Sarvnayak Se Trast Part 8

 श्रृंखला : सर्वनायक से त्रस्त

(पार्ट 8 )

【प्रथम अध्याय◆आयाम द्वार】

परमाणु का किस्सा तमाम हो चुका था काल के हाथों, उसकी क्षत विक्षत लाश पड़ी हुई थी ज़मीन पर और डोगा का किस्सा तो पहले खत्म हो गया था। लेकिन उसकी लाश का कहीं अता पता नही था|

काल : लप लप लप लप लप-यह पीला पोशाकधारी भी खत्म। और अब मुझे रुख करना है युगम क्षेत्र की ओर।

इधर युगम क्षेत्र में बाकी ब्रह्माण्ड रक्षक

ध्रुव : यार कई घण्टे हो गए परमाणु को गए हुए पता नही डोगा उसे मिला या नही तीन दिन हो गए डोगा को गायब हुए।

नागराज : युगम को यह बात मालूम नही है की डोगा गायब है।

स्टील : अगली प्रतियोगिता कल शुरू होगी और वो भी डोगा और योद्धा के बीच। अगर डोगा न मिला तो क्या होगा।

और इधर युगम

युगम : मैं देख रहा हूँ उसे-मैं देख रहा हूँ-वो आ रहा है।

अवधि : कौन आ रहा श्रीमान!!

युगम : वही जो मुझसे भी ताक़तवर है।

अवधी : क्या!!! आपके-आपके कहने का अर्थ है वो जीवित हो गया!

युगम : वो जीवित तो था ही-बस उसे ‘वह’ नही मिल रहा था, जो की अब मिल चुका है। अगर वो आ गया तो हमारे और उसके बीच युद्ध शुरू हो जाएगा और फिर सर्वनायक प्रतियोगिता रुकवानी पड़ेगी और अगर सर्वनायक प्रतियोगिता बीच में ही रुक गयी। तो एक भी युग नही बचेगा!!!!

उधर ब्रह्माण्ड रक्षक

नागराज : मैं परमाणु से मानसिक सम्पर्क साधने की कोशिश कर रहा हूँ पर नाकाम हो जा रहा हूँ।

ध्रुव : ऐसा क्यों हो रहा ?

स्टील : क्या कुछ भी पता नही चल रहा?

तिरंगा : मुझे लगता है अब हमे डोगा के गायब होने के बारे में युगम को बता देना चाहिए।

और तभी नागराज चौंकता है

नागराज : अबे अबे!! कौन है साला ज़बरदस्ती बाहर आ रहा है।

“हम”। कहने के साथ ही, नागराज की कलाइयों से दो नागफनी सर्प सन्न से बाहर निकल आये

नागराज : अबे तुम दोनों।

नागफनी सर्प 1 : हाँ हम हीहीही

नागराज : क्या हुआ सफलता हाथ लगी।

नागफनी सर्प 2 : नही जी हमारे तो..

नागफनी सर्प 1 : हाथ ही नही हैं।

नागराज : गुर्रर्रर्रर्र!!! अबे मेरे कहने का मतलब है सफलता मिली या नही।

नागफनी 1 : नही जी सफलता भी..

नागफनी 2 : नही मिली।

नागराज : गुर्रर्रर्रर्र अबे तो बाहर क्या करने आये हो, अंडे देने गुर्रर्रर्रर्र।

नागफनी 2: थू थू थू..

नागफनी 1 : छी छी छी..

नागफनी 2 : कैसी बात करते हैं आप। हम तो…

नागफनी 1 : मर्द हैं, और मर्द कहीं…

नागफनी 2 : अंडे देते हैं?

दोनों नागफनी सर्पों की बातें सुनकर ध्रुव ,तिरंगा, स्टील, हवलदार बहादुर,शक्ति और कोबी की हंसी ही नही रुक रही थी

स्टील : नागराज मुझे नही पता था तुम्हारे शरीर में ऐसे ऐसे जोकर सर्प भी भरे हुए हैं हा हा हा ।

नागफनी 1 : ( स्टील की तरफ मुड़कर ) जोकर किसे बोला बे, टीनी मनुष्य…

नागफनी 2 : चड्ढी में बड़ जाएंगे, सोच लेना फिर।

स्टील : मेरी चड्ढी में कुछ नही है हीही। सच पूछो तो चड्ढी ही नही पहनता मैं। हीहीही।

नागफनी सर्प फिर कुछ बोलते, इससे पहले ही नागराज उन्हें अपनी तरफ करता है

नागराज : तुम मुझे बताओगे की तुम लोग बाहर क्यों आये हो?, जब तुम्हे सफलता ही नही मिली तो।

नागफनी 1 : जी दरअसल हमे..

नागफनी 2 : छमिया मिल गयी।

नागराज : गुर्रर्रर्रर्र गधों मैं यहाँ प्रॉब्लम में हूँ और तुम लोगों को रोमांस सूझा है। दफा हो जाओ और जाकर शादी करलो उस छमिया से गुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर।

नागराज की डाँट सुनकर वो दोनों वापस जाने के बजाए आपस में फुसफुसाने लगते हैं

नागफनी 1 : “यह बावला हो गया है क्या”!!

नागफनी 2 : “हाँ पहले खुद ही बोलता है छमिया को ढूँढने को और फिर अब खुद ही भगा रहा है गुर्रर्रर्रर्र”

नागफनी 1 : “हाँ गुर्रर्रर्रर्र”

नागराज : अबे क्या फुसफुसा रहे हो तुम लोग मैंने सुन लिया, मत भूलो मेरे अंदर भी सर्प शक्तियां हैं। और मैंने तुमलोगों को छमिया ढूँढने को कब बोला???

नागफनी 1 : तुम्ही ने तो कहा था मुझे कोई ऐसा…

नागफनी2 : द्वार दो जिसकी मदद से मैं..

नागफनी 1 : किसी भी आयाम किसी भी युग में जा सकूँ..

नागफनी 2 : और फिर हमने जंतर मंतर काली कलन्तर खुल जा सिमसिम के बारे में तुम्हे बताया।

नागराज : अबे तो छमिया छमिया क्या लगा रखा है!!!

नागफनी 1 : अजी दरअसल बात यह की जब वो शक्ति किसी फीमेल 1000 वर्ष की कुंवारी नागफनी नागिन को मिल जाती है…

नागफनी 2 : तो हम सब उन्हें छमिया छमिया कहकर बुलाते हैं इज़्ज़त से, और तो और यह शक्ति पाने के बाद वो पहले से कई गुना ज़्यादा…

नागफनी 1 : ( लार चुआते हुए ) खूबसूरत हो जाती है।

नागफनी 2 : हाँ पर शादी नही कर सकती वो बुहुहु..

तभी शक्ति बोलती है

शक्ति : तुम लोग नारी को इज़्ज़त देने के लिए उसका नाम छमिया रख देते हो!! गुर्रर्रर्रर्र

नागफनी सर्प 1: सब नही सिर्फ हम नागफनी सर्प…

नागफनी 2 : क्यों आपको क्या प्रॉब्लम है!!

नागराज : दरअसल यह नारियों के खिलाफ कुछ भी अंट शन्ट बर्दाश्त नही करतीं, भले ही वो जानवर ही क्यों न हो। हीही। खैर चलो तुम आगे बताओ। इसका मतलब तुमलोग यह कहना चाह रहे हो की, किसी फीमेल नागफनी के पास है वो शक्ति ?

नागफनी 2 : बिलकुल।

नागराज : हुर्रर्रर्र। जियो मेरे शेरों तुमलोगों ने दिल खुश कर दिया…

नागफनी 1 : ( फुसफुसाते हुए ) देखो कैसा मक्खन लगाने लगा…

नागफनी 2 : हाँ अभी बोलेगा..

नागराज : जाओ और उस महान नागिन को लेकर आओ मेरे शेरों।

नागफनी 2 : “देखा क्या कहा था”

और फिर दोनों वापस नागराज के शरीर में घुस जाते हैं। और नागराज कुछ सोचने लगता है

●प्रथम अध्याय समाप्त●

【द्वितीय अध्याय◆कूच】

नागराज : 💭मुझे यह नही समझ आ रहा की मेरे शरीर में 1000 वर्ष की नागिन आई कैसे। अभी तो कुछ ही साल हुए हैं नागफनी सर्पों को वरदान में पाये। और मुझे इस चीज़ के बारे में क्यों नही मालूम था?? और नागफनी सर्पों को ऐसे द्वार की ज़रूरत पड़ती ही क्यों है??💭

तभी नागराज के कानों में देव काल जयी का स्वर गूंजता है

देव कालजयी : “वत्स नागराज हमने कहा था न की समय आने पर तुमको नागफनी सर्पों एक एक शक्तियों का पता चलता जायेगा, तो यह शक्ति भी उन्ही में से एक है। और मुझे यह भी पता था की तुम्हे एक न एक दिन इस शक्ति की ज़रूरत पड़ेगी इसलिए मैंने तुम्हे वरदान में जो नागफनी सर्प दिए थे उसी में मैंने इस नागफनी सर्पिणी को भी तुम्हे दिया था जिसके 1000 वर्ष पूरे होने में अभी 15 20 साल बचे थे।और रही बात यह की यह शक्ति इन्हें क्यों दी जाती है तो इसका जवाब फिर कभी मिलेगा। अभी तुम समय व्यर्थ मत करो और जल्द से जल्द बांकेलाल को लाने के लिए विशालगढ़ की ओर कूच करो। और हाँ एक बात और! नागफनी सर्पों की शक्ति का प्रयोग तुम सीमित समय तक ही कर सकते हो। तुम्हे बस 1 घण्टे का समय मिलेगा अपना काम पूरा करने के लिए। खैर!! बाकी बातें तुम्ही छमिया ही बताएगी हीही। हुण अप्पा चलदे हैंगे आं”

नागराज : 💭मुझे एक आईडिया आ रहा है। क्यों न इस शक्ति की मदद से मैं अपनी ही दुनिया में भाग जाऊं हीहीही।।। नही नही!! फिर मैं कायर कहलाऊंगा। और हो सकता है युगम फिर मुझे दुबारा खींच लाये। मुझे बांकेलाल को ही यहाँ लेकर आना होगा। वो ऐसा इंतज़ाम करेगा की यह प्रतियोगिता ही रुक जाए💭

नागराज अभी यही सोच रहा था की वो दोनों नागफनी सर्प एक और नागफनी सर्प, नही नही नागफनी सर्पिणी को लेकर बाहर निकल आये

नागफनी 1 : नागराज यही है ‛छमिया’।

नागराज : भाग जाओ तुम दोनों वापस। मैं इससे बात कर लूँगा।

नागफनी 2 : गुर्रर्रर्रर्र अहसान फरामोश।

दोनों नागफनी सर्प वापस नागराज के शरीर में घुस जातें हैं। और फिर छमिया नागराज को समझाने लगती है

छमिया : नागराज! तुमको जिस आयाम या जिस काल में जाना है मैं वहां जाने के लिए द्वार का निर्माण तो कर दूंगी पर इसमें एक समस्या भी है। तुम्हे सिर्फ एक घण्टे का टाइम मिलेगा वापस आने के लिए, अगर तुम नही आये और एक घण्टे के बाद आयाम द्वार बंद हो गया तो तुम वहीँ फस जाओगे और मैं दुबारा आयाम द्वार बनाकर तुम्हे वापस भी नही ला पाउंगी क्योंकि। मैं किसी के आदेश से ही आयाम द्वार बना सकती हूँ और चूँकि मैं यहाँ पर उस आयाम द्वार का निर्माण करुँगी इसलिए मैं वहां उस आयाम में तुम्हारे साथ नही रहूंगी क्योंकि मुझे यही पर रहकर आयाम द्वार को खोले रखना होगा और अगर मैंने एक बार आयाम द्वार का प्रयोग कर लिया तो फिर उसके बाद दूसरा आयाम द्वार लगभग तीन चार दिन बाद ही बना सकती हूँ। यही प्रॉब्लम है।

नागराज : ओके मैं सब कुछ समझ गया, तुम जल्दी से द्वार का निर्माण करो मैं समय व्यर्थ नही करना चाहता।

स्टील : नागराज क्या हुआ क्या बातें कर रहे थे तुम अपने सर्पों से ।

नागराज : तू जान कर क्या करेगा बे जंग लगे टीन के डिब्बे।

स्टील : गुर्रर्रर्रर्र।

छमिया नामक नागफनी सर्पिणी, कुछ मन्त्र बुदबुदाने लगी और फिर नागराज ने उसे जिस जगह का नाम बताया था वहां का नाम लेने लगी। थोड़ी ही देर में उसके सर पर एक मणि उभरने लगी और फिर देखते ही देखते उस मणि से रंगीन रोशनियाँ निकलने लगीं जो की एक ख़ास तरह के द्वार का निर्माण कर रही थीं, थोड़ी देर बाद एक पूरा द्वार नज़र आने लगा। जो छमिया के सर ने उभरी मणि से निकल रही रोशनि से बना हुआ था

छमिया : ( कुंडली मारते हुए ) नागराज! जाओ विशालगढ़ जाने का द्वार मैंने खोल दिया है प्रवेश करो और एक घण्टे से पहले लौट आना यह द्वार एक घण्टे तक खुला रहे रहेगा, तुम्हारे अलावा यह द्वार किसी को नही दिखाई देगा। चाहो तो किसी को साथ में लेकर जा सकते हो।

नागराज ध्रुव की तरफ ताकने लगता है

ध्रुव : ( गुस्से में ) मैं न जा रहा तेरे साथ। यह बकवास आईडिया है।

और फिर स्टील शक्ति तिरंगा और कोबी भी मना कर देते हैं जाने से, हवलदार बहादुर चुपचाप खड़े थे

नागराज : हवलदार बहादुर जी आप चलना चाहेंगे। इसी बहाने आप बाहरी दुनिया भी देख लेंगे हो सकता है आपको अपनी पिछली बातें भी याद आ जाये।

ध्रुव : मत जाइए हवलदार जी। यह सम्पोला बावला हो गया है। बेहुदा प्लान है इसका!!!गुर्रर्रर्रर्र!!!!

हवलदार बहादुर जी चुपचाप खड़े थे

नागराज : ( ध्रुव से )अबे मैं अकेला भी जा सकता हूँ गुर्रर्रर्रर्र।

कहकर नागराज बढ़ता है आयाम द्वार की ओर, तभी

हवलदार बहादुर : ठहरो नागराज!

नागराज : ( पीछे मुड़कर ) क्या हुआ?

Hb : मैं चल रिया हूँ, तुम्हारे साथ। तुम सही कहते हो। हो सकता है इस आयाम से बाहर निकलते ही मुझे कुछ याद आ जाये।

नागराज ध्रुव की तरफ तिरछी नज़र करके ताकता है, और एक विजयी मुस्कान के साथ हवलदार बहादुर को लेकर उस आयाम द्वार में प्रवेश कर जाता है। उस आयाम द्वार को पार करके वो दोनों पहुंचते है विशालगढ़ के विशाल जंगल में |

●द्वितीय अध्याय समाप्त●

【तृतीय अध्याय◆विशालगढ़】

HB : बड़ा ही घना जंगल है।

नागराज : हाँ और हम लगता है बहुत ही अंदर हैं इस जंगल के।

नागराज आयाम दवार के पास एक जासूस सर्प को छोड़ देता है ताकि अगर वो भटक जाएँ तो नागराज अपने जासूस सर्प से मानसिक सम्पर्क बनाकर यहाँ तक पहुँच जाए

नागराज : अब हमे चलना चाहिए, जल्द से जल्द बांकेलाल को लेकर आना होगा।

इधर जंगल के ही दूसरी ओर, एक शख्स घोड़े पर बैठा हुआ कहीं भागा जा रहा था। अरे!! यह तो बांकेलाल जी हैं…..

बांकेलाल : गुर्रर्रर्रर्र इस बार का षड्यंत्र भी विफल हो गया गुर्रर्रर्रर्र। मोटा मुच्छड़ बच गया साला भैंसा। समझ में नही आता मोटे मनहूस को मारूँ कैसे मैं, हमेंशा बच जाता है मोटा। अब तक न जाने कितनी तरकीबें लगा चुका मैं।

तभी बँकेलाल चौंकता है, उसकी नज़र उस पेड़ पर पड़ती है जिसपर एक शख्स उलटा लटका हुआ था, बांकेलाल तुरन्त ही अपने घोड़े को पावर ब्रेक लगाता है। और उतर कर उस पेड़ की ओर बढ़ता है

बँकेलाल : अबे यह कौन चमगादड़ की औलाद है। क्यों न साले को परेशान किया जाए। हीहीही अपनी खुन्दक निकालने का कोई न कोई तो साधन चाहिए न।

बांकेलाल उस पेड़ के पास पहुंचता है और उस आदमी को नीचे खींचता है वो शख्स धड़ाम से नीचे आ गिरता है, और दर्द के मारे कराह उठता है

### : आह!! कौन है दुष्ट जिसने हमारी नींद हराम की!!

बांकेलाल : बाप रे यह तो कोई ऋषि लगता है, बुहुहु अब यह मुझे श्राप देगा।

ऋषि बांकेलाल की तरफ देखता और फिर ऊपर उस डाल की तरफ ताकता है जिसपर वो लटका हुआ था, और फिर उठकर वो बांकेलाल के पास पहुंचता है

ऋषि : बांकेलाल। मैं हूँ ऋषि उल्टा चार्य। मैं ऐसे ही पेड़ों पर उलटा लटक कर सोता हूँ।

बांकेलाल : 💭आयीं मुझे लगा यह मुझे शाप देगा लेकिन यह तो, मुझे अपना परिचय देने लगा और इसके चहेरे पर गुस्सा भी नही है💭

ऋषि : बांकेलाल बेटा कहाँ खोये हो?

बांकेलाल : हीही कुछ नही महात्मन।

ऋषि : आज हम तुमसे अति प्रसन्न हुए बांकेलाल। पहले मुझे लगा की तुमने मुझे जानबूझकर उस पेड़ पर से गिराया मगर जब मैंने उस डाल पर देखा जिसपर उलटा लटक कर मैं सोया हुआ था तब मुझे समझ आ गया की तुमने मुझे क्यों गिराया।

बँकेलाल : 💭आईं ऐसा क्या है उस डाल पे💭

बांकेलाल डाल पर देखता है तो उसके होश उड़ जाते हैं, उस डाल पर एक बहुत ही ज़हरीला सांप था, वो सांप ऋषि को काटने के लिए ही आया था लेकिन जैसे ही उसने ऋषि को काटना चाहा उसी वक़्त बांकेलाल ने ऋषि को नीचे खींचा था, हाँ लेकिन बांकेलाल ने सांप को नही देखा था

ऋषि : हम प्रसन्न हुए बांकेलाल। हम तुमको इनाम के तौर पर एक मन्त्र देते हैं। इस मन्त्र को बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर साढ़े पचास बार बड़बड़ाने से ब्र्ह्मा भगवान प्रसन्न हो कर प्रकट हो जायेंगे, फिर तुम उनसे जो चाहे वो वर मेरा मतलब वरदान मांग लेना हीहीही।

बांकेलाल : ( आँखें बाहर करते हुए ) सब कुछ तो समझ आ गया लेकिन साढ़े पचास!!

ऋषि : समझाते हैं हम। देखो पहले तुम इस मन्त्र को पचास बार बोलना उसके बाद आखिर में एक बार सिर्फ आधा मन्त्र बोल देना, हो गया न साढ़े पचास हीही।

बांकेलाल : ( ख़ुशी के मारे लाल होकर ) हाँ समझ गया। हीहीही

और फिर ऋषि उल्टाचार्य बांकेलाल को वह मन्त्र बता कर चलते बनते हैं

बांकेलाल : ( मन ही मन खुश होते हुए ) जल्दी से कोई बरगद का पेड़ ढूँढूँ। ऐसा वरदान माँगूँगा ब्रह्मा से की इस बार तो मोटा मरेगा या तो गद्दी छोड़ेगा हीहीही।

इधर नागराज और हवलदार बहादुर

नागराज : बुहुहु यह जंगल तो खत्म होने का नाम ही नही ले रहा, आखिर कब पहुंचेंगे हम विशालगढ़ टाइम तेज़ी से ख़त्म हो रहा है।

Hb : कहीं हम फंस तो नही न गए हैं किसी भयानक जंगल में???

नागराज : मैं कुछ करता हूँ।

नागराज अपनी कलाइयों से ढेर सारे सर्प निकालता है, और फिर उन्हें विशालगढ़ का रास्ता ढूँढने का हुक्म देकर छोड़ देता है वो सब अलग अलग दिशाओं बढ़ जाते हैं। थोड़ी ही देर में नागराज को एक सर्प मानसिक सन्देश देता है

नागराज : “बहुत अच्छे शाबाश”। हवलदार जी मेरे एक सर्प ने विशालगढ़ जाने का रास्ता ढूंढ लिया है। हम विशालगढ़ के ही जंगल में हैं। अब चलिए मेरे साथ जल्दी।

और फिर नागराज हवलदार बहादुर को लेकर एक ओर तेज़ी से बढ़ने लगता है, जंगल में कई तरफ से शेरो की दहाड़ने की आवाज़ें आती हैं। नागराज आगे आगे चल रहा था और उसके पीछे हवलदार जी

नागराज : बस हवलदार जी अब हम लोग जल्द ही विशालगढ़ पहुँच जायेंगे, और फिर बांकेलाल को सारी बात समझा कर उसे भी युगम क्षेत्र ले चलेंगे। वो हमारी बहुत मदद कर सकता है सर्वनायक प्रतियोगिता बंद करवाने में।

तभी नागराज को कुछ अहसास होता है

नागराज : हवलदार जी!! आप कुछ बोल क्यों नही रहे??

नागराज पीछे घूमता है तो देखता की हवलदार जी गायब हो चुके थे

नागराज :आएं हवलदार बहादुर कहाँ गए??
हवलदार जी!!!! हवलदार जी!!!

नागराज काफी चिल्लाता है मगर कहीं से हवलदार साहब का जवाब नही मिलता है

नागराज : अरे यार अब यह बन्दा कहाँ गायब हो गया?? लगता है शेरो की दहाड़ सुनकर वापस भाग गया है। मुझे अपना समय नही खराब करना है अबसे सिर्फ 40 मिनट बचे हैं जल्द से बांकेलाल तक पहुंचना होगा।

जल्द ही नागराज जासूस सर्प के मानसिक सन्देश का पीछा करते हुए, विशालगढ़ के राजमहल पहुँच जाता है। नागराज महल के दरवाज़े पर पहुंचता है। उसे देखते ही महल के द्वार पर खड़े दरबान अपनी आँखें बाहर निकाल देते हैं

नागराज : ( एक दरबान से ) आ…मुझे बांकेलाल जी से मिलना है क्या मैं अंदर जा सकता हूँ?

थोड़ी देर तक दोनों दरबान एक दुसरे को ताकते हैं, और फिर अचानक ही नागराज के ऊपर कूद जाते हैं

दोनों दरबान : पकड़ो पकड़ो साले को आज हाथ आ ही गया यह बदमाश!!!!

●●●●●तृतीय अध्याय समाप्त●●●●●

क्रमशः

अरे बाप रे यह क्या हुआ?????

नागराज और हवलदार बहादुर आये थे बांकेलाल को लेने को लिए, मगर यह दोनों तो खुद ही फंस गए!!!

हवलदार बहादुर कहाँ गायब हो गए बीच जंगल में ही?

दरबान नागराज पर क्यों झपट पड़े??

बांकेलाल ने क्या वरदान माँगा ब्रह्मा से???

नागराज के पास समय कम है क्या वो बांकेलाल को लेकर युगम क्षेत्र जा पायेगा????

इंतज़ार कीजिये जवाब का।
और हमेशा की तरह अपने रिव्यूज़ ज़रूर दीजिये, आपके रिव्यूज़ हमारे मार्गदर्शक हैं।

lllधन्यवादlll

Written By – Talha Faran for Comic Haveli

 

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12 Comments on “Sarvnayak Se Trast Part 8”

  1. Gurrr ye kya ho gaya
    Ye part itna chhota kyun? Buhuhu.
    Kitna bada aa raha tha
    Nagraj bahut selfish hai dono nagfani sarpo ko thank you bhi nahi bola. Sidha ghudak diya. But wo dono sarp bas kamaal hain. Hihihi
    Ye story pata nahi kaha le jayegi?
    Kaun hai yugam se bhi shaktishali?
    Bankelal kaun sa vardan lega bramha ji se?
    Hawaldar bahadur kaha gaya?
    Kahani me hasi k sath sath jabardast rahasya aur romanch bhara hai. Jis bande ne doga aur parmanu jaise dhurandharo ko maar diya usse baki log kaise ladenge? Kya hai uski shaktiya k yugam k bhi pasine chhut rahe hain?
    Mujhe to gurudev bankelal ji par hi asha hai
    Wahi kuch shadyantra rachenge yugam ke khilaf aur hoga ulta.
    Par pratiyogita bol ke abhi tak kuch bhi nahi hui hai
    Dhruv ka kuch bhi role nahi dikha itni lambi story me
    Parantu kaafi rahasya ujagar hone baki hain
    Intezaar hai agle part ka

  2. सस्पेन्स और हास्य का मिश्रण बहुत लाजवाब है।
    हवलदार बहादुर और बांके की जोड़ी का इन्तेज़ार है ।
    नागराज के नागफनी सर्पो का रोल बहुत ही लाजवाब है।

  3. Bahut behatreen part raha ye waala….bankelal ko bhi maine bahut samay se padha nhi tha to aaj uski bhi yaad taaza ho gayi. Nice work.

  4. आपकी पूरी कहानी पढ़कर बहुत मजा आया पर कॉमिक्स सीरीज की तरह इसे लंबा ना खींचना

  5. इस भाग की शुरुआत बहुत ही दर्दनाक तरीके सके होती है। दो महानायको के मौत से हुई शुरुआत ही ईस भाग को इस श्रृंखला का एक अलग ही मोड़ दे देती है।

    ये भाग पूरी तरीके से नगराज और बअंकेलाल par hi kendrit tha. nagraaj ke andar se un srpo ka nikalkar mskhari krne wala bhaag mazedaar laga. aur us sarpani ka naam chamiya bahut hi achha laga. Uske naam ko hi padhkar hasin aa jati thi..

    Aapne bankelaal wala bhaag bahut hi achhe dhang se likha. Wo mujhe is bhaag ka sabse achaa bhaag laga. Us ajeeeb nam wale rishi ke saath saath uski ulti latakne waali baat aur phir bankelaal ko 50&1/2 baar wo mantr padhne ka tarika batana . Ye sab bilukl hi classic bankelaal ki comics jaisa hi laga. Bahut mazaa aaya padhkar.

    Ant me aapne Hawaldaar Bahadur aur Nagraaj ko us safar par bhejkar aur un dono ke upar hamle karwakar is bhaag ko bahut hi badhiyaa twist ke saath ant kiya.

  6. आप सभी लोगों का बहुत बहुत शुक्रिया, रिव्यूज़ देने। और खासकर मैं गुरूजी का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा की उन्होंने वक़्त निकालकर रिव्यू दिया

  7. Bhai maza aa gaya. Main to d3khna chahta hoon ki HB aur Vikramsingh ka saamna kaisa hoga. Aakhir HB ko apna boss jo yaad aayega Vikramsingh ko dekhte hi. Hi hi hi (shaitani wali hansi)

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