शक्तिलूटा Part-1

स्थान:- ब्रह्मंड रक्षकों का हेड क्वार्टर ।
जहाँ जोरो की अट्टहास गूँज रही है , न जाने क्यों , चलिए देखते हैं वहाँ क्या हो रहा है।

ध्रुव:- कौन हँस रहा है, बुद्धू कहीं का, सामने आ जरा, सारे दात तोड़कर पेट में भर दूँगा।

नागराज :- ये क्या हो रहा है भाई, किसकी इतनी हिम्मत जो हमसे मज़ाक करे।
(वैसे जिनमे हिम्मत है वो यहीं हैं और वो हँस नही रहे । थोड़ी हीरोपन्ति तो दिखानी ही पड़ेगी , ये ध्रुव अपने आप को ओवर स्मार्ट बनता है ही ही ही)
ओ एक मिनट रुको ध्रुव मैं पता लगता हूँ, अपने जासूस सर्पों की मदद से ।

ध्रुव :- क्या बोला? मदद से? हम किसी की मदद नहीं लेते सिर्फ करते है।

नागराज:- पागल हो गए हो क्या ध्रुव? हम अपने दोस्तों की मदद लेते हैं, कई बार मदद की जरूरत पड़ी है हमें ।

ध्रुव:- मैं किसी की मदद नहीं लेता , खासकर जब किसी हँसने वाले को ढूँढ़ना हो।

नागराज:- क्यों भला?

ध्रुव:- क्योंकि उसकी आवाज सुनकर मेरे दोस्तों (पशु-पक्षी) के कान की नसें फट गई तो?

नागराज:-ओह, अच्छा ऐसा भी होता हैं क्या?

ध्रुव :- हाँ।
नागराज:- आवाज से याद आया कहीं ये ध्वनिराज तो नही हैं।

ध्रुव:- नहीं वो नहीं हो सकता, उसकी आवाज तो रुलाने वाली होती है, और ये आवाज हँसी की है, वैसे भी वो नारका जेल में है।
इतनी देर से सारे ब्रह्मांड रक्षक इनकी बातों को सुन रहे थे , वो हँसी लगातार बढ़ती जा रही थी , ऐसा लग रहा था मानों कान के पर्दे फटने वाले हों।

डोगा:- ये सारी बाते बाद में कर लेना पहले इस अट्टाहस करने वाले का पता लगाओ, कान के पर्दे फटे जा रहे हैं।या इसका कोई उपाय करो।
परमाणु:- प्रोबाट ! क्या तुम मुझे सुन रहे हो?
प्रोबाट:- हाँ परमाणु बोलो।

परमाणु:- क्या तुम इस आवाज का कोई समाधान निकाल सकते हो?

प्रोबाट:-मैं कोशिश करता हूँ परमाणु ।

एंथोनी ;- ये कैसी आवाज है, जिसे मेरे कान भी बर्दाश्त नही कर पा रहे हैं।

शक्ति:- यार यकीन नहीं होता मुर्दों के भी कान दुखते हैं।

तिरंगा :- ये अट्टाहास वास्तव में बहुत ही भीषण है , जब हमारा ये हाल है तो आम लोगों का क्या होगा?

सब:- अरे……. इस बारे में तो किसी ने सोचा ही नहीं ।
चलो अपना अपना काम करो, जाओ ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाओ – ध्रुव बोला।

नागराज- खुद को बचा नहीं पा रहे हो दूसरों को क्या खाक बचाओगे।
शक्ति :- हमें खुद की फ़िक्र छोड़कर दूसरों को बचाना है।

हाँ , यही तो हमारा काम है, यही तो करते हैं हम- तिरंगा बोला

तो फिर ज्यादा भाषणबाजी मत करो , जाओ अपने काम पर लगो- डोगा बोला जिसने अपने कान को दोनों हाथों से बंद किया हुआ था।

क्यों बे डोगे, ऐसे रहेगा तो गोली कैसे चलाएगा – अबकी बार स्टील बोला जो काफी देर से इनकी बातें सुन रहा था और अपने सुपर कंप्यूटर पर स्कैनिंग कर रहा था।

और अचानक स्टील बोला :- अरे ये क्या.. …
स्टील की आधी बात मुँह में ही रह गयी , जोर का घूँसा पड़ा था उसे।

डोगा- चुप कर टीन के डब्बे , तुझे तो ये आवाज सुनाईं नही दे रही होगी वरना तू भी अपने कान बंद करके बैठ जाता।

स्टील:- एक मिनट रुको डोगा।

पर डोगा नहीं रुकता है, दनादन घूँसा बरसाए जाता है, पर स्टील के बदन पर इसका क्या असर होगा , ही. ही. ही……

तभी अचानक जोर की बिजली कड़कती है, जब आवाज कुछ कम हो जाती है, कोई वहाँ पर प्रवेश करता है।
“कौन हो तुम ? क्या चाहते हो? ”- ब्राह्मण रक्षक बोलेे।
उसका चेहरा अभी पूरी तरह से दिख नही रहा था , कुछ देर बाद धुंध छँटी तो सभी ने देखा एक मरकट सा आदमी खड़ा है।
सब आश्चर्यचकित थे इस सींकड़ी मानव के पास इतनी शक्ति , असंभव !
कौन हो तुम? -उन्होंने दोबारा पूछा।
मैं तो सिर्फ एक सेवक मात्र हूँ, तुम्हें आने वाली तबाही की सूचना देने आया हूँ – वह बोला।
अगर तुमने मेरी बात मानने से इनकार किया तो ये सारी दुनिया तबाह हो जाएगी , जिसके तुम रक्षक हो ।
नहीं ऐसा नहीं होगा, पहले तुम बताओ कौन हो तुम?- ध्रुव बोला ।

कितनी बार एक ही सवाल पूछोगे तुम लोग, मैं तो मात्र सेवक हूँ मुझे ये सब बताने की आज्ञा नहीं है। – वह बोला

ध्रुव- तो फिर ठीक है, तुम ये बताओ तुम्हें किसने भेजा है?
मुझे यह भी बताने की आज्ञा नहीं है।- वो बोला

तो फिर ये बताओ कि ये दुनिया कौन तबाह करना चाहता है, और वो ऐसा कैसे करेगा? – काफी देर से चुप बैठे तिरंगा ने पूछा ।
ये जानने के लिए तुम्हें मेरे साथ चलना होगा।
कहाँ? – ध्रुव बोला।

मेरे साथ चलो सब पता चल जाएगा – वो सिकड़ी मानव बोला।
सब तैयार हो जाते हैं, उस अन्जान खतरे से निपटने के लिए, पर नागराज अभी दुविधा में था।

नागराज- (ध्रुव के कान में) मुझे यकीन नहीं होता ,हमारी टीम इतनी आसानी से मान गई , कहीं ये हमारे किसी दुश्मन की चाल हुई तो?

उसके लिए हम रेडी है, नागराज- ध्रुव बोला।

चल सच-सच बता सिकड़ू, वरना तेरे मुँह में हैंडग्रेनेड डाल के पिन खींच दूँगा, फिर तेरा राम नाम सत्य! – डोगा उसे धमकाते हुए बोला।

ये धमकी कहीं और देना बच्चू , फिलहाल तुम मेरे साथ चल रहे हो, अपनी मर्ज़ी से या फिर मेरी मर्ज़ी से- वो बोला।

तभी वहाँ पर टेलीपोर्टेशन होता है और जब चमक खत्म होती है तो वहाँ कोई नहीं होता है।

आँख खुलने पर सब अपने आपको एक अनजान जगह पर पाते हैं, सामने एक सिंहासन होता है जिसपर कोई दुबला पतला सिकड़ी सा मानव बैठा होता है।

हम कहाँ पर हैं? वापस भेजो हमें जल्दी।- डोगा बोला-और तुम कौन हो?

अरे अरे अभी अभी तो आये हो, थोड़ा विश्राम कर लो फिर बात होगी, रही ये बात कि मैं कौन हूँ तो ये तुम्हें जल्द ही पता चल जाएगा :- सिंहासन पर बैठा आदमी बोला ।- वैसे भी आप लोग मेरी शक्तियों से परिचित हो चुके हो, और तुम्हारे पास हमारी बात न मानने की कोई वजह भी नहीं है।

तो फिर तुम ये बताओ हमें यहाँ क्यों लाये हो ? क्या चाहते हो तुम? – ध्रुव बोला।
कुछ नहीं चाहते हम – वो बोला।

फिर भी कुछ तो चाहते होगे न ,बेवजह कानो में इतना दर्द क्यों दिया?

बेवजह दर्द नही दिया , इसकी एक वजह है:- वो बोला ।

क्या है वजह? ऐसी वजह जिसके कारण तुम्हें हमें धरती से उठाना पड़ गया। :- शक्ति बोली।

तो फिर सुनो :- वो बोला।-

दरअसल मैं हास्य देव यानी हँसी का देवता हूँ , मेरी एक देवता से शर्त लगी , जो कि तुम्हारे पक्षधर हैं यानी कि एक्शन के देवता, उनका नाम एक्शन देव है।

एक्शन देव ! ये कैसा नाम है, और वो हमारे पक्षधर हैं तो फिर पहले हमसे कभी मिले क्यों नही? – अबकी बार सब पूछने लगे ।

दरअसल वे किसी से मिल नहीं सकते हैं ,कारण मत पूछना मैं बता नही सकता,अब वो कारण सुनो जिस वजह से तुम सबको यहाँ लाया गया है।
हाँ तो मैं ये कह रहा था कि ,तुम्हें यहाँ लाने के पीछे एक कारण है, वैसे जरूरी नहीं है कि मैं तुमको सब बताऊँ, फिर भी बता दूँगा कभी:- हास्य देवता बोले। – फिलहाल आप लोग जाकर आरामगृह में आराम करें, कुछ देर बाद आप लोगों से पुनः मुलाकात होगी।

क्या?क्या कहा तूने ??? आराम करें, हम आराम करने नहीं आये हैं, वहाँ तेरी बकवास हँसी से लोगों की हालत खराब होगी , कान पक गए होंगे
और हम यहाँ आराम करें.. एक बात ध्यान से सुन बे टिंगु , हमारे पास तेरी बकवास सुनने का वक्त नहीं है, हमें धरती पर भेजो जल्दी -डोगा हास्य देव को धमकाते हुए बोला।

ध्रुव:- रुको डोगा , जरा ठहरो , कम से कम इनकी बात तो सुन लो।
तुम्हे इसकी बकवास सुनने की पड़ी है, और धरती वालों का ज़रा भी ख्याल नहीं है, थू है तुम पर ध्रुव- डोगा गुस्से में बोला ।

डोगा आज बहुत गुस्से में लग रहा था, न जाने क्यों?

डोगा सही बोल रहा है- नागराज ने डोगा को समर्थन दिया।

ओये ओये नागराज! तू..,तू.. आतंकहर्ता मत बन , तू विश्वरक्षक ही ठीक है। – ध्रुव ने नागराज को समझाने की कोशिश की।

मैं कुछ बन नही रहा हूँ, मैं तुम जैसे हर किसी पर यकीन नही कर सकता।- नागराज जवाब देता है।

हाँ यार ..हद है ….कोई कह देगा कि वो कोई देवता है , और तुम लोग आसानी से मान जाते हो, अक्ल घास चरने गयी है क्या – तिरंगा भी अपने मन की भड़ास निकालने लगा।
– कम से कम एक बार प्रूव करने की कोशिश की होती, सबको तो उसकी बकवास सुनने की पड़ी है।
हास्य देव , एक्शन देव ये भी कोई नाम है? तुम लोग तो स्वर्ग भी गए थे , मिले थे क्या इनसे??

लो आ गये जासूस के अब्बा,- परमाणु अपने मन मे सोचता है।

इन सब की बातों को इगनोर करके हास्य देव अपने महल की ओर जाने लगते हैं।

अरे जरा रुको तो, वो आवाज(अट्टहास).. …..-:.अभी स्टील पूरा बोल भी नही पाया था कि उसे जोर का झटका लगा।

डोगा अपना गुस्सा गन निकाल कर उस ओर फायर करता है जिधर हास्य देव जा रहे थे, परन्तु उनके पास पहुँचने से पूर्व वह 180 डिग्री के ऐंगल से मुड़कर वापस उसी की ओर आती है, जिससे डोगा तो बच जाता है पर उसके पीछे खड़े स्टील को लगती है।

चूँकि स्टील का इस ओर ध्यान नहीं होता है इसलिए वो इससे बच नहीं पाता है और वो बहुत ही ज्यादा इंजर्ड हो जाता है।

स्टील- अबे डोगे !. तू हर बार मुझे ही नहीं बोलने देता!.. क्या दुश्मनी है तेरी मुझसे ?? ओह्ह …..

स्टील तुम बताओ क्या बता रहे थे.?.:- ध्रुव स्टील से पूछता है।

दो फौलाद में से एक शहीद हो गया- तिरंगा चुटकी लेता है।

तिरंगा ये मज़ाक का वक़्त नही है:- ध्रुव उसे समझाता है।

हाँ बोलो स्टील, क्या बता रहे थे तुम?

परमाणु:- ये बुरी तरह से इंजर्ड हो चुका है ध्रुव, इसके सारे सिस्टम अब डेड हो रहे है।

ये तो बहुत बुरा हुआ- ध्रुव सुबकते हुए बोला, अब हमें वो कौन बताएगा जो ये बता रहा था….?

तभी तिरंगा को कुछ याद आता है , वो वहाँ से जाने लगता है।

अब तुम कहाँ जा रहे हो ??- शक्ति उससे पूछती है।

मेरे पास एक आईडिया है परमाणु , ये जानने का कि स्टील क्या बता रहा था – ध्रुव कुछ सोच कर बोलता है।

क्या है जल्दी करो जो भी करना हे़ै, हमारे पास टाइम नही है:- नागराज बोला।

ध्रुव – परमाणु तुम्हारी बेल्ट में वॉइस सिस्टम है न?…

हाँ, लेकिन इससे होगा क्या ?- परमाणु पूछता है।

उस सिस्टम को तुम स्टील के सुपर कंप्यूटर मे इंटर करो, बाकी मैं सम्भाल लूँगा।
ठीक है ध्रुव मैं कोशिश करता हूँ।
लो ध्रुव, हो गया मैंने अपने वॉइस सिस्टम को स्टील के वॉइस सिस्टम से कनेक्ट कर लिया है, अब आगे का प्लान बताओ :- परमाणु चहकते हुए बोला।

ध्रुव:- बहुत बढ़िया परमाणु, आगे का काम मुझे करने दो।

फिर ध्रुव अपने बेल्ट से कुछ निकालता है और उसे स्टील के गले के पास फिट कर देता है, और अपने बेल्ट के ट्रांसमीटर को निकाल कर सिग्नल चेक करता है।

ध्रुव उसे परमाणु के वॉइस मॉड्यूल से जोड़ता है, कनेक्शन आता है , फिर स्टील का मैसेज आने से पहले ही कट जाता है।
ध्रुव:- ओह्ह , ये सिग्नल कनेक्ट होकर बार बार कट क्यों जा रहा है?

परमाणु:- ये कोई मामूली कंप्यूटर नही है ध्रुव, ये एक सुपरकंप्यूटर है , इसे रिपेयर होने का टाइम दो ये कुछ देर में ठीक हो जाएगा ।

ध्रुव :- ह्म्म्म, हो सकता है ये कोई जरूरी बात बताना चाह रहा था , हम कोई रिस्क नहीं ले सकते हैं, अब हम क्या करें?

डोगा:- जो भी करना है जल्दी करो वरना मैं तो चला।

कहाँ जा रहे हो डोगा? ये सब तुम्हारा ही तो किया धरा है:- शक्ति उसे रोकते हुए बोली।
डोगा:- क्या कहा? जरा फिर से कहो, ये सब मेरा किया धरा है , मैंने बोला था उसे कि मेरे गन के रास्ते में आये?

वो तुम्हारे रास्ते मे नहीं आया था, तुम्हारी मिसाइल उसे घूम कर लगी थी, क्या जरूरत थी गन चलाने की ?- शक्ति उसका जवाब देती है ।

इसने जानबूझकर तो नहीं चलाया न -नागराज समझाने की कोशिश करता है।

वाह जी! जानबूझकर नही चलाया, बच्चा है क्या ये ? – एंथोनी काफी देर से सुन रहा था उससे अब सहा नही गया ,तो वह भी अपने मन की भड़ास निकालने लगा ।

मैंने तो उस हास्य देव को निशाना बनाकर मिसाइल छोड़ी थी, मुझे क्या पता मिसाइल घूमकर इस स्टील को लग जायेगी :- डोगा सफाई देने की कोशिश करता है।

जब तुझे कुछ पता नहीं था तो ज्यादा सयाना बनने की क्या जरूरत थी, बड़ा आया बारूद का बेटा! हुँह…

ओये मुर्दे, साला जिसे चोट लगी वो तो कुछ बोल ही नही रहा, फिर तेरी क्यों फट रही है, चुप रह न। – अब डोगा को फिर से गुस्सा आने लगा था।
वो तो अभी घायल है, होश में तो आने दो:- अब ये सब शक्ति के बर्दाश्त से बाहर हो रहा था , ये कहके वो वहाँ से जाने लगी।
तुम्हें इसे रोकने की क्या जरूरत थी जाने देती न , फालतू में रोक दिया इस पागल कुत्ते को :- परमाणु अपना गुस्सा शक्ति पे उतारता है।
शक्ति परमाणु और बाकी सबको नजरअंदाज करके वहाँ से चली जाती है।
देख डोगे !ज्यादा मत बोल:-एंथोनी गुस्से में बोला ,
नही तो ठंडी आग में तपा दूंगा।

ठंडी आग, हा हा हा…… ये करने की कोशिश तू पहले भी कर चुका है, मुर्दे, :- डोगा एंथोनी को चिढ़ाते हुए बोला, कामयाब हुआ है कभी?

काफी देर तक ये लोग आपस मे बक बक करते रहे, न जाने कितनी देर तक और करते अगर बीच मे न बोलता ध्रुव- तुम सब चुप रहोगे?
मैं यहाँ सीरियस मैटर में बिजी हूँ और तुम लोग आपस मे झगड़ा कर रहे हो, कैसे हो तुम लोग, तुम्हें तो खुद को सुपरहीरो कहने में शर्म आनी चाहिए..:- अब ध्रुव को भी गुस्सा आने लगता है।

न. जाने क्यों सब के गुस्से का लेवल बढ़ गया था सब गुस्सा कर आपस मे लड़ने झगड़ने लगे।
(इधर तिरंगा हास्यदेव के हवेली के गुप्त मार्ग को खोजने का प्रयास करता है, क्योंकि उसे लगता है कि दाल में कुछ न कुछ काला जरूर है , वो सोचता है कि छुपकर छानबीन करना चाहिए, क्योंकि कुछ न कुछ तो गलत जरूर हो रहा है, डोगा का कहना सच भी हो सकता है , और मैं इसिलये यहाँ आया हूँ कि सबको सच्चाई से अवगत करा सकूँ। इतनी बड़ी हवेली में कोई न कोई गुप्त मार्ग अवश्य होगा, मुझे खोजना होगा।
तभी सामने की ओर से तिरंगा पर कुछ गिरता है, तिरंगा अपना न्याय दंड उठता है, और उसे अपने पर गिरने से रोकता है, और उठकर वहाँ से कहीं छिपने के लिए भागता है, मगर इसी बीच वह अपना शील्ड कह़ी गिरा देता है, वह उसे चाहते हुए भी ढूँढ़ने नही जा पाता है, उसे कुछ आवाज सुनाई देती है, जिस कारण वह दीवार में सट कर बैठ जाता है, कि अचानक..दीवार हल्की सरसराहट के साथ थोड़ा सा नीचे को सरक जाता है, और उसमें एक आदमी के जाने लायक जगह बन जाता है। और तिरंगा घुसता है, परन्तु पता नहीं क्यों उसका न्याय स्तम्भ नहीं जा पाता ।वो अपना न्याय स्तम्भ वहीं छोड़कर भीतर चला जाता है, नीचे जाने के लिए सीढ़िया बनी हुई थी, करीब दस मिनट छुप छुपकर चलने के बाद वो एक बड़े से हॉल में पहुँचा।
वह वहाँ रुककर कुछ छानबीन करता इससे पहले उसे एक आवाज सुनाई दी, वो आवाज की दिशा में गया।

वहाँ उसने जो देखा वो उसे बहुत ही अजीब लगा, निश्चय ही ये कोई भयंकर चाल थी , जिसमे सारे सुपरहीरो फँस चुके थे ।

To be Continued….

Written By – Manoj Kumar for Comic Haveli

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8 Comments on “शक्तिलूटा Part-1”

  1. wah mnoj ji …yeh aapki first story hy ..tho sbsy phly debue krny ky liy bdaai ho ..aasha karta hu ki aapki yeh writing ki yaatraa acchi rhy …aur aap ise enjoy kare….story sespence aur thriler wali lg rhi hy. …kaafi acchy sy likha gyaa ….yeh aapki phli story hy tho kuch chijo ka abaav lag rhaa hy …par isky vaavjood bi aapny itny saary chercter ko mange kiyaa…yeh bi apny aap me kabile tarif he…sb bde chercter he..aur unko is trh sy kahani bnaaye rkhnaa koi km.baat nhi he…hssi ky devetaa kyun hss rhe .. action dev kya he yeh shaayd abi aage jakr pta chelegaa

    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद अमन भैया जी।

      ये सच है कि अभी मेरे लेखन में बहुत अभाव है,मैं उन्हें दूर करने की पूरी कोशिश करूंगा,आपके बहुमूल्य कमेंट एवं सुझाव तथा उत्साहवर्धन के लिये धन्यवाद

  2. Pahli kahani,
    Itna sare heros ko lekar jo kahani aapne likhi hai , or jo concept aap bun rahe hain uske liye badhai .
    Abhi lekhan ki baat nahin sab badiya hai,

    Jaise jaise aap likhte jayenge shabdon par pakad or achchi hoti jayegi.

    Best wishes

  3. हुम्म … कहानी काफी सही है। कांसेप्ट भी बढ़िया है। हंसी का देवता , एक्शन देव, । क्या सोचा है वाह! इतने सारे सुपर हीरोज़ को ले कर कहानी लिखना कोई आसान काम नही है। हर एक पर बराबर ध्यान देना होता है। कहानी की बात की जाए तो यह अभी आपकी शुरूआती कहानी है और इसमें अभी उतना कुछ नज़र नही आ रहा फिर भी सही है। कॉमेडी एवरेज है। अब बस आप लिखते रहिए और नेक्स्ट पार्ट जल्दी दीजिए तो आपकी लेखनी भी निखर जाएगी। मुझे गुरूजी की वह बात नही भूलती, कि “लिखते रहिए आपकी लेखनी खुद ब खुद अच्छी हो जाएगी।” मैंने उनकी उस बात को मन में बिठा लिया और लिखता रहा । और आज जो कुछ भी लिखता हूँ जैसा भी लिखता हूँ लोग पसन्द ही करते हैं। इसी तरह आप भी लिखते रहिए। बड़ा मज़ा आता है लिखने में। और पढ़ने में भी।

    1. धन्यवाद तल्हा भाई जी।

      मेरी पहली कोशिश में त्रुटियों का होना वाजिब है ,परन्तु मैं धीरे धीरे इसे सुधारने की कोशिश करूंगा।

  4. बढ़िया कहानी।
    शुरुआत बढ़िया है लेकिन अगर हास्य कथा है तो हास्य का बहुत अधिक अभाव था।
    पंचेस नहीं हैं।
    और “फट रही है” टाइप संवाद कहीं न कहीं लेखक की कमजोरी बयां करते हैं कि उसे इनमें हास्य ढूंढना पड़ रहा है कोशिश कीजिये ऐसे द्विअर्थी संवाद से बच सकें आप तो।
    स्टोरी में ये सिकड़ी से दो लोग कौन हैं? और ये हास्य देव और एक्शन देव क्या बला है जानना रुचिकर होगा।
    द्वितीय पार्ट का इतंज़ार रहेगा।
    लेखन में अभी ध्यान देने की आवश्यकता है आपको कई जगह संवाद टूटे हुए हैं।
    प्रथम प्रयास है तो ये सब स्वीकार्य होता है किंतु आगे आकर ये कमियां बड़ी न बन जाएं इसका ध्यान रखिएगा।
    सभी हीरोज हैं जो रुचिकर बनाएगा।
    एक बात खटकी है कि ऐसी कौनसी गोली जो स्टील को भेद गयी?
    और यदि को बड़ा धमाका करने वाली गन है तो उसका इम्पैक्ट बाकियों पर क्यों नहीं हुआ?
    अगर हास्य है स्टोरी तो इसे इग्नोर किया जा सकता है।
    खैर आगे आप बढ़िया करेंगे इसका मुझे पूरा विश्वास है।

    1. धन्यवाद गुरूजी
      सच में आपके सुझाव बेहद सरल और मार्गदर्शन करने वाले है, मैं आगे से इसका ध्यान जरूर रखूंगा।
      और संवादों को भी जोड़ने की कोशिश करूंगा।

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