Sarvnayak Se Trast Part 9

सर्वनायक से त्रस्त

( part9 )

【 बँकेलाल और हवलदार बहादुर】

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【प्रथम अध्याय◆बांकेलाल】

युगम के आयाम में…
एक अनजान ग्रह पर।

काल : आर्रर्रर्रर्रर्घ…. यह क्या? युगम क्षेत्र कहाँ गया यहीं तो था, यहीं तो होने वाली थी सर्वनायक प्रतियोगिता लेकिन युगम क्षेत्र तो यहाँ है ही नही! इसका मतलब!! युगम क्षेत्र मिटा दिया गया!! नही नही! यह पीला पोशाक धारी झूठ नही बोल रहा था..

काल ने परमाणु की लाश को अपने कंधे पर टांग रखा था

काल : ज़रूर युगम क्षेत्र बदल कर कहीं और कर दिया गया है गर्रर्रर्रl इतने वर्षों तक शिथिल पड़े रहने के कारण मेरी शक्तियां बहुत कम हो गयीं हैं। वरना अभी मुझे एक पल का समय भी नही लगता यह जानने में की युगम क्षेत्र कहाँ है, मुझे ब्रह्माण्ड में हर चीज़ का पता था मैं हर समय काल का ज्ञाता था क्योंकि मैं खुद काल हूँ हर काल हर समय पर मेरा राज था। और मेरी आधी शक्ति युगम के पास थी लेकिन फिर भी मैं उससे ताकतवर था क्योंकि हर काल हर समय की शुरुआत मुझसे ही होती हैl युगम का तो काम था सिर्फ हर काल से सुपर हीरोज़ को काल क्षेत्र लाने का जिसका नाम बदलकर अब युगम क्षेत्र रख दिया गया है गर्रर्रर्र । जहाँ सर्वनायक प्रतियोगिताएँ हो रही हैंl देवताओं ने मुझे खत्म नही किया था क्योंकि वो जानते हैं अगर मुझे खत्म कर दिया गया तो कालचक्र रुक जायेगा हमेशा के लिए इसलिए मुझे शाप देकर सिर्फ एक चिपचिपा पदार्थ बनाकर छोड़ दिया और एक अनजान ग्रह पर फ़ेंक दिया गया। मै जीवित तो हूँ, क्योंकि मेरा जीवित होना ज़रूरी है। लेकिन मुझसे हर समय काल में हर युग में दखल देने का और उनपर राज करने का हक़ छीन लिया गया और युगम को दे दिया गया। और अगर अब मुझे अपनी सारी शक्ति वापस पानी है तो मुझे युगम को मारना होगा और युगम को मारना मेरे लिए बाएं हाथ का काम है क्योंकि मैं लाख कमज़ोर सही। लेकिन युगम मेरे सामने पल भर भी नही टिक सकता। अब मुझे बस पता लगाना है की युगम क्षेत्र कहाँ है जो मैं जल्द ही लगा लूँगा क्योंकि मैं उनकी ऊर्जा तरंगो को महसूस कर पा रहा हूँ जो सर्वनायक प्रतियोगिता में प्रतिभागी हैं।

और यहाँ पृथ्वी पर…..
कई सौ साल पीछे विशालगढ़ में

नागराज को दोनों दरबानों ने पकड़ रखा था

नागराज : 💭यह लोग मुझे बदमाश क्यों कह रहे हैं। खैर। यह मुझे महल के अंदर ही ले जा रहे हैं वहीँ पहुँच कर मैं बांकेलाल को सारी बात बता दूंगा, हो सकता है बांकेलाल मुझे पहचान ले क्योंकि जब वो कलियुग में आया था तब उसने कहीं न कहीं मेरा ज़िक्र तो सुना ही होगा💭

दरबान नागराज को महल में लेकर पहुंचे। जहाँ महाराज विक्रम सिंह अपने सिंहासन पर विराजमान थे, उनके हाथ में रसगुल्लों से भरा प्लेट था और उन्होंने कई रसगुल्ले अपने मुंह में ठूंस रखे थे। मंत्री गण लपलपाई निग़ाहों से उनकी तरफ ताक रहे थे, लेकिन बांकेलाल कहीं नज़र नही आ रहा था

नागराज : 💭यहाँ बांकेलाल तो कहीं नही दिख रहा💭

दरबान नागराज को लेकर महाराज के सामने पहुंचे

पहला दरबान : महाराज यह देखिये हमने किसे पकड़ा है!

सभी मंत्रीगण नागराज को देखने लगते हैं

महाराज : ( रसगुल्ले गटक कर ) यह क्या चीज़ पकड़ लाये हो तुम लोग!!

दूसरा दरबान : महाराज यह चीज़ नही है, इसकी चड्ढी देखिये!

महाराज नागराज की चड्डी को गौर से ताकने लगते हैं, और आँखें फाड़ने लगते हैं

महामन्त्री : (महाराज से) महाराज बस कीजिये कब तक टापते रहेंगे हीही।

सेनापति मरखप : महाराज अश्लील हो गए हैं हीहीही।

तभी महाराज ज़ोर से चिल्लाते हैं

महाराज : मैं पहचान गया इसे!! यह यह….कच्छा मण्डली का सरदार है डाकू कच्छा सिंह वही बैंगनी रंग की चड्ढी पहनता है और चड्ढी के अलावा कुछ नही पहनता, और इसके चेले काली रंग की चड्डियाँ पहन कर घूमते हैं और लोगों को लूटा करते हैं। आज पकड़ में आ ही गया यह।

दोनों दरबान : हाँ महाराज हमने बड़ी मुश्किल से इसे पकड़ा है।

महाराज : शाबाश तुम दोनों इनाम के हक़दार हो। लेकिन यह कच्छा सिंह इतना हरा भरा कैसे हो गया।

सेनापति मरखप : रंगाई पुताई करके साले ने खुद को हरा कर लिया होगा हीही।

महाराज : सेनापति ले जाओ इसे और कारागार में बन्द कर दो!!!

सेनापति के हुक्म पर सिपाही नागराज को लेकर जाने लगे कारागार की तरफ। नागराज ने खुद को छुड़ाते हुए कहा

नागराज : महाराज मैं कोई कच्छा वच्छा नही हूँ मैं नागराज हूँ, भविष्य की दुनिया से आया हूँ और मुझे बांकेलाल से मिलना है।

नागराज की बात सुनकर कुछ देर तो सभा में सन्नाटा छाया रहा, लेकिन तभी महाराज के ठहाकों ने सन्नाटा भंग किया और फिर सब ठहाका लगाने लगे, नागराज कुछ समझ नही पा रहा था

महाराज : अरे ओ महामन्त्री, यह कच्छा तो बावला निकला कैसी कैसी बातें कर रह रहा है।

नागराज : 💭बस बहुत हुआ अब मुझे ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी💭

नागराज सिपाहियों को हल्का सा झटका देता है वो छटक कर दूर जा गिरते हैं। एक बार फिरसे सभा में भारी सन्नाटा छा गया। और तभी नागराज ने अपनी कलाइयों से सर्प निकालने शुरू किये, सभा में भगदड़ मच गई, सबसे पहले सेनापति मरखप भागा, महाराज कुछ ज़्यादा ही रसगुल्ले खा चुके थे इस लिए वो भाग न सके।नागराज सट्ट से उनके पास पहुँच गया और गिरेबान पकड़ लिया

नागराज : महाराज मैं कोई चड्डा वड्डा नही हूँ। मैं नागराज हूँ और मुझे बांकेलाल से मिलना है जल्दी बताइये कहाँ है बांकेलाल??

महाराज : बा बांके ल ल लाल, व वो तो जंगल की तरफ गया है अपने घोड़े कालिया पे सवार हो कर।

नागराज : किस काम से गया है वो जंगल!

महाराज : मम म मुझे क्या पता। जंगल करने गया होगा हे हे ।

नागराज महाराज को छोड़ देता है और महल से बाहर निकल आता है

नागराज : शिट्ट! सिर्फ 30 मिनट बचे हैं। मुझे लगता है या तो बांकेलाल मुझे नही मिल पायेगा या फिर मैं ही यहाँ फंस कर रह जाऊंगा। क्या करूँ ? क्या करूँ? अगर मुझे पता होता की बांकेलाल उसी जंगल में है तो मैंने अपने जासूस सर्पों को विशालगढ़ खोजने के बजाए बांकेलाल को खोजने का हुक्म दिया होता। एक मिनट! यह काम तो मैं अब भी कर सकता हूँ। उस जंगल में अभी भी मेरे कुछ जासूस सर्प मौजूद हैं बस उनसे मानसिक सम्पर्क करके उन्हें बांकेलाल को ढूँढने का आदेश देता हूँ।

नागराज अपने सर्पों को मानसिक सन्देश देने लगा, थोड़ी ही देर में उसके पास एक सर्प का जवाब आया

जासूस सर्प : नागराज लेकिन हमने तो कभी देखा नही है बांकेलाल को। तो हम कैसे ढूंढेंगे उसे।

नागराज : चिक्। यह भी प्रॉब्लम है। एक काम करो तुम। लोग उस जंगल में भी बहुत सारे सर्प मौजूद होंगे उन सर्पों से पूछो की क्या उन्होंने बांकेलाल को देखा है?? बांकेलाल रोज़ उस जंगल में जाया करता है भ्रमण के लिए। उस जंगल के सर्प उसे ज़रूर पहचानते होंगे।

इधर उसी जंगल में।

बांकेलाल : यह रहा बरगद का पेड़।

बांकेलाल पेड़ के नीचे पहुँच कर आलथी पालथी मार कर बैठ जाता है

बांकेलाल : एक मिनट। पहले मैं सोच लूँ की मुझे मांगना क्या है ब्रह्मा जी से, कुछ अलग मांगना होगा इस बार। हर बार जो कुछ माँगता हूँ सब बेकार चला जाता है इस बार दूसरा षड्यन्त्र रचना होगा। इस बार मोटे मुच्छड़ को मारने का षड्यन्त्र नही, बल्कि इस बार कुछ ऐसा षडयंत्र रचना होगा की मोटा ज़िंदा तो रहे पर सिंहासन पर बैठने लायक न रहे। और चूंकि उसका लौंडा अभी सिंहासन सम्भालने लायक नही हुआ। फिर ले दे कर मैं ही ऐसा शख्स बचूंगा जिसपर मोटे मुच्छड़ को सबसे ज़्यादा भरोसा है, और फिर मोटा मुच्छड़ राजगद्दी सम्भालने का काम मुझे दे देगा हीहीही। और एक बार मैं राजा बन गया तो फिर उसके बाद मोटे मुच्छड़ और उसके लौंडे दोनों को रास्ते से हटाना मेरे बाएं हाथ का काम होगा हीही। और रानी हीहीही।

न जाने क्या सोचा था बँकेलाल ने रानी के बारे में हीहीही

बांकेलाल : हुर्रर्र। देखो तो ज़रा मेरे षड़यत्रकारी दिमाग का कमाल। बातों ही बातों में योजना बन गयी, मैंने सोच लिया मुझे गया माँगना है हीहीही।

और बांकेलाल वहीँ पेड़ के नीचे बैठ कर ऋषि के बताये हुए मन्त्र का उच्चारण करने लगता है, और फिर जैसे ही वो उस मन्त्र का साढ़े पचास बार पढ़कर उसे खत्म करता है। तुरन्त ही आस पास हवाएँ चलने लगती हैं, ज़ोर ज़ोर से

बांकेलाल : बुहुहु यह क्या? इतनी भयानक हवाएँ क्यों चलने लगी, कहीं उस ऋषि ने ब्रह्मा जी का नाम बताकर तूफ़ान बुलाने वाला मन्त्र तो नही न थमा दिया बुहुहु गुर्रर्रर्रर्र।

और तभी हवाएँ एकदम से रुक जाती हैं, और फिर धीरे धीरे बांकेलाल के सामने रौशनी प्रकट होनी शुरू होती है। और फिर तुरन्त ही बांकेलाल के सामने ब्रह्मा प्रकट हुए

ब्रह्मा : हम प्रसन्न हुए बांकेलाल कहो क्या चाहते हो।

बांकेलाल : हीही, पहले प्रणाम स्वीकार करें।

ब्रह्मा : हुम्म….. बोलो क्या वरदान चाहते हो?

बांकेलाल : हीहीही।

ब्रह्मा : हिहियाना बन्द करो और वर मांगो गुर्रर्र।

बांकेलाल : हे ब्रह्मा, मुझे वरदान में ऐसी दवा दें जिसे किसी को भी खिला देने पर, वो बन्दा ज़िन्दगी भर ‘वहां’ बैठा रहे हीहीही, उसका ‘वो’ कभी न रुके जब तक की वो मर न जाए।और उस दवा का असर हर किसी पर हो चाहे वो इंसान हो शैतान हो देवता हों राक्षस हों जानवर हों,कुछ भी हों सबपे उसका असर होना चाहिए हीहीही।💭मैं कोई जोखिम नही लेना चाहता💭

ब्रह्मा : 💭क्या बेहुदा चीज़ मांग रहा है गुर्रर्र, लेकिन अब देना तो पड़ेगा ही।💭 ठीक है मैं तुम्हे देता हूँ ऐसी दवा, और इसका असर सब पर होगा मुझे छोड़कर हीहीही।

कहकर ब्रह्मा जी अंतर्ध्यान हो गए। और उसी पल बांकेलाल के हाथों में दो सफेद रंग की गोलियां आ गयीं

बांकेलाल : वाह मिल गया मुझे जो चाहिए था, अब बस इसे दूध में मिलाकर उस हाथी के बच्चे को पिला दूंगा। और फिर,फिर। हीहीही फिर वो सारी ज़िन्दगी संडास में बैठकर सड़ाता और सड़ता रहेगा हीही।

तभी बांकेलाल को एक गधी दिखी, जो पास ही घास चर रही थी

बांकेलाल : 💭वाह। हीहीही। दूध का इंतज़ाम भी हो गया। इसी बहाने मोटे मुच्छड़ को गधी का दूध पिला दूंगा हीहीही।💭

बड़ा ही बद्तमीज़ किस्म का इंसान है यह बांकेलाल हीहीही

बांकेलाल ने बड़ी मुश्किल से उस गधी का दूध अपनी पानी वाली पोटली में भरा जो वो हमेशा साथ रखता था

बांकेलाल : हीहीही इस बार मोटे मुच्छड़ की अच्छी दुर्गत होगी।

बांकेलाल ने वहीँ वो गोलियां भी उस दूध में मिला दीं, और फिर पोटली का ढक्कन बंद करके उसे अपनी कमर में टांग कर चल पड़ा

बांकेलाल : ( कालिया पर बैठते हुए ) चल कालिया। अब मेरी योजना सफल होगी। अब मैं बनूँगा राजा और मोटा ज़िन्दगी भर सनडांस में सड़ेगा हीहीही।

कालिया : 💭सुधर जा बांकेलाल, वरना तेरी मौत संडास में ही आएगी💭

●प्रथम अध्याय समाप्त●

【द्वितीय अध्याय◆हवलदार बहादुर】

जंगल में ही, एक अनजान स्थान। कुछ शिकारी टाइप लोग न जाने कहाँ जा रहे हैं जल्दी जल्दी भागते हुए

शिकारियों का सरदार : जल्दी करो जल्दी चलो सब अबतक तो कोई न कोई जानवर फस ही गया होगा जाल में।

और फिर वो और उसके साथी और तेज़ तेज़ चलने लगते हैं। थोड़ी ही देर में वो एक विशाल वृक्ष के सामने पहुँचते हैं

पहला शिकारी : (आस पास की घास में कुछ ढूंढते हुए) जाल यहाँ पर नही है। इसका मतलब कुछ फंस चुका है।

और फिर जल्द ही वो सब उस रस्सी को खींचने लगते हैं, जो पेड़ के ऊपर लटके जाल से बन्धी थी, जल्द ही वो सब जाल नीचे उतार लेते हैं। लेकिन वो यह देखकर दंग हो जाते हैं की उस जाल में कोई जानवर नही बल्कि एक इंसान फंसा हुआ था। कौन है आखिर यह?? अरे! यह तो हवलदार बहादुर जी हैं, यह इसमें कैसे फंसे!!।

आइये आपको ले चलता हूँ कुछ समय पीछे। जब नागराज और हवलदार बहादुर जी जंगल में होते हुए विशालगढ़ की तरफ जा रहे थे तो बदकिस्मती से हवलदार बहादुर जी का पैर उस जाल पे पड़ गया जिसे शिकारियों ने जानवर फ़साने के लिए बिछा रखा था, अब आप पूछेंगे की नागराज क्यों नही फंसा। जी दरअसल नागराज उस रास्ते पर किनारे किनारे जा रहा था,हवलदार जी बीच में चल रहे थे और तभी उनका पैर उस जाल पर पड़ गया, वो जाल रास्ते के बीच में ही था। और जैसे ही हवलदार जी उसमे फंसे तुरन्त ही जाल पेड़ पे जा लटका और हलवदार बहादुर जी को चिल्लाने का मौक़ा भी न मिल पाया,ऊपर से उस जाल में वो बुरी तरह अकड़ गए थे इसलिए उनकी आवाज़ भी नही निकल पा रही थी

आइये अब प्रेजेंट टाइम में

हवलदार बहादुर : ( जाल से बाहर निकलते हुए) गुर्रर्रर्रर्र यह जाल यहाँ किस कमबख्त ने बिछाया था??

शिकारियों का सरदार : हमने बिछाया था।

Hb : रास्ते में क्यों बिछाया बे? मैं यहाँ कबसे फंसा हुआ था गुर्रर्रर्रर्र।

सरदार : तुझसे किसने कहा था फसने के लिए!

Hb : अबे यहीं रास्ते में जाल डालोगे तो बन्दा फंसेगा नही!

सरदार : अबे यहाँ कोई बन्दा नही आता। पहली बार तू ही यहाँ आया है।

दूसरा शिकारी : और अब वापस नही जा पायेगा।

Hb : क क क्यों!

तीसरा शिकारी : क्योंकि आज तेरी वजह से हमारा आज का शिकार बच गया, इसलिए हम तुझे ही लेकर जायेंगे।

चौथा शिकारी : दिल गुर्दे निकाल कर बेच देंगे, आँखें निकाल लेंगे कंचे खेलने के लिए, नाक-कान काट लेंगे भून कर खाने के लिए, बाल छीलकर चाउमिन बनाएंगे,बत्तीसी निकाल लेंगे अंगूठी बनाकर पहनने के लिए, उँगलियाँ काट लेंगे माला बनाने के लिए, दोनों पैर काटकर रख लेंगे हॉकी खेलने के लिए, दोनों हाथ काटकर बैडमिंटन खेलेंगे, और मुंडी शो केस में सजा देंगे और आखिर में जो सब बचेगा उसे पकाकर खा जायेंगे हीहीही।

HB : ( थूक गटकते हुए ) अबे तुमलोग जानते नही अभी मुझे।

सरदार : क्या कर लेगा बे तू???

Hb : बहुत कुछ कर सकता हूँ।

सरदार : दिखा करके।

Hb : दिखाऊं ????

सरदार : अबे दिखा ना ।

Hb : अच्छा ले देख।

और यह कहने के साथ ही हवलदार जी वहां से दुड़की हो लिए, भागने में तो उनका कोई सानी नही यह तो आप जानते ही होंगे अतः शिकारियों ने कुछ दूर तक उनका पीछा किया पर उन्हें पकड़ न पाये

●द्वितीय अध्याय समाप्त●

【तृतीय अध्याय◆बांकलाल और हवलदार बहादुर】

नागराज तेज़ी से उसी जंगल की तरफ बढ़ रहा था और साथ ही साथ अपने सर्पों से सम्पर्क भी बनाए हुए था।

इधर जंगल में बांकेलाल कालिया पर सवार होकर विशालगढ़ की ओर बढ़ रहे थे

बांकेलाल : कालिया बेटा। थोड़ा आराम आराम से चल आज मुझे कोई जल्दी नही है, आज तू आराम से चल हीही।

कालिया : 💭गुर्रर्रर्रर्र आज कुछ ज़्यादा ही ख़ुशी हो रही है इस चुटियल को, ब्रह्मा से ब्रह्मास्त्र मांग लिया है क्या💭

बांकेलाल : घबरा मत कालिया, एक बार मैं राजा बन गया। तो दस दस घोड़ियों से तेरी शादी कराऊंगा।

कालिया : 💭बुहुहु अबे इसके अलावा और कोई सज़ा नही दे सकता है क्या? एक को तो कोई सम्भाल नही पाता मैं दस दस कहाँ से सम्भालूंगा बुहुहु💭

बांकेलाल : कालिया तू खुश नही हुआ सुन कर…

कालिया : 💭अबे मेरी मौत का इंतज़ाम कर रहा है कहाँ से खुश होऊंगा मैं💭

बांकेलाल : क्या हुआ कालिया? नही करेगा क्या शादी???

कालिया : 💭गुर्रर्रर्रर्र अबे पहले अपनी तो कर ले। साले बुढ़ऊ गुर्रर्रर्रर्र।💭

बांकेलाल और कालिया बढ़ते चले जा रहे थे की तभी, बांकेलाल के कानो में वो आवाज़ पड़ी

“बचाओ बचाओ!!कोई है!मुझे बाहर निकालो”

बांकेलाल : आईं यह कौन गधा सिंपिया रहा है? कोई भी हो मुझसे क्या! चल कालिया।

कालिया : 💭गुर्रर्रर्रर्र बांकेलाल कभी तो कोई पुण्य का काम कर लिया कर💭

कहकर कालिया उस ओर घूम गया जिधर से आवाज़ आ रही थी

बांकेलाल : अबे अबे कालिये यह क्या कर रहा है?? बुहुहु तू मुझे हमेशा फंसाया करता है इसी तरह ।

कालिया : 💭गुर्रर्रर्रर्र मत भूल बांकेलाल की मेरी इसी हरकत की वजह से एक बार तुझे चमत्कारी जड़ें मिल गयीं थीं💭

सूचना : चमत्कारी जड़ें के बारे में जानने के लिए आप बांकेलाल की कॉमिक्स चमत्कारी जड़ें पढ़ें।

कालिया बांकेलाल को लेकर उस गड्ढे के पास पहुँचा जिसमे कोई गिरा पड़ा था और बचाओ बचाओ चिल्ला रहा था। बांकेलाल कालिया के ऊपर से उतरा और जाकर उस गड्ढे के अंदर झाँका, गड्ढा काफी गहरा था

बांकेलाल : कौन है अंदर!!

अंदर से आवाज़ आई

“मैं हूँ”

बांकेलाल : बड़ा ही अजीब नाम है “मैं हूँ”।

फिर गड्ढे में से आवाज़ आई

“अबे पूरा तो सुन,मैं हूँ हवलदार बहादुर”

बांकेलाल : हवलदार बहादुर! नाम कहीं सुना है मैंने लगता है।

HB : ओये तू मेरा नाम कहाँ से सुन लेगा मैं भविष्य से आया हूँ।

बांकेलाल : भविष्य से!

बांकेलाल चौंकता है

बांकेलाल : मैं शायद समझ गया कौन हो तुम!!

और फिर बांकेलाल जल्दी से एक रस्सी उस गड्ढे में लटका देता है, जिसे पकड़कर हवलदार बहादुर बाहर आ गए। और वो अपने कपड़े झाड़ने लगे, वो अपनी पैंट झाड़कर जैसे ही खड़े हुए। बांकेलाल उन्हें देखकर चिल्ला उठा

बांकेलाल : अरे हवलदार बहादुर!! मेरा याड़ी! कैसे आना हुआ दोबारा।

कहकर बांकेलाल हवलदार बहादुर को गले लगा लेता है, हवलदार जी हड़बड़ा कर उसे दूर धकेलते हैं

Hb : ओये कौन है तू मैं तुझे नही जानता।

बांकेलाल : आएं! यह क्या कह रहे हो मित्र? हाँ हो सकता है तुम मुझे भूल गए हो, इतने वर्ष जो बीत चुके हैं हमे मिले हुए। पर मैं तुम्हे नही भुला हूँ।

HB : ओये क्या बक रिया है!! मैं यहाँ पहली बार आया हूँ, वो भी एक सिरफिरे नागराज के साथ वो मुझे इस जंगल में अकेला छोड़कर ना जाने कहाँ गायब हो गया है।

बांकेलाल : क्या तुम सच में भूल गए हो मित्र की तुम यहाँ आये थे?? तुम हवलदार बहादुर ही हो न, भविष्य की दुनिया से। तुम रूपनगर में रहते हो, तुम्हारी पत्नी का नाम चम्पाकली है उसका एक भतीजा भी है जो तुमलोगों के साथ ही रहता है टुंड नाम है उसका। तुम रूपनगर पुलिस में हवलदार की ड्यूटी करते हो।

बांकेलाल जैसे जैसे यह सब बताता जा रहा था, हवलदार बहादुर के दिमाग पर ज़ोर पड़ता जा रहा था, और तभी उनका सर दर्द करने लगा, वो अपना सर पकड़ कर इधर उधर लड़खड़ाने लगे

बांकेलाल : अरे तुम्हे क्या हो रहा है मित्र??

HB : मुझे कुछ याद आ रहा, कुछ कुछ याद आ रहा है मुझे। मेरे साथ कोई बड़ी घटना हुई थी जिसके वजह से मैं अपनी याददाश्त खो चुका था और एक दुसरे आयाम में पहुँच चुका था।

और तभी हवलदार जी एकदम से चीख पड़े

HB : हाँ याद आ गया!! याद आ गया मैं कौन हूँ कहाँ रहता हूँ! सब कुछ याद आ गया मुझे। सब कुछ। बस यह याद नही आ रहा की मेरे साथ क्या हुआ था मैं कैसे उस आयाम में पहुंचा और किसने मुझे उस आयाम में पहुंचाया था।

बांकेलाल : ( HB से ) मैं याद आया या नही मित्र?

Hb : तुम! तुम बांकेलाल हो न।

बांकेलाल : हाँ ।

Hb : वाह मेरे याड़ी। तुमसे दुबारा मिलकर ख़ुशी हुई। आज तुम्हारी वजह से मेरी याददाश्त वापस आ गयी। क्योंकि मैं तुमसे एक बार पहले मिल चुका हूँ इसलिए दोबारा तुमसे मुलाक़ात होते ही, और तुम्हारे द्वारा मेरे बारे में सब कुछ बताते ही मेरी याददाश्त वापस आ गयी।

तो आखिर । बांकेलाल जी ने आज यह पुण्य का काम कर ही दिया उन्ही की वजह से आज हवलदार बहादुर जी की याददाश्त वापस आ गयी

सूचना : हवलदार बहादुर और बांकेलाल की मुलाकात कब और कैसे हुई यह हम बाद में कभी बताएंगे

बांकेलाल : सब कुछ तो ठीक हो गया लेकिन यह बात नही समझ में आ रही की तुम कहाँ थे अभी तक?किस आयाम में फंसे हुए थे? और यहाँ फिर कैसे आये क्यों आये? यह नागराज कौन है कहाँ है?

HB : अब तुम्हे सब बताता हूँ मेरे दोस्त।

और हवलदार बहादुर जी बांकेलाल को सबकुछ बताते चले गए की वे कहाँ फंसे हुए थे, और फिर उनसे परमाणु की मुलाक़ात। और कैसे कैसे वो यहाँ तक पहुंचे नागराज और वो यहाँ क्यों आये। जितना हवलदार जी को मालूम था सब कुछ उन्होंने बांकेलाल को बता दिया।

सब कुछ सुनने के बाद बांकेलाल अपने विचारों में खोया कुछ सोचने लगा

बांकेलाल : 💭तो इसके कहने का मतलब है की एक ऐसा आयाम जिसे युगम क्षेत्र कहते हैं, और वहां सर्वनायक नामक प्रतियोगिता हो रही है जिसे युगम नामक कोई शख्स करवा रहा है। हुम्म…..इसका मतलब वो युगम जो कोई है उसके पास ब्रह्माण्ड का वो सिंहासन है जिसपे बैठकर वो ब्रह्माण्ड के योद्धाओं को अपनी ऊँगली के इशारे पर नचा रहा है, भूत भविष्य सारे योद्धा वहां इकट्ठा हैं। और यह दोनों मुझे ले जाने आएं हैं वहां ताकि मैं कोई तिकड़म भिड़ा कर सर्वनायक प्रतियोगिता रुकवा। हुम्म्म…..तिकड़म तो मैं भिड़ाऊँगा हीहीही, पर💭

न जाने क्या सोच रहा था बांकेलाल और अपनी उस पोटली पर हाथ फेर रहा था जिसमे उसने दूध में वो दवा मिलाकर रख रखी थी

Hb : क्या हुआ बांकेलाल कहाँ खो गए??

बांकेलाल : आ… क कुछ नही कुछ। आ….मैं तैयार हूँ तुमलोगों के साथ युगम के आयाम में चलने के लिए।

HB : ठीक है। लेकिन अब इस नागराज को कहाँ ढूंढें हम?

तभी उन्हें किसी के कदमों की आहट सुनाई देती है, वो जैसे ही पीछे मुड़ते, हवलदार जी ख़ुशी के मारे चिल्ला उठते हैं

HB : नागराज तुम आ गए।

नागराज : जी मेरे जासूस सर्पों ने मुझे बताया की आप और बांकेलाल जी यहाँ मौजूद हैं। हैल्लो बांकेलाल जी

बांकेलाल : हैल्लो।

नोट : बांकेलाल को थोड़ी बहुत इंग्लिश पता है क्योंकि एक बार कलियुग में घूम चुका है हीहीही।

नागराज : हवलदार जी आप कहाँ चले गए थे, और बांकेलाल जी आपको कहाँ मिले।

हवलदार बहादुर ने नागराज को शुरू से लेकर अब तक की सब घटना बता दी

नागराज : अच्छा। और आपने बांकेलाल जी को यह बता दिया की हम लोग यहाँ क्यों आएं है, और बांकेलाल जी आप तैयार हैं चलने के लिए।

बांकेलाल : बिलकुल 💭हीहीही💭

ऐसा लग रहा है की बांकेलाल अपने मन में कोई कुटिल योजना बना रहा है, हीहीही

और तभी नागराज चिंतित हो उठता है

नागराज : अरे बाप रे हवलदार जी सिर्फ पांच मिनट बचे हैं हमे जल्दी आयाम द्वार तक पहुंचना होगा, आयाम द्वार छोटा होना शुरू हो चुका होगा!

HB : क्या!!! लेकिन आयाम द्वार तो जंगल के काफी अंदर है! इतनी जल्दी हम वहां कैसे पहुंचेंगे??

बांकेलाल : मेरे पास कालिया है।

और फिर वो तीनों जल्दी से कालिया पर सवार हो जाते हैं

बांकेलाल : चल कालिया, आज तुझे उतनी तेज़ भागना होगा। जितनी तेज़ तू ज़िन्दगी में कभी नही भागा।

कालिया : 💭बुहुहु एक घोड़े पे तीन तीन गधे, क्या मैं तेज़ भाग पाउँगा💭

और फिर कालिया उन तीनो को लेकर दौड़ पड़ा। उसी वक़्त नागराज न जाने किसे मानसिक सन्देश भेज रहा था

नागराज : “योजना का प्रथम चरण पूरा हुआ”

तभी जवाब आया

“शाबाश। हम प्रसन्न हुए आपके कार्य से नागराज। आपने और ध्रुव ने गज़ब का कार्य किया है”

●तृतीय अध्याय समाप्त●

क्रमशः

सबसे पहले तो आप सबसे माफ़ी चाहूँगा क्योंकि, मैंने वादा किया था की यह वाला पार्ट लास्ट होगा मगर मैं वादा पूरा न कर पाया। पर अब वादा करता हूँ। अगला पार्ट आखिरी होगा और आखिरी ही होगा

और आपको यह पार्ट कैसा लगा यह बात बताना तो बिल्कुल मत भुलियेगा

और क्या होगा अब?

क्या समय रहते तीनो पहुँच जाएंगे आयाम द्वार के पास??

या हवलदार बहादुर और नागराज हमेशा के लिए फंस जायेंगे बांकेलाल के युग में???

बांकेलाल के मन में कौनसी योजना चल रही है????

कौन था वो जिसे नागराज ने मानसिक सन्देश भेजा था?????

नागराज और ध्रुव ने कौनसा गज़ब का कार्य किया है??????

इन सारे सवालों के जवाब आपके मन में क्या आ रहे हैं हमे ज़रूर बताएं। और इंतज़ार करें इन सवालों का जवाब पाने के लिए

Written By – Talha Faran for Comic Haveli

 

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5 Comments on “Sarvnayak Se Trast Part 9”

  1. नहीं भाई ऐसा मत करना अगला भाग आखरी नहीं होना चाहिए अरे भाई जब कॉमिक्स इतनी लंबी है तो इसे भी लंबा ही खींचिए स सर्व नायक से त्रस्त हम सभी हैं बीच-बीच में ऐसी कहानियों से ही तो बड़ा लुफ्त आ रहा है ऐसा मत करना अगला / भाग इतनी जल्दी खत्म मत करना यह मेरी आपसे विनती ह

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