Shaktiloota Part-2

शक्तिलूटा

भाग-2

तिरंगा:-अरे ये क्या!! इसका मतलब हम किसी और ग्रह पर नही गए है, पृथ्वी पर ही है, फिर वो टेलीपोर्टेशन….!!!

गड़बड़ है ,बहुत ही ज्यादा गड़बड़ चल रहा है, और कोई समझ नही सकता कि कितना गड़बड़ है,

अरे!! ये क्या ये सब यहाँ क्या कर रही है..!!?

(तभी तिरंगा को जोरदार झटका लगता है, जोर से लात पढ़ी थी उसके मुंह पर, वो सम्भलने की कोशिश कर है “मगर दनादन पड़ रहे घुसे और लातो की वजह से बेहोश हो जाता है”) मगर उसे ऐसा महसूस हो रहा था, ये तो एक स्पेशल स्प्रे का कमाल था ,जो उसके आते ही उसपर छिड़क दिया गया था, जो अब असर कर रहा था।

बांध दो इसे ,अगर किसी भी तरह ये बाहर चला गया तो सारा प्लान चौपट हो जाएगा-उनमे से एक बोली

अए सुन ज्यादा स्याणी मत बन, ये हम सबका प्लान है,सबको मिलकर काम करना है,अगर उनको तुमलोग सच मे मज़ा चखाना चाहती हो तो।-:उन्ही में से दूसरी बोली

अरे यार अब तक वो क्या कर रही है, क्या करने गयी है, अब तक नही आई।

पता नही, पर आ ही रही होगी – जवाब देते हुए उनमे कोई एक बोली।


इधर, उसी महल के बाहर, तिरंगा और शक्ति के जाने के बाद एंथोनी भी जाने लगता है,

अब तू कहा जाने लगा बे मुर्दे!-:डोगा उसे रोकते हुए बोला

एंथोनी:- अरे वो क्या है न कि सुबह होने वाली है ,और मैं सिर्फ रात भर ही जग सकता हूँ मतलब बाहर घूम सकता हूं, सुबह मुझे मेरी कब्र में जाना होता है ।

ओह्ह, यह सब तो ठीक है एंथोनी मगर यह से तुम अपनी कब्र में कैसे जाओगे- ध्रुव ,एंथोनी को टोकते हुए पूछा

आ !..कैसे जाऊंगा,कैसे जाऊंगा (अरे उन्होंने तो कहा था कि सुबह होने से पहले मैं रूपनगर में होऊंगा, और वे झूठ नही बोल सकती है ,इतना तो यकीन है ही मुझे उनपर) वो तो मुझे नही पता ध्रुव पर मैं चला जाऊंगा।

नागराज :- तो फिर ठीक है, तुम्हे जाना चाहिए,(अभी तो इन इज्जतवालो की बेइज्जती का शानदार मौका मिलने वाला है) सुबह भी होने वाली है।
तो ध्रुव स्टील का क्या हुआ , कुछ ठीक हो रहा है,

पता नही शायद, मुझे तो कुछ पता ही नही चल रहा। : ध्रुव लाचारों जैसी हालत बनाकर बोला।

वाह वाह नही नही वाह ,ये है दुनिया के सबसे तेज दिमागधारी, और एक मशीन ठीक न हो रही है इनसे , दिमाग कहा गया रे भइवा ,
ऊ..ऊ.. याद आया काढ़ा तो खत्म होइ गया होगा दिमाग कैसे काम करे बेचारे का ,हहहहहहह . .. .. : नागराज ठहाका मार के हँसने लगता है।

ध्रुव : (इसे क्या हुआ अब ये क्यों ऐसा पागलपंथी करने लगा,) क्या हुआ नागराज,(अपने गुस्से पर काबू करने की कोशिश करते हुए) तुम ऐसे कैसे बात कर रहे हो, स्टील हमारा दोस्त है,उसे मैं बचाने की पूरी कोशिश कर रहा हूं पर मैं कोई इंजीनियर या वैज्ञानिक नही हूँ ।

नागराज: वही तो , वही तो कह रहा हूं मैं।
हहहहहहहह …… ..

ध्रुव: देखो नागराज मुझे गुस्सा मत दिलाओ प्लीज ,

नागराज: नही तो क्या कर लेगा तू मेरा, बोल न .. हा हा बोल भी, क्या करेगा तू मेरा,

ध्रुव:- नागराज प्लीज! मौके की नजाकत को समझो।

डोगा: तो गलत क्या कह दिया इसने ,तुम ! तुम दोनों! हा तुम भी (परमाणु की तरफ़ इशारा करते हुए जो स्टील के सिर के बगल में बैठा हुआ उसके ठीक होने का इंतज़ार कर रहा था)
दोनों महान आत्मा हो ,एक विज्ञान का तो एक दिमाग का, काहे का धुरन्धर हो भाया।

परमाणु: (डोगा से) तू तो बोल ही मत बे, सब तेरी वजह से हो रहा है,न तो तू मिसाइल छोड़ता न ही स्टील इंजर्ड होता और जो बात बताने वाला था बता देता, हो सकता है वो हमारे लिए महत्वपूर्ण बात रही हो, हो सकता है उसे कुछ ऐसा पता चला हो जिससे हम अपने दुश्मन का पता लगा लेते।

डोगा: दुश्मन हहहहहहह……..

नागराज : तो फिर ठीक करो न जल्दी इसे

डोगा: कैसे ठीक करेगा बेचारा , च च च ….
इसका तो हरेक काम तो वो… ‘उस रोबोट नाम क्या है’ याद आया प्रोबाट को करना पड़ता है, हहहहहहह ……..

नागराज: बात तो बिल्कुल सही किये हो डोगा, एकदम पॉइंट पकड़े हो

ध्रुव: तुम दोनों चुप करोगे, जा बे डोगा कहाँ जा रहा था , साला कुछ आता जाता है नही बन्दूक उठाने आये है

डोगा: अये ध्रुव , जरा तमीज से, नही तो एक गोली में सारा काढ़ा निकल जायेगा हहह……

नागराज:(डोगा का समर्थन करते हुए) हाँ !क्यों नही हहहहह……

परमाणु:(ध्रुव के कान में) लगता है पगला गए है ससुर, ये दोनों हहह…..….(हँसी रोकने की कोशिश करता फिर भी हँसी छूट ही जाती है )

ध्रुव : हम्म ,लग तो रहा है,

डोगा:(नागराज से) ये दोनों आपस मे कान में क्या बात कर रहे है जो हँसी आ रही है

नागराज: अरे रहने दो डोगा भाई, ऐसे ही पगला गए है ससुर

ध्रुव: वही तो, तुमने हमारे मन की बात कैसे जाना ली हहहहह…….
पेट फूल गया रे, थोड़ा सांस ले लू।

परमाणु: अरे ये देखो ध्रुव इसने(स्टील ने) हल्की सी हरकत की है, और इसका ऑटोमैटिक रिअपेयरिंग सिस्टम ऑन हो गया है, जल्द ही ठीक हो जाएगा ।

ध्रुव : वाह , ये तो अच्छी बात है,


अब क्या आर्डर है मैडम , – हास्यदेव अंदर किसी से पूछता है,

अब तुम्हारा काम खत्म हुआ ,तुम दोनों अंदर सेल में जाओ,जब जरूरत होगी बुला लिए जाओगे : जवाब मिला

(फिर दोनों सेल में चले गए जहाँ उनको निस्चेत कर दिया गया)

प्लान A के साथ B भी सक्सेसफुल हुआ, चीयर्स – उनमे से कोई एक बोली

सक्सेस हो गया है मगर पूरी तरह से नही,- दूसरी बोलती है
एक तो तिरंगा यह आ गया और अगर हमने समय वो शील्ड न लगाई होती तो ,इस बेचारे हास्यदेव का भी राज खुल जाता

बोल तो बिल्कुल सही रही हो , मगर तिरंगा को हमने पकड़ लिया है, और उनमें आपस मे झगड़ा भी हो ही गया है, हमारी योजना कारगर सिद्ध हुई, अब वक्त है इन्हें अच्छे से सबक सिखाने का, वैसे इसमे तिरंगा का कोई दोष नही फिर गेंहू के साथ घुन भी पिसा ही जाता है,इसलिये ये यह ही कैद रहेगा , सब अपने नम्बर वाली मास्क पहन लो :- उन्ही में से तीसरी बोलती है।

हा ,मगर एक बात याद रहे इसमे हम सब बराबर के हकदार है, याद रहे उन्हें केवल सबक सिखाना है चोट पहुचाना नही – उन्ही के बीच से कोई और बोलती है ।

हा बिल्कुल! इसका ख्याल रखा जाएगा,

सब अपनी-अपनी मास्क, और कॉस्ट्यूम पहनती है,जिसके उपर नम्बर लिखे होते है।

तभी वहां कोई एक और भी आती है।।

अरे आ गयी तू भी, कहा थी अब तक स……

श… श… श …..च..चुप हममे से किसी का भी नाम नही लेना है, जब तक मिशन सक्सेसफुल न हो जाये :- आने वाली ने कहा ।

Okk मिस 11, अपना मास्क पहनो।

मिस 11!!! अरे ये कैसा नाम है,मतलब अजीब हो यार कोई और नाम रखने को नही मिला क्या, जो मिस 1,मिस 2 ,…….मिस 11 नाम रख दिया ,कोई और नाम रख लेती ,वैसे भी हम उनको मज़े चखाने के लिए यहां लाये है, क्रिकेट खेलने नही वैसे भी वे लोग सिर्फ चार-पांच ही है। :- वह बोली जिसको मिस11 के नाम से बुलाया गया था।

हाँ! हमे पता है,उन्हें उनकी नानी याद दिलानी है, अगैरह-वगैरह…… :- वह बोली, “मगर यही नाम सही है,इससे हमारे ड्रेस पर लिखे नम्बरों के अनुसार बुलाया जाएगा।”

ठीक है। तो चले मेरे हाथ बेचैन हो रहे है, उसे सबक सीखने के लिए।- उनमे से बोली जिसके ड्रेस पर 2 लिखा था।

अये, ज्यादा बकवसी मत कर :- मिस 1, मिस 2 को आंखे बड़ी – बड़ी करके घूरते हुए बोली, वो तो मेरा भी मसला फँसा हुआ है नही तो,तुझे मैं अपने साथ भी नही लाती ,गुरर्रर्रर्रर.…….….

हां हां ,चल – चल मेरे बिना कौन सा तू अपना काम पूरा भी कर पाती,मेरे बिना तो तेरे प्लान का स्टार्टिंग भी नही होती:- मिस 2 बोली

तो मैं कोई दूसरा प्लान बना लेती- मिस 1 आंखे तरेरती हुई बोली

तुम दोनों चुप रहोगी, बात – बात पे झगड़ा ! मतलब हर बात पे झगड़ा, तो खुद ही कर लो न झगड़ा, उन्हें सबक सिखाना है कि नही :- मिस 3 दोनों को डांटती हुई चुप कराती है।

वैसे दाद देनी होगी मिस 11 की, काफी काबिल-ए-तारीफ काम की है, वरना उन्हें पहले ही पता चल जाता कि वो हँसी प्राकृतिक नही उन्ही के कानों में थी और सिर्फ उन्हें ही सुनाई दे रही है।- “मिस 3 तारीफ करते हुए मुस्कुराई और बोली” वैसे किसी को ये पता नही चला की स्टील इंजर्ड कैसे हुआ, सबको यही लग रहा है कि उसे डोगा की मिसाइल ने इंजर्ड किया है, जो कि होना असंभव है हीहीही………

हां किसी को पता भी नही चला कि उसकी मिसाइल इस शील्ड के अंदर निष्क्रिय हो गयी और उसके बदले में हमने चलाया मिस 11 की दी हुई वो गन , वैसे काफी दमदार लगी मुझे ये जो किसी ने नही किया वो कर दिखाया एक ही वार में स्टील रास्ते से हट गया ऐसा क्या किया , क्या है इस गन की मुख्य विशेषता :- मिस 7 बोली।

हां, हां, हमे भी जानना है, कि उस गन में स्पेशल क्या था।:- सब एक साथ बोली।

देखो हमने मिलकर इन सबको मज़ा चखाने का ज़िम्मा उठाया था, तो मेरे हिस्से में तो सिर्फ स्टील को रोककर ही रखना था, उसको क्या टॉर्चर करूंगी मैं- “आहत भाव से बोली मिस 11” तो मैंने ये गन भाईजान से ये कहकर बनवाया की कभी स्टील बेकाबू हो गया तो इसका उपयोग करेंगे , पहले भाईजान मान तो नही रहे थे फिर मेरे जोर देने पर ये स्पेशल गन बनाई जो सिर्फ एक ही बार उपयोग की जा सकती थी।

और वो हमने कर लिया, शुक्र है कि निशाना नही चुका वरना हमारा खेल शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाता- मिस 6 बोली।

वैसे मुझे एक बात समझ नही आई ,उन्हें अपने – आप जोर की हंसी कहा से सुनाई दे रही है, और वे अपने गुस्से या हँसी हो काबू क्यों नही कर पा रहे है।- मिस 11 ने सवाल दागा।

इसका जवाब तो मिस 2, मिस 3 और मिस 8 ही देंगी – मिस 6 बोली।

इसका जवाब बाद में, क्योंकि मुझे यकीन है वे लोग भी यही सवाल पूछेंगे, तो एक ही सवाल का बार – बार जवाब देने का क्या मतलब, पहले हिसाब बराबर करो फिर आराम से बैठकर कहानी सुनना।- मिस 2 मुस्कुराती हुई बोली।

ठीक है, बाबा।- मिस 11 झल्लाई ।

मुझे तो नागराज की चटनी बनानी है, पता नही कहा – कहा आवारागर्दी करता है,मुँह मारते फिरता है, और जब मैं कहूँ तो मेरे मुँह की मेरा मतलब मेरी बात को सुनता ही नही है, कुछ कहो तो जनाब कहेंगे “दिल मेरी ना सुने,दिल की मैं ना सुनु” अजी महाराज अपने दिल की नही तो मेरे जबान की तो सुनो।- मिस 4 पसीने से तर-तर होकर हांफते हुए बोली।

महाराज! महाराज तो उसे आपने ने ही बनाया है महारानी जी, अब बताइये मेरी भी बात नही सुनता है।- मिस 5 अपने बाल खुजाते हुए बोली।

अरे यार ! मेरी भी नही सुनता है, पता नही क्या हुआ है उसे आजकल.।- मिस 6 ने भी अपनी शिकायत दर्ज करी

अरे वो जब से दूसरे आयाम वाली अपने जैसी से मिला है न. तब से कुछ ज्यादा ही उड़ रहा है।- मिस 4 बोली

हम्म जी, बिल्कुल सही बोल रही है आप महारानी जी।- मिस 5 और मिस 6 ने हां में हां मिलाई।

हम्म, मुझे तो बस परमाणु को सीधा करना है, बड़ा उड़ता फिरता है।-मिस 8 भी बोल पड़ी

उड़ती तो मैं भी हूं। हहह….. – मिस 7 उसका मजाक उड़ाते हुए बोली।

तू चुप कर , तेरा तो कोई लफड़ा-वफड़ा नही है ,फिर क्यों चली आयी, और सुन ज्यादा बोलेगी तो मैं तेरे खोपड़ी में ब्लास्ट कर दूंगी, समझी – मिस 8 झल्लाहट में गुस्से से बोली।

लफड़ा मेरा है या तेरा. और हां दोबारा ब्लास्ट करने की धमकी मत दियो, ब्लास्ट मैं भी कर सकती हूं, okk – मिस 7 , मिस 8 को उंगली दिखाते हुए बोली।

हा तो कर न ब्लास्ट, तुझे रोक किसने है-मिस 8 आंखे लाल करते हुए बोली।

लो जी अब इन्ही का बचा हुआ है, कर लो झगड़ा, अजी झगड़ा बाद में कर लेना पहले जो करने आये हो वो तो करो। – मिस 10 मज़े लेते हुए बोली।

अच्छा ये बता तू क्यों आयी है भला, कह़ी तेरा भी तो कोई चक्कर – वक्कर नही चल रहा मेरे डोगू के साथ।- मिस 9,मिस 10 को आंख दिखाते हुए बोली।

अजी नही जी, मैं तो मज़े लेने आए थी इधर , गुररर्रर्रर…. मिस 10 आंखे लाल करते हुए बोली।

तुम सब चुप रहोगी, इसीलिए मैं तुम सबके प्लान में साथ नही दे रही थी, बस खुद में झगड़ा करना है , पहले उनसे निपट लो फिर कर लेंना जी भर के झगड़ा।- काफी देर चुप बैठी मिस 3 उन सभी पर चिल्लाते हुए बोली।

तभी अंदर किसी प्रभावशाली आकृति ने प्रवेश किया.
शांत हो जाओ तुम सब , अब वक्त आ गया है कि तुम सब अपनी- अपनी पानीपुरी के बदले चुकाओ, स्टील को होश आने वाला है।

सभी एक साथ आश्चर्य भाव से – क्या!!

क्या नही, जो करना है जल्दी करो, तुम सबके पास वक्त बहुत कम है।और हां एंथोनी को उसकी कब्र तक तुम्हारे सेवक द्वारा पहुँचवा दिया गया है,- वह बोली

क्या !! लेकिन एंथोनी खुद भी टेलीपोर्ट हो सकता था।- मिस 11 बोली।

नही उसे यहाँ, ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वो यहाँ से कही नही जा सकता- मिस 3 मुस्कुराते हुए बोली

भला ऐसा क्यों- अबकी बार मिस 10 पूछती है,

अरे ये तो है ही इनका जीनियस दिमाग । क्यों!!- मिस 6 बोली ।

हां क्यों नही, हहहह……… हँसते हुए बोली मिस 1 , आखिर दोस्त किसकी है।
वो तो सबको पता है, मेरी है।- मिस 2 अकड़ में बोली

तेरी कब से हुई, पहले मेरी है, बहुत पहले से मेरी दोस्त है।-मिस 1, मिस 2 को घूरते हुए बोली।

मैं सबकी दोस्त हूं ,पहले प्लान सक्सेस तो होने दो, -मिस 3 बोली।

हा, इसीलिए हमने मेहनत किया ताकि तुम सब यहाँ झगड़ा कर सको, गुरर्रर्रर्रर….- मिस 9 बोली।

लो जी, अब इसमें आपने क्या किया है भला, बोल तो ऐसे रही हैं जैसे सब इन्ही ने किया हो- मिस 10 सोचपूर्ण मुद्रा में मिस 9 के मज़े लेते हुए बोली।

बस – बस बहुत हुआ , तुम सबका इसमे योगदान है, तभी आज तुम्हे उनको मज़े चखाने का अवसर मिला है, अब अगर अपनी मेहनत का फल चाहती हो तो तुम्हे सामने जाकर लड़ना होगा।- बोलते हुए वो विशिष्ट आकृति उड़ते हुए गायब हो गयी….

“इधर तिरंगा अब तक बंधा हुआ बेहोश पड़ा था , जिसे अब धीरे धीरे होश आया रहा था, और वे सब बाहर की ओर आर या पार की लड़ाई करने जाने की तैयारी पूरी कर उस महल से मेन गेट से बाहर निकलने लगी।”

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4 Comments on “Shaktiloota Part-2”

  1. अभी दूसरा यानी कि ये पार्ट पढ़ा

    ये पार्ट भी ठीक है पर पहला भाग ज़्यादा अच्छा था ।

    Nice effort

    अब एक महत्वपूर्ण बात
    टाइपिंग से संबंधित कई सारी त्रुटियाँ हैं , कृप्या उन पर विशेष रूप से ध्यान दें ।
    क्यों कि त्रुटियों से भी कहानी पर असर पड़ता है ।
    रोचकता थोड़ा कम हो जाती है ।

  2. yeh part bi accha tha…panch bi acche the aapke ..aur story bi kuch kuch samaj aa rahi hai….likhne m kafi galtiya ki hai jiski wajaha bhut se chercter ka hona hai…phle se hi itne sare superhero aur fir upr se vo 12 ladkiyaa….ik kmi dhekhne ko mili ….jese agr aap yeh boli vo boli ki jagah 11 no poshak wali ne kaha jese word use kare tho khaani m jayada intereste aayegaa ….

    thank you
    aman aj

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