XSIZER-I AM NOT A HERO PART-1

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रितिका की मौत का सारा दृश्य अभी भी उसकी आंखों के सामने घूम रहा था, पर उसके पास करने के लिए कुछ नहीं था । नम्र  जिंदा तो था लेकिन वह भी किसी मृत इंसान से कम नहीं लग रहा था । उसके बाल बिखरे हुए थे ,आँखें पूरी तरह से बैंगनी थी पर उसका शरीर समान्य था । वह सड़क पर ऐसे चल रहा था जैसे कोई दारू पिया पागल इंसान चल रहा हो । सड़क पर आने वाली गाड़ियां उसके पास से गुजर रही थी; लेकिन नम्र का इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं था । उसके लिए आस-पास सब कुछ शांत था , उसे ना तो गाड़ियों का शोर सुनाई दे रहा था ना ही लोगों की आवाजे । वह बस सड़क पर चलता जा रहा था , चलता जा रहा था और तब तक चलता रहा जब तक एक सीमेंट से भरे ट्रक ने उसे टक्कर नहीं मार दी । इस टक्कर से नम्र हवा में उड़ता हुआ बहुत दूर जा गिरा और सड़क से रगड़ता हुआ पास की खाई में गिर गया । इस दौरान उसका सामान्य शरीर फिर से बैंगनी हो गया था, लेकिन नम्र का इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं था; वह तो बस अभी भी रितिका की मौत वाले दृश्य में खोया हुआ था । उसे तो इस बात का भी एहसास नहीं हुआ कि उसे एक ट्रक ने टक्कर मार दी है और वह एक खाई में गिर रहा है ‌। वह तब तक रीतिका की मौत वाले दृश्य में खोया रहा जब तक वह खाई के नीचे तक नहीं पहुंच गया।
नीचे गिरते ही एक झटके में उसकी हड्डियों के टूटने की आवाज आई और सब कुछ थम गया।

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सन 2140

कुछ दिन पहले ।

स्कूल की एक साइसं लैब।

“आओ चलो शुरू करें अंताक्षरी लेकर प्रभु का नाम”

” अबे तू पागल हो गया क्या नम्र , यहां प्रैक्टिकल चल रहे हैं और तुम्हें अंताक्षरी की पड़ी है!  “

“पागल तो तू है विवेक, तुझे तो पता है ना ,मुझे इस  प्रैक्टिकल ब्रैक्टिकल में कोई इंटरेस्ट नहीं , ऐसे ही धक्के से तू मुझे यहां ले आया ।”

” अरे यार यह केमिस्ट्री के प्रैक्टिकल है और मुझे केमिस्ट्री का प्रैक्टिकल बहुत पसंद है, इसमें आज हम डायमंड अगैरह वगैरह बनाएंगे “

पीछे से रितिका की आवाज आई ,

“अबे बंदर डायमंड नहीं क्रिस्टल बनाने वाले हैं वह भी Na²so⁴ के।”

नम्र –  कुछ भी बनाओ , मुझे इसमें कोई इंटरेस्ट नहीं ।

रितिका – हां तुम्हारा इंटरेस्ट तो उस चुड़ैल जिया में है ।

नम्र – पागल मेरी होने वाली बीवी है वो इज्जत से बात कर ।

रितिका – हुंह ,मैं तो कभी ना करूं ।

नम्र – क्यों? जलन हो रही है क्या ??

रितिका – मैं क्यों जलूंगी भला ।

नम्र –  अरे अरे अरे देखो स्माइल कर रही है ।

नम्र ये बात बोलते वक्त अपना हाथ रितिका के कंधे पर रख देता है।

रितिका –  जस्ट शट अप और अपना हाथ हटाओ मेरे ऊपर से  ।

नम्र – नहीं हटाऊंगा ।

रितिका – हटाते हो या फिर मैं….।

नम्र का हाथ रितिका के कंधे पर होता है और रितिका जोर से उसका हाथ अपने कंधे से हटाती है जिससे उसका हाथ पास की एक कांच की परखनली से टकरा जाता है और उसके हाथ से खून निकलने लगता है ‌।

नम्र –  आह!

रितिका – सॉरी सॉरी सॉरी मैं तुम्हें चोट नहीं पहुंचाना चाहती थी गलती से हो गया ।

नम्र – हां इट्स ओके मैं जानता हूं , कोई बात नहीं कुछ नहीं हुआ ।

रितिका – बहुत खून बह रहा है , रुको मैं रुमाल बांध देती हूं ।

नम्र – अरे रहने दो ना , इसकी कोई जरूरत नहीं है हल्का सा घाव है भर जाएगा ।

रितिका – अरे ऐसे कैसे भर जाएगा , और हमें प्रैक्टिकल भी करने हैं , तुम इस घाव के साथ प्रैक्टिकल कैसे करोगे ?

नम्र –  अरे यार सिंपल सा प्रैक्टिकल है , मैं एक हाथ से ही कर लूंगा , वैसे भी मुझे इसमें इंटरेस्ट तो है नहीं ।

रितिका – ओके जैसी तुम्हारी मर्जी , पर मेरे ख्याल से तुम्हें हाथ पर पट्टी बांध लेनी चाहिए ।

नम्र – अरे मैंने कहा ना, मुझे नहीं बांधनी चलो प्रैक्टिकल करें , टीचर भी आ गया ।

तभी टीचर की क्लास में एंट्री होती है ।

चलो बच्चों सब प्रैक्टिकल शुरू करो आज पहले ही बहुत लेट हो चुके हैं , सबसे पहले आपके सामने कुछ बॉक्स पड़े हैं वह उठा लो , यह Na2So4 के बॉक्स जो आज ही आए हैं और आज ही हम इसका पहला प्रैक्टिकल करेंगे । सब तैयार हैं ना ?

” हां ” सभी बच्चों ने जवाब दिया।

नम्र – मुझे पता था , सर सबसे पहले यही लाइन बोलेगें ।

रितिका – चुप हो जाओ , चलो , चलकर बॉक्स उठा लें। सारे बच्चे जा चुके हैं बॉक्स उठाने ‌।

नम्र – हां चलो ।

नम्र और रितिका भी बक्से को उठाने जाते हैं , लेकिन बक्सा उठाते वक्त एक बक्सा नीचे गिर जाता है जिससे Na2So4 फर्श पर बिखर जाता है और उसकी कुछ मात्रा नम्र के हाथ पर लगे हुए घाव पर भी पड़ जाती है ।

रितिका – ओ सॉरी , लगता है ,आज का तुम्हारा दिन ही बुरा है ।

नम्र – लग तो कुछ ऐसा ही रहा है ।

अचानक नम्र की हरकतें बदल जाती है ।

नम्र – आ…… मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है , यह मुझे क्या हो रहा है , ओ यह दर्द बहुत ज्यादा तेज है ।

रितिका – हा हा , मजाक कर रहे हो क्या ?

नम्र – ये मजाक नहीं …

नम्र बुरी तरह से चिल्लाने लगता है , होने वाला दर्द बहुत तेज था धीरे-धीरे उसका शरीर पीला पड़ने लगा ।

रितिका – नम्र … नम्र … तुम्हें क्या हो रहा है ।

नम्र को यूं चिल्लाते हुए देख टीचर दौड़ कर उसके पास आता है और उसकी नजरें सबसे पहले फर्श पर पड़े पाउडर पर पड़ती हैं ।

टीचर – यह तो na2so4 नहीं है , रुको रुको , चलो बच्चों साइड में हो , मुझे देखने दो और कोई एंबुलेंस को बुलाओ , अगर इसे ज्यादा ही तेज दर्द हो रहा है तो।

रितिका – सर इसे बहुत तेज दर्द हो रहा है , मैं अभी एंबुलेंस को कॉल करती हूं ।

विवेक – इसका तो पूरा शरीर पीले से बैंगनी रंग में बदल रहा है , आखिर यह क्या हो रहा है इसे ? कहीं किसी जहर का असर तो नहीं ?

टीचर – पता नहीं यह तो अब अस्पताल जाकर ही पता चलेगा ।

कुछ ही देर में एंबुलेंस आ जाती है और सब नम्र को उस में डाल कर हॉस्पिटल ले जाते हैं ।

2 घंटे बाद

डॉक्टर साहब ऑपरेशन थिएटर से बाहर आते हैं,

रितिका – डॉक्टर साहब अब कैसा है नम्र?

डॉक्टर – घबराने की कोई बात नहीं है अब वह खतरे से बाहर है , उसके शरीर में पॉइजन था पर हमने उसे एंटीडोट दे दिया है कल सुबह तक उसे होश आ जाएगा और शायद 2 या 3 दिन बाद आप उसे घर भी ले जा सकते हैं ।

अब तक नम्र के मां और पिताजी भी वहां पहुंच चुके होते हैं ।

नम्र की मां – भगवान का शुक्र है कि मेरा बेटा ठीक है मैं तो बहुत घबरा गई थी ।

नम्र के पिता जी – पर वह तो स्कूल गया था तो वहां से उसके शरीर में जहर कैसे आया क्या किसी सांप ने काट लिया था ।

रितिका – हम सब लोग प्रैक्टिकल लैब में प्रैक्टिकल कर रहे थे तभी केमिकल उसके शरीर पर गिर गया शायद उसी वजह से यह सब हुआ होगा वह केमिकल खतरनाक तो नहीं है पर पता नहीं यह कैसे हो गया , हमारे टीचर ने कहा है कि वह कुछ ही दिनों में इसका पता लगा लेंगे ।

नम्र के पिताजी – ओह तो यह बात है स्कूल में ऐसे खतरनाक केमिकल नहीं रखने चाहिए बेटा । अगर आज हमारे बेटे को कुछ हो जाता तो हम क्या करते?  हमारा तो इसके सिवा दुनिया में और कोई है भी नहीं , आखिर इसके बाद कौन मेरी करोड़ों की प्रॉपर्टी संभालता मेरे पास जो भी है वह सब इसी का तो है ।

नम्र की मां – देखिये आप ऐसी बातें मत कीजिए वह ठीक है ।

रितिका – हां यह बात तो सोचने वाली है कि इस तरह का केमिकल स्कूल में आया कैसे !
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शहर के नामी डांस बार में रात का समय-

रंग बिरंगी लाइटों से डांस बार चमक रहा था। जिसमें कई लड़कियां डांस कर रही थी और चारों तरफ शराब की बोतलें और गिलास घूम रहे थे। वहीं पास ही एक अंधेरे से हिस्से में एक मोटा सा आदमी बैठा हुआ था जिसके दोनों तरफ लड़कियां बैठी हुयी थी और वो खुद सोफे में बैठा हुआ था व लड़कियां सोफे के हत्थों में बैठी थी। सोफे के पीछे काले चश्मे पहने दो लोग खड़े थे जो शायद उसके बॉडी गार्ड थे। उसको देखने से लग रहा था कि वो जरूर कोई डॉन होगा।

उनके ठीक सामने ही घुटनों के बल विकास बैठा था जिसके सर पर बंदूक रखी गई थी ।

माफिया डॉन – मेरी करोड़ों की चीज, दो कौड़ी के पुलिस के आदमियों के डर से तुमने एक स्कूल वैन में रख दी? क्या मैं तुम्हें इन सबके लिए पैसा देता हूं ?

आदमी – माफ कीजिए हम बहुत डर गए थे ।

माफिया डॉन –  मेरी गैंग में डर की कोई जगह नहीं है ।

दाएं तरफ की लड़की उसकी तरफ झुकती है जिसे वो हटाते हुए बोलता है ‌।

आदमी –  सर हमारे पास और कोई रास्ता नहीं था अगर हम उसे वैन के अंदर ना छुपाते तो शायद वह पुलिस के हाथ लग जाता ।

माफिया डॉन – तो मैं इसमें क्या करूं उसे सुरक्षित मेरे पास लाना तुम लोगों का काम था और तुम यहाँ खाली हाथ आए हो जिसका सिर्फ एक ही मतलब है तुम्हारी मौत ।

इसी के साथ माफिया डॉन के इशारे पर एक आदमी उसके सर पर गोली मार देता है ।

दूसरे बगल में बैठी लड़की – तो अब तुम उसे ढूंढोगे कैसे?

माफिया डॉन – “बेबी वह कोई ऐसी वैसी चीज नहीं है जो छुपाए छुप जाएगी।”

दोनों लड़कियां उसको दोनों ओर से घेर लेती हैं और उसको बाहों में ले लेती हैं।

” बस अब मुझे इंतजार है उसके सामने आने का “

इस घटना के 2 दिन बाद,

रितिका –  अरे वाह नम्र, तुम बड़ी जल्दी स्कूल आ गए अभी कल ही तो तुम्हें हॉस्पिटल से छुट्टी मिली थी ।

नम्र –  हां मैं कुछ ज्यादा जल्दी ही ठीक हो गया इसलिए डॉक्टरों ने मुझे जल्दी छुट्टी दे दी ।

रितिका – अपना हाथ दिखाओ , अरे तुम्हारा तो घाव भी भर गया चलो अच्छा है । अब कम से कम मुझे यह तो अफसोस नहीं होगा कि मेरी वजह से तुम इतनी बड़ी मुश्किल में पड़ गये ।

नम्र – अरे यार इसमें तुम्हारा थोड़ी ना कोई कसूर था यह तो बस होना ही था । अब जो हो गया सो हो गया , मैं अब पूरी तरह से ठीक हूं इसलिए तुम ऐसी बातें मत करो ।

रितिका – तुम बहुत अच्छे हो ।

नम्र –  हां मैं जानता हूं , यह बताओ इन 2 दिनों में टीचर ने क्या कुछ करवाया कहीं ऐसा ना हो कि मेरा सिलेबस ही पीछे रह जाए ।

रितिका – मैं आज रजिस्टर लाना भूल गई , तुम शाम को आकर मेरे घर से ले जाना ‌।

नम्र – ठीक है कोई बात नहीं मैं आ जाऊंगा अरे यह विवेक कहां पर है ?

रितिका – वो शायद कैंटीन की ओर गया है ।

नम्र – ठीक है मैं भी उसके पास जा रहा हूं तुमसे शाम को बात करता हूं ।

नम्र स्कूल की कैंटीन में जाता है जहां एक बेंच पर विवेक बैठा होता है ।

नम्र –  अरे विवेक; कैसे हो मेरे भाई, आज कैंटीन में कैसे आ गया पहले तो नहीं आता था?

विवेक – नहीं ऐसा कुछ नहीं है। आज मन नहीं हो रहा था पढ़ने का तो कैंटीन में आ गया और बता तू कैसा है कब आया हॉस्पिटल से?

नम्र – बस आज ही छुट्टी मिली है, मैं जल्दी ठीक हो गया और खुद को थोड़ा अलग भी महसूस कर रहा हूं , शायद यह दवाइयों का असर है ।

विवेक – हां यह तीन या चार दिन तक रहेगा उसके बाद तो पहले जैसा हो जाएगा ।

नम्र – वैसे यह असर बहुत जबरदस्त है ऐसे महसूस हो रहा है मानो हाथों में बहुत ज्यादा ताकत आ गई हो ‌।

विवेक – ये ले फ्रूटी पी और बता आज शाम का क्या प्लान है? कहीं मूवी देखने चलें क्या?

नम्र – नहीं यार आज शाम को रितिका ने मुझे अपने घर पर बुलाया है ।

विवेक नम्र को छेड़ते हुए बोल पड़ा।

विवेक – क्या बात है भाई लड़की ने तुझे अपने घर पर इनवाइट किया है, वो भी अकेले। कुछ तो चल रहा है भाई तुम्हारे बीच?

नम्र – अरे नहीं यार ऐसा कुछ नहीं है, बस नोट्स लेने जा रहा हूं ।

विवेक – छोड़ छोड़, यह सब तो बस बहाने होते हैं असल में तो तू उससे मिलने ही जा रहा है।

नम्र – यार वो ऐसी लड़की नहीं है। उसे बस दोस्त मानता हूँ बस उसके लिए और नहीं सोचता यार।

विवेक – यार पर वो तो तुझ लट्टू है ।

नम्र – इसे लट्टू होना नहीं, ज्यादा फ्रेंडली होना कहते हैं। उसका व्यवहार ही ज्यादा फ्रेंडली है, वह हर लड़कों से ऐसे ही बात करती है ।

विवेक – ठीक है यार। चल मान लिया तुम दोनों बस दोस्त हो खुश।

नम्र – चुप कर अब , मैं जा रहा हूं यहां से । तुझसे कल मिलूंगा ।

विवेक – ठीक है पर उससे पूछ लेना कि प्यार व्यार करती है या नहीं तुझसे ?

शाम होने में ज्यादा वक्त नहीं लगा नम्र अच्छे से तैयार होकर रितिका के घर की तरफ निकल गया तो वही रितिका भी घर पर तैयार हो रही थी , उसने नेकलेस टॉप पहना था जो कि उस पर काफी अच्छा लग रहा था ।

नम्र घर की बेल बजाता है , रितिका बेल की आवाज सुनते ही दरवाजा खोलने आ जाती है ।

नम्र –  हाइ; कैसी हो तुम‌।

रितिका –  मैं ठीक हूं आओ अंदर आओ ।

नम्र –  यह फूल मैं तुम्हारे लिए लाया हूं ।

रितिका – ओ..थैंक्स पर इसकी क्या जरूरत थी ?

नम्र – कुछ नहीं सोचा दुनिया की खूबसूरत लड़की के लिए कुछ खूबसूरत तोहफा ले चलो , वैसे तुम आज पहले से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो ।

रितिका –  ओ.. थैंक्स।  तुम यहां सोफे पर बैठो में तुम्हारे लिए कॉफ़ी लेकर आती हूं ।

रितिका कॉफी लेने चले जाती है तो वहीं नम्र आस पास आसपास देखने लगता है ।

नम्र –  अरे यार मुझे आज क्या हो रहा है, आज सुबह से ही कुछ अजीब अजीब सा लग रहा है , और अब यह शरीर पर खुजली भी होने लगी ।

नम्र शरीर पर खुजली करते हुए खड़ा होता है ओर इधर उधर घूमने लगता है तभी वह किचन से बाहर आती रितिका से टकरा जाता है जिसे रितिका नीचे गिरने वाली होती है पर नम्र उसे पकड़ लेता है।

नम्र और रितिका दोनों आंखों में आंखें डाल कर एक दूसरे को देखने लगते हैं ।

नम्र – आ आ …ओ सॉरी मैंने ध्यान नहीं दिया ।

रितिका – इटस ओके । मैंने …. किचन…. में …कॉफी …रखी है ।

रितिका अभी भी  नम्र की बाहों में थीं । नम्र की कमर पर खुजली होने लगती है । वह रितिका को खड़ा करता है ।

नम्र –  आज मुझे कुछ अजीब अजीब सा लग रहा है ।

रितिका –  मुझे भी थोड़ा थोड़ा …..मैं कॉफी…. लेकर आती हूं ।

रितिका कॉफी लेने चली जाती है ।

नम्र –  यह किसकी बात कर रही थी , ऊफ! यार ये खुजली ।

नम्र अपनी गर्दन को खुजलाते हुए सोफे पर वापिस बैठ जाता है ।

रितिका कॉफी लेकर आती है और एक कप नम्र के आगे रख देती और एक कप खुद उठा लेती हैं । कॉफी लेते वक्त रितिका काफी असहज महसूस कर रही थी । वहीं नम्र पहले से ही बहुत असहज था ‌। गर्दन के साथ साथ उसकी छाती पर भी खुजली होने लगती है । रितिका को सामने देख नम्र खुद पर कंट्रोल करता है और खुजली रोक कॉफी का कप उठाता है ।

नम्र – तुम्हारे मॉम डेड कहीं नहीं दिख रहे ?

रितिका – दोनों जॉब करते हैं , रात को 10:00 बजे के बाद ही आएंगे ।

नम्र – कॉफी अच्छी बना लेती हो ‌।

रितिका – बस यह एक ही तो चीज है जो मुझे बनानी आती है ।

नम्र – हा हा हा …. वैसे तुम पढ़ कर क्या करना चाहोगी?

रितिका – मैंने तो अभी कुछ खास सोचा नहीं पर मेरे मॉम डेड कहते हैं कि वह मुझे स्पेस अकेडमी में जॉइन करवाएंगे ।

नम्र – ओ मतलब तुम अंतरिक्ष की लंबी लंबी यात्रा पर जाना चाहोगी ।

रितिका – नहीं स्पेस अकेडमी में और भी बहुत सारे फील्ड होते हैं उनमें से कोई अच्छा सा देख लूंगी ।
वैसे तुम क्या करना चाहते हो ?

नम्र – मैंने भी कुछ सोचा नहीं , तुम इस ड्रेस में काफी जच रही हो ‌। काफी अच्छी लग रही हो ‌।

रितिका – बस सिर्फ अच्छी…

नम्र – हां मतलब ठीक-ठाक….. और

रितिका – और क्या

नम्र – और प्यारी भी लग रही हो ।

रितिका उठकर नम्र के पास आ जाती है ।

रितिका – क्या मैं उस जिया से भी ज्यादा अच्छी हूं ?

नम्र – हां तुम तो उस से कहीं ज्यादा अच्छी हो । पर तुमने यह क्यों पूछा ?

नम्र और रितिका दोनों एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे । दोनों इतने करीब थे कि एक दूसरे की सांसो को भी महसूस कर सकते थे । दोनों की धड़कन बढ़ रही थी । नम्र धीरे धीरे रितिका के और पास होता है और रितिका भी नम्र के पास आती है । और नम्र हल्के से रितिका को चूम लेता है  और वापस पीछे हट जाता है ।

नम्र – आइ आइ आइ ……

इससे पहले कि नम्र कुछ बोलता रितिका नम्र के पास हो लेती है। रितिका एक शब्द भी नम्र से नहीं कहती बस उसकी तरफ एक टक देखती रहती है। नम्र भी उसकी आँखों मे देखता है तो उसे नजर आता है कि रितिका की आँखे कितनी सुंदर हैं शायद झील से भी गहरी हैं दोनों एक दूसरे की आँखों मे खो जाते हैं लेकिन नम्र को अजीब सी बेचैनी ने परेशान कर रखा था। उसकी नजर अपने हाथों पर पड़ी तो उसे अपना रंग बैंगनी होता हुआ दिखायी दिया।

रितिका इन सब से अनजान आज नम्र को इतने पास पाकर अलग ही दुनिया मे थी शायद ये पल उसकी जिंदगी बदलने वाले थे। नम्र अब भी परेशान था जो अपने हाथों को गहरे बैंगनी रंग में पहुंचते देख रहा था अब उसे रितिका का कोई ध्यान नहीं था। उसकी बैचेनी अब हद से बढ़ रही थी।

रितिका लगातार नम्र की आँखों मे देख रही थी उसने बिना नजर हटाये नम्र के दांये हाथ को अपने नाजुक हाथों में लिया और उसे अपने गालों से सटाकर अपनी आंखें बंद कर गयी।

नम्र की समझ नहीं आ रहा था कि उसे ये क्या हो रहा है उसे एहसास भी नहीं था कि रितिका के हाथों में उसका हाथ था।

अचानक रितिका नम्र के अधिक पास आयी और नम्र के होंठों को चूम गयी नम्र को एक अजीब सा झटका से लगा उसके लिए ये बिल्कुल अप्रत्याशित से था। वो कुछ पीछे हट गया।

इतने में रितिका की आंखे हल्के हल्के बन्द होने लगी नम्र की कुछ समझ नहीं आया। जब तक नम्र समझता एकदम से धम्म की आवाज से रितिका सोफे पर गिर पड़ी।

रितिका की सभी हरकतें बंद हो चुकी थी उसका हाथ नीचे गिर चुका था और उसकी तेज धड़कन रुक चुकी थी । नम्र सोफे से खड़े होते हुए देखता है कि उसका पूरा शरीर बैंगनी पड़ चुका है ।

नम्र – यह मेरे साथ क्या हो गया, यह मुझे क्या हो रहा है ,मेरे शरीर को क्या हो गया, रितिका ….रितिका ….तुम ठीक तो हो ।

लेकिन रीतिका की तरफ से कोई जवाब नहीं आता उसके मुंह से झाग निकलने लगती है । वह अब मर चुकी थी । नम्र के सामने अब दो ही चीजें थी एक उसका बैंगनी रंग का शरीर और आंखों के आगे मृत पड़ी रितिका । नम्र वही जमीन पर घुटनों के बल नीचे गिर जाता है और रितिका के शरीर को हिलाते हुए उसका नाम पुकारता है ।

नम्र – रितिका …. यह तुम्हें क्या हो गया…. यह सब मेरी वजह से हुआ है……..

और नम्र रोने लगता है । नम्र काफी देर तक रीतिका के पास ऐसे ही बैठे रहता है । लगभग 2 घंटे का वक्त गुजर चुका था उसके शरीर का बैंगनी रंग भी अब गायब हो चुका था । नम्र वहां से उठता है और उसे वहीं छोड़ बाहर आ जाता है ।

रितिका की मौत का सारा दृश्य अभी भी उसकी आंखों के सामने घूम रहा था पर उसके पास करने के लिए कुछ नहीं था । नम्र  जिंदा तो था लेकिन वह भी किसी मृत इंसान से कम नहीं लग रहा था । उसके बाल बिखरे हुए थे ,आँखें पूरी तरह से बैंगनी थी पर उसका शरीर समान्य था । वह सड़क पर ऐसे चल रहा था जैसे कोई दारू पिया पागल इंसान चल रहा हो । सड़क पर आने वाली गाड़ियां उसके पास से गुजर रही थी लेकिन नम्र का इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं था । उसके लिए आस-पास सब कुछ शांत था , उसे ना तो गाड़ियों का शोर सुनाई दे रहा था ना ही लोगों की आवाजे । वह बस सड़क पर चलता जा रहा था , चलता जा रहा था और तब तक चलता रहा जब तक एक सीमेंट से भरे ट्रक ने उसे टक्कर नहीं मार दी । इस टक्कर से नम्र हवा में उड़ता हुआ बहुत दूर जा गिरा और सड़क से रगड़ता हुआ पास की खाई में गिर गया । इस दौरान उसका सामान्य शरीर फिर से बैंगनी हो गया था लेकिन नम्र का इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं थ वह तो बस अभी भी रितिका की मौत वाले दृश्य में खोया हुआ था । उसे तो इस बात का भी एहसास नहीं हुआ कि उसे एक ट्रक ने टक्कर मार दी है और वह एक खाई में गिर रहा है ‌। वह तब तक रीतिका की मौत वाले दृश्य में खोया रहा जब तक वह खाई के नीचे तक नहीं पहुंच गया और एक पत्थर से टकराकर मर नहीं गया । पत्थर के टकराने के साथ ही नम्र के शरीर की भी सारी हरकतें बंद हो गई थी और वह मृत इंसान की तरह जमीन पर पड़ा था। वह भी उसके बैगनी शरीर के साथ जो कि वापिस कुछ समय बाद सामान्य हो जाता है लेकिन अब इस पर ध्यान देने वाला कोई नहीं था….

Written by- Aman Aj for Comic Haveli

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