गया है।

ध्रुव : क्या मतलब?

अवधि : मतलब की अब युगम का काम किसी और को करना पड़ेगा। क्योंकि प्रतियोगिता तो किसी कीमत पे नही रुक सकती।

नागराज झट्ट से कह उठा

नागराज : मैं तैयार हूं इस काम के लिए हीहीही।

ध्रुव : नागराज हममें से कोई ये काम नही कर सकता क्योंकि हम सब खिलाड़ी हैं।

नागराज और ध्रुव की नजरें मिली। और फिर ध्रुव की नज़र बाँकेलाल की तरफ घूमी साथ ही नागराज की भी।

ध्रुव : अ…..अवधि । बाँकेलाल जी को क्यों बुलाया युगम ने??

अवधि मुस्कराई

अवधि : लगता है आप समझ गए ध्रुव। युगम यही चाहता है कि बाँकेलाल को सौंपा जाए ये काम।

बाँकेलाल को तो अपने कानों पर यकीन नही हुआ।

बाँकेलाल : 💭वाह !! क्या बात है। इस बार बेड़ा गर्क नही हुआ। भले ही उस दवा का दूसरा असर हुआ पर युगम रास्ते से हट ही गया, यही नही बल्कि खुद अपने हाथों से अपना सिंहासन मुझे सौंप रहा है ये तो। ओये होए मजा आ गया💭

ध्रुव : लेकिन बाँकेलाल जी यह काम कैसे करेंगे।

बाँकेलाल : मैं कर लूंगा।

मारे खुशी के बाँकेलाल के मुंह से निकल ही गए ये शब्द

ध्रुव और नागराज उन्हें उल्लुओं की तरह टापने लगे। अब बाँकेलाल को अपनी गलती पता चली। उसने कुछ ज़्यादा ही चहक कर बोल दिया था

बाँकेलाल : हे हे अरे मतलब युगम जी ने मुझे अपना दोस्त बना लिया है न। अब एक दोस्त को दूसरे दोस्त की ज़रूरत पड़ी है तो दूसरा दोस्त मना थोड़ी न करेगा। 💭गुर्रर्रर्र बाँके अपनी खुशी पर काबू करना सीख💭

नागराज अवधि की तरफ मुड़ा

नागराज : क्या बाकी लोग इसका विरोध नही करेंगे?

ध्रुव : हाँ हम अपनी टीम को तो समझा लेंगे–लेकिन–पूर्वकाल वाले डेढ़ श्याने हैं, वो बाँकेलाल का आदेश शायद न मानें।

नागराज ध्रुव के कान में फुसफुसाया

नागराज : “और भोकाल का बच्चा । वो तो जानता ही है बाँकेलाल को। वो ज़रूर विरोध करेगा।”

तभी अवधि बोल पड़ी

अवधि : क्यों नही मानेंगे। हर किसी को मानना होगा। क्योंकि बाँकेलाल जी एक बार युगम की कुर्सी पर बैठ गए तो समझ लो वही युगम हैं। फिर हर किसी को बाँकेलाल का आदेश मानना होगा। और प्रतियोगिता कहाँ करानी है? कब करानी है? ये मुझे पता है । और उन्हें कैसे कराना है किसके बीच कराना है, ये बाँकेलाल के ऊपर है। बाँकेलाल चाहे तो उसमें कुछ फेरबदल भी कर सकते हैं। मैं तो सिर्फ इनका आदेश मानूँगी जैसे युगम का मानती थी।

ध्रुव : ok ठीक है फिर। अब नए युगम बाँकेलाल जी हैं। लेकिन। हम बाकी लोगों को क्या बताएंगे कि युगम क्यों नही कर रहे हैं ये काम।

अवधि : जो सच है वही बताएंगे और क्या !

नागराज : लेकिन वे यकीन नही करेंगे। युगम जैसी चीज़-म-मेरा मतलब युगम जैसे शख्स को भला कैसे कुछ हो सकता है?

अवधि : अगर वो नही यकीन करेंगे तो हम उन्हें भी लाकर दिखा देंगे युगम का हाल।

ध्रुव : लेकिन युगम ठीक कैसे होंगे? और हुआ क्या है इन्हें?

अवधि : कुछ समझ मे नही आ रहा है। कोई ऐसी चीज़ पकड़ में नही आ रही। और जब अभी ये ही नही पता चल पा रहा कि इन्हें हुआ क्या है? तो फिर ठीक कैसे होंगे?

नागराज : मुझे लगता है एक ही जगह पर बैठे-बैठे इनका शरीर जाम हो गया है 💭हीहीही💭 कुछ वक्त तक ऐसे ही आराम करने दो, हो सकता है ठीक हो जाएं।

अवधि : मैं पता लगाने की कोशिश कर रहीं हूँ कि क्या हुआ है । जल्द ही पता चल जाएगा।

बाँकेलाल : 💭उससे पहले तुम लोगों को चक्करघिन्नी बनाकर अंतरिक्ष मे भेज दूँगा। फिर पता लगाते रहियो वहीं से । हीहीही।💭

ध्रुव : तो फिर चलो । बाकी लोगों को भी बता देते हैं ।अब प्रतियोगिता के नए संचालक बाँकेलाल जी हैं।

और वो तीनो फिरसे अवधि के साथ वापस युगम क्षेत्र की ओर बढ़े

इधर कलियुग टीम के कक्ष में
स्टील, तिरंगा, कोबी और शक्ति एक टेबल के चारों तरफ बैठे हुए थे

कोबी : न जाने का भवा बा युगम को ।

कोबी ने मुंह बनाकर कहा

तिरंगा : अबे कोबी तू अब तो सही से बोलना सीख जा ।

कोबी : क्यों ? तैने सादी करने है म्हारे से?

तिरंगा : गुर्रर्रर्रर ।

स्टील : हा हा हा ।

तिरंगा ने स्टील की तरफ तिरछी नज़र करके कहा

तिरंगा : बड़ा मजा रहा है तुझे कचरे की पेटी !

स्टील : ए !!! कचरा किसको बोला बे ? और पेटी किसको बोला ?

तिरंगा ने मुंह बनाते हुए कहा

तिरंगा : है एक टीन का डिब्बा।

स्टील : देख तिरंगा…

तिरंगा : दिखा।

स्टील : गुर्रर्रर्र । मेरा मतलब सुन तिरंगे।

तिरंगा : सुना बे।

“पूर्वकाल और वर्तमान काल के सभी खिलाड़ियों को बाँकेलाल ने युगम क्षेत्र बुलाया है, तुरन्त आपलोग यहाँ आ जाएं।”

तिरंगा : ये क्या बकबका रहा है बे तू।

स्टील : अबे मैं नही बकबकाया। अवधि की आवाज़ लगती है।

तभी शक्ति बोलने लगी

शक्ति : चलो जल्दी। युगम क्षेत्र ।

वो चारों दरवाज़े से बाहर निकलने लगे। तभी तिरंगा ने स्टील की बांह पकड़ी

स्टील : क्या हुआ बे ?

तिरंगा : देख तो मेरे कान में कुछ बड़ तो नही गया।

स्टील : ऐं !! नही तो तेरे कान में तो कोई घुसपैठिया नही दिख रहा है ।

तिरंगा : तो फिर मैंने जो सुना वो तूने भी सुना है? बाँकेलाल हमे क्यों बुला रहा है? बुलाता तो अक्सर युगम है।

स्टील ने सोचने वाले अंदाज़ में कहा

स्टील : हाँ यार । लगता है ग्रीस में कुछ पीला है। मुझे तो लगता है पूरा ग्रीस ही पीला है।

सब बढ़ रहे थे युगम क्षेत्र की ओर। तिरंगा और स्टील ने भोकाल को उसकी टीम के साथ जाते देखा। वो सब अकड़कर अपनी छाती फुला कर चल रहे थे।

स्टील तिरंगा के कानों में फुसफुसाया

स्टील : “देख तो उन गधों को। ऐसे चल रहे हैं जैसे कहीं के नवाब हों। गुर्र।”

तिरंगा : “भूतनी का । उस भोकाल को तो देख। मुझे ऐसे घूर रहा था जैसे उसने मुझे नही मैंने उसे गड्ढे में गिराया था गुर्रर्र”

बातों ही बातों में वो युगम क्षेत्र पहुँच गए, जहाँ रखा हुआ युगम का ऊँचा सिँहासन अब छोटा हो गया था और उसपर विराजमान था बाँकेलाल। उसके बगल में अवधि खड़ी थी और एक तरफ नागराज और ध्रुव खड़े होकर आपस मे कुछ फुसफुसा रहे थे।

  • प्रथम अध्याय समाप्त●

द्वितीय अध्याय◆काल का आक्रमण

सभी बाँकेलाल से कुछ दूरी पर ही ठिठककर रुक गए। पूर्वकाल वाले आंखें चौड़ी करके बाँकेलाल को तो कभी अवधि को टीपने लगे, तिरंगा और बाकी तीनो की नज़र नागराज और ध्रुव पर पड़ी।

तभी अवधि का ऊंचा स्वर गूँजा

अवधि : आप सभी महानायकों को एक अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना देने के लिए यहाँ बुलाया गया है।

दो पल ठहरी अवधि और फिर बोलने लगी। सभी अपने कान स्टैंड अप करके उसकी बातें बड़े ध्यान से सुनने लगे।

अवधि : युगम एक भारी मुसीबत में है वो अब प्रतियोगिता नही करवा सकता। और इसीलिए अब बाकी प्रतियोगिताएं बाँकेलाल जी करवाएंगे। आज से ये ही नए युगम हैं।

*सभी ने अवधि की बात सुनी। और इस वक़्त सभी अपने बुक्के फाड़े हुए थे और दीदे चौड़े करके बाँकेलाल को देखते रहे।*

*दो तीन पलों तक खामोशी रही। और तभी एक जोरदार ठहाका गूँजा और फिर उसके बाद कई ठहाके गूंजने लगे। पश्चात काल के नायक हंस-हंस कर दोहरे हो रहे थे। पहला और सबसे ज़्यादा ऊँचा ठहाका भोकाल का था।*

*भोकाल अवधि को देखता हुआ बोला*

भोकाल : क्या बोला तुमने ? आज से ये सींकड़ी जी प्रतियोगिता करावाएँगे?? हा हा……हा हा हा…..हा।

गोजो : हम लोगों को एड़ा समझा है क्या, जो पेड़ा खिलाने के लिए इस सींकड़ी को बैठा दिया युगम की कुर्सी पर।

योद्धा : हा हा हा हा । अप्रैल फूल बना रहे हो आप लोग हमें? हा हा हा।

*स्टील भी गुर्रा उठा*

स्टील : तुझे फूल बनाने की क्या ज़रूरत है बे चोटी मास्टर। तू तो पहले से ही फूल है।

*योद्धा कानो से धुँवा उड़ाता हुआ स्टील की तरफ पलटा।*

योद्धा : क्यों बे टीन कि पैदाइश। ज़िन्दगी प्यारी नही है क्या ! जवानी का मज़ा नही लेना चाहता क्या??

*शुक्राल योद्धा के कानों में बुदबुदाया*

शुक्राल : अबे वो मशीनी मानव है । उसे बुढ़ापा या जवानी नही चापती ।

योद्धा : आ……देख मशीनी योद्धा। किसी को कुछ भी बोल पर हमारे बारे में एक भी शब्द तुम्हारे मुख से दुबारा नही निकलना चाहिए वरना मुख दिखाने लायक नही छोड़ेंगे हम।

*स्टील गरजा*

स्टील : मेगागन !!!

*और फौरन ही स्टील का हाथ मेगागन में बदल गया। इससे पहले की स्टील फायर करता अवधि की जोरदार आवाज़ गूंजी।*

अवधि : शांत हो जाये आप सब !! बस बहुत हुआ । आपलोगों की इस हरकत की वजह से आपलोगों के पॉइंट्स कम किये जा सकते हैं!!!

*सब शांत हो गए , सन्नाटा छा गया। पूर्वकाल वाले एक दूसरे का थोबड़ा निहार रहे थे। गहरा सन्नाटा छाया रहा दो पल। और तभी वो आवाज़ आने लगी।*

खुजर खुजर खुजर’

पूर्वकाल वालों ने स्लो मोशन में अपनी मुंडी तिरंगा, स्टील और शक्ति की ओर घुमाई। और उन तीनों ने अपनी मुंडी कोबी की ओर घुमाई। कोबी बुरी तरह से अपनी डिक्की खुजा रहा था।

*कोबी ने उन्हें हैरान होकर घूरा*

कोबी : कया भवा???

*तिरंगा बुदबुदाया।*

तिरंगा : “ये मजबूर है। लेकिन आप नही। रिंग कटर अपनाएं डिक्की की खुजली से छुटकारा पाएँ। खारिश खुजली हो या दाद, रिंग कटर को रखना याद। रिंग कटर रिंग कटर, जैक्सन वाल का रिंग कटर।”

*अवधि की आवाज़ फिर गूंजी*

अवधि : अब आपलोगों को बाँकेलाल की बात माननी ही पड़ेगी, पूर्वकाल के नायकों ! अबसे बाँकेलाल ही युगम का काम करेंगे।

*भोकाल ने नीम के पत्तों की तरह कड़वी निगाह, बाँकेलाल पर डाली। और निगाहों ही निगाहों में उसे गाली दी।*

*अवधि अब बाँकेलाल की तरफ पलटी*

अवधि : बाँकेलाल जी अब आप कुछ कहना चाहेंगे।

बाँकेलाल : सबसे पहले तो मैं भोकाल जी को आमंत्रित करता हू कि वो आएं कुछ पल हमारे साथ बैठें।

*कहने के साथ ही बाँकेलाल ने अवधि से इशारा किया*

बाँकेलाल : वो कुर्सी लाई जाए जिसपर मैं भोकाल को बैठाना चाहता हूँ।

*तत्काल ही बाँकेलाल के सिंहासन के बगल में एक कुर्सी प्रकट हो गई*

बाँकेलाल : अब कृपया भोकाल यहाँ पर अपनी तशरीफ़ लाएं।

*भोकाल ने दो तीन पल बाँकेलाल को फिर अपने साथियों को घूरा और कुर्सी की ओर बढ़ गया।*
भोकाल : 💭साला मुझे इतनी इज़्ज़त क्यों दे रहा है।💭

*भोकाल कुर्सी के पास पहुँचा और एक कड़ी निगाह कुर्सी पर डालने के बाद उसपे बैठ गया।*
*कुछ नही हुआ। भोकाल आराम से कुर्सी पर बैठा रहा । लेकिन अगले क्षण भोकाल कुर्सी से सन्न से उठा एकदम डंडे की तरह सीधा होकर। और फिर अगले क्षण चीखता हुआ अपने दोस्तों की तरफ भागा।*

भोकाल : अरे मोरी मइया !!! छलनी कर दिया रे छलनी कर दिया । मेरी डिक्की लहूलुहान हो गई !!

*बाँकेलाल का स्वर सबके कानो में पड़ा*

बाँकेलाल : सभी अपने अपने दीदे और कान के पर्दे खोल कर सुन लें, अब अगर किसी ने भी मुझसे बदतमीज़ी की या मुझे बुरा भला कहा तो सबको ऐसी ही कुर्सी पर बैठाउँगा मैं ।

*तभी नागराज ध्रुव के कान में फुसफुसाया।*

नागराज : “सुनो। अभी अभी युगम ने मानसिक सम्पर्क किया मुझसे । वो कहता है कि वोआ रहा है।”

ध्रुव : क्या??

नागराज : हाँ। उसे रास्ता मिल गया,यहाँ क।

ध्रुव : बस उम्मीद करो कि वोबाँकेलाल पर एक हाथ उठा दे बस। हमारा प्लान कामयाब हो जाएगा।

नागराज : हाँ लेकिन हमें बाँकेलाल को बचाने का नाटक करना होगा। हमे भी कुछ देर उससेलड़ना होगा।

ध्रुव : हाँ यह करना तो ज़रूरी है।

*नागराज ने कुछ कहने के लिए अपना मुंह खोला की तभी कहीं कुछ हुआ। ध्रुव और नागराज ने मुड़कर आकाश की ओर नज़र उठाई। अजीब सी पीली चमकती रौशनियाँ उन्हें आकाश से अपनी ओर आती दिखीं। ध्रुव और नागराज ज़ोर लगा कर चीखे।*

बचो!!!!! अपनी अपनी जगह से हट जाओ”

*अब सभी ने उस दृश्य को देख लिया था क्योंकि वो रौशनियाँ अब और नीचे आ गईं थीं। सारे नायक जल्दी जल्दी दूसरी दिशा में भागे। बाँकेलाल अपने सिंहासन पर ही बैठा हुआ था क्योंकि वो उनलोगों से ज़्यादा दूरी पर था । उसने नागराज और ध्रुव की चेतावनी नही सुनी थी।*

*बाँकेलाल बहुत खुश हो रहा था।*

बाँकेलाल : 💭हीहीही लगता है इनलोगों ने आतिशबाज़ी शुरू कर दी है। कूद कूदकर अपनी खुशी का इज़हार कर रहे ैं। भोकाल की हालत देखने के बाद सबके होश ठिकाने आ गए! हीहीही।💭

*और यही वो क्षण था जब आग के वो गोले धरती से टकराये और जहाँ-जहाँ गिरे भारी विस्फोट हो गए । सभी सुपर हीरोज़ इधर-उधर कूदे और खुद को विस्फोट की चपेट में आने से बचाया। एक तरफ प्रचंडा भागता हुआ जा रहा था उसके थोड़े ही पास एक गोला आकर गिरा और विस्फोट हो गया, प्रचंडा उस धमाके से तो बच गया लेकिन धमाके के ज़ोरदार वेग ने उसे उछाल दिया। एक तरफ कोबी पिनपिनाता हुआ भाग रहा था। तभी एक ‛धम्म’!!!! की जोरदार आवाज़ आई और कोबी फ्लैट हो गया। प्रचंडा उसके ऊपर आ गिरा था। तिरंगा भाग रहा था और उसने कोबी और प्रचंडा की टक्कर देखी। वो दौड़ता हुआ उनकी तरफ बढ़ा।*

तिरंगा : “इसे कहते हैं आसमान से गिरे और कोबी पे अटके”।

*तिरंगा उनके पास पहुँचा*

तिरंगा : क्या हुआ कोबी ठीक तो हो तुम?

कोबी : हम ठीक हूँ। पहले इ बताओ कउन गिरा हमरे उप्पर।

*तिरंगा ने अपना सर उठाकर देखा। प्रचंडा वहाँ से भाग चुका था पिनपिनाते हुए।*

*तभी नागराज और ध्रुव चिल्ला चिल्लाकर सबको एक जगह इकट्ठा होने का आदेश देने लगे।*

ध्रुव : जल्दी करो सब । एक जगह इकट्ठे हो जाओ। इधर आ जाओ सब।

*नागराज ने बाँकेलाल को देखा। बाँकेलाल का चेहरा अब मारे डर के नीला पीला हो गया था। लेकिन वो युगम का सिंहासन छोड़ने के लिए हिल भी नही रहा था। अवधि भी थोड़ी डरी हुई लगी। वो उस तरफ देख रही थी जहाँ विस्फ़ोट हुए थे। वहाँ अब बहुत सारा धुँवा इकट्ठा हो चुका था और उसके पार का सीन दिखना बन्द हो गया था। –और तभी– एक आवाज़ आई। कोई धम्म-धम्म करता हुआ धुँवे के बादलों के बीच से आ रहा था । सबने अपने दीदे जमाकर धुंवे के बीच देखने की भरपूर कोशिश की, पर किसी को कोई नज़र नही आया। पल प्रतिपल कदमों की वो आवाज़ नज़दीक आती जा रही थी। किसी भी क्षण कोई उस धुंवे के बादल से मेंढक की तरह कूदकर बाहर आ सकता था और सबके टटुए बजा सकता था। लेकिन तभी कदमों की वो आवाज़ रुक गई। नागराज और ध्रुव के साथ साथ बाकी सबकी भौहें सिकुड़ गईं और कान खड़े हो गए। किसी भी क्षण झपट्टा मारने को तैयार दुश्मन से बचने के लिए सभी सावधान होकर खड़े थे। चारों तरफ सन्नाटा हो गया–पहले से भी गहरा सन्नाटा । और तभी। धुंवे के बादलों के पार से कोई बहुत ही तेज़ी से कूदकर उनकी तरफ बढ़ा, सब जल्दी से पीछे हुए । और वो जो कोई भी था, आकर उनके कदमों के पास गिरा। सभी धीरे धीरे उसकी ओर बढ़े । वो शख्स धरती पर चारों खाने चित्त पड़ा हुआ था उसके थोड़ा पास पहुंचते ही शक्ति के मुंह से चीख निकली।*

शक्ति : परमाणु!!!!!!!!!!!!!!

*नागराज, ध्रुव और बाकी सभी चौंके और लपककर परमाणु की लाश के पास पहुंचे। परमाणु बुरी हालत में था जैसे किसी ने उसे खूब पटका हो। सभी की आंखों में आंसू के साथ लावा भी बहने लगे।*

कोबी : च् च् च् । बरमानु तैने इत्तत उप्पर कूदे की क जरुवत रही, लै तूट गए हाथ गोर।

नागराज : ये खुद कूद कर यहाँ नही आया । इसे किसी ने उछाल कर फेंका है हमारी तरफ।

*सब उठकर खड़े हो गए और वापस उस भयंकर काले धुंवे की तरफ अपनी आँखें गड़ा दी उन्होंने। सब गौर से देखने की कोशिश करने लगे लेकिन उन्हें अब भी कोई नही दिख रहा था । तभी एक आवाज़ गूंजी।*

लप लप लप लप लप। किसे ढूंढ रहे हो तुम लोग । ज़रा गौर से देखो यहीं तो हूँ मैं।”

*तभी नागराज की आँखें चौड़ी होती चली गईं । उस काले धुंवे में एक काला साया खड़ा था जो बड़ी मुश्किल से दिख रहा था।*

नागराज : (चिल्लाकर) कौन है तू ? सामने आ ?
काल : तेरे दोस्त ने भी मुझसे यही कहा था। लेकिन अब उसकी हालत देख।

*अचानक कोई काल की तरफ दौड़ लगा चुका था।*

चाहे तू जो भी हो। मुझे इससे कोई लेना देना नही। मैं तो बस तेरा काम तमाम करूँगा”

*कोई जाकर तेज़ी से टकराया काल से और–*

*भड़ाsssssक। ज़ूsssssम।*

*जिस तेजी से प्रचंडा ने काल पर आक्रमण किया था। उसी तेज़ी से वापस पलटा। और एक जोरदार चीख सुनाई दी । प्रचंडा कोबी से टकराया और उसे साथ लेकर दूर छटक गया।*

कोबी : गुर्रर्रर्र साले पिछली बार भी तू ही मुझसे टकराया था न? नही छोडूंगा मैं तुझे !!!

प्रचंडा : अबे मैं तुझसे कब टकराया ?
कोबी : झूठ मत बोल।

*अगले ही पल कोबी प्रचंडा पर कूद चुका था। दोनों आपस मे गुत्थम गुत्था हो गए।*

*इधर नागराज और भोकाल मिलकर चिल्लाए*

आक्रमण”!!!!!!

*सभी दौड़ पड़े उस ओर जिधर काल खड़ा था । सबसे पहले शक्ति ने ऊष्मा का वार किया जिसे बचाता हुआ काल एक ओर कूद पड़ा और तभी तिरंगा की ढाल स्लो मोशन में उसके मुंह के एक इंच दूर से निकली। स्टील काल पर कूदा और एक ज़ोरदार घूँसा उसे जमाने मे कामयाब हो गया। काल पीछे की तरफ लड़खड़ाया और फिर उसने परमाणु ब्लास्ट्स छोड़े। स्टील ने नीचे झुककर खुद को बचाया और उसके पीछे से आ रहा गोजो उससे नही बच सका। एक जोरदार धमाका हुआ और गोजो दूर छटक गया। ध्रुव ने स्टार लाइन काल के पैरों में फँसाई और उसे ज़ोर लगाकर खींचा काल लड़खड़ाया और इसी मौके का फायदा उठाकर नागराज उसपर कूद पड़ा। नागराज ने उसका गला अपनी भुजाओं में कसकर दबा लिया। ध्रुव ने काल के चारों तरफ दौड़ लगा दी और स्टार लाइन से उसे बांधने लगा । अश्वराज के हाथों में प्रकट हुआ दिव्य चाबुक और उसने काल को एक ज़ोरदार सर्राटा चेप दिया। काल तिलमिला उठा और गुस्से में इधर उधर परमाणु ब्लास्ट करने लगा और ध्रुव की स्टार लाइन से खुद को आज़ाद कर लिया उसने। तथा अपने कंधे पर बैठे नागराज का झोटा पकड़कर उसे दूर उछाल दिया। एक ज़ोरदार किक तिरंगा के थोबड़े पर पड़ी–वो पीछे की तरफ कलाबाज़ी खाकर ज़मीन सूँघने लगा । काल ने ध्रुव पर हमला किया और अपनी पूरी ताकत लगाकर एक ज़ोरदार किक मारने की कोशिश की–लेकिन–ऐन वक्त पर ध्रुव ने पास पड़ी तिरंगा की ढाल उठाकर खुद को उसके पीछे छिपा लिया। ध्रुव ने हमला बचा लिया लेकिन काल का आक्रमण इतना तेज था कि उसके वेग से ध्रुव भी दूर छटक गया। भोकाल, शुक्राल और शक्ति अब भी काल का वार बचा रहे थे तथा उसपर वार करने की भरपूर कोशिश कर रहे थे। तिरंगा उठा और अश्वराज की तरफ भागा।*

तिरंगा : (अश्वराज से) साले गधे ! तेरी वजह से सारा गोबर गुड़ हो, म मतलब सारा गुड़ गोबर हो गया । गुर्रर्रर्र

अश्वराज : अबे तमीज़ से बात कर । मैंने क्या किया है !!

तिरंगा : अबे बीच मे ही उसे चाबुक चेपने की क्या ज़रूरत थी बे। देख नही रहा था ध्रुव उसे बांध रहा था। अभी वो उसे अच्छे से बांध भी नही पाया और तूने काल को चाबुक चेप दिया और वो बेकाबू हो गया।

अश्वराज : उसने मेरे दोस्त पर हाथ उठाया था।

तिरंगा : अब मैं तुझपर हाथ उठाऊँगा। गुर्रर्रर्र

*तिरंगा अश्वराज पर कूद पड़ा और दोनों में मुक्कालात शुरू हो गई।*
*दूसरी तरफ कोबी, प्रचंडा और गोजो से भिड़ा हुआ था। गोजो भी कोबी के ऊपर आकर गिरा था।*

कोबी : अबे गोजो तू भी अपने दोस्त की देखा देखी मेरे ही ऊपर जानबूझकर गिरा है न । अब मैं तुझे गिरा गिराकर मारूंगा।

प्रचंडा : उससे पहले मुझसे बच ले बेटा ।

*और एक तरफ नागराज, और ध्रुव खड़े हो रहे थे।*
*ध्रुव खड़ा होकर तिरंगा की ढाल लेकर काल की तरफ दौड़ पड़ा।*

*और नागराज*–

नागराज : नागफनी सर्पों!! बाहर निकलो।

*तत्काल ही नागराज की दोनों हथेलियों से दो नागफनी सर्प बाहर झांकने लगे।*

नागफनी सर्प 1 : क्या हुआ नागराज ?

नागफनी सर्प 2 : क्यों बुलाया हमे ?

*नागराज खौरियाता हुआ बोला।*

नागराज : दिख नही रहा है बे, युद्ध चल रहा है। ध्वंसक सर्प छोड़ो जल्दी ।

*लेकिन नागराज के आदेश पर ध्वंसक सर्प छोड़ने के बजाए दोनों नागफनी सर्प उसे निहारते रहे।*

नागराज : क्या हुआ ? तुमलोग मुझे घूर क्यों रहे हो?

नागफनी सर्प 1 : माफ करो नागराज पर अब हम…

नागफनी सर्प 2 : …ऐसा नही कर सकते।

नागराज : अबे क्या बकवास कर रहे तुम लोग??

नागफनी सर्प 2 : बकवास नही ये…

नागफनी सर्प 1 : …सत्य है। अब हम और हिंसा नही करेंगे। अब हम…

नागफनी सर्प 2 : अहिंसा वादी, अहिंसा प्रिय सर्प हैं। आज हम…

नागफनी सर्प 1 : …एक रैली निकाल रहे हैं । लोगों को अहिंसा की तरफ लाने के लिए…

नागफनी सर्प 2 : …और इसलिए हमारे पास टाइम भी नही है…

नागफनी सर्प 1 : चलते हैं अब।

नागराज : अबे अबे रुको।

नागफनी सर्प 1 : हाँ…

नागफनी सर्प 2 : …बोलो

नागराज : अबे हम लोगों को उसे मारना ही होगा । देख रहे हो उसे जो काला कलुआ है। कितनी बुरी तरह से उसने शक्ति का झोटा पकड़ रखा है।

*नागफनी सर्पों ने एक नज़र काल पर डाली और फिर नागराज से बोले।*

नागफनी सर्प 1 : नागराज जीवन का सबसे बड़ा सत्य है…

नागफनी सर्प 2 : …हम जैसा करते हैं वैसा पाते हैं।

नागफनी सर्प 1 : ..अहिंसा वादी बनो। अहिंसा का प्रचार करो…

नागफनी सर्प 2 : ..हर काम प्यार से करने की कोशिश करो । याद रखो…

नागफनी सर्प 1 : …हिंसा से सिर्फ हिंसा ही मिलती है और परेशानियां बढ़ती हैं…

नागफनी सर्प 2 : …दुश्मन बढ़ते हैं। लेकिन अगर अहिंसा वादी बनते हैं हर झगड़े को प्यार से सुलझाने की कोशिश करते हैं…

नागफनी सर्प 1 : …तो हमारा दुश्मन हमारा दोस्त बन सकता है…

*नागराज बीच मे ही चिल्ला उठा।*

नागराज : अबे चोsssप। प्यार से उससे बात करके मसले हल करते हैं जो प्यार के बारे में जानता हो। लेकिन जिसे प्यार शब्द का अर्थ ही नही मालूम उससे प्यार से बात करके क्या मैं घण्टा उखाड़ लूँगा।

नागफनी सर्प 1 : तो फिर बताओ उसे। प्यार का मतलब समझाओ…

नागफनी सर्प 2 : …याद रखो अहिंसा हिंसा से बड़ी है…

नागफनी सर्प 1 : …अपने दुश्मन से एक बार प्यार से बात करके तो देखो…

नागफनी सर्प 2 : …उसे प्यार का मतलब शमझ में आने लगेगा…

नागफनी सर्प 1 : …अहिंसा ही एकमात्र उपाय है हिंसा से बचने का…

नागफनी सर्प 2 : …हिंसा को, समाप्त करने का…

*नागराज फिर चिल्लाया।*

नागराज : अबे चोप चोप चोप चोsssss प । तुम लोगों के प्रवचन सुनने को मैंने बाहर बुलाया है? दफा हो जाओ यहाँ से, और दूसरे नागफनी सर्पों को भेजो।

नागफनी सर्प 1 : कोई नही..

नागफनी सर्प 2 : …आ सकता।

नागराज : क्या मतलब???

नागफनी सर्प 1 : सब रैली में…

नागफनी सर्प 2 : …जा रहे हैं न।

नागराज : दफा हो जाओ यहाँ से निकम्मो!!!

*नागफनी सर्प फिरसे नागराज की कलाइयों में घुस गए।*
*नागराज ने बाकी नागफनी सर्पो को बाहर बुलाने की कोशिश की। पर कोई भी बाहर नही निकला।*

नागराज : गुर्रर्रर्र। साले पड़े पड़े आलसी हो गए हैं। अब मुझे अपने उन सर्पों को बुलाना पड़ेगा जिन्हें अत्यंत घातक होने की वजह से मैंने कभी इस्तेमाल नही किया है। भाला सर्प!!! बाहर निकल !!

*एक पल बाद ही नागराज की एक कलाई से एक लंबा, डंडे की तरह सीधा सर्प, बाहर निकला। वो दो हाथ जितना लम्बा था और उसका मुँह पतला नुकीला था। भाले की नोक की तरह–और उसका रंग भूरा था।*

भाला सर्प : कहो नागराज जी। हमे कैसे याद कर लिया??

नागराज : क्यों याद नही कर सकता क्या??

भाला सर्प : हे हे, अरे हमारा मतलब पहली बार हमें याद कर लिया आपने। है न अचंभे वाली बात।

नागराज : अच्छा चल। ज़्यादा बातें करने का टाइम नही ।

*नागराज ने काल की तरफ इशारा किया। जिससे अभी भी शक्ति, भोकाल, योद्धा लड़ रहे थे । शुक्राल को काल ने अपने एक हाथ मे टाँग रखा था। तथा ध्रुव दूर से तिरंगा की ढाल फेंक कर उसे मार रहा था।*

नागराज : देख रहे हो न उस काले दरिंदे को? जाओ जाकर उसका शरीर सुराखों से भर दो। वो कोई इंसान नही है। इसलिए उसकी जान भी चल जाये तो मुझे कोई परवाह नही है।

*भाला सर्प ने एक दृष्टि काल पर डाली और नागराज की तरफ वापस पलटा।*

भाला सर्प : भैं वैं वैं। नागराज किससे लड़ने को कह रहे हो? बूहूहू, उस भयंकर काले दरिंदे से?? भैं वैं । उसे छेदने के बाद तो हमारा थोबड़ा खराब हो सकता है, फिर हमारी Nf हमे पप्पी नही देगी । भगा देगी हमे बूहूहू।

नागराज : Nf??

भाला सर्प : नागिन फ्रेंड ! हीहीही। जैसे तुमलोग गर्ल फ्रेंड को शॉर्ट फॉर्म में Gf बोलते हो। उसी तरह हम अपनी प्रेमिका को Nf बोलते हैं। नागिन फ्रेंड हीहीही। भैंsssss

नागराज : अबे रो मत । जा जाकर मार उसे।

भाला सर्प : नही मार सकते भैंss। हमारे थोबड़े का डिज़ाइन बिगड़ सकता है। अभी थोड़ी ही देर में हमारी प्रेमिका ने हमे पार्क में बुलाया है। थोबड़ा ही बिगड़ जाएगा तो वो हमे पहचानने से ही इनकार कर देगी भैंsssss। किसी और को मारने को कहो हम मार देंगे। पर उस काले दरिंदे को नही मार सकते हम । हमे माफ़ करदो।

*नागराज का गुस्सा चढ़ आया।*

नागराज : भाग जाओ यहाँ से। दफा हो जाओ । गुर्रर्रर्र।

*भाला सर्प ने एक पल नागराज को घूरा। और फिर वापस उसके शरीर मे घुस गया।*

नागराज : गुर्रर्रर्र । यहाँ साला मैं मुसीबत में हूँ और इन सबको रोमांस सूझा हुआ है, साले निकम्मे। अब किसे बुलाऊँ…… किसे बुलाऊँ?
हाँ ! छुरा सर्पों !! बाहर आओ।

*कुछ पल तक खामोशी रही और तभी नागराज की कलाइयों से तीन-चार 9-9 इंच के सर्प बाहर निकले। उनका अगला भाग तो सामान्य था लेकिन पिछला चार इंच तक का भाग, चपटा और धारदार था चाकू की तरह, और उन सर्पों की खाल लाल रंग की थी।*

चारो छुरा सर्प एक साथ : कहो नागराज मुझे कैसे याद कर लिया ?

नागराज : क्यों तुमलोगों को भी नही याद कर सकता क्या ???

चारों छुरा सर्प : हे हे हे । पहली बार तुमने मुझे याद किया है तो अचम्भा तो होगा ही मुझे।

नागराज : दरअसल मुझे तुम लोगों की ज़रूरत है। और ये तुमलोग हर बात एक साथ क्यों बोल रहे हो? एक-एक करके नही बोल सकते क्या?

चारों छुरा सर्प : हैं !!!! एक-एक बन्दा ही तो बोल रहा है !!!

नागराज : गुर्रर्रर्रर । अच्छा ठीक है वो सब । चलो अब उसपर आक्रमण करो।

*नागराज ने काल की तरफ इशारा किया।*

चारों छुरा सर्प : नागराज ! तुमने मुझे पहली बार याद किया । बड़ा अच्छा लगा। लेकिन तुमने मुझे गलत समय पर याद किया।

नागराज : क्यों बे !! तुमलोग भी अपनी प्रेमिकाओं के साथ चुम्मा-चाटी कर रहे थे क्या???

चारो छुरा सर्प : हे हे हे । नही जी । वो बात नही है। दरअसल हम सब व्यस्त हैं। वो क्या है कि, पुक्कू की शादी है न।

नागराज : पुक्कू???? ये कौन है बे??

चारो छुरा सर्प : मेरा कच्छोटिया यार है।

नागराज : कच्छोटिया ???

चारों छुरा सर्प : लँगोटिया ! उसी की शादी है । हम सबको बारात लेकर जानी है।

नागराज : अबे तुम लोगों को यही मुहूर्त मिला था क्या शादी का??

चारों छुरा सर्प : हाँ । पंडित जी ने कहा था आज का दिन ही शादी के लिए शुभ है।

नागराज : और अगर मैं मर गया तो तुमलोगों का शुभ अशुभ बन जायेगा गुर्रर्रर्रर। तुममे से एक तो रुक सकता है?

चारों छुरा सर्प : नही रुक सकता । क्योंकि मेरी जाति में अगर किसी के यहाँ शादी होती है तो हर एक छुरा सर्प का वहां उपस्थित होना जरूरी होता है। ये हमारी प्रथा है हीही।

नागराज : गुर्रर्रर्र । दफा हो जाओ तुम सब भी।

*चारों छूरासर्प बिना कुछ कहे सन्न से वापस घुस गए नागराज के शरीर में।*

नागराज : हेंह । सब के सब निकम्मे आलसी हो चुके हैं । कुछ न कुछ बोलकर निकल जा रहे हैं। पता नही सच बोल रहे हैं या झूट। किसे बुलाऊँ अब? वो भी कोई न कोई बहाना बनाकर निकल लेगा। अरे हाँ !! सबसे भयानक और खतरनाक सर्प । सर्वाकार सर्प । जो किसी भी चीज़ का आकार ले सकता। मैंने उसे आजतक इसलिए इस्तेमाल नही किया क्योंकि मुझे कभी उसकी ज़रूरत नही पड़ी। नागफनी सर्प ही काफी थे, पर अब वो सब निकम्मे हो चुके हैं। अब मुझे सर्वाकार का इस्तेमाल करना होगा। सर्वाकार सर्प !!! बाहर आ जाओ।

*नागराज की कलाइयों में हरकत होनी लगी। कोई तेज़ी से उसमे से आ रहा था। और तभी नागराज की कलाई में से निकला।*

*एक चार इंच का संपोला??*

सर्वाकार सर्प : बोलो नागराज। म्हारे को कइसे याद कर लियो?

*नागराज ने उसे बताया।*

नागराज : …और कहीं तुम भी तो व्यस्त नही न हो, अपनी प्रेमिका के साथ।

सर्वाकार सर्प : हुंह। मइँ ये सब न करत।

नागराज : अच्छा तो चलो। मैं जिस चीज़ का आकार लेने कहूँगा, तुम उस चीज़ का आकार लेना । चलो अब। बजाते हैं उस काल की पुंगी।

सर्वाकार सर्प : हुणी चलो, उस ससुरे का पीट डारेगा अम।

  • द्वितीय अध्याय समाप्त●

तृतीय अध्याय◆धमाचौकड़ी

*नागराज दौड़ पड़ा काल की तरफ। काल से अब भी सिर्फ शक्ति अकेली लड़ रही थी। भयंकर युद्ध हो रहा था। ध्रुव अब भी एक ओर से ढाल का प्रहार कर था जो कभी काल को लगता, तो कभी काल के बगल से निकल जाता। भोकाल, योद्धा और शुक्राल एक तरफ चकराए हुए पड़े थे । वहीं से कुछ दूरी पर तिरंगा और अश्वराज आपस मे भिड़े हुए थे। तिरंगा अपने न्याय स्तम्भ से अश्वराज को ताबड़तोड़ पीट रहा था–कि तभी–अश्वराज ने उसे एक ज़ोरदार चाबुक चेंप दिया, तिरंगा तिलमिलाने लगा। और उनसे कुछ दूरी पर कोबी, प्रचंडा और गोजो से भिड़ा हुआ था।*

*नागराज काल के करीब पहुंच गया और चिल्लाया।*

नागराज : सर्वाकार!!!! ले ले हथौड़े का आकार!!

*तत्काल ही आश्चर्यचकित कर देने वाला दृश्य दिखा। चार इंच का छोटा सा सर्प अब तेज़ी से विशालकाय हुआ, उसका रंग काला था। तत्काल ही उसका मुंह एक बड़े विशालकाय हथौड़े के आकार का हो गया। नागराज ने उसकी पूंछ पकड़ी और उसे नचाता हुआ काल की तरफ बढ़ा (जैसे थॉर अपना हथौड़ा नचाता है । हीही)। शक्ति तत्काल पीछे की ओर हटी। इससे पहले की काल कुछ समझता । नागराज उसके करीब पहुंचकर कूदा। काल ने अपने काल को करीब आते देखा। नागराज ने ज़ोर से चिल्लाते हुए हतौड़ा तेज़ी से ऊपर उठाया और उतनी ही तेज़ी से नीचे मारा, हथौड़ा बहुत ही तेज़ी से काल की खोपड़ी पर पड़ा और एक ज़ोरदार धम्म की आवाज़ गूँजी। काल लड़खड़ाता हुआ पीछे गिरा। इसी के साथ ध्रुव की सीटी हवा में गूँजी,शक्ति ने ताली बजाई। तिरंगा और अश्वराज, कोबी, प्रचंडा और गोजो ने भी उधर देखा। काल बिलबिलाता हुआ कुछ दूरी पर बैठा हुआ था। नागराज ने अत्यंत घातक वार किया था उसकी खोपड़ी पर । काल चकरा गया था। नागराज की इस जीत को देखकर, सबमे जोश आ गया । तिरंगा और अश्वराज, कोबी, प्रचंडा और गोजो अपनी लड़ाई छोड़कर एक साथ दौड़े उस ओर। काल अब फिरसे उठ रहा था। सारे हीरोज़ नागराज के पीछे इकट्ठा हुए। काल खड़ा हुआ। और एक बार फिर सब काल की ओर दौड़ पड़े। लेकिन ध्रुव नही भागा और उसने नागराज को भी खींचकर रोक लिया।*

ध्रुव : ये क्या कर दिया तुमने नागराज? हमे उससे लड़ने की सिर्फ कोशिश करनी थी। लेकिन तुमने तो उसपर घातक वार करके उसे अत्यंत गुस्से में ला दिया है। और तुम्हे देखकर बाकी सबके अंदर भी जोश फड़कने लगा है।

*सारे हीरोज़ हल्ला मचाते हुए जाकर भिड़ गए काल से। लेकिन काल भी अब बहुत ज़्यादा गुस्से में आ चुका था। उसने भी हुंकार भरी और कइयों को एक ही वार में दूर छटका दिया।*

नागराज : क्या करूँ यार । वो हम पर घातक वार कर रहा था मुझे भी उसपर घातक वार करना ही पड़ा।

ध्रुव : चलो ठीक है। लेकिन अब हम क्या करें। बाकी सब तो पूरे जोश के साथ उससे भिड़ चुके हैं । वो काल के सामने ज़्यादा देर टिक नही सकते । हमे कुछ करना होगा। जिससे वो उससे लड़ना छोड़ दें। और काल बाँकेलाल की तरफ बढ़े।

नागराज : लेकिन क्या किया जाए??

ध्रुव : वही तो नही समझ आ रहा । एक मिनट। अभी कुछ देर पहले तिरंगा और अश्वराज आपस मे भिड़े हुए थे, और कोबी, प्रचंडा और गोजो से भिड़ा हुआ था। लेकिन अब वो सब भी मिलकर काल से लड़ रहे हैं।

*तिरंगा की ढाल काल की ओर लहराई, काल ने अपना मुंह पीछे घुमाया उससे बचने के लिए। और उसी क्षण स्टील ने अपनी मेगागन से उस पर फायर कर दिया।*

ध्रुव : आईडिया!!!

नागराज : क्या??

ध्रुव : सुनो।

खुसुर पुसुर खुसुर”

अगले ही क्षण ध्रुव और नागराज, काल की तरफ दौड़ पड़े। बाकी सभी के पास पहुँचकर वो काल पर आक्रमण करने लगे । भीड़ में ध्रुव को मौका मिला और वो कोबी के पीछे पहुंच गया, उसने कोबी के सर पर एक खड्डो मारा और दूसरी तरफ भाग गया। कोबी अपना सर सहलाता हुआ पीछे पलटा। उसके पीछे प्रचंडा था जो काल पर अगले वार की तैयारी कर रहा था।

 

To Be Continued.

Written By – Talha Faran for Comic Haveli.

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8 Comments on “Sarvnayak Se Trast Part 11”

  1. हीहीही।
    वाह मजा आ गया।
    नागराज के साथ अलग अलग सर्पो की बात चीत बड़ी मस्त लगी।
    बाँकेलाल तो बाँकेलाल है, लेकिन बाँकेलाल अभी तक काल से लड़ा नहीं।
    अजीबो गरीब शाप देवाचार्य हीहीही मस्त था, लेकिन उसके क्या रोल है देखने में मजा आएगा।
    यू असुरराज शम्भूक क्या गुल खिलायेगा ये भी देखने लायक होगा।
    युग्म को क्या हुआ हीहीही कुछ समझ नही आया लेकिन आगे देखते हैं उसे हुआ क्या?
    तल्हा जी आपको कॉमेडी लिखने में महारत हो चुकी है दिखता भी है।
    बहुत ही गजब स्टोरी मजा आ गया।
    जल्दी ही अगले पार्ट का इंतज़ार रहेगा।

  2. YE Cheating hai… antim bhag bolke kahani adhi chod di.. ek baar to mijhe laga jaise page pura load nahi hua.. anyway please share remaining story soon… and really like they way u try to make this more dramatic …. with weird events of nagraj and yugam.. kobi ko thoda or use kar sakte the

  3. ही ही ही ही ।
    बहुत मजेदार है भाई

    नागराज के साँपो ने तो कमाल ही कर दिया।
    पर बाँकेलाल के “दवा” ने कमाल क्यो नही किया।
    कुल मिलाकर बहुत बढ़िया थी।

  4. कहानी पूरी नही है! चलो कोई बात नही। इस कहानी में काफी मजेदार इवेंट्स हुए जैसे कि शरू में बेचारे कौए के साथ जो श्राप वाली घटना हुई और युग्म का बीमार पड़ने से लेकर बांकेलाल के उसके पद को संभालने तक सारी चीज़ें बहुत सही ढंग से दिखाई हैं।

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