Sarvnayak Se Trast Part 7

श्रृंखला : सर्वनायक से त्रस्त ( पार्ट 7 )

【काल】
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【 प्रथम अध्याय◆तिरंगा की वापसी】

सभी सुपर हीरोज़ हवलदार बहादुर को देखकर हैरानी के समुद्र में गोते लगा रहे थे उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नही हो रहा था वो शख्स जो बरसों पहले न जाने कहाँ गायब हो गया था किसी को क्या पता था की वो इस आयाम में पड़ा है

ध्रुव : क क क्या आप सचमुच हवलदार बहादुर ही हैं न ?

नागराज : तुझे क्या दिख रहा है ?

ध्रुव : हव….

तभी हवलदार बहादुर बीच में ही बोल पड़े

हवलदार बहादुर : ओये तुम लोग कौन हो और मुझे कैसे जानते हो ।

कोबी : हम नही जानत तुमको…

इंस्पेक्टर स्टील कोबी की बात काटता है

स्टील : मैं पहचानता हूँ आपको आप हवलदार बहादुर ही हैं ।

परमाणु : मुझे पहले ही शक ही हो गया था जब आपने अपना डायलॉग भींपड़ी बजा दूंगा बोला था ।

हवलदार बहादुर : अबे तो इसमें शक होने वाली कौनसी बात है l

परमाणु : अजी आपको कुछ भी नही याद है क्या…..

तभी कोबी बीच में कूदता है

कोबी : एक मनिट एक मनिट, कौनो हमहू के बतइये इ माजरा कया है ? हमको अभी तक समझ न आयो ।

स्टील : अबे तू समझकर करेगा क्या! और हाँ मनिट नही मिनट होता है गुर्रर्र ।

कोबी : अरे वही, तै समझ गए न ?

ध्रुव : तै ???

परमाणु : अबे कोबी अपनी लैंग्वेज सुधारता क्यों नही तू ?

कोबी : लैंगुएज ऊ का है ? हमरे पास तो है नही तो हम सुधारेंगे कैसे ? हीही ।

परमाणु अपना माथा पीट लेता है

नागराज : अबे यह जानवर है साला- नही सुधरने वाला ।

स्टील : वाह वाह क्या अर्ज़ किया है जनाब ।

नागराज : शुक्रिया शुक्रिया ।

परमाणु : अब क्या शायरबाज़ी शुरु करनी है गुर्र ?

ध्रुव : अरे हाँ शायरी से याद आया!―शक्ति-अभी तक लौटी नही तिरंगा को लेकर ?

तभी वहां शक्ति और तिरंगा दाखिल होते हैं

परमाणु : तिरंगा! शक्ति!

ध्रुव : वाह बड़ी लम्बी उम्र है ।

और फिर एक एक करके सबके बुक्के फट गए तिरंगा को देखकर, सब हैरान भी हुए और खुश भी हुए―और―तभी नागराज तिरंगा पर कूद पड़ा

●प्रथम अध्याय समाप्त●

【द्वितीय अध्याय◆रहस्य】

नागराज : ( गुस्से में ) इधर आ बे शायरी की दुकान खोपचे में आ तू, साले पूरी बेइज़्ज़ती करवा के रख दी तूने मेरी गुर्रर्र-छोड़ूंगा-नही आज तुझे ।

नागराज तिरंगा को खींचने लगा

कोबी : छोड़ दौ नागराज, फट जावेगी फट जावेगी।

नागराज एक पल को रुकता है और कोबी की तरफ पलटता है

नागराज : अबे क्या फट जायेगी बे ?

लेकिन परमाणु बीच में बोल पड़ता है

परमाणु : हीही―यह―कहना चाह रहा है की-छोड़ दो तिरंगा को वरना उसकी पोशाक फट जायेगी हीहीही।

कोबी : हाँ उहे ।

नागराज : साले की बत्तीसी बाहर करके ही छोड़ूंगा ।

कहकर नागराज एक बार फिरसे तिरंगा को हिलाने लगता है, उधर हवलदार जी सारा तमाशा टुकुर टुकुर देख रहे थे-अब सब उन्हें भूल गए थे―आज ऐसा लग रहा था की नागराज तिरंगा को एक रंग में रंगकर ही छोड़ेगा लाल रंग मे-मगर-तभी शक्ति बीच में आ गयी

शक्ति : ( तिरंगा को छुड़ाते हुए ) बस करो नागराज, आते ही बेचारे के ऊपर पिल पड़े-अरे-पहले इससे पूछो तो की आखिर हुआ क्या था ?

और फिर शक्ति बाकियों की तरफ पलटती है

शक्ति : और तुम लोग लड़ाई छुड़ाने के बजाए तमाशा देख रहे हो ?

कोबी : तो अउर का करे, साला हम्मन के बेइज्जती करवाये दिहिस है ससुरा गुर्रर्र।

तिरंगा : ( कोबी को घूरकर ) तेरे पास इज़्ज़त है की कहाँ बे साले दो कौड़ी के !

कोबी : देखबे हमसे काईदे में रहिबे ।

तिरंगा : अबे कायदा गया बाबा जी की धोती में ।

नागराज : अबे मेरा डायलॉग चोरी कर लिया, फोड़ दे कोबी-साले का सर।

कोबी : मैं तो वैसे भी साले को मारने वाला था, बहुत दिनों से खुजली हो रही है-हाथ में ।

कोबी फुल खुन्दक में आ चुका था

नोट : जब कोबी गुस्से में होता है-तो-उसके मुंह से हर वाक़्य शुद्ध निकलता है ।

कोबी : हे भेड़िया देवता मदद!

कोबी के हाथ में उसकी प्रलयंकारी गदा आ गयी

कोबी : आज नही छोड़ूंगा-गदा मार्के सर फोड़ दूंगा ।

स्टील बुदबुदाता है

स्टील : “साला जानवर गुस्से में होता है तो सबकुछ सही निकलता है मुंह से”

तिरंगा : छू सके हमे तेरी गदा में इतना दम नही-आज दिखा देंगे हम भी किसी से कम नही

कहकर तिरंगा अपना न्याय स्तम्भ निकाल लेता है, और स्लो मोशन में नचाने लगता है

कोबी : तेरा यह डंडा मेरा कुछ नही बिगाड़ सकता ।

तिरंगा : बेटा इसी डंडे ने जिस जिस को डंडा किया वो सब डंडे हो गए।

कोबी अपनी गर्दन चटकाता हुआ आगे बढ़ा

कोबी : चल देखते हैं-किसके-किस्मे है दम।

शक्ति ध्रुव की तरफ लपकती है

शक्ति : ध्रुव तुम कुछ क्यों नही कर रहे हो-यहाँ-रणक्षेत्र बनने जा रहा है-जल्दी कुछ करो ।

ध्रुव : हाँ कुछ् – करना ही पड़ेगा-अपनी आँखें बंद करलो ।

कहकर ध्रुव अपनी बेल्ट में से वो ख़ास तरह का फ्लेयर निकालता है-जो उसकी बहन श्वेता ने ख़ास उसके लिए बनाया था, यह एक ख़ास फ्लेयर था जिसे दिन में भी अगर किसी की आँखों के सामने फोड़ दिया जाए तो उसकी आँखें कुछ मिनट्स के लिए अंधी हो सकती हैं-ध्रुव ने हवलदार जी को भी अपनी तरफ खींच लिया और फिर तीनो ने अपनी आँखें बंद करली-और तुरन्त ही ध्रुव ने वो सिग्नल फ्लेयर वहीँ फोड़ दिया-और-सबके सब तुरन्त ही अंधे हो गए-इंस्पेक्टर स्टील-नागराज-परमाणु-तिरंगा-कोबी

स्टील : ध्रुव क्या फोड़ दिया मुझे तो बता दिया होता कम से कम ।

ध्रुव : क्या?? मुझे लगा तुम्हारी आँखों पर इसका असर नही होगा क्योंकि-तुम्हारी आँखें इंसानी आँखें नही हैं ।

स्टील : नही मुझे भी सच में कुछ नही दिख रहा !!

ध्रुव : शिट्ट-मैं-भूल गया था की यह श्वेता जीनियस का बनाया हुआ फ्लेयर है ।

तभी तिरंगा की चीख गूंजी

तिरंगा : अबे दबा दिया दबा दिया बुहुहु

नागराज : परमाणु उतरियो मत उसके ऊपर से!

परमाणु : किसके ऊपर से?

नागराज : उस तीन रंग के सियार के ऊपर से ।

परमाणु : अच्छा तो मैं इसी के ऊपर हूँ क्या? मुझे लगा मैं तुम्हारे ऊपर हूँ ।

नागराज : गुर्रर्रर्रर्र

शक्ति ध्रुव के कान में फुसफुसाती है

शक्ति: “यह नागराज-के-ऊपर तुम्हारे फ्लेयर्स का असर नही हुआ क्या”

ध्रुव : “अरे वो अपनी सर्प इन्द्रियों से देख सकता है”

शक्ति : अरे हाँ भूल गयी थी ।

कोबी हाथ इधर उधर नचाता हुआ

कोबी : कहाँ है कहाँ है? वो तीन रंगो वाला?

और तभी हाथ नचाता हुआ वह स्टील के पास पहुँच गया और फिर उसकी गदा सीधे स्टील के शरीर से टकराई-स्टील बिलबिला उठा

स्टील : बुहुहु-गुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर-किसने ठोका बे-हाथ तोड़कर लात में पकड़ा दूंगा।

कोबी : तू बीच में क्यों आया बे-बीच में आएगा तो लगेगी नही गुर्रर्रर।

स्टील : अबे मैं तो एक जगह खड़ा हूँ ।

कोबी : तेरे कहने का मतलब है मैं तेरे पास आया और तुझे मारा ?

स्टील : और नही तो क्या!

कोबी: रुक बताता हूँ तुझे भी फोड़ दूंगा मैं,किधर है तू?

कहकर कोबी गदा नचाता हुआ आगे बढ़ने लगा-ध्रुव ने तुरन्त ही स्टील को अपनी तरफ खींच लिया-और कोबी ने अपनी गदा चलाई जोकि उस दीवार पर जा लगी जिससे सट कर स्टील खड़ा था-और उसी दीवार के पीछे भूतकालीन टीम का कक्ष था-जैसे ही कोबी की गदा वहाँ लगी-दीवार फूट गयी और एक बहुत बड़ा छेद हो गया

नागराज : अबे क्या गिरा क्या गिरा?

अब तक सबकी रौशनी वापस आ गयी थी-नागराज और बाकी सब दौड़कर वहां पहुंचे परमाणु भी तिरंगा के ऊपर से उतर गया-उधर दीवार में एक बड़ा छेद हो गया था-कोबी बुक्का फाड़े उधर देख रहा था बाकी सब भी देखने लगे-उसपार भोकाल और उसकी टीम गुस्से में खड़ी थी-कोबी खिसिया गया था इसलिए उसका गुस्सा अब उतर चुका था

कोबी : ( दांत दिखाते हुए ) और भाऊ लोगन कया हाल बाटे हीही-ई-ई हम नही किया हूँ-ई-ई इस टीन के डब्ब्वा का काम है।

कोबी स्टील की तरफ इशारा करता है

भोकाल : ( उसपार से ) लेकिन गदा तो तेरे हाथ में थमी है-रुक जा आ रहा हूँ अभी ।

कोबी : बुहु महागरू शिष के ऊपर हाथ उठाव गै ।

थोड़ी ही देर में भोकाल उनके कक्ष में आ गया

भोकाल : अब बताओ किसने किया यह काम ।

तब तक तिरंगा भी थोडा सम्भल गया-वो कराहता हुआ उठा-सब उसकी तरफ देखने लगे

तिरंगा : मम्मी!! परमाणु के बच्चे पीठ तोड़ दी तूने मेरी गुर्रर्र ।

तभी तिरंगा की नज़र भोकाल की नज़रों से टकराई

तिरंगा : तू!!

भोकाल : (💭अरे बाप यह वापस कैसे आ गया💭) अच्छा भाईलोग मैं चलता हूँ-कोई बात नही दीवार तोड़ी वैसे भी दीवार मेरी नही थी ।

कहकर भोकाल जल्दी से फूट लिया

ध्रुव : यह क्या हुआ कुछ समझ नही आया ।

नागराज : हाँ साला आया तो था पूरी आस्तीन वास्तीन मोड़कर-मैं तो चाह रहा था साला एक हाथ उठाये उसकी बाद बताऊँ मैं ।

शक्ति : हाँ लेकिन तिरंगा को देखते ही पता नही क्यों यहाँ से कट लिया।

स्टील : हाँ यार-तिरंगा-अब तुम ही बताओ माजरा क्या है ?

तिरंगा : बताता हूँ ।

कहकर तिरंगा उनके पास आ गया, और तभी उसकी नज़र हवलदार बहादुर पर पड़ी जिन्हें सब भूल चुके थे

तिरंगा : लेकिन पहले तुम लोग यह बताओ की यह महाशय कौन ।

शक्ति : अरे हाँ मैं भी पूछना भूल गयी,इनकी शक्ल तो जानी पहचानी सी लगती है ।

नागराज : यह हवलदार बहादुर जी हैं ।

शक्ति : क्या!! हवलदार बहादुर!!!-लेकिन-यह-यह यहां कैसे पहुंचे ।

परमाणु : यह बहुत लंबी कहानी है, पहले तिरंगा तुम अपनी दास्ताँ बताओ इनके बारे में हम बाद में पता करेंगे-इतने सारे रहस्य जुड़ते चले जा रहे हैं बुहु-अभी-एक खुलता नही है की दूसरा रहस्य सामने आ जाता है ।

●द्वितीय अध्याय समाप्त●

तृतीय अध्याय◆राहस्योदघाटन

तिरंगा : ठीक है मैं बताना शुरू करता है ।

और फिर सब लाइन बना कर बैठ जाते हैं-और फिर तिरंगा शुरू हो जाता है

तिरंगा : भाईलोग मैं कहता था न तुमसे यह युगम संजय सर से मिलता है संजय सर से मिलता है मगर तुम लोग यकीन नही करते थे अब सुनो मेरी बात―दो दिन पहले जब मैं रात को अपनी लघु शंका के समाधान के लिए उठा तो जैसे ही समाधान करके टॉयलेट से बाहर निकल-मैंने सोचा-लाओ ज़रा सा बाहर टहल लूँ-क्योंकि-उस रात मुझे नींद नही आ रही थी-और फिर-मैं बाहर निकल आया, थोड़ी ही देर में मैं युगम क्षेत्र में पहुँच गया वहां मैंने देखा की युगम जी अपने सिंहासन पर बैठे हुए हैं और कुछ बड़बड़ा रहे हैं-उन्हें देखते ही मैं छुप गया,और उनकी बातें सुनने लगा, वो कह रहे थे
‘अरे वो सर्वनायक के अगले पार्ट का क्या हुआ जल्दी स्टोरी लिखो मेरे भाई फैन्स ने नाक में दम कर रखा है,’हाँ हाँ, अरे इतना लम्बा टाइम ? क्या कहा! अभी आर्टवर्क पूरा नही हुआ गुर्रर्रर्रर्र जल्दी करो, उस सिरीज़ की वजह से रातों को चैन से सो नही पा रहा हूँ रात भर उल्लू बना रहता हूँ, ठीक है हाँ हाँ ठीक है कुछ भी करो मगर जल्दी, और वो सर्वनायक विस्तार श्रृंखला ? क्या कहा! उसके ऊपर अभी काम ही नही शुरू किया, बुहुहु, और वो एन्ड गेम कब तक मिलेगी फैन्स को, ‘नाक में धनिया बो रखा है फैन्स ने, कह रहे हैं डेड एन्ड आने में इतना टाइम लगा दिया, अब क्या एन्ड गेम एक साल बाद देंगे-हाँ-हाँ-क्या? अभी एक साल लग जायेंगे, बुहुहु, फैन्स की धमकियां मिल रही हैं की Rc पर हल्ला बोल देंगे, सर चकरा रहा है मेरा जी कर रहा है सर यहीं पटक कर फोड़ दूं गुर्रर्र बुहुहु’

तिरंगा एक पल को रुकता है

तिरंगा : और फिर इतना बोलते ही युगम गायब हो गया, मैं भौचक्का हो गया और यहाँ वहां ताकने लगा लेकिन कुछ न दिखा, फिर मैं कुछ दूर तक यहाँ वहां दौड़ा मगर मुझे कोई नही दिखा-और-तभी-वो भोकाल का बच्चा मुझे दिखा-एक तरफ से आता हुआ-मैंने पूछा की क्या तुमने युगम को देखा कहीं ? उसने मुझसे कहा-हाँ हाँ मैंने देखा है युगम को वो उस तरफ गया है, उसने एक तरफ इशारा करके कहा-तुम जल्दी दौड़ते हुए जाओ वरना युगम दूर निकल जायेगा, मैंने उसकी बात मान ली और उस ओर दौड़ लगा दी मैं दौड़ता ही जा रहा था की अचानक से एक गड्ढा पड़ा जिसे ऊपर से किसी ने घास फूस से ढाँक रखा था मैं उसी में गिर पड़ा-और-जब मैं उसमे गिरा तब तब मेरी जासूसी खोपड़ी चालु हुई और फिर मुझे मामला समझ आ गया। उस गड्ढे को घास फूस से भोकाल ने ढाँक रखा था, मैं सबके झूट को तुरन्त पकड़ लेता हूँ पर भोकाल का झूट मैं नही पकड़ सका उसने झूठ बोला था की युगम उस तरफ गया जबकि युगम को सिर्फ मैंने देखा था-लेकिन फिर क्या हो सकता था-मैं तो गिर ही चुका था गड्ढे में, मैं दो दिन तक उस गड्ढे में गिरा चिल्लाता रहा मगर कोई मेरी मदद को न आया-और-आज शक्ति वहाँ पहुँच गयी और मुझे बाहर निकाला ।

तिरंगा ने ज़ोरदार सांस ली,सबके बुक्के फटे हुए थे,तभी परमाणु ने ख़ामोशी तोड़ी

परमाणु : तेरी जासूसी खोपड़ी गड्ढे में गिरने से पहले काम नही कर रही थी क्या बे??

तिरंगा : वही तो यार-वो सब देखकर मैं भौचक्का हो गया था और मेरी जासूसी खोपड़ी धोखा खा गयी।

स्टील : इसका मतलब उस भोकाल के बच्चे ने वो गड्ढा खोद रखा था तेरे लिए।

तिरंगा : नही वहां ऐसे ही बड़े बड़े बहुत सारे गड्ढे थे, बस उनमे से एक को भोकाल ने ढाँक दिया था ।

ध्रुव : और उसने हम्मे से किसी को उसमे गिराने के लिए ऐसा किया होगा और उसी वक़्त उसे तुम मिल गए और उसने तुम्हे ही उसमे गिरा दिया ।

तिरंगा : Exactly

नागराज : इसीलिए-इसीलिए-वो हम सब के पीछे पड़ा था की मुझे तिरंगा से मिलवाओ मुझे तिरंगा से मिलवाओ क्योंकि वो जानता था की हम झूठ बोल रहे हैं तिरंगा को तो खुद उसी ने गड्ढे में गिरा दिया था ।

स्टील : अरे वाह नागराज तुम्हारा भी दिमाग चल निकला है ।

नागराज : अबे टीन का डिब्बा समझ रखा है क्या अपनी तरह गुर्रर्र!!

हवलदार बहादुर : क्या कोई मुझे भी समझा सकता है की यहाँ क्या हो रहा है? यह कौन सी जगह है? मैं कहाँ हूँ?

ध्रुव : मैं बतलाता हूँ ।

कहकर ध्रुव पहले सबका परिचय देता है और उनके बारे में बताता है और फिर पृथ्वी से यहाँ तक कैसे पहुंचे वे सब और फिर कोबी और डोगा की लड़ाई से लेकर अबतक का सबकुछ बता देता है-सबकुछ सुनने के बाद

हवलदार बहादुर : इसका मतलब डोगा नाम का शख्स अभी भी गायब है !

अचानक नागराज को याद आया

नागराज : अरे हाँ! परमाणु तुझे डोगा नही मिला क्या?

परमाणु : मैं गया तो था डोगा को ढूँढने-पर-उसे ढूंढते ढूंढते मुझे हवलदार बहादुर जी मिल गए, मैं फिरसे जाता हूँ उसे ढूँढने देखता हूँ-आखिर-कहाँ गया डोगा।

कहकर परमाणु एक बार फिरसे निकल जाता है, डोगा को ढूँढने

नागराज : और अब हम चलते हैं युगम के पास उस भोकाल की करनी की पोल पट्टी खोलने।

सभी एक साथ : हाँ चलो ।

●तृतीय अध्याय समाप्त●

【चतुर्थ अध्याय◆युगम का हमशक्ल】

कुछ ही देर में वो सभी वहां मौजूद थे और तिरंगा युगम के सामने भोकाल की पोल पट्टी खोल रहा था भोकाल और उसकी टीम को भी युगम ने वहां बुला लिया था भोकाल तो बार बार अपना चेहरा छुपा रहा था और नागराज उतना ही उसे घूर घूर कर ताक रहा था और मन ही मन खुश हो रहा था-तिरंगा ने हर एक घटना युगम को बता दी-युगम की बातें सुनने वाली घटना भी उसने नही छुपाई-सारी बात सुनने के बाद

युगम : ह्म्म्म, तो भोकाल यह आपकी करनी थी-ज़रा हमें बताएंगे आपने ऐसा क्यों किया?

भोकाल : ( खिसियाई आवाज़ में ) मैंने ऐसा अपनी टीम को जिताने के लिये किया, अपने युग को जिताने के लिए किया मैंने सोचा की अगर मैं नागराज की टीम में से किसी को अगर कहीं गायब कर दूं तो सब यही समझेंगे की वो कहीं भाग गया है इस तरह नागराज की टीम कायर साबित हो जायेगी, मैं तो नागराज को ही उस गड्ढे में गिराने वाला था, न रहता कैप्टेन न जीतती टीम, पर उसे गिराना बेकार था क्योंकि वो अपने सांपो की मदद से बाहर निकल आता, यही सोचता हुआ मैं आ रहा था की किसी उस गड्ढे में गिराऊँ तभी मुझे तिरंगा दिख गया और फिर मैंने इसे ही उसमे गिरा दिया लेकिन मुझे नही पता थ की यह भी बाहर निकल आएगा।

शक्ति : इसे मैं बाहर निकाल कर लाइ हूँ ।

भोकाल अपना सर झुका लेता है उसके टीम के खिलाड़ी भी अब उसकी बुराई कर रहे थे वो सब आपस में बुदबुदा रहे थे

गोजो : इस साले को कैप्टेन बनाना ही नही चाहिए था मुझे बनाना चाहिए था गुर्रर्रर्रर्र।

कोबी भी बोल उठा

कोबी : क महागुरु हम सोचले भी नाही रहली की तू इतना गिर जयबा ।

युगम ने फैसला सुनाया

युगम : सारी बात जान्ने के बाद, मैं भोकाल की टीम से दो points काटकर नागराज की टीम को देता हूँ-एक पॉइंट इसलिए काटा की भोकाल ने जो भी किया गलत किया-और दूसरा पॉइंट भोकाल के झूठ बोलने की वजह से काटा ।

और फिर नागराज धीरे धीरे चलता हुआ भोकाल के पास आया-पीछे पीछे ध्रुव भी पहुच गया, नागराज भोकाल के पास पहुंचकर बुदबुदाया

नागराज : क्यों बे क्या बोल रहा था तू-मैं और मेरी टीम मक्कार है झूठी है तू क्या है बे साले भूतकालिए, बोल मारू क्या एक ज़ोरदार घूँसा तेरे थोबड़े पर।

ध्रुव नागराज का हाथ पकड़ लेता है

ध्रुव : नही नागराज जाने दो हाथ मत उठाना वरना युगम ने हमें जो दो पॉइंट्स दिए हैं वो छिन जायेंगे ।

नागराज वापस चला आया-तभी शक्ति ने युगम से एक सवाल कर डाला

शक्ति : युगम जी आपने हमें यह नही बताया की आप उस रात क्या बड़बड़ा रहे थे और फिर अचानक से कहाँ गायब हो गए?

युगम : अब तुम लोगों को जानना ही है तो सुनो, पृथ्वी पर-जहाँ तुम लोग रहते हो वहीँ एक दिल्ली नामक शहर में एक बन्दा है संजय गुप्ता नाम है उसका – राजकॉमिक्स का संस्थापक- उसी का हाल चाल जानने गया था म , उसकी शक्ल मेरी शक्ल से मिलती जुलती है, उसे मैंने अपना भाई माना हुआ है इस घड़ी बेचारा बहुत परेशान रहता है, राजकॉमिक्स बड़ी मुश्किलों से फिरसे उठकर खड़ी हुई है- इस वक़्त बहुत परेशानियां चल रही हैं बेचारे की-ऊपर से कुछ फैन्स ऐसे हैं जिन्होंने डंडा कर रखा है की जल्दी कॉमिक्स लाओ जल्दी कॉमिक्स लाओ-वो उनकी परेशानियों को समझने की कोशिश ही नही कर रहे हैं-महंगाई बढ़ गयी है-ऊपर से Gst-सब चीज़ों ने एकदम से तोड़ कर रख दिया है,फिर भी राजकोमिक्स अपने फैन्स के लिए कॉमिक्स निकाल रही है,और कुछ फैन्स फिर भी उनकी मजबूरियों को नही समझ रहे, उन्हें फिरभी लगता है की Rc धोखेबाज़ है
ऐसे वक़्त में सभी फैन्स को उनका साथ देना चाहिए-उनकी हिम्मत बढ़ानी चाहिए-आज कल के लोग सिर्फ टीवी और मोबाइल से चिपक कर रह गए हैं-कोई कॉमिक्स को पूछता ही नही जबकि कॉमिक्स पढ़ने में जितना मज़ा आता उतना मज़ा मोबाइल और टीवी में नही आ सकता है-कॉमिक्स एक अनमोल धरोहर है जो शायद इतिहास बन गयी होती अगर राजकॉमिक्स वालों ने हिम्मत खो दी होती तो, लेकिन फिरभी वो लगे रहे और अब जाकर राजकॉमिक्स थोड़ा ऊंचाई पर आई है कुछ फैन्स ऐसे भी हैं जिन्होंने कदम कदम पर Rc का साथ दिया वरना शायद Rc भी इतिहास बन गयी होती-वहीँ कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने कॉमिक्स की पायरेसी शुरू कर दी और कुछ अभी भी कर रहे हैं-और इसी चीज़ की वजह से कॉमिक्स जगत को सबसे ज़्यादा नुक्सान हुआ, लोगों को समझना होगा, उन्हें कॉमिक्स जैसे अनमोल जगत को बचाना होगा-क्या रखा है मोबाइल में क्या रखा वीडियो गेम्स में क्या रखा है टीवी में? कुछ नही रखा, नुक्सान के सिवा-बच्चे दिन भर मोबाइल से लगे रहते हैं और इसी वजह से उनकी पढ़ाई उनकी दिमागी हालत सबकुछ खराब हो जाती है-जबकी कॉमिक्स- कॉमिक्स एक स्वस्थ मनोरंजन की चीज़ है कॉमिक्स से कोई नुक्सान बल्कि कॉमिक्स में कुछ नॉलेज की बातें भी होती है, कॉमिक्स से बहुत से ज्ञान भी प्राप्त होते हैं, हर शख्स को यह बात समझनी होगी और कॉमिक्स जगत को डूबने से बचाना होगा ।

सभी सुपर हीरोज़ युगम की बातें बड़े ध्यान से सुन रहे थे-युगम की बात खत्म होते ही

नागराज : बहुत सही बात आपने कही है ।

ध्रुव : हाँ आज हम और हमारा अस्तित्व बहुत कठिन परिस्थितियों से गुज़र रहा है…

शक्ति और तिरंगा: ऐसे में सबको हमारा साथ देना होगा..

स्टील : कॉमिक्स जगत को डूबने से बचाना होगा…

कोबी : और म्हारे जैसे अनोखे सुपर हीरो को खोने से..

कोबी की बात पर सब हंसने लगे, और फिर सभी सुपर हीरोज़ अपने कक्ष में आ गए

ध्रुव : ( इधर उधर टहलता हुआ ) युगम ने सच में जो बात कही वो चिंता का विषय बनी हुई है ।

नागराज : मुझे तो सोचकर भी डर लगता है, क्या होगा अगर कभी हम दुनिया से विलुप्त हो गए ।

स्टील : ( हवलदार बहादुर की तरफ इशारा करके)हवलदार बहादुर जी की तरह ।

शक्ति : आज भले ही हवलदार बहादुर जी की कॉमिक्स नही आती हैं, लेकिन फिर भी कोई इन्हें भूला नही है आज भी जब इनका ज़िक्र होता है तो लोगों की आँखों में चमक और चेहरे पर मुस्कराहट आ जाती है, पुराने फैन्स के दिलों में यह आज भी ज़िंदा हैं ।

ध्रुव : घबराओ मत दोस्तों अभी हमारे ऐसे बहुत सारे फैन्स ज़िंदा है और जब तक वो ज़िंदा है तब तक हम ज़िंदा रहेंगे ।

स्टील : चिल्ल मारो यार सब टेंशन लेने की कोई ज़रूरत नही ।

तिरंगा : हाँ- तलहा फरान-दिव्यांशु त्रिपाठी-संवर्त हर्षित-यह लोग हैं न और आये दिन हमारी एक से एक कहानियाँ लिखते हैं, ऐसे फैन्स के होते हुए कैसी टेंशन ।

कोबी : अउर सबसे बड़ी बात, आपन कॉमिक हवेलीयो अभी ज़िंदा बाटे ।

स्टील : और सुना है एक आकाश पाठक नाम का लड़का नागराज और ध्रुव की पूरी नागभारत लिख रहा है ।

नागराज : वाह वाह , बस यह सब सुनकर मेरी टेंशन दूर हो गयी ।

●चतुर्थ अध्याय समाप्त●

【पंचम अध्याय◆ काल 】

परमाणु डोगा की खोज में उड़ता हुआ एक दुसरे ग्रह पर आकर उतरा है-इस ग्रह पर भी चारों तरफ सन्नाटा है-और ढेर सारे छोटे छोटे गोले उड़ रहे हैं जिनमे से हल्की हल्की रौशनी निकल रही है और इनकी वजह से ही उस गृह पर हल्की रौशनी फैली हुई है

परमाणु : यहाँ भी अँधेरे ही अन्धेरा है, क्या डोगा यहाँ गिरा होगा? आखिर कैसे खोजूँगा मैं डोगा को?

परमाणु फिर डोगा को पुकारना शुरू करता है

परमाणु : ( चिल्ला कर ) डोगा !! डोगा….डोगा कहाँ हो तुम,

उसी ग्रह पर परमाणु जहाँ था वहां से बहुत दूर एक स्थान पर,कोई शख्स है जो साये की तरह काला है और चलता हुआ कहीं जा रहा है, अचानक वो शख्स परमाणु की आवाज़ पर चौनकता है

#### : ( डरावनी आवाज़ ) लप लप लप लप लप-इंसान की आवाज़-इंसान की आवाज़-एक और इंसान।

वो हैरान भी होता है और खुश भी होता है, वो तुरन्त ही उड़ता हुआ उस ओर बढ़ने लगता है जहाँ से परमाणु आवाज़ दे रहा था,कुछ ही देर में वो वहां पहुँच गया और अदृश्य हो गया, और अपनी डरावनी आवाज़ में बोला

#### : लप लप लप लप लप- कौन है रे तू मानव? यहाँ कैसे पहुंचा ।

परमाणु : ( चौंककर ) कौन है सामने आओ ।

#### : लप लप लप लप लप-अगर मैं सामने आ गया तो तू परलोक सिधार जायेगा।

परमाणु : अबे कौन है सामने आकर बात कर आँख से आँख मिलाकर ।

#### : लप लप लप लप लप- ले आ जाता हूँ मैं तेरे सामने ।

कहकर वो एकदम से परमाणु के सामने प्रकट हुआ, वो सच में इतना डरावना था की अगर एक आम इंसान उसे साइड से भी देख लेता तो मृत्यु को प्राप्त हो जाता, मगर वो तो परमाणु था जो उसे देखकर सिर्फ चक्राकार रह गया,उस रहस्यमय शख्स ने तुरन्त परमाणु का गला पकड़ लिया

#### : हा हा हा चकरा गया न देखकर ।

परमाणु : अक्… कौन हो तुम..कक क्या चाहते हो ।

#### : कौन हूँ मैं? मेरे ग्रह पर आकर मुझी से पूछता है कौन हूँ मैं , तू बता तू कौन, तुच्छ मानव ।

परमाणु : ( अपना गला छुड़ाने की कोशिश करते हुए ) मैं अपने एक दोस्त को ढूँढने आया हूँ ।

#### : लप लप लप लप लप, हा हा हा इसका मतलब वो मानव तेरा दोस्त था जिसे मैंने अभी अभी मारा है।

परमाणु : क्या तुमने अक्.. उसे मार दिया..

#### : हाँ कुत्ते जैसी शक्ल थी उसकी, उसे मैंने अभी अभी मौत के घाट पहुंचाया है।

इतना सुनते ही परमाणु की आँखों में शोले भड़कने लगे

परमाणु : बस बहुत हुआ अब तु देखे परमाणु प्रलय

कहकर परमाणु एक निर्देश देने वाली आवाज़ में बोला

परमाणु : ट्रांस्मिट ।

और इसी के साथ परमाणु ट्रांस्मिट हो गया

#### : अरे कहाँ, कहाँ गायब ।

परमाणु : मैं यहाँ हूँ ।

कहकर परमाणु ठीक उसके पीछे प्रकट हुआ अब परमाणु एक्शन टाइम में आ चुका था और जब परमाणु एक्शन में आता है तो वो बन जाता है भीम परमाणु, परमाणु ने तुरन्त टाइगर श्रॉफ स्टाइल में एक ज़ोरदार राउंड किक जमा दी उसके थोबड़े पर, वो शख्स लड़खड़ा गया, और इससे पहले की वो सम्भलता – परमाणु ने एक और फ्लाईंग किक मारी उसे और इस बार वो लड़खड़ा कर कुछ ज़्यादा ही दूर चला गया, वो शख्स चिल्लाता हुआ वापस पलटा और तुरन्त ही परमाणु ने एक बूमरैंग किक लगाई इस बार वो घूम कर कुछ दूर छटका, वो फिर उठकर खड़ा हुआ और जैसे ही पलटा परमाणु दौड़ता हुआ आया और उसके सीने पर पैर रखकर एक वॉलफ्लिप मारी और उसके थोबड़े पर किक जमाता हुआ वापस पलट गया-एक के बाद एक परमाणु ने उसके ऊपर ऐसी किकों की बारिश की थी यह सब इतना जल्दी जल्दी हुआ था की उस शख्स को सम्भलने का मौका नही मिल पाया था

परमाणु : बहुत हुआ अब तेरी जीवनलीला समाप्त करता हूँ ।

कहकर परमाणु थोडा ऊपर गया, और हवा में ही रूककर उसके ऊपर परमाणु छल्लों का वार करने लगा, और यहीं पर परमाणु गलती कर गया जिसका पता उसे कुछ ही देर में चल गया,क्योंकि वो जितने परमाणु छल्ले छोड़ता जा रहा था वो सभी उस रहस्यमय शख्स के शरीर में समाते जा रहे थे, और उसे कुछ भी नही हो रहा, अब परमाणु ने परमाणु छल्लों का वार रोकना चाहा मगर अब उसकी छाती से निकल रहे परमाणु छल्ले रुकने का नाम नही ले रहे थे, परमाणु चाह कर भी उन्हें नही रोक पा रहा था ऐसा लग रहा था जैसे वो शख्स खुद ही उन्हें खींच रहा था, थोड़ी ही देर बाद परमाणु ऊपर से नीचे आ गिरा

#### : लप लप लप लप लप- काफी शक्ति है रे तेरे में अब मुझे अपने शरीर में नयी ऊर्जा का संचार होता महसूस हो रहा है।

परमाणु अब ज़मीन पर गिर चुका था, उसकी सारी परमाणु पॉवर को वो शख्स आराम से सोख्ता जा रहा था कुछ ही देर में उसने सारी पॉवर सोख ली, फिर तुरन्त उसने परमाणु की कमर पे बन्धी बेल्ट खींच ली

#### : लप लप लप लप लप- हा हा हा तुच्छ मानव तेरी सारी शक्तियों का राज़ यह बेल्ट ही थी, जिसमे से मैंने सारी शक्ति अपने अंदर खींच ली है।

कहकर उस शख्स ने परमाणु कि बेल्ट को मसल कर चकनाचूर कर दिया,परमाणु अब पूरी तरह सक्तीहीन हो चुका था, परमाणु के मुंह से बड़ी मुश्किल से निकला

परमाणु : कक….अबे आखिर..त तू है कौन।

#### : ( गुस्से में ) रस्सी जल गयी पर बल न गया ।

कहकर उसने परमाणु की टांग पकड़ी और उसे उठाकर इस तरह इधर उधर पटकने लगा जैसे वो कोई बोरा हो, तीन चार बार पटकने के बाद जब उसने परमाणु को छोड़ा तो उसका पूरा शरीर लहूलुहान हो चुका था, और परमाणु मौत की नींद सो चुका था

#### : हा हा हा हा, लप लप लप लप लप, मैं हूँ काल काल कभी नही मरता-और अब मैं तैयार हूँ-युगम कहाँ है तू आ रहा हूँ मैं ।

●पंचम अध्याय समाप्त●

क्रमशः

तो दोस्तों कैसा लगा आपको यह पार्ट बताना मत भूलियेगा।

आखिर कौन है यह काल ?

क्या दुश्मनी है इसकी युगम से ?

इसे कैसे पता था की परमाणु की शक्तियां उसकी बेल्ट में हैं ?

ऐसे कई सवालों के जवाब लेकर जल्द हाज़िर होऊंगा ।

और हाँ आप सबको हवेली की तरफ से।

【 Happy new Year 】

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Written By – Talha Faran for Comic Haveli

 

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8 Comments on “Sarvnayak Se Trast Part 7”

  1. बहुत बढ़िया तल्हा जी….हवलदार बहादुर को भी इस स्टोरी में ले आये।

    1. पिछले भाग को पढ़ने के बाद मन मे हवलदार बहादुर को देखने की बड़ी उत्सुकता थी मन में। वो उत्सुकता उतनी अच्छे से नई समाप्त केई गई क्योंकि हवलदार बहादुर का रोल इस भाग में ज्यादा नही था। मैं उसको एक आहम रोल में देखना चाहता हूँ। आशा है आगे के भागो में ये कमी पूरी होगी।

      कहानी मैं हास्य अच्छा था। कोबी का गुस्से में शुद्ध हिंदी बोलना बहुत ही बढ़िया लगा। ध्रुव केआ सिग्नल flare का ज्ञान न होना भी सही लगा। मार कुटाई वाला भाग बहुत ही बढ़िया लगा।

      तिरंगा को आआपने उसके डिटेक्टिव वाले स्किल दिखाने का मौका दिया जो कि बहूत ही अच्छा था।

      आआपने भारतीय किकॉमिक्स इंड्रस्ट्री को जो बचाने की अपील की जो केई एक बहुत ही सराहनीय कदम था। हमे इस लिए कदम उठाने ही चाहिए।

      अंत मे आपने रहस्य से भरा एक नया किरदार लाया जिसे जानने की उत्सुक्ता बढ़ गयी है।

      आगले भाग का बेसब्री सके इंतज़ार है।

      1. थैंक्स गुरूजी इतना अच्छा रिव्यू देने के लिए, और कोशिश करता हूँ आपको अगले भाग में अपनी शिकायत दूर होती मिलेगी

  2. Lap lap lap lap lap_ kaisi jeebh laplapai
    Bahut kam log jante hain k is pure part ko 4 ghante me hi likha gaya hai
    Sabko laga tha k ye shayd utni achhi na ho
    But hamare talha sahab to aakhir tripathi ji k shishya hain
    Aise kaise khrab ho jaygi story
    Doga mar chuka hai, parmanu bhi mar chuka hai
    To aakhir aage ka competition hoga kaise
    Aur doga itne aaram se kaise mar sakta hai
    Ye kaal hai kaun
    Yugam se kya dushmani hai
    Aur ye chahta kya hai ab
    Kafi sawal man me chhode gye hain
    Is part me hasya ras kam tha comparatively but ek important baat thi
    Indian Comic Industry ko bachane ki apeel
    Ye bahut hi sarahniya kadam hai
    Aur is apeel ko regular haveli k har platform me rakhna chahiye
    Talha ji is part k bare me jyada kuch nahi kahunga
    Parmanu ka action sequence bahut mast laga hai
    Aur ye shayd aapke personal anubhav aur training ka hi description laga mujhe
    Bas ye bolunga k next part dhamakedar hone wali hai
    All the best

  3. To is part mein pata chala ki bhokal jisko hm bahot maryadapurshottam smjhte the usne hi tiranga ko gaddhe mein giraya tha…. sunn k bahot bura laga
    sbse zyada bura laga ki doga aur parmanu jeevit na rhe…
    pr Brahmand Rakshak aur hamare priya lekhak kuch na kuch karenge jisse Doga aur Parmanu hamare beech mein upasthit honge is part mein bahot zyada comedy nhi thi jo ho skta h kisi ko pasand na aaye but yh hota rhta h..
    talha bhaijaan hame niraash nhi karenge mjhe poori ummed h
    all the best for next part

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