The Black Demon Part 4

श्रृंखला :- 【 The Black Demon 】
पार्ट :- [ 4th ]

जेम्स की बाइक दनदनाती हुई उस ओर बढ़ रही थी जहाँ से जेम्स और बॉन्ड को मौत की ओर रवाना होना था। आज ये हाईवे बनने जा रहा था जेम्स और बॉन्ड के लिए मौत का हाईवे…..The Black Highway

☆The Black Highway☆

Recap :- अब तक आपने पढ़ा ; प्रोफेसर जावेद जो अपने असिस्टेंट अब्दुल के साथ एक प्राचीन काले जंगल में खोज के लिए निकलते हैं और उन्हें वहां एक के बाद एक कई रहस्य पता लगते हैं साथ ही मिलता है एक काला ताबूत जिसे प्रोफेसर उठाकर अपनी लैब ले आते हैं। इस घटना के पन्द्रह माह गुज़रने के बाद एक दिन कुछ ऐसा होता है की प्रोफेसर को अरेस्ट कर लिया जाता है। परन्तु क्यों? क्या किया था प्रोफेसर ने ऐसा?

*पूर्व के कथानक जानने के लिए The Black Demon के पिछले भाग पढ़ें।

जेम्स-बॉन्ड को अपने सामने साफ़ साफ़ दिख रही थी…मौत। आज ये हाईवे उनके लिए ब्लैक हाईवे साबित होने वाला था। मौत से बस कुछ क्षण की दूरी पर थे वे।
परन्तु जो अंतिम क्षण की भी बाज़ी पलट जाते हैं, वही तो बाज़ीगर कहलाते है ।
पुल की रेलिंग से चार-पांच इंच की दूरी पर ही जेम्स ने किया कुछ ऐसा किया जिसे देखकर आश्चर्यचकित हो गई आँखें। बाइक का अगला पहिया एक तेज़ घर्र की आवाज़ के साथ ऊपर हवा में था। बॉन्ड ने जेम्स को कसकर पकड़ रखा था। हवा में उठ जाने के कारण पहिया रेलिंग को छू भी न सका था । परन्तु खतरा अब भी था क्योंकि पिछ्ला पहिया ज़मीन पर ही था। परन्तु इससे पहले की पिछला पहिया पुल की रेलिंग तक पहुंचता उससे पहले ही जेम्स ने अपनी बाइक को दिया एक तीव्र झटका और बाइक दाईं ओर मुड़ गई। खतरा टल चुका था। बाइक अब पुल पर आगे बढ़ रही थी।

“यु हूsss । मुझे पता था हम नही मरेंगे।” बॉन्ड ने चहकते हुए कहा।

“क्यों ? तू ज्योतिषी है क्या?” जेम्स ने पूछा।

“अरे नही यार! वो मैंने बैक व्यू मिरर में अपनी आँखें देखी थीं। मेरी आँखों की पुतलियाँ सफ़ेद नही हुई थीं। इसलिए मैं समझ गया मैं नही मारूंगा।” जेम्स ने आँख मारते हुए कहा।

बॉन्ड ने अपना माथा पीट लिया।

मोहन नगर का समुद्र के ऊपर बना हुआ ये पुल बहुत ही लम्बा था। अब्दुल बहुत आगे निकल चुका था। परन्तु जेम्स-बॉन्ड अब भी उसके पीछे थे।

“तू नाइट्रो क्यों नही यूज़ करता?” बॉन्ड ने जेम्स से पूछा ।

“खत्म हो गया यार ।” जेम्स ने चिंतित स्वर में कहा “तेरी ही वजह से हुआ! मैंने कहा था टँकी फुल कर दे नाइट्रो से। पर तुझे स्टंट्स कर ने से फुर्सत मिले तब न।”

स्टंट्स का नाम सुनकर बॉन्ड ने गर्व से मुस्कुराते हुए पूछा “मुझे समझ नही आया, तुमने मेरी तारीफ की या बुराई।”

“चुपचाप बैठा रह!” जेम्स ने गुस्से में कहा।

अब्दुल ट्रैफिक जाम में जा घुसा था। जेम्स-बॉन्ड के माथे पर पसीने की बूँदें आ गईं । अब तो अब्दुल को पकड़ना लगभग नामुमकिन था, क्योंकि इतनी ट्रैफिक में उस तक आसानी से नही पहुंचा जा सकता था।

जेम्स अभी यही सोच रहा था की तभी उसे सामने ट्रक दिखा जो तेज़ी से आगे जा रहा था परन्तु जेम्स की बाइक उस ट्रक से भी तेज़ थी जो जल्द ही ट्रक से टकराने वाली थी। जेम्स बेध्यानी में ये देख ही नही रहा था की सामने क्या है। लेकिन डरने के बजाए जेम्स मुस्करा दिया।

“बॉन्ड! अब तेरी बारी आ गई, स्टंट्स के बादशाह।” जेम्स ने ज़ोर से कहा।

ये वाक्य सुनकर पहले तो बॉन्ड चौंका लेकिन फिर उसके होठों पर गर्वीली मुस्कान फ़ैल गई।

“मैं तैयार हूँ , दिमाग और टेक्नोलॉजी के बादशाह! मेर भाई।” बॉन्ड ने भी ज़ोर से कहा।

बाइक, ट्रक के काफी करीब पहुँच चुकी थी। अचानक, जेम्स ने एक झटके से चाँप दिया अगला ब्रेक। इतनी ज़्यादा स्पीड में होने के कारण बाइक रुकी नही, बल्कि उसका पिछला पहिया सन्नss की आवाज़ के साथ हवा में ऊपर उठ गया। पीछे पहले से तैयार बैठे बॉन्ड को एक ज़ोरदार झटका लगा और वो भी हवा में उड़ गया,साथ ही जेम्स की बाइक हवा में एंटी क्लॉक वाइज़ में गोल घूमकर फिर से सीधा खड़ी हो गई। जेम्स ने ऊपर देखा, बॉन्ड ट्रक की छत पर पहुँच चुका था। उसने वहीँ से जेम्स को मुस्करा कर अंगूठा दिखाया । जेम्स ने भी अंगूठा दिखाकर आँख मारी।

“शाबाश मेरे शेर।” जेम्स मुस्कराकर बोला।
इसी के साथ जेम्स ने अपनी बाइक को नई दिशा दी और ट्रैफिक में जा घुसा । दूसरी तरफ ट्रक पर खड़ा बॉन्ड ; “अब मुझे अपने आज तक के सीखे हुए परकॉर और स्टंट्स का कमाल दिखाना है। नीचे जेम्स अपनी बाइक से अब्दुल का पीछा तो कर रहा है पर वो ‘शायद’ उसे पकड़ पाए। परन्तु मैं आसानी से एक के बाद एक गाड़ियों पर कूदता हुआ उसे पकड़ सकता हूँ।”

बॉन्ड दौड़ पड़ा। दौड़ते हुए उसने ड्राईवर के केबिन के ऊपर पहुंचकर एक एरियल फ्लिप मारी और एक जीप की छत पर जा उतरा । भड़ की आवाज़ हुई और ड्राईवर चौंक कर ऊपर देखने लगा। उसका ध्यान भटका और जीप एक कार से जा टकराई । बॉन्ड अब भी जीप के छत पर था , कार से टकरा कर जीप हवा में उड़ गई। बॉन्ड ने छलांग लगा दी और एक टैक्सी की छत पर जा उतरा।

“ओफ़्फ़। बेवकूफ ड्राईवर! शुक्र है ऊपर वाले का ज़्यादा नुक्सान नही हुआ।” बॉन्ड ने राहत की सांस लेते हुए कहा। “अब मुझे सावधानी से कूदना होगा किसी भी वाहन के छत पर। ताकि आवाज़ बिलकुल भी न हो।”

दूसरी ओर जेम्स अपनी बाइक को बड़ी मुश्किल से ट्रैफिक के बीच से घुमाता हुआ निकाल रहा था। ट्रैफिक का शोर कान फाड़ने वाला था। जेम्स से कुछ ही दूरी पर अब्दुल भी अपनी बाइक इधर उधर से निकालता हुआ भागता जा रहा था। अब जेम्स और अब्दुल में दूरी तो थोड़ी कम होती जा रही थी परन्तु ट्रैफिक उतना ही बढ़ता जा रहा था। तभी जेम्स को दिखा वो।

“वाह! बॉन्ड तो मुझसे आगे निकल गया ! चलो आज उसका परकॉर सीखना काम तो आया!”

बॉन्ड बड़ी तेज़ी से अब्दुल की ओर बढ़ रहा था । वाहनों के छतों पर कूदता हुआ जेम्स जल्द ही अब्दुल के बिलकुल बराबर पहुँच गया। अब्दुल की नज़र उस पर पड़ी , बॉन्ड ने उसे दाँत दिखाए , परन्तु बॉन्ड की हंसी अचानक गायब हो गई क्यों की अब्दुल अपनी कमर से निकाल कर उसकी ओर तान चुका था…बन्दूक।

“ओ शिट्।” बॉन्ड उस मिनी बस की छत से बड़ी फुर्ती से कूदा जब अब्दुल की चलाई गोली उसके शर्ट को छूती हुई निकली। बॉन्ड उस बस के आगे जा रही एक कार की छत पर कूदा था। उसे उम्मीद थी की अभी दूसरी गोली भी चलेगी । परन्तु जैसे ही उसने उस दिशा में नज़रें घुमाईं, अब्दुल गायब था। बॉन्ड जल्दी जल्दी इधर उधर नज़रें दौड़ाने लगा। परन्तु दूर दूर तक अब्दुल का नामोनिशान तक नही था। बॉन्ड रोड पर उतर आया तथा ट्रैफिक के बीच से खुद को बचाता हुआ उस ओर बढ़ा जहाँ कुछ देर पहले अब्दुल भाग रहा था। वहां पहुंचकर भी उसे अब्दुल नही दिखा । बॉन्ड फुटपाथ पर खड़ा हो गया। तभी उसे कुछ ही दूरी पर फुटपाथ के किनारे अब्दुल की बाइक खड़ी दिखी। बॉन्ड दौड़कर वहां पहुँचा।

“बाइक यहाँ खड़ी है। तो फिर वो कहाँ है?” बॉन्ड मन ही मन खुद से पूछ रहा था। अचानक वो बाइक से पीछे की दिशा में भागा,उसने कुछ ही दूरी पर ट्रैफिक में फंसी एक वैन खड़ी देखी । बॉन्ड जल्दी से उस वैन के पास पहुँचा। अंदर ड्राईवर बैठा हुआ था मुंह पर गमछा बान्धकर।

“हैल्लो अंकल। क्या आपने उस बाइक वाले को देखा” बॉन्ड ने बाइक की ओर इशारा कर के पूछा। “बाइक खड़ी कर के किधर गया वो?”

जवाब में ड्राईवर ने न में सर हिलाया।

“शिट्ट! गच्चा दे गया।” जेम्स ने अपने बाल नोचते हुए कहा।

तब तक ट्रैफिक जाम खुल चुका था । ट्रैफिक आगे बढ़ा और वो वैन भी। वैन के कुछ आगे पहुँचते ही उस वैन के ड्राईवर ने चेहरे से गमछा उतार फेंका और एक कुटिल मुस्कान के साथ बगल वाली सीट पर निगाह डाली जहाँ उस वैन का असली ड्राईवर बेहोश पड़ा हुआ था।

बॉन्ड अब भी अपने बाल नोच रहा था।

“ओये क्या हुआ! निकल गया वो हाथ से?” जेम्स उसके पास बाइक रोकता हुआ बोला।

“अरे भाई! सॉरी। मैं नही पकड़ पाया उसे। उसकी गोली से बचने के लिए मैंने छलांग लगाई और तब तक वो गायब हो गया।”

“हाँ तुझपर गोली चलाते हुए मैंने देखा था उसे। पर अचानक ही मेरे सामने एक वैन आ गई और मैं भी नही देख सका की वो किधर गया।” जेम्स ने कहा। “उम्मीद से ज़्यादा फुर्तीला निकला।”

“हाँ।” बॉन्ड ने दुखी हो कर कहा।

“क्या तूने किसी से पूछा नही आस पास। आखिर किसी ने तो देखा होगा उसे बाइक छोड़कर भागते हुए।” जेम्स ने सवाल किया।

“अभी कुछ देर पहले यहाँ जो वैन खड़ी थी उसके ड्राईवर से पूछा था।” बॉन्ड ने कहा।

“क्या कहा उस ड्राईवर ने?” जेम्स ने जल्दी से पूछा ।
“न कहा।”
“मुंह से कहा?”
“नही।”
“नही! लेकिन क्यों?”
“पता नही, शायद इसलिए क्यो की उसने मुंह गमछे से ढाँक रखा था।”

“क्या कहा! ज़रा फिर रिपीट कर!” जेम्स लगभग हड़बड़ाता हुआ बोला।

“उसने चेहरा…” पूरा बोल पाने से पहले ही खुद बॉन्ड का भी मुंह खुलता चला गया।

“अबे अक्ल के अंधे! ऐसे जासूस बनेगा तू! इसीलिए…इसीलिए मैं तुझसे एक घण्टा बड़ा हूँ। तू समझ ही नही पाया और मैं तेरी बात सुनकर ही समझ गया। वो 100% वही था, एक तो उसने तुझसे मुँह से कुछ नही बोला दूसरा उसने अपना चेहरा छुपा रखा था। यही दोनों बातें साफ़-साफ़ कहती हैं की वो वही था।”

“सॉरी । उसके अचानक गायब हो जाने की वजह से मैं बौखला गया था और इस ओर ध्यान ही नही दे पाया।” बॉन्ड ने सर झुकाकर कहा।

जेम्स ने अपना माथा पीट लिया।
“अगर ऐसे ही अपना धीरज खोता रहा न तू, तो घण्टा बनेगा जासूस।” जेम्स ने कहा “अच्छा अब जल्दी से बता कौनसी है वो वैन?”

बॉन्ड ने जल्दी से अपनी नज़रें इधर उधर घुमाईं।
“शह्ह। निकल गई वो वैन। कहीं नज़र नही आ रही।”

जेम्स ने एक बार फिर अपना माथा पीट लिया।
तब तक पुलिस की गाड़ियां वहां पहुँच चुकी थीं। सायरन के शोर में ट्रैफिक का शोर दबकर रह गया। इंस्पेक्टर मनोज की नज़र जेम्स-बॉन्ड पर पड़ी।

“किधर गया वो!” इंस्पेक्टर मनोज ने पूछा।

“जिधर उसे जाना था।” जेम्स ने कहा।

“क्या बकवास है! तुम दोनों उसके पीछे आए थे।”

“हम उसके पीछे तो आए थे लेकिन उसे पकड़ नही सके।” बॉन्ड ने हताश स्वर में कहा।

मनोज तुरन्त मैसेज भेजने लगा।

“शहर से बाहर जाने वाले रास्तों पर नाकेबंदी कर दो! भारी नाकेबंदी।”

“सर माजरा क्या है? हमे भी तो बताइये। शायद हम कोई हेल्प कर सकें।” जेम्स ने मनोज से कहा।

मनोज के बगल में खड़ा उसका ड्राईवर कान में फुसफुसाया।

“सर । इन लड़कों के पास काफी अद्भुत टेक्नोलॉजी है। इनकी मदद लेने में हमारा कुछ नही जाता।”

“शट अप!” मनोज ने कड़ककर कहा। “तुम लोगों को जो कुछ भी जानना है, कल के न्यूज़ पेपर में पढ़ लेना।” कहकर मनोज वापस पलटा।

“लेकिन हमे तो अभी जानना है सर।” जेम्स-बॉन्ड ने एक साथ कहा।

मनोज ने मुड़कर पहले उन्हें घूरा , फिर अपने साथ चलने का इशारा किया।

जल्द ही जेम्स-बॉन्ड भी मोहननगर के न्यायालय में उपस्थित थे। प्रोफेसर जावेद खान को बाइज़्ज़त बरी कर दिया गया था। जेम्स-बॉन्ड को पूरा मामला पता चल चुका था।
प्रोफेसर जल्द ही अदालत से बाहर निकले। मीडिया वालों ने उन्हें घेर लिया, वहां से कुछ दूरी पर खड़े जेम्स-बॉन्ड ये सब देख रहे थे।

“यार वो दिन कब आएगा जब हमे भी मीडिया वाले घेर कर खड़े होंगे।” बॉन्ड ने सपनीले अंदाज़ में कहा।

“घबरा मत छोटे। जल्द ही आएगा वो दिन।” जेम्स ने कहा।

काफी देर बाद प्रोफेसर मीडिया वालों के चंगुल से बाहर निकले। जेम्स-बॉन्ड दौड़कर उनके पास पहुंचे।

“सर सर । हमे आप से कुछ बात करनी है।” जेम्स-बॉन्ड प्रोफेसर के करीब पहुँचते ही बोले।

“ओह, बच्चों । तुम दोनों वही हो न जिसने अब्दुल का पीछा किया था।” प्रोफेसर ने मुस्कराते हुए पूछे।

“जी सर। हम उसे पकड़ लेते । पर ऐन टाइम पर ट्रैफिक ने सारा काम बिगाड़ दिया।” बॉन्ड ने कहा।

प्रोफेसर के कुछ बोलने से पहले ही जेम्स बोल उठा।

“सर हम उसे पकड़ने में आप की मदद कर सकते हैं। क्या आप हमे पूरी कहानी बताएंगे? आखिर अब्दुल क्या लेकर भागा है आप की लैब से?”

“वह जो लेकर भागा है मेरी लैब से, वो आने वाले समय में पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकता है।” प्रोफेसर निराशा भरे स्वर में बोले।

“क्या! ऐसा कौन सा हथियार था वो?” बॉन्ड ने पूछा।

“हथियार से भी खतरनाक है, परमाणु हथियार से भी खतरनाक।” प्रोफेसर बोले।

“एक मिनट, एक मिनट। क्या आप हमे पूरी कहानी सुना सकते हैं?” जेम्स जल्दी से बोला।

“माफ़ करना बच्चों। पर मुझे तुमलोगों को डराने का बिल्कुल भी मन नही है।” प्रोफेसर जाने लगे।

जेम्स उनके पीछे दौड़ा।

“लेकिन सर । हम आपकी मदद कर सकते हैं अब्दुल को ढूँढने में।”

“वो पुलिस आराम से कर लेगी।” प्रोफेसर इतना कह कर चल दिया।

उनके जाते ही जेम्स अपने चेहरे पर रहस्मयी मुस्कान लेकर बॉन्ड की तरफ पलटा।

“क्या हुआ भाई! तू ऐसे क्यों मुस्करा रहा है?” बॉन्ड ने सवालिया निगाह डालते हुए पूछा।

“क्योंकि मुझे एक बहुत बड़ा झोल नज़र आ रहा है। इस सारे घटनाक्रम में।” जेम्स उसी तरह मुस्कराता हुआ बोला।

“और मुझे होल नज़र आ रहा है।” बॉन्ड अचानक नाक फुलाता हुआ बोला।

जेम्स ने आश्चर्य से पूछा “कहाँ?”

“तेरे भेजे में! और वो होल मैं ही करने वाला हूँ । क्या तुझे याद नही आज क्या है।” बॉन्ड जैसे कुछ याद कराना चाह रहा था जेम्स को।
और याद आते ही, जेम्स उछल पड़ा।

“अरे हाँ यार! मैं कैसे भूल गया। जल्दी बैठ , बहना इंतज़ार कर रही होगी।”
बॉन्ड कूद कर जेम्स की बाइक पर बैठा जो अब अपने पुराने स्वरूप में आ चुकी थी।

“सब से पहले एटीएम चलते हैं । ” जेम्स फुल स्पीड से बाइक भगाता हुआ बोलता जा रहा था “उसके बाद गिफ्ट शॉप पर चलेंगे। उसके बाद मिठाई की दुकान पर भी जाना है। बहना नाराज़ हो गई होगी। उसे मनाने के लिए ज़्यादा चीज़ें लेकर जानी होंगी।”

“हाँ । हमे तो मालूम ही नही था की आज ‘रक्षाबन्धन’ है। जब तुम प्रोफेसर से बातें कर रहे थे उसी वक़्त मैंने सड़क किनारे लगे एक बोर्ड पर आज की डेट देखी और रक्षाबन्धन की शुभकामनाए भी।” बॉन्ड बोला।

“आज पहली बार हुआ जब हम रक्षाबंधन भूल गए।” जेम्स एटीएम के पास बाइक रोकता हुआ बोला।

जल्द ही जेम्स और बॉन्ड मिठाई तथा गिफ्ट्स लेकर उस छोटे से घर के सामने खड़े थे जो देखने से ही किसी भिखारी का लग रहा था।

“छोटी! कहाँ है तू? छोटी!” जेम्स लगभग दरवाज़ा पीटता हुआ बोला।

“आराम से यार। वो पहले ही गुस्साई हुई होगी , इतनी तेज़ दरवाज़ा पीटेगा तो तुझे मुक्के न मारने लगे।” बॉन्ड ने दांत दिखाते हुए कहा।

काफी देर तक घर के अंदर से कोई जवाब न आया । जेम्स-बॉन्ड की धड़कने बढ़ने लगी। उनकी प्यारी बहना दरवाज़ा क्यों नही खोल रही थी। वो बहना जो जेम्स-बॉन्ड की आवाज़ सुनते ही दरवाज़ा खोलने को दौड़ती थी आज उसे क्या हो गया था।

अब की बार बॉन्ड ने दरवाज़ा पीट डाला। “छोटी दरवाज़ा खोल! मानता हूँ हम से गलती हुई है , लेकिन इतनी भी क्या नाराज़गी।” पर अंदर से कोई जवाब न आया।

“मुझे बहुत डर लग रहा है जेम्स! छोटी सही सलामत तो होगी?” बॉन्ड की आँखों में आँसू थे।

“अबे अबे! रो क्यों रहा है? हमारी बहन है वो। उसे कुछ नही होगा।” परन्तु जेम्स की आँखों में भी आंसू थे। माँ-बाप के बाद दुनिया में छोटी ही वो थी जिससे दोनों को सब से ज़्यादा प्यार था। छोटी की ‘आह’ भी निकलती तो दोनों भाइयों का कलेजा मुंह को आ जाता था। दोनों की मुंह बोली बहन छोटी का घर उनके घर से एक किलोमीटर की दूरी पर था। उसकी माँ एक भिखारिन थी जो की जेम्स-बॉन्ड के घर अक्सर भीख मांगने आती थी,छोटी को गोद में लेकर। छोटी का बाप उसे बचपन में ही छोड़कर चला गया था। जेम्स-बॉन्ड तब पाँच साल के रहे होंगे , जब उन्हें पता चलता की छोटी अपनी माँ के साथ आई हुई है,वे दौड़कर बाहर आते और छोटी को गोद में लेकर खेलने लगते । वो नन्ही बच्ची भी उन्हें देखकर खिलखिलाने लगती थी। उसका नाम भी जेम्स-बॉन्ड ने ही रखा था ‘छोटी’ । ज्यों-ज्यों छोटी बड़ी होती गई जेम्स-बॉन्ड का प्यार भी उसके लिए बढ़ता गया। जेम्स की बहुत ज़िद पर उसके पापा जो की दुनिया के सबसे बड़े कंजूस इंसान हैं ( परन्तु दिल के बहुत साफ़ और सच्चे) ने छोटी का एडमिशन जेम्स के स्कूल में ही करा दिया। और जब बॉन्ड को पता लगा की छोटी जेम्स के स्कूल में जाने लगी है तो उसने भी अपने पापा से कहकर अपना एडमिशन जेम्स के स्कूल में करा लिया। और फिर, तीनो भाई बहन की जान एक दूसरे मे बसने लगी।

पुरानी यादों से निकलकर जेम्स-बॉन्ड ने एक साथ दरवाज़े को धक्का मारा। वो कमज़ोर दरवाज़ा उनके एक ज़ोरदार धक्के से खुल गया। जेम्स-बॉन्ड उस एक कमरे वाले घर में दाखिल हुए। घर के अंदर काफी अन्धेरा था। कमरे के बीचोबीच एक टूटा फूटा खाट पड़ा हुआ था जिसपर एक बुढ़िया लेटी हुई थी। जेम्स-बॉन्ड दौड़कर उस के पास पहुँचे। वो छोटी की माँ थी जो काफी समय से बीमार रहने लगी थी, गरीबी ने उसे वक़्त से पहले बूढ़ा कर दिया था। जेम्स-बॉन्ड ने मिलकर छोटी और उसकी माँ का खर्च उठा रखा था इसलिए अब उस बुढ़िया को भीख मांगने की ज़रूरत नही थी। बुढ़िया के पास बैठते हुए जेम्स ने पूछा। “माँ। छोटी कहाँ है?”

बुढ़िया उन्हें कुछ देर तक देखती रही फिर कांपती आवाज़ में बोली। “छ छोटी, तुम दोनों का इंतज़ार करते-करते तुम्हे ढूँढने निकली थी और अभी तक नही लौटी।”

जेम्स-बॉन्ड के हलक सूख गए।

“कब निकली थी वो।” दोनों ने एक साथ पूछा।

बुढ़िया ने फिर कांपते स्वर में कहा। “सुबह ही निकली थी।”

जेम्स-बॉन्ड बिना कुछ कहे फौरन बाहर की ओर भागे। घर से बाहर निकलकर जेम्स सीधा दौड़ा जब की बॉन्ड घर के पिछवाड़े की ओर। जेम्स उसे घर के पीछे भागता हुआ देखकर रुक गया।

“उधर कहाँ जा रहा है तू?” उसने चिल्लाकर पूछा।

“ऐसे वक़्त पर तेरा दिमाग काम नही करता है पर मेरा करता है। मैं सब से पहले इधर ही भागता हूँ छोटी को ढूँढने।” बॉन्ड ने कहा।

जेम्स भी उसकी तरफ दौड़ लिया।
जल्द ही दोनों उस छोटी नदी के किनारे पहुंचे। जिसके आस-पास हरियाली अपना जलवा बिखेरे हुए थी। नदी के उस पार पहाड़ थे जो इस दृश्य को और सुहाना बना रहे थे। जेम्स-बॉन्ड का तेज़ी से धड़कता हुआ दिल अब अपने सामान्य लय में आ रहा था। क्योंकि उनकी प्यारी छोटी नदी के किनारे बैठी हुई दिख गई थी उन्हें। बॉन्ड ने जेम्स की ओर मुस्कराते हुए देखा जवाब में जेम्स भी मुस्कराया।
दोनों धीमे कदमों से चलते हुए छोटी के पीछे पहुंचे।

“बदमाश! तूने तो हमारी जान निकाल दी थी। कब से बैठी हुई है यहाँ पर?” जेम्स अनायास ही बोल गया।

“चल अब जल्दी से ये राखी हमे बाँध दे ।” बॉन्ड बोला।

परन्तु छोटी उसी तरह बैठी रही और नदी के पानी में अपना हाथ इधर से उधर करती रही। जेम्स और बॉन्ड ने एक दुसरे से नज़रें मिलाईं और जाकर छोटी के अगल-बगल बैठ गए।

“हूँ…तो हमारी बहना आज कुछ ज़्यादा ही नाराज़ है हम से।” दोनों भाई एक साथ बोले।

“मुझसे बात मत करो आप दोनों।” आखिर कार छोटी कुछ तो बोली। जेम्स-बॉन्ड ने एक दुसरे को आँख मारी।

“अच्छा बाबा। हम तुझसे नही बोलेंगे। लेकिन हमे राखी तो बाँध दे।” दोनों ने फिर एक साथ कहा।

“हुंह….सब से पहले मेरे आंसू मुझे वापस कीजिए।” छोटी उन दोनों की तरफ देखे बिना बोली।

“कौन से आंसू?” जेम्स ने पूछा।

“वही । जो मैंने अब तक बैठकर बहाए हैं। आप लोग क्या जानो मैं कितना रोइ हूँ। सुबह से इंतज़ार कर रही थी आप दोनों का। पर जब आप नही आए तो मैं आपके घर गई, वहां मुझे पता चला आप दोनों सुबह से गायब हो। मैंने काफी देर तक इंतज़ार किया पर आप दोनों नही आए। मैं तब से यहाँ बैठकर रो रही हूँ की कहीं आप दोनों को कुछ हो तो नही गया।” छोटी फिर से आंसू बहाने।

जेम्स और बॉन्ड उसके आंसू पोछते हुए बोले। “अरे पगली! जब तेरे जैसी बहन है हमारे पास जो दिन रात हमारे लिए दुआ करती है, तो फिर मजाल है किसी की जो हमे नुक्सान पहुंचाए। चल अब जल्दी से बाँध दे राखी।”

“नही बांधूंगी।” छोटी ने फिर गुस्से से कहा।

“क्या! इसका मतलब तू चाहती है हम सही सलामत न रहें।” जेम्स-बॉन्ड ने कहा।

अब छोटी का गुस्सा थोड़ा शांत पड़ने लगा। जेम्स-बॉन्ड ने अच्छा डॉयलॉग मारा था। छोटी उठकर खड़ी हो गई। बॉन्ड ने उसे राखी थमाई। “सब से पहले अपने छोटे भइया को बाँध।”

छोटी ने पहले बॉन्ड फिर जेम्स को राखी बाँध दी, दोनों भाइयों ने मरते दम तक अपनी बहन की रक्षा करने की कसम खाई। परन्तु छोटी अब भी दोनों से नज़रें नही मिला रही थी । शायद उसे उस डायलॉग का इंतज़ार था जो जेम्स-बॉन्ड ने एक साथ मिलकर बोला।

“एक बार नज़रें उठाकर मुस्करा तो दे बहना। ताकि हमारा दिन अच्छा जाए।”

बस। अनायास ही खिलखिला उठी छोटी।

उस स्थान से बहुत दूर , एक अँधेरे से भरे गुप्त स्थान पर:-

“हा हा हा! जल्द ही ये पूरी दुनिया मेरी मुट्ठी में होगी। इस पूरी दुनिया को मेरी गुलामी करनी होगी। बस कुछ ही समय है इंसानो के पास।”

शाम के 6 बज रहे थे। काफी देर तक अपनी बहन के साथ समय बिताने के बाद जेम्स-बॉन्ड फिर बढ़ रहे थे किसी मंज़िल पर। दोनों के चेहरों पर वो ज़बरदस्त ख़ुशी थी जो हर साल इसी दिन दिखती थी यानी ‘रक्षाबंधन’ के दिन।
जल्दी ही जेम्स की बाइक उस विशाल बंगले के आगे रुकी।

“हम यहाँ क्यों आए हैं ?” बॉन्ड ने पूछा ।

“उस झोल का पता लगाने जिसका मैंने ज़िक्र किया था।” जेम्स बोला।

“यानी…यानि की हम प्रोफेसर की जासूसी करेंगे।” बॉन्ड का मुंह खुला हुआ था।

“जासूस और करते क्या हैं।” कहकर जेम्स ने एक जम्प मारी और दस फुट ऊंची दीवार पर जा खड़ा हुआ । फिर उसी दीवार पर बैठकर अपने जूते उतारने लगे।

“रहने दे भाई! मुझे इस मेंढक जूते की ज़रूरत नही।” बॉन्ड कुछ कदम पीछे हो कर दौड़ता हुआ आया और एक पैर दीवार पर मारकर कूदा। अगले ही क्षण वो भी दीवार पर बैठा हुआ था।

“ओह! मैं तो भूल ही गया था। तुझे परकॉर आता है।” जेम्स ने कहा।

“ऐसे ही भूलता रहा न, तो घण्टा जासूस बनेगा तू।” बॉन्ड ने तिरछी मुस्कान के साथ कहा ।

“मेरा डायलॉग मुझे ही चिपका दिया। गुर्र!” जेम्स बोला ।

थोड़ी ही देर में वे प्रोफेसर जावेद के बंगले में चोरी छिपे घुस चुके थे। बंगला बहुत ही शानदार था, उसकी खूबसूरती देख कर दोनों के मुंह खुले के खुले रह गए थे। परन्तु ऐसा लग रहा था जैसे बंगले में कोई इंसान रहता ही नही है। बहुत ही गहरा सन्नाटा था वहाँ। जेम्स-बॉन्ड जल्दी जल्दी छान-बीन करने लगे। छान-बीन करते हुए दोनों हॉल में आ गए । अभी वे खड़े हो कर हॉल का नज़ारा ले रहे थे की तभी उन दोनों के कन्धों पर किसी ने हाथ रखा।
दोनों जल्दी से पलटे।

“तुम! तुम दोनों यहाँ क्या करने आए हो?” प्रोफेसर ने चौंककर पूछा।

“आ…हम तो बस ये देखने आए थे की कहीं आपको किसी चीज़ की ज़रूरत तो नही। जैसे की ये चायपत्ती।” बॉन्ड अपनी जेब से चायपत्ती का पैकेट निकालता हुआ बोला।

प्रोफेसर ने खुश हो कर चायपत्ती उससे हथिया ली।
“वाह! यही तो चाहिए था मुझे। चायपत्ती खत्म हो चुकी है और सारे नौकर चाकर भी छुट्टी पर हैं।”

“हे हे” जेम्स-बॉन्ड ने एक साथ दाँत दिखाए।

“वैसे आ ही गए हो तुम लोग तो चाय पी कर जाना।”

जल्द ही प्रोफेसर के साथ बैठकर जेम्स-बॉन्ड चाय की चुस्कियां ले रहे थे।

“अच्छा बच्चों। मैं जानता हूँ तुम लोग यहां किस लिए आए हो।” अचानक प्रोफेसर ने कहा। “चलो तुम दोनों को वो कहानी बता ही देता हूँ।”

प्रोफेसर उठे और एक अलमारी की ओर चल दिए, जेम्स-बॉन्ड ने एक दूसरे को देखा। प्रोफेसर के हाथ में एक मोटी किताब थी। वे किताब लेकर जेम्स-बॉन्ड के पास आ बैठे। किताब देखने में काफी पुरानी लग रही। उसका कवर पेज पूरा काला था तथा सुनहरे धागों से अजीबों गरीब आकृतियां बनी हुई थी उसपर।
प्रोफेसर ने अपना गला खंखारा साथ ही एक लम्बी साँस खींची।

“हाँ तो बच्चों सुनो। ये कहानी नही सच्चाई है। पृथ्वी पर बहुत समय पहले डायनोसौरों की उतपत्ति से भी पहले काले राक्षसों का राज था…”

युगों समय पहले का दृश्य :-

पूरी पृथ्वी पर हरियाली का नामोनिशान नही था। हर तरफ सिर्फ ज्वालामुखी और काले-काले जंगल थे। पृथ्वी लगभग आग का दहकता गोला थी। और उसी पृथ्वी पर रहते थे वे काले राक्षस। उन राक्षसों का एक ही सरदार था…“एरांको” । पूरी पृथ्वी पर उसका ही एकछत्र राज था। एरांको को राय देने के लिए उसका एक गुरु भी था जिसका नाम निब्रो था। निब्रो को काले जादू का भी ज्ञान था। उस समय पृथ्वी पर डायनसौरों से भी अजीब और भयानक जानवर रहते थे।जिनसे राक्षसों की कभी नही पटती थी। आए दिन उन प्राणियों और राक्षसों में युद्ध हुआ करते थे। कभी राक्षस उनपर भारी पड़ते कभी वे राक्षसों पर । आए दिन उनके बीच भयंकर मार काट होती थी। धीरे-धीरे राक्षस उन प्राणियों पर भारी पड़ने लगे। और जल्द ही उन अजीबो गरीब प्राणियों की प्रजाति खतरे में पड़ गई। राक्षस बड़े ही निर्दयी थे। वे उन जानवरों के बच्चों को उठा ले जाते थे और बड़े ही चाव से खाते थे। जल्द ही पृथ्वी से उन प्राणियों की प्रजाति एक दम खत्म हो गई। अब राक्षसों के खाने के लाले पड़ने लगे। उसी समय पृथ्वी पर उतपत्ति हुई डायनासौरों की। बस फिर क्या था। काले राक्षसों को नए शिकार मिल गए। उन्होंने डायनासौरों को अपनी सवारी भी बनाना शुरू कर दिया और भोजन भी। परन्तु उनका मौज कब तक चलता। जल्द ही पृथ्वी पर हरियाली छाने लगी । काले जंगल खत्म होने लगे। राक्षस बचे हुए काले जंगलों में भागने लगे और जगह की कमी की वजह से वे आपस में युद्ध करने लगे। राक्षस अपने सरदार एरांको की भी नही सुनते थे। ताकत के मामले में तो उन राक्षसों का कोई सानी न था। वे एक ही मुक्के में पहाड़ को चूर कर देते थे। और जब वे आपस में ही लड़ने लगे तब तो पूरी पृथ्वी पर प्रलय आ गई । एरांको परेशान हो कर अपने गुरु निब्रो के पास पहुंचा।

“महा गुरु निब्रो। बड़ी ही विकट घड़ी आ गई है। पूरी पृथ्वी पे हरियाली छाती जा रही है। हमारे रहने के लिए जगह कम पड़ रही है और मेरी प्रजा आपस में ही लड़ रही है।” बड़े काले चेहरे पर चिंता के भाव , सर के बीचोबीच लाल धधकता हुआ आग का गोला, दो लम्बी लम्बी और खतरनाक तरीके से मुड़ी हुई सींग, आँखों में ज्वाला सी दिख रही थी, बड़े और लम्बे नाखूनों से भी लावा निकल रहा था, और यह सब बातें बाकी राक्षसों से भयंकर बनाती थी एरांको को। चेहरे पर चिंता के भाव लिए हुए भी वो खूंखार लग रहा था।

निब्रो एक ऊंचे पत्थर पर बैठा हुआ था। उसके हाथ में किसी डायनासौर का दिल था जिसे उसने अपने लम्बे नाखूनों से उस डायनासौर की छाती फाड़ कर निकाला था। चेहरे पर गहन चिंता के भाव लिए, उसकी पीठ में ज्वाला धधक रही थी। चेहरा एरांको से भी भयानक । उसने अपनी भयंकर आवाज़ में कहा। “मैं देख रहा हूँ एरांको। उस पल को देख रहा हूँ, उस समय को देख रहा हूँ , जब हमारा नामोनिशान यहाँ से मिट जाएगा। ये जो तुम देख रहे हो ये तो सिर्फ शुरुआत है। अभी तो हमारा अन्त होना बाकी है।”

क्रमश :

अगला भाग :- The Black History

दोस्तों । प्लीज़ कमेंट करें। बस और कुछ नही ।

Written By- Talha Faran for Comic Haveli

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5 Comments on “The Black Demon Part 4”

  1. शानदार कहानी तल्हा।
    एक्शन सीन बहुत ही गजब है, और सस्पेन्स तो इस पूरी कहानी में शुरू से ही बना हुआ है।
    अब जब हमारे हीरोज मैदान में आ ही चुके है तो राक्षसों की खैर नहीं।
    अब अगले भाग का इंतेजार है।

  2. kahani kuch jayada hi lmbi he …abhi aada part pda he …baaki ka aada part abi pdna baaki he….mzaa aa rha jems aur bond ki story padkar

  3. aaha ab complete story di hy .mzzaa aa gyapad kar …jems-bond ki jodi such m kmaal lag rhi h… action seen kaafi jbrdst aur bdaa tha….aur prfosr ka dost i mean nokar itna khtrnaak niklygaa mene tho socha hi nhi tha….kaly raksh ki kahani abi suri huyi hy …so andaaza pgaya ja sakta hy ki vilin bhut strong hony vala hy …par jese jese kahani aagy bd rhi hy kahani sy interst thoda kam hota ja rha he…becuse khani ke phly part m jo suspence create kiya tha vo abi tk chl rhaa he jo ab boring lgny lga he…ik swaal ka agr lgaatar jvab na mily tho fir us swaal ko krny ka mn nhi karta..abi tk yeh bi pta nhi chla ki aakhir 15 mhiny phly profsr ky sath huya kya tha…aasa karta hu ki agly part m km sy km aadha sespence tho aap clear kregy hi …aur plz jldi sy jldi next part laya kry ..varna ksm sy agla part nhi pdungaa

  4. बहुत ही शानदार लिखा है तल्हा आपने इस पार्ट को।
    इसमें एक तरफ एक लंबा चेज़ भी था अब्दुल को लेकर और रक्षाबंधन का एक छोटा सा हिस्सा भी था।
    अब्दुल को पकड़ने में भले ही इस बार जेम्स बांड हार गए लेकिन अगली बार वो पकड़ लेंगे हीरो जो हैं। हाहाहा।
    तल्हा जी आपने अपना मार्शल आर्ट का ज्ञान इसमे डाला हुआ है जो पढ़ने में अच्छा लग रहा है बल्कि गूगल भी करना पड़ेगा अब तो।
    लेकिन जेम्स बॉन्ड करते क्या हैं और उम्र etc ये जानने की इच्छा है।
    प्रो O जावेद जेल से रिहा हो गए और अब जेम्स बॉन्ड को कहानी सुनाएंगे और आगे स्टोरी बढ़ेगी सही है।
    छोटी का छोटा सा कैमियो है शायद इस कहानी में।
    जेम्स के हाई गैजेट्स और बांड की मार्शल आर्ट देखने को मिलेगा अब लगता है।
    एरंको एक राक्षस है वो भी ब्लैक demon, उसकी वेश भूषा पाश्चत्य दैत्यों की याद दिलाते हैं लेकिन उसका अंत कैसे हुआ ये जानने में बड़ा मजा आएगा।
    ये निब्रो भविष्यवक्ता है और शायद दीर्घायु होगा तो इसका कहानी में क्या रोल है देखते हैं।
    ओवरआल मुझे ये पार्ट एवरेज लगा तल्हा जी
    आप जो लिखते आ रहे हैं उस हिसाब से ये थोड़ा कमतर रहा ।
    आप अपने लिए एक अलग स्टैण्डर्ड बना चुके हो तो ये खास नही लग पाया।
    मतलब स्टोरी में कोई मोड़ नहीं था बल्कि सीधी थी।
    सस्पेंस थ्रिलर है तो आशा है आगे सर खुजाने को हम तैयार रहें।
    All the best आगे के लिए और एक सुखद और बेहतरीन लेखन के भविष्य के लिए।

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