The Black Demon Part 7 (Conclusion Part)

The Black Demon part 7 – Last

[ The Black Christal ]

जेम्स लगातार बॉन्ड को कॉल मिला रहा था परन्तु हर बार सिर्फ यही सुनने को मिल रहा था ‘आप जिस व्यक्ति से सम्पर्क करना चाहते हैं वह अभी व्यस्त है कृपया कुछ देर बाद प्रयास करें।’  “शह्! कहाँ बिज़ी हो गया यह?” जेम्स ने बाल नोच डाले अपने।

दूसरी ओर बॉन्ड अब भी बाइक पर बैठा हुआ था। उसने बाइक स्टार्ट की थी लेकिन फिर बन्द कर दी। क्योंकि उसकी बहन का फोन आ गया था जिससे वह इस समय बात कर रहा था। फोन पर छोटी कह रही थी। “हैल्लो बॉन्ड भैया। एक सरप्राइज़ है तुम्हारे लिए , जल्दी से घर पर आओ।”

बॉन्ड बोला “तेरा सरप्राइज़ मैंने देख लिया।”

“मतलब?”  छोटी ने पूछा।

“तू कहाँ है इस वक़्त?” बॉन्ड बोला।

“लगता है तुम घर पर आए हुए हो? अंदर गए या बाहर ही हो?”  उधर से छोटी की आवाज़ गूंजी।

“तू कहाँ है यह बता?”  इस बार बॉन्ड ने थोड़ा कड़ककर पूछा।

“आ… मैं अपने एक दोस्त के घर आई हुई हूँ।”

“ओके। मैं तुझसे वहीँ आकर मिल ले रहा हूँ …. बोल कहाँ है।

“न नही नही। रुको मैं आ रही हूँ , रास्ते में ही हूँ।”

इस वक़्त शाम के साढ़े सात बज रहे थे । अन्धेरा हो चला था। बॉन्ड ने चाहा की फौरन यहाँ से चला जाए वह ‘उसे’ ज़रा भी देखना पसन्द नही करता था। लेकिन अपनी बहन के कारण वहां रुका हुआ था क्योंकि उसे पता था अगर उसकी बहन वहां आएगी तो अपने भाई को वहां न पाकर वह उदास हो जाएगी। यही वह चीज़ है जो दोनों भाई बर्दाश्त नही कर सकते – अपने बहन की उदासी।

बॉन्ड की आँखों के आगे तीन साल पहले के दृश्य तैरने लगे जब उसने ‘उसे’ थप्पड़ मारा था जिसे वह दिलो जान से प्यार किया करता था। कितना प्यार करता था वह ‘उससे’ और उसने क्या किया?

बॉन्ड की बहन को उसके ही सामने “भिखारी की औलाद” कहा और न जाने क्या क्या बुरा जहा उसने। वो भी पूरे स्कूल के सामने !

बॉन्ड चाहकर भी यह कभी नही भूल पाया और न ही भूल सकता था, और क्या कभी वो ये भूल भी पायेगा? शायद कभी नही।

“क्या तुम मुझे माफ़ नही कर सकते बॉन्ड?” यादों के परदें हटा कर उस ओर झांकता बॉन्ड यह आवाज़ सुनकर फिर इस ओर आ गिरा। उसका चेहरा मारे गुस्से के तमतमा गया , बाइक की पेट्रोल टँकी पर रखे हाथ यूँ कस गए मानो उसे फाड़ते हुए अंदर जा घुसेंगे। ‘वह’ आँखों में आँसू लिए अब भी बॉन्ड के पीछे खड़ी थी। ‘वह’ जिसकी आँखों में कभी आँसू नही मुस्कराहट देखना चाहता था बॉन्ड। जिसे बेस्ट फ्रेंड के रूप में पाया था उसने और अपनी उस दोस्त से उसे न जाने कब एक तरफा प्यार हो गया पता ही नही चला।

बॉन्ड ने उस दिन ठाना था कि आज वो अपने प्यार का इज़हार करके ही रहेगा लेकिन हुआ क्या?  उसी दिन उसकी बहन को पूरे स्कूल के सामने बुरा भला कह दिया उसने और वह भी बॉन्ड के सामने।

एक भाई पर क्या गुजरती है जब कोई उसकी आँखों के सामने ही उसकी बहन को कुछ कह दे लेकिन यहां तो बात उसके दिल को दुखाने की ही थी तो बॉन्ड को गुस्सा आना ही था और इस गुस्से से क्या हुआ? वही जिसका हमेशा से बॉन्ड को डर था। ना चाहते हुए भी न जाने कैसे बॉन्ड का हाथ काव्या पर उठ गया और उसे एक थप्पड़ मार दिया। हर भाई को बहुत गुस्सा आता है जब उसकी आँखों के सामने कोई उसकी बहन का दिल दुखाए, वही गुस्सा थप्पड़ के रूप में काव्या के गालों पर पड़ा था।

बॉन्ड ये कभी नहीं भूल पाया लेकिन आज फिर ये सब उसकी आँखों के सामने आ रहा था और इससे एक बार फिर बॉन्ड का गुस्सा तेज़ हो गया l

“बॉन्ड।” फिर उसने नाम लिया ।

बॉन्ड के दिल ने कहा गुस्सा थूक दे बॉन्ड परन्तु दिमाग उसे बार-बार पुरानी यादें यादों की वादियों में पटक दे रहा था।

“मुझे अपनी उस हरकत का बहुत पछतावा है। तुम नही जानते मैं अब तक घुट-घुट कर जीती रही हूँ क्योंकि मेरी उस हरकत की वजह से मैंने अपने बेस्ट-फ्रेंड को खो दिया था..”  काव्या का इशारा बॉन्ड की तरफ था।

बॉन्ड का दिल एक बार फिर पसीज गया परन्तु दिमाग मानने को तैयार नही था। “..उस घटना के कुछ दिनों बाद हमारे फाइनल एग्जाम के रिजल्ट्स आए और उसी दौरान डैड का ट्रान्सफर दूसरे शहर में हो गया। मैं न तुम से मिल सकी न तुम्हारी बहन से। आज इतने साल बाद मेरी फैमिली फिर यहाँ आई हुई है, और मैं उस मौके को खोना नही चाहती थी जो ऊपर वाले ने मुझे तीन साल की दुआओं के बाद दिया । मैंने अपने पाप का प्रायश्चित करने के लिए छोटी की माँ के कदमों में गिरकर सारी बात बताई और माफ़ी मांगी। उन्होंने मुझे हंसते हुए माफ़ कर दिया खुद छोटी ने भी माफ़ कर दिया। अब बचे हो तुम, तुम मुझे प्लीज़ मेरा बेस्ट फ्रेंड लौटा दो।” बॉन्ड के चेहरे पर एक शिकन भी न आई थी । बल्कि उसे गुस्सा आया की छोटी ने काव्या को माफ़ कैसे कर दिया। आखिर यह क्या बात हुई। एक इंसान की भरी महफ़िल में बेइज़्ज़ती करो और फिर तीन साल बाद आकर माफ़ी मांग लो। क्या इससे मामला सुलझ जाएगा, नही मैं नही माफ़ करूँगा। बॉन्ड मन ही मन खुद से बोला। तभी उसके फोन पर फिर रिंग हुई।

उसने फ़ोन उठाया तो उधर से छोटी बोल रही थी। “बॉन्ड भइया मेरे लिए एक काम करोगे?”

“क्या ?” बॉन्ड ने गुस्से भरी आवाज़ में पूछा । परन्तु वह गुस्सा अपनी बहन को नही पीछे खड़ी काव्या को सुना रहा था।

“अभी जो तुम्हारे पीछे खड़ी है न, उस बेचारी को माफ़ कर दो, मेरे लिए…प्लीज़ मेरे लिए माफ़ कर दो। प्लीज़…प्लीज़..प्लीज़।”   छोटी ऐसे ज़िद कर रही थी जैसे बच्चे टॉफी के लिए करते हैं “देखो मना मत करना …. और मुझे गुस्सा दिखाने की तो बिल्कुल भी कोशिश मत करना वर्ना मैं तुमसे गुस्सा हो जाउंगी और फिर कभी नही बोलूंगी ।”  छोटी ने एक ही साँस में अपनी सारी बात फटाफट कह डाली। अब तो बॉन्ड बुरी तरह फंस गया था। उसका मन तो चाह रहा था की अभी वहां से चला जाए पर…पर..दिल को न समझा सका। फिर भी बिना पीछे मुड़े वह सीधा काव्या से बोला।

“मैंने … तुम्हे माफ़ कर दिया । अब जाओ।”  बॉन्ड के मुंह से बड़ी मुश्किल से यह शब्द निकले थे ।

दिल तो कुछ और ही कहलवाना चाह रहा था । और काव्या। उसे तो यकीन नही हो रहा था, पर …… अब भी कुछ बाकी था जो काव्या कहना चाहती थी।

उसने एक गहरी साँस खींची, बड़ी ही तेज़ी से धड़कते अपने दिल को सम्भालते हुए बॉन्ड के पीछे थोड़ा और करीब गई।

काव्या की आँखे उसका साथ नहीं दे रही थी और न ही उसके कदम आज उसके साथ थे। वो जो भी कह रही थी वो सच तो था लेकिन अधूरा सच। कांपती आवाज के साथ खुद के जज्बातों और खुद को समेटते हुई अनजाने डर से घिरी काव्या बोल पड़ी।

“बॉन्ड , अब मेरी एक और बात सुन लो।”  उसने बड़े ही प्यार से कहा।

इसी आवाज पर तो बॉन्ड सब कुछ हार बैठा था अपना चैन हंसी सब कुछ।

“आज भी वही जादू वही मासूमियत कैसे खुद को रोकूँ और बोल सकूँ की तुम आज भी वही हो मेरे लिए लेकिन मेरी बहन भी मेरे लिए सब कुछ है फिर कैसे मान जाऊं और सुन लूं तुम्हें।” इसी कशमकश से जूझता बॉन्ड का दिल चाहा पलट कर उसे देखता ही रहे परन्तु उसने बिना उसकी तरफ देखे ही कहा “जो कहना है जल्दी कहो मेरे पास वक़्त नही..”

“आई…लव यू।”

काव्या के ये शब्द जैसे बिजली की तरह चमके हों बॉन्ड को कुछ समझ ही नहीं आया कि क्या उसने जो भी अभी सुना है वो सच मे काव्या ने ही कहा है? या वो अब भी अपने ख्यालों में खोया हुआ है। बॉन्ड उसकी तरफ पलटा और एक नजर भर देख कर वापस मुड़ गया।

अब उसका दिल तेज़ी से धाड़-धाड़ करने लगा था लब खामोश थे , समझ नही आ रहा था क्या कहे।

“क्या ये अभी जो मैंने सुना वो काव्या ने ही कहा? नहीं ऐसा नहीं हो सकता आखिर आज ही क्यों? लेकिन उसकी आँखों मे देख सकता हूँ कि उसने जो भी कहा वो झूठ नहीं है। लेकिन कैसे भूल सकता हूँ जो भी हुआ नहीं मैं नहीं भूल सकता बिल्कुल नहीं भूल सकता। ये सब छलावा है झूठ है ये सब। हां झूठ है।” आखिरकार बॉन्ड ने खुद को सम्भाल लिया और बोला “देखो मैंने तुम्हे माफ़ कर दिया वही बहुत है। अब चली जाओ और मुझे कभी नज़र मत आना।”

बॉन्ड ने कब बाइक स्टार्ट की उसे पता ही नही चला। कहते हैं न, दिल सिर्फ कहता है करवा कुछ नही पाता जब तक की दिमाग शरीर को हुक्म नाम दे उस काम को करने का। और इस वक़्त बॉन्ड का दिल कुछ और कह रहा था पर उसका दिमाग उस पर हावी था जो उससे जो चाहे करवा रहा था उन पुरानी यादों को हथियार बनाकर जो बॉन्ड को आज तक चुभती हैं। उसने बाइक स्टार्ट की और बगैर काव्या की ओर देखे चलता बना।

काव्या अब भी वहीँ खड़ी थी उसकी आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे आखिर बहते भी क्यों ना इतने सालों बाद आज वो अपने प्यार को इतने नजदीक से दूर जाता देख रही थी। शायद इस आशा में भी देख रही थी कि क्या पता वो वापस आये लेकिन वो वापस नहीं आया।

बॉन्ड अभी कुछ ही दूर पहुंचा था की उसकी मोबाइल एक बार फिर रिंग करने लगी। बाइक रोक कर उसने कॉल रिसीव की “हैल्लो भाई! तुमने काव्या को माफ़ तो कर ही दिया होगा अब तक, एक और बात सुन लो … सॉरी मैं तुम से कहना भूल गई थी। वह मुझे बहुत पसन्द है और मैं चाहती हूँ की वही मेरी छोटी भाभी बने।”  बॉन्ड गुस्से से लाल पीला नीला सब हो गया , वह छोटी को डांटने ही वाला था की छोटी ने उसे वही डायलॉग सुना दिया जिसके आगे बॉन्ड और जेम्स दोनों हार जाते हैं। “अगर मुझे नाराज़ किया तो मैं कभी बात नही करुँगी।” बॉन्ड ने उसे बिना कुछ कहे फोन रख दिया। अब वह खुद को समझा रहा था। इंसान से गलतियां बहुत होती हैं कभी किसी गलती की वजह से वह सामने वाले का दिल भी दुखा देता है। पर जब वही इंसान रो रो कर आपसे माफ़ी माँगे तो आपको उसे माफ़ कर देना चाहिए न की आप भी वही करो जो उसने किया , आप उसका दिल न दुखाओ। बॉन्ड ने काव्या को माफ़ तो कर दिया था पर उसने भी उसका दिल दुखा दिया था यह कर की दुबारा मुझे नज़र मत आना और–और …. उसके प्यार को क़ुबूल न कर के।

बॉन्ड को बड़ी हैरानी हुई , यह देखकर की उसने बाइक दुबारा छोटी के घर की ओर मोड़ ली है। अब उसका दिल दिमाग एक हो चुके थे। बढ़ती धड़कनो को सम्भाले हुए बॉन्ड बड़ी तेज़ी से वापस भागा जा रहा था।

उसे कुछ दूर से ही काव्या नज़र आने लगी। बहुत ही धीमे कदमों से आगे बढ़ रही थी, सर को झुकाए हुए ऐसे जैसे उसे अपनी बहुत ही कीमती चीज़ खोने का दुःख हो। बॉन्ड ने उसके करीब पहुँचते ही अचानक से ब्रेक लगाए थे , बाइक के पहिए सड़क पर रगड़ खा कर चिल्ला उठे। काव्या इस आवाज़ पर एकदम से पीछे पलटी और यही वह क्षण था जब बॉन्ड और काव्या की ज़नरें मिलीं। काव्या की आँखों में अब भी आंसू भरे थे , बॉन्ड ने उसे अब बगैर गुस्से के देखा तो पाया की वह कितनी प्यारी थी , काले लम्बे लहराते हुए बाल, आँखे भी काली । चेहरा हसीन और रँग गोरा। पहले से भी खूबसूरत लग रही थी वह। बॉन्ड उसकी आँखों से बाहर निकला ।

ना जाने क्यों बॉन्ड की नजरें उसे छोड़ना नहीं चाहती थी उसकी जबान लड़खड़ा रही थी लेकिन उसे बोलना ही था

“ आ …. मुझे तुमसे दो बातें कहनी हैं..”

काव्या के दिल की धड़कन तेज हो गयी लेकिन उसने इसका इज़हार नहीं किया बस एकटक बिना कुछ बोले उसे देखती रही।

“…दूसरी बात यह है कि …मुझे माफ़ कर दो।”

काव्या को जिसका इंतज़ार था वो न सुनकर उसे झटका लगा “ये मैं क्या सोच रही हूँ वो मुझसे प्यार कैसे कर सकता है? आखिर इतना सब हुआ था। वो नहीं कर सकता मुझे प्यार ऐसा मैं सोच भी कैसे सकती हूँ।”

“लेकिन दूसरी बात? तो पहली बात क्या है?”

काव्या को समझ नही आया वह क्या कह रहा है फिर भी उसने पूछ लिया। “और …. पहली बात…क्या है?”

बॉन्ड को शायद इसी सवाल का इंतज़ार था  ये सवाल आया भी लेकिन इसके लिए वो तैयार नहीं था । वो अपने हाथों को हिलाते हुए कभी इधर देख रहा था कभी उधर उसकी समझ नहीं आया कि वो क्या कहे और कैसे कहे।

आखिर इतनी बड़ी बात जो उसने इतने सालों तक खुद में छुपाये रखी उसे वो जाहिर कैसे करे। लेकिन फिर भी उसने अपने धड़कते दिल को सम्भाला और एक लम्बी साँस खींची ..“पहली बात यह है कि …आ…..आई लव यू टू।”

काव्या उसे फटी आँखों से देखने लगी,उसे लग रहा था वह सपना देख रही है। उसे ऐसा लगा मानो आस पास कुछ नहीं है सब कुछ रंगहीन केवल वो है और कोई पास नहीं। शायद ये सपना होगा? लेकिन नहीं ये सच था और इसका उसे एहसास होने बाकी था।

जबकि बॉन्ड सोच रहा था , वाह कितना आसान था यह । मैंने एक ही बार में बोल दिया।

उसने काव्या की आँखों के आगे हाथ लहराए। “हैल्लो कहाँ खो गई। मैंने सच कहा है।” काव्या बगैर जवाब दिए उससे लिपट गई , बॉन्ड ने भी वैसा ही किया। आज ऐसा लग रहा था जैसे जन्मों के बिछड़े मिल गए हों। उन दोनों से दूर एक गली के नुक्कड़ के पास दीवार से टेक लगाए खड़ी छोटी उन दोनों को देख रही थी। वह भी बहुत खुश थी “आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम दोनों को फिर एक साथ देखकर। मैं शुरू से जानती थी बॉन्ड भाई की तुम उसे चाहते हो। आज तुम दोनों को एक कर के मुझे बहुत ख़ुशी मिली है।”

दोनों कब तक एक दुसरे में खोए रहे पता ही नही चला । तभी उन दोनों का ध्यान बॉन्ड की मोबाइल पर बजते रिंग ने भंग किया। कॉल जेम्स की थी , बॉन्ड ने फौरन रिसीव की। “हैल्लो! किससे बिज़ी है बे तू! कब से फोन मिला रहा हूँ बिज़ी बता रहा!”  जेम्स की कड़कती आवाज़ गूँजी।

“अ व वो बात यह है की पता नही कैसे मोबाइल में एयरप्लेन मोड ऑन हो गया था। अभी मैंने देखा तो हटाया। और जैसे ही हटाया तेरा फोन आ गया।”

 

 

 

“चल अब जल्दी से वहां पहुँच जहाँ का पता मैं दे रहा हूँ। तेरा इंतज़ार करता तो टाइम वेस्ट होता। इसलिए मैं निकल चुका हूँ। तू भी आ।”  जेम्स हाँफते हुए बोल रहा था। जैसे वह जल्दी में कहीं जा रहा था।

 

“ओके । मैं तुरन्त पहुँचता हूँ। पता बोल।”

जेम्स ने उसे पता दिया और फिर कॉल डिस्कनेक्ट हो गई।

 

बॉन्ड काव्या की ओर पलटा। बॉन्ड के कुछ बोलने से पहले काव्या ने ही पूछ लिया। “जेम्स था क्या?”

 

“हाँ ।”  बॉन्ड ने हंसते हुए कहा।

 

“कैसा है वह?”  काव्या ने पूछा।

 

“वैसा ही जैसा पहले था। पर अब पहले से ज़्यादा होशियार चन्द समझने लगा है खुद को।”  काव्या हंस दी । “असल में वह है भी।”  बॉन्ड ने आगे कहा। इस पर दोनों खुलकर हँसे।

 

“अच्छा । अब मैं चलता हूँ। आ…….. कब तक हो यहाँ?”

 

काव्या के बोलने से पहले बॉन्ड दुबारा बोल पड़ा “खैर छोड़ो। कल मिलते हैं।” बॉन्ड ने बाइक स्टार्ट की और चला गया। काव्या को यकीन नही हो रहा था अभी जो सब हुआ। यह उसकी ज़िन्दगी का सब से बेहतरीन दिन था।

 

 

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जेम्स एक बड़े से गेट के सामने खड़ा था। उसने एक बार आस पास का जायज़ा लिया , और फिर उस गेट पर चढ़ने लगा।

 

“यह है मोहन नगर का एरिया 21 l आसान भाषा में इसे मोहन नगर का ट्रांसपोर्ट नगर भी कहते हैं लोग। 2 किलोमीटर के दायरे में फ़ैला यह एरिया शहर भर के सभी बड़े वाहनों से भरा पड़ा रहता है।”  जेम्स गेट पार कर के उस पार पहुँच चुका था। रात के अँधेरे में जगह-जगह पर लगे हुए बिजली के खंबों से लटकते बलब्स ने रौशनी फैला रखी थी । जेम्स को एक किलोमीटर की दूरी पर वह विशालकाय फैक्टरी दिखी जहाँ बड़े बड़े वाहनों जैसे ट्रक, बस आदि इन सब की मरम्मत और पार्ट्स बदले जाते थे। फैक्टरी इस वक़्त रौशनी से भरी हुई थी। साफ़ ज़ाहिर था की कोई है वहां पर। जेम्स उस ओर बढ़ने लगा।

 

बॉन्ड बाइक को पूरी तेज़ी से भगाता हुआ एरिया 21 की ओर बढ़ रहा था। “जेम्स को ऐसा क्या पता चल गया? उसने एरिया 21 क्यों बुलाया मुझे?”  अपने आप में ही सवाल करता हुआ बॉन्ड बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ रहा था।

 

उधर जेम्स फैक्टरी के गेट पर खड़ा था। अंदर बिलकुल खामोशी थी, फैक्टरी से खटपट या किसी भी तरह की कोई आवाज़ नही आ रही थी। जेम्स ने यूँही गेट को धक्का लगाया और गेट खुलता चला गया। जेम्स हैरानी के भाव लिए अंदर दाखिल हुआ। फैक्टरी की छत काफी ऊंची थी । इधर-उधर लोहे के बड़े-बड़े सामान तथा मशीनें फैली हुई थीं। हैरानी की बात यह थी की जब कोई था ही नही वहाँ तो रौशनी क्यों फैली हुई थी। नही …. कोई तो था वहां। ऐन वक़्त पर अपने पीछे दबे पाँव बढ़ती आफत को भांप कर जेम्स झुककर पीछे पलटा और कन्धे पर उठा कर उस शख्स को एक ओर फेंक दिया। धड़ाम की आवाज़ हुई और वह शख्स कराह उठा। तभी तालियों की आवाज़ गूंजने लगी वहां के वातावरण में। जेम्स ने सामने देखा । वही नकाब पोश शख्स करीब बीस पच्चीस लोगों के साथ सामने से चलता चला आ रहा था। “चेहरा छुपाने की कोई ज़रूरत नही है प्रोफेसर …. जावेद खान!”  जेम्स ने गुस्से में कहा।

 

अचानक अपने चेहरे से नकाब नोचकर फेंक दिया प्रोफेसर ने।

“दाद देनी होगी तुझे छोरे!  तू न सिर्फ मुझे पहचान गया बल्कि मुझे ढूंढ भी निकाला।”  क्रूर मुस्कराहट लिए बोले प्रोफेसर जावेद ।

 

“आपको ढूंढना तो बहुत ही आसान था। आप जिस वक़्त न्यूज़ चैनल पर नज़र आ रहे थे उस वक़्त आपके पीछे कुछ दूरी पर ट्रक के कुछ पार्ट्स लटकते नज़र आ रहे थे । हर इंसान की नज़र आप पर रही होगी परन्तु मैं उस समय यह देखने की कोशिश कर रहा था की आप बोल कहाँ से रहे हैं। और मेरी नज़र उन पार्ट्स पर पड़ गई, हालाँकि वह मुश्किल से नज़र आ रहे थे .. पर आ रहे थे। जब मैंने ऊपर छत की तरफ देखा तो पाया की छत की ऊंचाई काफी ज़्यादा थी। बस मेरा शक यकीन में बदल गया के आप एरिया 21 की फैक्टरी में छुपे हुए हैं। इस जगह का ख्याल मेरे दिमाग में आने के पीछे एक और बड़ा कारण है ….. एरांको को छुपाने के लिए ऐसी ही बड़ी जगह चाहिए थी न आपको?”  जेम्स की बात पूरी होते ही प्रोफेसर फिर तालियां बजाने लगे।

 

चेहरे पर शैतानीयत से भरी मुस्कान लिए बोले प्रोफेसर। “तुझे जितनी भी दाद दूं मैं कम है लड़के। तू बहुत ही खतरनाक है ।”

 

“हाँ और इसीलिए मुझे और बॉन्ड को अपने रास्ते से हटाने के लिए आपने अब्दुल के द्वारा हमे झूठी इनफार्मेशन दिलाई और काला जंगल भेज दिया। वहाँ आपके आदमी पहले से छुपे हुए थे हथियारों से लैस हो कर । मैंने कई छायाओं को हमारा पीछा करते देखा पर मुझे लगा यह मेरा वहम है। पर वह सच था। आपके आदमी हम पर हमला ज़रूर करते अगर ऐन वक़्त पर वह निंजा गर्ल बीच में न आ गई होती

। मुझे और बॉन्ड को निंजा गर्ल से लड़ता और पिटता हुआ देखकर आपके आदमी निश्चिन्त हो कर वापस चले आए। परन्तु अब मुझे समझ आया । वह निंजा गर्ल हमे मार नही रही थी, बचा रही थी। उसने जान बूझकर बॉन्ड का ऑक्सीजन सिलेंडर फाड़ा ताकि मैं उसे लेकर तुरन्त जंगल से बाहर निकल जाऊँ।”  जेम्स की बात पूरी होते ही प्रोफेसर ने झुंझलाहट में माथा पीट लिया।

“उसकी खोज तो मुझे भी है! कौन थी वह निंजा लड़की? क्या कर रही थी वहाँ? वह न होती तो तुम दोनों की लाश भी उस जंगल से बाहर न आती।”

 

“वह जो भी थी। उसने आपके आदमियों को हमारा पीछा करते देख लिया था। फैक्टरी में दाखिल होते समय मैंने एक कोने में ढेर सारे काले कपड़े पड़े देखे और मैं समझ गया जंगल में मुझे वहम नही हुआ था। आपके आदमी यही कपड़े पहन कर हमारा पीछा कर रहे थे।”

 

“बम पर बम फोड़ता जा रहा है तू! यह तो बता मुझ पर शक कैसे हुआ तुझे?”  प्रोफेसर ने पूछा।

 

 

“आप पर शक तो मुझे शुरू में ही हो गया था जब आपसे मेरी मुलाक़ात मोहन नगर मेन कोर्ट के बाहर हुई थी। आप मेरे सवालों का सही से जवाब नही दे रहे थे ऊपर से आँखें चुरा रहे थे, दूसरा शक तब हुआ जब मुझे पता चला की अब्दुल भरी अदालत में खुद का गुनाह क़ुबूल कर भाग उठा, जो की आपने करवाया था। ज़ाहिर था आपको अपने आपको निर्दोष साबित करना था वह भी हो गया, और आपको अब्दुल की ज़रूरत भी थी इसलिए उसे भगा भी दिया। तीसरा शक मुझे तब हुआ जब आप ब्लैक डेमन्स का इतिहास सुनाते वक़्त किताब का एक पेज छोड़ गए। चौथा शक तब हुआ जब मैं और बॉन्ड चुपके से आपके घर पहुँचे। मुझे ऊपर छत से दो लोगों की खुसफुसाहट सुनाई दी जो की आप और अब्दुल थे । फिर शायद आप समझ गए की कोई ऊपर आ रहा है , इसलिए अब्दुल को भाग जाने को कहा परन्तु ऐन वक़्त पर हम वहां पहुँच गए , जब हमने अब्दुल को पकड़ा उस वक़्त वह भीगी बिल्ली बना हुआ था परन्तु अचानक एक किर्र की आवाज़ हुई और अब्दुल खूंखार हो उठा। यहीं पर मुझे चौथा शक हुआ , मेरा वह चौथा शक तब यकीन में बदल गया जब अब्दुल को बेहोश कर के मैं आपके पास पहुँचा , बॉन्ड ने तो नही देखा था परन्तु मैंने देख लिया आपकी  पैंट के पिछले पॉकेट से एक रिमोट झाँक रहा था। आपके हाथ इस तरह बंधे हुए थे जैसे कोई इंसान खुद से अपना हाथ बांधता है …”

 

 

“हाँ वह वही रिमोट था जिससे मैं अब्दुल के दिमाग में लगे चिप को नियंत्रित करता हूँ।” प्रोफेसर बीच में ही बोल पड़े “अब आगे बोल।”

 

जेम्स फिर शुरू हो गया “…फिर मैंने सोचा एक चांस देता हूँ आपको। मैंने खुद को समझाया की यह मेरा वहम है, परन्तु सच्चाई तो यही थी। फिर जब आप टीवी पर आए मोहन नगर वासियों को धमकी देने तो मैंने आपकी आवाज़ पहचान ली , भले ही आप आवाज़ बदलने की जितनी कोशिश कर रहे थे पर मैंने पहचान ली आपकी आवाज़ भी और आपकी आँखें भी। अब बस आपको रंगे हाथों पकड़ना था वह भी हो गया। सच पूछो तो मैं आपका शुक्र अदा करना चाहता हूँ क्योंकि आपने मुझे यहाँ तक पहुँचने का रास्ता दिखाया है। किताब का जो पेज आपने छोड़ दिया था उसकी मैंने फ़ोटो क्लिक कर ली थी । वह पेज  ट्रांसलेट कर के मैंने जब पढ़ा तो मुझे तुरन्त समझ आ गया की एरांको का हमला आज ही होगा। उस पेज पर एरांको के गुरु निब्रो ने लिखा था :- जंगल से बाहर निकाल कर जब तुम्हे मानवों की आबादी में कोई ले जाएगा, उसके बाद पहले सूर्य ग्रहण से एक दिन पहले तुम जाग जाओगे और तुम्हे उसी दिन सौ लोगों को मारना होगा ताकि तुम …. ब्लैक एनर्जी से भरा क्रिस्टल पहन सको जिससे तुम्हारी शक्तियां जल्दी वापस आ जाएंगी।”

 

जेम्स की बात खत्म होते ही प्रोफेसर की आँखें चौड़ी हो गईं।।   “तुझे मैंने जितना समझा था उससे भी ज़्यादा निकला तू तो।”

 

 

“तारीफ के लिए शुक्रिया।” जेम्स ने गर्वीली मुस्कराहट के साथ कहा। “अब आगे की कहानी तो सभी को पता है। एरांको के जागते ही आपने उसे सौ लोगों को मारने भेज दिया। पर आप नही चाहते थे की भारी भरकम एरांको लोगों की नज़रों में आए क्योंकि अभी वह कमज़ोर है । पुलिस और सेना के हथियार उसे खत्म कर सकते थे। अन्धेरा होते ही आपने उसे एक पूरी बिल्डिंग तबाह करने भेज दिया पर अफ़सोस …. वह बिल्डिंग खाली थी।”  जेम्स ने कहा।

 

 

“बाकी का सस्पेंस मैं ही क्लियर कर देता हूँ।”  प्रोफेसर बोले “हाँ । मैंने ही एरांको को वह बिल्डिंग तबाह करने भेजा था , ताकि वह एक ही बार में सौ से ज़्यादा लोगों को मार सके। और तुझे एक सीक्रेट बताऊँ लड़के? एरांको के भेजे में भी मैंने वैसा ही एक हाई पावर का चिप फिट कर रखा है। जैसा अब्दुल के भेजे में है। अब एरांको तबाही तो फैलाएगा । वह क्रिस्टल पहन कर जो की मुझे काले जंगल में एक वृक्ष के ठूँठ के तने की कोटर में मिला था–अपनी शक्तियां भी वापस पाएगा पर फर्क इतना है की नाचेगा मेरे इशारे पर। और लड़के तूने सही कहा, मुझे बहुत अफ़सोस हुआ की वह बिल्डिंग खाली थी …. पर अब कोई अफ़सोस नही क्योंकि …. मेरा शेर(एरांको) शहर की एक बड़ी बिल्डिंग को ध्वस्त कर ने फिर से निकल चुका है…. आ ……शायद ध्वस्त कर भी चुका हो, हा हा हा हा।”

 

जेम्स के चेहरे के भाव बदल गए परेशानी और गुस्से के मिले जुले भाव में। उसने फौरन अपने कान में लगा रखे एक प्रकार के डिवाइस से बॉन्ड से कॉन्टैक्ट किया। “हैल्लो ….बॉन्ड तू कहाँ है ?”

 

उधर से बॉन्ड का जवाब आया “मैं एरिया 21 में दाखिल हो चुका हूँ।”

 

इस पर जेम्स बुरी तरह चौंक गया “क्या कहा तूने! तू एरिया 21 में दाखिल हो चुका है! पर गेट तो बन्द था मैं कूद कर अंदर आया।”

 

“गेट तो पूरा खुला हुआ था।”  बॉन्ड ने कहा। जेम्स के चेहरे के भाव बनने बिगड़ने लगे । वह हैरान और परेशान नज़र आने लगा। उसके सामने अपने आदमियों के साथ खड़े प्रोफेसर के चेहरे पर क्रूर मुस्कान नज़र आ रही थी। “इस का मतलब समझा लड़के …? हा हा हा”  प्रोफेसर ठहाका लगाने लगे।

 

जेम्स अपनी पूरी आवाज़ में चिल्ला उठा “बॉन्ड तू …. तू बाइक की फुल स्पीड कर के भाग वहां से!!”

 

“परन्तु क्यों? ए….एक मिनट। मुझे मेरे पीछे एक गुर्राहट सुनाई दी। ओह माय गॉड!”  जेम्स सिर्फ इतना ही सुन सका क्योंकि अगले ही क्षण दोनों का सम्पर्क टूट गया।

 

 

बॉन्ड अपनी बाइक सहित एक ओर गिरा पड़ा था। उसका एक पैर बाइक के नीचे दबा हुआ था। जबड़े भींचे हुए बॉन्ड ने अपने पैर को निकालने की पूरी कोशिश की , क्योंकि उसकी ओर बड़ी तेज़ी से बढ़ता आ रहा था….एरांको।

 

 

अभी तक जिसकी कहानी सुनकर उसे कल्पनाओं के आयाम में देखा था बॉन्ड ने आज वह उसकी आँखों के सामने यमदूत की तरह बढ़ता आ रहा था। एरांको का पूरा शरीर काला था । उसका हुलिया, लम्बाई, चौड़ाई सब सेम थी।  सर पर वैसे ही सींग थे। परन्तु इस समय उसके सर में ज्वाला नही भड़क रही थी क्योंकि अभी उसने अपनी पूरी शक्ति हासिल नही की थी। उसकी लम्बाई 15 फुट से कम नही रही होगी। जब वह चल रहा था तो धरती मानो काँप रही थी। एरांको उसके करीब पहुँचा और उसकी गर्दन पकड़ कर हवा में टांग दिया। बॉन्ड बुरी तरह हाथ पाँव चलाने लगा।

 

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जेम्स बार-बार बॉन्ड की मोबाइल पर कॉल कर रहा था परन्तु कोई जवाब नही आ रहा था। जेम्स को इस तरह परेशान देखकर प्रोफेसर के होंठों पर भयानक मुस्कान फैली हुई थी। “च् च् च्। मुझे तुझपर तरस आ रही है बच्चे। पर क्या करूँ । तुम दोनों को ही हीरो बनने का शौक था। चलो ठीक है तुम दोनों की मौत को मैं फिलहाल कुछ समय के लिए रोक देता हूँ।” प्रोफेसर के हाथों में एक छोटा सा डिवाइस नज़र आने लगे जिसको अपने मुंह के पास लाकर वह बोले। “एरांको… उस बच्चे को ज़िंदा मेरे पास लेकर आ।”

 

जेम्स ने थोड़ी राहत की सांस ली। अचानक उसे अहसास हुआ धरती हिलने लगी है। प्रोफेसर के चेहरे पर फैली मुस्कान और फ़ैल गई। “आ गया मेरा …”

 

भड़ाक की आवाज़ हुई और दरवाज़ा तोड़ता हुआ अंदर आ घुसा। “ …. गुलाम। एरांको।” प्रोफेसर तालियां बजाने लगे।

 

एरांको ने कन्धे पर टांग रखे बॉन्ड को नीचे पटका और किसी पालतू कुत्ते की तरह प्रोफेसर के आगे जाकर गुर्राने लगा। जेम्स, बॉन्ड की ओर लपका।

 

“तू ठीक तो है बॉन्ड!”  जेम्स ने पूछा।

 

बॉन्ड कराहता हुआ बोला। “यार ! पूरी कहानी में मुझे ही धुलवाने की ठान ली है क्या तल्हा ने!”

 

तभी प्रोफेसर का ठहाका गूंजने लगा। “हा हा हा। तो बच्चों कैसी लगी मेरे शेर की एंट्री? एकदम अप्रत्याशित और अचानक से हुई न। अब तुम लोग अपनी आँखों के सामने इसे ब्लैक क्रिस्टल धारण करते देखोगे।”  प्रोफेसर के हाथ में चमकने लगा वह काला गोल अंडकार क्रिस्टल जिसके अंदर लाल रौशनियां इधर उधर तैर रही थीं। उस छोटे से क्रिस्टल को प्रोफेसर ने एक लोहे के पट्टे में बने गोल छेद में चिपकाया और उस पट्टे को अगले क्षण एरांको के गले में डाल दिया। एक चिंगारी सी चमकी और एरांको पूरा गला फाड़ कर गुर्रा उठा। “हा हा हा। अब इसकी शक्तियां सात दिन के अंदर पूरी तरह से इसके पास आ जाएंगी।”  प्रोफेसर जावेद वहशी मुस्कराहट लिए ख़ुशी के मारे कूदने लगे।

 

तड़ तड़ तड़। तालियों की गूँज सुनकर प्रोफेसर का नाचना रुक गया। वह जेम्स की ओर देखने लगे। “तू तालियां क्यों बजा रहा था? ”

 

“नाच बड़ा अच्छा रहे थे आप। अब जाकर जेल में नाचिएगा, पुलिस पूरी तैयारी के साथ आ रही है। उनके पास सेना और टैंक्स भी हैं और खतरनाक हथियार भी । एरांको अभी उतना शक्तिशाली नही है की उनका सामना कर पाए।”  अब जेम्स-बॉन्ड के चेहरे पर विजयी मुस्कराहट नज़र आ रही थी और प्रोफेसर की मुस्कराहट भक् हो कर उड़ गई थी। “पु …. पुलिस को किसने बुलाया?”

 

“बुलाया तो किसी ने नही है। पर अभी तक जो कुछ यहाँ हुआ उस सब का लाइव प्रोग्राम मोहन नगर के हर एक न्यूज़ चैनल पर शहर का लगभग हर एक नागरिक देख चुका है। और हमारी पुलिस भले ही सुस्त है पर जब हमला पूरी मानवाता पर होता है तो वे भी सुस्ती भूल जाते हैं।”  जेम्स ने कहा

 

“पर…पर कैमरा कहाँ है यहाँ?”  प्रोफेसर ने हैरत से पूछा।

 

जेम्स बोला “यह सस्पेंस खोलने का मेरा मूड नही अभी।”

“अरे! मेरे कानो में ढेर सारे टैंक्स की आवाज़ें क्यों आ रही है?”

 

“हाँ मेरे भी आ रही हैं।”  बॉन्ड कान पर हाथ रखकर सुनने की एक्टिंग करते हुए बोला।

 

“हाँ न! दे ताली।”  जेम्स और बॉन्ड ने एक दूसरे से ताली ठोकी।

 

सच में टैंक्स और गाड़ियों की आवाज़े आ रही थीं। ऐसा लग रहा था पूरी फ़ौज आ रही है । आवाज़ें लगातार तेज़ हो रही थीं।

 

“बॉस, बॉस । पूरी सेना आ रही है।”   प्रोफेसर के गुंडों में से एक गुंडा एक ओर से भागता हुआ आया।

 

जेम्स-बॉन्ड के चेहरों पर मुस्कान खेल गई। प्रोफेसर फुंफकार उठे। “एरांको ! चल भाग यहाँ से ।” प्रोफेसर ने एरांको को ऑर्डर दिया। परन्तु एरांको एक कदम बढ़ाते ही चिंघाड़ उठा। प्रोफेसर ने पलट कर देखा , एरांको बुरी तरह काँप रहा था जैसे उसे हाई वोल्टेज का करन्ट छुला दिया गया हो। प्रोफेसर के चेहरे पर एक पल को डर के भाव आए। “एरांको भाग! क्या हुआ है तुझे?”

 

“यह मेरे इलेक्ट्रो-बीटल्स का कमाल है प्रोफेसर!”  जेम्स आगे बढ़ता हुआ बोला। उसके चेहरे पर विजयी मुस्कान अब भी फैली हुई थी।

 

 

प्रोफेसर ने गौर से देखा तो पाया , एरांको के शरीर में जगह-जगह छोटे चमकते हुए बीटल रोबोट्स  चिपके हुए थे जो उसे करन्ट का तेज़ झटका दे रहे थे। एरांको बौखला गया था।

 

“कैसा लगा मेरे भाई का अविष्कार प्रोफेसर!”  बॉन्ड, जेम्स के कन्धे पर हाथ रख कर बोला।

 

“बस बहुत हुआ! अब दोनों अभी के अभी मरोगे।” प्रोफेसर चीखे और इसी चीख पर प्रोफेसर के पीछे खड़े सभी गुंडे उन दोनों की तरफ दौड़ पड़े।

 

उनके हाथों में लम्बे-लम्बे चाक़ू चमक रहे थे। जेम्स-बॉन्ड ने मुट्ठियाँ बाँध ली। एक गुंडे के वार को बचाता हुआ बॉन्ड हल्का सा पीछे हुआ और तत्काल ही उसके कन्धे पर हाथ रखकर जेम्स उछला तथा उस गुंडे के थोबड़े पर एक ज़ोरदार किक जड़ता हुआ बॉन्ड के पीछे उतर गया । जेम्स ने ऐन वक़्त पर वह वार बचाया जो उसकी खोपड़ी चीरने वाला था। वार बचाते ही गुंडे का हथियार वाला हाथ पकड़ कर उसे बॉन्ड की ओर बढ़ते दूसरे गुंडे पर उछाल दिया जेम्स ने । दोनों गुंडे एक साथ ढेर हो गए। एक गुंडा बॉन्ड के पीछे दौड़ता हुआ आया , बॉन्ड फौरन जेम्स की ओर भागा। जेम्स पीछे पलटा और अपने दोनों हाथों को जोड़कर ,फैला कर खड़ा हो गया। बॉन्ड , जेम्स के करीब पहुँचते ही कूद कर उसके हाथों पर चढ़ा और जेम्स ने बॉन्ड को हवा में उछाल दिया साथ ही उस गुंडे के पेट में जबरदस्त किक जड़ी जेम्स ने जो बॉन्ड का पीछा करता हुआ आ रहा था। गुंडा उड़कर एक मशीन से जा टकराया उसका भेजा खुल गया। बॉन्ड ने हवा में ही बैक-फ्लिप ली और नीचे जेम्स की ओर बढ़ते दो गुंडों पर गिरा, वह दोनों भी ढेर हो गए।

 

जेम्स-बॉन्ड एक के बाद एक गुंडों को ढेर करते जा रहे थे उनके वारों को बचाते हुए।

 

दूसरी ओर एरांको अब भी चिंघाड़ रहा था। और तीसरी ओर सेना करीब आती जा रही थी । उनका शोर साफ़ सुनाई दे रहा था। प्रोफेसर जावेद की तो कुछ समझ नही आ रहा था। तभी एरांको तेज़ी से चिंघाड़ता हुआ एक दीवार से जा टकराया। प्रोफेसर ने देखा दीवार से टकराते ही एरांको के शरीर से कुछ बीटल्स गिरकर धुँवा छोड़ने लगे। प्रोफेसर के मुंह से  वाह निकल गई।  तत्काल ही प्रोफेसर ने एरांको को ऑर्डर दिया “अपने शरीर को बार-बार दीवार से लड़ा एरांको।”  प्रोफेसर के आदेश का तत्काल पालन करते हुए एरांको खुद को दीवार से लड़ाने लगा। फैक्टरी की दीवार काफी मोटी और मज़बूत थी फिर भी तीसरी टक्कर में ही पूरी दीवार ढह गई। परन्तु काम हो चुका था।

 

जेम्स-बॉन्ड ने लगभग सभी गुंडों को बेहोश कर दिया था। कुछ के हाथ-पैर टूट गए थे और कुछ टपक भी गए थे। लेकिन अब भी चार गुंडे बचे हुए थे। वे चारों हल्ला मचाते हथियार लहराते हुए जेम्स-बॉन्ड की ओर लपके । जेम्स ने आँखों से बॉन्ड को इशारा किया बॉन्ड समझ गया , वह फौरन आधा झुक गया। जैसे ही चारों गुंडों उन दोनों के पास पहुंचे, झुके हुए बॉन्ड की पीठ पर हाथ जमा कर जेम्स ने अपने दोनों पैर हवा में उछाले । जेम्स के पैर बहुत ही तेज़ गति से चारों गुंडों के मुंह से टकराए उनके जबड़े हिल गए , अगले ही पल वे लहराकर गिरे और ज़मीन सूंघने लगे।

 

विजयी अंदाज़ में दोनों वापस मुड़े प्रोफेसर और एरांको की खोज खबर लेने के लिए। और उनके सरों पर हुआ वह अप्रत्याशित वार। दोनों चकरा गए । धुंधलाती आँखों से उन्होंने देखा सामने रॉड लिए खड़े ठहाका लगाते हुए प्रोफेसर को, और प्रोफेसर के पीछे खड़े एरांको को । जेम्स-बॉन्ड के होश गुम हो रहे थे। गिरते वक़्त जेम्स ने बॉन्ड को एक तमाचा जड़ा और फिर गिर पड़ा साथ ही बॉन्ड भी गिरा।

 

जेम्स-बॉन्ड के होश पूरी तरह गुम हो गए।

 

 

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सूरज की किरणे उनकी आँखों पर लगातार हमला कर रही थीं। अचानक चौंक कर जेम्स-बॉन्ड ने आँखें खोलीं। वे एक बड़े से कमरे के बीचों बीच खंभे से बंधे हुए थे। सामने छोटे से रौशनदान से सूरज की किरणे अंदर आ रही थीं। उन्होंने चारों तरफ नज़रें दौड़ाईं। आसपास का जायज़ा लिया परन्तु वहाँ कुछ नही था सिवाए उस खंभे के जिससे वे दोनों बंधे हुए थे। नही …. एक छोटी सी टीवी स्क्रीन लगी हुई थी सामने दीवार से। जेम्स-बॉन्ड उस स्क्रीन की ओर देख ही रहे थे की उसपर चित्र उभरने शुरू हुए। प्रोफेसर जावेद खान का चेहरा सामने आया। “कैसे हो बच्चों? हा हा हा। तुम दोनों के लिए ख़ास इंतज़ाम करवाया है मैंने । अब तुम बड़े आराम से मोहन नगर की तबाही को देख सकोगे वह भी लाइव। मोहन नगर की तबाही के बाद पूरी दुनिया की बारी आएगी अगर उन्होंने मेरे आगे घुटने नही टेके तो..”  जेम्स-बॉन्ड चुपचाप सुने जा रहे थे। इसके अलावा वे कुछ कर भी तो नही सकते थे । “..तुम लोग घबराओ मत। मोहन नगर की तबाही देखने के बाद तुम्हारा मन करेगा चुल्लू भर पानी में डूब मरने का। इसलिए मैंने तुम दोनों की मौत का सामान भी तैयार कर रखा है। इस वक़्त तुम दोनों जहाँ क़ैद हो उस घर के छत में बम लगे हुए हैं..”  जेम्स-बॉन्ड ने फौरन ऊपर देखा । “अंहां। वह तुम्हे नज़र नही आएँगे … छुपाकर जो लगाए हैं मैंने। हा हा हा। चलो यह सब बातें छोड़ो अब तुम लोगों को कल रात का किस्सा सुनाता हूँ। कल तुम दोनों को जैसे ही बेहोश किया मैंने , पुलिस फैक्टरी के बहुत करीब आ गई। मैं तुरन्त एरांको के कन्धे पर सवार हुआ , मुझे और तुम दोनों को लेकर एरांको फैक्टरी की पिछली दीवार तोड़ता हुआ भाग निकला। अब तुम दोनों कहीं और हो और मैं कहीं और। अच्छा चलता हूँ , बाय बाय। जल्द ही लाइव तबाही देखोगे तुम लोग।”  स्क्रीन फिर से सादी हो गई।

 

जेम्स-बॉन्ड काफी देर तक यूँ ही चुप्पी साध कर बैठे रहे। उन्हें समझ नही आ रहा था क्या करें। उनका अपना शहर जिसे बचाने के लिए उन्होंने क्या क्या पापड़ नही बेले थे , खुद बॉन्ड जंगल में एक लड़की से बुरी तरह पिटा था,बॉन्ड के दिमाग में वह घटना ताज़ा हो गई। “भाई । अब क्या करें। कुछ समझ नही आ रहा। मन कर रहा है खुदकुशी करने करना।”  बॉन्ड खंभे से अपना सर लड़ाने लगा।

जेम्स चीखा “पागल मत बन बॉन्ड!”

 

“तो क्या करूँ…. क्या करूँ ? हँसू , गाउँ। उधर हमारा शहर तबाह होने वाला है और इधर हम यहां बंधे-बंधे सड़ रहे हैं।”  बॉन्ड बेचैन अंदाज़ में बोला।

 

“हमारे शहर को कुछ नही होगा। फिलहाल सात दिन तक तो कोई खतरा नही है।”  जेम्स बोला।

 

बॉन्ड ने पूछा “क्या मतलब?”

 

“मतलब उसने हम लोगों को कोरी धमकी दी है। तू ही सोच अगर उसे अभी तबाही फैलानी होती तो कल रात पुलिस से बचकर वह भागता क्यों। अभी एरांको की ताकत पूरी तरह वापस आने में सात दिन लगेंगे। प्रोफेसर जावेद ने हमे यह धमकी सिर्फ इसलिए दी है ताकि हम अपना आपा खो दें और यहीं पड़े-पड़े मर जाएं। जबकि हमे दिमाग से काम लेना है। हमे मौत देने का भयंकर रास्ता चुना है उसने।”   जेम्स का जवाब सचमुच सही था। बॉन्ड ने राहत की सांस लेते हुए कहा। “तो क्या इसका मतलब छत में बम भी नही फिट है?”

 

“पता नही। नही भी हो सकता है, हो भी सकता है। वह बस हमारा दिमागी सन्तुलन बिगाड़ने के लिए ऐसा कर रहा है।”  जेम्स ने कहा।

 

“परन्तु दिमाग लगा कर हम कर भी क्या सकते हैं? कोई रास्ता तो नज़र नही आ रहा यहाँ से बचकर निकलने का। एक तो ये रस्सियाँ इतनी मज़बूत हैं की टूट ही नही रहीं। काश यह अपने आप ही गल-सड़ कर कमज़ोर हो जाएं।”  रस्सी तोड़ने की भरपूर कोशिश करते हुए बॉन्ड ने कहा।

 

“गल!”  अचानक जेम्स को कुछ याद आया “बॉन्ड ज़रा अपना बायाँ कान इधर ला।”  जेम्स बोला।

 

“बायाँ कान ही तेरी तरफ है। पर तुझे इतनी भूख लगी है की मेरा कान ही खा जाएगा ?” जेम्स, बॉन्ड के कान के करीब आया। “आऊ! काट मत लेना।”

 

 

“अबे तेरा भाई हूँ। चुपचाप रह। हिल मत।”  तत्काल ही जेम्स ने अपना मुंह बॉन्ड के कान के पास से हटाया । बॉन्ड ने देखा जेम्स के मुंह में एक छोटा सा कैप्सूल दबा हुआ है। जेम्स, बॉन्ड के बंधे हुए हाथ के पास झुका और उसने कैप्सूल को अपने दांत से हल्का सा दबा दिया । उस कैप्सूल के एक छेद से एसिड की धारा निकली और रस्सियों पर गिरी। अगले ही पल रस्सी जलकर इतनी कमज़ोर हो गई कि बॉन्ड ने एक ही झटके में तोड़ दी।

 

“युहूssss l मैं आज़ाद हो गयाsss। अब मुझे समझ आ गया तुमने मुझे कल रात में झापड़ क्यों मारा था। असल में तुम मेरे कान के पीछे यह कैप्सूल छुपा रहे थे!”  बॉन्ड लगभग चिल्लाता हुआ बोला।

 

“चिल्ला मत। मुझे आज़ाद कर जल्दी।” जेम्स ने कहा।

 

जेम्स के बन्धन खोलता हुआ फिर बोला बॉन्ड। “लेकिन तुम वह कैप्सूल अपने कान के पीछे भी छुपा सकते थे।”

 

“हाँ फिर मैं अपने ही कान तक अपना मुंह कैसे लाता।” जेम्स खड़ा हो गया । उसके भी बन्धन खुल चुके थे।

 

अब दोनों राहत की सांस ले रहे थे।

 

“अब आगे क्या करना है? हमे तो यह भी पता नही प्रोफेसर इस वक़्त कौनसे बिल में जा कर बैठा है।”  बॉन्ड सोचते हुए अंदाज़ में बोला।

 

“पता है न!”  जेम्स ने अपने कपड़ों से धूल उड़ाई।

 

“क्या ? तुझे पता है वह कहाँ हैं?”  बॉन्ड बड़ी तेज़ी से जेम्स के सामने आया। “पर कैसे?” उसने हाथ लहराकर पूछा।

 

“जेम्स जब कोई योजना बनाता है तो..”

 

“…उसके साथ एक मुफ़्त की योजना भी बना लेता है ।”  बॉन्ड जल्दी से बोला। “पता है मुझे तेरा यह पुराना डायलॉग। वैसे वह योजना क्या है?”

 

“सुन।”  जेम्स बोला “जब मैंने इलेक्ट्रो बीटल्स से एरांको को बेबस करने का प्लान बनाया था तभी मैंने उन बीटल्स में एक जीपीएस बीटल भी शामिल कर दिया था। मैंने इलेक्ट्रो बीटल्स के साथ उसे भी एरांको के शरीर पर फेंका था।”

 

“पर तुझे यह कैसे पता था की वह ज़रूर भाग जाएंगे।”  बॉन्ड ने हैरत भरे स्वर में पूछा।

 

“तू अभी बच्चा है। बेटा कुछ काम बिना पता रहे भी कर लेना चाहिए। और वैसे भी वह मेरा फ्री प्लान था इसलिए उसी वक़्त आज़मा लिया। ऐसे ही थोड़े एक योजना के साथ एक मुफ़्त योजना बना लेता हूँ।”  जेम्स ने कहा और जाकर दरवाज़े के पास खड़ा हो गया।

 

“समझ गया मैं।” बॉन्ड बोला। “लेकिन एक सवाल और । एरांको के शरीर से तेरे इलेक्ट्रो बीटल्स गिर कर खराब हो गए थे तो क्या ऐसा नही हुआ होगा की वह बीटल भी गिर गया हो?”

 

“वह बीटल रोबोट मैंने एक ख़ास धातु से बनाया था। और उसे पता था की उसे क्या करना है–एरांको के कान में उसी वक़्त घुस गया था वह।”  जेम्स बोला। “चल अब इस दरवाज़े को तोड़ने में मदद कर मेरी।” जेम्स हाथ से दरवाज़ा छूते हुए बोला।

 

दोनों ने मिलकर दरवाज़े को कई बार धक्का दिया, अंत में दरवाज़ा टूट ही गया। वे दोनों फौरन बाहर निकले। सब से पहले तो उनकी आँखों पर चिलचिलाती हुई सूरज की रौशन पड़ी । फिर उन्होंने देखा तो पाया की वह किसी सुनसान इलाके में हैं। वह एक बहुत बड़ा सा मैदान था, थोड़ी-थोड़ी दूर पर बड़े-बड़े पेड़ खड़े थे। उस मैदान में वही एकलौता घर था जिसमे दोनों को कैद किया था प्रोफेसर ने।

जेम्स ने फौरन अपना बायाँ हाथ ऊपर किया जिसमे उसने घड़ी पहन रखी थी । उसकी छोटी सी स्क्रीन के बगल में लगे एक बटन को दबाते ही होलोग्राफिक इमेज उभर आई । फिर जेम्स न जाने क्या-क्या सर्च करता रहा । बॉन्ड उसे चुपचाप देख रहा था। थोड़ी देर बाद जेम्स बोला “मिल गया! मैंने एरांको के शरीर में घुसे जीपीएस… बीटल से उसे ट्रैक कर लिया!”

 

“कहाँ हैं वह?”  बॉन्ड ने पूछा।

 

“लोकेशन बता रही है वह मोहन नगर बन्दरगाह के पास हैं।”  जेम्स बोला। “अब इतनी जल्दी हम वहां पहुंचेंगे कैसे? टाइगर कहाँ है?”  उसने बॉन्ड की ओर देखकर पूछा।

 

“आ…. वह तो शायद एरिया 21 में कहीं पड़ा होगा। एरांको सिर्फ मुझे उठा कर लाया था। बाइक को छुआ भी नही था।”  बॉन्ड ने कहा।

 

“उसे बुलाना होगा।”  जेम्स ने कहा। “हम शहर से बहुत दूर हैं। कोई सवारी यहाँ नही मिलने वाली।”  जेम्स अपनी घड़ी को अपने मुंह के पास लाया। “हैल्लो… हैल्लो टाइगर ! क्या तू मुझे सुन रहा है हैल्लो..”  जेम्स ने कई बार आवाज़ लगाई मगर उधर से कोई जवाब न आया।

 

“उसका सिस्टम डाउन तो नही हो गया?”  बॉन्ड ने कहा।

 

“चुप कर बे! शुभ-शुभ बोला कर।”  बॉन्ड के सर पर ठोकते हुए कहा जेम्स ने। “एक बार फिर से ट्राइ करता हूँ। हैल्लो टाइगर! कहाँ है बे तू! जवाब दे।” जेम्स इस बार बड़ी ज़ोर से चिल्लाया था । कुछ देर तक शान्ति छाई रही। जेम्स-बॉन्ड एक दूसरे का मुंह ताकते रहे , अचानक एक ज़ोरदार घर्रर्र की आवाज़ गूँजी । जेम्स ने फौरन घड़ी वाला हाथ ऊपर उठाया। टाइगर का जवाब आ रहा था, मानो वह घर्रर्र-घर्रर्र कर के यह बताना चाह रहा था की ‘हाँ मैं तुम्हे सुन रहा हूँ।’

 

जेम्स-बॉन्ड की ख़ुशी का ठिकाना न रहा।

 

“युहूsss!” जेम्स हवा में कूदा। “सुन टाइगर ! मैं तुझे लोकेशन भेज रहा हूँ। तू फौरन यहाँ पहुँच।”  उधर से फिर घर्रर्र की आवाज़ आई।

 

कुछ देर बाद। जेम्स-बॉन्ड इधर-उधर टहल रहे थे। धूप ज़्यादा बढ़ गई थी क्योंकि गर्मी का मौसम चल रहा था। बॉन्ड ने अपना पसीना पोंछा “शह्! कौनसी स्पीड से आ रहा है यह टाइगर का बच्चा!”

 

“सब्र रख यार। आता ही होगा।”  जेम्स वहीँ घास पर पसर गया।

 

तभी दोनों के कानो में घर्र की आवाज़ पड़ी। वे फौरन सामने की ओर देखने लगे। टाइगर फुल स्पीड से आ रहा था। ज्यों-ज्यों वह जेम्स-बॉन्ड के करीब पहुँच रहा था घर्र-घर्र की आवाज़ें तेज़ करता जा रहा था, मानो ख़ुशी का इज़हार कर रहा हो। जेम्स की आँखें उसे देखकर हरी हो गईं। “शुक्र है तू सही सलामत है मेरे दूसरे भाई।”  उसने खुश होते हुए कहा।

“तू कुछ ज़्यादा ही इमोशनल हो गया है।”  बॉन्ड उसे तिरछी नज़रों से देखकर बोला।

 

ज्यों ही बाइक ( टाइगर ) जेम्स-बॉन्ड के करीब पहुँची। उसने एक झटके से ब्रेक लगाए और घूम कर फिर से उस दिशा की ओर खड़ी हो गई जिधर से आई थी ।

 

जेम्स-बॉन्ड कूद कर उस पर सवार हो गए। जेम्स ने एक्सेलेटर पूरा घूमा दिया और जिस रफ़्तार से टाइगर आया था उससे दुगनी रफ़्तार से वापस भागा।

 

जेम्स-बॉन्ड मोहन नगर बंदरगाह के करीब पहुँच रहे थे। जेम्स ने सोचा एक बार और प्रोफेसर और एरांको की लोकेशन देख लेता है। परन्तु उसने जैसे ही अपनी वॉच पर नज़र डाली वह बुरी तरह चौंक गया। “हे भगवान!”

“क्या हुआ?”  बॉन्ड ने भी चौंक कर पूछा।

 

“वे दोनों अब बन्दरगाह पर नही हैं।”  जेम्स ने कहा।

“फिर कहाँ हैं?”  बॉन्ड चौंक गया।

 

“बीच समुद्र में, किसी बड़े जहाज़ पर।” जेम्स की आवाज़ में परेशानी झलक रही थी।   बॉन्ड की भी आवाज़ जाम होती सी लगी। “अ..ब हम क्या करेंगे?”

 

“वही तो नही समझ आ रहा। क्योंकि एक भी बोट नज़र नही आ रही जिसपर बैठ कर हम उस जहाज़ तक पहुँच सकेंगे।”  जेम्स-बॉन्ड बन्दरगाह पर पहुँच चुके थे । इस वक़्त सन्नाटा था। न कोई बड़ा समुद्री जहाज़ दिख रहा था और न ही कोई बोट। बॉन्ड ने देखा विशालकाय समुद्र में दूर एक जहाज़ चींटी के इतना बड़ा दिख रहा था।

 

जेम्स का चेहरा लटक गया बॉन्ड भी परेशान नज़र आने लगा। “च्… हमे देर हो गई। अब उस मुसीबत को खत्म करने के लिए हम उस तक पहुँचे भी तो कैसे।”

 

“बहुत ही चालाक निकला यह प्रोफेसर!” जेम्स बोला। “वह जानता था की अगर वह मोहन नगर में रहा तो पुलिस उसे ज़रूर ढूंढ निकालेगी । अब वह सात दिन बाद लौटेगा जब एरांको अजेय हो चुका होगा।”

 

“उस जहाज़ को ही हम रॉकेट से उड़ा देते हैं।”  बॉन्ड ने सुझाव दिया ।

 

“पहली बात तो यह है, हमारे पास रॉकेट नही है। और अगर होती भी तो मैं यह गलती नही करता । क्या पता उस जहाज़ में और लोग भी सवार हों जो निर्दोष हों।”  जेम्स ने कहा।

 

“यह बात तो सही कही तूने। फिर क्या करें?”

 

“हमे किसी तरह उस जहाज़ के अंदर पहुँचना होगा।”  जेम्स बाइक से उतर कर चहल कदमी करने लगा । वह साथ ही सोचता भी जा रहा था की अब क्या करे।

 

“अरे वाह!”  अचानक जेम्स ने चुटकी बजाई।

 

“क्या हुआ?”  बॉन्ड जिज्ञासा लिए उसके पास पहुँचा ।

 

“हमारी मदद एक बार फिर टाइगर करेगा। देख कहीं कोई छोटी नौका नज़र आ रही है?”  जेम्स बोला।

 

बॉन्ड ने मन ही मन सोचा। “लगता है यह पागल हो गया। नौका में बैठकर हम चप्पू चलाते हुए ख़ाक उस जहाज़ तक नही पहुँच पाएंगे। और यह टाइगर कौनसी मदद करेगा?”

 

 

“तू क्या सोच रहा है?” जेम्स ने त्योरियां चढ़ाई।

 

“आ.. कुछ नही। मैं देखता हूँ । कहीं कोई नौका दिख जाए।”  बॉन्ड निकल गया नौका की खोज मे तथा जेम्स टाइगर की पिछली सीट के नीचे से रिंच और प्लास वगैरह निकालने लगा। दूसरी तरफ वह जहाज़ जिसमे प्रोफेसर और एरांको सवार थे पल प्रति पल दूर होता जा रहा था ।

 

जल्द ही बॉन्ड कूदता फांदता हुआ वापस आया। “जेम्स! जेम्स! एक नौका मिल गई। वह ज़्यादा बड़ी तो नही है पर दो लोग आराम से बैठ सकते हैं।”  बॉन्ड ने जेम्स को बाइक के साथ खटर-पटर करते हुए देख कर  कहा। बॉन्ड ने देखा बाइक का हुलिया पूरी तरह बदल चुका था। उसके दोनों साइलेन्सर्स और नीचे आ गए थे। पिछला पहिया भी बहुत नीचे आ गया था।

 

जेम्स ने काम पूरा करते ही हाथ झाड़े ।

 

“यह तू क्या कर रहा था?”  बॉन्ड ने पूछा।

 

“जल्द ही पता चल जाएगा।”

 

जेम्स-बॉन्ड उस छोटी नौका तक पहुँचे जो एक किनारे पर रस्सी से बन्धी हुई थी। दोनों ने मिलकर रस्सी खोली। जेम्स ने टाइगर को नौका पर चढ़ा दिया।

 

“अबे यह क्या! पूरी जगह तो इसने ले ली। हम कहाँ बैठेंगे।”  बॉन्ड चिल्लाया।

 

जेम्स कुछ नही बोला। वह न जाने क्या-क्या करता रहा नौका और बाइक के साथ।

 

 

करीब पन्द्रह मिनट बाद। टाइगर पूरी तरह से नौका में फिक्स हो चुका था। अब नौका किसी बोट की तरह नज़र आ रही थी। जेम्स कूद कर टाइगर पर जा बैठा । उसने एक्सेलेटर सम्भाल लिया। बॉन्ड भी सब कुछ समझ गया था । वह भी पीछे जा बैठा। टाइगर ने घर्र-घर्र की कई आवाज़ें निकाली और चल पड़ी उनकी अनोखी बोट । जेम्स ने अपने दिमाग के बल पर वह कर दिखाया था जो शायद कोई सोच भी न सके । जिस तरह हर एक मुश्किल का हल निकालता आया था जेम्स उसी तरह इस मुश्किल का भी हल निकाल लिया था उसने। बॉन्ड मन ही मन अपने भाई को दाद दिए बगैर न रह सका।

उनकी अद्भुत नौका बड़ी तेज़ी से बढ़ती चली जा रही थी, और उसकी रफ़्तार को और तेज़ कर रहा था टाइगर के साइलेन्सर्स से निकलता नाइट्रो।

 

जेम्स-बॉन्ड बड़ी ही तेज़ी से आगे बढ़ते जा रहे थे। अब वह विशालकाय जहाज़ उन्हें और बड़ा दिखने लगा था । समुद्र में कोई हलचल नही, हल्की हल्की लहरें उठ रही थी सिर्फ। सूरज की तेज़ चमकती किरणे समुद्र की सतह पर पड़ रही थीं। दृश्य बड़ा सुहाना था पर जेम्स-बॉन्ड के पास इन सब का वक़्त नही था। वे तो बस जल्द से जल्द उस जहाज़ तक पहुँच जाना चाहते थे।

 

आधे घण्टा तक चलते रहने के बाद उनकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा जब वे जहाज़ के एकदम करीब पहुँच गए। जेम्स-बॉन्ड ने एक दूसरे का हाथ पकड़ कर समुद्र में छलांग लगा दी। जल्द ही सतह के ऊपर उनके सर नज़र आए। बॉन्ड ने पूछा। “अब टाइगर को कैसे ले जाएंगे हम?”

 

“उसे मैंने वापस जाने का कमांड दे दिया है। वह आराम से चलता हुआ वापस बन्दरगाह पहुँच जाएगा।” जेम्स ने कहा। बॉन्ड ने देखा टाइगर वापस चल दिया था।

 

अब दोनों भाई जल्दी-जल्दी हाथ पैर मारते हुए उस जहाज़ तक पहुँचे और जल्द वह उसपर चढ़ते नज़र आए। “बिल्कुल सावधान रहना।”  जेम्स ने बॉन्ड से कहा। वे सावधानी से चढ़ने लगे।

 

जल्द ही वे डेक पर खड़े थे । जहाज़ बहुत ही ज़्यादा विशालकाय था । उस जहाज़ में काफी बड़े और विशालकाय हॉल बने हुए थे। ज़रूर प्रोफेसर ने उसे ख़ास तौर से बनवाया था ताकि वह एरांको को आराम से कहीं भी ले जा सके। फिलहाल इस वक़्त जहाज़ पर सन्नाटा छाया हुआ था। ऐसा लग रहा था वह जहाज़ अपने मर्ज़ी से चल रहा है। बॉन्ड ने केबिन की ओर नज़र दौडाई, उसका दरवाज़ा बन्द। कप्तान निश्चिन्त हो कर जहाज़ को भगा रहा था।

 

“हमे सब से पहले कप्तान को अपने काबू में करना होगा।”  जेम्स केबिन की ओर बढ़ने लगा। बॉन्ड उसके पीछे चलता हुआ चारों ओर नज़रें दौड़ाता रहा । केबिन के पास पहुँच कर उन्होंने कुछ पल शान्ति से एक दूसरे को देखा। बॉन्ड ने धीरे से दरवाज़े पर दस्तक दी और फिर वह तथा जेम्स एक ओर छुप गए। वे इंतज़ार करते रहे परन्तु दरवाज़ा नही खुला। बॉन्ड ने एक बार फिर ठक-ठक किया। कोई हलचल नही सुनाई दी। कई बार भड़ भड़ाने पर भी जब दरवाज़ा नही खुला तब दोनों ने मिलकर उसे तोड़ देने का निश्चय किया।

सन्नाटा अब भी उसी तरह फैला हुआ था। कोई नज़र नही आ रहा था। जेम्स-बॉन्ड एक साथ कुछ कदम पीछे हुए फिर दौड़ते हुए आकर उन्होंने छलांग लगाई ताकि दरवाज़ा एक ही वार में टूट जाए। पर यह क्या ! इससे पहले की वह उस दरवाज़े से टकराते दरवाज़ा अपने आप ही खुल गया और जेम्स-बॉन्ड केबिन की दीवार से जाकर बड़ी तेज़ी से टकराए। जल्द ही उन्होंने खुद को सम्भाला। वे जैसे ही पीछे मुड़े, उनके सामने चेहरे पर वहशियाना पन लिए प्रोफेसर खड़े थे। उनके जबड़े भिंचे हुए थे। चेहरे से क्रूरता झलक रही थी।  “तुम दोनों छोकरे किस मिट्टी से बने हो। इंसान हो या शैतान!”

 

“हम इंसान ही हैं। असली।”  जेम्स-बॉन्ड ने एक साथ कहा।

 

“पर यहाँ आ कर तुम दोनों ने बहुत बड़ी गलती कर दी। अब तुम दोनों की कब्र मैं इसी समुद्र में बनाऊंगा।”  प्रोफेसर उन दोनों पर झपटे और उन्हें पकड़ कर केबिन से बाहर उछाल दिया और खुद भी उछल कर बाहर आ गए।

 

बाहर आते वे चिल्लाए “एरांको।!”

 

गर्रर्रर्रर्रर्रर्र!  पूरा जहाज़ इस आवाज़ से थर्रा गया। एरांको एक ओर से छत फाड़ता हुआ निकला । वह कूदता हुआ जेम्स-बॉन्ड की तरफ लपका। जेम्स-बॉन्ड अपनी कई गुना बढ़ चुकी धड़कन को सम्भाले विपरीत दिशाओं में कूदे ठीक उसी पल उस स्थान पर अपना पैर पटका एरांको ने जहाँ कुछ पल पहले जेम्स-बॉन्ड मौजूद थे। पूरा डेक काँप उठा। एक बात तो पक्की हो चुकी थी । प्रोफेसर और एरांको के आलावा कोई नही था उस जहाज़ पर। एरांको जेम्स की ओर ध्यान न देता हुआ बॉन्ड की ओर लपका। जेम्स ने पास पड़ा एक छोटा सा बक्सा उठा कर एरांको पर फेंका। वह बक्सा एरांको की खोपड़ी से टकरा कर टूट गया। बॉन्ड की ओर बढ़ते एरांको का ध्यान जेम्स ने अपनी ओर कर लिया था। अब एरांको जेम्स की ओर लपका उसने अपने भारी भरकम हाथ से उस पर आक्रमण किया जेम्स झुककर कला बाजियां खाता हुआ वार बचा गया था । एरांको का हाथ जहाज़ के पैरापेट से टकराया और उतनी दूर का पैरापेट टूट कर समुद्र में जा गिरा। बॉन्ड के हाथों में चमका एक लम्बा तार अगले ही पल अपने परकॉर का प्रदर्शन करता हुआ बॉन्ड पहले जहाज़ के पैरापेट पर कूदा फिर एक छलांग लगा कर एरांको के कन्धों पर सवार हो गया। उसने बड़ी ही फुर्ती से तार एरांको के गले में डाला और उस तार के दोनों छोर पकड़ कर एरांको की पीठ पर लटक गया। एरांको चिंघाड़ उठा।

वह गुस्से में फुंफकारता हुआ इधर-उधर लड़खड़ाने लगा। प्रोफेसर बॉन्ड की ओर लपके उसके हाथ में थमा तार छुड़ाने के लिए परन्तु उनके ऊपर आकर पड़ी जेम्स की किक प्रोफेसर दूर छटक गए। जेम्स उनकी ओर बढ़ने लगा परन्तु अचानक वह पीछे पलटा। एरांको ने बॉन्ड को अपने हाथ में जकड़ कर नीचे पटक दिया बॉन्ड के मुंह से ज़ोरदार कराह निकली। जेम्स का कलेजा दहल गया । वह फौरन उसकी तरफ लपका। इससे पहले की एरांको बेबस बॉन्ड को अपने पैरों तले दबा देता जेम्स ने कूद कर अपने दोनों पैरों से एरांको पर वार किया। इस वार से एरांको को कोई ख़ास चोट तो नही पहुँची परन्तु उसका ध्यान ज़रूर फिर से जेम्स की ओर हो गया। उसने आगे बढ़ कर जेम्स को पकड़ना चाहा पर जेम्स फुर्ती से बैक-फ्लिप मार कर पीछे हो गया था।

 

अद्भुत लड़ाई चल रही थी उस जहाज़ पर। एक विशालकाय राक्षस जिससे दो आम लड़के भिड़े हुए थे। ये जानते हुए भी की वह उस राक्षस के सामने कुछ नही हैं। अगर वह उसके हाथ में आ गए तो वह उन्हें दो फाड़ कर डालेगा। हवाएं भी जैसे इस युद्ध को देखने के लिए रुक सी गई थीं।

 

जेम्स पर वार पे वार किए जा रहा था एरांको पर जेम्स हर वार को बड़ी फुर्ती से बचा रहा था। बॉन्ड एक ओर पड़ा कराह रहा था और प्रोफेसर दूसरी ओर पड़े कराह रहे थे। पूरा जहाज़ डोल रहा था। जेम्स को मारने के लिए पागल एरांको यहाँ से वहां कूद रहा था । उसकी वजह से अब तक जहाज़ कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुका था। जेम्स का ध्यान जल्द ही इस ओर गया। “यह तो पागलों की तरह इधर-उधर कूद रहा है। जल्द ही यह जहाज़ को पूरी तरह तबाह कर डालेगा और हम सब यहीं डूब जाएंगे। क्रोध में पागल प्रोफेसर को भी यह नही दिख रहा की खतरा उन पर भी है। मुझे ही कुछ करना होगा।”

 

अगले ही पल जेम्स ने ठान लिया उसे क्या करना है। वह एरांको के सामने से दौड़ता हुआ जहाज़ के किनारे की ओर भागा , एरांको उसके पीछे लपका पर तब तक जेम्स जहाज़ से समुद्र की ओर छलांग लगा चुका था । एरांको उसके पीछे ही था उसने लपक कर अपने हाथ बढ़ाए जेम्स का पूरा शरीर एक पल को डर से सिहर उठा की क्या होगा अगर एरांको ने उसे अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया, परन्तु एरांको का हाथ उससे एक इंच की दूरी से गुज़र गया। जेम्स छपाक से समुद्र में जा गिरा, उसे पकड़ने के लिए लपके एरांको का सन्तुलन भी बिगड़ चुका था इसलिए वह भी समुद्र में जा गिरा एक ज़ोरदार छप्पाक की आवाज़ के साथ।।

 

अब जहाज़ पर सिर्फ दो लोग थे और दोनों की आँखें फटी हुई थीं । “ये तूने क्या कर दिया जेम्स!”  बॉन्ड की आँखें भर आई थीं।

 

प्रोफेसर आहिस्ता-आहिस्ता उठकर खड़े हुए । “हा हा हा। तेरे भाई ने एरांको के हाथों मरने से अच्छा समुद्र में डूब कर मरना समझा। अब या तो वह डूब कर मरेगा या एरांको के हाथों मरेगा।”

 

“गलत ! प्रोफेसर। जेम्स अपनी नही बल्कि एरांको अपनी मौत के पीछे गया है।”  बॉन्ड के आँसू अब सूख चुके थे। वह कैसे भूल गया था कि उसके भाई ने कभी हार मानना नही सीखा।

 

“सारा सस्पेंस अब क्लियर हो चुका है। जेम्स ने मुझे सारी कहानी बता दी है असली विलेन आप ही हैं प्रोफेसर। और अब मैं आपको  बचकर जाने नही दूंगा।” बॉन्ड प्रोफेसर को घूरते हुए बोला।

 

“हा हा हा हा। तू मुझे रोकेगा? जो खुद उठ नही पा रहा। कितनी हड्डियां टूटी तेरी ? हा हा हा। वैसे तेरा यह आखिरी वक़्त चल रहा है तो मैं तुझे कुछ बताना चाहता हूँ। मैं …. प्रोफेसर ….. नही हूँ। प्रोफेसर तो बेचारा फ़ालतू में मारा गया।”  बॉन्ड के चारों ओर टहलते हुए बोले प्रोफेसर । बॉन्ड की आँखें फ़ैल गईं , वह सोचने लगा। “अगर यह प्रोफेसर नही है तो कौन है? शक्ल तो प्रोफेसर की ही है।”

 

 

समुद्र में जेम्स काफी नीचे तक आ गया था । एरांको उससे भी नीचे तक गया। “अब मुझे सोचना है की इसे खत्म कैसे किया जाए।”  जेम्स उस विशालकाय राक्षस की ओर बढ़ने लगा। “यह ज़रा सा भी विचलित नज़र नही आ रहा है । क्या यह पानी में साँस ले सकता है?” अगले ही पल जेम्स को पता चल गया। “अरे नही! इसने तो अपनी सांस रोकी हुई है!”  भौंचक्के जेम्स को वह वार कब पड़ा उसे पता ही नही चला। वह पानी में बहुत दूर तक छटक गया। शुक्र इस बात का रहा की पानी में रहने की वजह से वह वार उसे उतना नुक्सान न पहुंचा सका था ।

 

“उफ्। यह तो यहाँ भी बहुत ज़्यादा आक्रामक है। मुझे और ऊपर जाना होगा। इतनी गहराई में इससे मुकाबला करना खतरनाक है सांस खत्म होने पर मुश्किल हो जाएगी।”  जेम्स तैरता हुआ ऊपर भागा। एरांको भी उसके पीछे तैरने लगा । उस गहरे समुद्र में भी वह मुंह फाड़ कर अपने नुकीले और खतरनाक दांत दिखा रहा था।

जेम्स को आश्चर्य हुआ की एरांको तैर कैसे ले रहा है पर जब उसने ध्यान दिया तो उसे समझ आया की एरांको उसकी नकल कर रहा था। “यह तो मेरी नकल कर के तैर रहा है!”  अब जेम्स काफी ऊपर आ चुका था। अचानक उसका पैर एरांको ने पकड़ लिया। जेम्स ने पूरी ताकत लगा कर हाथ पाँव चलाए पर वह अपना पैर छुड़ा न सका। “अब तो मेरे बचने की कोई उम्मीद नही। मेरे वार इस पर कोई असर नही डालेंगे जबकि यह मुझे अभी के अभी फाड़ कर आधा कर देगा। मेरे पास कोई हथियार भी नही है।”

 

जेम्स बुरी तरह बेबस हो चुका था और बॉन्ड का भी यही हाल था।

 

“क्या प्रोफेसर बावले तो नही हो गए?” बॉन्ड यही सोच रहा था की तभी प्रोफेसर बोल उठे।

 

“तूने सही सुना है बच्चे । यही तो है इस कहानी का मेन सस्पेंस । यह सारा प्रोग्राम मेरा ही सेट किया हुआ था …. मेरा यानी ….. जमोग्रा का ।”

 

बॉन्ड की समझ में नही आ रहा था प्रोफेसर क्या बड़बड़ा रहे हैं।

 

“तू अब भी हैरान है छोरे! तेरी सारी हैरानी जल्द ही खत्म हो जाएगी । बस तू सुनता जा ।”  एक बड़ा सा बॉक्स अपनी तरफ खींच कर उसपर बैठ गए प्रोफेसर और बोलना शुरू किया। “तूने ब्लैक डेमन्स, डायनासौर और यतियों के बारे में ही सुना था न सिर्फ उस किताब में पर …. एक प्रजाति और थी उस काल में । यमोगा प्रजाति, हाँ मेरी प्रजाति का यही नाम था। हम न इंसान न जानवर न कीड़े न मकोड़े किसी भी श्रेणी में नही आते थे  । क्योंकि हम इनमे से एक हैं ही नही। …. हम तो …. सब हैं। हाँ हमारे अंदर वह शक्ति थी कि हम किसी का भी रूप ले सकते थे…”

 

“इच्छाधारी नाग हो यानी तुम!”  बॉन्ड ने कहा। इस पर प्रोफेसर बना जमोग्रा हंस दिया ।

 

“इच्छाधारी नाग! हा हा हा। वे तो कमज़ोर प्राणी हैं। उन्हें सौ साल की उम्र पार करनी होती है तब जाकर वह इच्छाधारी शक्ति प्राप्त करते हैं। वह सिर्फ किसी का भी रूप धारण कर सकते हैं। जब की हम रूप के साथ-साथ अपने शत्रु की शक्तियों को भी धारण कर लेते हैं, जिस-जिस शक्ति का उसने हम पर इस्तेमाल किया होता है । हाँ तो मैं कह रहा था की मेरी प्रजाति सब से शक्तिशाली थी । परन्तु हमारी सब से बड़ी कमज़ोरी थी आपस में एकता का न होना। मेरी प्रजाति के लोग आपस में झगड़ते रहते थे और मरते रहते थे। ब्लैक डेमन्स जानते थे की हम उनसे ताकतवर प्राणी है, परन्तु वह हमारी कमज़ोरी भी जानते थे। उन्होंने मेरी प्रजाति में फूट डालना शुरू कर दिया सब आपस में ही लड़ने लगे। यमोगा प्रजाति के लोग आपस में लड़ते रहे जब तक की वे आधे से भी आधे नही रह गए। मैंने उन्हें बहुत समझाया पर वे तो जैसे जन्मजात शत्रु थे एक दूसरे के। दूसरी तरफ मेरा मकसद कुछ और था। मैं ब्लैक डेमन्स, यतियों, इंसानो सब को परास्त कर के पूरी पृथ्वी पर कब्ज़ा करना चाहता था। पर मैं अकेला उस वक़्त ऐसा नही कर सकता था। ऊपर से मेरे लोग आपस में ही लड़कर तबाह हो चुके थे । जब वे इतने कम बचे की ब्लैक डेमन्स उन्हें आसानी से हरा सकें तब ब्लैक डेमन्स ने उन पर आक्रमण कर दिया – यहाँ एक बात और जान लो , हम किसी भी प्रकार के वातावरण में रह सकते हैं इसलिए हम भी काले जंगलों में रहा करते थे।चूँकि तब पूरी पृथ्वी पर काले जंगल मौजूद थे, उस वक़्त इंसानो और यतियों की उतपत्ति नही हुई थी। जिस तरह एरांको के गुरु निब्रो को पता था की इंसान और यतियों की उपत्ति भी होगी पृथ्वी पर ।  उसी तरह हमे भी पता था। फर्क सिर्फ इतना था की हम ब्लैक डेमन्स से पहले से यह बात जानते थे। ब्लैक डेमन्स ने मेरी प्रजाति को पूरी तरह खत्म कर दिया। बचा तो सिर्फ मैं –अकेला। मेरे अंदर क्रोध का ज्वालामुखी फूट रहा था। मैं ब्लैक डेमन्स से बदला लेना चाहता था पर फिलहाल मैं उनसे बचकर भागता फिर रहा था। मैं कोई रूप भी नही धर सकता था – इसलिए अपने सामान्य रूप में इधर-उधर भटक रहा था। निब्रो को पता था की एक यमोगा यानी मैं बचा हुआ हूँ । वे ज़ोर शोर से मेरी खोज कर रहे थे । मैं अकेला और कमज़ोर था मैं कोई रूप इसलिए नही धर सकता था क्योंकि तब वे मुझे तुरन्त पकड़ लेते क्योंकि उनके ख़ास दोस्त यानी डायनासौर्स हमारी महक सूंघ लेते थे जब भी हम कोई रूप धारण करते थे। मुझे एक तरक़ीब सूझी । चूंकि हमारा सामान्य रूप बहुत ही छोटा होता है इसलिए मैं डायनसौरों के कानो में छुपकर रहने लगा । इसी तरह मैं एक डायनासौर के कान में छुपा हुआ था की निब्रो की नज़र उस डायनासौर पर पड़ी और उसने उसे मारकर सीना फाड़ा और उसका हृदय निकाल लिया। मैं उस डायनासौर के कान में छुपा यह सब देखता रहा। फिर एरांको अपने गुरु के पास पहुँचा उन दोनों में जो बातें हुई वह तुम प्रोफेसर या कहो मेरे मुंह से सुन चुके हो। मेरे अंदर जिज्ञासा जाग उठी और फिर मैं उन्ही डायनासौरों के कान में छुपने लगा जो निब्रो और एरांको के आस पास मंडराते थे । जल्द ही मुझे एरांको के गुरु निब्रो की योजना पता चल गई। और तभी मेरी भी योजना बननी शुरू हो गई। मैंने तय कर लिया जिन राक्षसों ने मेरी पूरी प्रजाति को खत्म किया था उन्ही को मैं अपना गुलाम बनाऊंगा और फिर पूरी पृथ्वी के साथ-साथ पूरे ब्रह्माण्ड पर कब्ज़ा करूंगा। मैंने गहरी नींद में जाने का फैसला किया ताकि कलियुग में फिर से वापस आ सकूँ। मैं धरती के गर्भ में जाकर सो गया। मैं कलियुग के सन् 2000 की शुरुआत में गहरी नींद से जागा । परन्तु जब मैं धरती के गर्भ से बाहर आया पूरी धरती ही बदल चुकी थी। चारों तरफ बड़े देश और शहर बसे हुए थे । हरियाली तो जैसे गायब होने की कगार पर थी। ऐसे में काले जंगल को ढूंढना नामुमकिन था पर इतना तो मुझे पता था काला जंगल अब भी मौजूद है..”

 

जमोग्रा अपनी कहानी सुनाने में व्यस्त था और बॉन्ड सुनने में । जबकि जेम्स अपनी मौत का इंतज़ार कर रहा था। एरांको उसके पैर को पकड़ कर उसे पानी में इधर से उधर नचा रहा था । पानी का दबाव जेम्स के पूरे शरीर को मसल रहा था । इतनी तेज़ गति में एरांको उसे घुमा रहा था की जेम्स अपने शरीर की पूरी ताकत समेटकर भी कुछ नही कर पा रहा। उसका सूट कई जगह से फट भी गया था। उसे तेज़ी से अहसास हो रहा था की अब उसकी साँस खत्म हो रही है ,  अचानक जेम्स को पता चला की उसकी नाक से खून भी निकलने लगा था।

 

 

“…मैं काले जंगल की खोज में कई वर्षों तक इधर उधर भटक रहा था। इतने युगों तक सोते रहने के बाद मेरी शक्तियाँ क्षीण हो गई थीं वह भी भारी मात्रा में । मैं बस एक आम इंसान का रूप धरे हुए पूरी पृथ्वी पर घूमता रहा। कुछ ही समय में मुझे पता चला की काला जंगल भारत के एक शहर मोहन नगर के जंगलों छुपा हुआ है। मैं फौरन निकल पड़ा। जंगल की खोज मैंने जल्द ही कर ली , परन्तु जब मैंने अंदर घुसना चाहा तो वहाँ के वातावरण को झेल न सका और बाहर भाग आया क्योंकि तब मैं इंसान के रूप में था और अपनी क्षीण शक्तियों की वजह से कोई और रूप नही ले सकता था। मुझे ज़रूरत थी किसी मदद की । फिर मैं कुछ वक़्त तक के लिए मोहन नगर में रहने लगा । यहाँ मुझे पता चला एक महान वैज्ञानिक प्रो.जावेद खान के बारे में । जिसे नई-नई खोज करने का बहुत शौक था। मैं कुछ दिन ध्यान में चला गया। क्योंकि ध्यान में रहने से हमारी खोई हुई शक्तियां वापस आती जाती हैं परन्तु इसमें वर्षों का टाइम लगता है । मैंने कुछ ही दिनों के अंदर मानसिक शक्ति को थोड़ा बहुत जगा लिया और उसी के बल पर मैंने प्रोफेसर के दिमाग पर कब्ज़ा किया और उसे उस जंगल और ब्लैक डेमन्स के बारे में बताया – उसे लगता रहा की उसने यह सब चीज़ें किसी किताब में पढ़ी हैं। जल्द ही प्रोफेसर अपने सहायक अब्दुल को लेकर चल पड़ा काले जंगल की ओर और जब वह वहां से आया तो उसके पास ब्लैक क्रिस्टल भी था और एरांको का शरीर भी । मेरा कब्ज़ा प्रोफेसर के दिमाग पर तो था परन्तु मेरी मानसिक शक्ति पूरी तरह वापस न आने के कारण जल्द ही फिर से क्षीण हो जाती और प्रोफेसर पर से मेरा नियंत्रण हट जाता । तब मैंने प्रोफेसर से दो चिप्स बनवाईं जिसमे से एक प्रोफेसर ने अब्दुल के दिमाग में फिट कर दिया और एक खुद के । अब उन दोनों का रिमोट मेरे हाथ में था। मैं उन दोनों को अपनी मर्ज़ी से चलाता था । प्रोफेसर समझता रहा की उसने एक राक्षस कंकाल की खोज की जिसमे उसे माँस भरकर उसे ज़िंदा करना है। परन्तु एरांको तो अपने आप ही जीवित होने वाला था सूर्य ग्रहण से एक दिन पहले। मैंने पता किया तो सूर्य ग्रहण के लिए अभी बहुत वक़्त था। मुझे एरांको के दिमाग पर कब्ज़ा करना था जो की मैं मानसिक शक्ति से कर सकता था पर उसके लिए मुझे अपनी पूरी मानसिक शक्ति चाहिए थी जिसमे बहुत ही ज़्यादा वक़्त लगता। प्रोफेसर के पास भी उतनी आधुनिक लैब नही थी और न ही वह सामान थे जिनकी बदौलत एरांको को काबू करने वाले चिप बनाया जा सके। तब प्रोफेसर ने सरकार से मदद ली – हाँ उसका आईडिया मैंने ही दिया था। प्रोफेसर ने पूरी मीडिया के सामने यह ऐलान किया की वह एक राक्षस के कंकाल में माँस भरकर उसे जीवित करेंगे। सरकार मदद के लिए तैयार हो गई , एक आधुनिक लैब प्रोफेसर को दी गई जिसमे प्रोफेसर ने काम करना शुरू कर दिया। परन्तु एक अजीब बात हुई , प्रोफेसर का दिमाग उस चिप से लड़ने लगा जो उसके दिमाग में फिट थी। रह-रह कर प्रोफेसर के दिमाग पर से मेरा  नियंत्रण हट जाता था। आखिरकार एरांको को काबू करने के लिए प्रोफेसर ने एक खतरनाक चिप ईजाद कर ली और उसी दिन– उसके दिमाग ने पूरी तरह उस चिप पर काबू कर लिया । प्रोफेसर जैसे नींद से जाग उठा । वह सोचने लगा की वह क्या कर रहा है ? अब वह मेरे कण्ट्रोल के बाहर हो चुका था । उसे सारी बात पता चलते देर न लगी । उसने यह भी पता लगा लिया की उसके मस्तिष्क में एक चिप फिट है बस उसे यह नही पता था की यह किसने किया। उसे शक हो गया की कोई उससे गलत काम करवा रहा था। उसने फौरन एरांको के ताबूत को कहीं छुपा दिया और ब्लैक क्रिस्टल को भी। मुझे भी यह पता नही चला की ऐसा उसने कब और कैसे किया ? उसने अब्दुल को भी नही बताया था। अब मेरे पास एक ही चारा था। मैं दिन रात प्रोफेसर को धमकियां दे कर उन चीज़ों का पता पूछता पर वह फिर भी बताने को तैयार न होता। जब उसे लगने लगा की खतरा ज़्यादा बढ़ गया है तब वह अब्दुल को लेकर उस लैब में गया जहाँ उसने उन चीज़ों को छुपाया था और यहीं पर वह गलती कर गया। क्योंकि अब्दुल अब मेरे इशारे पर नाच रहा था। मैंने रात होते ही अब्दुल द्वारा एरांको के ताबूत को उठवा लिया। और प्रोफेसर को फंसाने का प्लान भी बना लिया। ज्यों ही सुबह हुई मैंने पुलिस को फोन कर के बताया–प्रोफेसर ने अपना प्रयोग आतंकियों के हवाले कर दिया है। पुलिस फौरन उसके घर धमकी और प्रोफेसर को हिरासत में ले लिया गया। परन्तु प्रोफेसर के वकील को वह फुटेज मिल गईं जिसमे अब्दुल रात को चोरी करने जाता हुआ दिखा । एक और अजीब बात हुई उस वक़्त–सिर्फ प्रोफेसर के मस्तिष्क ने ही चिप का प्रतिरोध नही किया था । अब्दुल का मस्तिष्क भी उस चिप का प्रतिरोध करने लगा था। जब प्रोफेसर कटघरे में खड़ा था उस वक़्त अब्दुल भी वहां पहुँच गया , उसने भरी अदालत में अपना गुनाह क़ुबूल कर लिया क्योंकि वह प्रोफेसर को कोई नुक्सान नही होने देना चाहता था। एक पल को मैं हैरान रह गया पर अगले ही पल मैंने पुनः अब्दुल के मस्तिष्क पर काबू कर लिया और उसे वहां से भगा दिया क्योंकि अभी मुझे उसकी ज़रूरत थी। दूसरी तरफ प्रोफेसर को बाइज़्ज़त बरी कर दिया गया जोकि एक तरह से अच्छा हुआ क्योंकि – ……ब्लैक क्रिस्टल उस ताबूत में नही था। हाँ प्रोफेसर …. बड़ा होशियार निकला। उसने ब्लैक क्रिस्टल कहीं और छुपा रखा था । अब मेरा क्रोध सीमा पार कर गया था। मैं अब्दुल का रूप का धरकर उससे क्रिस्टल के बारे में पूछ सकता था परन्तु मैं दूसरा रूप लेने के चक्कर में पहले रूप को भी खो देता और दूसरा रूप भी , क्योंकि तब मेरी शक्तियां क्षीण थीं। फिर मैं अब्दुल को लेकर प्रोफेसर के पास पहुँचा , मैंने अब्दुल के भेजे पर बन्दूक तानी और प्रोफेसर को ब्लैक क्रिस्टल मेरे हवाले करना ही पड़ा । क्रिस्टल हासिल करते ही मैंने प्रोफेसर को मौत के घाट उतार दिया । एक ही रूप वर्षों से धरे हुए मैं परेशान हो चुका था, मैंने प्रोफेसर का रूप ले लिया क्योंकि मैं उसे मार चुका था – किसी को अपने हाथों से मारने के बाद मैं उसका रूप तुरन्त ले सकता हूँ बगैर किसी परेशानी के । अब मैं सूर्य ग्रहण का इंतज़ार करने लगा। फिर इस घटना में तुम दोनों भाई भी कूद पड़े , मुझे तुम दोनों को वह किताब पढ़कर सुनानी पड़ी पर मैंने वह पेज छोड़ दिया जिसपर ब्लैक क्रिस्टल के साथ एरांको कब और कैसे जागेगा यह भी लिखा था। परन्तु तेरा भाई बहुत चालाक निकला , उसने पता लगा लिया की एरांको सूर्य ग्रहण से एक दिन पहले जागेगा और उसी दिन उसे सौ लोगों को मारना होगा ताकि वह ब्लैक क्रिस्टल धारण कर के सात दिन के अंदर ही अपनी पूरी शक्तियां प्राप्त कर ले । पर देर हो चुकी थी , एरांको जाग भी चुका था मैं उसके मस्तिष्क में चिप भी फिट कर चुका था और उसके द्वारा सौ लोग मारे भी गए थे। और कल रात मैंने उसे सफलता-पूर्वक ब्लैक क्रिस्टल भी पहना दिया । जल्द ही मैं एरांको और उसकी पूरी सेना के बल पर तबाही फैलाऊंगा । पूरी पृथ्वी पर कब्ज़ा करते-करते मेरी शक्तियां भी वापस आ ही जाएंगी ,फिर तो मैं पूरे ब्रह्माण्ड पर विजय पाउँगा हा हा हा।”

 

 

जमोग्रा की बात अब खत्म हो चुकी थी। वह फिर से खड़ा हो कर अट्टहास करने लगा था । बॉन्ड सोच रहा था अब तक जिसे कहानी का मेन विलेन समझा वह तो सिर्फ प्यादे निकले , असली विलेन तो अब सामने आया है। अचानक बॉन्ड ने एक किक अप लिया और खड़ा हो गया ।

 

“बहुत बहुत धन्यवाद आपका! श्रीमान।” बॉन्ड ने बनावटी आवाज़ में कहा।

 

“तू …. तू खड़ा कैसे हो गया । और किस धन्यवाद की बात कर रहा है?”  जमोग्रा हड़बड़ा गया।

 

“अपनी असलियत दुनिया के सामने लाने के लिए और प्रोफेसर तथा अब्दुल को निर्दोष साबित करने में मेरी मदद करने के लिए धन्यवाद। और …. हाँ। मुझे उतनी ज़्यादा चोट नही लगी थी की मैं उठकर खड़ा न हो सकूँ पर जब तुम अपनी कहानी सुनाने लगे तो मैंने भी आराम से तुम्हारी कहानी सुनने का मन बना लिया ।”  बॉन्ड आराम से चहलकदमी करता हुआ बोला।

 

“म ….मेरी असलियत…दुनिया के सामने कैसे आई?”  जमोग्रा ने पूछा।

 

“ऐसे !”  कह कर बॉन्ड ने जमोग्रा को आँख मारी।

 

“अब तू नही बचेगा लड़के! अब दुनिया तेरी मौत देखेगी वह भी लाइव”  गुर्राता हुआ बॉन्ड पर झपटा जमोग्रा । बॉन्ड हल्का सा तिरछा हुआ और अड़ंगी लगा कर जमोग्रा को गिरा दिया। जमोग्रा लड़खड़ाता हुआ उठा “इस वक़्त मैं प्रोफेसर के रूप में हूँ इसलिए तू आसानी से मुझसे लड़ ले रहा है लड़के क्योंकि प्रोफेसर को लड़ना नही आता पर ………. अब तू क्या करेगा ! ”  बॉन्ड के आँखों की पुतलियाँ फैलती चली गईं क्योंकि अब उसके सामने प्रोफेसर के रूप में नही बल्कि जैकी चैन के रूप में खड़ा था जमोग्रा।

 

“हा हा हा । हैरान मत हो। जब मेरी नींद खुला मैं पृथ्वी के गर्भ से बाहर निकल कर अपने सामान्य रूप में भटक रहा था तभी मैं उस जगह पहुँचा जहाँ किसी फ़िल्म की शूटिंग चल रही थी। मैंने इस आदमी को बहुत खतरनाक तरीके से युद्ध करता हुआ देखा तब मैंने इसी का रूप धर लिया। प्रोफेसर का रूप लेने से पहले मैं इसी रूप में था इसलिए इस रूप को दुबारा आसानी से धारण कर लिया। हा हा हा हा।”  बिजली की फुर्ती से चैकी चैन उर्फ़ जमोग्रा बॉन्ड पर झपटा और उसकी किक ने बॉन्ड को दूर उछाल दिया।

 

“आह! अब तो मैं मरा । क्योंकि इतने भयंकर फाइटर का मुकाबला मैं नही कर सकता ।”  यहाँ बॉन्ड बेबस था तो दूसरी तरफ समुद्र के अंदर एरांको की मुट्ठी में जकड़ा जेम्स।

 

 

जेम्स की नाक से निकलता खून काफी ज़्यादा मात्रा में फ़ैल गया था जिसकी गन्ध पा कर दो शार्क मछलियाँ उन दोनों की ओर बढ़ रही थीं। जेम्स के फेफड़े से तेज़ी से साँस खत्म हो रही थीं। उसकी पलकें भारी हो रही थीं, मौत सर पर तांडव कर रही थी। और अब एक नई मुसीबत शार्क मछलियों के रूप में उसकी ओर बढ़ रही थीं । शार्क पल-प्रतिपल जेम्स के करीब आती जा रही थीं । उनके मुंह पूरे के पूरे खुल गए और नुकीले दांत दिखने लगे । इससे पहले की शार्क जेम्स पर आक्रमण करती , एरांको ने एक-एक हाथ में दोनों शार्क्स को दूर पहुँचा दिया। शायद उसे लगा वह उस पर आक्रमण करने आ रही थीं। जेम्स को नई ऊर्जा सी मिली यह देखकर की शार्क मछलियों को मारने के चक्कर में एरांको ने उसे छोड़ दिया था। अपनी बची हुई सारी ताक़त लगा कर जेम्स सतह की ओर भागा। साँस लगभग खत्म हो चुकी थी। जेम्स के जीवन की पहली सब से खतरनाक लड़ाई थी यह, और उसे यह लड़ाई जीतनी थी क्योंकि वह हार गया तो पूरी दुनिया हार जाएगी। अपनी शक्ति का एक एक कतरा समेटे हुए आखिरकार पहुँच ही गया जेम्स सतह तक । उसने एक लम्बी साँस खींची । ठण्डी हवा जब उसके चेहरे से टकराई तो उसे अपने अंदर नई शक्ति का संचार होता महसूस हुआ। पानी में तेज़ हलचल इस बात का सुबूत था की एरांको उसके पीछे आ रहा था । “तुझे …… खत्म करने …. का तरीका मुझे समझ आ गया है भद्दे जानवर।”  अगले ही क्षण जेम्स तेज़ी से वापस पलटा और एरांको से दूरी बनाते हुए समुद्र की गहराई में जाने लगे। एरांको भी उसे देखकर तेज़ी से वापस पलटा जब वह हाथ-पाँव मार रहा था तो जैसे पानी में तूफ़ान से आ रहे थे। एरांको गुर्रा भी रहा था पर उसकी गुर्राहट पानी में दब जा रही थी।

 

जेम्स के अंदर जोश का नया ज्वालामुखी जाग उठा था । वह तेज़ी से समुद्र की गहराई में भागता जा रहा था। न जाने क्या तकीब सोची थी उसने । क्या वह तरकीब कारगर सिद्ध होगी?

 

 

बॉन्ड के होठ कट गए क्योंकि एक ज़बरदस्त मुक्का उसे लगा था। फिर एक के बाद एक घूँसे उसके पेट में बरसने लगे। उसके मुंह से खून का फव्वारा छूट निकला। “तू … तुम ….मेरे .. फेवरेट हीरो हो…इसलिए मैं तुम पर हाथ नही उठा रहा।”  बड़ी मुश्किल से बॉन्ड के मुंह से यह वाक्य निकले । अगले ही पल जमोग्रा ने उसे एक ज़ोरदार हुक पंच मारा और बॉन्ड कुछ फुट ऊपर उछल कर धम्म की आवाज़ के साथ नीचे गिरा।

 

“क्या मैं इतना भयंकर पहली बार पिट रहा हूँ? पिटूँगा ही न जब सामने जैकी चैन होगा तो।”  बॉन्ड सोच रहा था “अगर जेम्स होता तो क्या होता ? क्या वह भी पिटता? नही उसे तो फाइटिंग आती है। शह्! यह मैं क्या सोच रहा हूँ । मुझे इस तरह नही …. मुझे जेम्स की तरह सोचना होगा ।”  बॉन्ड पूरी ताकत समेटकर उठा और केबिन की ओर भागा।

 

“हा हा हा । कहाँ भाग रहा है? तूने भी समुद्र में डूब कर मरने का प्लान बना लिया है क्या।”  जमोग्रा चिल्लाया।

 

कुछ क्षणों के बाद ही बॉन्ड कूद कर केबिन से बाहर आया “डूबेगा तो तू। शर्म से।”  बॉन्ड के दोनों हाथों में एक-एक आग बुझाने वाले छोटे सिलेंडर थे जो अगले ही पल तीव्र गति से जमोग्रा की ओर लपके साथ ही बॉन्ड भी उसकी ओर दौड़ा । जमोग्रा ने एक-एक पँच में दोनों सिलेंडरों को इधर-उधर छटका दिया परन्तु सिलेंडरों से बचने की जगह अगर उसने बॉन्ड पर ध्यान दिया होता तो वह देख लेता उस किक को जो तीव्र गति से उसके नाभि के बीचों बीच पड़ी और मार्शल आर्ट्स का एक खतरनाक दांव यह भी है, शत्रु की नाभि पर ज़ोर का वार करो – दर्द उसे पूरे शरीर में होगा। जमोग्रा कराहता हुआ दूर जा गिरा ।

बॉन्ड सीना फुलाकर खड़ा हो गया। “इसे कहते हैं जेम्स की तरह सोचना।”

 

जमोग्रा धीरे-धीरे खड़ा हुआ। वह बॉन्ड की तरफ लपका , बॉन्ड भी उसकी तरफ दौड़ा। ज्यों ही दोनों करीब आए जमोग्रा ने वार किया पर बॉन्ड सामने था ही कहाँ । वह तो कब का एक ऊँची छलांग लगा कर जमोग्रा के पीछे खड़ा था। जमोग्रा के अगले वार से पहले ही बॉन्ड ने उसके घुटनो के पिछले हिस्से पर ज़ोरदार वार किया और जमोग्रा गिरकर घुटनो के बल बैठ गया अगले ही पल बॉन्ड ने उसकी गर्दन को अपने शिकंजे में जकड़ लिया था।

 

 

जेम्स समुद्र की गहराई में बढ़ता ही जा रहा था। अब समुद्र का तल भी नज़र आने लगा था। बड़ी छोटी चट्टाने दिख रही थीं। समुद्री पौधे पानी में लहरा रहे थे। मछलियों का झुण्ड यहाँ वहां तैर रहा था। एरांको को देखते ही सारी मछलियाँ तेज़ी से गायब हो गईं। जेम्स की आँखें चमक उठी क्योंकि उसे वह दिख गया जिसकी उसे तलाश थी। वह समुद्र के तल में निकले उन विशालकाय और नुकीली चट्टानों के पास पहुँच गया था। “हाँ यहीं तो पहुंचना था मुझे।”  जेम्स ने एक बार अपने पीछे आते एरांको को देखा और फिर तेज़ी से उन नुकीली चट्टानों के जाल में जा घुसा । वह आराम से उन चट्टानों के बीच तैरता हुआ कुछ दूर तक आ गया। एरांको ने भी ऐसा ही किया । वह भी उन चट्टानों के बीच घुसा और जेम्स को यही तो चाहिए था । कुछ दूर तक जेम्स के पीछे आया एरांको लेकिन आगे जाकर चट्टानों का जाल गहरा था जेम्स तो उन चट्टानों के बीच से आराम से निकल गया परन्तु अपने विशालकाय शरीर की वजह से एरांको उन चट्टानों में फंस गया। वह चिंघाड़ने लगा , तेज़ी से हाथ पाँव चलाने लगा जिस वजह से कई चट्टाने उसके हाथ पाँव में धँस गईं। पर जेम्स को पता था– “एरांको जल्द ही इन चट्टानों को तोड़कर आज़ाद हो जाएगा … इसलिए अब मुझे अपनी अंतिम चाल चलनी होगी ।”  जेम्स आराम से तैरता हुआ एरांको की तरफ बढ़ने लगा। उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था। घायल हो जाने की वजह से एरांको और खतरनाक हो गया था। वह कुछ भी कर सकता था । पर जेम्स को यह करना ही था। वह चुपके से एक चट्टान के पीछे जा कर छुप गया। उसने झाँक कर देखा तो उसे एरांको की गर्दन और उसमे बंधा पट्टा नज़र आ गया जिसमे ब्लैक क्रिस्टल चिपका हुआ था। जेम्स ने छुपकर ही अपने हाथ उस पट्टे की तरफ बढ़ाए। चट्टानों के बीच से निकलने का जी तोड़ प्रयास करता एरांको इस बात से अनजान था। जेम्स ने उस क्रिस्टल पर हाथ धर दिया । उसे एक झटका सा लगा और अजीब सी सिहरन उसके शरीर में दौड़ गई । उसे एक भयानक सा अहसास हुआ , ब्लैक क्रिस्टल से निकलती ब्लैक एनर्जी का स्पर्श कर लिया था उसने। उसे लगा वह नही कर पाएगा पर उसे करना ही था। उसने दोनों हाथों से उस क्रिस्टल को मज़बूती से पकड़ लिया और उसे खींच निकालने की कोशिश करने लगा।

 

 

बॉन्ड और जमोग्रा दोनों ही एक दूसरे से जूझने की भरपूर कोशिश कर रहे थे । जमोग्रा की गर्दन अब भी बॉन्ड के शिकंजे में थी। अंत में जमोग्रा ही कामयाब हुआ । उसने बॉन्ड का हाथ पकड़ कर उसे दूर उछाल दिया । बॉन्ड गिरता पड़ता हुआ एक ड्रम से जा टकराया । उसके नथुनों में केरोसिन की गन्ध जा घुसी। “इस ड्रम में तो केरोसिन भरा हुआ है।”  अगले ही पल बॉन्ड ने ड्रम का ढक्कन हटाया और अपनी मुंडी उसमे घुसा दी फिर तुरन्त ही बाहर निकाल कर वापस पलटा। उसकी तरफ बढ़ता जमोग्रा अब काफी करीब आ चुका था। अगले ही क्षण बॉन्ड की मुट्ठी में चमका लाइटर जिसे उसने अपने मुंह के पास किया एक क्लिक की आवाज़ हुई फिर तुरन्त बॉन्ड ने अपने मुंह से केरोसिन का फव्वारा छोड़ा । जमोग्रा का पूरा चेहरा झुलस गया। वह अपनी ऑंखें मलने लगा , वह बिलबिला उठा था। “इसे भी कहते हैं जेम्स की तरह सोचना।” बॉन्ड ने कहा और बगैर कोई रहम दिखाए जमोग्रा पर घूँसे बरसाने शुरू कर दिए। जमोग्रा अब बेहाल हो चुका था। बॉन्ड ने अपने जूते में छुपा रखा शुरिकेन नाइफ बाहर निकाला। यह वही नाइफ था जिससे निंजा गर्ल ने उस पर और जेम्स पर हमला किया था। बॉन्ड ने एक नाइफ उठा कर अपने पास रख लिया था।

 

“जैसा की तुमने बताया था। तुम न इंसान हो न जानवर न कीड़े न मकोड़े। तो फिर मुझे तुम्हे जान से मारने में कोई हिचक नही होनी चाहिए।”  बॉन्ड ने एक सधा निशाना लगाया और शुरिकेन नाइफ खच् की आवाज़ करता हुआ जमोग्रा के सीने को पार कर के निकल गया। जमोग्रा ने ज़ोरदार हिचकी ली और भद से नीचे गिर पड़ा।

 

 

ब्लैक क्रिस्टल को खींच निकालने की भरपूर कोशिश करते जेम्स को अचानक अहसास हुआ की एरांको की हरकत शांत पड़ गई है। बॉन्ड ने धड़कते दिल के साथ ऊपर देखा तो दहल गया। एरांको की लाल आँखें उसे घूर रही थीं उसने देख लिया था जेम्स को । अगले ही पल एरांको झपटा और एक हाथ से जेम्स को जकड़ लिया । जेम्स को उसकी हड्डियां कड़कती हुई महसूस हुईं। फिर भी उसने हार न मानी और ब्लैक क्रिस्टल को पकड़ कर खींचने की कोशिश करता रहा और एरांको उसे अपने गले से दूर खींचने लगा

। अब देखना यह था की जीत किस की होती है। दोनों ही ज़ोर लगा रहे थे एक के पास ताकत ज़्यादा थी तो दूसरे की हिम्मत खत्म होने का नाम नही ले रही थी। अब जेम्स की सांस भी कम हो रही थी , फिर भी उसकी हिम्मत कम नही हो रही थी। वह किसी चींटी की तरह चिपटा हुआ था जैसे उसने पक्का इरादा कर लिया था या तो मरने के बाद इसे छोड़ेगा या इसे उखाड़ कर ही मानेगा। और कोशिश करने वालों की मदद खुद ऊपर वाला भी करता है। आखिर कार ब्लैक क्रिस्टल उस पट्टे से अलग हो ही गया। एरांको की ज़ोरदार चीख निकली । पानी में ढेर सारे बुलबुले दिखाई दिए। कुछ देर तक वह पागलों की तरह हाथ पैर चलाता रहा फिर एक और चीख के साथ शांत पड़ गया । जेम्स को यकीन नही हो रहा था उसने यह कर दिखाया था। क्रिस्टल से निकलती एनर्जी की वजह से पानी में एक भँवर सा पैदा होने लगा था। जेम्स ने तुरन्त ही उस क्रिस्टल को छोड़ दिया । ब्लैक क्रिस्टल समुद्र के तल से जा कर टकराया और फिर अपने आप ही धरती में घुस गया। जेम्स एरांको की तरफ पलटा। वह विशालकाय राक्षस अब शायद गहरी नींद में चला गया था या मर गया था। कुछ भी हो – अब वह ज़रा भी हरकत नही कर रहा था । उसके लम्बे काले बाल पानी में लहरा रहे थे । शरीर एक दम शांत था। जेम्स को समझ नही आ रहा था की वह खुश हो या अफ़सोस करे। आज उसने पहली बार किसी की जान ली थी। भले ही वह राक्षस था । अचानक जेम्स को अपने शरीर में कमज़ोरी महसूस होने लगी। पानी में अब भी ब्लैक क्रिस्टल से निकली हुई एनर्जी मौजूद थी । जेम्स को अपने होश गुम होते से लगे। वह पूरी ताकत लगा कर अपने हाथ पाँव चलाने लगा और सतह की ओर भागा । पर अब देर हो चुकी थी। उसका शरीर जवाब दे रहा था । कमज़ोरी हावी हो रही थी सांस लगभग खत्म हो चुकी थी। ऊपर से क्रिस्टल की एनर्जी ने उसके मस्तिष्क पर बुरा असर डाला था। उसे ज़ोरदार ठण्ड का अहसास हो रहा था । मौत आँखों के सामने नाच रही थी । जेम्स बहुत ऊपर तक आ चुका था , सतह नज़र आ रही थी और वह विशालकाय जहाज़ भी। परन्तु अचानक जेम्स के शरीर ने हरकत करना बन्द कर दिया। उसके पाँव रुक गए हाथ थम गए । आँखों की पुतलियाँ एक जगह पर केंद्रित हो गईं और ……. जेम्स वापस समुद्र के तल की ओर गिरने लगा। उसके मस्तिष्क में बहुत सी पुरानी यादें किसी फ़िल्म की तरह चल रही थीं। उसे अपना भाई बॉन्ड दिख रहा था जो मुस्करा रहा था , कभी फुट बॉल खेलता हुआ दिख रहा था उसके साथ तो कभी चॉक्लेट खाता हुआ। उसकी बहन दिखी जो ज़बरदस्ती उसकी बाइक पर बैठ कर घूमने की ज़िद कर रही थी। माँ दिखी जो उसे प्यार कर रही थी , पापा दिखे जो उसे अपने कन्धों पर बिठा कर घुमा रहे थे । और अंत में …. यादों के पर्दे साफ़ हो गए सब कुछ दिखना बन्द हो गया बिल्कुल उसी तरह जिस तरह टीवी बन्द होने के बाद कुछ नही दिखता।

 

 

बॉन्ड जमोग्रा को गौर से देख रहा था की वह सचमुच मर गया है या नही। जमोग्रा सचमुच मरा नही था ! वह ज़िंदा था। लड़खड़ाती आवाज़ में बोला जमोग्रा “न …. नही ….मैं मर नही सकता…मर नही सकता। मुझे यह इंसानी रूप त्यागना होगा।”  अचानक जमोग्रा गायब हो गया। बॉन्ड को तो यही लगा एक पल को। फिर जब उसने गौर से देखा तो जमोग्रा जिस स्थान पर था अब वहां एक छोटा सा जीव पड़ा हुआ था । उसका छोटा सा मुंह हल्का-हल्का छिपकली से मिल रहा था बस उसकी चोंच कुछ ज़्यादा ही नुकीली थी । उसकी आँखें एकदम काली और चेहरे से भी बड़ी लग रही थीं। उसकी छोटे कान अगल बगल लटके हुए था। उसके पांच इंच के शरीर में एक इंच का चेहरा था और चार इंच का उसका पूरा धड़ था जो की एक सांप की पूँछ जैसा था। उसके चार पैर भी थे जो टिड्डे के पैरों जैसे लम्बे थे। और इन सब के अलावा उसके दो पर थे जो पूरे शरीर से लम्बे और बड़े थे। अचानक उसके झिल्ली जैसे पर फड़फड़ाए और हवा में इतना ऊपर आ कर रुक गया की जेम्स उसे पकड़ न सके। उसके पर जब फड़फड़ा रहे थे तो एक छन-छन की बेसुरी आवाज़ निकाल रहे थे।

 

कुछ पल तक उसे आँखें फाड़ कर देखता हुआ बॉन्ड अचानक ठहाके लगाने लगा। “हा हा हा हा । यही है तुम्हारा असली रूप। तुमने सही कहा था तुम जानवर, इंसान, कीड़े मकोड़े किसी श्रेणी में नही आते।”

 

“हंस ले जितना हंसना है।” अचानक जमोग्रा की बेहद पतली और बेसुरी आवाज़ निकली “मैं जल्द ही वापस आऊंगा अपनी पूरी शक्तियों के साथ और फिर तुझे ही पहले मौत के घाट उतारूंगा। मेरा नाम अपने कट्टर दुश्मनों की सूची में सब से ऊपर लिख ले।”

 

 

“तेरा नाम तो मैं लिखूंगा..” अपने दाएं पैर का जूता उतारता हुआ बोला बॉन्ड “पर अपनी हिटलिस्ट में , वह भी सब से ऊपर क्योंकि तू अभी मरने वाला है।”

 

बॉन्ड ने जूता फेंक कर मारा पर एक ओर हटकर जमोग्रा वार बचा गया। और तेज़ी से उड़कर भागने लगा। बॉन्ड ने दूसरा जूता भी उतार कर फेंका पर वह भी जमोग्रा को न लगा और समुद्र में जा गिरा । जमोग्रा दूर आकाश में गायब हो चुका था।

 

बॉन्ड ने अपना माथा ठोका “शिट्ट! बच गया कीड़ा । ऊपर से मेरे जूते भी समुद्र में जा गिरे …. समुद्र!”   अचानक बॉन्ड को याद आया की उस विशालकाय समुद्र में उसका भाई भी मौजूद है। बॉन्ड ने समुद्र में छलांग लगा दी।

 

 

धुंधले पानी में उसे दूर तक कुछ नही दिख रहा था एक भी मछली या कोई अन्य समुद्री प्राणी नज़र नही आ रहा था। पूरा समुद्र शांत था। बॉन्ड बेचैन हो गया । वह कभी पानी में कहीं और भागता कभी कहीं और उसे समझ नही आ रहा था इस विशालकाय समुद्र में उस एक बूँद को कैसे ढूंढें जो जेम्स के रूप में कहीँ गुम हो चुकी थी । बॉन्ड की धड़कने बढ़ती जा रही थीं। उसे एक अनजाना भय परेशान कर रहा था। उसका दिमाग भी काम नही कर रहा था इस परिस्थिति में । बॉन्ड हर तरफ जाने की कोशिश कर चुका था । वह सीधे भी गया था , दायें भी गया था बाएं भी गया था ….. लेकिन ….क्या वह पीछे मुड़ा था। तेज़ी से चलती धड़कनो के साथ बॉन्ड पीछे पलटा । उसे कुछ दूर पानी में कोई  चीज़ नीचे की ओर जाती दिखी। बॉन्ड उस ओर तैरने लगा । कुछ करीब पहुंचकर उसने पहचान लिया। वह जेम्स ही था।

उसने जेम्स के पास पहुंचकर उसे पकड़ा । जेम्स को हिलाने डुलाने का टाइम नही था। बॉन्ड अपने शरीर की सम्पूर्ण शक्ति लगा कर ऊपर भागा।

 

 

जल्द ही जहाज़ पर―एक ओर जेम्स पड़ा हुआ था । बॉन्ड उसके बगल में बैठ कर रो रहा था। अचानक जैसे बॉन्ड पागल सा हो गया। वह डेक पर अपने हाथ को ज़ोर-ज़ोर से मारने लगा। फिर उसने जेम्स की कॉलर पकड़ ली। जेम्स की आँखें बन्द थीं , वह बिल्कुल शांत था। बॉन्ड उसका कॉलर पकड़ कर चिल्लाया, उसका दर्द उसकी आवाज़ में साफ़ छलक रहा था। “आखिर क्यों ! क्यों तू मुझे छोड़कर चला गया ! अपना वादा भूल गया! हम साथ में मरने वाले थे और तू अकेला मर गया!”  बॉन्ड , जेम्स के सीने पर अपने हाथ पटकने लगा “बता मुझे बता! उठ! उठ ना!”  अचानक जो हुआ उसकी बॉन्ड को उम्मीद नही थी। जेम्स ज़ोर से खांसा था। बॉन्ड फौरन उसके पास झुक कर उसका गाल थपथपाने लगा। “जेम्स!….जेम्स! उठ जा बड़े भाई। मैं अकेला हूँ तेरे बिना।”

 

बॉन्ड के इन वाक्यों ने जैसे जादू कर दिया एक भाई को मौत की दुनिया से वापस खींच लिया। “खौं… खौं…खौं।”  जेम्स लगातार खाँसने लगा  “किसी ने मुझे … पीछे से पकड़ कर खींचा क्या?”  कमज़ोरी की वजह से जेम्स की मरी हुई आवाज़ निकली।

 

बॉन्ड की आँखों में ख़ुशी के आँसू छलक आए । उसने जेम्स को फौरन गले से लगा लिया । “मैं जानता था तू मुझे छोड़कर नही जाएगा बड़े भाई।”

 

जेम्स भी अपने भाई से लिपट गया। “अब समझ आ…… गया मुझे उस….. अँधेरी दुनिया से जिसने वापस खींचा। …वह… तू था मेरे भाई।”

 

एरांको का क्या हुआ

बॉन्ड ने पूछा ।

“वह …. उसका खेल अब खत्म। प्रोफेसर … ने जो पन्ना हमे ….पढ़कर नही सुनाया था । उसके आखिर में यही लिखा था की ….यदि ब्लैक क्रिस्टल …..एरांको से अलग हो गया उसकी पूरी शक्तियां वापस आने से पहले तो क्रिस्टल एरांको की बची खुची शक्ति के साथ …. उसकी आत्मा को भी खींच लेगा। मैं यह बात भूल गया था। पर जब मैंने दुबारा सतह पर आकर सांस ली ….. तो …. मुझे अचानक यह याद आ गया। और मैंने उसके गले से क्रिस्टल खींच निकाला।”  जेम्स ने कहा और एक लम्बी सांस छोड़ी।

 

 

दोनों भाई एक दूसरे से लिपटे हुए थे । शाम हो गई थी। आकाश में सूरज डूब रहा था । अभी तक शांत समुद्र अब खूब हल्ला मचाने लगा था जैसे वह भी किसी ख़ुशी का इज़हार कर रहा था।

 

जब की नीचे समुद्र में एक तेज़ चक्रवात सा बढ़ता हुआ उस ओर जा रहा था जहाँ एरांको की लाश चट्टानों में फंसी पड़ी हुई थी। पहले वह चक्रवात उन चट्टानों के आस पास काफी देर तक घूमा फिर वह उस जगह घूमने लगा जहाँ ब्लैक क्रिस्टल धरती में समा गया था। काफी देर तक वहीँ पर घूमता रहा वह चक्रवात उसके बाद एक झटके से रूक गया और नज़र आईं दो लाल अंगारे जैसी आँखें – वैसी ही आँखें जैसी काले जंगल में खड़े मानवाकृति नुमा पेड़ की थीं।

 

**************************************

 

 

एक हफ्ते बीत गए इस घटना के । अब तो ब्लैक डेमन्स , एरांको यह सब बीती हुई बात हो चुके थे। बॉन्ड ने जेम्स को जमोग्रा के बारे में भी बताया था जिसे सुन कर जेम्स हैरान हुआ फिर उसका असली रूप जानकर खूब हँसा था। कुछ ही दिनों बाद जेम्स-बॉन्ड को एक विशेष सम्मान से नवाज़ा गया । अब वह मोहन नगर के साथ-साथ पूरे देश के चहेते बन चुके थे।

 

प्रोफेसर जावेद खान पर लगाए गए सारे आरोप हटा लिए गए। उन्होंने आखिरी वक़्त तक ईमानदारी का दामन थामे रखा था वक़्त और हालात या कहें जमोग्रा ने उन्हें मजबूर किया था।  अब्दुल को भी बाइज़्ज़त बरी कर दिया गया। ऑपरेशन के द्वारा अब्दुल ने अपने मस्तिष्क में फिट चिप भी निकलवा ली थी ।

 

एक दिन जेम्स-बॉन्ड अब्दुल से मिलने पहुँचे। काफी देर तक वे आपस में बातें करते रहे । फिर जेम्स-बॉन्ड को अब्दुल बाहर तक छोड़ने आया। “समझ नही आता मैं तुम दोनों का शुक्र कैसे अदा करू । तुम इंसान नही फ़रिश्ते हो।”  अब्दुल ने दोनों को मुस्करा कर देखते हुए कहा।

 

“अरे छोड़िए सर। शुक्र अदा करना है तो ऊपर वाले का कीजिए । वही सब करता है हम तो बस ज़रिया हैं।”  जेम्स ने भी मुस्कराते हुए जवाब दिया।

 

“हाँ और अब आप भी प्रोफेसर जावेद सर की तरह महान वैज्ञानिक बनिए और देश का नाम रौशन कीजिए।” बॉन्ड भी बोल पड़ा।

 

“हाँ ज़रूर। अब तुम दोनों मेरे छोटे भाई की तरह हो। जब भी तुम्हे मदद की ज़रूरत होगी मैं हमेशा तैयार मिलूँगा।”  अब्दुल ने मुस्करा कर सर झुकाया।

 

 

जेम्स-बॉन्ड चल दिए वापस । अब्दुल उन्हें दूर तक जाता हुआ देखता रहा और सोचता रहा। कैसा हो अगर इस देश का हर एक युवा इनकी तरह हो जाए इनकी तरह सोचने वाला हो जाए। पूरे देश का नक्शा ही बदल जाएगा । पूरी दुनिया में हमारा देश नंबर एक पर होगा।

 

अब्दुल से मिलने के बाद जेम्स बॉन्ड एक हरे भरे मैदान में पहुँचे । वहीँ घास पर बैठ कर वे एक दूसरे से बातें करते रहे। बॉन्ड ने जेम्स को काव्या के बारे में बताया जिसे सुन कर जेम्स बहुत खुश हुआ “तू तो सेट हो गया छोटे । अब मेरी वाली कब आएगी?”

 

“तुझे ऐसा क्यों लगता है की तेरी मुलाक़ात उससे फिर होगी।”  बॉन्ड ने पूछा।

 

“मुझे नही लगता । मेरे दिल लगता है और मेरे दिल को जो लगता है वह ज़रूर होता है , समझा छोटे ।” बॉन्ड का जवाब नही आया। जेम्स ने मुंडी पीछे घुमाई तो बॉन्ड कान में मोबाइल लगाए टहलता हुआ दिखा ।

 

“हाँ काव्या । कहो क्या हाल है। क्या कहा….हाँ..मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आ रही है।”  बॉन्ड बोल रहा था।

 

वापस पलट कर जेम्स ने आसमान की ओर मुंह उठाया। “इसे तो तूने सेट कर दिया । अब मुझ गरीब की भी सुन ले।”  तभी जेम्स को सामने वही निंजा लड़की दिखी। पर अब वह दूसरे कपड़े में थी। लाल रंग की लम्बी ड्रेस पहने थी वह जो हवा में लहरा रही थी। उस लड़की की सिर्फ आँखें नज़र आ रही थीं । जेम्स फुर्ती से खड़ा हुआ और उसकी ओर लपका। वह भी इठलाती हुई भागी। जेम्स उसके पीछे गाना गाते हुए भागा। जेम्स उसके पीछे भागता ही जा रहा था और गा रहा था “गुलाबी आँखें जो तेरी देखीं , शराबी ये दिल हो गयाss”

 

अचानक बॉन्ड की नज़र जेम्स पर पड़ी । बॉन्ड वहीँ से चिल्लाया। “अरे जेम्स कहाँ जा रहा है?”  बॉन्ड भी उसके पीछे लपका। “अरे रुक जा बड़े भाई।”  बॉन्ड जब जेम्स के थोड़ा करीब पहुँचा तो उसे भी जेम्स का गाना सुनाई दिया। “लगता है यह फिर से बावला हो गया है! अरे रुक जा जेम्स ! आगे कीचड़ से भरा गड्ढा है।”  बॉन्ड उसे पकड़ने ही वाला था की जेम्स औंधे मुंह गड्ढे में जा गिरा। जब वह खड़ा हुआ तो ऊपर से नीचे तक कीचड़ से लथपथ था। बॉन्ड ने ज़ोरदार ठहाका लगाया।“ हा हा हा ।”

 

“गुर्र। प्यार में अक्सर लोग औंधें मुंह गिरते हैं छोटे । आज मैं भी गिर गया।” जेम्स ने अपने चेहरे से कीचड़ साफ़ करते हुए कहा ।

 

“हा हा हा । तेरा प्यार मुझे ज़रा हाई लेवल का लगता है भाई। क्योंकि लोग तो गिरते हैं औंधें मुंह, पर तू सीधा कीचड़ में गिरा है।”  बॉन्ड की इस बात पर जेम्स भी ठहाका लगाकर हंस दिया । फिर एक दूसरे के कन्धे पर हाथ रखकर दोनों चल दिए–घर की ओर।

 

 

 

 

—————―Happy Ending―————–

द ब्लैक डेमन शुरू करते वक़्त मैंने यह नही सोचा था की इस कहानी में मैं नए हीरोज़ को ला पाउँगा। और न ही मुझे अंत का कुछ पता । बस मैंने सोचा की मुझे भी एक एक्शनपैक्ड कहानी लिखनी है । और उसके लिए मैंने एकदम अलग कहानी सोचनी शुरू कर दी । कई दिन तक सोचने के बाद यह राक्षसों वाला आईडिया आया। मैंने सोचा राक्षस ही दिखाने हैं तो कुछ नए तरीके से दिखाया जाए। और लिखना शुरू कर दिया। शुरू में बस यही प्लान था की राक्षस को कोई आम इंसान मारेगा । लेकिन फिर सोचा लाओ लगे हाथों मैं भी अपने नए हीरोज़ उतार दूं मैदान में। इसी के साथ जेम्स-बॉन्ड की रचना हुई।

यह मेरी पहली सस्पेंस+एक्शन स्टोरी थी। इसलिए गलतियां भी बहुत की होंगी मैंने। कृपया मेरी गलतियों को बताएं और क्या अच्छा किया वह भी बताएं।

अब से मेरी आने वाली हर कहानी अगली पिछली कहानियों से जुडी हुई होंगी । इसलिए जो सवाल छोड़े जाएं उन सवालों पर कोई सवाल नही करेगा। आगे आने वाली कहानी में पिछले सारे सवाल खुलते जाएंगे। और कुछ गलतियों (जो पिछली कहानियों में हो जाती हैं। ) को अगली कहानी में सुधारा जाएगा। इसलिए जो मेरी पिछली कहानी नही पढ़ेगा उसे अगली समझ नही आएगी। और जो अगली नही पढ़ेगा उसे पिछली समझ नही आएगी।😜

दोस्तों यह वाला भाग कुछ ज़्यादा ही बड़ा रहा। इस लिए काफी मेहनत लगी टाइपिंग करने में। कृपया रिव्यू देते हुए जाएं ताकि पता तो चले कितने लोगों ने यह कहानी पढ़ी है।

 

नोट :- जल्द ही आपको निंजा गर्ल की कहानी पढ़ने को मिलने वाली है। उसकी कहानी अलग है। वह एक अलग किरदार है। अब कुछ लोग पूछेंगे की जब उसके बारे में बताना ही नही था तो उसे कहानी में क्यों लाए । जी दरअसल उसकी कहानी कुछ और है और वह इस कहानी से जुडी हुई है । वह क्या कर रही थी काले जंगल में यह आपको उसकी कहानी में ही पता चलेगा।

 

धन्यवाद#

Written By- Talha Faran for Comic Haveli

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6 Comments on “The Black Demon Part 7 (Conclusion Part)”

  1. Talha ji sabse pahle , itni badhiya kahani likhne ke liye aapko shukriya.

    Kyu ki itni lambi kahani likhne ke baad bhi ek taartamyta banaa kar rakhi hai aapne .

    Ab question main kar nahi sakta kyu ki aapne khud likha hai ki saare questions ke answers aage aane wali stories me mil jayenge.

    Love story ne thoda sa bhavuk kar diya, but ladke ka decision dekh kar achcha laga. Bahan ki insult par thappad maar diya

    Sahi kiyaa.

    Agli kahani ka intezaar rahega..

    Best wishes

    1. बहुत बहुत धन्यवाद विरक्त हरिभक्त जी। आशा करता हूँ आगे भी आपको मेरी कहानियां पसन्द आएंगी।

  2. वाह भाई!
    मज़ा आ गया।
    कितना मज़ा आया ,ये तो मैं बता नही सकता,
    सच कहूं तो बताने भर के लिये शब्द ही नही है मेरे पास

    क्या शुरुआत थी और क्या एंडिंग है यार! मानना पड़ेगा, बहुत ज्यादा मश्क्कत की है तुमने, ये पार्ट बाकि सभी पार्ट्स से मस्त था, बस एक चीज की कमी लगी कि इसमें निंजा गर्ल को नही लाये, उसका नाम भी पता नही चला…….

    वैसे बांड के पुराने प्यार को मिलवा के अच्छा किया।उसकी बैक स्टोरी भी अच्छी रही, भाई-बहन का पायल वाला सीन तो पूछो ही मत, क्या इमोशनल ब्लैकमेलिंग है यार, गजब!
    बस एक बात पची नही कि बन्दे(बांड) ने बचपन मे ही लव का कोर्स कर लिया था क्या…
    तुम्हारे अनुसार दोनों 17-18 साल के है, या ज्यादा उम्र के, प्लीज इसे क्लियर कर दो।

    विलेन का सस्पेन्स जबरदस्त था, पहले प्रोफेसर, फिर पता चला कि वो जमोग्रा नामक जीव है, जो ब्लैक डेमन्स के समयकाल से है, 5 इंच का जीव किसी का रूप बदलकर उसकी सभी काबिलियत की कॉपी कर लेना या कुछ ऐसा ही , पूरी तरह वही बन जाना कमाल का कॉन्सेप्ट था ये, पूरी कहानी एकदम बहती सी जाती है, कही रुकने का नाम ही नही है। दाद देनी होगी जेम्स के दिमाग की ,बन्दे ने हर चाल समझ ली।

    Eranko भी बहुत खतरनाक लग रहा था, उसको रोकना ,मात देने बहुत ही खतरनाक था, उम्मीद है ये जमोग्रा नामक विलेन किसी और स्टोरी में भी दिखेगा, और ऐसी ही शानदार कहानी पढ़ने को मिलेगी।

    एंडिंग भी गजब की लगी , लोग प्यार में अंधे होते है मानना पड़ेगा ये, कीचड़ में गिर दिया यार और तो और सस्पेन्स भी छोड़ गए ,लड़की तो मिली ही नही

    छोटी वाला कॉन्सेप्ट दिल को छू जाने वाला है, पता नही क्यूँ बार बार वही दिमाग मे आ रहा है।बहुत ही अच्छा कॉन्सेप्ट है यार ये, मुझे पर्सनली इस कॉन्सेप्ट से प्यार हो गया है मतलब बोले तो सबसे ज्यादा अच्छा और दिल को छू जाने वाला ,नही सिर्फ छू जाने वाला नही बल्कि धीरे से दिल मे उतर के बस जाने वाला है❤️।

    बांड और काव्या की बाख स्टोरी मेरी दूसरी पसन्द वाली कॉन्सेप्ट रही, बहन के अपमान करने पर कोई भी भाई ऐसा ही करता, फिर छोटी का बांड से जोर जबरदस्ती करके ,काव्या के लिए मनाना काफी अच्छा लगा।

    फाइट सीन तो कमाल के थे भाई, मानना पड़ेगा, क्या लिखते हो यार ,बहुत ही शानदार।गुरुजी की छाती चौड़ी हो जाएगी ये कहानी पढ़कर,
    उम्मीद करता हूं आगे भी ऐसे ही लिखते रहोगे, और जल्द ही हमे इसका सिकवल पढ़ने को मिलेगा, साथ जेम्स – बांड के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने को मिलेगा, निंजा गर्ल जल्द ही कम्पलीट करके रीलीज करो।
    एक कृपा और करना जेम्स को निंजा गर्ल से मिलवा दो यार, छोटे को मिल गयी और बड़े को अब तक नही मिली ये तो घोर अन्याय है…….।
    वैसे ये मेरी पर्सनली रिकवेस्ट है।

    मेरी तरफ से आपके लिए छोटा सा बधाईनामा-

    गली गली में आज छाये है तल्हा,
    हवेली में शोर मचाये है तल्हा
    निगहबानी में की शरारत कुछ ऐसी
    तभी तो सबके दिल मे बसे-बसाए है तल्हा।

    1. धन्यवाद मनोज भाई। आपका रिव्यू पढ़कर बहुत ही ज़्यादा अच्छा लगा। और हाँ ….. जेम्स-बॉन्ड की उम्र 18 है। आज से तीन साल पहले यानी जब वे पन्द्रह साल के थे तब वे हाई स्कूल में थे और तभी बॉन्ड को काव्या से प्यार हुआ था।

      1. धन्यवाद तल्हा भाई !
        यार बुरा न मानो तो एक बात बोलूं
        अगर बन्दे का लव उसी टाइम सक्सेस हो जाता तो तुम्हारे पास हीरो कहा से आता , और तो और पूरा का पूरा गड़बड़ ही हो जाता

  3. सर्वप्रथम हवेली के दो नए सुपरहीरोज़ की पहली कहानी पूरी होने की बधाइयाँ।
    तल्हा फरहान की कहानी ‘THE BLACK DEMON’ बहुत ही रहस्यमय और रोमांचक थो।
    जहाँ जेम्स और बांड ने एरांको को हरा दिया वहीं निंजा गर्ल का रहस्य अभी भी बरकरार है।
    साथ ही कहानी में जेम्स बांड का अपनी बहनों के लिए प्यार भी देखने को मिला और दोनों के लव इंटेरेट्स की झलक भी दिखाई दी।
    उम्मीद है जल्द ही दोनों की ओरिजिन भी दिखाई जाएगी।
    राक्षस, उनकी प्रजातियाँ , और उनकी समकक्ष प्रजातियों का बढ़िया वर्णन किया है साथ ही कलनिद्रा के बारे में भी।
    अब बात करते है आखिरी भाग की,
    यह भाग सबसे लंबा था, साथ ही एक्शन सीन्स भी डिटेल में थे।
    उम्मीद है तल्हा से आगे भी ऐसी कहानियाँ मिलती रहेंगी।

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