The Death Pattern Chapter 6

THE DEATH PATTERN
Chapter-6-The Climax

 

“कहाँ गया रघुराम..?”-नाजिम ने लगभग चिल्लाते हुए हामिद से पूछा।
“नंबर एक और नंबर दो जब रघुराम के कमरे के रेगुलर चेक के लिए गए तो कमरा खाली था।”-हामिद ने बताया।

नंबर एक और नंबर दो वही दोनों नकाबपोश थे जो जंगल में मौजूद इमारत की पहरेदारी कर रहे थे।
इस समय रात के लगभग दो बज रहे थे।जलती हुई मशालों से मंदिर पूरी तरह रोशन था। ध्रुव अभी भी बलिवेदी के पास ही बँधा था। हामिद के हाथों में अभी भी ट्रांसमीटर था। नाजिम कभी हामिद के परेशान चेहरे को देख रहा था कभी ध्रुव के चेहरे पर मौजूद मुस्कान को।

“पिछली बार कब चेक किया था?” -नाजिम।
हामिद- “इससे पहले 11 बजे चेक किया था, तब वहीं था।”
नाजिम ने कुछ सोचा और हामिद से बोला-“शायद कोई और भी है…., पर वो जो भी होगा इन जंगलों में ज्यादा दूर नहीं जा पायेगा। उन दोनों को बोलो आस पास का इलाका छान मारें।”

हामिद ने ट्रांसमीटर पर वैसा ही निर्देश दिया।
नाजिम वापस ध्रुव की तरफ मुड़ा , उसके चेहरे पर कुछ समय पहले परेशानी के भाव थे जो कि अब गायब हो चुके थे।

नाजिम ने अपने बदलते हुए भावों को काबू में किया और ध्रुव से बोला-” अगर तुम समझते हो कि रघुराम को बचा कर तुम जीत गए तो तुम गलत हो। वैसे भी मेरा काम पूरा हो चुका है, कुछ ही देर बाद मैं तुम्हारी बलि चढ़ाऊँगा। फिर भी मैं तुम्हें बता देता हूँ की अगर तुमने कोई चालाकी की तो राजनगर में एक बड़ा धमाका होगा जिसमें तुम्हारा शहर जल कर खाक हो जाएगा।”

नाजिम ने ध्रुव के चेहरे की तरफ देखा, उसके चेहरे पर ऐसे कोई भाव नहीं थे जिसकी उम्मीद नाजिम ने की थी।
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लगभग छः घंटे पहले-
स्थान-देवता सोरा का मंदिर।
ब्लास्टर द्वारा किये हुए ब्लास्ट्स पीछे पथरीली दीवार पर टकराये और कुछ टुकड़े ध्रुव के सर पर लगे जिससे ध्रुव पल भर के लिए बेहोश हो गया।

तुरंत ही ध्रुव को होश आया, ब्लास्टर अभी भी ध्रुव के पास खड़ा था।
ध्रुव ने बेहोश होने का नाटक किया , क्योंकि उसे यकीन हो गया था कि ब्लास्टर को उसकी जान लेने के लिए नहीं भेजा गया। वर्ना पल भर के लिए मिले इस समय में वो अटैक जरूर करता।
ध्रुव ने सोचा ब्लास्टर जरूर उसे नाजिम तक पहुंचा सकता है, इसीलिए ध्रुव होश में आकर भी जमीन पर पड़ा ही रहा।
कुछ देर बाद दो नकाबपोशों ने प्रवेश किया।
उन्होंने ध्रुव को हिलाडुला कर चेक किया ,पर ध्रुव बड़ी सावधानी से बेहोश होने का नाटक करता रहा।
फिर उन्होंने ध्रुव को बाँध दिया और मंदिर के पीछे मौजूद जंगलों में बढ़ने लगे।
कुछ ही देर में वह दोनों एक इमारत के पास पहुँचे , जिसके एक कमरे में उन्होंने ध्रुव का मुँह बाँध कर कैद कर दिया।
(पूरी घटना के लिए पढ़े इसी कहानी का पाँचवा भाग)
दोनों के जाने के बाद ध्रुव कुछ देर तक शांत सा पड़ा रहा। जब उसे यकीन हो गया कि कमरे में और कोई नहीं है तो उसने आँखे खोली।
कमरा बिल्कुल खाली था।कमरे में एक लोहे का दरवाजा था और एक छोटा सा रोशनदान जोकि दीवार में लगभग नौ फुट ऊपर था।
ध्रुव अपने बँधे हुए हाथ अपने जूते तक ले गया।उसके जूते के सोल में एक छोटा सा चाकू था। उसकी मदद से ध्रुव ने अपने हाथ खोल लिए।फिर अपने मुँह से भी कपड़ा हटा लिया।
उसके बाद ध्रुव कमरे को ध्यान से देखने लगा, देखने से इमारत बहुत पुरानी लगती थी जिसे कई सालों से इस्तेमाल नहीं किया गया था। दीवारें खुरदुरी थीं।
ध्रुव दरवाजे को ध्यान से देखने लगा , दरवाजा लोहे का था जिसे अभी जल्द ही बनाया गया था।
उसी समय दरवाजे के पास एक आहट हुई। कुछ सोच कर ध्रुव वापस उसी तरह लेट गया और बेहोश होने का नाटक करने लगा।

कटी हुई रस्सियाँ उसने छुपा दी थीं और उसके हाथ भी इस समय पीछे की तरफ थे जिससे कि दरवाजे से आने वाले को तुरंत न पता चले कि ध्रुव के हाथ खुले हुए थे।
कुछ ही पलों पर दरवाजे पर किसी के आने की दस्तक हुई।किसी ने दरवाजे में लगे छोटे से सुराख से अंदर झाँका और वापस चला गया।
ये कोई और नहीं उन्हीं दोनों नकाबपोशों में से एक था।
ध्रुव ने अपनी कलाई में बंधी घड़ी में समय देखा , इस समय ठीक नौ बज रहे थे।
जब ध्रुव को वापस यकीन हो गया कि कोई नहीं तो वह फिर से उठ खड़ा हुआ।
उसने दरवाजे के उसी छोटे से सुराख से बाहर देखा । बाहर एक गलियारा था, और बिल्कुल ही सन्नाटा था।
ध्रुव ने दरवाजे को चेक किया । बिना चाभी के दरवाजे को खोलना नामुमकिन था।
ध्रुव ने कमरे को चेक किया, कमरे में कोई भी चीज नहीं थी। ध्रुव के बाहर निकलने का रास्ता केवल रोशनदान था। ध्रुव रोशनदान के नीचे गया। रोशनदान ध्रुव की पहुँच से ऊपर था।
ध्रुव ने छलाँग लगाई पर फिर भी रोशनदान तक नहीं पहुँच चुका।
कुछ देर बाद ध्रुव ने अपनी बेल्ट निकाली और उसे रोशनदान पर फेंका। एक ही प्रयास में बेल्ट की बक्कल रोशन दान में फँस गयी।
ध्रुव ने उसके सहारे ऊपर चढ़ना चाहा पर वह ध्रुव का भार नहीं सह पाया। बक्कल बेल्ट से अलग हो गयी और बक्कल और बेल्ट नीचे आ गए।
(नोट-ध्रुव इस समय अपनी रेगुलर ड्रेस में नहीं बल्कि साधारण ड्रेस में है , इसीलिए उसकी बेल्ट भी स्टार बेल्ट नहीं बल्कि नार्मल बेल्ट है।)
ध्रुव ने बेल्ट उठाया और बक्कल को बेल्ट के बीच में पहुँचा कर उसे आधे पर से मोड़ दिया। इस तरह बेल्ट की लंबाई तो आधी हो गयी पर इस बार बेल्ट ध्रुव का भार सहने के लिए तैयार थी।

फिर कुछ ही प्रयासों में बक्कल फिर से खिड़की में फँस गया।उसी की मदद से ध्रुव ऊपर पहुँचा।
ध्रुव एक हाथ से रोशनदान को पकड़े हुए था और दूसरे हाथ से रोशन दान में मौजूद ग्रिल को चाकू से खोलने लगा। यह वही चाकू था जो उसके जूतों के सोल में मौजूद था।
ग्रिल दरवाजे की अपेक्षा कमजोर था और जल्दी ही खुल गया। ध्रुव ने वापस चाकू को जूते में रखा , बेल्ट हाथ में लिया और ग्रिल को वापस उसी तरह अटकाकर बाहर कूद गया।
बाहर का जंगल बहुत घना था, और इमारत से सटी हुई जमीन पथरीली थी। चंद्रमा की रोशनी इस समय भरपूर उजाला कर रही थी।
ध्रुव ने इमारत के अगले भाग में पहुँच कर छुप कर देखा। दोनों नकाबपोश इमारत के बाहर ही खड़े थे। कुछ ही देर में ध्रुव को यकीन हो गया कि इनके अलावा और कोई पहरेदार नहीं है।
ध्रुव अभी आगे की योजना बना रहा था कि तभी दोनों आपस में कुछ बात करने लगे।ध्रुव को कुछ सुनाई नहीं दिया पर उनकी बातों से लगा कि उनमें से एक ऊपर की मंजिल की तरफ इशारा कर रहा था। ध्रुव को यकीन था कि वहाँ या तो नाजिम होगा या कोई कैदी , जैसे -रघुराम। अगले ही पल दोनों अंदर जाने लगे।
ध्रुव ने इस बार घड़ी में समय देखा तो 9 बज कर 53 मिनट हो रहे थे। तुरंत ही ध्रुव के दिमाग में एक योजना ने जन्म लिया।
वह वापस उसी तरफ दौड़ते हुए गया जहाँ से बाहर आया था। बाहर की दीवार खुरदुरी थी जिसकी मदद से ध्रुव रोशनदान तक पहुँच गया। पहले से ही खुले हुए रोशनदान से वह वापस अंदर पहुँच गया। रोशन दान को वापस अटकाकर वह अंदर कूद गया।
10 बजने में अभी लगभग दो मिनट बाकी थे। ध्रुव ने अपनी साँसों पर नियंत्रण रखा और वापस उसी तरह लेट गया।

लगभग आधे मिनट बाद दरवाजे के पास आहट हुई और किसी ने सुराख से अंदर झाँका। सब कुछ सही जानकर वह वापस चला गया। ध्रुव तुरंत ही उठा और वापस बेल्ट की मदद से बाहर निकल गया और इमारत के अगले भाग की तरफ दौड़ने लगा।
दोनों नकाबपोशों के पहले ही उसे वहाँ पहुँचना था।
ध्रुव इसमें भी सफल हुआ और लगभग 10:05 पर बाहर पहुँचा। वहाँ से वह अंदर पहुँचा और अंधेरे में एक जगह छुप गया। ठीक 10:07 पर दोनों नकाबपोश बाहर पहुँचे और फिर उसी तरह पहरा देने लगे।
अब ध्रुव के लिए अंदर का रास्ता साफ था।
ध्रुव उसी गलियारे में बढ़ गया जिधर से दोनों नकाबपोश आये थे।कुछ दूर चलने के बाद ध्रुव ऐसे जगह पहुँचा जहाँ से तीन रास्ते जाते थे।
एक रास्ता ऊपर की तरफ जाता था और एक रास्ता आगे की तरफ । एक तीसरा रास्ता निचली मंजिल पर जाता था पर उस दरवाजे पर लॉक लगा था। ध्रुव ने उस दरवाजे को खोलने की कोशिश नहीं की और आगे बढ़ गया।
आगे चल कर ध्रुव को वही कमरा मिला जिसमें ध्रुव खुद ही कैद था।
ध्रुव वापस आया और निचली मंजिल के दरवाजे को खोलने लगा। पास ही मौजूद एक लोहे के तार से ध्रुव ने दरवाजा खोला।
ध्रुव ने उस तार के टुकड़े को अपने पास रखा और कमरे में प्रवेश कर गया।
ये कमरा बाकी कमरों से बिल्कुल अलग था , देखने से यह किसी तरह का सर्वे रूम लग रहा था। कई कंप्यूटर वहाँ रखे थे पर सभी बंद थे। उन्हीं के पास कई फाइलें रखी हुई थीं। ध्रुव ने कुछ फाइलें देखीं और वापस चला आया।
दरवाजा बंद करके ध्रुव वापस आ गया। अब बारी थी ऊपरी मंजिल की।
ध्रुव धीरे धीरे ऊपर बढ़ने लगा।उसे यकीन था कि ऊपर उसे जरूर कुछ मिलेगा।
ऊपरी मंजिल पर सारे कमरे खुले थे, केवल एक कमरा लॉक्ड था।

ध्रुव ने अपने धड़कते हुए दिल को काबू में किया और अंदर झाँका। अंदर रघुराम बँधा हुआ था। अपने बाबा की ये हालत देख कर ध्रुव की आँखों में आँसू आ गए।
ध्रुव ने बड़ी मुश्किल से अपने आप को काबू में किया।उसने तार के टुकड़े से डोर लॉक खोला और अंदर चला गया।
अंदर रघुराम कुर्सी से बँधा हुआ था। उसने यह देखने की भी जहमत नहीं उठाई की कौन आया है।

“बाबा”-ध्रुव के गले से भर्राती हुई आवाज निकली।ध्रुव ने रघुराम के बंधन खोल दिये।
“ध्रुव”-रघुराम ने आश्चर्य से ध्रुव को देखा।

उसे अपने आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। कुछ देर के लिए वो अपनी हालत को भी भूल चुका था।
अचानक से रघुराम का लहजा सख्त हो गया।

रघुराम-“तुम यहाँ क्यों आये हो ध्रुव?ये सब तुम्हें मारने का एक प्लान है। आज रात को वो तुम्हारी बलि देने की योजना बना रहे है।मेरे जरिये वो तुम्हें ब्लैकमेल करेंगे। यहाँ से चले जाओ ध्रुव।”

काफी समझाने के बाद रघुराम शांत हुआ। रघुराम ने ही ध्रुव को बताया कि दो दिन पहले तक उसे कहीं और कैद में रखा गया था। उसने ये भी बताया कि अलेक्सांद्रिया में ही उसे किडनैप कर लिया गया था।

“अब क्या करोगे ध्रुव?मेरे ख्याल से हमें यहाँ से निकल लेना चाहिए।”-रघुराम ने ध्रुव को देखते हुए कहा।
“नहीं बाबा, बस कुछ देर और”-ध्रुव का लहजा सख्त हो गया।-“पहली बात तो यह है कि इस जंगल से निकलने में बहुत समय लगेगा और हमें गायब जानकर वो हमें ढूंढ़ भी लेंगे।क्योंकि ये जंगल उनका देखा हुआ है और दूसरी बात ये है कि मैं नाजिम को यूँही नहीं छोड़ सकता। भले ही मुझे नाजिम दुबारा मिल जाएगा, पर इस समय मैं उसे नहीं छोड़ सकता।बस आज रात की बात है। सुबह से पहले हम आजाद होंगे।”
ध्रुव ने अपनी घड़ी में समय देखा। 10 बजकर 47 मिनट हो रहा था।

ध्रुव ने अपने बाबा को कुछ समझाया और उन्हें वापस बाँध कर बाहर निकल गया।
ध्रुव ने डोर लॉक को बंद नहीं किया। दरवाजा ऐसा था कि बिना खोलने की कोशिश किये ये नही पता चलता कि दरवाजा लॉक्ड है या नहीं।
उसके बाद ध्रुव अपने कमरे का लॉक खोल कर , अपने कमरे में आ गया और वापस उसी तरह लेट गया।
ठीक 11 बजे किसी ने सुराख से झाँका और वापस चला गया।
उसके जाने के बाद ध्रुव दरवाजा खोल कर वापस अपने बाबा के कमरे में गया और उन्हें निचली मंजिल पर मौजूद सर्वे रूम में छिपा दिया।
उसके बाद वापस अपने कमरे में आ गया।
ठीक 11:43 पर दोनों नकाबपोश उस कमरे में आये। उन्होंने ड्रग इंजेक्ट करके ध्रुव को बेहोश किया। ध्रुव ने कोई प्रतिकार नहीं किया। उसके बाद ध्रुव को तब होश आया जब मंदिर में नाजिम ने ध्रुव के ऊपर पानी डाला।
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वर्तमान समय:-

“द डेथ पैटर्न… यही नाम रखा था न तुमने इस मिशन का?”- ध्रुव ने नाजिम से पूँछा।

ध्रुव के मुँह से यह शब्द सुनकर नाजिम के चेहरे के भाव बदल गए जिन्हें ध्रुव ने सर्वे रूम में पढ़ लिया था।
जबसे ध्रुव होश में आया था तबसे अपने जूते की सोल में मौजूद चाकू से अपने हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रहा था।

ध्रुव-“तुमको लगता था कि तुम मुझे पूरी तरह समझ चुके हो,पर तुम गलत थे। तुम मुझे कभी समझ ही नही पाए। और न ही मेरे काम करने के पैटर्न को।”
नाजिम के चेहरे पर एक व्यंग भरी मुस्कान उभरी।
नाजिम-अगर अपने बाबा को छुड़ा कर तुम यह समझते हो कि तुम जीत गए तो तुम गलत हो। तुम यहाँ कैद हो…. और बाहर से कोई जल्दी इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता । और अगर गलती से कोई गड़बड़ हुई भी तो वहाँ इंडिया के नक्शे से राजनगर का नामोनिशान मिट जाएगा।”

“किसने कहा कि मैं कैद हूँ…?”- अब तक ध्रुव अपने बंधन खोल कर खड़ा हो चुका था।
नाजिम और हामिद को अपने आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था।
नाजिम के पास इस समय कोई हथियार नहीं था, पर हामिद ने तुरंत ही अपनी पिस्तौल निकाल ली और ध्रुव की तरफ तान दी ।

“इसकी भी जरूरत नहीं हामिद , राजनगर के ऑपरेटर्स को कॉन्टैक्ट करो।”- नाजिम ने कहा।

हामिद ने दूसरे हाथ से ट्रांसमीटर पर राजनगर की फ्रीक्वेंसी सेट की और उसे नाजिम की तरफ उछाल दिया।
ध्रुव खड़े होकर उन दोनों की हरकतों को देख रहा था।

नाजिम -“हेलो! राजनगर ऑपरेटर… मिशन डेथ पैटर्न।”
” कॉलर आइडेंटिफाइड…”- उधर से आवाज आई।
नाजिम-“तैयारियाँ पूरी हैं?”
“यस सर… राजनगर की तबाही बस एक कदम दूर है। आपके एक इशारे से पूरा राजनगर तबाह हो जाएगा।”

यह सुनकर नाजिम का आत्मविश्वास और भी बढ़ गया।
ध्रुव जैसे ध्यान ही नहीं दे रहा था।

ध्रुव-“हो गया …? ”

इसी के साथ ध्रुव ने हामिद के हाथों पर एक किक लगाई। असावधान हामिद के हाथों से गन उछल कर ध्रुव के हाथों में आ गयी।
ध्रुव ने उस गन को डिसेम्बल कर के फेंक दिया।

” अभी भी समय है ध्रुव”- नाजिम ने ध्रुव को आखिरी चेतावनी दी-“अगर आगे बढ़े तो राजनगर…”

पर ध्रुव ने नाजिम की बातों पर ध्यान भी नहीं दिया और उसकी तरफ बढ़ने लगा।

“क्या ऑर्डर्स हैं सर”- नाजिम के हाथों में मौजूद ट्रांसमीटर में से आवाज आई।
नाजिम ने अपनी तरफ बढ़ते हुए ध्रुव को देखा , उसने ट्रांसमीटर में बोला-“एक्टिवेट इट!”

ट्रांसमीटर पर एक क्लिक की आवाज आई और कनेक्शन कट गया।
एक पल के लिए किसी को कुछ समझ नहीं आया।
ध्रुव भी एक पल के लिए रुक गया।

नाजिम-” वे सुसाइडर्स थे, राजनगर के साथ खुद भी खत्म हो गए। अब तुम्हें राजनगर के विनाश की खबर सुनाने वाला भी कोई नहीं मिलेगा। और कुछ ही देर में रघुराम भी हमारे कब्जे में होगा।”

रघुराम का नाम सुन कर ध्रुव का गुस्सा भड़क गया , उसने एक किक लगाई और नाजिम दूर जा गिरा । नाजिम की ये हालात देख कर हामिद भी खाली हाथ ध्रुव से भिड़ गया।
पर हामिद को लड़ाई का कुछ ज्यादा अनुभव नहीं था। ध्रुव के एक ही सधे वार से वह बेहोशी की दुनिया में चला गया।
उधर ध्रुव ने देखा नाजिम अनुष्ठान की पोटली में से कुछ सूखी हुई जड़ियों में आग लगा रहा था जिससे धुआँ निकल रहा था।
कुछ पत्तियों को नाजिम चबा भी रहा था।

ध्रुव को अपनी तरफ बढ़ता देख नाजिम ने कहा-” जल्द ही यह जहरीला धुआँ इस बंद गुफा में भर जाएगा। दोनों साथ ही मरेंगे ध्रुव। एक ही समय पैदा हुए और एक ही समय मरेंगे। नियति भी कैसा खेल खेलती है ना..?”

इतना कहकर नाजिम ठहाका लगाकर हँसने लगा।
ध्रुव ने नाजिम के चेहरे को देखा। नाजिम पूरी तरह से विकृत लग रहा था।

“पागलपन बंद करो नाजिम..”- ध्रुव ने कहा और एक जोरदार घूँसा उसके चेहरे पर जड़ दिया।
नाजिम का चेहरा घूम गया। पर उसकी हँसी नहीं गायब हुई।
” जो जड़ी बूटी मैं खा रहा हूँ उससे मुझे दर्द का एहसास नहीं होगा ध्रुव”- नाजिम ने कहा और एक घूँसा ध्रुव के चेहरे पर जड़ दिया।
ध्रुव का सर घूम गया।
“पर तुम्हें जरूर दर्द होगा। क्योंकि इससे मेरी ताकत भी बढ़ जाएगी।”

अब तक ध्रुव भी संभल चुका था।
नाजिम पागलों की तरह ध्रुव पर टूट पड़ा।
“तुम मुझसे कभी जीत नहीं पाओगे ध्रुव , क्योंकि तुम एक इंसान हो और मैं देवता।”
“इस पागलपन ने तुम्हें कहीं का नहीं छोड़ा नाजिम , इतना बड़ा एम्पायर होने के बाद भी तुम इन गुफाओं में मुझसे लड़ रहे हो। और अब जल्द ही जेल में भी जाओगे।”
“जेल इंसानों के लिए होती है बेवकूफ।”-नाजिम ने कहा और ध्रुव पर छलाँग लगा दी।

नाजिम के वार इतने तेज थे कि ध्रुव को वार करने का भी मौका नहीं मिल रहा था।
इस बार नाजिम ने ध्रुव पर छलाँग लगाई तो ध्रुव बच गया और उसने नाजिम के कंधों पर वार किया।
सटीक प्रहारों से उसके दोनों हाथ सुन्न हो गए।
दौड़ते हुए नाजिम को ये एहसास भी नही हुआ कि उसके हाथ सुन्न हो गए हैं और वो अपना संतुलन खोकर गिर पड़ा।
ध्रुव ने अब कोई वार नहीं किया।
नाजिम किसी तरह खड़ा हुआ। उसके हाथ अभी भी सुन्न थे।

“इंसान कभी भी भगवान से नहीं जीत सकता ध्रुव” -नाजिम चिल्लाया। उसने अपने सर से ध्रुव को निशाना बनाकर उस पर छलाँग लगा दी।
ध्रुव अपने बचाव में पीछे हटा और नाजिम का सर पीछे पथरीली दीवार से जा टकराया।
ध्रुव के कुछ समझ पाने से पहले ही नाजिम जमीन पर गिर पड़ा।
नाजिम हिला डुला और फिर शांत हो गया।
जो कुछ हुआ वह अप्रत्याशित था।
ध्रुव ने नाजिम की बॉडी चेक की।
नाजिम मर चुका था।
इंसान होकर भगवान बनने का सपना अपनी आंखों में लिए हुए नाजिम इस दुनिया से जा चुका था।
नाजिम द्वारा फैलाया हुआ धुँवा अब पूरे मंदिर में फैल रहा था।
ध्रुव के पास अब कुछ ही समय था।

ध्रुव ने हामिद को देखा । वह अभी भी बेहोश पड़ा हुआ था।
ध्रुव ने हामिद को उठाया और गुप्त दरवाजे की तरफ बढ़ने लगा।
बाहर से पैटर्न्स से खुलने वाला दरवाजा अंदर से सिर्फ एक पत्थर हटाने पर ही खुल गया।
ध्रुव ने पहले हामिद को बाहर फेंका।
रघुराम को ढूंढते हुए दोनों नकाबपोश इस समय वहीं थे। बेहोश हामिद उन दोनों के सामने गिरा।
दोनों के कुछ समझ पाने से पहले ही ध्रुव भी बाहर आ गया।
इससे पहले की दोनों हमला करते , ध्रुव ने उन दोनों को भी बेहोशी की दुनिया में पहुँचा दिया।
ध्रुव ने जंगली लताओं से उन तीनों को मजबूती से बाँध दिया ताकि अगर वे होश में भी आ जाये तो खुद को छुड़ा न पाएँ।
इसके बाद ध्रुव वापस उसी इमारत की तरफ बढ़ने लगा।
अब तक रात का अँधेरा भी छाँट चुका था। घने जंगलों में सूरज की रोशनी भी छन कर पहुँच रही थी।
ध्रुव ने अपने बाबा को छुड़ाया और जंगल से बाहर निकलने लगा।
लगभग दो घंटो बाद ध्रुव को बाहर का रास्ता मिला।
जंगल से निकल कर ध्रुव सीधा पुलिस स्टेशन गया। वहाँ जाकर ध्रुव ने सारी बातें बताईं। कुछ ही घंटों में जंगल में बँधे तीनों हिरासत में थे।
एथेंस से ध्रुव अपने बाबा रघुराम के साथ ल्योन पहुँचा। ध्रुव एक हफ्ते तक वहाँ था , उसके बाद ध्रुव ने राजनगर आने का निर्णय लिया।
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लगभग एक हफ्ते बाद-
ल्योन एयरपोर्ट पर-
ध्रुव राजनगर जाने के लिए फ्लाइट पकड़ने वाला था।
इस बार भी ध्रुव के साथ वेरा थी।

ध्रुव-“वैसे तुम ल्योन में कब तक हो?”
वेरा-” बस एक दो दिन और । अब तो यह साफ हो गया है कि इन सबके पीछे नाजिम ही था। अब स्पेशल टीम का यहाँ कोई काम नहीं , रिपोर्ट्स सब्मिट करके सीधा पेरिस जाना है अब।”

उसी समय फ्लाइट के जाने की अन्नोउंसमेट हुई।
ध्रुव एयरपोर्ट के अंदर चला गया।
—————————————–
लगभग एक हफ्ते बाद।
ध्रुव नागराज के साथ कमांडो फ़ोर्स के हेडक्वार्टर में बैठा था।

ध्रुव-“मुझे यकीन था नागराज, तुम राजनगर में मौजूद ऑपरेटर्स को संभाल लोगे।”
“पर यहाँ मामला बहुत ही पेचीदा था।”-नागराज ने मुस्कुराते हुए कहा-” यहाँ काम कर रहे लोगों को ये भी नहीं पता था कि वे किसके लिए काम कर रहे हैं।”
“फिर भी तुमने सारा मामला सुलझा ही लिया।”
“हाँ! शुरुआत में मुझे बस इतना पता चला कि कुछ लोग तुम्हारे परिचितों का पीछा कर रहे थे। ऐसे ही एक रात मैंने एक आदमी को पकड़ा। वो झूठ न बोले इसके लिए मैंने उसे सम्मोहित कर दिया था।
तब उसने मुझे सारी बात बताई। राजनगर में ऐसे बहुत से लोग थे। वो लोग राजनगर में न्यूक्लियर बॉम्ब्स प्लांट कर रहे थे। उनको आदेश था कि अगर कोई भी गड़बड़ हो तो तुरंत ही ब्लास्ट कर दें। पर उसे भी यह नही पता था कि इन सबके पीछे कौन है।सबको केवल एक नाम पता था। इस मिशन का नाम – द डेथ पैटर्न। तब मैंने योजना बनाई। मैंने उसे इस तरह सम्मोहित कर दिया कि वो मेरे बारे में भूल जाये और अपना काम करता रहे। बस जब भी उसे बॉम्ब्स ब्लास्ट करने का आर्डर मिले , वो बेहोश हो जाये। इस तरह अंतिम समय तक किसी को भी शक नहीं होता। ऐसा मैंने बाकियों के साथ भी किया। इसके लिये मुझे कई रातों तक राजनगर की गलियो की खाक छाननी पड़ी।उसके बाद जब उन्हें ब्लास्ट के ऑर्डर्स मिले तो वो सभी बेहोश हो गए। वो सब इस समय जेल में हैं। ”
ध्रुव-“और आखिर कार तुम्हें सफलता मिल ही गयी।”
नागराज ने सहमति में सर हिलाया।
नागराज-“पर तुम्हें कब शक हुआ कि इन सबके पीछे नाजिम था।”
ध्रुव-“शक तो मुझे अलेक्सांद्रिया में ही हो गया था। शॉक और चोक के बारे में मुझे पहले से पता था कि वे नाजिम के लिए काम करते थे। अलेक्सांद्रिया में मैं जैसे ही कुंड में गिरा वो दोनों भाग गए , जबकि वे हमला भी कर सकते थे।मुझे तभी शक हुआ कि सब खेल मुझे बुलाने के लिए रचा गया है। मुझे नबीला पर भी शक हुआ कि वो नाजिम की ही ऑपरेटर है , पर बाद में मुझे पता चला कि वो खुद नाजिम ही था। ऐसा इसलिए भी हुआ कि मैंने नाजिम को पहले कभी देखा नहीं था। शक होने के बाद मैं नाजिम के शहर समारा गया। वहाँ जाकर मेरा शक मजबूत हो गया और एथेंस में पहुँचकर शक यकीन में बदल गया।”
उसके बाद ध्रुव ने नाजिम के मरने तक की कहानी बता दी।
नागराज-“अच्छा ध्रुव अब मैं चलता हूँ, तुम्हें भी बहुत काम होगा।”
ध्रुव -“चलो मैं भी नीचे कैफेटेरिया तक जा रहा था।”
कमरे से निकल कर दोनों नीचे बढ़ने लगे।
नागराज-“क्या तुम्हें लगता है ध्रुव, कि बलि देने से नाजिम को शक्तियाँ मिल जाती।”
ध्रुव-” पता नहीं, पर नाजिम को यह विश्वास जरूर हो जाता कि वह देवता बन जायेगा। इस तरह उसे कुछ भी करने की छूट मिल जाएगी।”
अब तक दोनों कैफेटेरिया पहुँच चुके थे।
ध्रुव ने कॉफी का आर्डर दिया।
वेटर ने नागराज से पूँछा-“सर आप क्या लेंगे?”
“MILK… Without Sugar.”

——————————————-
नमस्कार मित्रों।
आशा करता हूँ ये पूरी कहानी आपलोगों को पसंद आई होगी।
पढ़ने के बाद पूरी सीरीज कैसी लगी ये बताना न भूलें।
इस कहानी में संवाद, रहस्य, रोमांच , शब्द कैसे थे ये बताना न भूलें।

धन्यवाद।

Written By – Akash Pathak for Comic Haveli

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7 Comments on “The Death Pattern Chapter 6”

  1. Wah Aaksh bhai bahut jabardast story thi.aap bahut hi badiya writer hai. Is story ke liye aap ne bahut mahnat ki.Location ,action, nai nai places wo bhi out of india sab badiya.new dharm ke bare me bhi bataya.dhurve ne bhi apani budhi ka loha manava liya najim se.nagraj ka bhi aacha rol raha.kul milkar jordar story rahi.
    Is ke liya aap ko bahut bahut badhaiya aur dhanyavad. App hum logo ke manoranjan ke liya nai story late hai.jis se hum logo me comics ke liye junoon bana rahata hai.
    Is series ki agar comics bhi ban jaye to maja aa jay.
    Aap ke next story ka intajar rahega.

  2. Wah Akash Bhai me aapki naagbharat wali kahani padh k Hi aapka fan bana tha aur uske baad Hi mene comic Haveli site ki baki stories padhi, ye series bhi bahut damdar thi, dhruv ka alag alag sahar ka safar acha lga, vera ko vapas laye story me uska bhi acha use kiya, halanki idni jabardast story ka end thoda jaldbazi me ho gaya, but is series k kuch highlight gajab k the
    Jaise dhruv ka car k darwaze se lamba rasta paar karna
    Dhruv ka room se nikalna
    Nazim ka nabila ban k dhruv k paas Jana

    Waiting for next new story

  3. Aare ye to badi jaldi khatam ho gai.
    Per bht maza aaya
    Naraj ka kaam karne ka tareeka bhi accha laga nahi to nagraj aise chhup kar kaam karne walo se me se nahi hai.
    Idhar dhruva as usual brilliant
    Waiting for ur next serise

  4. सबसे पहले तो सॉरी आकाश भइया। बहुत देर बाद रिव्यू दे रहा हूँ।

    अब आता हूँ स्टोरी पर । जब ये सिरीज़ शुरू हुई, इसने एक न्य रिकॉर्ड बना दिया। नागभारत ने जितना धमाल मचाया था उससे दुगुना धमाल इस श्रृंखला ने मचाया। इस कहानी की शुरुआत ज़बरदस्त तरीके से की गई। ध्रुव का अपने दादा की खोज में मिस्र के विभिन्न शहरों में भटकना, नाज़िम के एक से बढ़कर एक खतनाक षड्यंत्र। सब कुछ धमाकेदार था। साथ ही इस कहानी की वजह से मिस्र के विभिन्न शहरों के बारे में भी जानकारी मिली। इस श्रृंखला के सभी भागों ने पूरी तरह से बांधा हुआ था। और अब ये रहा लास्ट पार्ट। सच अगर पूछिए तो मुझे लगता है इस कहानी के अंत के साथ नाइंसाफी हुई है। वो नाज़िम जो इतना चालबाज़ इतना खतरनाक था वो इतनी आसानी से मर गया! ध्रुव ने अपने बाबा कप इतनी आसानी से छुड़ा लिया! एक्शन सीन्स ने भी उतना प्रभावित नही किया। मुझे ऐसा अंत बहुत खल रहा है। इसका अंत और भी धांसू और खतरनाक हो सकता था। खैर अब तो हो गया अंत। आशा करता हूँ अगली कहानी इससे भी ज़बरदस्त होगी और उसका अंत उससे ज़बरदस्त।

    7 out of 10

  5. With the End amazing work brother… Good job..
    8/10.
    Nagraj/rajnagar pr thoda focus karne ki jrurat thi..
    But a perfect suspense/thriller story ️‍♀️ wali…
    Thanks!

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