vishparast- 3rd part of kshatipoorti series

इंसानियत को जिंदा रखना है तो हैवानों का संहार करना पड़ता है, आतंकवाद की आत्मा के विष को काटना है तो अपने शरीर के विष को हथियार बनाना पड़ता है| दुनिया के लिए वो जो भी हो, आतंकहर्ता नागराज मेरे लिए मेरा खुदा है, इश्वर है, भगवान है और मैं हूँ उसका…विषपरस्त!!


मौत का बाजीगर – Released in Set 2 of 2016
विषपरस्त – Upcoming (Excepted in Nov Set of 2018)
क्षतिग्रस्त – Forth Coming
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इस सीरीज की शुरुआत के लिए हमें चलना होगा क्षतिपूर्ति कॉमिक्स के पहले।
अतंकहर्ता नागराज की जर्मनी सीरीज ।
आतंकवाद की अमर बेल को जड़ से उखाड़ने के लिए नागराज जा पहुँचता है जर्मनी।उसके इस अभियान में सारे नाग एक गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं और नागराज के खिलाफ हो जाते हैं।
परमपिता के आदेश स्वरुप नागराज सफल तो हो जाता है , पर उसे अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ती है। सारे नागों को अपनी भूल का एहसास होता है पर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
नागराज की इच्छा अनुसार बाबा गोरखनाथ नागराज का अंतिम संस्कार भी कर देते हैं।
(नोट-अगर आपने पहले दोनों भाग नहीं पढ़े, तो पहले उन्हें ही पढ़े)
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नागराज की मृत्यु की खबर विश्व भर के आतंकवादियों को हो जाती है और वो नागराज की मौत का जश्न मनाते हैं जिससे वे कर सकें अपनी-
क्षतिपूर्ति।


● मसाया
सीरीज के शुरुआत से ही दिखाया गया है कि एक लड़का अपने मस्तिष्क में गूंजती आवाजों के निर्देशानुसार सफर करता है, जिसे खुद का नाम भी नहीं पता रहता।
नागानंद और नागनाथ जो कि नागराज के साथ हमेशा रहते थे , वे दोनों भी इस अदभुत लड़के के साथ ही रहते हैं।
अपने सफर के दौरान ही इस लड़के की टक्कर नागदंत से हो जाती है । अपने दिमाग में गूँजती आवाज के अनुसार ही वह नागों की मदद से नागदंत को हरा देता है।
उसकी इस उपलब्धि के कारण वहाँ के लोग इसे एक नाम देते हैं-
मसाया।। मसाया यानी ईश्वर का भेजा हुआ देवदूत।
यही लड़का आगे चलकर थोडांगा से भी टकराता है और नागों की ही मदद से उसे भी हरा देता है।
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या ये लड़का ‘मसाया’ ही नागराज है?
नागराज की तरह नाग इसके शरीर में नहीं रहते परंतु नाग इसका आदेश मानते हैं।
नागराज की तरह इसकी खाल हरी नही है पर उसी की तरह मजलूमों की पुकार इसके हृदय को भी भेद देती है।
दूसरे भाग यानी मौत का बाजीगर में एक दृश्य के द्वारा दिखाया गया है कि यही लड़का कुछ महीनों पहले हिमालय की घाटी में स्थित एक गाँव में जमीन से निकलता है जिसे गाँव वाले शैतान और मनहूस समझ कर भगा देते हैं।
लगभग सारे ही फैंस को यकीन है कि मसाया ही नागराज है, परंतु कैसे ?
उसके मस्तिष्क में गूँजती आवाज किसकी है?
इन सारे सवालों के जवाब के लिए मुझे और आपको भी करना होगा इंतेजार।
● नागदंत
क्षतिपूर्ति में दिखाया गया है कि नागदंत नागराज के डर से नार्दग के रूप में छिप कर रह रहा है।
नागदंत बताता है कि किसी ‘शख्स’ ने उसे शल्य चिकित्सा से नए हाथ भी प्रदान किये थे?
कौन है वो रहस्यमयी शख्स?
क्या नागदंत सच में मारा गया?
● रहस्यमय व्यक्ति
इस श्रृंखला के दोनों भागों में दिखाया गया है कि दो रहस्यमय पुरुष मसाया के आस पास ही हमेशा रहते हैं और उसके कार्यो का अवलोकन करते हैं ,पर कभी उसकी सहायता नहीं करते।
दोनों की बातों से साफ जाहिर होता है कि वे मसाया और नागराज से जुड़ी सारी सच्चाई जानते हैं,, पर यहाँ भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे हैं कौन?
●नाइट्रो(NITRO)
Nitro यानी New international terrorism removal organisation
इस संघठन में वे लोग हैं जिन्होंने नागराज के विभिन्न अभियानों में पहले भी उनका साथ दिया है।
आने वाले समय में नाइट्रो की क्या भूमिका है,यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।पर इतना तो तय है कि कुछ ऐसे किरदार भी सामने आएँगे जिन्हें हम लगभग भूल चुके हैं।
●पैराडॉक्स
पहले भाग यानी क्षतिपूर्ति में एक नए खलनायक को दिखाया गया है जिसका नाम है पैराडॉक्स।
पैराडॉक्स खुद बताता है कि नागराज के कारण ही उसने स्वयं को गुमनामी के अंधकार में धकेल दिया था।
वह कुछ आतंकवादियों को अपने विष से संक्रमित करके आतंक फैलाने के लिए भेज देता है।
यहाँ उन आतंकवादियों से टकराव होती है उन नागों से जिन्होंने मरते हुए नागराज को वचन दिया था कि वे उसका अधूरा कार्य पूरा करेंगे।
पर सौडांगी और बाकी के नाग भी इस अजीबो गरीब विष को नहीं पहचान पाते और उनसे हार जाते हैं।
तब उन नागों को बचाने के लिए आता है- नागराज।
पर पैराडॉक्स के पास ऐसा तीक्ष्ण विष कहाँ से आया?
कौन है पैराडॉक्स?
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मानवता के लिए उसने अपना सब कुछ लुटा दिया, पर मौत भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती क्योंकि वो है-
मौत का बाजीगर
श्रृंखला के दूसरे भाग से कहानी और भी जटिल होती जाती है , जिसे पढ़ कर एक नया अनुभव मिलता है।
कई सवालों के जवाब मिलते हैं तो कई नए सवाल भी हमारे सामने आते हैं।
●अतंकहर्ता और विश्वरक्षक
इस भाग के शुरुआत में ही दिखाया गया है कि कुछ लोग नागराज की मौजूदा स्थिति का अवलोकन करते हैं।
यहाँ बताया गया है कि नागराज के एक फैसले के कारण नागराज का सम्पूर्ण अस्तित्व दो भागों में बंट गया था- विश्वरक्षक और अतंकहर्ता।
अतंकहर्ता नागराज तो जर्मनी में मर चुका है,तो फिर कौन है जो नागों को बचाने के लिए आया है।
क्या वो विश्वरक्षक नागराज है?
यहाँ तक तो फिर भी ठीक है ,पर कहानी जटिल तब होती है जब आखिरी पन्नों में विसर्पी को बचाने के लिए एक शख्स आता है जो खुद को ‘राज’ कहता है।
अब यह तीसरा शख्स कौन है?
●विसर्पी
नागराज की मृत्यु से आहत विसर्पी नागद्वीप छोड़ कर महानगर आती है जिससे वह नागराज को दिया हुआ वादा पूरा कर सके।
यहाँ एक रहस्यम शख्स कुछ गुंडों को फनहरी देता है जिससे वे विसर्पी को काबू कर सकें।
कौन है वो रहस्यमयी शख्स?
उसे विसर्पी के बारे में कैसे पता?
क्या वो नगीना है?
●दो समयधाराएँ
इतना तो तय है कि इस कहानी में दो समयधाराओं का समावेश है ,पर नागराज के जन्म के समय ऐसा क्या हुआ कि नागराज का सम्पूर्ण अस्तित्व दो भागों में बंट गया।

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नितिन मिश्रा द्वारा लिखी गयी ये कहानी वाकई बहुत ही अदभुत और रोमांचक है।
हेमंत कुमार द्वारा बनाये गए चित्र बहुत ही शानदार हैं।
इंकिंग और रंगसज्जा चित्रों को जीवंत कर देती है।
उम्मीद है ये जादू तीसरे और चौथे भाग में भी देखने को मिलेगा।
कहानी के संवाद लंबे समय तक जेहन में रहते हैं, कुछ संवाद मैं यहाँ भी लिख रहा हूँ-
● पर तूफान कितना ही भयानक क्यों न हो,जिंदगी आगे बढ़ने का रास्ता तलाश ही लेती है
● भगवान सबका है , भगवान हमें कभी नही भूलता, बस हम उसके बंदे हैं यह भूल जाते हैं।
● यह उसके जीवन का श्राप है या वरदान यह पता नहीं, लेकिन कुदरत ने उसे पूरा मानव बनाना कुबूल न किया,यह बात और है कि इंसानियत उसमें हमेशा से ही इंसानों से ज्यादा रही।


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आपको यह आर्टिकल कैसा लगा, कमेंट में जरूर बताएँ।
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Written By -AKASH PATHAK
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आगामी कहानी नागभारत 2 की एक झलक->
युद्ध।
युद्ध हमेशा बलिदान माँगता है।
कालक्षेत्र में हुए महायुद्ध में सारे महानायकों ने कुछ न कुछ बलिदान दिया।
किसी ने झूठे रिश्तों की बलि दी तो किसी ने सच्चे रिश्तों की।
किसी ने अपना गुरु खोया तो किसी ने अपना सच्चा मित्र खोया ।
नताशा ने अपने पिता को खोया तो नागराज ने भारती को खोया।
पर नागभारत के उस महायुद्ध में विजयी होने के लिए कुछ लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, जैसे वेदाचार्य।
विनाश एक युद्ध की मूल आवश्यक्ता है क्योंकि विनाश ही सृजन का मार्ग प्रशस्त करता है।
रात जितनी घनी अंधेरी होती है , आने वाली सुबह की पहली किरण उतनी ही चमकदार होती है।
समंदर की लहरें जितनी ऊँची होती हैं, उनसे फैली तबाही का मंजर उतना ही भयानक होता है ।
पर तबाही कितनी ही भयानक क्यों न हो, जिंदगी आगे बढ़ने का रास्ता तलाश ही लेती है।
दुनिया में ऐसा कोई युद्ध नहीं हुआ जो आने वाले युद्ध को टाल सके।
हर युद्ध का अंत किसी और युद्ध का प्रारंभ होता है।
जो घाव ‘उसकी’ आत्मा में लगा है उसकी पीड़ा समस्त नागों को महसूस करनी होगी।
अपने अस्तित्व को बचाने के लिए नागों को लड़ना होगा एक युद्ध।
एक महायुद्ध-
नागभारत।

नागभारत 2…
जल्द ही सिर्फ कॉमिक हवेली पर।
By- Akash Pathak
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अगर आपने नागभारत नहीं पढ़ी तो अभी पढ़े ->

NagBharat Complete Series


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2 Comments on “vishparast- 3rd part of kshatipoorti series”

  1. वाह आकाश जी, बहुत ही सूक्ष्म अवलोकन किया है आपने, पढ़कर आनंद आया ।
    साथ ही तीसरा संवाद – इंसानियत उसमें इंसानों से ज़्यादा थी दिल को छू गया ।

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