Sarvnayak Se Trast Part-6

Sarvnayak Se Trast

●●● 🌍 युगम धारित्री अस्य: 🌏 ●●●

श्रृंखला : सर्वनायक से त्रस्त ( Part 6)

सर्वशाक्तिधारी नागफनी सर्प

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【 युगम के आयाम में】

[एक अनजान ग्रह] कीचड से भरे घड्ढे में से एक शख्स उठ कर खड़ा हुआ है और पूरी तरह कीचड़ से लथपथ है……….
कौन है ये ?????

आइये इसकी बातें सुनते है…..
यह तो किसी की शान में गुस्ताखी कर रहा है ।
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कीचड़ वाला व्यक्ति : गुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र 😡😡😡😡😡😡 ## 3 5###!!××+×+ साला जानवर की औलाद, बुहुहु साला ना जाने कहाँ आकर गिरा हूँ चारों तरफ अँधेरा ही अँधेरा है, और कीचड़ ही कीचड़ एक बार मैं वापस पहुँच गया उस साले कोबी के बम में बम डाल कर उड़ा दूंगा गुर्रर्रर्रर्र, बुहुहु कहीं दूर दूर तक कुछ दिख ही नही रहा है बुहुहु।

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ओह तो यह हैं अपने श्रीमान डोगा😀

डोगा उस कीचड़ के गड्ढे से बाहर निकलता है और लड़खड़ाता हुआ आगे बढ़ता है ।
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डोगा : साला यहाँ चारों तरफ अँधेरा है कुछ दिख ही नही रहा है ,गुर्रर्र😡 बुहुहु।😨

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तभी डोगा का पैर किसी चिपचिपी चीज़ पर पड़ता है
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डोगा : गुर्रर्रर्रर्र 😡😡साला फिर कीचड़ में पैर पड़ गया, समझ नही आता इतना सारा कीचड़ यहाँ आया कहाँ से।

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लेकिन वो कीचड़ नही कुछ और ही था, क्योंकि वो डोगा के पैरों पर चढ़ने लगा था
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डोगा : अबे अबे अबे, यह कीचड़ मेरे ऊपर कैसे चढ़ रहा है….. अबे यह क्या हो रहा है , अबे मुंह दे विच् ग्रेनेड डाल दूंगा पिन खींच के गुर्रर्रर्रर्र😡 बुहुहु.😨😫……

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वो चीज़ जो भी थी उसने अब डोगा को पूरी तरह ढाँक लिया था और अब डोगा कहीं दिख नही रहा था इसका एक ही मतलब है, वो जो भी चीज़ थी उसका रंग काला था जिसकी वजह से डोगा नज़र नही आ रहा था,
और अब उसकी आवाज़ भी कहीं सुनाई नही दे रही थी इसका मतलब यह था की डोगा की जीवन लीला समाप्त हो चुकी थी।👻
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[वहां से दूर] शक्ति युगम छेत्र से कई किलोमीटर दूर आ चुकी थी उसने वो आवाज़ सुनी ।
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शक्ति : यह आवाज़…. यह आवाज़ तो…
तिरंगा की है,

तिरंगा : बचाओ बचाओ…😫 कोई है, मुझे निकालो यहाँ से ।

शक्ति : तिरंगा कहाँ हो तुम, तिरंगा तिरंगा!

तिरंगा : ( चिल्लाकर )शक्ति तुम हो क्या ?

शक्ति : हाँ मैं , मैं तुम्हे ही ढूँढने निकली थी पर तुम हो कहाँ ।

तिरंगा : यहाँ इस गड्ढे में ।

शक्ति : किस गड्ढे में ?

तिरंगा : क्या….., गड्ढा नही दिख रहा है ?

शक्ति : नही मुझे तो कोई गड्ढा नही दिख रहा है।

तिरंगा : अरे मेरी माँ तीसरी आँख खोल के देख ।

शक्ति : मज़ाक मत करो, कहाँ हो तुम जल्दी बताओ ।

तिरंगा : तुम इस वक़्त हो कहाँ,मेरा मतलब ज़मीन पे हो या आकाश में ।

शक्ति : ज़मीन पे हूँ ।

तिरंगा : तो थोड़ा ऊपर उड़ो और फिर देखो ।

शक्ति : अरे हाँ यह तो मैंने सोचा ही नही था ।

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शक्ति उड़ कर थोड़ा ऊपर जाती है, और चारों तरफ नज़रें दौड़ाती है
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शक्ति : कहाँ है कहाँ है, हाँ वहां 👉 मुझे एक गड्ढा दिखा ।

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शक्ति उस गड्ढे के पास जाती है ।
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शक्ति : तिरंगा तुम इसी में हो न ?

तिरंगा : और कोई गड्ढा दिख रहा है क्या ?

शक्ति : नही…. फिर भी मैंने सोचा एक बार पूछ लूँ, सच बताओ इसी में हो न तुम ।

तिरंगा : गुर्रर्रर्रर्र 😬आवाज़ कहाँ से आ रही है ।

शक्ति : इसी में से, हीहीही😁

तिरंगा : तब क्यों पूछ रही हो….. यार शक्ति, बाकी सब ऐसे बेवकूफी वाले सवाल करते हैं तो समझ में आता है की साले बावले हैं, लेकिन तुम भी……… खैर चलो निकालो अब मुझे ।

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शक्ति तिरंगा को तुरंत ही बाहर निकाल देती है।
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शक्ति : तिरंगा क्या हुआ था ? तुम यहाँ कैसे पहुंचे ? और इस गड्ढे में कैसे गिरे ? क्या हुआ था तुम्हारे साथ ? क्या तुम खुद इस गड्ढे में गिरे या किसी और ने तुम्हे धक्का दे दिया था ? क्या तुम्हारी यहाँ पर किसी के साथ मुठभेड़ हुई थी ? तुम प्रतियोगिता छोड़ कर क्यों भागे थे ? क्या तुम खुद भागे थे ? या किसी और ने तुम्हे भाग जाने के लिए कहा था ? ऐसा क्या हुआ था ? क्या….

तिरंगा : बुहुहुह😓ु चुप हो जा चुप हो जा मेरी माँ, अभी तक मैं अच्छे से सांस नही ले पाया और तुमने आधी ही साँस में इतने सारे सवाल कर डाले, बुहुहुहुह😫😫ु।

शक्ति : हीही😁… Sorry, लेकिन मैं जानना चाहती हूँ की आखिर तुम यहाँ कैसे पहुँचे ? खुद यहाँ आये थे या किसी और ने तुम्हे लाकर पटक दिया था ? या..🤔

तिरंगा : (💭बुबुहु 😫फिरसे शुरू हो गयी💭) चुप हो जाओ शक्ति मैं सब बताऊंगा बस जल्दी से मुझे वापस सबके पास ले चलो ।

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शक्ति तिरंगा को लेकर चल पड़ती है युगम क्षेत्र की ओर ।
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[ एक अनजान जगह पर ]……….

कोई रहस्मयी आकृति दिख रही है, जिसका पूरा शरीर नही दिख रहा है अँधेरे की वजह से, सिर्फ उसकी लाल सुर्ख आँखें दिख रही है।
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रहस्मय आकृति : लप लप लप लप लप….. हाहाहाहाहाहाहा👹👹 ( भयानक वाला अट्टहास ) मुझे जिस चीज़ की ज़रूरत थी वो मैंने हासिल कर लिया है अभी बस मुझे थोड़ी सी शक्ति की ज़रूरत है उसके बाद मैं आक्रमण करूंगा युगम पर और युगम क्षेत्र को तो मैं तबाह कर डालूँगा हाहाहाहा👹👹👹 ( फिर भयानक वाला अट्टहास)

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और वहां से दूर, उस गृह पर जहाँ परमाणु एक रहस्मयी व्यक्ति के साथ मौजूद है ।
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परमाणु : कौन हो तुम और यहाँ कैसे पहुंचे ?

रहस्मय व्यक्ति : मैं कौन हूँ ? अरे हाँ मैं कौन हूँ……. बुहुहु मैं तो यह भी भूल चूका हूँ, मैं कौन हूँ , कहाँ से आया हूँ, कैसे यहाँ पहुंचा हूँ, मुझे कुछ याद नही है, बस इतना याद है की मैं यहाँ का नही हूँ मैं कहीं और का हूँ मेरे किसी शत्रु ने मुझे यहाँ पहुंचाया है और मुझे यहाँ आये लगभग 30 साल से ज़्यादा हो चुके हैं ।

परमाणु : ( 💭 साला मरा नही। मैं तो दो दिन में मर जाता 😧💭 )

रहस्यमय व्यक्ति : क्या सोच रहे हो ?

परमाणु : कुछ नही, हीही,😁 आ……. जब आप यहाँ आये थे तब आपकी उम्र कितनी थी ?

रहस्यमय व्यक्ति : उतनी ही जितनी इस वक़्त है, हीहीही😁 ।

परमाणु : मतलब ?

रहस्यमय व्यक्ति : हीहीही 😁, मतलब! मतलब यह है की मतलब तुमको समझ में नही आयेगा, मतलब जब मैं नही समझ पा रिया हूं तो तुम कैसे समझ पाओगे मतलब……, मतलब, मतलब ऐसी खतरनाक चीज़ है जिसकी वजह से एक इंसान दुसरे इंसान को खत्म कर देता है अपने मतलब के लिए, मतलब की मतलब ऐसी चीज़ है जिसकी वजह से सारे फसाद होते, मतलब की मतलब बहुत ही वाहियात चीज़ का नाम है और मतलब के मतलब से बच कर रहना चाहिए, मतलब की मतलब से जितना हो सके उतना दूर रहने से ही मतलब रखो, मतलब….

परमाणु : जी जी मैं समझ गया, मैं समझ गया, अब आप अपने मुख को आराम दें , हीही 😁( 💭 साला बावला लगता है गुर्रर्रर्रर्र😡💭 )

रहस्यमय व्यक्ति : तुमने कुछ कहा ?

परमाणु : नही नही जी, नही तो। आ….. एक सवाल पूछना है,… क्या आपको आपके उस शत्रु का नाम याद है जिसने आपको यहाँ पर पटक दिया था…….. कहीं वो युगम तो नही था ?

रहस्मय व्यक्ति : युगम यह कौन है ? 🤔🤔

परमाणु : है एक सिरफिरा, जिसको चाहता है यहाँ पर लाकर पटक देता है ।

रहस्यमय व्यक्ति : हाँ तब हो सकता है उसने ही मुझे पटका होगा..

परमाणु : हो सकता है नही , उसने ही पटका होगा गुर्रर्र 😡जब हम सुपर हीरोज़ को नही छोड़ा उसने तो तुम तो एक आम इंसान हो ।

रहस्यमय व्यक्ति : गुर्रर्रर्रर्र😡 आम इंसान मत बोलना मुझे, अच्छे अच्छों की भींपड़ी बजा चुका हूँ मैं, जिन्नों को भी नही छोड़ा था मैंने ।

परमाणु : ( 💭 अरे बाप रे , यह तो खोली बाबा लगता है 😕💭)

रहस्यमय व्यक्ति : हीही यह बात मुझे अभी अभी याद आई है अपने बारे में, और अब तुम मुझे यह बताओ की यह युगम कहाँ मिलेगा उसकी भींपड़ी तो मैं बजाऊंगा ज़रूर 😡।

परमाणु : ( 💭भींपड़ी…….. यह डॉयलॉग तो कहीं सुना है मैंने, एक मिनट इस व्यक्ति का अंदाज़, बात बात पे भींपड़ी बजाना, कहीं यह…💭)

रहस्यमय व्यक्ति : ओये क्या सोच रिया है….

परमाणु : आपका यह डॉयलॉग……. भींपड़ी बजा दूंगा भींपड़ी बजा दूंगा मैंने कहीं सुना है, आप अपना नाम बताना ज़रा ।

रहस्यमय व्यक्ति : अरे क्या बावला बन्दा है, मुझे मेरा नाम याद ही नही है तो कैसे बताऊंगा, गुर्रर😠्र ।

परमाणु : ओह सॉरी भूल गया था, आप चलिए मेरे साथ , मैं चल कर आपको छील दूंगा म मम मेरा मतलब आपके ये लम्बी लम्बी दाढ़ी मूछें छिल दूंगा और आपके छोटे कर दूंगा,बा।ल… सर के बाल छोटे कर दूंगा हीही😁, तब हो सकता है मैं आपको पहचान लूँ या मेरे साथियों में से कोई आपको पहचान ले, या हो सकता है आप खुद अपने आपको पहचान लें । ( 💭 वापस आकर डोगा को खोजूँगा 💭)

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परमाणु उस रहस्यमय व्यक्ति को लेकर चल पड़ा है युगम क्षेत्र की ओर और इधर शक्ति और तिरंगा भी बढ़ रहे हैं युगम क्षेत्र की ओर, अब आइये नागराज ध्रुव और बाकियों का हाल चाल जानते हैं ।
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[नागराज और बाकी सब अपने कक्ष में ]
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नागराज : { बेचैनी में इधर उधर टहलते हुए } (💭कौन सी है कौन सी है वो शक्ति जो मेरे ही अंदर है बुहुहु, 😰कैसे ढूँढू💭)

कोबी : की हुआ नगराज, ऐसे बेचैन होकर इधर उधर काई कु टहल रहे हो, जाओ टुआइलेट में, हीही😁।

नागराज : चुप कर बे गुर्रर्रर्रर्र, 😡 इधर मेरे भेजे का दही हो रखा है अब तू बकवास कर करके दही बड़ा मत बना वरना ठोक दूँगा ।

कोबी : हीही ठोके में तो हम एक्सपरट ह😁ैं ।

नागराज : भेजा मत खराब कर वरना, चड्ढी में नागफनी सर्प छोड़ दूँगा { कहकर नागराज नागफनी सर्प निकाल लेता है } बोल छोड़ूँ नागफनी सर्प तेरी चड्ढी में।

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तभी नागफनी सर्प नागराज के कान में फुसफुसाते हैं
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नागफनी सर्प : “ ना बाबा न हम तो नही जाएंगे इसकी चड्ढी में बुहुह😥ु”

दूसरा नगफनि सर्प : “हाँ हम नही जाएंगे वरना खो जाएंगे , हीही😁”

नागराज : “ क्या मतलब बे !”

नागफनी : कुछ नही कुछ नही हीहीही😁, पर हम नही जाएंगे इसकी चड्ढी में, बुहुहुहु गुर्रर्र 😡।

इंस्पेक्टर स्टील : क्या हुआ नागराज क्या खुस्फ़ुसा रहे हो ?

नागराज : आ….. हीही कुछ नही सोच रहा हूँ छोड़ दूं इस बेचारे को जानवर है बेचारा, और जानवर बेज़ुबान होते हैं और बेजुबानों पर ज़ुल्म नही करना चाहिए, पर कोबी अगर अगली बार तूने भेजा घुमाया तो मैं नही देखूंगा की बेज़ुबान है की गूंगा है, सीधे एक गुच्छा नागफनी सर्प डाल दूंगा तेरी चड्ढी में , सोच फिर तेरा क्या होगा हीही, तू ‛वो’ बन जाएगा ‛वो’ हीहीही😝।

इंस्पेक्टर स्टील : हीही 😜मैं समझ गया क्या बन जाएगा ।

कोबी : ( गड़ब)

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तभी ध्रुव वहां से उठता है और तुन्तुनाता हुआ टॉयलेट की तरफ जाने लगता है ।
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ध्रुव : ( 💭 इन सालों की बकवास सुनने से अच्छा है मैं जाकर टॉयलेट में बैठूं गुर्रर्रर्रर्र 😠😠💭)

इंस्पेक्टर स्टील : (ध्रुव की तरफ इशारा करते हुए) अब उसे 👉 क्या हुआ ?

नागराज : कल का वाला काढ़ा निकालने गया होगा, हीहीही😁। बुहुहु 😥मुझे समझ नही आ रहा उस शक्ति का पता कैसे लगाऊँ । हाँ….. ध्यान लगाता हूँ देव कालजयी को फिरसे बुलाता हूँ और पूछता हूं की वो कौन सी शक्ति है बुहुहु।

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नागराज फिरसे बैठ जाता है देव कालजयी का ध्यान लगाने के लिए ,
तभी उसके कानों में देवकालजयी का स्वर गूंजता है
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देव कालजयी : ○ वत्स नागराज फ़ालतू में अपना टाइम खाली पीली फ़ोकट मत करो हम नही आने वाले उस शक्ति का पता तुम्हे अपने से लगाना होगा हीही ○

नागराज : ( 💭 लेकिन मुझे कुछ समझ में नही आ रहा है, कौन सी है वो शक्ति ? 💭)

देव कालजयी : ○ तुम इतना रो रहे हो तो ठीक है हम तुम्हे हल्का सा सुराग दे दे रहे हैं । तुम मेरी और अपनी एक बहुत पुरानी मुलाक़ात को याद करो मैंने तुम्हे कुछ वरदान में दिया था बस उसी का पता लगाओ और तुम्हे कहीं भी आने जाने का द्वार मिल जायेगा । ○

नागराज : धन्यवाद 🙏 देव काल जयी, लेकिन मैं रोया कब था, देव कालजयी, कहाँ गएँ आवाज़ क्यों नही आ रही आपकी, देव कालजयी!…… आएं,….. नेटवर्क प्रॉब्लम हो गयी क्या हीही😁😁 ।

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तभी फिरसे देवता कालजयी का स्वर गूंजता है
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देव कालजयी : बकवास मत करो और तुरंत काम पर लग जाओ, हम तुम्हारी बातें भी सुन रहे हैं और पल पल तुम पर नज़र भी रखे हुए हैं।

नागराज : हीहीही ( गड़ब )

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नागराज सोचना शुरू कर देता है
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नागराज : (💭 क्या था वो वरदान…….. हाँ याद आ गया नागफनी सर्प, नागफनी सर्प मुझे वरदान में दिए थे देव कालजयी ने और कहा था समय आने पर तुम्हे इसकी शक्तियों का पता चलता जाएगा….. नागफनी सर्पों बाहर निकलो 💭)

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नागराज की कलाइयों से दो नागफनी सर्प सन्न से बाहर निकल आये
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नागराज : अबे अबे अबे… तुम्ही दोनों बार बार बाहर निकलते हो, हाँए……

नागफनी सर्प : वो क्या है जी हम दोनों जुड़वा भाई हैं इसलिए हम दोनों साथ साथ रहते हैं, और हम दोनों ही सारे नागफनी सर्पों में सबसे बुज़ुर्ग हैं इसलिए हम दोनों ही पहले बाहर आते हैं, हीहीही।😁😁 बोलो अब हमे क्यों बुलाया ?

नागराज : मुझे वो द्वार चाहिए जिससे मैं कहीं भी कभी भी जा सकूँ किसी भी काल में किसी भी आयाम में ।

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वो दोनों नागफनी सर्प आपस में फुसफुसाने लगते हैं ।
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नागफनी सर्प 1 : “आयीं यह क्या बकवास कर रहा है।”

नागफनी सर्प 2 : “हाँ हमे बढ़ई समझ रखा है क्या, द्वार कहाँ से लाकर दे हम ? बावलो वाली बात करता है ।”

नागराज : क्या बोला बे 😡

नागफनी सर्प 1 : कुछ नही जी हीहीही, लेकिन हमारे पास ऐसा कोई द्वार नही है जो आप कह रहे हो ।

नागराज : अबे लेकिन मुझे तो खुद देव कालजयी ने बताया है की तुमलोगों के पास ही वो शक्ति है जो मुझे किसी भी समय या काल में पहुंचा सकती है ।

नागफनी सर्प 2 : एक मिनट कहीं तुम ‛ जंतर मंतर काली कलन्तर खुल जा सिम सिम ’ की बात तो नही न कर रहे हो ? 🤔

नागराज : जंतर मन्तर काली कलन्तर खुल जा सिम सिम?

नागफनी सर्प 1 : हाँ यह हम नागफनी सर्पों की अत्यंत गुप्त शक्ति में से एक शक्ति होती है…

नागफनी सर्प 2 : हाँ और यह शक्ति फीमेल नागफनी सर्पों को ही मिलती है सिर्फ…..

नागफनी सर्प 1 : और उन्हें यह शक्ति पाने के लिए बहुत बड़ा बलिदान देना पड़ता है तब उन्हें यह शक्ति मिलती है…..

नागफनी सर्प 2 : और तब भी तुरंत नही मिलती है, एक कुंवारी फीमेल सर्प जब 1000 वर्ष की हो जाती है तब उसे यह शक्ति अचानक से ही मिल जाती है ।

नागराज : अभी तुम बात कर रहे थे की उन्हें कुछ बलिदान देना होता है, कैसा बलिदान ?

नागफनी सर्प 1 : हाँ वो शक्ति प्राप्त करने के लिए सबसे पहली शर्त है की, शादी नही कर सकती वो हीही, और न ही किसी से लव कर सकती है अगर मन में किसी के लिए प्यार😍😍 होगा तो उसे वो शक्ति नही मिलेगी…. मतलब दो दो बलिदान ।

नागफनी सर्प 2 : हाँ और एक तीसरा बलिदान भी है ।

नागफनी सर्प 1 : तीसरा कौन सा है बे ?😬

नागफनी सर्प 2 : वो बच्चे नही पैदा कर सकती ।

नागफनी सर्प 1 : अबे जब शादी होगी तब तो बच्चे होंगे गुर्रर्रर्रर्र 😡।

नागराज : अरे ऐसी बात नही है , बिना शादी के भी बच्चे पैदा हो सकते हैं , मेरा एक बच्चा खुद बिना शादी के पैदा हुआ है और दूसरे आयाम में पल रहा है हीहीही😁😁, अब तुम लोग कुछ अंट शंट मत सोचना गुर्रर्र हीही😁। हाँ तो बताओ क्या तुमलोगों में है कोई ऐसी महान नागफनी सर्पिणी जिसके पास वो शक्ति हो।

नागफनी सर्प 1 : शायद ही हो….

नागफनी सर्प 2 : हाँ क्योंकि यह शक्ति उस फीमेल नागफनी को 1000 वर्षों बाद प्राप्त होती है…

नागफनी सर्प 1 : और हमें नही लगता की तुम्हारे शरीर में हम जितने भी नागफनी सर्प हैं उनमे से कोई स्त्री नागफनी 1000 वर्षों की होगी….🤔

नागफनी सर्प 2 : और दूसरी शर्त है की जीवन भर कुंवारा रहना….😥

नागफनी सर्प 1 : और यही शर्त सबसे कठिन है…..😈

नागफनी सर्प 2 : और इसे पूरा शायद ही कोई माई की गुलाबी कर पाये……😁

नोट : जिस तरह लड़कों को माई का लाल कह कर संबोधित करते हैं उसी तरह लड़कियों के लिए माई की गुलाबी शब्द का प्रयोग करते हैं हीहीही😂 ।

नागफनी सर्प 1 : क्योंकि जवानी में सबका पैर फिसलता है चाहे लड़का हो या लड़की चाहे नाग हो या नागिन…😌

नागफनी सर्प 2 : चाहे शेर हो या शेरनी, बानर हो या बानरी….😌

नागफनी सर्प 1 : हाथी हो या हथिनी, गैंडा हो या गैंडनि..😌

नागफनी सर्प 2 : गाय हो या बैल, भैंस हो या भैंसा…😌

नागफनी सर्प 1 : ऊँट हो या ऊँटनी, जिराफ हो या जिराफनि…😌

नागफनी सर्प 2 : गधा हो या गधी, बकरा हो या बकरी…😁

नागफनी सर्प 1: कव्वा हो या कव्वी, मुर्गा हो या मुर्गी…😒

नागफनी सर्प 2 : गौरैया हो या गौरीयनि, शतुरमुर्ग हो या शुतुर्मुर्गनि…😌

नागफनी सर्प 1 : तोता हो या मैना…😌

नागफनी सर्प 2 : हाँ..नही मिलता इनको इनके बिना चैना…😋

नागफनी सर्प 1: हाँ.. चाहे शार्क हो या शारकिनी, ह्वेल हो या ह्वेलनि….😌

नागफनी सर्प 2 : पेंगुइन हो या पेंगुइननि, डॉल्फ़िन हो या डोल्फिंनि…😌

नागफनी सर्प 1 : ऑक्टोपस हो या ऑक्टपस्नि, ईल हो या इलनी…😦

नागफनी सर्प 2 : हाँ..एक दुसरे के बगैर यह हो जाते हैं छलनी छलनी…😊

नागफनी सर्प 1 : हाँ… चाहे डायनासोर हो या डायनासोरनी..😌

नागराज : अच्छा अच्छा हो गया गया, तुम लोग कुछ ज़्यादा ही जज़्बाती हो गए हो, जल, थल, नभ, तीनो के नाम जोड़ा चुके अब शांत हो जाओ ..😁

नागफनी सर्प 1 : अच्छा हुआ तुमने चुप करा दिया …

नागफनी सर्प 2 : हमारा मुंह दुखने लगा था बुहुहु 😨।

नागराज : अबे तुम दोनों अभी तक कहाँ थे ? पहले तो मैंने तुम लोगों को नही देखा।😒

नागफनी सर्प 1 : तुम्हारे शरीर में ही तो थे….

नागफनी सर्प 2 : पर कभी निकलते नही थे आलस के मारे ।😅

नागराज : अबे तुम दोनों तो मेरे मनोरंजन के लिए बढ़िया साधन साबित होंगे, आज से मैं जब बुलाऊँ तुम दोनों तुरंत आना। और अब मेरी समस्या का समाधान बताओ, क्या किसी भी फीमेल नागफनी सर्प के पास नही है ‛खुल जा सिम सिम’ वाली शक्ति, बुहुहु 😰कुछ करो तुम दोनों ।

नागफनी सर्प 1 : आप घबराएं नही….

नागफनी सर्प 2 : हम अभी बस्ती में जाकर पूछते हैं की कौन सी नागफनी सर्पिणी 1000 वर्ष की…..

नागफनी सर्प 1 : कन्या कंवारी है ।😜

नागराज : बस्ती ? 😳

नागफनी सर्प 2 : और नही तो क्या सर्फ तुम इंसानों की ही बस्ती होती है क्या….😠

नागफनी सर्प 1 : हम सबकी भी बस्ती है….😐

नागराज : अबे वो सब तो ठीक है । लेकिन मेरे शरीर में ?

नागफनी सर्प 2 : हाँ तुम्हारे शरीर में जितने भी सर्प या इच्छाधारी सर्प वास करते हैं….

नागफनी सर्प 1 : सबकी अलग अलग बस्तियां हैं , कुल मिलाकर समझ लो….

नागफनी सर्प 2 : पूरा देश है, नाम है….

नागफनी सर्प 1:सर्पस्तान..

नागराज : अबे मेरे शरीर में तुमलोगों ने देश भी बना रखा है, नाम भी रख रखा है, इससे पहले किसी ने मुझसे क्यों नही बताया ।

नागफनी सर्प 1 : ताकि तुम…..

नागफनी सर्प 2 : कर ना लेने लगो, हीहीही…..😁😁😁

नागराज : वो तो मैं अब लूँगा, जाओ कर के रूप में उस सर्पिणी का बता लगाओ जो 1000 वर्ष की हो चुकी है और अभी तक कंवारी है, हीहीही।😁😁

दोनों नागफनी सर्प एक साथ : हूँड़ी लो जी ।😁😁

*****
कहकर दोनों वापस नागराज के शरीर में घुस जाते हैं, तभी परमाणु की आवाज़ गूंजती है ।
*****

परमाणु : भाई लोग यह देखो मैं किसे लेकर आया हूँ ।😀

*******
ध्रुव भी तब तक टॉयलेट से बाहर आ जाता है, नागराज और बाकी सब परमानु को देखकर तो खुश हो जाते हैं लेकिन जैसे ही उसके साथ आये उस शख्स पर उनकी नज़र पड़ती है…..
********

कोबी : भूत भूत बचाओ परमाणु के पाछे भूत खड़ा है, 🤢

नागराज : यह किस नमूने को लेकर आया है, डोगा कहाँ है ?😠

ध्रुव स्टील एक साथ : परमाणु कौन है यह ? और तुम्हे कहाँ मिला ? 😯

परमाणु : यही तो जानना है दोस्तों, और यह जान्ने के लिए इनकी दाढ़ी और मूछें काटनी होंगी, तुम लोगों को जितने सवाल करने हैं बाद में करना पहले तो मुझे जो करना है वो मैं कर लूँ।

*********
परमाणु उस रहस्यमय व्यक्ति को टॉयलेट का रास्ता दिखाता है उस्के हाथों में रेज़र थमाता है नए कपडे थमाता है और चला आता है……

काफी देर बाद वो शख्स दाढ़ी छील कर और मूछ छोटा कर नहा धो कर बाहर निकलता है, और जैसे वो ब्रह्माण्ड रक्षको के सामने पहुँचता है, एक पल को तो सबके बक्के फट जाते हैं और फिर सब एक साथ बोल पड़ते हैं
*********

सभी एक साथ ज़ोर से : हवलदार बहादुर………..😮😲😲😵😧

क्रमशः

हिहिहिहि दोस्तों अब आने वाला है डबल मज़ा, यह स्टोरी कैसी लगी अपनी अपनी राये ज़रूर दीजियेगा ।

धन्यवाद 🙏

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Written By – Talha Faran for Comic Haveli

 

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12 Comments on “Sarvnayak Se Trast Part-6”

  1. Bahut badhiya story hai. Maza aa gaya padhkar, Hawaldar Bahadur ki entry dhamakedaar thi. Agle part ka intezaar hai.

  2. *रिव्यु : सर्वनायक से त्रस्त भाग 6*

    इस श्रृंखला की अच्छी बात कहे या खराब बात मगर ये शृंखला बिल्कुल सर्वनायक श्रृंखला जैसी ही है। क्योंकि अगर किसी ने इस श्रृंखला का कोई भी भाग अगर नही पढ़ा तो उसे इसका अगला भाग बिल्कुल भी समझ में नही आएगा । कारण ये है कि इस श्रृंखला के अंदर बहुत सी अलग अलग छोटी छोटी कहानिया चल रही है और सभी आपस मे जुड़ी हुई है इसलिए अगर किसी ने एक भी भाग मिस किया तो उसे आगे समझ नही आनी है । मगर शुक्र है तल्हा भाई का की वो हमें RC की तरह बहुत लंबा इंतजार नही करवाते है और जल्दी ही अगला भाग दे देते है। हमे बार बार पिछला भाग पढ़ने की आव्यशकता नही पड़ती।

    अब आते है इस भाग पर। इस भाग की शुरुआत डोगा की गाली देने से शुरू हुई। ‘ बम में बम’ डालने वाला संवाद बड़ा मज़ेदार लगा ।

    उसके बाद शक्ति और तिरंगा का दृश्य आता है। उन दोनों का संवाद बहुत ही बेहतरीन ढंग से लिखा गया था। पढ़ का आनंद आया।

    उस रहस्मयी शक़्स के बारे में भी जानने की उत्सुकता बढ़ गई है जो युगम क्षेत्र और युगम को बर्बाद करने की ठानी है।

    नागराज और नागफनी सर्पो का संवाद भी बहुत सहज ढंग से पेश किया गया है। नागफनी सर्पो का अत्यधिक बड़बड़ करना देखकर भी बहुत मज़ा आ रहा था।

    आखिर में हवलदार बहादुर की एंट्री से मज़ा दोगुना हो गया।

    सुधार के लिए में एक ही बात कहना चाहूंगा कि अगर हो सके तो इमोजी का प्रयोग ना करे। अपने शब्दों की संरचना और उनको पेश करने का ढंग ही इस तरह रक्खे की आपके जो मन मे जो चल रहा है पाठक उसको सजीव होता हुआ देख पाए। मेरे हिसाब से इमोजी का इस्तेमाल पाठकों के दिमाग को इस तरह बना देता है जिससे कि वो लेखक के लिखे हुए शब्दों के भाव को उन इमोजी के माध्यम से समझने लगते है। जो कि लेखक की मेहनत का अपमान होगा क्योंकि एक लेखक की शक्ति उसके लिखे गए शब्द ही होते है और उन शब्दों को समझाने के लिए किसी इमोजी की आवश्यकता नही होती है।

    ये मेरी व्यक्तिगत सोच है।

    बाकी अगले भाग का बेसब्री से इंतज़ार है।

    1. Buhuhu guruji itna lamba review mere liye. Aapka bahut bahut shukriya, guru hokar aapne apne shishya ki kahani ka review diya, Thank you guruji.

  3. कहानी बढ़ीया लगी। संवाद मजेदार थे। पढकर बहुत आनंद आ रहा है। हवलदार बहादुर की एंट्री ने तो कमाल कर दिया। आशा है लेखक ऐसे हि मजेदार कहानी लिखते रहेंगे और हमें गुदगुदाते रहेंगे। धन्यवाद

    1. धन्यवाद सूरज जी
      आपलोग बस इसी तरह मेरा साथ देते रहें मैं इससे भी अच्छी अच्छी कहानियां लिखकर देता रहूँगा ।

  4. This one is the most hilarious part in this series
    Nagfani sarpo ne to bas hasa hasa k gira diya
    Kaha se aate hain ye pagal saanp
    Baap re baap
    Ek chiz bas
    Jo baat dusro ko achhi lagi wahi mujhe khrab lagi
    Ye sarvanayak raj comics characters par hai
    Aur islye hawaldar bahadur ka aana mujhe thk nahi laga
    Kyun ki agar wo aayega to fir sabko lana padega
    Jo ki is kahani ka maza khrab kar dega warna baki characters k sath nainsafi hogi
    Aur talha ji to hmesha ki tarah kalam ka prayog kapil sharma jaise karte hain
    Bahut hi behatreen

    1. Bahut bahut dhnywàd pradip burnwal ji, air main aapko yeh btaa doon ki kisi me saath koi nainsaafi nhi hone waali hai. Aap aglaa part padhenge to aapko bahut kuch maloom chalega .

  5. hehehehehe……. is part mein to bahot ache punch lines h …… yh ab tk ki best part lagi mjhe is story ki……. aur isme Hawaldar bahadur ki b entry ho gyi…. ab mene kbhi RC k alawa kisi b purani comics ko nhi pdha to main is character ko nhi jaanta pr aapke story se kuch jankari to mil hi jayegi.. bahot maza aaya…

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