The Death Pattern: Chapter 3 -【Alexandria】

THE DEATH PATTERN Chapter -3- Alexandria

स्थान-अलेक्सांद्रिया ,इजिप्ट ।

अलेक्सांद्रिया(Alexandria) मिस्त्र(Egypt) देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर है।
भूमध्य सागर (Mediterranean sea) के किनारों पर स्थित इस शहर को खुद Alexander ने 331 ईशा पूर्व बनाया था।

समय:-> 11:00AM

(फ्राँस और इजिप्ट के समय बराबर हैं)

चार घंटो के सफर के बाद ध्रुव अलेक्सांद्रिया के एयरपोर्ट पर पहुँच चुका था।
ध्रुव सीधा प्राइवेट पायलट्स के केबिन की तरफ बढ़ चला। इस समय उसके पास केवल एक बैग था।
अहमद जाकी के केबिन के आगे जाकर ध्रुव ने दरवाजा खटखटाया।
अंदर से आवाज आई-“कौन है?”
“ध्रुव, मुझे लगता है आप मेरे बारे में….”
ध्रुव की बात पूरी होने से पहले ही केबिन का दरवाजा खुला।
सामने एक हट्टा कट्टा नौजवान खड़ा था।उसने पूछा-“ध्रुव ?”
“हाँ!”- ध्रुव ने जवाब दिया।
“अंदर आइए, ल्योन से मुझे इंस्पेक्टर वेरा का फोन आया था।आप शायद कोई जानकारी चाहते हैं।”-अहमद ने कहा।
ध्रुव केबिन में आ गया। केबिन बहुत ही सुंदर और साधारण तरीके से सजाया गया था।
कुर्सियों पर बैठने के बाद अहमद ने पूछा-“तो बताइए ध्रुव , मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ।”
ध्रुव-“आप ल्योन में हुए प्लेन हादसे…….”
“मैं उस बारे में पुलिस को कई बार बयान दे चुका हूँ।मैं केवल उन छः लोगों को ल्योन से यहाँ लाया था, इससे ज्यादा मैं कुछ भी नहीं जानता।”-अहमद ने झुँझलाते हुए कहा।
“जी मैं बस आपसे एक ही सवाल पूछूँगा।”-ध्रुव ने कहा।
“पूछिये”- अहमद ने बेफिक्री से कहा।
ध्रुव ने अपने बाबा रघुराम की तस्वीर दिखाते हुए कहा-“इन्हें तो आप पहचानते होंगे?”
अहमद-“जी हाँ, ये भी उन्हीं में से एक थे।”
ध्रुव-“दरअसल मुझे इनके बारे में ही पता करना था।आपने इन्हें अलेक्सांद्रिया के एयरपोर्ट पर छोड़ा , तो इसके बाद ये लोग कहाँ गए, क्या आप इस बारे में मुझे कुछ बता सकते हैं।”
“जी नहीं। मेरा काम केवल इन्हें एयरपोर्ट तक लाना था। “-अहमद ने संछिप्त उत्तर दिया।
ध्रुव-“कोई और बात जो आपको अजीब लगी हो?मसलन उन लोगों के आपस में कैसे संबंध थे, क्या वो लोग आपस में बातें कर रहे थे?”
अहमद-“आप कितने भी सवाल कर लें , Mr. ध्रुव मेरा एक ही जवाब है- मुझे कुछ नही पता। मैं केवल एक पायलट हूँ और मेरे यात्री क्या करते हैं, कहाँ जाते हैं मुझे इससे कोई मतलब नहीं।”
ध्रुव वापस जाने लगा कि अहमद ने उसे टोका-” आप यहाँ के टूर गाइड्स से पूँछ सकते हैं , इतने बड़े शहर को बिना टूरिस्ट गाइड्स के घूमना बहुत कठिन है। अगर कोई पहली बार आ रहा है तो ये और भी मुश्किल हो जाता है। इसलिए वहाँ आपको जरूर हेल्प मिल जाएगी।”

“जी शुक्रिया!”-कहते हुए ध्रुव बाहर निकल गया।
ध्रुव एयरपोर्ट के बाहर आ गया। बाहर काफी भीड़ थी। दोपहर के बारह बजे थे और सूरज का प्रचंड तेज साफ महसूस हो रहा था।
कुछ अफसर एयरपोर्ट के बाहर अपनी ड्यूटी कर रहे थे। ध्रुव उनमें से एक की तरफ बढ़ने लगा।
ध्रुव ने उससे पूछा-“हेलो सर! आई एम ए टूरिस्ट । क्या यहाँ आस पास कोई टूरिस्ट गाइड्स मिलेंगे।”
ऑफिसर ने ध्रुव की तरफ बिना कोई ध्यान दिए एक बड़ी सी बिल्डिंग की तरफ इशारा किया-“वहाँ आपको गाइड्स मिल जाएँगे।”
ध्रुव ने उस बिल्डिंग पर लगे बोर्ड को ध्यान से देखा । उसपर लिखा था- Alexandria Tourist Services ।
ऑफिसर के बर्ताव को देखते हुए ध्रुव ने ज्यादा पूछना ठीक नहीं समझा।
Alexandria Tourist Service उस शहर की एकमात्र टूरिस्ट एजेंसी थी। दरअसल अलेक्सांद्रिया की गवर्मेंट ने सारे टूरिज्म बिज़नेस को अपने अंडर करने के लिए ऐसा किया था। कोई भी टूरिस्ट अपनी आई डी दिखा कर टूर गाइड्स ले सकता था।
कुछ देर बाद ध्रुव वहाँ के मैनेजर के केबिन में बैठा था।
“नो सर! रघुराम के नाम से कोई भी आदमी पिछले एक महीने में यहाँ नहीं आया है।”-मैनेजर ने कंप्यूटर स्क्रीन को देखते हुए कहा।
“ओके !क्या आप थोड़ी और डिटेल…”-ध्रुव ने कहा।
मैनेजर-“देखिए मिस्टर ध्रुव!आपकी रिक्वेस्ट के कारण मैं आपको पहले ही काफी जानकारी दे चुका हूँ, इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कर सकता।”
ध्रुव-“पर ये आर्गेनाइजेशन तो इकलौती है ना इस शहर में? जो टूरिस्ट यहाँ आयेंगे उन्हें गाइड्स तो चाहिए ही।”
मैनेजर-“जी हाँ ये टूरिस्ट गाइड्स उपलब्ध कराने वाली एकमात्र आर्गेनाईजेशन है , पर कई बार गाइड्स बाहर भी मिल जाते हैं।”
ध्रुव-“मतलब?”
मैनेजर ने समझाने वाली मुद्रा में बोलना शुरू किया-” देखिए मिस्टर ध्रुव, अलेक्सांद्रिया एक टूरिज्म सिटी है ,और हर ऐसी सिटी में बेरोजगारों के लिए सबसे आसान होता है टूरिस्ट गाइड्स बनना। पर सब लोग इस आर्गेनाईजेशन में नहीं आ सकते। आपको इस शहर की गलियों में ऐसे लोग अक्सर मिल जाएंगे जो आपके गाइड बनने को तैयार होंगे। कई बार कुछ कम पैसों में भी।इनमें से कुछ ये काम पार्ट टाइम करते हैं।”
ध्रुव-“ओह!यानी कि कई बार लोग बाहर से भी गाइड्स ले लेते हैं?”
मैनेजर-“हाँ। और वो लोग अपने कस्टमर्स की डिटेल्स भी नहीं रखते।”
“आपकी मदद के लिए शुक्रिया।”-ध्रुव ने उठते हुए कहा।-“मुझे भी एक गाइड की जरूरत पड़ेगी तो …..”
ध्रुव की बात पूरी होने से पहले ही मैनेजर ने बोला-“आप बाहर काउंटर पर रेजिस्ट्रेशन करा लीजिये और वहाँ से आपको एक गाइड मिल जाएगा।”

ध्रुव ने बाहर काउंटर पर रजिस्ट्रेशन कराया।
वहाँ बैठे एजेंट ने ध्रुव को एक बुकलेट दी और बोला-“हमारे प्लान में ये सारे जगह शामिल हैं।”
ध्रुव बुकलेट को देखने लगा और एजेंट फॉर्म भरने में व्यस्त हो गया।
कुछ देर बाद एजेंट ने पूछा-“सर क्या आप कैब भी बुक कराना चाहेंगे या आपके पास कोई कार है?”
ध्रुव-“जी नहीं मेरे पास कोई भी कार नहीं है, आप एक कैब बुक कर दीजिए।”
एजेंट ने ध्रुव को एक प्रिंटेड कार्ड दिया -“प्रोसेस पूरा हो चुका है, मिस्टर ध्रुव। आपकी गाइड हैं-नबीला मकरम।गाइड होने के साथ वह एक स्किल्ड ड्राइवर भी हैं।”
एजेंट ने एक फोन किया और कुछ ही देर में एक लड़की उस केबिन में आई।
एजेंट ने ध्रुव से उसका परिचय कराया-“मिस्टर ध्रुव ये हैं आपकी गाइड-नबीला मकरम और नबीला ये हैं आपके क्लाइंट Mr ध्रुव।”
ध्रुव ने नबीला को ध्यान से देखा। नबीला ने मिस्र की पारंपरिक पोशाक पहन रखी थी ।लगभग 6 फुट लंबाई नबीला को बाकियों से थोड़ा अलग बनाती थी ।उम्र लगभग 25 साल।हाथ हथेलियों तक ढके हुए थे।सर भी बुर्के से ढका हुआ था।
नबीला ने मुस्कुराते हुए ध्रुव की तरफ हाथ बढ़ाया -“हैल्लो मिस्टर ध्रुव , अलेक्सांद्रिया के खूबसूरत और रहस्यमय शहर में आपका स्वागत है।”
ध्रुव ने भी हाथ मिला कर औपचारिकता पूरी की।
उस समय ध्रुव नहीं जानता था कि नबीला से उसकी ये मुलाकात इस कहानी को एक नया मोड़ देने वाली थी।
नबीला ध्रुव के साथ बाहर पार्किंग में खड़े कैब्स की तरफ बढ़ने लगी।
नबीला-“कैब की ये सर्विस केवल शाम 7 बजे तक है जो कि सुबह आठ बजे फिर शुरू होगी। रात में आपको किसी जगह रुकना पड़ेगा , जैसे कोई होटल या इन(inn)। वैसे तो एजेंसी भी ये सर्विस ऑफर करती है पर मैं आपको कुछ सस्ती और अच्छी जगहें बता सकती हूँ।”
ध्रुव ने कोई जवाब नहीं दिया केवल सर हिला दिया।
नबीला ने बोलना जारी रखा-“मैं आपको कुछ लोगों के नाम बता सकती हूँ जो रात में आपको कुछ अच्छी जगहें दिखा सकते हैं । वैसे भी किसी शहर की रंगीनियत का अंदाजा उसकी रात से ही तय होता है।”
ध्रुव-“अभी तो उसकी कोई जरूरत नहीं।”
तब तक दोनों कैब तक पहुँच चुके थे। नबीला ने कैब को पार्किंग से निकाला और जल्द ही दोनों कैब में बैठे अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रहे थे।
ध्रुव खिड़की से बाहर अलेक्सांद्रिया की सड़कों को देख रहा था। वास्तव में तो उसके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।कैब में एक खामोशी छाई हुई थी जिसे नबीला ने ही तोड़ा-” अभी हम अलेक्सांद्रिया के फेमस ‘रोमन थिएटर’ जा रहे हैं।”


ध्रुव ने इस बार भी कोई जवाब नहीं दिया , उसने केवल एक बार नबीला की तरफ देखा और वापस खिड़की से बाहर देखने लगा।

कुछ देर तक कैब यूँ ही सड़को पर दौड़ती रही, जबकि ध्रुव अभी भी ख्यालों में ही खोया हुआ था ।
नबीला ने एक बार फिर बोला-“आप हमेशा ही इतने शांत रहते हैं या इस शहर की खूबसूरती ने ही आपके होश छीन लिए हैं।”
इस बार ध्रुव ने भी मुस्कुरा कर ही जवाब दिया-“ऐसा कुछ नही है।मैं कुछ सोच रहा था।”
नबीला-“सैर सपाटा लोगों को चिंताओं से मुक्त करता है, कमसे कम इस समय तो आपको चिंता मुक्त होना चाहिए,बिल्कुल फ्री माइंड।”
ध्रुव -“तुम मुझे ‘आप’ की जगह ‘तुम’ ही कहो।”
“जैसा आप…..सॉरी , जैसा तुम ठीक समझो।”-नबीला ने मुस्कुराते हुए कहा।
कुछ ही देर में दोनों रोमन थिएटर पहुँच गए।
रोमन थिएटर या रोमन अखाड़े को दूसरी शताब्दी में बनवाया गया था।
नबीला ने ध्रुव को उस जगह के बारे में बताना शुरू किया-“
इस थिएटर को कुल तेरह स्तरों पर बनाया गया था, यहाँ पर लगभग आठ सौ लोगों के बैठने की जगह है जिसे कि मार्बल से बनाया गया है।”
ध्रुव ध्यान से उस जगह को और आस पास की जगहों को देखने लगा।
ध्रुव ने एक ओपन एयर कॉफी शॉप की तरफ इशारा करते हुए कहा-“वहाँ चलते हैं।”
नबीला-“ठीक है”
दोनों ने कॉफी आर्डर की ।कुछ देर बाद ध्रुव बोला-“तुम यहीं रुको मैं थोड़ी देर में आता हूँ।”
नबीला का जवाब सुने बिना ही ध्रुव निकल गया।
ध्रुव ने आस पास कई जगहों पर रघुराम के बारे में पूछा पर कोई नतीजा नहीं निकला। ध्रुव वापस कॉफी शॉप में पहुँचा।
ध्रुव-“अब चलते हैं यहाँ से, अगली जगह पर।”
नबीला ने उठते हुए कहा-“अगर कोई बात है तो तुम मुझे बता सकते हो।”
“नहीं, ऐसी कोई बात नहीं।”-ध्रुव ने बिना नबीला की तरफ ध्यान देते हुए कहा।
शाम तक दोनों कई जगहों पर गए। ध्रुव ने हर जगह पूछताछ की पर कोई नतीजा नहीं निकला। नबीला ने कई बार ध्रुव से इस बारे में पूछा पर ध्रुव ने हर बार बात टाल दी।
शाम तक नबीला वापस चली गयी और ध्रुव ने पास ही के एक होटल में रूम बुक करा लिया।
देर रात तक ध्रुव लोकल न्यूज़ वेबसाइट्स खंगालता रहा पर यहाँ भी उसे कुछ हाथ नहीं लगा।
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उसी समय राजनगर में-
समय-:11:00PM(भारतीय समयानुसार)
श्वेता वापस घर लौट रही थी।
श्वेता(मन में)-“आज का सारा दिन ही खराब है, एक तो ऑटो की हड़ताल ऊपर से स्कूटी भी खराब।भैया भी यहाँ नही है वरना वो ही मुझे पिक कर लेता।मम्मी -पापा को स्कूटी खराब होने के बारे में बताऊँगी तो बेवजह परेशान होंगे।”
थोड़ी देर बाद श्वेता ने महसूस किया कि कोई उसका पीछा कर रहा था। कन्फर्म करने के लिए श्वेता ने जानबूझकर थोड़ी देर के लिए गलत रास्ता लिया । अजनबी उस रास्ते पर भी श्वेता के पीछे था।

श्वेता(मन में)-“लगता है मुझे अकेली जानकर मेरे पीछे पड़ गया है, इससे निपटने के लिए मुझे चंडिका बनना पड़ेगा और उसके लिए मुझे छुपने की जगह चाहिए।आगे की किसी अंधेरी गली में ही ऐसा हो पायेगा।”
श्वेता अगली गली में मुड़ने वाली थी कि किसी ने उस अजनबी का रास्ता रोका। श्वेता ने भी ये देखा पर वो आगे की गली में मुड़ गयी।श्वेता ने चंडिका बनने से पहले झांककर देखा तो दोनों अभी भी आमने सामने खड़े थे। श्वेता ने अब चंडिका बनने की जरूरत नहीं समझी। उसने अगली बार झाँका तो दोनों वहाँ नहीं थे।
हैरानी के भाव लेते हुए श्वेता वापस घर पहुँच गयी।
घर पहुँचते ही श्वेता ने कॉल लगाई।
श्वेता-“हेलो , करीम?”
करीम-“हाँ बोलो श्वेता , क्या बात है , इतनी रात में क्यो फ़ोन किया?”
श्वेता-“मुझे कुछ पूछना था तुमसे, कल मिलोगे?”
करीम-“हाँ ,क्यों नहीं?पर बात क्या है?”
श्वेता-“कुछ नहीं।”
करीम-“अरे!!!क्या कुछ नहीं, कुछ तो बताओ।”
श्वेता-“मुझे भैया के बारे में बात करनी है। मुझे लगता है वो यहीं राजनगर में हैं।
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अलेक्सांद्रिया में अगली सुबह –
ध्रुव तैयार होकर होटल से निकला। नबीला उसे कैब के साथ निश्चित स्थान पर मिली।
“गुड मॉर्निंग , मिस्टर ध्रुव।”-नबीला ने मुस्कुराते हुए ध्रुव का अभिवादन किया।
” गुड मॉर्निंग टू यू टू।”-ध्रुव ने भी मुस्कुराते हुए कहा-“आज हमारी लिस्ट में सबसे पहली जगह कौन सी है?”
“जहाँ अलेक्सांद्रिया का इतिहास आज भी देखने को मिलेगा।”-नबीला ने कैब को स्टार्ट करते हुए कहा।
ध्रुव-“मतलब?”
“अलेक्सांद्रिया नेशनल म्यूजियम।”


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Alexandria national museum
“अलेक्सांद्रिया का शहर बहुत ही पुराना है”-नबीला ने म्यूजियम में घुसते हुए ध्रुव को बताया-“कई शताब्दियों तक ये इजिप्ट की राजधानी रहा है। किसी समय ये रोम का भी हिस्सा था। उन सब की झलक तुम्हें यहाँ देखने को मिलेगी।”
ध्रुव ध्यान से सारी चीजों को देख रहा था।
“ये क्या है?”-एक जगह पर रखे कुछ टुकड़ो को देखते हुए ध्रुव ने नबीला से पूछा।उन टुकड़ों पर कुछ पैटर्न्स बने हुए थे।
“ये कुछ टुकड़े है जो मरूग सभ्यता से संबंधित है।यहाँ अलेक्सांद्रिया में मरूग जाति के देवता मोरा का एक मंदिर है। वहाँ की खुदाई में ये टुकड़े मिले थे।”- नबीला ने बताया।
“पर ये हैं क्या?”
“Patterns of sky.”
“मतलब?”-ध्रुव ने पूछा।
नबीला-“इन टुकड़ों पर नक्षत्रों को बनाया गया है। मरूग सभ्यता पैटर्न्स में बहुत विश्वास रखती थी। उन्होंने ही आकाश में दिखने वाले इन नक्षत्रों को इन टुकड़ों पर उकेरा है।”

*नक्षत्र — तारों का एक समूह जो एक निश्चित पैटर्न में आकाश में एक आकृति बनाते है।
“वैसे देवता मोरा का मंदिर भी है हमारी लिस्ट पर।”-कुछ देर बाद नबीला ने कहा।
थोड़ी देर बाद दोनों बाहर आ गए। ध्रुव ने नबीला को कैब के पास भेज दिया और वहाँ के कर्मचारियों और लोकल्स से पूछताछ करने लगा।
यहाँ भी उसे कोई जानकारी नहीं मिली। वह वापस कैब के पास आ गया।
नबीला कैब के बाहर ही खड़ी थी।
ध्रुव -“आओ चलें।”
नबीला अपनी जगह खड़ी ही रही।
ध्रुव ने हैरान होते हुए पूछा-“क्या हुआ?”
नबीला-“तुमको पता है , इस शहर में पैंतीस लाख लोग रहते हैं।”
ध्रुव-“मतलब।”
नबीला-“उन पैंतीस लाख लोगों में से किसी एक इंसान को ढूँढना लगभग नामुमकिन है वो भी बिना किसी के मदद के।”
ध्रुव-“तुम्हें कैसे पता…….”
ध्रुव की बात खत्म होने से पहले ही नबीला ने बोला-“जिन लोगों से तुम पूछताछ कर रहे थे , उन्हीं में से एक से पूछा।आखिर बात क्या है?अगर मुझे बता दोगे तो शायद मैं कुछ हेल्प कर सकूँ।”
ध्रुव ने नबीला को बताना ही ठीक समझा। उसने नबीला को एक मनगढंत कहानी सुनाई-” कुछ दिनों पहले मेरे बाबा एक पैसेंजर्स फ्लाइट से अलेक्सांद्रिया आये थे। उसके बाद से उनका कुछ पता नहीं चला।बस उन्हीं के बारे में मुझे पता करना था।”
नबीला ने सर हिलाते हुए कहा-“अच्छा , तो ये बात है।”
ध्रुव-“हाँ, और मुझे लगता है तुम इसमें मेरी मदद भी कर सकती हो।”
नबीला-“जरूर, मुझे खुशी होगी । पर मैं किस तरह से मदद कर सकती हूँ?”
ध्रुव-“तुमने कहा था तुम कुछ लोकल गाइड्स को जानती हो। उनसे पूछने पर शायद कुछ पता चल सके।”
नबीला ने सहमति में सर हिलाया।
ध्रुव -“पर जो साइट्स इस लिस्ट में है,हमें वहाँ भी जरूर ढूँढना चाहिए। उसके बाद ही मैं कुछ और सोचूँगा।”
नबीला ने कैब की ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोला-“हाँ, जरूर।”
शाम तक ध्रुव खोजबीन करता रहा पर उसे कुछ भी पता नहीं चला।
नबीला-“हो सकता है तुम्हारे बाबा यहाँ आते ही किसी और फ्लाइट से कहीं और चले गए हों।”
ध्रुव ने बेफिक्री से कहा-“हो सकता है।”
ध्रुव जानता था कि उसके बाबा इस शहर में रुके थे , क्योंकि उसे पता था कि उन्होंने अगली फ्लाइट पकड़ी थी। पर इस समय नबीला को ज्यादे डिटेल्स बताना उसने जरूरी नहीं समझा।
आखिरकार ध्रुव को एक क्लू मिल ही गया।
एक टैक्सी ड्राइवर से पता चला कि उसने रघुराम को मेडिटेरियन सी(भूमध्य सागर) की तरफ जाते हुए देखा था। पर उसे भी पूरी तरह से यकीन नही था।

संयोग से उनकी लिस्ट पे सबसे आखिरी जगह थी मेडिटेरियन सी।


नबीला और ध्रुव दोनों वहाँ पहुँचे।
नबीला-” तुमको पता है ध्रुव , इस जगह को सबसे लास्ट में क्यों रखा गया है?”
ध्रुव-“नहीं।”
नबीला-” क्योंकि यहाँ से डूबते सूरज का नजारा बहुत ही मनमोहक होता है। डूबता हुआ सूरज लोगों के दिलों में उम्मीद पैदा करता है।”
कहते कहते नबीला भावुक हो गयी।
ध्रुव-“लगता है यहाँ से बहुत यादें जुड़ी हैं तुम्हारी?”
नबीला-“हाँ। बचपन में सब मुझे बहुत चिढ़ाते थे। कोई मुझे लड़का कहता तो कोई मुझे भालू। उनकी बातें सुनकर मैं रोती थी। तब मेरे पापा मुझे अक्सर यहाँ लाते थे। डूबता हुआ सूरज मुझे उम्मीद देता था। मेरे पापा इस दुनिया में नहीं है अब , बस इस जगह आकर मुझे अपने बचपन और पापा की याद आ गई।”
ध्रुव ने कुछ नहीं कहा। थोड़ी देर बाद नबीला ने कहा-“आई एम सॉरी ध्रुव, फालतू में ही तुम्हें परेशान किया।”
ध्रुव-“अरे।ऐसा कुछ नहीं है।इट्स ओके।”
नबीला ने एक तरफ इशारा करते हुए कहा-“पर पहले हम वहाँ चलते हैं, देवता मोरा के मंदिर।वहाँ गाड़ियाँ नही जाती तो हमें पैदल ही जाना होगा।”
“चलो”-ध्रुव ने कहा और दोनों पैदल ही उस तरफ बढ़ चले।
देवता मोरा का मंदिर पत्थरों को तराश कर बनाया गया था। उस समय तक केवल इक्के दुक्के लोग ही वहाँ थे।
पत्थरों पर पैटर्न्स बनाये गए थे। नक्षत्रों, ग्रहण चंद्रमा की विभिन्न अवस्थाओं और कई तरह के चित्रों से दीवार भरी हुई थी।
“इन दीवारों पर प्रकृति में देखे जाने वाले सारे पैटर्न्स हैं।इस मंदिर को लगभग पहली शताब्दी में ही बनाया गया था।”-नबीला ने बताया।
मोरा की पंद्रह फीट की मूर्ति मंदिर के मध्य भाग में थी। मूर्ति के सामने एक बहुत बड़ा जल कुंड था। मूर्ति और जल कुंड के चारों तरफ छोटी छोटी कई मूर्तियां थी।
ध्रुव -“ये मरूग जाति के लोग पैटर्न्स में कुछ ज्यादा ही बिलीव करते हैं।”
नबीला-“हाँ , दरअसल इस धर्म की नींव ही पैटर्न्स पर पड़ी थी। “
ध्रुव-“पर मैंने कभी इस धर्म या जाति के बारे में नहीं सुना।”
नबीला ने हँसते हुए कहा-“ये दुनिया बहुत बड़ी है ध्रुव , कोई भी इंसान केवल एक जन्म में सब कुछ नहीं जान सकता।वैसे तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूँ की मरूग जाति अभी भी अस्तितव में है । कई लोग इसे केवल जनजाति मानते हैं पर ऐसा नही है। मरूग जाति की अपनी अलग सभ्यता रही है जिसका प्रतीक है यह मंदिर।”
ध्रुव-“ओह! अच्छा तो इस मंदिर के बारे में बताओ।”

नबीला-“मरूग लोगों के अनुसार उनके केवल दो देवता हैं।मोरा और सोरा। मोरा पृथ्वी की रक्षा करते हैं और देवता सोरा पृथ्वी के बाहर। उनके अनुसार स्वर्ग नरक सब एक ही स्थान पर है। स्वर्ग में ही अन्य देवता रहते है जिन्हें तरह तरह की शक्तियाँ प्राप्त हैं पर उनके राजा या मुखिया हैं देवता सोरा। और उन देव गणों की रक्षा करते हैं देवता सोरा। देवता मोरा पृथ्वी की रक्षा करते हैं। उनका मंदिर भी यहाँ है क्योंकि यह पृथ्वी का मध्य स्थान है। भूमध्य सागर।
इस कुंड को देख रहे हो न। प्राचीन समय में देवता मोरा के बहुत ज्यादा उपासक थे। कहते है पहले इस कुंड में जल नहीं था। उनके उपासक सागर से हथेली में जल भरकर लाते थे और इसमें डालते थे । कुछ ही वर्षो में यह कुंड लबालब भर गया और आज भी भरा ही हुआ है।”
ध्रुव ने हैरानी से पूछा-“तो क्या इसमें भूमध्य सागर का ही जल है?”
नबीला-“हाँ।”
उसी समय दो लोगों ने मध्य कक्ष में प्रवेश किया।तब तक नबीला और ध्रुव के अलावा बाकी लोग वहाँ से जा चुके थे।
“हैल्लो ध्रुव।”-दोनों ने एक साथ ही बोला।
ध्रुव ने वापस मुड़ कर दरवाजे की तरफ देखा। दोनों के हाथों में हंटर थे। हंटर रबर के बने थे जिसके लकड़ी के बने हैंडल उनके हाथों में थे।
“अपनी मौत को इतने ध्यान से नहीं देखा जाता ध्रुव।”-उनमें से एक बोला।
तब तक दोनों ध्रुव के पास पहुँच चुके थे।
उनमे से एक ने ध्रुव पर वार किया। उसका हंटर ध्रुव के कमर के चारों तरफ लिपट गया। ध्रुव के शरीर को बिजली के हल्के झटके लगने लगे।
“शॉक के हंटर से बचना मुश्किल है ध्रुव।”-उसने बोला।
उसी समय दूसरे ने अपने हंटर से वार किया।उसका हंटर ध्रुव के गले के चारों तरफ लिपट गया। ध्रुव का दम घुटने लगा।
“चॉक का हंटर जिसके गले मे लिपट जाता है , उसकी साँसे रुक जाती है।”- दूसरे ने कहा।
शॉक और चॉक के वार अचानक हुए जिससे ध्रुव उन दोनों के हन्टर्स में फँसा हुआ था। पर जल्द ही ध्रुव संभला । उसने एक सधी हुई किक शॉक के पेट पर मारा। शॉक दूर जा गिरा पर उसका हंटर अभी भी ध्रुव के कमर में लिपटा हुआ था।
उधर चॉक का हंटर अभी भी ध्रुव के गले में लिपटा हुआ था। जिससे निकलने के लिए ध्रुव को काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी।
उसी समय नबीला ने एक पत्थर चॉक पर मारा। वो एक पल के लिए पीछे मुड़ा , उतना समय ध्रुव के लिए काफी था। जल्द ही ध्रुव ने दोनों के हन्टर्स अपने शरीर से छुड़ा लिए। पर आश्चर्यजनक रूप से दोनों के हंटर वापस उनके हाथों में चले गए।
दोनों में फिर हमला किया। इस बार ध्रुव सावधान था। पर शॉक और चॉक भी बहुत फुर्तीले थे। नबीला अभी भी कुंड के पास ही खड़ी थी। चॉक ने नबीला पर हमला कर दिया । अब ध्रुव को नबीला का भी बचाव करना था।
इधर नबीला का बचाव करते करते ध्रुव असावधान हो गया। शॉक का हंटर एक बार उसके चारों तरफ लिपटा हुआ था।
उधर चॉक ने नबीला पर हमला कर दिया।

आश्चर्यजनक रूप से उसने नबीला को उठा कर कुंड के बीच में फेंक दिया।
” नबीला!!!!”-ध्रुव चिल्ला उठा।
इस बार उसने किक मारी तो शॉक उछल कर चॉक कर ऊपर जा गिरा।
उधर नबीला पानी में अपने हाथ पाँव मार रही थी। उसकी हरकतों से साफ पता चल रहा था कि उसे तैरना नहीं आता।
शॉक और चॉक अपनी हार देख कर मंदिर से बाहर भागने लगे।ध्रुव ने उनके पीछे जाने की जगह कुंड में छलाँग लगा दी।
फेफड़ों में पानी घुसने की वजह से नबीला बेहोश हो गयी थी। कुछ ही देर में नबीला को लेकर ध्रुव वापस निकला।
ध्रुव ने जल्द ही नबीला को पास के हॉस्पिटल में भर्ती करवाया।
थोड़ी देर में नबीला को होश आया।
ध्रुव अभी भी उसके पास ही बैठा था।
“क्या हुआ था ध्रुव?वो दोनों कहाँ हैं?”-नबीला ने कराहते हुए पूछा।
“वो दोनों तो भाग गए। पर तुम चिंता मत करो , डॉक्टर तुम्हें कुछ देर में डिस्चार्ज कर देंगे।”-ध्रुव ने कहा।
“पर तुम कहाँ जा रहे।”-नबीला ने पूछा।
ध्रुव-“तुम तो जानती हो नबीला, मुझे अभी बहुत काम है।”
नबीला-“तुम चाहो तो मैं किसी और गाइड का पता बता सकती हूँ।”
ध्रुव-“नहीं अब उसकी कोई जरूरत नहीं। मैं नही चाहता उसकी जान भी मेरी वजह से खतरे में पड़े।और मेरी अगली फ्लाइट भी कल सुबह की है।”
ध्रुव बिना नबीला का जवाब सुने ही वहाँ से चला गया।
ध्रुव वहाँ से सीधा होटल पहुँचा। ठीक आठ बजे उसने होटल से एक फ़ोन किया।
फ़ोन ल्योन में वेरा के पास लगा जो कि एक पब्लिक बूथ पर खड़ी थी।
ध्रुव-“मैंने जो बोला था वो पता चला?”
वेरा-“हाँ। तंजानिया।”
ध्रुव-“ओके”
इसके बाद ध्रुव ने तुरंत ही फ़ोन कट कर दिया।
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अगली सुबह –
समय -4:00AM
अलेक्सांद्रिया के एक खंडहर जैसे घर में हामिद अकेला था। उसके सामने मेज पर कुछ लैपटॉप रखे थे , जिनमें वो लगातार देख रहा था।
तभी एक आदमी वहाँ आया।
हामिद-“बोलो क्या खबर है?”
“ध्रुव ने कल रात आठ बजे ल्योन में फ़ोन किया था। फ़ोन किसी पब्लिक बूथ का था। ध्रुव ने किससे क्या बात की कुछ पता नहीं चल पाया।”
हामिद-“ठीक है तुम जाओ।”
हामिद वापस अपने काम में जुट गया।
लगभग 6 बजे वहाँ नबीला आई।
नबीला-“हैल्लो हामिद, काम हुआ?”
हामिद ने हैरानी से कहा-“अरे बॉस आप?”
“हाँ मैं।”- नबीला के मुँह से अब नाजिम की आवाज आ रही थी।

नबीला ने अपना बुर्का उतार दिया उसके बाद अपने नकली बाल। अब नबीला का असली चेहरा साफ दिख रहा था।
नबीला कोई और नहीं नाजिम ही था।
नाजिम-“आखिरकार हमारे मिशन ‘द डेथ पैटर्न’ का अगला पड़ाव भी पार हो गया।”
उस समय नाजिम के होठों पर एक जहरीली मुस्कान तैर रही थी।
नाजिम -“राजनगर से कोई खबर”
हामिद-“नहीं बॉस , वहाँ सब कुछ एकदम परफेक्ट है।कोई दिक्कत नहीं।”
ठीक उसी समय एक आदमी लगभग हाँफता हुआ आया।
“बॉस एक नई खबर है।”
नाजिम-“क्या?”
“ध्रुव मैक्सिको की जगह तंजानिया जा रहा है।”
——————————————-
अलेक्सांद्रिया से तंजानिया जाने वाली फ्लाइट तैयार थी।
ध्रुव अलेक्सांद्रिया से तंजानिया जाने के लिए फ्लाइट में बैठ चुका था।
उसकी बढ़ी हुई दाढ़ी अब उसके चेहरे पर नहीं थी।उसके चेहरे पर एक तेज था।
कुछ ही देर में फ्लाइट अपनी उड़ान भर रही थी जोकि ध्रुव को उसकी अगली मंजिल तक पहुँचाने वाली थी।
Story Continues in-
The Death Pattern ..
[Chap 4-TANZANIA]

धन्यवाद

Written By – Akash Pathak for Comic Haveli

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Disclaimer-
यह कहानी पूर्णतया काल्पनिक है , इसमें कुछ असली जगहों का उपयोग मात्रा प्रतीक के रूप में किया गया है। इस कहानी का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नही है।
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6 Comments on “The Death Pattern: Chapter 3 -【Alexandria】”

  1. ये स्टोरी जैसे जैसे आगे बढ़ती जा रही है । सस्पेंस और रोमांच और भी ज़्यादा बढ़ता ही जा रहा है। इस पार्ट की शुरुआत हुई ध्रुव के अलेक्सन्द्रिया पहुंचने से । ध्रुव बेचारा एक मिनट भी चैन से सांस नही ले पा रहा है। सिर्फ यहां से वहां, वहां से वहां घूमता फिर रहा है लफ़ंगा परिंदा बनकर । हीहीही। पर सच बताऊं तो मुझे आतंकहर्ता नागराज की याद आ गयी। फर्क सिर्फ इतना है कि नागराज आतंकवाद मिटाने के लिए इधर उधर भटकता रहता है और ध्रुव अपने बाबा की खोज में भटक रहा है । ध्रुव और अहमद जाकी की बात चीत भी अछि लगी। लेकिन अहमद भी ध्रुव की कोई मदद नही कर सका । ध्रुव को अलेक्सांद्रिया के टूरिस्ट सर्विस की एजेंसी में नबीला मिली। नबीला के बारे में पढ़कर ऐसा लगा कि ये शायद ध्रुव की कोई मदद ज़रूर करेगी पर वो तो नाज़िम निकला । और ध्रुव एक बार भी उसपे शक नही कर सका । ये मुझे अजीब लगा। खैर । हो सकता है ध्रुव अपने बाबा को जल्द से जल्द ढूंढने के चक्कर में और किसी चीज़ पर ध्यान न दे सका।
    पर एक बात कहना चाहूंगा ये नाज़िम- बन्दा है तो बहुत खतरनाक । जैसे जैसे स्टोरी बढ़ रही है इसके शातिर दिमाग के खतरनाक षड्यंत्र देखने को मिलते जा रहे हैं।
    एक अहम बात कहना चाहूंगा। ये जो काहानी के बीच बीच मे पिक लगी हुई है , ये चीज़ मुझे बहुत अच्छी लगी बीच बीच मे उन जगहों की पिक्चर्स देखकर बहुत मज़ा आया ( हीहीही। मैं भी लगाऊंगा अब तो।)। और फिर ध्रुव और नबीला उर्फ नाज़िम की यात्रा जब शुरू हुई तब मज़ा आ गया। इस कहानी के बहाने मिस्र के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला जो कि बहुत अच्छी बात है। और आखिर में टपोरी टाइप गुंडे ( हाँ टपोरी ही कहूंगा । क्योंकि बड़ी जल्दी हार गए बन्दे। ) । खैर हमारे प्यारे ध्रुव के सामने उनकी औकात भी नही थी जो टिक जाते। बीच मे राजनगर का भी सीन देखने को मिला। और इस सीन ने एक नया सस्पेंस खड़ा कर दिया है। क्या ध्रुव सच मे राजनगर में है ? तो फिर अलेक्सांद्रिया में कौन है ? अगले पार्ट में पता चलेगा। मरूग जाती भी रहस्मई है। अब बस अगले भाग का इंतज़ार है जिसमे तंजानिया के बारे में जानने को मिलेगा। और हां उसमे भी जगह जगह पिक्स लगाना मत भूलियेगा। धन्यवाद ।
    और हां । अगला पार्ट एक हफ्ते से पहले दे दीजियेगा। एक बार फिरसे धन्यवाद।
    वैसे तो मैंने इस पार्ट में गलतियां खोजने की जीतोड़ कोशिश की पर एक भी गलती न मिली इसलिए इस स्टोरी को मेरी ओर से10 में से 10 पॉइंट खड़े। तीसरी बार धन्यवाद।

  2. same to same wahi word jo talha ji ny khy……talha ji kahani ki tarif m itna kuch khy dete hy ki hum logo ky liy kuch bctha hi nhi….. ( are talha ji hmaary loy bi kuch shod diya karo ) kahani ki jitni taarif ki jaaye utni kam.
    .isy tho raj comics m shamil karna chahihy….agr isy baaki log bi pdege tho unhy bi padkar bhut mjaa aayga

    mujy ik galti mili…..hahaha ..bich m nbila ki jgha vyraa ka naam use kar diya

    10 out of 10 marks

    1. जब गलती आपने निकाल ही ली थी 10 में से 10 क्यों दिया।

  3. Bht hi supense badhta ja raha hai .
    Nazim.bht khatarnak lag raha hai wo magru jati ka lag raha hai mujhe .
    Shweta ka part kam tha per chalo entry to hui

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