Sequence Part-4 (Final)

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अब तक आपने देखा कि दिल्ली में परमाणु एक लड़की को कुछ गुंडों से बचाता है जिसके बाद उसके सामने बिजली की तेज रोशनी होती है ठीक ऐसा ही प्रभात के साथ होता है । इस घटना से ठीक 2 दिन पहले की घटनाओं से पता चला कि यह सब रिवर्स की वजह से हुआ है जो कि भविष्य से वर्तमान में, डॉक्टर वायरस द्वारा बनाए गए एक यंत्र को बंद करने की जानकारी लेने आया था । भविष्य से इस समय में आने के लिए वह टाइम एनालॉग की जगह Dark Deep Space की पावर का उपयोग करता है जो Dark World से जुड़ी हुई थी और इसी वजह से Dark Realm का दरवाजा भी खुल गया क्योंकि Dark Realm भी Dark World से जुड़ा हुआ है हालाँकि समीर ने रिवर्स को रोकने के लिए प्लानिंग बनाई थी लेकिन रक्तबीज के साथ लड़ाई में व्यस्त होने के कारण वह इसमें कामयाब नहीं हो सका । Dark Realm का दरवाजा खोलकर रिवर्स वहाँ से बाहर आ जाता है पर उसे दरवाजे को बंद करने की जानकारी नहीं होती और इसी मौके का फायदा उठा कर बहुत सारे शैतान भी बाहर आ जाते हैं जिनमें octohead और पाशा जैसे दो ताकतवर शैतान भी थे । इसके बाद हो रही अलग-अलग घटनाओं के कारण सभी सुपर हीरो संयोगवश एक साथ आ जाते हैं और मिलकर पाशा का सामना करते हैं।
यहाँ तक कि कहानी आपने सीक्वेंस के पिछले तीन भागों में पढ़ी,

अब आगे->

समीर , निकिता , कीर्ति , प्रभात और रिवर्स सभी क्षतिग्रस्त बिल्डिंग में खड़े थे जहाँ की छत से टिप टिप कर पानी नीचे गिर रहा है जोकि उसकी क्षतिग्रस्त हो चुकी टंकी से निकल कर आ रहा था ।

समीर – कोई इस टिप टिप को बंद करेगा ।

रिवर्स – नहहहहीं…. रहने दो ,अच्छा लग रहा है… थोड़ी हॉरर वाली फीलिंग आ रही है ।

समीर – अबे लौंडे , तू तो चुप ही रह। यह सब तेरा ही किया धरा है , मुझे तो अब तक तेरे हाथ पैर तोड़ देने चाहिए थे । वो तेरह चौदह कम थे क्या जो उस बड़े से सांड को भी बाहर निकाल दिया ।

रिवर्स – म म म …मैंने यह जानबूझकर नहीं किया , हो जाता है यार , बच्चा हूँ।

समीर – बच्चा है , अभी थोड़ी देर पहले तो निकिता पर लाइन मार रहा था तब यह तेरा बच्चा पन कहाँ गया था ?
रिवर्स – नहीं यार , मैं लाइन नहीं मार रहा था मैं तो बस सच कह रहा था कि वह खूबसूरत है, हसीन है ब्ला ब्ला ब्ला…

समीर – चुप बिल्कुल चुप …..अब अगर आगे कुछ भी बोला तो मैं तेरे दाँत तोड़ दूँगा ।

रिवर्स – वैसे कीर्ति भी अच्छी है ।

समीर तिरछी निगाहों से रिवर्स की तरफ देखता है और रिवर्स मुँह पर उँगली रखता है और चुप हो जाता है ।

प्रभात – देखो दोस्त , वो बड़ा सा राक्षस…..

रिवर्स – खुला साँड़।

प्रभात – हाँ.. . बड़ा सा खुला सांड अभी भी बाहर है ,अगर परमाणु नाम का शख्स वक्त पर आकर हमारी मदद ना करता तो वो काफी तबाही मचा चुका होता क्योंकि हम तो उसको रोकने में पूरी तरह से नाकामयाब हो गए थे । पर वह भी किसी ब्रह्मांड रक्षक की बात कर यहाँ से चला गया ।

समीर – हाँ, उसने कहा था कि वह ब्रह्मांड रक्षकों की मदद करके आ रहा है , क्योंकि वह भी अकेले हैं, और किसी मुसीबत में हैं , उसने कहा था कि उसकी परमाणु रस्सियाँ उसे 6 घंटे तक बांधे रखेगी ।

प्रभात – पर अभी तक 2 घंटे का वक्त गुजर चुका है । शायद हमें दूसरा उपाय भी सोचना चाहिए ।

समीर – वह सब तो ठीक है लेकिन अभी ऑक्टोहैड भी आजाद घूम रहा है उसको पकड़ना भी जरूरी है ।

निकिता जो काफी देर से चुप खड़ी थी वह भी वार्तालाप में हिस्सा लेती है।

निकिता – वह तो हमसे बहुत दूर है अगर हम कार से जाएंगे तो शायद हमें 8 घंटे लग जाए पहुँचने में । और तुम दोनों जा नहीं सकते क्योंकि उसके बाद यहाँ पाशा को कौन सँभालेगा ?

समीर – इधर यह पाशा और उधर ऑक्टोहैड , हम दोनों तरफ बुरी तरह से फँसे हुए हैं और यह सब इस लड़के की वजह से हो रहा है । एक बार इस मुसीबत से निपट लूँ, फिर देखता हूँ इसका क्या करना है ?

निकिता – देखो उसने यह जानबूझकर नहीं किया, वह इस सब से अनजान था ।

समीर – तुम यह कैसे कह सकती हो ।

निकिता – क्योंकि जब हम यहाँ आए थे तब यह अकेला ही था जो पाशा से लड़ रहा था और बाद में तुम्हारे आने के बाद भी इसने पाशा से लड़ने में सब का साथ दिया । इससे एक बात का तो पता लगता है ,इसने पाशा को जानबूझकर बाहर नहीं निकाला ।

समीर – देखो गलती गलती होती है चाहे वो अनजाने में हो या जानबूझकर । इसकी इस गलती के कारण पूरी दिल्ली खतरे में आ चुकी है और इस गलती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता ।

निकिता – समीर….. ( कंधे पर हाथ फेरते हुए )

समीर – जब मैं इस मुसीबत से निपट लूंगा तब इसे भी डार्क रील्म में बंद कर दूँगा ।

कीर्ति – ताकि यह फिर से बाहर आ सके …यह मत भूलो कि इसके पास Dark realm का दरवाजा खोलने की पावर है ।

समीर – समझ में नहीं आ रहा कि यह पावर इसके पास आई कैसे?

रिवर्स से बिना बोले कंट्रोल नहीं हो रहा था वह भी रुकिए रुकिऐे कहते हुए बीच वार्तालाप में आ कूदता है ।

रिवर्स – देखिए कीर्ति मैडम …हो सकता है मैंने आपकी तारीफ कम की हो ….पर इसका मतलब यह नहीं कि आप समीर भैया को मेरे खिलाफ भड़काएँ , रही बात डार्क Realm का दरवाजा खोलने की तो मेरे पास ऐसी कोई पावर नहीं है जिससे मैं यह दरवाजा खोल सकूँ ।मैंने तो अपनी डीप डार्क स्पेस वाली पावर का इस्तेमाल किया था ,जिससे यह दरवाजा खुल गया ।

प्रभात – deep dark space वाली पावर , तुम इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हो ?

समीर – क्या तुम इसके बारे में जानते हो प्रभात ?

प्रभात – हाँ, यह जिस पावर की बात कर रहा है उसे हमारे शब्दों में अंधेरी दुनिया को नियंत्रित करने वाली शक्ति कहा जाता है । इस शक्ति के जरिए हर उस आयाम को खोला या बंद किया जा सकता है जो अंधेरी दुनिया से संबंधित होता है, पर यह बात फिर भी सोचने वाली है कि यह शक्ति उसके पास कैसे आई क्योंकि जहाँ तक मुझे पता है इस पर सिर्फ उन्हीं लोगों का अधिकार होता है जिन्होंने अजेक्स गॉड से पँगा लिया हो ।

समीर – अजेक्स गॉड ?यह कौन से भगवान हैं।

प्रभात – जिस तरह हमारी इस दुनिया के भगवान हैं, उसी तरह यह भी भगवान हैं लेकिन किसी दूसरी दुनिया के , यह भगवान हमारे भगवानों से कम शक्तिशाली है लेकिन तकनीक में काफी आगे हैं उन्होंने काफी ऐसी तकनीक खोजी है जो अपने आप से अलग हैं और यह डीप डार्क स्पेस की शक्ति उसी का एक उदाहरण है । अजेक्स गॉड इस शक्ति का इस्तेमाल एक दुनिया से दूसरी दुनिया में जाने के लिए करते थे‌।

समीर – और तुम इन सब बातों के बारे में कैसे जानते हो ?

प्रभात – यह कोई बड़ा सवाल नहीं है ।मैं जिस समय काल में रहता हूँ वहाँ इनका आना जाना लगा रहता है ।

निकिता – पर हमने इनके बारे में कभी नहीं सुना। न ही इतिहास के पन्नों में पढा़ ।

प्रभात – शायद तुम यह बात नहीं जानती कि मैं जिस समय काल में रहता हूँ वहाँ ना ही किसी को लिखना आता है ना ही पढ़ना तो इस बात का इतिहास मे आने के सवाल ही नहीं उठता । हमारे समय में उसे समझाने का एक ही तरीका है और वह है गुफाओं की दीवारों पर चित्र लिपि करना और उसे यहाँ के लोग एलियन समझ लेते हैं ।

कीर्ति – पर तुम तो अपने समय से काफी ज्यादा एडवाँस लग रहे हो क्योंकि तुम्हारी बातों से लग रहा है तुम्हें हर एक चीज की जानकारी हैं ।

प्रभात – मेरा यह दिव्य फरसा , यह फरसा मुझे जिस शख्स ने दिया था उसने मुझे यह सब कुछ सिखाया , बताया, मेरी शिक्षा दीक्षा उसी ने की , इस वजह से मुझे काफी जानकारी है ।

निकिता – यह शक्ति रिवर्स के पास है इसका मतलब कि वो कोई आम इंसान तो हो नहीं सकता ‌। बताओ रिवर्स तुम कौन हो ।

रिवर्स – यह सब तुम मेरे ओरिजन में पढ़ लेना मैं तुम लोगों को भेज दूंगा ।

निकिता – मतलब ???

रिवर्स – मतलब भविष्य में मुझ पर किताबें छपती हैं , जिसमें मेरे बारे में सब जानकारी है उतनी जितनी मुझे पता है । हो सकता है बहुत जल्द मुझ पर कोई फिल्म भी बन जाए ।
निकिता – तुम मजाक कर रहे हो या सच कह रहे हो ।
रिवर्स – नहहहीं ……मैं कभी मजाक नहीं करता …..हाँ मैं तुम्हें अपनी फिल्म में लेना नहीं भूलूँगा ।

समीर – छोड़ो वैसे भी मुझे इस रिवर्स की कहानी जानने में कोई इंटरेस्ट नहीं , हमें इस समस्या को सुलझाना है । उसके बाद रिवर्स अपनी दुनिया में और हम अपनी दुनिया में , ना यह कभी यहाँ आएगा और ना हम कभी वहाँ जाएंगे । यह हमारी और रिवर्स की पहली और आखिरी मुलाकात है ।

रिवर्स – हाँ ठीक है… एक बार मुझे मेरा रिमोट मिल जाए तो मैं भी यहाँ से चला जाऊँगा ..बाद में आऊँगा या नहीं आऊंँगा यह तो मुझे भी नहीं पता ।

कीर्ति – तुम्हारा वो रिमोट मेरे पास है जाते वक्त परमाणु मुझे दे गया था ।

रिवर्स – ( मन ही मन में ) अबे यार यह कीर्ति तो पक्का मेरे पुराने जमाने की दुश्मन है , मेरे पास रिमोट ही एक ऐसा बहाना था जिससे मैं यहाँ रुक सकता था , अब क्या करूँगा ‌।

समीर – लाओ ..यह इसको दे दो ताकि यह यहाँ से जा सके ।

कीर्ति रिमोट रिवर्स को दे देती है और रिवर्स थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए रिमोट को तेजी से कीर्ति के हाथों से ले लेता ।

रिवर्स – ( धीमी सी आवाज़ में ) तुमको तो मैं छोडूँगा नहीं ।

समीर – ठीक है रिवर्स ..अब तुम यहाँ से जा सकते हो ।

रिवर्स – हाँ वो तो है… पर मैं क्या कह रहा था बड़े भैया अगर मैं यहाँ से चला गया तो आप लोगों की मदद कौन करेगा ?
समीर – नहीं हमें तुम्हारी मदद की कोई जरूरत नहीं। वैसे भी तुम तो हमारे काम बढ़ा रहे हो ‌। इसलिए तुम्हारा यहाँ से जाना ही ठीक है ।

रिवर्स – अरे बड़े भैया …मैं भला अपने बड़े भाई को छोड़कर कैसे चला जाऊँ ….वह भी इतनी बड़ी मुसीबत में ….उस बड़े से सांड के सामने , बस मैंने सोच लिया, मैं यहां से तब तक नहीं जाऊँगा जब तक मैं उस सांड को हरा ना दूँ, और यह मेरा प्रेम है ।

निकिता कीर्ति ( एक साथ ) – प्रेम है ???

रिवर्स – मम मम मम मेरा मतलब मेरा प्रण है प्रण ,,, यह मेरा प्रण है । वह जो अग्नि को …..साक्षी मानकर….. मैं शपथ लेता हूँ …..वैसा वाला , वही वाला , मैंने महाभारत में देखा था ।

समीर – नहीं नहीं रहने दो , हमें तुम्हारी किसी भी मदद की जरूरत नहीं ।

Nikita – wait just a minute , तुम्हारे पास सुपर स्पीड है ना ?

reverse – हाँ वो तो है … क्यूँ??

निकिता – ठीक है तुम रेगिस्तान में जाओगे और वहाँ ऑक्टोहैड से लड़ोगे और उसे अपनी डीप डार्क स्पेस वाली पावर से ही डार्क रील्म में बंद कर दोगे‌।
और वहीं से अपने घर वापस चले जाना ।
कीर्ति – हाँ यह सही आइडिया है ।

रिवर्स – क्या सही आइडिया है …मैं जानता भी नहीं यह ऑक्टोपैड वेड क्या है ।

कीर्ति – मुझे लगता है तुम्हारी इंग्लिश बहुत वीक है , पर अब तुम यही करोगे।

रिवर्स – बड़े भैया आप ही समझाइए ना मैं उस टोक्टोहेड से नहीं लड़ सकता ।

समीर – कीर्ति और निकिता दोनों सही कह रही हैं , तुम्हारे पास बस यही एक तरीका है अपनी गलती सुधारने का ।अब जाओ और जाकर उस ओक्टोहेड को वापस डार्क रील्म में बंद करो‌ ।

रिवर्स – हाँ ठीक है अब आप सब लोग इतना जोर देकर कह रहे हैं तो जाना ही पड़ेगा , वादा निभाना ही पड़ेगा । अरे हाँ प्रभात भैया मैं आपको ajax God के बारे में और बताऊँ क्या ?

समीर – रिवर्स ……..

रिवर्स – हाँ हाँ जा रहा हूँ..बड़े भैया … अच्छा चलता हूँ…. दुआओं में याद रखना….. चिट्ठी तारों की तारों की….. अपने पास रखना……

कीर्ति – हाँ ठीक है .. bye

रिवर्स – उजाला सवेरा….. तेरे नाम किया….. अँधेरा…. तेरा …..ले ले ले लिया …. आ ।।। आ।।।आ।।।

समीर – मैंने यह पूरा गाना सुन रखा है …जाओ अब ।

रिवर्स – ठीक है …..ठीक है, बाय निकिता जी , बाय बड़े भैया जी , बाय प्रभात भैया जी , बाय कीर्ति ।

कीर्ति – हाँ ठीक है भाई ।

निकिता – बाय अपना ध्यान रखना ।

रिवर्स – वाह निकिता जी आप कितनी अच्छी हैं , आपका नाम भी कितना अच्छा है । किसने रखा ये ?
समीर – स्वर्ग से देवता आए थे रखने …. बस अब जान लिया …खुश… चलो जाओ अब ।

रिवर्स – अरे निकिता जी मैं वो कह रहा था कि जाते-जाते आपका नंबर मिल जाता तो , कभी कभार आपको फोन कर लिया करूँगा ।

कीर्ति – तुम फ्यूचर से हो और शायद ऐसी कोई तकनीक नहीं की फ्यूचर से भूतकाल में कोई फोन किया जा सके इसलिए रहने दो ‌। हाँ , पर यह डिवाइस ले जाओ इसमें सागर की लोकेशन है ।

रिवर्स ( उस डिवाइस को पकड़ते हुए ) – हाँ वो भी है , अच्छा चलता हूँ अब मेरी बातें खत्म हो गई ।
रिवर्स बिल्डिंग की दीवार के पास जाता है जो कि थर्ड फ्लोर पर थी और टूटी हुई थी । धीरे धीरे रिवर्स उल्टे पाँव से दीवार के पीछे की तरफ जाता है और वहाँ से नीचे उल्टा कूदते हुए अपना सुपर एक्शन दिखाता है और जमीन पर एक सुपर हीरो वाली लैंडिंग करता है और लैंड करते ही सुपर स्पीड पकड़ रेगिस्तान की तरफ चल देता है ।

समीर – चलो रिवर्स से तो छुटकारा मिला…. अब इस पाशा का क्या करना है यह सोचना पड़ेगा ।

निकिता – पाशा इस वक्त अपने विराट रूप में है अगर हम किसी तरह से इसका आकार छोटा कर दें तब हम इसे आसानी से डार्क रील्म में फेंक सकते हैं ।

समीर – पर हम उसका आकार छोटा कैसे करेंगे ।

निकिता – परमाणु । उसके पास एक ऐसी तकनीक है जिससे वह किसी का भी आकार छोटा या बड़ा कर सकता है ‌‌।

समीर – पर वह तो ब्रह्मांड रक्षकों से मिलने निकल गया ।

निकिता – हाँ उसने कहा था कि उसका कोई दोस्त मुसीबत में है, मैं कुछ ही समय में वापस आ जाऊँगा। तब तक मेरी परमाणु रस्सियाँ इसे रोके रखेंगी ।

अभी निकिता की बात पूरी नहीं हुई थी कि एक उड़ता हुआ दीवार का टुकड़ा तेजी से उसकी तरफ आता है ।

समीर – बचो निकिता !

इससे पहले कि टुकड़ा निकिता और आसपास के लोगों से टकराता समीर तेजी से उस टुकड़े को अपने हाथों से विपरीत दिशा में जोर लगाते हुए रोक लेता है और उसे बाहर फेंक देता है ।

सब समीर के पास आकर बाहर देखते हैं , जहाँ उनके सामने पाशा खड़ा था । वह अब आजाद हो चुका था , उसकी परमाणु रस्सियाँ टूट चुकी थीं। उसके दूसरे हाथ में एक और टूटी दीवार का टुकड़ा था जिसे उसने अपनी मुट्ठी में भींच कर मिट्टी बना दिया ।

रिवर्स की स्पीड प्रकाश की स्पीड के जितनी तो नहीं है पर फिर भी वह 30 किलो मीटर पर सेकंड की स्पीड से दौड़ सकता है जो उसकी कंफर्ट जोन वाली स्पीड है । इस स्पीड से उसे दिल्ली से राजस्थान के बीच की 600 किलोमीटर ( दिल्ली से राजस्थान के उस हिस्से तक जहां पर रेगिस्तान था) कि डिस्टेंस तय करने में मात्र 20 सेकंड लगे ।

रेगिस्तान जहां सागर और सार्थक एक हाथ मे आग की बनी मसाल और दूसरे हाथ में तेज लोहे का बॉल लेकर ऑक्टोहेैड को घेरने की कोशिश कर रहे थे । रिवर्स के वहाँ पहुँचते ही

रिवर्स – ओ तेरी , तो यह अजीब सा दिखने वाला प्राणी ही ऑक्टोहैड है । हे भगवान कैसे कैसे प्राणी पैदा कर रखे हैं तुमने इस धरती पर । इसकी ना तो शक्ल अच्छी है ना ही सूरत , बेचारे की तो कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं होगी ।

तभी ओक्टोहैड जो सागर और सार्थक को कुछ बोलता है ।

ओक्टोहैड – दूर हटो जाओ मुझसे नादान बच्चों । सागर सार्थक से – हम इसे डराने के सिवा और कुछ नहीं कर सकते क्या ‌।

सार्थक – इसे रोकने का तो फिलहाल एक ही तरीका है और वह है इसे डार्क रील्म में बंद करना जिसके लिए समीर का यहाँ होना जरूरी है ।

तभी रिवर्स दोनों के बीच आता है और दोनों से आगे निकलते हुए ओक्टोहैड के सामने जाकर बोलता है

रिवर्स – इसीलिए तो मैं यहाँ आया हूँ , क्योंकि मैं हूँ
….
इससे पहले कि रिवर्स की बात पूरी होती ओक्टोहैड जबरदस्त लात रिवर्स को मारता है और रिवर्स मिट्टी में घिसटता हुआ दूर के टिब्बे ( रेत का बड़ा ढेर ) के अन्दर जा गिरता है । और सागर और सार्थक दोनों उसे इस हालत से गुजरते हुए अजीब तरीके से देखते हैं ।

रिवर्स ( मुँह से मिट्टी निकालते हुए ) -क्योंकि मैं हूँ रिवर्स , आज तो सब जगह बेइज्जती बेइज्जती हो रही है , चल बेटा अब ज्यादा टाइम वेस्ट मत कर इससे पहले कि तेरी और ज्यादा बेइज्जती हो इस ओक्टोहैड को इसकी जगह पर पहुँचा दे ।

रिवर्स खड़ा होता है और अपने साथ आठ प्रतिरूप में बदलता है तथा सुपर स्पीड से कलाबाजी दिखाने लगता है । अपनी सुपर स्पीड में ही वह पहले तो सागर और सार्थक को उस जगह से थोड़ा दूर करता है फिर अपने अलग अलग प्रतिरूपों की मदद से octohead के आसपास चक्कर लगाने लगता है । 30 किलोमीटर पर सेकंड की स्पीड और उसके साथ आठ प्रतिरूप की मिलीजुली गति यह काफी थी octohead के आसपास एक मिट्टी का बवंडर पैदा करने के लिए । देखते ही देखते आसपास आँधी तूफान का मौसम सा हो जाता है और वातावरण में बस रेत ही रेत हो जाती है , वह भी इतनी ज्यादा कि उसमें कुछ भी साफ से दिखाई नहीं दे रहा था । रिवर्स को पता था कि शायद ऐसा होने वाला है इसलिए वह अपने साथ एक काला चश्मा पहले ही ले आया था ।‌रिवर्स चश्मे को अपनी आँखों से लगाता हुआ octohead के पास जाता है ठीक उसके पीछे ‌ ,और बोलता है
रिवर्स – शू… तुम्हारा समय खत्म हुआ गंदे बंदे से प्राणी ।
जैसे ही ओक्टोहैड पीछे पलटता है रिवर्स वहाँ से गायब हो जाता है अपने सुपर स्पीड की मदद से , और वहाँ अब रिवर्स की जगह एक गोल काला सा घेरा था जो ब्लैक होल की तरह दिखता था । इससे पहले कि octohead के दिमाग में यह बात आती है कि वह डार्क रील्म का दरवाजा है रिवर्स के प्रतिरूप पीछे से आकर उसे धक्का दे देते हैं जिससे ओक्टोहैड सीधे डार्क रील्म के अंदर चला जाता है और इस तरह ओक्टोहैड वाली समस्या भी खत्म हो जाती है ।

रिवर्स – सॉरी भाई लोगों ….यह दरवाजा खुला हुआ है इसलिए मेरे पास तुम लोगों से ज्यादा बात करने का वक्त नहीं है पर मैं तुम लोगों को इतना बता देता हूँ कि मुझे समीर और निकिता नें यहाँ भेजा था तुम्हारी मदद करने के लिए , बाकी की बातें तुम लोग उन्हीं से जान लेना , बाय मैं अब चलता हूँ ।

सागर – समीर और निकिता ने भेजा था पर यह था कौन ?
सार्थक – पता नहीं पर जो भी हो हमारी समस्या तो खत्म हुई ।

पर एक समस्या अभी भी बाकी थी जो कि दिल्ली में थी , समीर और प्रभात दोनों पाशा से लड़ने में व्यस्त थे और अब निकिता और कीर्ति भी उसका साथ दे रहे थे । प्रभात अपने फरसे से लड़ रहा था तो समीर अपनी शक्तियों से , वहीं निकिता और कीर्ति के पास स्पेशल तरह की गन्स थीं जिनसे वह चुप चुप कर पाशा पर हमला कर रही थीं।
समीर एक तेज रोशनी का हमला पाशा की आंँखों पर करता है ।
ठीक इसी वक्त प्रभात अपने फरसे का जबरदस्त वार उसकी गर्दन पर करता है ।
पाशा के मुँह से हल्की सी आह निकलती है ।
समीर पीछे से घूमते हुए फिर से उसके सामने आता है, और ,एक और रोशनी का वार उसकी आँखों पर करता है ।
प्रभात अपने फरसे का वार उसकी गर्दन की दूसरी साइड पर करता है ।
पाशा अपने दोनों हाथ अपनी गर्दन पर रख लेता है ताकि वह अपनी गर्दन पर होने वाले आघात से बच सके ।
निकिता और कीर्ति अपनी गन से उसके हाथ पर फायर करती हैं ।
समीर अपनी शक्तियों से एक ऊर्जा रस्सी बनाता है और उसे पाशा की गर्दन में डाल देता है तथा उसे खींचता है ।‌

पाशा उस ऊर्जा रस्सी को पकड़ते हुए खुद को खींचने से बचाता है ।

मौके का फायदा उठाकर प्रभात अपने फरसे का एक के बाद एक वार उसकी गर्दन पर करता है ।

पाशा अपना हाथ ऊर्जा रस्सी से हटाकर फिर से अपनी गर्दन पर रख लेता है जिससे पाशा को एक जबरदस्त झटका लगता है और पाशा सामने कि तरफ नीचे गिर जाता है ।

तभी परमाणु वहाँ पहुँचता है ।

परमाणु – दोस्तों कहीं मुझे आने में देरी तो नहीं हुई , माफ करना मेरा एक बहुत ही जिगरी दोस्त ध्रुव थोड़ा मुश्किल में था जिसके लिए मुझे जाना पड़ा ।‌

समीर – नहीं तुम वक्त से थोड़ा पहले ही आए हो, हमारे पास एक उपाय है इसे रोकने का ।

परमाणु – वह क्या है ।

समीर – अगर तुम अपनी शक्तियों से इसे छोटा कर दो तो हम इसे डार्क रील्म में फेंक सकते हैं ।
परमाणु – समझ गया मुझे क्या करना है ।
परमाणु पाशा के पास जाता है और अपनी परमाणु बेल्ट से कुछ अजीब सी रोशनी निकालते हुए पाशा के ऊपर डालता है जिससे देखते ही देखते पाशा का आकार छोटा होने लगता है तो वहीं समीर की ऊर्जा रस्सी उसे अच्छे से जकड़ लेती है ।

अपनी आँखें बंद करते हुए समीर डार्क रील्म का दरवाजा खोलता है और जैसे ही पाशा का आकार उपयुक्त छोटा होता है वैसे ही उसे खींचकर डार्क रील्म में फेंक देता है ।

Sameer – उफफफ मुसीबत टली ।

समीर के साथ-साथ प्रभात निकिता और कीर्ति भी राहत की साँस लेती हैं।

परमाणु – मजा आया इसके साथ लड़कर , मेरे लिए इसे हराना तो बाएँ हाथ का खेल था ।

समीर – हाँ क्यों नहीं आप हमसे सीनियर जो हो‌।

परमाणु के हाथ में लगी घड़ी टूं टूं की आवाज करती है ।

परमाणु – माफ करना दोस्त शहर को मेरी जरूरत है मुझे चलना होगा ।

इतना कह के परमाणु वहाँ से चला जाता है ।

समीर – बाय दोस्त …उम्मीद करता हूँ कि रिवर्स ने भी अपना काम पूरा कर दिया होगा ।

निकिता – हाँ अभी सागर का फोन आया था, रिवर्स ने ऑक्टोहेड को वापस बंद कर दिया , और वह वापस अपनी दुनिया में भी चला गया ।
समीर – मतलब रिवर्स नाम की समस्या भी खत्म हुई ।
कीर्ति – हाँ वह तो है ।
समीर कीर्ति निकिता और प्रभात चारों थोड़ी दूर पर ही बनी एक जूस की दुकान पर जाते हैं और एक-एक जूस का गिलास आर्डर करते हैं ।

निकिता – वैसे मैं क्या कह रही थी क्यों ना हम एक टीम बनाएँ । एक सुपर हीरो की टीम । जो इसी तरह बड़ी-बड़ी समस्याओं से लड़ा करेगी ।
समीर – हा हा हा टीम वह भी सुपर हीरो की यहाँ सुपरहीरो है कहाँ ‌?
निकिता – नहीं …तुम एक सुपर हीरो हो यह प्रभात भी एक सुपर हीरो जैसे ही काम करता है और हम सब , हम सब भी कौन सा किसी सुपर हीरो से कम हैं , शायद हम लोग एक अच्छी टीम की तरह काम करेंगे ‌।

समीर – तुम यह टीम वीम की बातें भूल जाओ , और वैसे भी मुझे नहीं लगता कि ऐसा मौका फिर कभी आएगा ।

निकिता – यह तो वक्त वक्त की बात है क्या पता आने वाले समय में इससे भी कोई बड़ी समस्या आ जाए , और तब हम सब को फिर से एक साथ इकट्ठा होना पड़े ।

समीर – यह तो वक्त ही बताएगा‌ ।

कीर्ति – क्या रिवर्स भी हमारी टीम का हिस्सा होगा ??

समीर – नहीं नहीं मैं उस नमूने को अपनी टीम में नहीं देखना चाहता , जो हमेशा ड्रामेबाजी करता रहता है ।

कीर्ति – हा हा हा मी टू।

समीर – अच्छा मैं प्रभात को वहाँ छोड़ आता हूँ जहाँ से इसे लेकर आया था ।

निकिता – ठीक है पर जल्दी आना ।

इसी के साथ समीर और प्रभात वहाँ से प्रस्थान करते हैं ।

उनके जाने के बाद

कीर्ति – वैसे सुपर हीरो टीम वाला आइडिया अच्छा है पर हम उसका नाम क्या रखेंगे और उसमें कुल कितने मेंबर होंगे और कौन-कौन ।

निकिता – यह अभी बहुत दूर की बात है पर रही बात नाम की तो वह मैंने सोच रखा है । उसका नाम होगा होगा
सीक्वेंस…
द सीक्वेंस…।
Kirti – वाह! यह तो बहुत अच्छा नाम है ।
निकिता – हाँ तो रखा भी किसने है ।
इसी के साथ सागर ,समीर, सार्थक, निकिता, कीर्ति और प्रभात की कहानी यहीं पर समाप्त होती है, पर रिवर्स की कहानी अभी भी बाकी थी । जो कि इस वक्त डॉ डी की स्पेस शिप में बैठकर सिपुड़ सिपुड़ कर फ्रूटी पी रहा था और डॉक्टर डी को अब तक की अपनी पूरी कहानी सुना रहा था ।

डॉ डी – तुम्हारी फ्रूटी कब की खत्म हो चुकी है , अब क्या पूरा डब्बा पियोगे ।

रिवर्स – अरे डॉक्टर जी खत्म होने के बाद ही तो मजा आता है , चाहे वह फ्रूटी हो या फिर कोई कहानी । पर मैंने यह नहीं सोचा था कि मेरी कहानी इस तरह खत्म होगी । मतलब पहली बार मैं एक अलग दुनिया में गया और वहाँ पर मैंने कुछ इंजॉय भी नहीं किया ।

डॉक्टर डी – तो अब तुम्हारा इरादा क्या फिर से वहाँ वापिस जाने का है ?
रिवर्स – हो भी सकता है । क्या पता इस कहानी का कोई सीक्वल बन जाए ।
डॉ डी – हाँ पर इसके लिए तुम्हें अपनी वर्ड मिस्टेक सुधारनी होगी , तुम आजकल बहुत गलतियाँ करते हो जिससे कहानी में मजा नहीं आता ,खासकर इंग्लिश वाले शब्दों में ।

रिवर्स – हाँ ये भी कर लूँगा …. कभी वक्त मिला तो ……

DR D – वक्त …..वक्त ही तो एक ऐसी चीज है जो कभी मिलती नहीं…. एक वक्त था जब…
रिवर्स – अरे डॉक्टर डी वह सब छोड़िए, आपके पास लड़कियों के साथ फ्लर्ट करने के कुछ आइडियाज है क्या , वो…….वो‌…. क्या है ना नीचे धरती पर जाकर निधि से भी तो मिलना है ।

डॉक्टर डी – हे भगवान रिवर्स तुम कभी नहीं सुधरोगे ।
____THE END____

हर एक लेखक अपनी कहानी लिखने में उतनी ही मेहनत करता है जितनी उसे करनी चाहिए लेकिन फिर भी कभी कभार गलतियों का होना जायज है, क्योंकि कहते हैं ना कि गलती इंसान से ही होती है , पर गलतियों को सुधारा जा सकता है जिसमें आपकी भी थोड़ी सी भागीदारी का होना जरूरी है ।
अगर आप किसी भी कहानी को पढ़कर सिर्फ 2 मिनट निकालकर उसके बारे में दो शब्द लिखेंगे तो शायद यह एक लेखक के लिए अपनी गलती सुधारने का सबसे सुनहरा मौका होगा ।और साथ ही साथ यह लेखक को प्रेरणा देगा , आगे बढ़ने के लिए,आगे और भी कहानियाँ लिखने के लिए , अगर मैं दूसरे शब्दों में कहूं तो शायद आपके यह 2 मिनट किसी एक लेखक की पूरी जिंदगी बदल सकते हैं । तो कृपया किसी भी लेखक को यह 2 मिनट देने के लिए कभी ना चूके । कहानी चाहे आपको अच्छी लगे या बुरी उसके बारे में दो शब्द जरूर लिखना चाहिए ।
इसी के साथ मैं आपका writer Aman Aj आपसे इजाजत लेता हूँ, लेकिन सिर्फ अभी के लिए , क्योंकि हमारी फिर मुलाकात होगी किसी और जगह किसी और कहानी में, एक नए सफर के साथ ,कुछ नई चीजों के साथ …..
तब तक के लिए शुभ नवरात्रि , और नवरात्रि की ढेरों शुभकामनाएँ।

धन्यवाद

Written By – Aman for Comic Haveli

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One Comment on “Sequence Part-4 (Final)”

  1. दमदार कहानी का दमदार अंत। शुरुआत में रिकैप देकर आपने अच्छा किया और इतना लम्बा रिकैप देकर तो और भी अच्छा किया। पिछले कहानी अच्छे से याद आ गई। यह कहानी शुरू जिसकी वजह से हुई थी, खत्म भी उसकी वजह से हुई, यानी रिवर्स । पहली बार कॉमिक हवेली के इतने सारे हीरोज़ एक साथ थे देखकर बड़ा अच्छा लगा और मज़ा आया। आप बहुत अच्छा कर रहे हैं Aman भाई। लगे रहिए। मुझे वह वाला सीन नही भूल रहा जब रिवर्स डायलॉग मारता हुआ जाता है भौकाल है और उसे ऑक्टहेड मार कर रेत में धँसा देता है। बेचारे का डायलॉग भी पूरा नही हो पाया। ही ही। और डॉक्टर डी का वह डायलॉग “तुम्हारी फ्रूटी कब का खत्म हो चुकी है अब क्या डब्बा ही पी जाओगे।” क्या बात क्या बात। आपकी अगली स्टोरी यानी फर्मीऔन के नेक्स्ट पार्ट का बेसब्री से इंतज़ार है।

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