The last fighter of light-part 1

संसार सदियों से ताकत को लेकर दो समूहों में बंटा रहा है। देवताओं और राक्षसों के बीच के युद्ध को तो हर कोई जानता है। अगर किसी वस्तु का वजूद है तो उसे खत्म करने वाली ताकत का भी वजूद है। हर एक चीज की विपरीत अवस्था इस ब्रम्हांड में मौजूद है। अगर छाया है तो धूप है। बर्फ है तो आग है। दोनों विपरीत चीजें अलग अलग अवस्था में अलग अलग तरह का उदाहरण बनती रही है। कभी अच्छाई के लिए तो कभी बुराई के लिए।

यह महाकथा ऐसे ही एक विपरीत अवस्थाओं के चक्कर में फंसे समुदाय की है जिसे ताकत ने दो भागों में बांट दिया। एक ने अच्छाई का साथ दिया तो एक ने बुराई का। जिस हिस्से ने अच्छाई का साथ दिया वह रोशनी के वफादार कहलाए और जो बुराई के साथ मिल गए उन्हें अंधेरे के नुमाइंदे कहा जाने लगा। दोनों के अपने अलग-अलग मकसद बने अपनी अलग-अलग मंजिलें बनी और अपने अलग-अलग नियम और कायदे। अंधेरे के नुमाइंदे जिनका मकसद रोशनी के वफादारों को खत्म करना और इस विश्व पर राज करना था तो वहीं रोशनी की वफादारों का कार्य संसार में शांति बनाए रखना, खुद की हिफाजत करना और अंधेरे के नुमाइंदों को उनके मकसद में कामयाब होने से रोके रखना था।

रोशनी की वफादारों ने अपने इस कार्य के लिए अपने ही समुदायों में से कुछ खास लोगों को चुना और उन्हें रोशनी के रक्षक नाम दें संसार के अलग-अलग कोनों में भेज दिया। इन रोशनी के रक्षकों के पास कुछ खास तरह की क्षमताएं होती थी जिसे देवीय शक्ति या सुपर पावर कहा जा सकता है। इन शक्तियों के दम पर वह अंधेरे के नुमाइंदों से लड़ते और उन्हें खत्म करते थे।

समय दर समय यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा पर सन 2100 के पास एक ऐसा समय आया जब रोशनी के वफादारों की शक्तियां कमज़ोर पड़ गई और अंधेरे के नुमाइंदों की शक्तियां बढ़ गई। धीरे-धीरे अंधेरे के नुमाइंदे रोशनी के वफादारों के ऊपर हावी होते गए और रोशनी के रक्षकों को खत्म करते गए। उनका यह काम तब तक जारी रहा जब तक आखिरी रोशनी का रक्षक भी खत्म होने की कगार पर नहीं आ गया।

इस कहानी में इस आखिरी रोशनी के रक्षक की संघर्ष यात्रा भी हैं जिसने कई सारी मुसीबतों का सामना करते हुए खुद को अंधेरे के नुमाइंदों के आगे खड़ा किया। मात्र 4 साल की उम्र मे बचने से लेकर आगामी कई वर्षों तक का सफर इस कहानी में हैं।

आशा करूंगा आप लोग इस कहानी से जुड़े रहेंगे और यह आपको पसंद आएगी।

आभार – Aman aj
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सन 2128

शाम का समय

न्यूयॉर्क का एक घना अंधेरा जंगल।

इस घने अंधेरे जंगल के बीचोबीच एक घर बना हुआ था।

इस घर से निकलकर एक 4 साल का छोटा सा बच्चा इस घने जंगल की ओर जा रहा था। तभी उसकी मां ने पीछे से आवाज़ लगाई।

“रुको”

“कहां जा रहे हो”

“इधर आओ”

“वहां कुछ नहीं है”

आवाज लगाने से बच्चा नहीं रूका, उसकी मां तेजी से उसके पास गई और उसके हाथ पकड़ उसे आगे जानें से रोका।

“ए पागल है क्या”

“जब मैंने कहा रुको तो उसका मतलब तुम्हें रुकना था, तुम्हें कितनी बार कहा है घर से बाहर मत निकला करो, चलो अब अंदर चलो”उसकी मां ने जबरदस्ती उसे अंदर की ओर खींचा और बच्चा मजबूरन मां का हाथ पकड उसके साथ साथ चल
दिया। इस दौरान बच्चे के पैर बार-बार रुक रहे थे जैसे उसे घर के अंदर नहीं बल्कि जंगल की ओर जाना है।

4 साल का यह बच्चा, जिसके सर पर लंबे-लंबे बाल थे। देखने से आर्यवर्त राज्य का कोई राजकुमार लग रहा था। शरीर की सामान्य वेशभूषा, पर अद्भुत नजारा।

“अरे जेसिका, यार क्यों बच्चे पर जुलम कर रही हो” दोनों के घर में आते ही सोफे पर बैठा एक हट्टा कट्टा और आदिवासी मानव जैसी वेशभूषा रखने वाला व्यक्ति बोला जो इस बच्चे का पिता था।

“आप भी ना, यह सर चढ़ता जा रहा है, आज दिन में ही तीसरी बार यह घर से बाहर निकला है। इससे पहले तो कभी कभी निकलता था और अब तो उसने हद कर दी”

“अरे सुधर जाएगा यार, बच्चा है, वह भी कोई ऐसा वैसा नहीं रोशनी का रक्षक, जिसने भी यह आखिरी है”

“हां तो, रोशनी का रक्षक है इसका मतलब यह थोड़ी ना है जो मन आएगा वह करेगा, अभी छोटी सी उम्र में ऐसी हरकतें कर रहा है बड़ा होकर क्या करेगा”

“यह तो भगवान ही जाने”

इसका जवाब तो सच में भगवान के ही पास है। जल्द ही अंधेरा हो गया। जेसिका रात के खाने का इंतजाम करने लगी और वहीं उसका पति सोफे पर बैठा इधर-उधर के काम निपटाने लगा। जल्दी ही घर में एक और शख्स का आवागमन हुआ। इस शख्स की उम्र 60 साल के आसपास लग रही थी, लंबी लंबी दाढ़ी और लंबे लंबे बाल। शरीर पर भगवा रंग का कुडत्ता पहना हुआ था।

“ओह आओ विष्णुवर, तुम्हारा ही इंतजार था, बड़े दिनों बाद आना हुआ।”

“धन्यवाद साहिब, आज ही हिंदुस्तान से आया था तो सोचा पहले आपसे मिल आऊं, आश्रम से कुछ जरूरी संदेश भी आपको देने थे”

“ओहो चलो कोई बात नहीं, पहले आराम से बैठो, खाना-वाना खाओ फिर बात करते हैं”

“हां खाने की तो जरूरत है, भुख कुछ ज्यादा ही लग गई है ऊपर से 60 किलोमीटर दौड़ के आ रहा हूं”

“दौड़कर आ रहे हो पर क्यों, अरे यार टैक्सी कर लेते, तुम्हारे पास 70-90 किलोमीटर पर घंटा दौड़ने की क्षमता है तो इसका मतलब यह थोड़ी ना है कि तुम बिल्कुल ही कंजूसी बरतो”

“अरे साहिब मेरा बस चलता तो मैं तो हिंदुस्तान से भी दोड़ कर आ जाता”

“हा हा हा, क्या यार तुम भी”

जल्दी ही खाने की मेज पर खाना लग चुका था। सब एक-एक कर खाना खाने लगे।

“आश्रम में सब ठीक तो है ना”खाना खाते हुए जेसिका के पति ने विष्णुवर से पूछा

“हां, आचार्य वर्धन के होते हुए आश्रम का तो कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता, अभी पिछले ही हफ्ते कुछ अंधेरे के नुमाइंदों ने हमला किया था पर हमने उनसे निपट लिया,तीन हफ्ते पहले भी ऐसा ही हमला हुआ था, इन हमलों के चलते आचार्य वर्धन ने मुझे यहां आप लोगों को सावधान करने के लिए भेजा”

“ओह, तुम चिंता मत करो, अंधेरे के नुमाइंदे यहां तक नहीं पहुंच सकते, उन्हें तो इस जगह की खबर ही नहीं होगी”

“बात वो नहीं है” विष्णुवर ने चिंतित स्वर में कहा” अंधेरे के नुमाइंदों की प्रभुता बढ़ता जा रहा है, आम इंसानों के संपर्क में आने के कारण वह अब हर एक जगह पर अपना प्रभाव बना चुके हैं। पुलिस अफसरों के अधिकारियों से लेकर बड़े-बड़े नेताओं तक उनकी पहुंच है और उनकी आदमी भी अब आम लोगों में रहने लगे हैं। यह पहचानना बहुत मुश्किल हो रहा है कि कौन आम इंसान हैं और कौन अंधेरे का नुमाइंदा, इसीलिए आप लोगों को आगाह करना था कि आम इंसानों से भी आपको सावधानी बरतनी होगी, अब आम इंसानों के वेश में कोई अंधेरे का नुमाइंदा भी हो सकता है”

“यह तो सच में चिंताजनक बात है, आगे से सावधानी थोड़ी ज्यादा रखेंगे”

जल्दी ही सभी का खाना खत्म हुआ। खाना खाने के बाद विष्णुवर प्रस्थान करने को तैयार था। वह बाहर दरवाजे पर खड़ा अपनी कुछ आखरी बातें कर रहा था।

“सुनने में आया है अंधेरे के नुमाइंदे रोशनी की आखिरी रक्षक को बड़ी बेसब्री से ढूंढ रहे हैं, वह अपनी हर इक आखिरी कोशिश रोशनी के रक्षक को ढूंढने में लगा रहे हैं। इस काम को अंजाम देने के लिए उन्होंने एक खास अंधेरे के नुमाइंदों को चुना है जो कहीं भी आ जा सकता है और वह अपना रूप बदल सकता है”विष्णुवर खाना खाने के बाद अपने हाथों को मलते हुए बोला।

“करने दो उन्हें कोशिश, रोशनी का रक्षक अब उन्हें नहीं मिलने वाला, वही बात उस खास नुमाइंदे की तो जब उसे जगह का पता ही नहीं चलेगा वह यहां आएगा कैसे”

“खैर, कुछ कह नहीं सकते। भगवान हमारी रक्षा करें। और आप भी अपनी रक्षा ध्यान से करना, चलिए मैं अब इजाजत चाहता हूं”

“मैं तो कह रहा था तुम रात यहीं रूक लेते”

“रुकता …पर क्या करूं कुछ और जरूरी काम है जिन्हें पूरा करना है”

“चलो तुम्हारी मर्जी है , जरा ख्याल से जाना”

थोड़ी देर बात करने के बाद दोनों गले मिले और इसके बाद विष्णुवर ने अपनी रफ्तार पकड़ी और वहां से चला गया।

विष्णुपुर को जाता देख जेसिका का पति भी पीछे की ओर मुड़ा और घर के अंदर चला गया।

जल्द ही सब सोने की तैयारी करने लगे। बेड को ठीक करते हुए जेसिका का ध्यान बाहर की ओर गया जहां एक लाईट अभी भी चल रही थी।

“अरे सेमस” जेसिका बोली” तुमने बाहर की लाइट तो चलती ही छोड़ दी”

“ओ यार पर मैंने तो उसे बंद किया था, शायद, रुको मैं अभी बंद करके आया”

सेमस लाइट बंद करने के लिए बाहर की ओर निकला। कुछ कदम चलने के बाद वह लाइट के बल्ब के पास पहुंचा और बल्ब का बटन दबा उसे बंद कर वापिस घर के अंदर जाने लगा पर जैसे ही वह घर के दरवाजे के पास पहुंचा बलब वापिस जग गया।

” यह क्या हो रहा ” सेमस ने मन ही मन सोचा और वापिस उस बटन की ओर जा उसे बंद किया पर इस बार बटन तो बंद हुआ पर लाइट नहीं। सेमस यह सब देख थोड़ा हैरान हुआ। उसने वापिस बटन दबाया और बार-बार दबाया पर उसकी एक भी कोशिश में लाइट बंद नहीं हुई।

“तुम इसे नहीं बंद कर सकते” सैमस के पीछे से एक भारी-भरकम आवाज आई। आवाज सुनते सेमस पीछे पलटा।

उसके सामने एक अंधेरा धुंआ खड़ा था जो धीरे-धीरे अपना आकार ले रहा था। अंधेरे के नुमाइंदे उस तक पहुंच चुके थे।

“कौन हो तुम”

“तुम्हारी मौत”

इससे पहले सेमस कुछ समझ पाता वह अंधेरा धुंआ उड़ता हुआ सेमस के पास आया और उसके आसपास लिपट गया। लिपटते हुए उसने सेमस की हड्डियों का कचुमर बना दिया। दो पल भी नहीं लगे थे सेमस को अपने प्राण त्यागने में।

यह अंधेरी परछाई वह खास अंधेरे का नूमाईदा था जिसे रोशनी के रक्षक को खत्म करने के लिए भेजा गया था।

सेमस को खत्म करने के बाद यह अंधेरी परछाई घर की और बढने लगी।

घर के अंदर जेसिका जो अभी भी बैड ठिक कर रही थी। वह इस बात से अनजान थी कि एक खतरा उसकी और आ रहा है।

जल्दी ही अंधेरी परछाई ने जेसिका पर भी हमला बोल दिया और उसके आसपास लिपट कर उसका भी कचुंबर निकाल दिया।

यह बेरहम अंधेरी परछाई दोनों को खत्म करने के बाद उस छोटे बच्चे की ओर बढ़ने लगी जो रोशनी का आखरी रक्षक था।

रोशनी के आखिरी रक्षक और अंधेरी परछाई दोनों के बीच बस एक दीवार का ही फासला था जो आने वाले समय में एक महागाथा का रूप लेने वाला है।

अगले भाग में क्रमशः जारी।

2 Comments on “The last fighter of light-part 1”

  1. बढ़िया कहानी है। प्रारम्भ बहुत उत्तम रूप में किया है आपने लेकिन कहानी का यह भाग अत्यंत छोटा था जिससे कहानी का कुछ अधिक समझ नहीं आया। थोड़ा भाषायी अशुद्धियाँ अभी भी शेष हैं कृपया उनपर ध्यान दें।
    और अगले भाग की प्रतीक्षा रहेगी।

  2. भाई ये कहानी तो प्रतिलिपी पर पढ़ लिया हु 22 एपिसोड है शायद । और भी कहानियां अपडेट करिए प्रतिलिपी पर।

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