Sarvnayak Se Trast Part 12

सर्वनायक से त्रस्त 

अंतिम भाग 

काल का अंत


कोबी : गुर्रर्रर्र। खड्डो क्यों मारता है बे
??

प्रचंडा : मैंने कब क्या मारा बे?

कोबी : गुर्रर्रर्र। झूट बोलता है।

कोबी ने प्रचंडा पर गदा का प्रहार किया। प्रचंडा झुककर बच गया, फिर तुरन्त ही प्रचंडा ने कोबी पर घूँसा जमा दिया, कोबी दूर छटक गया। प्रचंडा उसकी ओर दौड़ा, कोबी खड़ा हुआ और अपनी गदा प्रचंडा पर फेंकी, प्रचंडा दूसरी तरफ कूद गया। गदा जाकर गोजो को लगी। गोजो फुंफकारता हुआ पलटा और फुल खुंदक में कोबी की ओर दौड़ पड़ा। तीन खिलाड़ी मैदान छोड़कर आपस मे ही भिड़ चुके थे।

इधर नागराज ने नागरस्सी फेंकी और तिरंगा के पैर में फंसाकर उसे खींच दिया, इस दृश्य को किसी ने नही देखा। तिरंगा गिर पड़ा। नागराज की नागरस्सी सन्न से वापस पलट गई। तिरंगा खड़ा हुआ और वापस पलटा। उसने देखा अश्वराज एक तरफ अपना दिव्य चाबुक लहरा रहा था। तिरंगा उसकी तरफ झपटा।

तिरंगा : गुर्रर्रर्र। अबे आखिर मौका देखकर तूने मुझे अपने चाबुक से फंसाकर गिरा ही दिया।

अश्वराज : हैं !! क्या बक रहा है बे?

अश्वराज तिरंगा को सिर से पैर तक देखता हुआ बोला।

अश्वराज : गिरे हुए को कौन गिरायेगा।

तिरंगा : गुर्रर्रर्रर्र।

और फिर तिरंगा अपना न्याय स्तम्भ लहराता हुआ झपट पड़ा अश्वराज पर।
दूसरी तरफ स्टील अपनी मेगागन से काल पर वार करने वाला था। लेकिन तभी ध्रुव उससे टकराया और स्टील का निशाना बदलकर शुक्राल की तरफ बढ़ गया। शुक्राल बाल बाल बचा क्योंकि विस्फोट उससे कुछ ही दूरी पर हो गया। शुक्राल पीछे पलटा और स्टील को घूरता हुआ आगे बढ़ा।

ध्रुव : सॉरी स्टील। मैं चकरा गया था।

स्टील : कोई बात नही। ध्यान रखो।

ध्रुव वहाँ से हट गया।
शुक्राल स्टील के पास पहुंच गया।

शुक्राल : क्यों बे लोहामानव। मुझपर आतिशबाज़ी क्यों फेंकी तूने?

स्टील : अबे जानबूझकर थोड़ी न फेंका था।

शुक्राल : तमीज़ से बात कर।

स्टील : तूने तमीज़ से पूछा?

और स्टील, शुक्राल भी भिड़ गए आपस मे।
धमाचौकड़ी का माहौल हो गया था। अब ज़्यादातर लोग आपस मे भिड़े हुए थे। कोई किसी को घूँसा जमाता, कोई किसी को उठाकर पटकता।अब बस कुछ ही लोग काल से लड़ रहे थे जिसमें : नागराज, ध्रुव, भोकाल, शक्ति, और योद्धा शामिल थे।

योद्धा ने अपना ढकमानघन काल की तरफ लहराया, काल झुककर बच गया और ढकमानघन भोकाल को जा लगा। नागराज के सर्वाकार सर्प ने मुक्के का आकार लिया और काल से पूरी तेज़ी से टकराया।

भोकाल : (योद्धा से ) गुर्रर्रर्रर। अबे देखकर मार। पागल हो गया है क्या??

योद्धा : सॉरी भोकाल भाई। हमसे मिस्टेक हो गई।

नागराज : 💭छोरा हिंगलिश कब सीख लिहिस।💭

कोबी अब भी गोजो और प्रचंडा से भिड़ा हुआ था।

कोबी : गुर्रर्रर्रर । तुम दोनों के टकले फोड़ दूंगा आज मैं।

गोजो : मैं तुझे झुलसवा दूंगा, बिजलिका से।

तभी प्रचंडा मुक्का तानकर कोबी पर झपटा , कोबी साइड हो गया। प्रचंडा का घूँसा गोजो को लगा।

गोजो : भैं…..गुर्रर्रर्र।

प्रचंडा : माफ कर दो गोजो। गलती से तुम्हे लग गया घूँसा।

गोजो : आगे से देखके वार करियो।

कोबी ने गोजो की ओर गदा लहराई, गोजो ने संहारक शक्ति अपने ऊपर धारण कर ली और वार बचा गया। गोजो का एक जोरदार पंच कोबी की तरफ बढ़ा, लेकिन उससे पहले ही गोजो ज़मीन पर गिर पड़ा। कोबी ने अपनी पूंछ में फंसा कर उसे गिरा दिया था। पीछे से प्रचंडा कोबी पर झपटा और कोबी की नट्टी चाप ली। कोबी ने खुद को छुड़ाया और प्रचंडा को उठाकर गोजो के ऊपर पटक दिया। गोजो बिलबिला उठा।

गोजो : अबे मेरे ऊपर क्यों गिरा?

प्रचंडा : उसने मुझे पटका है। मैं कहाँ जानबूझकर गिरा।

गोजो : साले तुझे मैं ही दिखता हूँ क्या? मुक्का भी मुझे ही मारता है, गिरता भी मेरे ही ऊपर है?

गोजो ने प्रचंडा का गला जकड़ लिया। अब प्रचंडा और गोजो आपस मे भिड़ गए थे। कोबी खड़ा होकर उन्हें घूर रहा था और किसे पहले मारे यही सोच रहा था।काल ध्रुव , नागराज और बाकी सबका वार बचाता हुआ एक ओर उछला और फिर उसने कई सारे परमाणु ब्लास्ट छोड़ दिये। सभी उससे बचने के लिए इधर उधर कूदे। एक ब्लास्ट उड़ता हुआ उस जगह पर जाकर गिरा, जहाँ स्टील और शुक्राल आपस मे भिड़े हुए थे। एक “बूsss म” की आवाज़ करता हुआ तेज़ धमाका हुआ। धमाके के वेग से शुक्राल और स्टील छटक गए। शुक्राल उड़ता हुआ जाकर कोबी के ऊपर गिरा। कोबी फ्लैट हो गया।

कोबी : गुर्रर्र। अबे तुम सब को मैं ही दिख रहा हूँ क्या, लैंडिंग करने के लिए। (कोबी के मुह से क्रोध में प्रत्येक वाक्य शुद्ध निकलता है )

कोबी खड़ा हुआ और खुंदक में शुक्राल की ओर बढ़ा।
लेकिन तभी स्टील तेज़ी से उड़कर आता हुआ कोबी से टकराया, और कोबी दूर छटक गया।
स्टील और शुक्राल फिर आपस मे भिड़ गए।

कोबी : (उनकी ओर बढ़ता हुआ) गुर्रर्रर्र। नही छोडूंगा, दोनों को नही छोड़ूंगा।

कोबी उनके पास पहुंच गया और अपनी पूंछ बढ़ाकर उसने दोनों को एक साथ लपेट दिया।

स्टील : ये क्या कर रहा है कोबी? दिमाग तो ठिकाने है तेरा??

कोबी : दिमाग तो तेरा ठिकाने पर नही है बे ! मेरे ऊपर क्यों आकर गिरा? गुर्रर्ररर ।

स्टील : धमाके की वजह से उछलकर मैं तेरे ऊपर आ गिरा।

कोबी : अबे तो गिरने के लिए मैं ही दिखा था क्या?? जोगो या चरपण्डा के ऊपर नही गिर सकता था ??

कहने के साथ ही कोबी ने स्टील पर एक घूँसा जमा दिया। स्टील ने ताक़त लगाकर कोबी की पूंछ से खुद को आज़ाद किया और एक जोरदार घूँसा कोबी के थोबड़े पर जमाया, कोबी के मुंह पर मुक्के का निशान बन गया। कोबी चकरा गया और शुक्राल भी उसकी पूंछ की पकड़ से आज़ाद हो गया। अब उन तीनों में द्वंद शुरू हो गया। कभी कोई किसी को मारता, कभी कोई किसी को उठाकर पटकता। प्रचंडा और गोजो भी भिड़े हुए थे आपस में । तिरंगा और अश्वराज भी आपस मे भिड़े हुए थे। लड़ाई करते करते तिरंगा और अश्वराज काल की तरफ बढ़ने लगे। अचानक अश्वराज ने मौका पाकर तिरंगा को एक ज़ोरदार दुलत्ती जमा दी, तिरंगा उड़ता हुआ काल की तरफ बढ़ा जिसे शक्ति अपने ऊष्मा घेरे में कैद करने की कोशिश कर रही थी। काल ने तिरंगा को अपनी ओर आते देखा, काल ने घुमाकर एक घूँसा अपनी ओर आते तिरंगा पर जमा दिया। तिरंगा शूंsss की आवाज़ करता हुआ वापस पलटा और उड़ता हुआ कोबी की तरफ बढ़ा, जिसने स्टील और शुक्राल की नट्टी पकड़ कर उन्हें हवा में टांग रखा था। तिरंगा पूरी गति से कोबी से टकराया और कोबी कुछ दूर जा गिरा, स्टील और शुक्राल की नट्टीयाँ उसके हाथों से आज़ाद हो गईं।

चकराया हुआ तिरंगा सम्भलने की कोशिश कर रहा था। कोबी उठता हुआ ज़ोर से चीखा।

कोबी : गुर्रर्रर्रर्र अबे लाल पीले ! तुझे भी मैं ही दिखा टकराने के लिए?

तिरंगा ने खुद को संभाल लिया था, कोबी उसकी ओर दौड़ा।

तिरंगा : सॉरी कोबी…वो…मैं तुझसे जानबूझकर नही टकराया। वो…वो अश्वराज ने मुझे तेरी तरफ उठाकर फेंका था।

कहकर तिरंगा वहाँ से फूट लिया , वो कोबी से पंगा नही लेना चाहता था। कोबी फिर से स्टील और शुक्राल से भिड़ गया। तिरंगा फिर से अश्वराज के पास पहुंचा, उनमें फिर से युद्ध शुरू हो गया। तिरंगा और अश्वराज में युद्ध होने लगा । एक बार फिर वो दोनों लड़ते हुए काल की तरफ बढ़े । काल के पास पहुँचते ही, तिरंगा ने अश्वराज का एक वार बचाया और अपने न्याय स्तम्भ से एक ज़ोरदार प्रहार अश्वराज पर किया, अश्वराज लड़खड़ाता हुआ काल की तरफ बढ़ा। काल ने उसे अपने करीब आते देखा और नागराज के सर्वाकार सर्प के वार से बचते हुए अश्वराज पर जोरदार लात जमा दिया। अश्वराज उड़ चला, कोबी की ओर।

कोबी स्टील और शुक्राल से भिड़ा हुआ था, की तभी उसकी निगाह अपनी ओर उड़ कर आते हुए अश्वराज पर पड़ी। कोबी उसे देखकर चौंका जल्द से वह अपनी जगह से हट गया। कोबी को लगा कि अश्वराज स्टील या फिर शुक्राल से टकराएगा, लेकिन–“भड़ाकsss”। अश्वराज तेज़ी से आता हुआ कोबी के ऊपर गिरा। कोबी घास चाटने लगा। अश्वराज जल्दी से उसके ऊपर से हटा।

कोबी : गुर्रर्र गुर्रर्रर्रर्र गुर्रर्रर्र। अबे तुझे मैं अस्तबल दिख रिया हूँ क्या, मेरे ऊपर क्यों आकर गिरा बे?

कोबी अब परेशान हो गया था, बेचारा, सब उसी से टकरा रहे थे आकर बार-बार।
इससे पहले की अश्वराज कोई जवाब देता या कोबी अश्वराज पर झपटता, फिर एक ज़ोरदार भड़ाक की आवाज़ आई और एक पल बाद, तिरंगा कोबी पर गिरा हुआ पाया गया। कोबी ने तिरंगा को झटककर दूर किया और खड़ा होकर फुल खुंदक में चीखा।

कोबी : अबे पागल हो गए हो क्या तुमलोग? तुम लोगन को हम हवाई हड्डा लउक रहा हूँ क्या? सब मिले हमरे ही उप्पर लैंड करत हवे आके। गुर्रर्रर्।

कोबी गुस्से में तो था ही, लेकिन अब बेचारा दुविधाग्रस्त भी हो चुका था। और जब कोबी गुस्से और दुविधा दोनों में होता है, तो उसके मुँह से आधे वाक्य शुद्ध निकलते हैं और आधे अशुद्ध निकलते हैं (हीहीही)।

तिरंगा एक ओर से उठता हुआ बोला।

तिरंगा : कोबी, हवाई हड्डा नही, हवाई अड्डा होता है।

कोबी : गुर्रर्रर्र। अबे कुछ भी हो तै शमझ गवे न।

कहकर कोबी अपनी गदा लेकर तिरंगा पर कूदा और तिरंगा उसका वार बचा बचाकर इधर उधर कूदने लगा। अब पांच लोग एक साथ आपस मे भिड़ चुके थे। कोबी, अश्वराज, तिरंगा, स्टील और शुक्राल। वो कभी किसी को मारते कभी किसी को, कभी कोई किसी के वार से बचता हुआ कूदता नज़र आता, कभी कोई। पूरी तरह से धमाचौकड़ी का माहौल हो चुका था अब। एक तरफ गोजो और प्रचंडा भिड़े हुए थे। काल से सिर्फ पांच लोग भिड़े हुए थे, ध्रुव, नागराज, शक्ति, योद्धा और भोकाल।

ध्रुव : (नागराज के कान में फुसफुसाते हुए) “नागराज बाकी सभी तो रास्ते से हट गए हैं, लेकिन अभी ये दोनों नही हटे हैं।”

*ध्रुव का इशारा भोकाल और योद्धा की तरफ था।*

नागराज : “समझ गया। अब तुम देखते जाओ।”

योद्धा अब काल पर एक ज़ोरदार प्रहार करने के लिए तैयार था। उसने अपना ढकमानघन सम्भाला और काल के थोबड़े की तरफ लहरा दिया। ―और उसी वक़्त नागराज ने एक ज़ोरदार मगर बिना आवाज़ की फूंक मारी योद्धा के ढकमानघन पर, और योद्धा का ढकमानघन जो काल के थोबड़े पर पड़ने वाला था, वापस घूम गया और पूरी तेज़ी से जाकर भोकाल के थोबड़े से टकराया। भोकाल का शरीर उड़ कर पीछे की तरफ पलटी खा गया। और अगले ही पल भोकाल पेट के बल चारों खाने चित्त पाया गया। योद्धा भौंचक्का हो गया। और जल्दी से भोकाल की ओर बढ़ा। उसने भोकाल को पलटा, भोकाल की आंखें खुली हुई थी और उसके पूरे चेहरे पर धूल लग गई थी, वो भूतहा दिखने लगा था, उसके होंटो से खून निकल रहा था और साथ ही एक दबी हुई गुर्रर्र-गुर्रर्र-गुरर्राहट निकल रही थी। भोकाल अचानक से उठ गया और उसने योद्धा की नट्टी चाप ली।

भोकाल : सुर्रर्रर्र-सुर्रर्रर्र ! साले सप्सान पर हास उसाया है सूने, सूने सानबूसकर मेरे सोबड़े पे सकमानसन मारा न? सुर्रर्रर्र।

योद्धा : ये आप क्या कह रहे हैं, श्रीमान भोकाल? हमे कुछ समझ नही आ रहा।

भोकाल : सोsss, साले, सब सेरी ही वसह से हुआ है। सकमानसन मार कर मेरा होथ फोर दिया !! इस लिए मेरी आबास सोसली निकल रही है।

योद्धा : सोसली???

भोकाल : सुर्रर्रर्र !! सोसलीsss !

योद्धा : अच्छा तोतली कहना चाह रहे हैं आप। लेकिन श्रीमान हमने जानबूझकर कुछ नही किया। वो पता नही कैसे हमारा ढकमानघन आपकी ओर घूम गया।

भोकाल : अबे सोsssssप। सूने नही मारा सो क्या सेरा सकमानसन अपने आप सूम गया मेरी ओर। सुर्रर्रर्रर्र। सूने एक बार और मुसे अपने सकमानसन से मारा सा।

योद्धा : नही श्रीमान। उस बार भी हमने सानबूसकर नही मारा था, और इस बार भी सानबूसकर नही मारा।

भोकाल : क्या कहा सूने? सानबूसकर? सुर्रर्रर्र ! एक सो मुसे सकमानसन से मारसा है ऊपर से मेरा मसाक उरासा है।

योद्धा : अर्र नही श्रीमान वो गलती से निकल गया।

भोकाल : लेकिन मेरी सलवार गलती से नही निसलेगी।

कहकर भोकाल ने अपनी सलवार, मेरा मतलब तलवार खींच ली। और खड़ा हो गया, योद्धा एक कदम पीछे हटा।

भोकाल : अब तुसे मैं अपनी सलवार से कास सालूँगा। सुर्रर्रर्र।

योद्धा : श्रीमान आप मेरी बात का यकीन कीजिये। हमने जानबूझकर आपको नही मारा।

लेकिन भोकाल ने उसकी एक भी बात सुने बगैर उस पर छलाँग लगा दी।
दोनों भिड़ गए आपस मे।

नागराज : (ध्रुव से) लो ये दोनों भी गए रास्ते से। अब सिर्फ मैं, तुम और शक्ति लड़ रहे हैं काल से।

ध्रुव : तो देर किस बात की? हम भी हटते हैं अब।

और तभी शक्ति के कानों में दो लोगों की तू तू मैं मैं की आवाज़ पड़ी।

नागराज : मैं ही सही हूँ। तू उल्लू का पट्ठा है।

ध्रुव : अबे चुप। कैप्टन तुझे नही मुझे बनना चाहिए था।

नागराज : शक्ल देखी है आईने में? गुर्रर्र

ध्रुव : रोज़ देखता हूँ। तू अपनी देख।

नागराज : तुझसे हैंडसम हूँ और क्या।

ध्रुव : हुंह। ओप्पो या वीवो के कैमरे में तूने अपनी फोटो खींचकर देखी होगी।

नागराज : गुर्रर्रर्रर्र।

और नागराज ने ध्रुव को उठाकर पटक दिया। अब नागराज और ध्रुव भी बुरी तरह आपस मे भिड़ गए।

शक्ति चीखी।

शक्ति : अरे ये क्या कर रहे हो तुमसब? आपस मे भिड़े हुए हो । आकर इस काल को मारो।

लेकिन कोई शक्ति की बात नही सुन रहा था। सब बुरी तरह से आपस मे गुत्थम गुत्था हुए पड़े थे।
उन सबको देखने की वजह से शक्ति का ध्यान थोड़ी देर को भंग हुआ। और इसी बात का फायदा उठा कर काल ने शक्ति को नचाकर दूर फेंक दिया। शक्ति बहुत दूर जाकर गिरी। काल अब पूरी तरह से आज़ाद था, उसपर किसी का ध्यान नही था।
काल ने अपने कदम स्लो मोशन में बढ़ाये। काल युगम क्षेत्र में धमाकेदार एंट्री मारना चाहता था, और उसने धमाकेदार एंट्री मारी भी। अब काल भौकाल तरीके से आगे बढ़ रहा था। स्लो मोशन में।तृतीय अध्याय समाप्त●

चतुर्थ अध्याय◆काल का अंत

काल के चलते वक़्त हवाएं अजीब तरीके से चलने लगीं, काल के एक एक पैर जमीन पर बढाते ही गर्दे उड़ने लगते थे। काल भौकाल में आगे बढ़ने लगा। आपस मे भिड़े हुए सुपर हीरोज़ को इस बात की कोई फिक्र नही थी वो तो आपस मे एक दूसरे से पिले पड़े थे। काल कइयों के बगल से गुज़रा।

ध्रुव : काल बढ़ रहा है उस ओर।

नागराज : हाँ मैं भी देख रहा हूँ।

और अब बाँकेलाल भी इस बात को ताड़ चुका था कि काल उसी की तरफ बढ़ रहा है। बाँकेलाल का काटो तो खून नही वाला हाल था। अवधि भी डरी डरी बाँकेलाल के बगल में खड़ी थी। दोनों डर के मारे पलकें झपकाना भूल गए थे, और उनकी आंखें डर के मारे फटी हुई थीं।
काल अब बाँकेलाल से पांच कदम की दूरी पर रह गया था।―एक, दो, तीन, चार, । और फिर काल बाँकेलाल के एकदम करीब आकर खड़ा हो गया, वातारण में गहरा सन्नाटा छा गया। ऐसा लगा जैसे हवाएं तमाशा देखने के लिए रुक गई हैं। एक तरफ सुपर हीरोज़ आपस मे भिड़े हुए थे, उन्हें खबर नही थी कि काल इस वक़्त बाँकेलाल के आगे खड़ा है। दूसरी तरफ नागराज और ध्रुव एक दूसरे से लड़ते वक़्त इस तरफ नज़रे गड़ाए हुए थें। काल बाँकेलाल को घूरने लगा, बाँकेलाल को उसकी आँखों मे झांकने की हिम्मत भी नही हो रही थी। वो तो डर के मारे सिंहासन के कोने में दुबका चला जा रहा था। शायद बाँकेलाल सोच रहा था कि सिंहासन उसे अपने अंदर समा लेगा।

अगले ही पल एक ज़ोरदार अट्टहास गूँजा।

काल : हा हा हा हा हा हा हा हा । लप लप लप लप लप।च् च् च्। युगम ये क्या हाल हो गया तेरा। मुझे तो अपनी आंखों पर यकीन नही हो रहा , हा हा हा। तू इतना सींकड़ी और छोटा कैसे हो गया। इतने युगों में कितना कुछ बदल चुका है, लेकिन मैंने मैंने यह नही सोचा था कि तू भी बदला हुआ मिलेगा मुझे हा हा हा हा । वो भी इतना बदला हुआ।

काल के ज़ोरदार अट्टहास की वजह से अब सभी सुपर हीरोज़ का ध्यान इस तरफ आ गया था। लेकिन कोई भी हीरो बाँकेलाल को बचाने के लिए आगे नही बढ़ रहा था।

कारण– भोकाल ने बाँकेलाल से अपनी दुश्मनी की वजह से अपनी टीम के लोगों को रोक दिया उसे बचाने से।
और नागराज ने अपनी टीम को आर्डर दे दिया कि कोई बाँकेलाल को बचाने की कोशिश न करेगा।

बाँकेलाल ने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ निकाली।

बाँकेलाल : म मैं यू यू युगम न..

काल : हा हा हा हा । मेरे डर की वजह से तू अपना नाम बड़बड़ाने लगा। हा हा। मुझे याद है वो दिन। जब मुझे शाप देकर एक चिपचिपी चीज़ बनाकर एक अनजान ग्रह पर फेंक दिया गया। तूने भी मेरा साथ नही दिया, अपने बड़े भाई का साथ नही दिया। मेरी शक्तियां छीन कर तुझे दे दी गईं और तूने भी ले लिया उन्हें। पर। अब वक्त आ गया है कि मैं तुझे मारकर खतम कर दूँ। और फिर मुझे मेरी शक्तियां वापस मिल जाएंगी। साथ ही साथ तेरी भी। हा हा हा । मैं एक बार फिरसे स्वर्ग पर आक्रमण करूँगा । तूने इन जो नमूनो को इकट्ठा किया है न , सर्वनायक नामक बकवास प्रतियोगिता करवाने के लिए। इन्ही को मैं अपनी सेना में शामिल करूँगा, इन नमूनों को लेकर मैं स्वर्ग पर आक्रमण करूँगा।

काल ने सभी सुपर हीरोज़ की तरफ उंगली दिखाते हुए कहा।

काल : लप लप लप लप लप।और इस बार मैं जीतूँगा। क्योंकि इस बार कोई ऋषि मुनि देवताओं की मदद करने के लिए नही है। हा हा हा । कलियुग में अजीबो गरीब शाप देवा चार्य जैसे ऋषि कहाँ से आएंगे।

कहने के साथ ही काल ने अपनी मुट्ठी भींच ली और बाँकेलाल के थोबड़े अपने मुक्का का डिज़ाइन बनाने के लिए तैयार हो गया । लेकिन बाँकेलाल के मुंह तक पहुंचने से पहले ही उसने अपना मुक्का रोक लिया।

काल : लप लप लप लप लप। क्या हुआ बे। तू तो बचने की कोशिश भी नही कर रहा है, इतना कमजोर हो गया है तू? चल मैं ही तुझे आसान मौत दे देता हूँ। क्योंकि मैं तेरा बड़ा हूँ , बड़प्पन तो दिखाना ही पड़ेगा। घबरा मत मैं तुझे धीरे से एक चाँटा मारूँगा बस।

कहकर काल ने बाँकेलाल को मुक्का मारने के बजाए अपना दायाँ हाथ उठाया और बाँकेलाल के गाल की तरफ बढ़ा दिया, एक चाँटा उसके गाल पर जड़ दिया। बाँकेलाल जानबूझकर नीचे गिर गया और मरने की एक्टिंग करने लगा। उसने अपनी जीभ पूरी बाहर निकाल दी।―लेकिन। तभी किसी की बड़ी भयानक चीख सुनाई दी।

ये तो काल चीख रहा था बड़ा ही भयानक। और उसका शरीर धुँवा बनकर उड़ता जा रहा था। साथ ही एक नया शरीर सामने आ रहा था, नीले रंग का। ―काल बाँकेलाल को देखकर चीखा।

काल : आरर्रर्रघ!!!!!! धोखा धोखा, तू युगम नही है। तू तू कोई इंसान है।

अब बाँकेलाल का डर भी थोड़ा गायब हो गया था।

बाँकेलाल : यही तो मैं तुमको बताना चाह रहा था ।

काल : गर्रर्रर्रर्रर्र । धोखा!! धोखा दिया गया मुझे। अब मुझे मेरा दूसरा शाप याद आ रहा है।

### : अफसोस बड़ी देर से याद आया तुमको तुम्हारा दूसरा शाप।

सभी लोग भौंचक होकर खड़े थे, और काल को धुँवा बनता देख रहे थे। लेकिन उस आवाज़ ने उन्हें और भौंचक कर दिया। वो आवाज़ युगम की थी। सबने उस तरफ देखा। युगम का सिंहासन अब फिरसे बड़ा हो चुका था। और उसपर बैठा हुआ था युगम।

काल : ग्र्रर्रर्रर । युगम तूने मुझे धोखा दिया।

युगम : धोखा नही, इसे कहते हैं आने वाली मुसीबत से निबटने के लिए पहले से योजना तैयार करना।

लेकिन अब काल की आवाज़ नही निकली।

काल : लप लप लप लप लप…

बस लपलपाने के बाद ही काल पूरी तरह धुँवा बनकर गायब हो गया। और अब सामने आया वो जिसके शरीर पर उसने कब्ज़ा जमा रखा था। डोगा का शरीर धम्म की आवाज़ के साथ ज़मीन पर गिर गया। सभी के बुक्के खुल गए।

नागराज ध्रुव के कान में फुसफुसाया।

नागराज : “साला काल। मरते मरते भी लपलपाता हुआ मरा। कइसी जीभ लप लप लपाई, हीहीही।”

ध्रुव : “वो बेचारा अपनी अंतिम इच्छा प्रकट कर रहा था। सेंटर फ्रूट खाने की, हीहीही।”

तिरंगा लम्बे कदम बढ़ाकर डोगा के शरीर के करीब पहुँचा। डोगा की सांस चल रही थी। लेकिन वो गहरी बेहोशी में लग रहा था।

तिरंगा : अरे ये तो डोगा है।

स्टील : डोगा ही काल था?

युगम की आवाज़ गूँजी।

युगम : नही । काल ने डोगा के शरीर पर कब्ज़ा कर लिया था और उसे अपने हिसाब से चला रहा था। जिस तरह स्पाइडर मैन का दुश्मन वेनम किसीके भी शरीर पर कब्ज़ा कर लेता और उसे अपनी मर्ज़ी से चलाता है।

भोकाल : ये सब हो क्या रहा है??

शक्ति : हमारी कुछ समझ मे नही आ रहा है।

शक्ति भी अब वापस आ चुकी थी।

युगम : मैं आपलोगों को सबकुछ बताऊंगा, विस्तार से । फिलहाल अभी बाँकेलाल को वापस उनके समय मे भेज दूँ।

और तभी बाँकेलाल के चारों तरफ रौशनी चमकने लगी, बुरी तरह से भौंचक्का बाँकेलाल इससे पहले की कुछ समझ पाता, रौशनी उसे अपने अंदर समेट कर गायब होती चली गई।

किसी को कुछ समझ नही आ रहा था, सब बेचैनी में इधर उधर झूल रहे थे। सिर्फ ध्रुव और नागराज ही इत्मिनान से खड़े थे।

तभी युगम की आवाज़ दोबारा गूँजी।

युगम : हाँ तो अब आप लोग सुनिए की माजरा क्या है।

सभी ने अपने अपने कान खड़े कर लिए।

युगम : आरम्भ से आरम्भ करता हूँ। ―दरअसल ये बात युगों पहले की है। जब सभी देवताओं ने मिलकर ये तय किया कि कलियुग में सर्वनायक नामक प्रतियोगिता होगी, जिसमे अपने अपने युग को बचाने के लिए महानायकों को इकट्ठा होना होगा।

तिरंगा ने सवाल दागा।

तिरंगा : क्या सर्वनायक की शुरुआत युगों पहले ही हो गई थी??

युगम : हाँ । और तब देवताओं ने इस आयाम का निर्माण किया, और युगम क्षेत्र बनाना शुरू किया, जिसका नाम तब काल क्षेत्रथा।

स्टील : क्यों????

युगम : मेरी बात पूरी सुनते रहिये आपलोग। जबतक ज़रूरी न हो, बीच मे न बोलिये।

स्टील : सॉरी जी।

युगम : हूँ…। हाँ तो देवताओं ने सबसे पहले इस क्षेत्र का निर्माण किया। प्रतियोगिता का स्थान बनकर तैयार हो गया। अब नियुक्त करना था प्रतियोगिता के संचालकों को। तब देवताओं ने काल का निर्माण किया और फिर मेरा, फिर अवधि का। इस हिसाब से काल मुझसे बड़ा था। इसलिए मैंने काल को अपना बड़ा भाई माना और उसकी हर बात मानने की प्रतिज्ञा ली, और अपने बड़े भाई पर कभी हाथ न उठाने की भी सौगन्ध खाई। काल के नाम पर ही इस क्षेत्र का नाम काल क्षेत्र रखा गया।―फिर हम तीनों को देवताओं द्वारा सब कुछ समझा दिया गया कि हमे क्या करना है। हमने प्रतियोगिता की हर छोटी-बड़ी तैयारी तुरन्त शुरू कर दी। हमे हर चीज़ को देखते हुए चलना था। हम तभी से अपने काम पर लग चुके थे, हालांकि प्रतियोगिता कलियुग में शुरू होनी थी। लेकिन हमें हर युग की छोटी बड़ी घटनाओं को मिलाकर सर्वनायक प्रतियोगिता की तैयारी करनी थी। सब कुछ अच्छे से ही चल रहा था। ―लेकिन फिर पता नही क्या हुआ या कैसे हुआ। काल की असुरराज शंभूक से गहरी दोस्ती हो गई। पता नही असुरराज शंभूक काल को कहाँ मिल गया। असुरराज शंभूक और काल मिलकर इधर उधर घूमने फिरने लगे, काल ने अपने काम पर से अपना ध्यान हटा लिया और उसका काम भी मुझे ही करना पड़ा। काल पहले भी एक नम्बर का अय्याशबाज़ था। लेकिन वो अपने काम पर अच्छा खासा ध्यान देता था और जब समय मिलता था तब हुडकबाज़ी करता था। लेकिन जबसे असुरराज शंभूक से उसकी दोस्ती हुई, वो पूरी तरह बिगड़ गया। और फिर धीरे-धीरे असुरराज शंभूक उसे राजसी ठाठबाट दिखाकर ललचाने लगा। धीरे धीरे काल को सत्ता का लालच चापने लगा–और–एक दिन असुरराज शंभूक ने उसके साथ मिलकर स्वर्ग पर आक्रमण करने का प्रस्ताव रखा। उसने काल को स्वर्ग का सिंहासन का लालच दिया, उसने कहा कि काल इंद्रदेव के सिंहासन पर बैठ कर राज करेगा।

तिरंगा : क्या असुरराज शंभूक ने ऐसा कहा? हेंह।

युगम : ये सब उसकी चाल थी। वो जानता था कि कोई भी देवता काल पर कभी वार नही करेगा, सभी देवताओं ने हम तीनों को ये वचन और आशीर्वाद दिया था कि कोई भी देवता हम पर हाथ नही उठाएगा। और काल के पास इतनी शक्तियां थीं कि कोई और उसे हरा भी नही सकता था। असुरराज शंभूक स्वर्ग का सिंहासन जीतने के बाद ज़रूर कोई धोखेबाज़ी करता काल के साथ । वो काल को कहीं कैद कर देता या गायब कर देता, उसका गुरु तो है ही एक नम्बर का योजना बनाऊ मशीन। खैर। असुरराज ने आखिर काल को अपने साथ शामिल कर लिया और वो स्वर्ग पर आक्रमण की योजना बनाने लगे। काल मेरे पास आया उसने मुझे भी सारी बात बताई और उसका साथ देने को कहा। मैने कहा तुम ये बिल्कुल गलत कर रहे हो। इस पर काल कहने लगा “मैं जो कर रहा हूँ बिल्कुल सही कर रहा हूँ। ज़रा तुम ही सोचो की देवताओं ने हमे क्या दिया है,वो बस हमे नौकर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने हमारे लिए आलीशान महल बनवाया तो है लेकिन हम उसमे तबतक नही जा सकते जबतक सर्वनायक प्रतियोगिता खतम न हो जाये। और उसके लिए युगों इंतज़ार करना पड़ेगा तो क्या हम इतने युगों ऐसे ही नौकरों की तरह खून पसीना बहाते रहें।” मैने कहा “काल यही हमारा काम है, हमे इसी के लिए तो बनाया गया है। तुमको क्या हो गया है?, तुम उस शंभूक का साथ छोड़ दो। उसने तुमको बहका कर गलत रास्ते पर ला दिया।”

उसने मुझे गलत नही बल्कि सही राह दिखाई है। आखिर क्या करना चाहते हैं देवता उस बकवास प्रतियोगिता को करवा कर। वो बस अपना मनोरंजन करने के लिए ऐसा कर रहे हैं।”

तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है काल। अगर देवताओं को अपने मनोरंजन के लिए ये प्रतियोगिता करवानी होती तो वो युगों इंतज़ार नही करते बैठकर।”

दिमाग तो मेरा अब ठिकाने पर आया है। और मैं असुरराज का साथ दूँगा। मैं और वो मिलकर स्वर्ग पर आक्रमण करेंगे और इंद्र का सिंहासन जीतने के बाद मैं बनूँगा स्वर्ग का नया राजा । और सभी देवताओं को वहाँ से खदेड़ दूँगा।”

अच्छा ! और तुम्हारा साथ देने के बदले में असुरराज क्या चाहता है? क्या तुमने उससे पूछा ? दरअसल वो तुम्हारे साथ मिलकर स्वर्ग पर आक्रमण नही कर रहा है। बल्कि वो तुमको अपने साथ मिलाकर स्वर्ग पर आक्रमण कर रहा है। जीतने के बाद वो कोई चालबाज़ी करेगा तुम्हारे साथ, और सिंहासन हथिया लेगा।”

मैं उसे अच्छे से जानता हूँ वो मेरे साथ धोखा नही करेगा। वो देवताओं की तरह धोखेबाज़ नही है।”

देवताओं ने कौनसा धोखा किया है तुम्हारे साथ?”

बहुत बड़ा धोखा किया है। हमे इस वीरान बंजर आयाम में कैदी की तरह रखा हुआ है। कुछ भी हो मैं अब स्वर्ग पर आक्रमण करूँगा तो करूँगा। तुम्हे भी मेरा साथ देना है तो चलो मेरे साथ।”

मैं तुम्हारा साथ कभी नही दूंगा, तुम जो कर रहे हो गलत कर रहे हो। अगर मैंने तुम्हे अपना बड़ा भाई न माना होता और तुम पर कभी हाथ न उठाने की सौंगन्ध न खाई होती, तो मैं तुम्हे बलपूर्वक रोकता। पर मैं तुमको सिर्फ समझाना चाहूँगा तुम जो कर रहे हो, बिल्कुल गलत है, तुमको इसका बुरा अंजाम भुगतना होगा।”

हेंह। बुरा अंजाम तो तुम भुगतोगे। मेरा साथ न देकर। देख लेना जैसे ही स्वर्ग का राजा बनूँगा सबसे पहले इस बकवास आयाम तो तबाह करूँगा। और काल क्षेत्र को पूरी तरह बर्बाद कर दूँगा कोई सर्वनायक प्रतियोगिता नही होगी।”

और फिर वो चला गया। स्वर्ग सिंहासन जीतने के बाद उसने काल क्षेत्र को तबाह करने की कसम खाई थी।

बोलता हुआ युगम कुछ पल के लिए रुक गया।

TO BE CONTINUED……


WRITTEN BY – TALHA FARAN FOR COMIC HAVELI

 

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3 Comments on “Sarvnayak Se Trast Part 12”

  1. बेचारा कोबी हीहीही।
    बाँकेलाल का रोल खत्म 🙁
    काल को बेचारे को लड़ने की जरूरत ही नही पड़ी किसी से भी सब तो एक दूसरे के पीछे पड़े हुए थे हीहीही।
    असुरराज शम्भूक का रोल अभी इसमे क्लियर नही हुआ ज्यादा शायद अगले पार्ट में होगा ।
    ऋषि अजीबोगरीब शपदेवा चार्य भी अभी नदारद हैं।
    बाँकेलाल की किस्मत हाहाहा।
    बेचारा पता नहीं कब अपनी किस्मत को सही कर पायेगा।
    डोगा तो वापस आ गया अब परमाणु कहाँ हैं बहूहूहू।
    अगला पार्ट कैसा होगा पता नहीं लेकिन इतना पक्का है हंसी से भरपूर होगा ।हीहीही

    आल द बेस्ट तल्हा जी।
    बहुत बढ़िया स्टोरी

  2. बहुत सही कहानी है तल्हा भाई।
    पर बाँकेलाल को अभी नही भेजना था।
    बहु हु हु हु।
    कोबी का रोल तो सब से गजब था।
    अब बस जल्दी से आखिरी भाग भी आ जाये।

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