The Death Pattern: Chapter 4 -【Tanzania】

THE DEATH PATTERN Chapter -4-Tanzania

स्थान-डोडोमा, तंजानिया।

समय-11:45 AM

ध्रुव अपनी अगली मंजिल तंजानिया की राजधानी डोडोमा पहुँच चुका था।
डोडोमा तंजानिया की राजधानी है, जिसकी वजह से सड़कों पर चहल पहल ज्यादे रहती है।
ध्रुव ने एयरपोर्ट के बाहर एक टैक्सी ली और डोडोमा के बाल सुधार गृह की तरफ चल पड़ा।
डोडोमा का बाल सुधार गृह बहुत ही पुराना था , उसकी हालत देख कर कोई भी बता सकता था कि वर्षों से उसकी मरम्मत नहीं हुई थी।
कुछ देर बाद ध्रुव वहाँ के वार्डन आदिल के आफिस में बैठा था।आदिल एक लगभग चालीस वर्ष का आदमी मालूम होता था। ध्रुव ने आदिल को अपना असली परिचय दिया।
आदिल ने हैरानी से ध्रुव को देखा-“बेशक…!बेशक ध्रुव, मैं तुम्हें नाजिम के बारे में जानकारी दे सकता हूँ। पर…”
ध्रुव-“क्या बात है, आदिल।”
आदिल-“कुछ नहीं, मेरा मतलब है अगर तुम्हें केवल यही जानकारी चाहिए थी तो तुम्हें ये दुनिया के किसी कोने में मिल सकती थी।केवल इसी जानकारी के लिए यहाँ इतनी दूर डोडोमा आने की क्या जरूरत थी।”
ध्रुव ने मुस्कुराते हुए कहा-“इंसान जो भी करता है उसके पीछे कोई न कोई वजह जरूर होती है।”
आदिल-“बेशक, उम्मीद करता हूँ तुम्हारे यहाँ आने के पीछे भी कोई खास वजह हो।”
ध्रुव-“खैर, आप मुझे नाजिम के बारे में बताइए।”
आदिल-“ये लगभग सात सालों पहले की बात है, उस समय मैं यहाँ का वार्डन नहीं केवल एक मामूली ऑफिसर था। उन दिनों एक चौदह साल के बच्चे को यहाँ लाया गया। उसका अपराध तो बहुत बड़ा था, पर नाबालिग होने के कारण उसे फाँसी की सजा नहीं सुनाई गई। वो लड़का कोई और नहीं नाजिम ही था।”
ध्रुव-“क्या अपराध किया था उसने।”
आदिल-“पचास लोगों की हत्या का।”
“क्या?”-ध्रुव ने हैरान होते हुए पूछा।
आदिल-“हाँ, उसने पचास लोगों को मार डाला था।”
ध्रुव-“अकेले?”
आदिल-“हाँ अकेले ही।”
ध्रुव-“पर क्यों ,कोई वजह तो रही होगी।”
आदिल-“हाँ, लोग कहते हैं मरूग लोगों और सागा लोगों के बीच कोई झगड़ा हुआ था। सागा लोगों ने कुछ मरूग लोगों के घरों में आग लगा दी थी, उसी कारण नाजिम ने रातों रात सागा लोगों को मार डाला।”
ध्रुव में हैरानी से पूछा-“तो क्या नाजिम भी एक मरूग है?”
आदिल-“हाँ!”
ध्रुव-“ओह!फिर आगे क्या हुआ?”
आदिल बताता गया-“नाजिम यहाँ लगभग एक साल तक था।शुरुआत में उसका बर्ताव बहुत ही अजीब था।”
ध्रुव-“अजीब?”
आदिल-“हाँ, वो अपने आप को देवता कहता था, कोई अगर ना कहे तो नाजिम उस पर हमला कर देता था।”

ध्रुव-“फिर क्या हुआ। वो नार्मल हुआ या नहीं?”
आदिल-“हुआ । लगभग छः महीनों की मेडिकल ट्रीटमेंट के बाद वो थोड़ा नार्मल हुआ। वह बाकी बच्चों के बीच घुल मिल का रहने लगा। पर शायद ऐसा नहीं था। लगभग एक साल बाद वह यहाँ से भाग गया।”
आदिल कुछ देर के लिए रुका और फिर कहने लगा-“उस दिन से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था और न ही उसके बाद कोई भागा है यहाँ से।वह केवल भागा ही नहीं था , उसने कुछ गार्ड्स की हत्या भी कर दी थी। हमने उसे ढूँढने की कोशिश की। उसके कस्बे में भी गए। मरूग लोगों से भी पूछा। पर किसी को कुछ पता नहीं था।हम उसे नहीं ढूँढ पाए। सच पूछो तो उसे कोई नहीं ढूँढ पाया।आज भी लोग उसे ढूँढ रहे हैं। अब तो वह पूरे यूरोप और अफ्रीका को कंट्रोल करता है। “
कुछ देर तक कमरे में खामोशी थी जिसे आदिल ने ही तोड़ा।
आदिल-“पर तुम नाजिम के बारे में क्यों पूछ रहे हो?”
ध्रुव-“कुछ खास नहीं, आपने उसके कस्बे का नाम नहीं बताया।”
आदिल-“समारा। यहाँ से लगभग साढ़े तीन सौ किलोमीटर दूर माउंट किलीमंजारो की तलहटी में बसा एक कस्बा है समारा।”
ध्रुव-“माउंट किलीमंजारो तो पूरे विश्व के सर्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। इस वजह से समारा कस्बा भी एक पर्यटन का ही केंद्र होगा।”
आदिल-“नहीं ऐसा नही है। जिस तरफ से लोग माउंट किलीमंजारो पर चढ़ाई करते हैं , समारा उसके विपरीत दिशा में है। उस दिशा में बहुत कम लोग ही जाते हैं। दरअसल उस दिशा में बहुत अधिक मात्रा में जनजातियाँ रहती हैं , बीहड़ जंगलों को काट कर रास्ते बनाये गए हैं। “
ध्रुव-“पर नाजिम को इतनी दूर यहाँ डोडोमा में क्यों लाया गया।”
आदिल-“क्योंकि केवल डोडोमा में ही बाल सुधार गृह है। अगर नाजिम को यहाँ नही लाया जाता तो वो निश्चित ही और लोगों की हत्या कर देता। या जंगल के कानून का शिकार होकर खुद ही मारा जाता।”
” हम्म…”- ध्रुव ने सोचने वाले अंदाज में कहा-“क्या आप मुझे मरूग लोगों के बारे में और भी बातें बता सकते हैं?”
आदिल-” मुझे मरूग लोगों के बारे में तो ज्यादे कुछ नहीं पता, पर समारा में जरूर पता चल सकता है।समारा में ही मरूग धर्म के मुखिया सामंगो का घर भी है।”
ध्रुव-“अब ये सामंगो कौन है?”
आदिल-“जैसे हर धर्म में धर्म गुरु होते हैं, वैसे ही मरूग धर्म मे भी हैं। और उनके वर्तमान गुरु का नाम है सामंगो। और जाहिर है उन्हें मरूग धर्म के बारे में सबसे ज्यादे जानकारी होगी।”
ध्रुव-“ओह! वैसे मुझे सामंगो से मिलने के लिए क्या करना होगा?”

आदिल-“सामंगो समारा में ही रहते हैं, वहाँ से बाहर नहीं जाते। तो जाहिर है तुम्हें भी समारा जाना पड़ेगा।”
“ओह! आपकी जानकारी और मदद के लिए शुक्रिया।” -ध्रुव ने खड़े होते हुए कहा।
“बस एक मदद और कीजिये।”
आदिल-“हाँ, हाँ। बोलो, मैं कैसे मदद करूँ तुम्हारी।”
ध्रुव-“मुझे समारा जाना है , तो उसके लिए टैक्सी कहाँ से मिलेगी।”
आदिल-“उस रूट पर टैक्सी नहीं मिलती ध्रुव, पर मैं तुम्हारी मदद जरूर कर सकता हूँ।”
ध्रुव-“कैसे?”
आदिल-“मैं तुम्हें वहाँ ले जा सकता हूँ,अपनी कार से।”
ध्रुव-“अरे नहीं, आप मुझे किसी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बारे में बता दीजिए।”
आदिल-“वो भी मुश्किल है।”
ध्रुव-“पर….”
आदिल-“पर .. वर कुछ नहीं , मुझे कोई समस्या नहीं है। आखिर तुमने दुनिया को इतनी बार बचाया है , तुम्हारे लिए मैं इतना तो कर ही सकता हूँ।”
ध्रुव कुछ बोल नहीं पाया।
आदिल-“तुम बाहर चलो मैं पार्किंग से कार लेकर आता हूँ।”
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समय-4:00pm
समारा का रास्ता जंगलों और पहाड़ों से होकर जाता था।
आदिल पूरी तल्लीनता से खाली सड़कों पर अपनी कार दौड़ा रहा था।
ध्रुव उसके बगल वाली सीट पर बैठा था।
ध्रुव-“कितनी देर में हम समारा पहुँचेंगे।”
आदिल-“तीन घंटे।जब से पहाड़ो को काट कर ये शॉर्टकट रास्ता बनाया गया है, तब से आवागमन थोड़ा आसान हुआ है।”
ध्रुव-“कैसा शॉर्टकट रास्ता।”
आदिल-“उसके लिए पहले हमें माउंट किलीमंजारो पर नौ सौ मीटर ऊपर चढ़ना पड़ता है और वहाँ से सीधा ढलान रास्ता हमें किलीमंजारो की तलहटी में ले जाता है। उसी तलहटी में बसा है समारा।”
ध्रुव ने खिड़कियों से बाहर का नजारा देखते हुए कहा-“वाकई बहुत खूबसूरत हैं ये जंगल।”
आदिल-” खतरनाक और रहस्यमयी भी। इन रास्तों पर अक्सर जंगली जानवर राहगीरों पर हमला कर देते हैं। इसी कारण शाम या रात के समय ये रूट लगभग बंद ही रहते हैं।”
ध्रुव-“और दिन के समय ? दिन के समय वे हमला नहीं करते।”
आदिल-“ह्म्म्म…. करते हैं। पर लोग ऐसा मानते हैं कि जानवर दिन में कम हमला करते हैं। इसी उम्मीद में लोग दिन में ही ट्रैवेल करना ज्यादा पसंद करते हैं।उम्मीद पर ही ये जंगल कायम है और ये दुनिया भी।”
ध्रुव-“तुमने बोला कि ये जंगल रहस्यमयी भी हैं। किन बातों को ध्यान में रखते हुए तुमने ऐसा कहा।”
आदिल ने मुस्कुराते हुए कहा-“इंसान जिन चीजों के बारे में पूरी तरह नहीं जानता उन्हें रहस्यमयी ही समझता है।इस जंगल में कई तरह की जनजातियाँ है, उनके अलग अलग रिवाज हैं। मैं खुद उनमें से कइयों के बारे में नहीं जानता।”

ध्रुव-“सही कहा। दो दिन पहले मैं भी मरूग लोगों के बारे में कुछ नहीं जानता था और आज उन्हीं के बीच जा रहा हूँ।”
आदिल -“वैसे मरूग कोई जनजाति नहीं है। उनकी अपनी सभ्यता भी है।”
ध्रुव-“हाँ। पिछले कुछ दिनों में मुझे ये बात पता चल चुकी है। वैसे तुम्हारी नजर में एक जनजाति और एक धर्म में क्या अंतर है?”
अब तक दोनों पहाड़ के उस जगह तक पहुँच गए थे जहाँ से उन्हें नीचे तलहटी के लिए जाना था।
आदिल-“जनजाति एक खास जगह तक सिमटी रहती है वही एक धर्म विशेष का समुदाय दूर दूर तक फैला रहता है। जनजातियों की मान्यताएं होती हैं। वही धर्म विशेष के लोगों के लिए धर्म ग्रंथ होते हैं। मंदिर होते हैं। वैसे मैंने सुना है कि मरूग देवताओ के मन्दिर कई अन्य देशों में भी है।”
“शायद उनके देवताओं की ही कृपा थी कि मैं उनमें से एक मंदिर में उनके देवता का दर्शन कर चुका हूँ।”-ध्रुव ने कहा और वो दोनों हँसने लगे।
अचानक से उनकी कार के सामने कोई जानवर तेजी से गुजरा । उसे बचाने के चक्कर में आदिल ने अपना संतुलन खो दिया और कार एक नुकीले पत्थर से जा टकराई।
पहाड़ो पर जो सड़क बनाई गई थी, उनकी एक तरफ गहरी ढलान थी और एक तरफ ऊँची पहाड़ियाँ। आदिल ने कार को ढलान में गिरने से तो बचा लिया पर कार को पहाड़ियों में निकले पत्थरों में टकराने से नहीं बचा पाया।
“ओह …नहीं!”-आदिल ने कार से उतरते हुए कहा।
आदिल ने कार का बोनट चेक किया और ध्रुव की तरफ देखते हुए बोला-“बुरी खबर है।कुछ पार्ट्स परमानेंट डैमेज हुए हैं। कार यहाँ से आगे नहीं जा सकती।”
ध्रुव ने आस पास देखते हुए कहा-“तो हमें यहाँ से आगे पैदल ही जाना पड़ेगा?”
आदिल -“मुझे तो उस जानवर का डर है। शायद कोई आदमखोर शेर था।कहीं वह वापस न आ जाये।वैसे भी अँधेरा घिरने वाला है।”
आदिल की आवाज में डर साफ झलक रहा था।
आदिल-“वैसे भी यहाँ से पैदल जाना बेवकूफी है। हम न वापस डोडोमा जा सकते हैं ना ही समारा।”
ध्रुव-“तो फिर हमें रात यहीं बितानी पड़ेगी क्या?”
आदिल-“खतरा उसमें भी है, क्योंकि आदमखोर शेर हमेशा झुंड में ही घूमते हैं।”
ध्रुव-“तो फिर हमारे पास और कौन सा………”
ध्रुव अभी अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि उसने शेर की गुर्राहट सुनी।
शेर ठीक ध्रुव के पीछे ही था। आदिल अभी कार के पास खड़ा था जब उसने शेर को देखा। शेर को देखते ही उसकी हालत खराब हो गयी।
शेर को अपने पीछे महसूस करके भी ध्रुव ने कोई जल्दबाजी नहीं की
ध्रुव-“हिलना मत आदिल।”
इतना कहकर ध्रुव वापस पलटा ही था कि शेर ने उसपर छलाँग लगा दी।ध्रुव ने अपने दोनों हाथों से उसके अगले पंजो को पकड़ लिया। ध्रुव ने शेर को उसकी भाषा में समझाने की कोशिश की पर कोई फायदा नहीं हुआ।

शेर अपने पिछले पंजों से ध्रुव पर वार कर रहा था।
ध्रुव ने चिल्ला कर आदिल से कहा-“आदिल!!!क्या कार में कोई रस्सी है?”
आदिल जैसे सोते से जगा -“न ..नन..नहीं ध्रुव। “
“पर…प…र कार में वायर्स(wires) हैं जिन्हें मैं घर ले जा रहा था।”-अचानक से आदिल को याद आया।
“मुझे दो ….जल्दी करो।”-ध्रुव ने शेर से जूझते हुए कहा।
ध्रुव के सामने शेर बेबस हो गया था, उसके गले से केवल भयंकर गुर्राहट निकल रही थी जिससे पूरी पहाड़ी गूँज रही थी।
आदिल ने कार से वायर्स निकाल कर ध्रुव की तरफ फेंक दिए।
वायर्स पर्याप्त मात्रा में थे और काफी मजबूत थे । जल्द ही ध्रुव ने शेर को काबू में करके उसके पंजो को बाँध दिया ।
अब शेर बिल्कुल बेबश था।
आदिल की जान में जान आयी-“अब हम क्या करें ?रात भर यहीं बैठ कर शेरों से कुश्ती।”
ध्रुव ने शेर की तरफ देखते हुए कहा-“मेरे पास एक आईडिया है पर पहले बताओ इस कार और शेर का क्या होगा?”
आदिल-“समारा जाकर मैं फॉरेस्ट ऑफिसर्स को कॉल कर दूँगा। ऐसे बिगड़ैल जानवरो को या भटके हुए जानवरों को वो सही जगह पहुँचा देते हैं। सुबह होते ही वे इसे ले जायेंगे। और कार के लिए डोडोमा से मैकेनिक बुलाना पड़ेगा। वैसे वापसी के लिए समारा से भी हमें कार मिल जाएगी।”
ध्रुव-“ठीक है हम यहाँ से नीचे सर्फिंग करते हुए जाएँगे। पर उसके लिए हमें कार के दो दरवाजे चाहिए।”
आदिल ने शंकित भाव से ध्रुव की तरफ देखा।
ध्रुव-“यहाँ से ढलान तो काफी है पर पेड़ पौधे भी ज्यादा नहीं है।हम कार के दरवाजों पर बैठकर नीचे जायेंगे। पर उसके लिए पहले हमें दरवाजों को निकालना पड़ेगा।”
जल्द ही दोनों ने दरवाजों को तोड़कर निकाल दिया।
ध्रुव घुटनों के बल कार के दरवाजे पर बैठ गया। आदिल ने भी वैसा ही किया।
ध्रुव-“अब हम धीरे धीरे नीचे बढेंगे। बस हमें ध्यान देना होगा कि हमारी गति ज्यादे तेज न हो जाये।उसके लिए हम इन नुकीले पुर्जों का इस्तेमाल करेंगे जो हमने कार से ही निकाले हैं।जैसे ही हमारी गति बढ़ेगी हम इन्हें जमीन में धँसा देंगे जिससे हमारी गति थोड़ी कम हो जायेगी। और हमें चट्टानों से भी बचना होगा , अगर हम किसी वजह से तुरंत रुक जाएंगे तो प्रतिक्रिया स्वरूप हमारा शरीर झटके के साथ आगे उछल जाएगा। उस अवस्था में हम सीधे आगे गिरेंगे और बुरी तरह जख्मी हो जायेंगे।
आदिल-“ठीक है, यहाँ रात गुजारने से तो बेहतर ही होगा हम नीचे की तरफ बढ़ें।”
आदिल की आवाज में उत्साह झलक रहा था।
सावधानी बरतते हुए दोनों नीचे बढ़ने लगे।
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अँधेरा घिरने के साथ ही दोनों तलहटी में पहुँच चुके थे।
ध्रुव और आदिल के हाथ पैर कहीं कहीं से छिल गए थे पर दोनों सुरक्षित थे।
समारा एक सम्पन्न और खुशहाल कस्बा था।
आदिल और ध्रुव सीध सामंगो के घर गए। सामंगो का घर त्रिकोणीय जमीन पर बना था, जिनमें तीन दरवाजे थे।
सामंगो उस घर में छोटा सा आश्रम चलाता था , जहाँ बाहर से आये हुए अतिथियों का हमेशा स्वागत होता था। मरूग धर्म के बारे में जानकारी प्राप्त करने वालों के लिए भी वहाँ पर्याप्त व्यवस्था की गई थी।छोटे बच्चों को शिक्षा देने की भी उचित व्यवस्था की गई थी।
सामंगो एक लगभग साठ वर्ष का वृद्ध पुरुष था। सामंगो आदिल को पहले से जानता था। उसने गर्मजोशी से आदिल और ध्रुव का स्वागत किया।दोनों के घावों पर मरहम लगाए गए।आदिल ने सामंगो को अपने आने की वजह बताई।
नाजिम का नाम सुनकर सामंगो गहरी सोच में डूब गए। कुछ देर बाद उन्होंने बोलना शुरू किया-“नाजिम हमारा सबसे होशियार और काबिल शिष्य था। अपने माँ बाप की इकलौती संतान। पर सागा कबीले से हुए उस झगड़े ने उसके पूरे परिवार को तबाह कर दिया।”
ध्रुव -“पर दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ क्यों था?”
सामंगो-“इस दुनिया में चार हजार से ज्यादे धर्म हैं। सबके अपने नियम और कायदे हैं। नियम जहाँ हमें अनुशासन सिखाता है वहीं विरोधाभास को भी जन्म देता है।ऐसी ही किसी छोटी बात पर मरूग और सागा लोगों में झगड़ा हुआ और सागा लोगों ने मरूग के घरों में आग लगा दी। दुर्भाग्य वश आग कुछ ज्यादा ही फैल गयी और कुछ मरूग लोग उसमें जल कर मर गए। उससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह था कि जल कर मरने वालों में नाजिम के माता पिता भी थे।”
इतना कह कर सामंगो कुछ देर के लिए रुका और फिर कहने लगा-“उनकी मौत ने नाजिम को जैसे पागल कर दिया।उसने अकेले ही उनके कबीले में नरसंहार मचा दिया। उस दिन मैंने उसकी आँखों में शैतान को देखा। बात हमारी पहुँच से बाहर निकल गयी थी इसीलिए हमने पुलिस को खबर भिजवा दी। वहाँ से उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया। उसके साल भर बाद खबर आई कि वो वहाँ से भाग निकला , पर वह यहाँ फिर कभी वापिस नहीं आया।
ध्रुव -“जब नाजिम डोडोमा में था तो वो अक्सर अपने आप को देवता कहता था, इसकी क्या वजह थी।”
सामंगो-“उसकी अंतरात्मा। मरूग धर्म किसीको कत्ल करने की मंजूरी नहीं देता । हमारे धर्म में जीवन लेना केवल देवताओं के अधिकार क्षेत्र में आता है। हम लोग सजा के रूप में भी किसीको मृत्य दंड नहीं देते। जब उसने सागा लोगों को मारा तब उसने खुद को देवता कहना शुरू कर दिया, ताकि कोई उसपर नियम तोड़ने का आरोप न लगाएं क्योंकि वो मरूग धर्म मे बहुत विश्वास करता था।”
उसके बाद सामंगो संध्या ध्यान क्रिया करने चले गए। त्रिकोणीय घर के बीचों बीच आँगन था जहाँ बैठ कर आदिल और ध्रुव ने सबके साथ भोजन किया।

“इस घर की बनावट बहुत ही अनोखी है और इसपे लिखे हुए शब्द बहुत ही रहस्यमय।”-ध्रुव ने कहा।सबने रात का भोजन कर लिया था और अब वे सामंगो के घर में घूम रहे थे।
सामंगो-“यह एक प्राचीन भाषा है। यह घर हजारों साल पुराना है और प्रकृति की कृपा से अभी तक सुरक्षित है।इन दीवारों पर इस घर की बनावट और इतिहास के बारे में लिखा है। मरूग लोगों के हर मंदिर के बाहर भी उसके बारे में लिखा रहता है।”
ध्रुव-“मैं अभी हाल में ही अलेक्सांद्रिया में देवता मोरा के मंदिर गया था, वहाँ दीवारों पर पैटर्न्स तो थे पर उस मंदिर के बारे में कुछ लिखा नहीं था।”
सामंगो-“मंदिरों के बारे में उनकी बाहरी दीवारों पर लिखा रहता है , और ज्वार के समय अक्सर भूमध्य सागर का पानी वहाँ पहुँच जाता है। हजारों वर्षों से चली आ रही इस प्रक्रिया से उसकी दीवारों से लिखावट मिट चुकी है।जबकि पैटर्न्स अंदर की दीवारों पर बने है इसलिए अभी भी सुरक्षित हैं। देवता सोरा के मंदिर की लिखावट अभी भी सुरक्षित है।”
ध्रुव-“देवता सोरा का मंदिर तो….”
सामंगो-“एथेंस में है।”
“एथेंस..”-ध्रुव ने कुछ सोचते हुए दोहराया।
उसके बाद कुछ देर तक सब आपस में बातें करते रहे। ध्रुव ने मरूग धर्म के बारे में काफी बातें पता की।
आदिल और ध्रुव ने रात समारा में ही बिताई।सुबह जब ध्रुव वापस जाने लगा तो सामंगो ने उससे पूछा-“मुझे लगता है ध्रुव , तुम्हारे पास कई ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर तुम्हें नहीं पता?”
ध्रुव-“शायद..”
सामंगो-“याद रखना ध्रुव, कई बार उत्तर हमें तभी मिलता है जब हम प्रश्न के बारे में सोचना छोड़ देते हैं।”
ध्रुव ने कोई जवाब नहीं दिया और आदिल के साथ वापस डोडोमा जाने के लिए निकल गया।
डोडोमा पहुँच कर ध्रुव ने आदिल से विदा लिया और अपने अगले सफर के लिए डोडोमा के एयरपोर्ट की तरफ बढ़ चला।
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DODOMA AIRPORT, TANZANIA:-
“हेलो सर , How can I help you.”- काउंटर पर बैठी महिला ने ध्रुव से पूछा।
ध्रुव-“एथेंस की अगली फ्लाइट कब है?”
महिला-“सॉरी सर! डोडोमा से एथेंस की केवल एक वीकली फ्लाइट है और अगली फ्लाइट दो दिन बाद है।”
ध्रुव-“ओह! कोई प्राइवेट प्लेन अवेलेबल है?”
“यस सर।”
ध्रुव-” तो कृपया उसे मेरे लिए अवेलेबल कराइये। मुझे एथेंस जाना है जल्द से जल्द।”
“ओके सर, आप वेटिंग रूम में आधे घंटे वेट कीजिये। तब तक हम अरेंजमेंट कर देंगे।”
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Same time, Rajnagar:-
“मैंने कहा न कि ध्रुव कमांडो फोर्स के किसी सीक्रेट मिशन पे गया है।”-करीम ने श्वेता से कहा।
श्वेता इस समय करीम के साथ थी।
“और वो मिशन क्या है वो तुम्हें भी नही पता?”-श्वेता ने पूछा।

“हाँ।मुझे भी नहीं पता।”-करीम ने जवाब दिया।ध्रुव ने करीम को बताया था कि वह ब्रह्मांड रक्षकों के मिशन पर जा रहा है।ध्रुव ने किसी और से इस बात का जिक्र भी करने से मना किया था इसीलिए करीम ने श्वेता को वही बताया जो उसे बताने को कहा गया था।
करीम-“पर बात क्या है ?तुम्हें क्यों लगता है ध्रुव राजनगर में ही है।”
श्वेता ने करीम को पिछ्ले रात की बातें बतायी।
श्वेता-“मम्मी भी कह रही थी की जब वह मार्केट में थी तो उन्हें लगा कि कोई उनकी निगरानी कर रहा था।”
करीम श्वेता की बात सुनकर सोच में पड़ गया।
करीम-“कुछ दिन पहले पीटर ने भी मुझसे कहा था कि उसे शक है कोई उसके फ्लैट की निगरानी कर रहा था। उसने पता लगाने की भी कोशिश की पर कुछ पता नहीं चला था।”
श्वेता-“भैया पहले भी ऐसे ही गायब हो चुका है। मुझे कुछ बुरा होने का आभास हो रहा है।कोई हमारे ऊपर नजर रख रहा है।”
उसी समय करीम को एक कॉल आयी।
करीम-“क्या…… और ….वहाँ से?…..अच्छा ठीक है।”
करीम ने फोन रख दिया।
करीम -“तुम्हारा शक गलत है, श्वेता। ध्रुव को तंजानिया में देखा गया है। ध्रुव राजनगर में हो ही नहीं सकता।”
श्वेता ने हैरान होते हुए पूछा-“भैया वहाँ क्या कर रहा है?”
करीम-“पता नहीं ।अब वो तंजानिया में भी नही है। वहाँ से वो कहाँ गया हमें भी नहीं पता।”
करीम को जो खबर मिली थी वो सही थी, वापस जाते समय ध्रुव ने अपनी असली आइडेंटिटी नहीं यूज़ की थी। इसीलिए उसे ट्रेस करना कठिन था।
करीम-“तुम घर जाओ श्वेता , जो कुछ भी हो रहा है कमसे कम ध्रुव का उससे कोई लेना देना नहीं।”
करीम ने कह तो दिया पर उसकी बातों में आत्मविश्वास की कमी थी।
श्वेता-“पता नहीं करीम, क्यों मुझे भैया के आस पास एक खतरे का आभास हो रहा है।”
श्वेता का शक सही था, एक खतरनाक जाल ध्रुव को अपने अंदर समेट रहा था।
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किसी गुप्त स्थान पर –
नाजिम और हामिद सारी बातें डिस्कस कर रहे थे।
नाजिम-“कुछ पता चला?”
हामिद-“नहीं बॉस, तंजानिया में हमारे ऑपरेटर्स इनएक्टिव थे।ज्यादे डिटेल्स नहीं मिली हमें। हमें ध्रुव के वहाँ जाने का कोई अंदेशा नहीं था। जहाँ तक मुझे लगता है वो आपके अतीत के बारे पता करना चाहता था। उसके समारा जाने की भी खबर मिली है।”
नाजिम-“जाने दो जहाँ जा रहा है। हमारा बीता हुआ कल भी उसका आने वाला कल नहीं बदल सकता।वैसे भी कुछ ही दिन में बलि का समय आने वाला है।”
हामिद-“जो भी हो बॉस , पर अब वो सीधा एथेंस जा रहा है। मुझे लगता है उसके हाथ कोई न कोई क्लू लग गया है।”

नाजिम-“जब तक वो पूरे मामले को समझेगा , तब तक वो इस दुनिया से जा चुका होगा। वैसे भी अभी राजनगर वाले पत्ते भी हमारे ही पास है।”
हामिद-“राजनगर से भी ऑपरेटर्स का कॉल आया था, उन्हें भी पता चल गया था की ध्रुव तंजानिया में था। उन्होंने पूछा कि क्या करना है?मैंने निर्देश दे दिए हैं कि जो जैसा है वैसा ही रहने दो।”
नाजिम-“बढिया किया।राजनगर में कोई दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि इस मिशन के लिए हमने वहाँ अपने बेस्ट ऑपरेटर्स भेजे हैं।”
हामिद-“हमें अब क्या करना है।”
नाजिम-“कुछ खास नहीं, अब एथेंस में इस प्लान का लास्ट फेज शुरू होगा। तब तक के लिए ध्रुव को मेरा मैसेज भिजवा दो।”
नाजिम की आँखों में एक चमक थी।
एक खास चमक थी।
जिस मिशन के लिए उसने इतनी तैयारी की थी उसके पूरा होने की चमक।
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ध्रुव एयरपोर्ट पर अपनी फ्लाइट पकड़ने ही जा रहा था कि एक बच्चा ध्रुव की तरफ दौड़ते हुए आया।
“आपका नाम ध्रुव है?”-उस बच्चे ने ध्रुव को ऊपर से नीचे देखते हुए बोला।
“हाँ..”-ध्रुव ने कहा।
इससे पहले कि ध्रुव कुछ और कह पता उस बच्चे ने ध्रुव को एक कागज दिया और वापस चला गया।
ध्रुव के कुछ करने से पहले ही वो भीड़ में गायब हो चुका था।
ध्रुव ने उस बच्चे के पीछे जाना जरूरी नही समझा।
उसने कागज खोला । कागज बिल्कुल सादा था। ध्रुव ने कागज को सूँघा। उसके चेहरे पर एक मुस्कान दौड़ गयी।उसने कागज अपनी जेब में रखा और रनवे की तरफ बढ़ चला।
कुछ देर बाद ध्रुव प्राइवेट प्लेन में अपने अगले पड़ाव एथेंस की तरफ बढ़ रहा था।
उसके कई सवालों के जवाब मिल चुके थे पर अभी कइयों के जवाब ढूँढना बाकी था ।
जिस नाजिम को वो जानता तक नहीं था, जो आज तक कभी भारत आया भी नहीं था, वो आखिर ध्रुव को क्यों मारना चाहता था। क्यो उसने ध्रुव के चारों तरफ एक जाल बुना था।
पर शायद ध्रुव भी नहीं जानता था कि जल्द ही उसके सवालों के जवाब मिलने वाले थे।
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Story Continues in-
The Death Pattern ..
[Chap 5-ATHENS]

 

धन्यवाद

Written By – Akash Pathak for Comic Haveli

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Disclaimer-
यह कहानी पूर्णतया काल्पनिक है , इसमें कुछ असली जगहों का उपयोग मात्रा प्रतीक के रूप में किया गया है। इस कहानी का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नही है।
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12 Comments on “The Death Pattern: Chapter 4 -【Tanzania】”

  1. वाह भाई, बहुत खूब।पता ही नहीं चला कहानी कब खत्म हो गई।ध्रुव की तंजानिया की यात्रा भी बहुत रोचक थी।ये मरुग और सागा कबीले और उनके धर्म की बातें बहुत बढिया थी।कया ये धर्म रियल है या कालपनिक।आप ने बहुत गहराई से लिखा है।उम्मीद है ध्रुव की एथेंस की यात्रा भी रोचक रहेगी। नई कहानी शीध्र लाईयेगा।आप को बहुत बहुत शुभ कामनाएं।

    1. आपके कमेंट के लिए शुक्रिया विजय जी।
      मरूग और सागा धर्म काल्पनिक हैं, पर जिन जगहों का उल्लेख किया है वो असली हैं।
      इस कहानी के लिए जैसा धर्म चहिये था वैसा कोई भी मुझे मिला नहीं, इसीलिए किसी अन्य धर्म के नियमों में बदलाव करने की जगह मैंने नया और काल्पनिक धर्म बनाया है।
      जिस जगह इन कबीलों की भौगोलिक स्थिति दिखाई है वहाँ छग(chaga) कबीला है।

  2. Wah maza hi aa gaya
    One read me hi padh liya
    Story me bht hi suspence hai utsukta badhti hi ja rahi hai

  3. वाह मैं जानता था ये पार्ट भी बाकी पार्ट्स की तरह गज्जब होने वाला है। आखिर लेखक आकाश भाई जो हैं। पर मेरी बदनसीबी! मैं हमेशा सोचता हूँ पहला रिव्यू मेरा होगा। पर किसी न किसी कारणवश हमेशा मैं लेट हो जाता हूँ। बहरहाल । अब आता हूँ स्टोरी की तारीफ में चार लाइन बयाँ करने ।
    वैसे तो इस सीरीज़ के सभी पार्ट्स धांसू हैं । But , इस चौथे पार्ट ने बाकी तीनो पार्ट्स को पीछे धकेल दिया । इस पार्ट को पढ़ते वक्त पहले से भी ज़्यादा डबल मज़ा आया। ध्रुव की सभी यात्राओं की तरह तंज़ानिया की यात्रा भी गज्जब थी।
    सागा और मरूग कबीले के बारे में जानकर उत्सुकता बढ़ी है और उससे भी ज़्यादा उत्सुकता नाज़िम का अतीत जानकर बढ़ी है। कौन है ये नाज़िम कहाँ से आई इतनी शक्तियां इसके पास?
    एक सवाल जो ऊपर विजय भाई ने किया है । क्या ये सागा और मरूग कबीले वास्तविक हैं या काल्पनिक। मेरा भी एक सवाल ये है कि ; क्या वो मंदिर सच मे वहां मौजूद है।
    एक तरफ जहां ये सारे सवाल मन मे आ रहे हैं वहीं और सवाल खड़े होते जा रहे हैं। आखिर श्वेता को ये शक क्यों हुआ कि ध्रुव अब भी राजनगर में है। नाज़िम द्वारा भेजे गए उत्पाती जब राजनगर में उत्पात मचाएंगे तब क्या होगा?
    अरे!! नागराज को तो मैं भूल ही गया था।
    फूssss।अब कोई डर नही , राजनगर में नागराज है। बस डर इस बात का है कि अगली स्टोरी फिर लेट न हो। धन्यवाद।

    1. धन्यवाद तल्हा भाई।
      ये मंदिर काल्पनिक हैं।

  4. “हमारा बीता हुआ कल भी उसका आने कल नही बदल सकता” । नाज़िम का ये डायलॉग मुझे मस्त लगा।

  5. क्या बात है पाठक जी आपकी लेखनी दिन ब दिन विस्मयकारी होती जा रही है।
    अद्भुत।
    इस स्टोरी में वो सब है जो एक उम्दा स्टोरी में होना चाहिए।
    ये सस्पेंस नॉवेल ज्यादा नजर आ रहा है।
    जो आपने बेहतरीन तरीके से लिखा है।
    जितनी तारीफ की जाए कम है।
    राजनगर में अब हल्ला होने वाला है और शायद नागराज और बाकी ब्रह्मांड रक्षको के लिये कुछ काम आने वाला है।
    अगले पार्ट का बेशब्री से इंतज़ार रहेगा।

  6. Bahut hi tagda akash
    This part was all about information
    Action vagairah nhi tha
    Mujhe kuch kuch chize khatki jaise k sher baat nhi samjha kyun ki janwar normal hote hain unme bhasha ka difference nhi hota h
    Wo sher jungli tha to fixed h kisi sammohan ya nashe me nhi tha
    Wo surfing wala idea gajab laga
    Mount Kilimanjaro aur uske andar marug aur saga kabilon ka knowledge bhi mast laga
    Writing tumhari bahut jabardast h
    Mujhe ek sawal thoda atpata laga jo dhruv puchta h k janjati aur dharm me kya antar h
    Ye totally irrelevant aur non dhruv type tha
    Apart from all that superb classy part
    Next part aa hi gya h tumhara to main chala udhar…

  7. wah…mene yeh kahani phly kyun nhi pdi…. dhruv ki yeh adventure story such m bhut acchi chl rhi hy …lahani ka hr ik part ik nye shr ky baary m bi btata hy aur wahan ky adventure ky baary m bi …so grate bhai

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