The Death Pattern: Chapter 1 – The Beginning

पैटर्न्स।
पैटर्न्स हमारे जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब से यह प्रकृति अस्तित्व में है तभी से यह पैटर्न्स भी अस्तित्व में है।
ब्रह्मांड का विस्तार, पृथ्वी का सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाना, मौसमों का बदलना , दिन और रात का होना यह सब एक निश्चित पैटर्न के तहत होता है।
जैसे जैसे मनुष्य का विकास हुआ ,उसके मस्तिष्क का भी विकास हुआ। धीरे धीरे मनुष्य ने इन पैटर्न्स को समझना शुरू किया और नींव रखी सभ्यताओं की। कौन सी फसल कब उगती है , कब गर्मी पड़ती है और कब बरसात होती है , ये सब समझ कर मनुष्य और भी विकसित होता रहा।
अब बारी थी ब्रह्मांड के पैटर्न्स को समझने की
। कौन सा तारा कब दिखाई देता है , किस नक्षत्र का क्या स्वरूप है , उल्कापिंड , निश्चित समय और निश्चित अवधि में टिमटिमाते तारे, ग्रहण और न जाने कितने ही रहस्यों का ज्ञान मनुष्यो को हुआ केवल प्रकृति के पैटर्न्स समझ कर।
पैटर्न्स ने वैज्ञानिक और खगोलीय प्रगति में भी काफी योगदान दिया। गति , ऊर्जा, त्वरण , वेग, रसायन, जीव जंतु , भूकंप , सुनामी इन सबके रहस्य अब मनुष्यों की ज्ञात हैं।
मनुष्य हमेशा से अपने भविष्य के प्रति उत्सुक रहा है, उसने हमेशा से अपने भविष्य में झाँकने की कोशिश की है और इस कार्य के लिए भी उसने सहारा लिया पैटर्न्स का। किसी के जीवन मे क्या घटित हो रहा है और क्या घटित हो चुका है इसके आधार पर उसके भविष्य का पता भी लगाया जा सकता है। पर किसी के जीवन का कोई भी पैटर्न हो वह खत्म एक ही जगह होता है उसकी मौत पर।
पर क्या होगा जब कोई इस पैटर्न को बदलना चाहे?
ये कहानी है ऐसे ही एक पैटर्न की-
●●●●● द डेथ पैटर्न●●●●
(THE DEATH PATTERN)
CHAPTER-1 【The Beginning】
आइए चलते हैं उस शहर में जहाँ से इस कहानी की शुरुआत हुई।
राजनगर।
राजनगर जाना जाता है अपने रखवाले सुपर कमांडो ध्रुव के कारण।
ध्रुव के माता पिता सर्कस में काम करते थे , और बचपन में ही सर्कस में लगी एक आग के कारण मर गए थे।
तब ध्रुव को गोद लिया राजन मेहरा ने जो अब राजनगर के कमिश्नर भी है।।
ध्रुव राजनगर में ही पिता राजन मेहरा , माता रजनी और बहन श्वेता के साथ रहता है और अपने अपराध उन्मूलन की प्रतिज्ञा पर ध्रुव तारे के समान ही अटल है।
—————————————-
स्थान- राजनगर गोडाउन एरिया।
लगभग दिन के बारह बज रहे थे।
सूट बूट पहना हुआ एक आदमी एक पुराने गोदाम की तरफ बढ़ रहा है। वह सीधा एक ही तरफ बढ़ रहा था , शायद उसे कहाँ जाना है, ये पहले से पता था। इस समय भीड़ लगभग न के बराबर थी फिर भी वो अजनबी बहुत सावधानी से आगे बढ़ रहा था। कुछ दूर चलने के बाद वह गोदाम नंबर 12A के बाहर पहुँचा।उसने संकेत की तरह तीन बार दरवाजा खटखटाया।
वैसे तो गोदाम बाहर से वीरान लग रहा था ,पर आश्चर्यजनक रूप से तुरंत ही दरवाजे पर आहट हुई। दरवाजा थोड़ा सा खुला और अंदर से एक शख्स ने बाहर खड़े अजनबी को ऊपर से नीचे तक देखा। अजनबी के चेहरे पर थोड़े आश्चर्य के भाव आये वहीं अंदर खड़े शख्स के चेहरे पर एक खुशी की लहर दौड़ गयी।
“मुझे पता था तुम जरूर आओगे।”इससे पहले की अजनबी कुछ बोल पाता , अंदर खड़े शख्स ने चुप रहने का इशारा किया और उसे अंदर खींच लिया-“शशशश!बाकी बातें नीचे चलकर करेंगे।”
इतना कहकर वह शख्स गोदाम के एक कोने में बने तहखाने की सीढ़ियों की तरफ बढ़ने लगा।
देखने से तो वह शख्स हट्टा कट्टा तंदरुस्त लग रहा था , पर उसकी हालत बिल्कुल इसके उलट थी।बढ़ी हुई दाढ़ी , बिखरे बाल , मैले कपड़े इस बात की गवाही दे रहे थे कि वो शख्स पिछले कुछ दिनों से यहीं था , गोदाम में।
जल्दी ही वह शख्स नीचे उतर चुका था और उसके पीछे पीछे वह अजनबी भी। अजनबी ने अपने चारों तरफ नजरे घुमायी।
अंदर के तहखाने की हालत बिल्कुल अलग थी। देखने से वह कमरा किसी खुफिया एजेंसी का मिनी आफिस लग रहा था। मेज़ पर लैपटॉप और कागज बिखरे हुए थे, दीवारों पर नक्शे चिपके हुए थे।पर्याप्त मात्रा में प्रकाश कमरे में फैला था।
वह शख्स आगे बढ़ कर मेज़ पर रखे लैपटॉप में कुछ चेक करने लगा । तब तक अजनबी भी अपने आस पास के माहौल से परिचित हो गया था। पर आश्चर्य अभी भी उसके चेहरे पर कथक कर रहा था।

आखिर उसने बोला-“ध्रुव!”
“हूँ”- ध्रुव ने बिना लैपटॉप स्क्रीन से चेहरा उठाये कहा।
“ये सब क्या नाटक है ध्रुव , मुझे तो लगा था तुम राजनगर से बाहर हो। और तुम यहाँ पागलों की तरह अपने ही शहर में छुप कर रह रहे हो।और मुझे भी इतने खुफिया तरीके से बुलाया। मुझे तो लग रहा है कि मैं ब्रह्मांड रक्षक नहीं बल्कि कोई सीक्रेट एजेंट हूँ।”
“रिलैक्स नागराज , रिलैक्स! सब बताता हूँ।”ध्रुव ने एक गहरी साँस ली और बोलना जारी रखा-“दरअसल बात ऐसी है नागराज कि मैं कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर जा रहा हूँ और उससे पहले मुझे तुमसे एक जरूरी काम था।”
ध्रुव ने नागराज के चेहरे को गौर से देखा-“मुझे तो लगा तुम नागराज शाह बनके आओगे।पर तुम तो…”
“वही रूप है बस फ्रेंच कट दाढ़ी की जगह फुल दाढ़ी है।तुमने बुलाया ही इतना सीक्रेटली , की मुझे लगा और सावधानी बरतनी चाहिए।”
(दोस्तों , नागराज के नाम से तो आप सभी परिचित होंगे।नागराज महानगर में रहता है जो कि राजनगर से 450 km की दूरी पर है। नागराज गुप्त रूप से नागराज शाह बनकर रहता है और स्नेक आईज नामक सिक्योरिटी एजेंसी का हेड है। ध्रुव की तरह वो भी ब्रह्मांड रक्षकों के दल का एक सदस्य है।)
नागराज ने चारों तरफ एक बार फिर नजरें घुमाई-“मुझे तो लगा तुम दो दिन पहले ही राजनगर से बाहर गए हो।कमांडो फ़ोर्स के किसी खुफिया काम से।”
“कमांडो फ़ोर्स के कुछ खास मेंबर के अलावा बाकी सब को भी यही पता है।”
“जैसे करीम , पीटर और रेणु।”-नागराज ने कहा।
“हाँ”-ध्रुव ने सर हिला कर जवाब दिया।
“और उन तीनों को क्या बताया है कि तुम कहाँ गए हो?राजनगर के गोडाउन में अज्ञातवास।”
“नहीं”ध्रुव ने कहा”उन तीनों को मैंने बताया है कि मैं ब्रह्मांड रक्षकों के काम से जा रहा हूँ।”

“क्या?”-नागराज की नजरें जो कि अभी भी कमरे को स्कैन कर रही थीं ध्रुव पर आकर टिक गयीं।
“इसका मतलब तुमने उनसे भी झूठ ही बोल।”
ध्रुव-“बात झूठ और सच की नही है नागराज, एक बहुत बड़ी और अजीब सी समस्या आ गयी है , जिसे सुलझाने के लिए मुझे ये सब करना पड़ रहा है।”
“बात क्या है ध्रुव मुझे शुरुआत से बताओ”-इस बार नागराज की आवाज में कुछ ज्यादे ही गंभीरता थी।
ध्रुव-“तुम तो जानते हो नागराज ,राजनगर में मैं अपने दत्तक पिता कमिश्नर राजन मेहरा के साथ रहता हूँ।मेरे असली माता पिता की कुछ सालों पहले हत्या कर दी गयी थी। दो साल पहले ही मुझे पता चला कि मेरे बड़े ताऊ जी और मेरे बाबा अभी भी जिंदा हैं और वो फ्राँस के एक शहर ल्योन में रहते हैं, जो कि पेरिस से कुछ ही दूर पर है।”
नागराज-“हाँ पता है मुझे, क्या समस्या का संबंध उन लोगों से है?”
“हाँ! बात दरअसल ऐसी है कि कुछ दिन पहले मेरे बाबा रघुराम को एक वर्ल्ड टूर का फ्री टिकट मिला था लकी ड्रा से।उन्होंने कुछ दिन पहले किसी वर्ल्ड वाइड कंपनी से कुछ सामान खरीदा था जो अपने कस्टमर्स के लिए लकी ड्रा से गिफ्ट्स बाँट रही थी।उसमें से एक गिफ्ट ये भी था।मेरी जानकारी के मुताबिक कुल 6 लोगों को वर्ल्ड टूर वाले गिफ्ट्स मिले थे जिनमें से एक मेरे बाबा भी थे।मेरे बाबा भी घर पर वहाँ अक्सर खाली ही रहते है तो उन्होंने भी जाने का निश्चय कर लिया और मेरे बड़े ताऊ ने भी उन्हें रोका नही।मुझे भी खुद ये बात पता थी और मुझे भी कुछ ऐतराज नहीं था।सो वो भी बाकियों के साथ गए। पर तीन दिनों पहले ही उन 6 लोगों का काफिला वापस ल्योन आ रहा था तो शहर से एक km पहले ही उनका प्लेन क्रैश हो गया।”इतना कहने के बाद ध्रुव ने एक गहरी साँस ली।
“तो क्या…क्या तुम्हारे…बाबा…?”-नागराज ने पूछना चाहा।
पर उससे पहले ही ध्रुव ने फिर बोलना शुरू कर दिया-

“नहीं !वो मेरे बाबा नहीं थे, पोस्टमार्टम से यह पता चला है कि जो लाश मेरे बाबा रघुराम की थी वो उनकी थी ही नहीं।”
“क्या? क्या बोल रहे हो तुम। लाश थी पर नहीं थी।”नागराज ने पूछा।
ध्रुव-“हाँ , जो लाश थी वो मेरे बाबा की हमशक्ल तो थी पर असली नही थी।उस लाश के फिंगरप्रिंट और यहाँ तक कि रेटिना भी मेरे बाबा जैसी ही थी।पर उनका ब्लड ग्रुप अलग था । DNA भी अलग था और कुछ फ्रैक्चर्स को मिलाने पर भी यही पता चला है कि वो मेरे बाबा नही थे।”
नागराज-” हे देव कालजयी! ये तो बड़ी अजीब बात है। तो क्या बाकी भी नकली थे?”
ध्रुव-“पता नहीं उनके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है ।पर ये तो बस शुरुआत थी और भी चौकाने वाली बातें तो बाद में पता चलीं।. .
पहली बात तो ये है कि वर्ल्ड टूर के नाम पे केवल कुछ ही शहर थे जहाँ वो जाने वाले थे जिनकी मैंने एक लिस्ट बनाई है और जबकि वर्ल्ड टूर में काफी देशों और शहरों को include किया जाता है।”
ध्रुव ने एक लिस्ट निकाल कर टेबल पर रख दी। नागराज ने उस लिस्ट को उठा लिया और गौर से देखने लगा।
नागराज-“बड़े अजीबो गरीब शहर हैं, अलेक्सांद्रिया(alexandria) ये तो इजिप्ट की राजधानी काहिरा(cairo) से कुछ ही दूर पर है।
एथेन्स जो कि मानव सभ्यता के पुराने शहरों में से एक है। मेक्सिको , और वांगचेंग..”
ध्रुव- “ये वांगचेंग चीन का एक शहर है जो की येलो(yello) रिवर के पास स्थित है और एक बहुत पुराना शहर है।”
नागराज-“बगदाद और कुछ ईरान के भी शहर हैं । ये शहर तो मेसोपोटामिया सभ्यता से जुड़े हुए है।”
ध्रुव-“सारे नाम ही अजीब है नागराज, और इनमें कोई पैटर्न भी नही दिखाई देता।”
नागराज-“तुमने उस शॉप का पता लगाया जहाँ से लकी टिकट मिला था?शॉप किसकी थी?”
ध्रुव-“हाँ! मैंने लगाया है सब पता, शॉप का नाम है ‘द कस्टमर्स वर्ल्ड’ ।ये एक तरह का शॉपिंग मॉल है।

पूरे फ्रांस में इसकी चेन्स है लगभग 100 शॉप्स हैं।और वैसी ही एक शॉप ल्योन में भी थी।”
नागराज-“और ओनर?इस शॉपिंग चेन का ओनर कौन है।”
ध्रुव-” रिचर्ड डिसूजा। सारी शॉप्स उसी के नाम पे रजिस्टर्ड हैं। पर मुझे पता चला है कि वो केवल एक मोहरा है, इन सारी शॉप्स का मालिक तो कोई और ही है।”
नागराज-“कौन?”
ध्रुव-“नाजिम खान।”
“क्या …!नाजिम खान”- नागराज ये नाम सुनकर आश्चर्यचकित रह गया।-“नाजिम खान तो आज यूरोप का सबसे बड़ा माफिया है। कई देश और टेररिस्ट ग्रुप तो केवल उसका नाम सुनकर ही काँपते हैं।”
ध्रुव-“हाँ वही। जिसका चेहरा आज तक किसी ने नही देखा। किसी भी देश की पुलिस उसे नही पकड़ सकी। कुछ लोग कहते है वो कोई काला जादू का तांत्रिक है तो कुछ लोग खुद उसे शैतान का अवतार मानते हैं।”
नागराज-“पर उसे शॉपिंग मॉल खोलने की क्या जरूरत थी।”
ध्रुव ने एक गहरी साँस ली-“पता नहीं नागराज, ये सब क्या हो रहा है।”
नागराज ने ध्रुव के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा-“तो फिर, हमें आगे क्या करना है।”
ध्रुव-“अब जो करना है , मैं खुद करुँगा।मैं आज शाम को ही ल्योन के लिए निकल रहा हूँ।”
नागराज-“पर मुझे अभी भी समझ नही आया तुमने ऐसा भेष क्यों बनाया है और मुझे क्यो बुलाया।”
ध्रुव-” अभी और भी बातें ऐसी है नागराज जो तुमको जाननी चाहिए। दरअसल राजनगर में आज कल संदिग्ध लोगों का आना जाना कुछ ज्यादे ही बढ़ गया है।ये लोग कौन हैं, कहाँ से आये हैं इसे ट्रेस करने में समय लग सकता है। मैंने ऐसे ही एक संदिग्ध आदमी को कुछ दिनों पहले पकड़ा था तो उसके पास मुझे चोंकाने वाली चीजें मिली। मुझसे जुड़ी लगभग सारी जानकारी उसके पास थी। पापा ,मम्मी , श्वेता यहाँ तक कि पीटर, करीम और रेणु से भी जुड़ी जानकारियाँ थी उसके पास। शायद वो हमारी जासूसी कर रहा था पर इससे पहले मैं उससे कुछ पूछ पाता उसने जहर भरा कैप्सूल खा कर आत्महत्या कर ली।

हालाँकि उसके पास बम ,गन्स ऐसा कुछ नही था ,फिर भी बात चिंता की थी। मैंने कुछ और लोगो को भी चेक किया पर उनके पास कुछ नहीं मिला ।केवल संदेह के आधार पर मैं सबको नही चेक कर सकता।”
नागराज-“तुम मुझसे क्या चाहते हो?”
ध्रुव-“राजनगर की सुरक्षा।”
नागराज-“मतलब”
ध्रुव-” हो सकता है मुझे उन सारे देशों में जाना पड़े , जो इस लिस्ट में है। मुझे नही पता बाबा को किस देश में बदला गया था। बाबा इस वक्त कहाँ है?किस हालत में हैं ?मैं चाहता हूँ तुम महानगर के साथ ही राजनगर पे भी नजर रखो। वैसे ऐसा करने के लिए राजनगर में भी लोग हैं। कमांडो फ़ोर्स , चंडिका हैं पर मैं फिर भी चाहता हूँ कि तुम….।”
ध्रुव एक पल के लिए रुका और फिर कहने लगा-“मैं चाहता हूँ कि तुम भी राजनगर पर नजरें रखो।या अपने जासूस सर्पों को यहाँ फैला दो। हो सकता है ये सब केवल मेरा भ्रम हो , केवल इसलिए मैं कमांडो फोर्स को कोई ऑर्डर्स नहीं दे सकता। पर मेरा फ्रांस जाना जरूरी है।”
नागराज -“मुझे कोई समस्या नही है ध्रुव, मेरे जासूस सर्प अब राजनगर में भी रहेंगे ,और वैसे भी आज कल नागदंत की कृपा से मेरे पास उड़ने की शक्ति है और महानगर और राजनगर के बीच मे केवल 450 किलोमीटर की दूरी है तो मैं खुद भी आ जाऊँगा कोई समस्या आने पर। लेकिन….”
ध्रुव-“हूँ..।लेकिन क्या नागराज?”
नागराज-“मैं चाहता हूँ कि मैं भी चलूँ तुम्हारे साथ, और रही बात राजनगर की तो हम बाकी ब्रह्मांड रक्षकों से बात कर लेंगे , या फिर विस्तृत ब्रह्मांड रक्षकों से।”
ध्रुव-“नहीं नागराज , यह मेरा व्यक्तिगत मामला है । मैं केवल संदेह के कारण बाकी लोगों को परेशान नहीं करना चाहता। और अगर बात वाकई में बड़ी होगी तो तुम बाकियों को खबर कर देना।
पर तभी जब मामला बहुत ज्यादे सीरियस हो। और हाँ मैं तुमसे कॉन्टैक्ट करूँगा जरूरत पड़ने पर तुम मुझसे कॉन्टैक्ट मत करना।”
नागराज-“अब इसका क्या मतलब?”

ध्रुव-“मतलब है नागराज। पहली बात तो मैं पापा, मम्मी या श्वेता को बाबा के बारे में नहीं बता सकता । श्वेता भी आज कल यही है।और अगर मेरे वजह से उनपर कोई खतरा है तो मुझे ना पाकर वो लोग जिनसे मुझे खतरा है, मुझे ढूंढने की कोशिश करेंगे।और तीसरी बात अगर बाबा को सचमुच जान बूझ कर गायब किया गया है तो गायब करने वालों को पता न चले की मैं उन्हें ढूँढ रहा हूँ। या किस तरह ढूँढ रहा हूँ।”
नागराज-“तुम्हारी बाकी बातें तो ठीक हैं , पर मैं तुम्हारी तीसरी बात से सहमत नहीं हूँ।अगर ये सब किसी प्लानिंग का हिस्सा है तो वो लोग जरूर तुमपे नजर रख रहे होंगे।”
ध्रुव-” इसकी उम्मीद मुझे भी है , पर इस तरह बाकी लोगों को तो नही पता चलेगा मैं कहाँ हूँ और क्या कर रहा हूँ। जैसे पापा को या कमांडो फ़ोर्स को।”
नागराज-“और तुम अपने आप को कब तक छुपा पाओगे, आखिर तुम सुपर कमांडो ध्रुव हो। ये बाल ये दाढ़ी और कपड़े बदल लेने से क्या होगा ,आखिर तुम्हारे वीसा(visa) पर तो तुम्हारा नाम लिखा ही होगा। अगर तुम्हारी भाषा में कहें तो तुम खुली किताब हो।”
ध्रुव-“उसका इंतेजाम मैंने कर लिया है। “
थोड़ी देर रुक कर ध्रुव ने फिर कहा-“तो ठीक है , तुम्हें समझ आ गया होगा कि मैं ऐसा क्यों कर रहा हूँ,अब चलो मैं भी आज शाम में ही निकलता हूँ।”
नागराज-” ठीक है मैं भी अब चलता हूँ, और अभी से ही अपने जासूस सर्पों को यहाँ फैला देता हूँ।”
उसके बाद नागराज गोदाम से निकल गया और उसी तरह छुपते हुए दूर निकल आया।
एक उचित स्थान पर असली रूप में आ गया और कुछ जासूस सर्पों को राजनगर में फैला कर वापस महानगर की तरफ उड़ चला।
————————————–
उसी समय विश्व के किसी अत्यंत गुप्त स्थान पर-
नाजिम अपने सबसे खास वफादार हामिद से बातें कर रहा था।
दोनों किसी बड़ी इमारत के एक लगभग खाली कमरे में मौजूद थे। कमरे में सिर्फ एक पुरानी मेज और एक कुर्सी रखी थी।

कमरे में केवल हल्का उजाला था।
नाजिम ने काले रंग का एक सूट पहन रखा था और कमरे में मौजूद एकमात्र खिड़की से बाहर देख रहा था।उसकी उंगलियों के बीच एक महंगा सिगार दबा हुआ था।हामिद कमरे के बीचों बीच खड़ा था। उसने पठानी सूट पहन रखा था। केवल कपड़ो से ही दोनों की हैसियत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता था।
हामिद-” क्या आपको नहीं लगता बॉस , हमने थोड़ी जल्दबाजी कर दी।अगर हम थोड़ा और इंतेजार करते तो ध्रुव के अलावा हमे कोई और जरूर मिल जाता।”
हामिद की आवाज मे अदब साफ झलक रहा था।
नाजिम ने अपनी नजरें हामिद पर टिका दी और बोला-” तुम कब से ऐसी बेवकूफाना बातें करने लगे हामिद। इतने सालों बाद तो हमें ऐसा शख्स मिला है जो हमारे काम के लिए सही है। ध्रुव को छोड़ कर किसी और को ढूंढना शायद हमारी सबसे बड़ी बेवकूफी होगी।”
हामिद-” पर बॉस वह हिंदुस्तान के लोगों के लिए……”
नाजिम-“हाँ तो क्या हुआ अगर वो हिंदुस्तान के लिए एक मसीहा है, उनका प्रोटेक्टर है।ये मत भूलो की हमने जो जाल उसके चारो तरफ बिछाया है , उससे वह खुद ब खुद यहाँ पहुंच जाएगा।”
नाजिम ने अपने सिगार से एक गहरा कश लिया और फिर बोलना जारी रखा -“ध्रुव को मैंने नही चुना है , उसकी नियति ने ही उसे चुना है। उसकी बलि ही मेरे देवता बनने की राह खोलेगी और उसके बाद मैं इस धरती पर एक नए युग का आरंभ करूँगा और इस काम मे तुम मेरे सिपहसालार बनोगे हामिद। अब तुम्ही बताओ क्या इतने बड़े काम के लिए नियति किसी साधारण इंसान का चुनाव करती। नहीं हामिद नही, बड़े बड़े कामों के लिए बड़ी बलि देना जरूरी है।”
इन बातों को सुन कर हामिद में भी थोड़ा उत्साह आ गया -“पर बॉस इसके लिए रघुराम को ल्योन से बाहर लाने की क्या जरूरत थी। और उसे अभी तक जिंदा क्यों रखा गया है बॉस ।”

नाजिम-” रघुराम ही तो वह जरिया है जिसके जरिये हमने वह पैटर्न बनाया है हामिद, जिसका पीछा करता हुआ ध्रुव यहाँ आएगा , और वही पैटर्न बनेगा उसकी मौत का पैटर्न , उसका डेथ पैटर्न।”
हामिद को जैसे कुछ याद आया-“ओह ! तो इसीलिए आपने इस मिशन का नाम “डेथ पैटर्न ” रखा है।”
नाजिम ने सिगार खत्म किया और हामिद के पास आकर बोला-” किसी भी इंसान को समझने के लिए उसके काम करने के पैटर्न को समझना बहुत जरुरी होता है। वह कैसे काम करता है। किन परिस्थितियों में वो कैसे काम करेगा , क्या सोचेगा ये हम काफी हद तक पता कर सकते हैं।मैंने काफी समय से ध्रुव के काम करने के पैटर्न का विश्लेषण किया है और , उसी आधार पर मैंने ये प्लान बनाया है।”
“तैयारियाँ शुरू कर दो हामिद, इस मिशन के लास्ट फेज(last phase) के पूरा होने का समय आ चुका है। अब जल्द ही ये मिशन पूरा होगा जो आरम्भ करेगा एक नया युग।”
———————————-
स्थान-राजनगर एयरपोर्ट।
समय- 6:40Pm
ध्रुव एयरपोर्ट की तरफ बढ़ रहा था , पर हमेशा की तरह उसके शरीर पर चुस्त फाइटिंग ड्रेस नहीं थी बल्कि ढीले ढाले कपड़े थे। बढ़ी हुई दाढ़ी और हैट, बचा हुआ चेहरा उसके काले चश्मे ने ढ़क रखा था।गले में लटकते हुए हेडफोन्स। बदली हुई चाल। कोई कह नही सकता था कि यही है सुपर कमांडो ध्रुव।
ध्रुव अपना टिकट और पासपोर्ट लेकर काउंटर पर पहुँचा। काउंटर पर बैठी महिला ने ध्रुव का स्वागत किया-
“Good Evening Sir! May I see your ticket please.”
ध्रुव-“yeah sure!”
“ध्रुव… right!”-औरत ने पहले ध्रुव को देखा फिर उसके पासपोर्ट को।
ध्रुव-“yes! ध्रुव मिश्रा”
ध्रुव लगातार उस औरत को घूर रहा था।
“Mr. Dhruva…”
ध्रुव जैसे नींद से जागा-“हूँ… हाँ, बोलिये।”
“Mr ध्रुव आप लेट है , ल्योन जाने वाली फ्लाइट बस पाँच मिनट में टेकऑफ करने वाली है।”
ध्रुव-“अभी तो है ना फिलहाल , पाँच मिनट के लिए।”
औरत ने टिकट और पासपोर्ट ध्रुव की तरफ बढ़ाते हुए कहा-“हाँ पर पाँच मिनट के बाद नहीं। please be sure to hurry up.”
” Nice dress by the way.” ध्रुव ने टिकट लेते हुए कहा और कॉउंटर से दूर बढ़ गया।
“IDIOT” – ध्रुव ने दूर जाते हुए उसकी आवाज सुनी और हल्के से मुस्कुरा उठा।
ऐसा करना ध्रुव के लिए जरूरी था , क्योंकि अगर कोई बाद में पूछताछ करता तो किसी को भी सुपर कमांडो ध्रुव का ख्याल सपने में भी नही आता।
कुछ देर में फ्लाइट फ्रांस के शहर ल्योन की तरफ उड़ान भर चुकी थी।
————————————–
Story Continues in – The Death Pattern [Chap 2-FRANCE]

धन्यवाद

Written By – Akash Pathak for Comic Haveli

Our social links :

website- www.comichaveli.com
Twitter-http://twitter.com/comichaveli
Instagram-http://instagram.com/comichaveli
Facebook-http://www.facebook.com/comichaveli
Pinterest-http://pinterest.com/comichaveli
subscribe- http://www.youtube.com/c/ComicHavelis

Disclaimer – These stories are written and published only for entertainment. comic haveli and writers had no intent to hurt feeling of any person , community or group. If you find anything which hurt you or should not be posted here please highlight to us so we can review it and take necessary action. comic haveli doesn’t want to violent any copyright and these contents are written and created by writers themselves. The content is as fan made dedications for comic industry. if any name , place or any details matches with anyone then it will be only a coincidence.

Disclaimer-
यह कहानी पूर्णतया काल्पनिक है , इसमें कुछ असली जगहों का उपयोग मात्रा प्रतीक के रूप में किया गया है। इस कहानी का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नही है।
————————

Facebook Comments

16 Comments on “The Death Pattern: Chapter 1 – The Beginning”

  1. वाह भाई, बहुत बढिया है।काफी दिनों बाद ध्रुव की कहानी आई है। मजा आ रहा है।अगले भाग का इंतजार रहेगा।

  2. Jabrdast bhai….
    Plot kafi shandar hai…
    Naagraj ka role kya hoga ye dekhna bahut jaruri hoga…
    Awesome keep it up buddy

  3. पैटर्न पैटर्न पैटर्न। इस कहानी की शुरुआत ही पैटर्न से हुई है। the death pattern . जैसा कि नाम से ही जाहिर है । मौत का पैटर्न । अब मौत किसकी होगी ये देखने लायक होगा। नाज़िम खान की या ध्रुव। इस कहानी के लिए सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा। कि ये कहानी सबसे हटकर होने वाली। आकाश भाई गज्जब के लेखक हैं। क्या ज़बरदस्त प्लाट है।

    मेरी तरफ 5 में से 5

    1. धन्यवाद तल्हा भाई।
      आशा करता हूँ आगे के भाग भी आपको पसंद आयें।

  4. Bohat hi jabardast tarike se likhi hui kahani hai ye. Jaise koi suspense thriller movie Hoti hai bilkul waise hi

  5. khnaa pdega.

    ……you are amazing ..aur aapky likhny ka tarika bi bhut jbrdast hy….image krny m khin bi koi problam nhi aa rahi….story adventure sy bri pdi hy …jismy bus mjaa hi mjaa hy …eyshi adventure khaniyo ko pdny ka mjaa hi alg hy …nicr bro

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.